1857 के विद्रोह की विफलता के बाद भी भारतीयों में स्वतंत्रता की ललक बनी रही। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी शिक्षा के प्रसार, राष्ट्रवादी विचारों के उदय और अंग्रेजी शासन की शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध प्रतिक्रिया ने एक संगठित राजनीतिक आंदोलन को जन्म दिया। इसी पृष्ठभूमि में 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना हुई और भारत का राष्ट्रीय आंदोलन संगठित रूप धारण करने लगा।
1. आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास के कारण
1.1 आंतरिक कारण
1.2 ब्रिटिश प्रतिक्रियावादी नीतियाँ
🎯 EXAM TIP
UPSC में राष्ट्रवाद के कारणों पर प्रश्न बार-बार आते हैं। "धन निष्कासन सिद्धांत" — दादाभाई नौरोजी की पुस्तक "Poverty and Un-British Rule in India" याद रखें।
2. INC से पहले की प्रमुख राजनीतिक संस्थाएँ
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पहले अनेक राजनीतिक संस्थाएँ कार्यरत थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन की नींव रखी —
| वर्ष | संस्था का नाम | संस्थापक / प्रमुख व्यक्ति | योगदान |
|---|---|---|---|
| 1836 | बंगभाषा प्रकाशिका सभा, कलकत्ता | राजा राममोहन राय के सहयोगी | प्रशासनिक सुधार व शिक्षा की वकालत |
| 1837 | ज़मींदारी एसोसिएशन (लैंडहोल्डर्स सोसाइटी) | द्वारकानाथ टैगोर, राधाकांत देब | भारत में संवैधानिक आंदोलन का पहला प्रयास |
| 1851 | ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन, कलकत्ता | राधाकांत देब (अध्यक्ष), देबेंद्रनाथ टैगोर (सचिव) | विधायी सुधार, न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण की माँग |
| 1866 | ईस्ट इंडिया एसोसिएशन, लंदन | दादाभाई नौरोजी | भारतीय मुद्दों पर ब्रिटिश जनमत को प्रभावित करना |
| 1867 | पूना सार्वजनिक सभा, पूना | जी.वी. जोशी, एम.जी. रानाडे | जनमत का प्रतिनिधित्व, सरकार व जनता के बीच मध्यस्थ |
| 1875 | इंडियन लीग, कलकत्ता | शिशिर कुमार घोष | राष्ट्रवाद और राजनीतिक शिक्षा का प्रसार |
| 1876 | इंडियन एसोसिएशन, कलकत्ता | सुरेंद्रनाथ बनर्जी, आनंद मोहन बोस | ICS सुधार आंदोलन, अखिल भारतीय सम्मेलन (1883) |
| 1885 | बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन | फीरोजशाह मेहता, बदरुद्दीन तैयबजी | लिटन की नीतियों के विरुद्ध राजनीतिक अधिकारों की माँग |
🎯 EXAM TIP
1876 की इंडियन एसोसिएशन को "इंडियन नेशनल एसोसिएशन" भी कहते हैं — UPSC 2017 में पूछा गया। 1892 में दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सांसद बने।
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)
3.1 स्थापना एवं प्रथम अधिवेशन
3.2 INC की स्थापना से संबंधित सिद्धांत
महत्वपूर्ण तथ्य: 1887 में बदरुद्दीन तैयबजी INC के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बने। 1888 में जॉर्ज यूल प्रथम अंग्रेज (गैर-भारतीय) अध्यक्ष बने। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार "वंदे मातरम" गाया।
4. नरम दल — उदारवादी चरण (1885–1905)
4.1 प्रमुख नेता
4.2 नरम दल के तरीके एवं माँगें
4.3 नरम दल की सामाजिक आधार
4.4 नरम दल की उपलब्धियाँ
4.5 नरम दल की सीमाएँ एवं आलोचना
🎯 EXAM TIP
नरम दल की विफलताओं से ही गरम दल का उदय हुआ — यह कारण-कार्य संबंध UPSC Mains में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
5. गरम दल का उदय — उग्रवादी चरण (1905–1919)
5.1 गरम दल के उदय के कारण
5.2 गरम दल के प्रमुख नेता — लाल-बाल-पाल
| नेता | उपाधि / अन्य नाम | जन्म | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|---|
| लाला लाजपत राय | पंजाब केसरी, शेर-ए-पंजाब | 1865, फिरोजपुर (पंजाब) | पंजाब में स्वदेशी आंदोलन, D.A.V. कॉलेज की स्थापना। Simon Commission का विरोध। |
| बाल गंगाधर तिलक | लोकमान्य | 1856, रत्नागिरी (महाराष्ट्र) | गणपति उत्सव, शिवाजी उत्सव, केसरी अखबार, "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।" |
| बिपिन चंद्र पाल | क्रांतिकारी विचारों के जनक | 1858, हबीबगंज (बंगाल) | New India अखबार, बंगाल में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व। |
