महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सर्वाधिक प्रभावशाली नेता थे। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से न केवल भारत को स्वतंत्र कराया, बल्कि विश्व को एक नई राजनीतिक चेतना दी। गांधी युग (1915–1947) में राष्ट्रीय आंदोलन जन-आंदोलन में परिवर्तित हुआ और करोड़ों भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े।
| ★ KEY POINTS ★ |
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| ✦ जन्म: 2 अक्तूबर 1869, पोरबंदर (गुजरात) — मृत्यु: 30 जनवरी 1948, दिल्ली |
| ✦ राजनीतिक गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले; साहित्यिक प्रेरणा: रस्किन, थोरो, टॉलस्टॉय, गीता |
| ✦ "महात्मा" उपाधि: रवींद्रनाथ टैगोर (1917); "राष्ट्रपिता": सुभाष चंद्र बोस (1944) |
| ✦ दक्षिण अफ्रीका में 21 वर्ष (1893-1914) — सत्याग्रह का विकास |
| ✦ भारत वापसी: 9 जनवरी 1915 — गोखले का निर्देश: एक वर्ष मौन |
| ✦ प्रमुख आश्रम: सत्याग्रह आश्रम कोचरब (1915), साबरमती (1917), सेवाग्राम (1934) |
| ✦ प्रमुख पुस्तकें: हिन्द स्वराज (1909), सत्य के प्रयोग (आत्मकथा) |
| ✦ पत्रिकाएँ: इंडियन ओपिनियन, यंग इंडिया, हरिजन, नवजीवन |
खण्ड 1 : दक्षिण अफ्रीका के वर्ष एवं सत्याग्रह का विकास (1893–1914)
गांधीजी 1893 में एक मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका गए और वहाँ 21 वर्ष बिताए। इन वर्षों में उन्होंने नस्लीय भेदभाव का सामना किया और सत्याग्रह की तकनीक विकसित की।
दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी ने सत्याग्रह को व्यावहारिक रूप दिया। इसमें भारतीय परंपरा, ईसाई शिक्षाओं और टॉलस्टॉय के दर्शन का समन्वय था।
EXAM TIP
UPSC में "गांधीजी ने सत्याग्रह की तकनीक भारत में नहीं, दक्षिण अफ्रीका में विकसित की" — यह तथ्य बार-बार पूछा जाता है। प्रथम सत्याग्रह: 11 सितंबर 1906।
खण्ड 2 : भारत वापसी एवं प्रारंभिक आंदोलन (1915–1919)
गांधीजी 9 जनवरी 1915 को भारत लौटे। गोखले के निर्देश पर एक वर्ष मौन रहकर उन्होंने भारत का भ्रमण किया। 20 मई 1915 को साबरमती (पहले कोचरब) में सत्याग्रह आश्रम स्थापित किया।
समस्या: चंपारण (बिहार) में नील बागान मालिकों द्वारा टिनकठिया प्रणाली — किसानों को अपनी 3/20 भूमि पर नील उगाना अनिवार्य था। यह दासता के समान था।
| चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा की त्रिवेणी — महत्त्व |
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खण्ड 3 : रॉलट एक्ट एवं जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919)
रॉलट कमीशन (1918) की सिफारिश पर मार्च 1919 में "अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम" पारित हुआ। इसे "काला कानून" कहा गया।
रॉलट एक्ट के मुख्य प्रावधान:
गांधीजी का स्वीकृति: गांधीजी ने रॉलट सत्याग्रह को "हिमालयन भूल" (Himalayan Blunder) कहा — क्योंकि जनता हिंसक हो गई — उन्होंने 18 अप्रैल 1919 को आंदोलन वापस लिया।
यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक है। इसने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध खड़ा कर दिया।
पृष्ठभूमि:
हत्याकांड:
| मृत्यु का स्रोत | मृत संख्या | घायल |
|---|---|---|
| ब्रिटिश सरकारी आँकड़े | 379 | ~1,100 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 1,000+ | 1,500+ |
प्रतिक्रियाएँ:
EXAM TIP
UPSC में पूछा जाता है: जलियाँवाला बाग — हंटर समिति के सदस्य, मृत्यु के आँकड़े, डायर की नियुक्ति कारण। मेमोरी trick: "379 आधिकारिक, 1000+ कांग्रेस"।
खण्ड 4 : खिलाफत आंदोलन (1919–1924)
प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के साथ ब्रिटेन का व्यवहार भारतीय मुसलमानों को क्रोधित कर गया। तुर्की के सुल्तान को वे खलीफा (इस्लाम के आध्यात्मिक नेता) मानते थे।
गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन को हिंदू-मुस्लिम एकता और ब्रिटिश विरोध का अवसर माना। वे जानते थे कि बिना मुसलमानों के सहयोग के बड़ा आंदोलन संभव नहीं।
1924 में समाप्ति: तुर्की में मुस्तफा कमाल पाशा ने खिलाफत ही समाप्त कर दी — इससे आंदोलन अपने आप समाप्त हो गया। साथ ही कांग्रेस में हिंदू-मुस्लिम एकता भी टूटी।
खण्ड 5 : असहयोग आंदोलन (1920–1922)
असहयोग आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का पहला बड़ा जन-आंदोलन था। इसने भारत के हर वर्ग को एक साथ जोड़ा।
1. खिलाफत के प्रश्न का समाधान।
2. पंजाब के अत्याचारों का प्रायश्चित।
3. स्वराज की प्राप्ति — एक वर्ष में।
1. सरकारी उपाधियाँ एवं मानद पद लौटाना।
2. सरकारी और सरकारी अनुदान प्राप्त विद्यालयों का बहिष्कार।
3. ब्रिटिश न्यायालयों का बहिष्कार।
4. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।
5. सरकारी दरबारों और समारोहों में उपस्थिति से इनकार।
6. प्रांतीय एवं केन्द्रीय विधान सभा चुनावों में भाग न लेना।
7. मेसोपोटामिया सेवा से इनकार — सख्त अहिंसा।
| क्षेत्र | गतिविधि |
|---|---|
| मिदनापुर (बंगाल) | श्वेत जमींदार कंपनी के विरुद्ध कृषक हड़ताल |
| आंध्र | वन कानूनों के विरुद्ध कर-विरोध आंदोलन |
| पंजाब | अकाली आंदोलन — गुरुद्वारों पर भ्रष्ट महंतों का नियंत्रण समाप्त |
| असम | चाय बागान और परिवहन में श्रमिक हड़ताल (जे.एम. सेनगुप्त) |
| अवध | किसान आंदोलन — असहयोग प्रचार से शक्ति मिली |
| मालाबार/केरल | मुस्लिम किसान बनाम हिंदू जमींदार (मोपला विद्रोह — सांप्रदायिक रूप लिया) |
उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा गाँव में उत्तेजित भीड़ ने एक पुलिस थाने में आग लगा दी — जिसमें 22 पुलिसकर्मी जल कर मर गए।
आलोचना: कई नेताओं ने आंदोलन वापस लेने की आलोचना की — मोतीलाल नेहरू, सी.आर. दास आदि — क्योंकि आंदोलन अपने चरम पर था। परंतु गांधीजी का मत था कि अहिंसा के बिना स्वराज का कोई अर्थ नहीं।
खण्ड 6 : असहयोग के बाद का काल — स्वराज पार्टी, साइमन कमीशन, नेहरू रिपोर्ट (1922–1929)
ब्रिटिश सरकार ने 1927 में संवैधानिक सुधारों का सुझाव देने के लिए साइमन कमीशन नियुक्त किया। इसकी रचना में कोई भी भारतीय सदस्य नहीं था।