| अरविंदो घोष | श्री अरविंद | 1872, कलकत्ता | Vande Mataram अखबार, बंदूक से नहीं आत्मशक्ति से स्वतंत्रता का संदेश। |
महत्वपूर्ण: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" — बाल गंगाधर तिलक का ऐतिहासिक नारा। यह UPSC में बार-बार पूछा जाता है।
5.3 गरम दल के तरीके एवं माँगें
6. नरम दल बनाम गरम दल — तुलनात्मक अध्ययन
| पहलू | नरम दल (1885-1905) | गरम दल (1905-1919) |
|---|---|---|
| सामाजिक आधार | संपन्न जमींदार, उच्च-मध्यम वर्ग, शिक्षित पेशेवर | शिक्षित मध्यम व निम्न-मध्यम वर्ग, ग्रामीण जनता |
| विचारधारा | पश्चिमी उदारवाद, संसदीय सिद्धांत, ब्रिटिश न्याय में विश्वास | भारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, स्वराज की माँग |
| ब्रिटिश शासन पर दृष्टि | कुछ हद तक लाभकारी, ईश्वरीय कार्य मानते | शोषणकारी, अन्यायपूर्ण, अवैध |
| संघर्ष के तरीके | प्रार्थना, याचिका, प्रचार, संवैधानिक आंदोलन | बहिष्कार, निष्क्रिय प्रतिरोध, हड़ताल, प्रत्यक्ष संघर्ष |
| प्रमुख माँगें | संवैधानिक सुधार, ICS में भागीदारी, "No Taxation without Representation" | स्वराज, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा, बहिष्कार |
| महिलाओं की भागीदारी | सीमित — मुख्यतः शिक्षित अभिजात वर्ग | प्रोत्साहित — छात्र, महिलाएँ, श्रमिक सभी शामिल |
| प्रमुख नेता | दादाभाई नौरोजी, गोखले, फीरोजशाह मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी | तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष |
| सांस्कृतिक प्रभाव | राजनीतिक-प्रशासनिक सुधार पर जोर | हिंदू पौराणिकता, परंपरा, उत्सवों का राजनीतिकरण |
7. महत्वपूर्ण कांग्रेस अधिवेशन (1885-1920)
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष | प्रमुख घटनाएँ / प्रस्ताव |
|---|---|---|---|
| 1885 | बॉम्बे | डब्ल्यू.सी. बोनर्जी | INC का प्रथम अधिवेशन, 72 प्रतिनिधि |
| 1886 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | INC व नेशनल कॉन्फ्रेंस का विलय |
| 1887 | मद्रास | बदरुद्दीन तैयबजी | प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष, मुसलमानों से INC में शामिल होने की अपील (UPSC 2015) |
| 1888 | इलाहाबाद | जॉर्ज यूल | प्रथम अंग्रेज (गैर-भारतीय) अध्यक्ष |
| 1896 | कलकत्ता | रहीमतुल्ला सयानी | रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार "वंदे मातरम" गाया |
| 1905 | बनारस | गोपाल कृष्ण गोखले | स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा, बंगाल विभाजन की निंदा |
| 1906 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | पहली बार "स्वराज" को लक्ष्य घोषित, स्वदेशी-बहिष्कार प्रस्ताव |
| 1907 | सूरत | रश बिहारी घोष | नरम-गरम दल में ऐतिहासिक विभाजन (सूरत विभाजन) |
| 1911 | कलकत्ता | बी.एन. धर | पहली बार "जन गण मन" गाया |
| 1916 | लखनऊ | ए.सी. मजूमदार | नरम-गरम दल में पुनर्मिलन, लखनऊ समझौता (मुस्लिम लीग के साथ) |
| 1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट | INC की प्रथम महिला अध्यक्ष (UPSC 2015) |
| 1919 | अमृतसर | मोतीलाल नेहरू | खिलाफत आंदोलन का समर्थन, जलियाँवाला बाग की निंदा |
| 1929 | लाहौर | जवाहरलाल नेहरू | "पूर्ण स्वराज" प्रस्ताव, 26 जनवरी 1930 — स्वतंत्रता दिवस घोषित |
🎯 EXAM TIP
दादाभाई नौरोजी INC के तीन बार अध्यक्ष बने — 1886, 1893, 1906। 1917 में एनी बेसेंट प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। इन तथ्यों पर बार-बार प्रश्न आते हैं।
8. सूरत विभाजन (1907) — कारण, घटना एवं परिणाम
दिसंबर 1907 में सूरत अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नरम दल और गरम दल में विभाजित हो गई — यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की एक ऐतिहासिक घटना थी।
8.1 विभाजन के कारण
8.2 विभाजन के परिणाम
► राजद्रोही सभाएँ अधिनियम 1907
► आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1908
► विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908
► भारतीय प्रेस अधिनियम 1910
याद रखें: सूरत विभाजन (1907) ने स्वदेशी आंदोलन को कमज़ोर किया लेकिन भारत में राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में मदद की — UPSC 2015 में इस पर प्रश्न आया था।
9. गरम दल का मूल्यांकन — उपलब्धियाँ एवं सीमाएँ
9.1 उपलब्धियाँ
9.2 सीमाएँ
10. होमरूल लीग आंदोलन (1916)
प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) के दौरान ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों और मोर्ले-मिंटो सुधारों से निराशा के बाद, होमरूल लीग आंदोलन आरंभ हुआ।
| 10.1 दो अलग लीगें | |||
|---|---|---|---|
| संस्था | स्थापना | मुख्यालय | क्षेत्र |
| तिलक की होमरूल लीग | अप्रैल 1916 | पूना | महाराष्ट्र (बॉम्बे छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत |
| एनी बेसेंट की होमरूल लीग | सितंबर 1916 | मद्रास | शेष भारत, बॉम्बे शहर सहित |
10.2 होमरूल आंदोलन के उदय के कारण
10.3 होमरूल आंदोलन का महत्व
🎯 EXAM TIP
होमरूल लीग पर UPSC में बार-बार प्रश्न — "तिलक की लीग" अप्रैल 1916, "बेसेंट की लीग" सितंबर 1916। एनी बेसेंट 1917 में INC की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं।
11. लखनऊ समझौता (1916)
1916 के लखनऊ अधिवेशन (अध्यक्ष — ए.सी. मजूमदार) में दो महत्वपूर्ण समझौते हुए — INC में नरम-गरम दल का पुनर्मिलन और INC-मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता।
11.1 मुख्य धाराएँ (मुस्लिम लीग के साथ)
11.2 मूल्यांकन
महत्वपूर्ण: लखनऊ समझौते में तिलक और जिन्ना की प्रमुख भूमिका रही — इसी कारण तिलक को "भारतीय अशांति के जनक" कहने वाले अंग्रेज बाद में उनकी प्रशंसा करने लगे।
12. राष्ट्रीय आंदोलन के चरण — संक्षिप्त अवलोकन
| चरण | काल | नेतृत्व | विशेषता |
|---|---|---|---|
| नरम दल / उदारवादी चरण | 1885–1905 | नौरोजी, गोखले, मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जी | याचिका, प्रार्थना, संवैधानिक माँगें, क्रमिक सुधार |
| गरम दल / उग्रवादी चरण | 1905–1919 | तिलक, लाल-बाल-पाल, अरविंद | स्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार, जनभागीदारी |
| गांधी युग | 1919–1947 | महात्मा गांधी | पूर्ण स्वराज, अहिंसक असहयोग, सत्याग्रह |
| ★ KEY POINTS ★ |
|---|
| ✦ INC की स्थापना — दिसंबर 1885, बॉम्बे। संस्थापक — ए.ओ. ह्यूम। प्रथम अध्यक्ष — वोमेश चंद्र बोनर्जी। 72 प्रतिनिधि। |
| ✦ दादाभाई नौरोजी — "भारत के बुजुर्ग नेता", "धन निष्कासन सिद्धांत" के प्रणेता, INC के तीन बार अध्यक्ष (1886, 1893, 1906)। |
| ✦ "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" — बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य)। |
| ✦ सूरत विभाजन — दिसंबर 1907। INC नरम-गरम में विभाजित। 1916 लखनऊ अधिवेशन में पुनर्मिलन। |
| ✦ 1887 — प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी। 1888 — प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष: जॉर्ज यूल। |
| ✦ 1917 — एनी बेसेंट INC की प्रथम महिला अध्यक्ष। 1925 — सरोजिनी नायडू प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष। |
| ✦ होमरूल लीग — तिलक (अप्रैल 1916, पूना) और एनी बेसेंट (सितंबर 1916, मद्रास)। |
| ✦ लखनऊ समझौता 1916 — INC व मुस्लिम लीग के बीच। पृथक निर्वाचन की स्वीकृति — द्विराष्ट्र सिद्धांत को बल। |
| ✦ 1896 कलकत्ता — पहली बार "वंदे मातरम" गाया (टैगोर)। 1911 कलकत्ता — पहली बार "जन गण मन" गाया। |
| ✦ 1892 में दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सांसद बने। |
| 🧑💼 अध्याय 07 — महत्वपूर्ण व्यक्तित्व (UPSC दृष्टि से) |
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🎯 EXAM TIP
UPSC Prelims हेतु — INC के प्रथम 10 अधिवेशनों के अध्यक्ष, स्थान और प्रमुख घटनाएँ याद रखें। "लाल-बाल-पाल" = लाला लाजपत राय + बाल गंगाधर तिलक + बिपिन चंद्र पाल।
🎯 EXAM TIP
UPSC Mains हेतु — "नरम दल और गरम दल में क्या अंतर था और गरम दल का उदय क्यों हुआ?" — इस पर 150-200 शब्दों में उत्तर लिखने का अभ्यास करें।
अध्याय सारांश: भारत का राष्ट्रीय आंदोलन तीन चरणों में विकसित हुआ। नरम दल (1885-1905) ने याचिका और संवैधानिक माँगों से शुरुआत की। गरम दल (1905-1919) ने स्वराज, स्वदेशी और जनभागीदारी पर जोर दिया। सूरत विभाजन (1907) और लखनऊ पुनर्मिलन (1916) इस काल की महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं। होमरूल लीग आंदोलन ने गांधी युग की तैयारी की।