महत्त्वपूर्ण: लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने के लिए भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद और राजगुरु ने 17 दिसंबर 1928 को सांडर्स की हत्या की — यह HSRA की प्रमुख घटना है।
खण्ड 7 : सविनय अवज्ञा आंदोलन एवं दांडी मार्च (1930)
गांधीजी ने ब्रिटिश नमक एकाधिकार को चुनौती देने के लिए दांडी मार्च की योजना बनाई। नमक एक ऐसा विषय था जिसे हर भारतीय समझता था।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| आरंभ तिथि | 12 मार्च 1930 |
| प्रस्थान स्थान | साबरमती आश्रम, अहमदाबाद |
| समापन स्थान | दांडी (तटीय गुजरात) |
| दूरी | 240 मील (लगभग 385 किमी) |
| अवधि | 24 दिन |
| प्रारंभिक प्रतिभागी | 78 अनुयायी |
| दांडी पहुँचे | 5 अप्रैल 1930 |
| नमक उठाया | 6 अप्रैल 1930 — ब्रिटिश नमक कानून भंग |
नमक सत्याग्रह एक बड़े सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत था। इसमें भारत का हर कोना सम्मिलित हुआ।
EXAM TIP
"नमक सत्याग्रह — 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930" — यह तिथियाँ परीक्षा में सबसे अधिक पूछी जाती हैं। 78 अनुयायियों से शुरू, हजारों तक पहुँचा।
खण्ड 8 : गांधी-इरविन समझौता एवं गोलमेज सम्मेलन (1931–32)
वायसराय लॉर्ड इरविन और गांधीजी के बीच वार्ता के बाद यह ऐतिहासिक समझौता हुआ।
आलोचना: सुभाष चंद्र बोस ने इस समझौते की आलोचना की — "ब्रिटिश सरकार ने गांधीजी को मूर्ख बनाया।" भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फाँसी से बचाने में गांधीजी असफल रहे (23 मार्च 1931)।
| सम्मेलन | तिथि | गांधी उपस्थिति | परिणाम |
|---|---|---|---|
| प्रथम गोलमेज | नवंबर 1930 – जनवरी 1931 | नहीं (जेल में) | सीमित प्रगति |
| द्वितीय गोलमेज | सितंबर – दिसंबर 1931 | हाँ (कांग्रेस प्रतिनिधि) | अनिर्णायक |
| तृतीय गोलमेज | नवंबर – दिसंबर 1932 | नहीं | साम्प्रदायिक पंचाट |
खण्ड 9 : साम्प्रदायिक पंचाट और पूना पैक्ट (1932)
ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडॉनल्ड ने साम्प्रदायिक पंचाट की घोषणा की — इसमें दलितों (अवसाद वर्ग) के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की व्यवस्था की।
दीर्घकालिक प्रभाव: पूना पैक्ट ने भारतीय संविधान (1950) में अनुसूचित जातियों हेतु आरक्षण का आधार तैयार किया। गांधीजी बनाम अम्बेडकर — अलग निर्वाचन मंडल बनाम हिंदू समाज की एकता — यह विवाद आज भी प्रासंगिक है।
EXAM TIP
UPSC: साम्प्रदायिक पंचाट — 17 सितंबर 1932; पूना पैक्ट — 24-25 सितंबर 1932। आरक्षित सीटें 71 से 147 हुईं। वार्ताकार: गांधीजी + अम्बेडकर।
खण्ड 10 : व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940–41)
उद्देश्य: व्यापक जन-आंदोलन से बचकर ब्रिटिश सरकार पर प्रतीकात्मक दबाव बनाए रखना। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से पहले की तैयारी।
खण्ड 11 : भारत छोड़ो आंदोलन / अगस्त क्रांति (1942)
नेतृत्व के जेल जाने के बावजूद आंदोलन सहज रूप से फैला — यह इसकी सबसे बड़ी विशेषता थी।
| भारत छोड़ो आंदोलन की विशेषताएँ एवं महत्त्व |
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EXAM TIP
UPSC: 8 अगस्त 1942 = AICC प्रस्ताव; 9 अगस्त = गिरफ्तारियाँ। "करो या मरो" नारा। अरुणा आसफ अली = तिरंगा फहराया। आगा खाँ पैलेस = गांधीजी की नजरबंदी। समानांतर सरकारें: बलिया, सातारा, तामलुक।
खण्ड 12 : गांधीजी का दर्शन एवं विचारधारा
अहिंसा गांधीजी के दर्शन का सर्वोच्च आधार था। यह केवल शारीरिक हिंसा से विरत रहना नहीं था — बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी को आघात न पहुँचाना था।
"सत्य" + "आग्रह" = सत्याग्रह। दक्षिण अफ्रीका में 1906 में विकसित — भारत में विभिन्न रूपों में प्रयुक्त।
| सत्याग्रह के प्रकार | विवरण |
|---|---|
| बहिष्कार (Boycott) | अन्यायपूर्ण नीतियों का आर्थिक असहयोग |
| असहयोग (Non-Cooperation) | अन्यायी व्यवस्था से समर्थन वापस लेना |
| सविनय अवज्ञा (Civil Disobedience) | अन्यायी कानूनों को शांतिपूर्वक तोड़ना |
| उपवास (Fast) | नैतिक दबाव — आत्म-पीड़ा द्वारा |
| कर न देना (Tax Refusal) | अन्यायी राजस्व से इनकार |
| हिजरत (Migration) | अत्याचारी स्थान छोड़ना |
गांधीजी मानते थे कि राजनीतिक संघर्ष के साथ-साथ समाज का पुनर्निर्माण आवश्यक है।
खण्ड 13 : गांधी युग के प्रमुख कांग्रेस अधिवेशन
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | महत्त्व |
|---|---|---|---|
| 1916 | लखनऊ | अंबिका चरण मजूमदार | लखनऊ समझौता — कांग्रेस-लीग एकता |
| 1920 | नागपुर | वी. राघवाचारी | असहयोग आंदोलन — कांग्रेस पुनर्गठन |
| 1924 | बेलगाँव | महात्मा गांधी | गांधीजी एकमात्र बार अध्यक्ष |
| 1927 | मद्रास | एम.ए. अंसारी | पूर्ण स्वराज प्रस्ताव (प्रथम) |
| 1928 | कलकत्ता | मोतीलाल नेहरू | नेहरू रिपोर्ट बहस |
| 1929 | लाहौर | जवाहरलाल नेहरू | पूर्ण स्वराज प्रस्ताव — 26 जनवरी 1930 |
| 1931 | कराची | सरदार पटेल | मौलिक अधिकार एवं आर्थिक नीति प्रस्ताव |
| 1942 | बॉम्बे (AICC) | मौलाना आजाद | भारत छोड़ो प्रस्ताव — 8 अगस्त 1942 |
EXAM TIP
UPSC: गांधीजी केवल एक बार कांग्रेस अध्यक्ष बने — 1924 बेलगाँव अधिवेशन। 1920 नागपुर = कांग्रेस का पुनर्गठन। 1929 लाहौर = पूर्ण स्वराज।
खण्ड 14 : गांधी युग के प्रमुख व्यक्तित्व
| नाम | योगदान |
|---|---|
| राजेन्द्र प्रसाद | चंपारण सत्याग्रह — बाद में भारत के प्रथम राष्ट्रपति |
| सरदार वल्लभभाई पटेल | खेड़ा सत्याग्रह, बारडोली (1928), गृहमंत्री (भारत) |
| मोतीलाल नेहरू | स्वराज पार्टी, नेहरू रिपोर्ट, NCM में वकालत छोड़ी |
| जवाहरलाल नेहरू | युवा नेतृत्व — पूर्ण स्वराज — प्रथम प्रधानमंत्री |
| सी.आर. दास | स्वराज पार्टी के संस्थापक — "देशबंधु" |
| मौलाना अबुल कलाम आजाद | खिलाफत, हिंदू-मुस्लिम एकता, कांग्रेस अध्यक्ष (1940-46) |
| सरोजिनी नायडू | महिला नेतृत्व — धरासणा छापा — "भारत कोकिला" |
| विनोबा भावे | प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही (1940) |
| अरुणा आसफ अली | 9 अगस्त 1942 — मुंबई में तिरंगा फहराया |
| जयप्रकाश नारायण | भारत छोड़ो — भूमिगत आंदोलन नेतृत्व |
| नाम | भूमिका |
|---|---|
| लॉर्ड इरविन (Viceroy) | गांधी-इरविन पैक्ट (1931) — वार्ताकार |
| जनरल रेजिनाल्ड डायर | जलियाँवाला बाग (1919) — निर्दयी आदेश |
| सर माइकल ओ'ड्वायर | पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर — मार्शल लॉ |
| सर जॉन साइमन | साइमन कमीशन अध्यक्ष (1927) |
| रैम्जे मैकडॉनल्ड | साम्प्रदायिक पंचाट जारी किया (1932) |
| विंस्टन चर्चिल | गांधीजी के कटु आलोचक — "अर्ध-नग्न फकीर" |
| स्टैफोर्ड क्रिप्स | क्रिप्स मिशन (1942) — असफल प्रस्ताव |
खण्ड 15 : प्रमुख आंदोलनों का तुलनात्मक अध्ययन
| आंदोलन | वर्ष | नारा/प्रतीक | विशेषता | अंत का कारण |
|---|---|---|---|---|
| असहयोग | 1920-22 | स्वराज | प्रथम जन-आंदोलन | चौरी-चौरा हिंसा |
| सविनय अवज्ञा | 1930-31 | नमक/चरखा | महिला भागीदारी | गांधी-इरविन पैक्ट |
| व्यक्तिगत सत्याग्रह | 1940-41 | क्रमिक गिरफ्तारी | प्रतीकात्मक | क्रिप्स मिशन |
| भारत छोड़ो | 1942 | करो या मरो | सबसे व्यापक | दमन + स्वतंत्रता |
खण्ड 16 : गांधी युग की कालक्रम तालिका
| वर्ष/तिथि | घटना | महत्त्व |
|---|---|---|
| 2 अक्तूबर 1869 | जन्म — पोरबंदर | गांधीजी का जन्म |
| 1893 | दक्षिण अफ्रीका प्रस्थान | सत्याग्रह का विकास |
| 11 सित. 1906 | प्रथम सत्याग्रह | दक्षिण अफ्रीका में |
| 9 जनवरी 1915 | भारत वापसी | जन-नेता का उदय |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह | भारत में प्रथम CD |
| फरवरी 1918 | अहमदाबाद मिल हड़ताल | प्रथम उपवास |
| मार्च 1918 | खेड़ा सत्याग्रह | प्रथम असहयोग |
| 6 अप्रैल 1919 | रॉलट सत्याग्रह | प्रथम जन-आंदोलन |
| 13 अप्रैल 1919 | जलियाँवाला बाग | क्रूरतम ब्रिटिश दमन |
| 1 अगस्त 1920 | असहयोग आंदोलन आरंभ | तिलक का निधन (उसी दिन) |
| दिसंबर 1920 | नागपुर अधिवेशन | कांग्रेस पुनर्गठन |
| 5 फरवरी 1922 | चौरी-चौरा | आंदोलन वापसी |
| 1923 | स्वराज पार्टी | दास-मोतीलाल |
| 1927-28 | साइमन कमीशन बहिष्कार | "साइमन गो बैक" |
| 1928 | नेहरू रिपोर्ट | डोमिनियन बनाम पूर्ण स्वराज |
| दिसंबर 1929 | पूर्ण स्वराज — लाहौर | 26 जनवरी स्वतंत्रता दिवस |
| 12 मार्च 1930 | दांडी मार्च | नमक सत्याग्रह |
| 6 अप्रैल 1930 | नमक कानून भंग | CDM का आरंभ |
| 5 मार्च 1931 | गांधी-इरविन पैक्ट | प्रथम वार्ता |
| सित.-दिसं. 1931 | द्वितीय गोलमेज | गांधी लंदन |
| 17 सित. 1932 | साम्प्रदायिक पंचाट | अलग निर्वाचन मंडल |
| 24-25 सित. 1932 | पूना पैक्ट | गांधी + अम्बेडकर |
| 1940-41 | व्यक्तिगत सत्याग्रह | विनोबा प्रथम सत्याग्रही |
| मार्च 1942 | क्रिप्स मिशन विफल | CDM की पृष्ठभूमि |
| 8 अगस्त 1942 | भारत छोड़ो प्रस्ताव | "करो या मरो" |
| 9 अगस्त 1942 | सभी नेता गिरफ्तार | भूमिगत आंदोलन |
| 22 फरवरी 1944 | कस्तूरबा का निधन | जेल में |
| 15 अगस्त 1947 | भारत स्वतंत्र | गांधीजी उत्सव से दूर |
| 30 जनवरी 1948 | गांधी की हत्या | नाथूराम गोडसे — "हे राम" |
खण्ड 17 : UPSC परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं आँकड़े
| विषय | आँकड़ा |
|---|---|
| जलियाँवाला बाग — दागी गोलियाँ | 1,650+ गोलियाँ |
| जलियाँवाला बाग — मृत (सरकारी) | 379 |
| जलियाँवाला बाग — मृत (कांग्रेस अनुमान) | 1,000+ |
| असहयोग में गिरफ्तारियाँ (1921) | ~30,000 |
| CDM में गिरफ्तारियाँ (प्रथम लहर) | 60,000+ |
| दांडी यात्रा की दूरी | 240 मील (385 किमी) |
| दांडी यात्रा में प्रारंभिक प्रतिभागी | 78 |
| दांडी यात्रा की अवधि | 24 दिन |
| तिलक स्वराज फंड | 1 करोड़ रुपये से अधिक |
| राष्ट्रीय विद्यालय खुले | ~800 |
| पूना पैक्ट में आरक्षित सीटें | 71 → 147 (प्रांत), केन्द्र में भी |
| साम्प्रदायिक पंचाट के विरुद्ध उपवास | 6 दिन |
| गांधीजी की नजरबंदी (QIM) | अगस्त 1942 से मई 1944 (22 माह) |
1. रॉलट एक्ट के प्रावधान क्या थे? (UPSC 2012, 2015)
2. चंपारण — भारत में प्रथम सविनय अवज्ञा क्यों? टिनकठिया प्रणाली क्या थी?
3. जलियाँवाला बाग — हंटर समिति का गठन, डायर की कार्रवाई, परिणाम।
4. खिलाफत आंदोलन में गांधीजी की भूमिका और महत्त्व।
5. नागपुर अधिवेशन (1920) का महत्त्व — कांग्रेस का पुनर्गठन।
6. चौरी-चौरा — गांधीजी ने आंदोलन क्यों वापस लिया? आलोचना।
7. दांडी मार्च का सार्वभौमिक महत्त्व और प्रभाव।
8. गांधी-इरविन पैक्ट की शर्तें और आलोचना।
9. पूना पैक्ट — वार्ताकार, शर्तें, संवैधानिक प्रभाव।
10. भारत छोड़ो आंदोलन — "करो या मरो", भूमिगत नेतृत्व, समानांतर सरकारें।
11. सत्याग्रह और अहिंसा में अंतर — गांधी की पद्धति बनाम क्रांतिकारियों की।
12. गांधीजी का ग्राम स्वराज का दृष्टिकोण — संविधान में क्या स्वीकार हुआ?
EXAM TIP
"गांधी बनाम अन्य नेता" प्रश्न — गांधी बनाम अम्बेडकर (पूना पैक्ट), गांधी बनाम सुभाष (CDM), गांधी बनाम जिन्ना (विभाजन) — ये तुलनात्मक प्रश्न प्रायः मुख्य परीक्षा में पूछे जाते हैं।
| ★ KEY POINTS ★ |
|---|
| ✦ भारत में गांधीजी की प्रथम सविनय अवज्ञा = चंपारण (1917) |
| ✦ राजनीतिक हथियार के रूप में प्रथम उपवास = अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918) |
| ✦ प्रथम असहयोग = खेड़ा सत्याग्रह (1918) |
| ✦ असहयोग आंदोलन आरंभ = 1 अगस्त 1920 (तिलक का निधन भी उसी दिन) |
| ✦ दांडी मार्च = 12 मार्च से 5 अप्रैल 1930 (78 → हजारों) |
| ✦ गांधी-इरविन पैक्ट = 5 मार्च 1931 |
| ✦ साम्प्रदायिक पंचाट = 17 सितंबर 1932; पूना पैक्ट = 24-25 सितंबर 1932 |
| ✦ भारत छोड़ो = 8 अगस्त 1942; गिरफ्तारी = 9 अगस्त 1942 |
| ✦ गांधीजी एकमात्र बार कांग्रेस अध्यक्ष = 1924 बेलगाँव |
| ✦ "महात्मा" उपाधि = रवींद्रनाथ टैगोर; "राष्ट्रपिता" = सुभाष चंद्र बोस (1944) |
| ✦ हत्या = 30 जनवरी 1948, नाथूराम गोडसे, अंतिम शब्द: "हे राम" |
| ✦ UNESCO: 2 अक्तूबर = अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस |