🏛️ अध्याय 7/15 — आधुनिक भारत का इतिहास

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का उदय एवं उदारवादी युग

Rise of INC & Moderate Phase | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में

    1857 के विद्रोह की विफलता के बाद भी भारतीयों में स्वतंत्रता की ललक बनी रही। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में पश्चिमी शिक्षा के प्रसार, राष्ट्रवादी विचारों के उदय और अंग्रेजी शासन की शोषणकारी नीतियों के विरुद्ध प्रतिक्रिया ने एक संगठित राजनीतिक आंदोलन को जन्म दिया। इसी पृष्ठभूमि में 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना हुई और भारत का राष्ट्रीय आंदोलन संगठित रूप धारण करने लगा।

    1. आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास के कारण

    1.1 आंतरिक कारण

    1.2 ब्रिटिश प्रतिक्रियावादी नीतियाँ

    🎯 EXAM TIP

    UPSC में राष्ट्रवाद के कारणों पर प्रश्न बार-बार आते हैं। "धन निष्कासन सिद्धांत" — दादाभाई नौरोजी की पुस्तक "Poverty and Un-British Rule in India" याद रखें।

    2. INC से पहले की प्रमुख राजनीतिक संस्थाएँ

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना से पहले अनेक राजनीतिक संस्थाएँ कार्यरत थीं, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन की नींव रखी —

    वर्षसंस्था का नामसंस्थापक / प्रमुख व्यक्तियोगदान
    1836बंगभाषा प्रकाशिका सभा, कलकत्ताराजा राममोहन राय के सहयोगीप्रशासनिक सुधार व शिक्षा की वकालत
    1837ज़मींदारी एसोसिएशन (लैंडहोल्डर्स सोसाइटी)द्वारकानाथ टैगोर, राधाकांत देबभारत में संवैधानिक आंदोलन का पहला प्रयास
    1851ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन, कलकत्ताराधाकांत देब (अध्यक्ष), देबेंद्रनाथ टैगोर (सचिव)विधायी सुधार, न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण की माँग
    1866ईस्ट इंडिया एसोसिएशन, लंदनदादाभाई नौरोजीभारतीय मुद्दों पर ब्रिटिश जनमत को प्रभावित करना
    1867पूना सार्वजनिक सभा, पूनाजी.वी. जोशी, एम.जी. रानाडेजनमत का प्रतिनिधित्व, सरकार व जनता के बीच मध्यस्थ
    1875इंडियन लीग, कलकत्ताशिशिर कुमार घोषराष्ट्रवाद और राजनीतिक शिक्षा का प्रसार
    1876इंडियन एसोसिएशन, कलकत्तासुरेंद्रनाथ बनर्जी, आनंद मोहन बोसICS सुधार आंदोलन, अखिल भारतीय सम्मेलन (1883)
    1885बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशनफीरोजशाह मेहता, बदरुद्दीन तैयबजीलिटन की नीतियों के विरुद्ध राजनीतिक अधिकारों की माँग

    🎯 EXAM TIP

    1876 की इंडियन एसोसिएशन को "इंडियन नेशनल एसोसिएशन" भी कहते हैं — UPSC 2017 में पूछा गया। 1892 में दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सांसद बने।

    3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (1885)

    3.1 स्थापना एवं प्रथम अधिवेशन

    3.2 INC की स्थापना से संबंधित सिद्धांत

    महत्वपूर्ण तथ्य: 1887 में बदरुद्दीन तैयबजी INC के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बने। 1888 में जॉर्ज यूल प्रथम अंग्रेज (गैर-भारतीय) अध्यक्ष बने। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार "वंदे मातरम" गाया।

    4. नरम दल — उदारवादी चरण (1885–1905)

    4.1 प्रमुख नेता

    4.2 नरम दल के तरीके एवं माँगें

    4.3 नरम दल की सामाजिक आधार

    4.4 नरम दल की उपलब्धियाँ

    4.5 नरम दल की सीमाएँ एवं आलोचना

    🎯 EXAM TIP

    नरम दल की विफलताओं से ही गरम दल का उदय हुआ — यह कारण-कार्य संबंध UPSC Mains में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    5. गरम दल का उदय — उग्रवादी चरण (1905–1919)

    5.1 गरम दल के उदय के कारण

    5.2 गरम दल के प्रमुख नेता — लाल-बाल-पाल

    नेताउपाधि / अन्य नामजन्मप्रमुख योगदान
    लाला लाजपत रायपंजाब केसरी, शेर-ए-पंजाब1865, फिरोजपुर (पंजाब)पंजाब में स्वदेशी आंदोलन, D.A.V. कॉलेज की स्थापना। Simon Commission का विरोध।
    बाल गंगाधर तिलकलोकमान्य1856, रत्नागिरी (महाराष्ट्र)गणपति उत्सव, शिवाजी उत्सव, केसरी अखबार, "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।"
    बिपिन चंद्र पालक्रांतिकारी विचारों के जनक1858, हबीबगंज (बंगाल)New India अखबार, बंगाल में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व।
    अरविंदो घोषश्री अरविंद1872, कलकत्ताVande Mataram अखबार, बंदूक से नहीं आत्मशक्ति से स्वतंत्रता का संदेश।

    महत्वपूर्ण: "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" — बाल गंगाधर तिलक का ऐतिहासिक नारा। यह UPSC में बार-बार पूछा जाता है।

    5.3 गरम दल के तरीके एवं माँगें

    6. नरम दल बनाम गरम दल — तुलनात्मक अध्ययन

    पहलूनरम दल (1885-1905)गरम दल (1905-1919)
    सामाजिक आधारसंपन्न जमींदार, उच्च-मध्यम वर्ग, शिक्षित पेशेवरशिक्षित मध्यम व निम्न-मध्यम वर्ग, ग्रामीण जनता
    विचारधारापश्चिमी उदारवाद, संसदीय सिद्धांत, ब्रिटिश न्याय में विश्वासभारतीय इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, स्वराज की माँग
    ब्रिटिश शासन पर दृष्टिकुछ हद तक लाभकारी, ईश्वरीय कार्य मानतेशोषणकारी, अन्यायपूर्ण, अवैध
    संघर्ष के तरीकेप्रार्थना, याचिका, प्रचार, संवैधानिक आंदोलनबहिष्कार, निष्क्रिय प्रतिरोध, हड़ताल, प्रत्यक्ष संघर्ष
    प्रमुख माँगेंसंवैधानिक सुधार, ICS में भागीदारी, "No Taxation without Representation"स्वराज, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा, बहिष्कार
    महिलाओं की भागीदारीसीमित — मुख्यतः शिक्षित अभिजात वर्गप्रोत्साहित — छात्र, महिलाएँ, श्रमिक सभी शामिल
    प्रमुख नेतादादाभाई नौरोजी, गोखले, फीरोजशाह मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जीतिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरविंद घोष
    सांस्कृतिक प्रभावराजनीतिक-प्रशासनिक सुधार पर जोरहिंदू पौराणिकता, परंपरा, उत्सवों का राजनीतिकरण

    7. महत्वपूर्ण कांग्रेस अधिवेशन (1885-1920)

    वर्षस्थानअध्यक्षप्रमुख घटनाएँ / प्रस्ताव
    1885बॉम्बेडब्ल्यू.सी. बोनर्जीINC का प्रथम अधिवेशन, 72 प्रतिनिधि
    1886कलकत्तादादाभाई नौरोजीINC व नेशनल कॉन्फ्रेंस का विलय
    1887मद्रासबदरुद्दीन तैयबजीप्रथम मुस्लिम अध्यक्ष, मुसलमानों से INC में शामिल होने की अपील (UPSC 2015)
    1888इलाहाबादजॉर्ज यूलप्रथम अंग्रेज (गैर-भारतीय) अध्यक्ष
    1896कलकत्तारहीमतुल्ला सयानीरवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार "वंदे मातरम" गाया
    1905बनारसगोपाल कृष्ण गोखलेस्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा, बंगाल विभाजन की निंदा
    1906कलकत्तादादाभाई नौरोजीपहली बार "स्वराज" को लक्ष्य घोषित, स्वदेशी-बहिष्कार प्रस्ताव
    1907सूरतरश बिहारी घोषनरम-गरम दल में ऐतिहासिक विभाजन (सूरत विभाजन)
    1911कलकत्ताबी.एन. धरपहली बार "जन गण मन" गाया
    1916लखनऊए.सी. मजूमदारनरम-गरम दल में पुनर्मिलन, लखनऊ समझौता (मुस्लिम लीग के साथ)
    1917कलकत्ताएनी बेसेंटINC की प्रथम महिला अध्यक्ष (UPSC 2015)
    1919अमृतसरमोतीलाल नेहरूखिलाफत आंदोलन का समर्थन, जलियाँवाला बाग की निंदा
    1929लाहौरजवाहरलाल नेहरू"पूर्ण स्वराज" प्रस्ताव, 26 जनवरी 1930 — स्वतंत्रता दिवस घोषित

    🎯 EXAM TIP

    दादाभाई नौरोजी INC के तीन बार अध्यक्ष बने — 1886, 1893, 1906। 1917 में एनी बेसेंट प्रथम महिला अध्यक्ष बनीं। इन तथ्यों पर बार-बार प्रश्न आते हैं।

    8. सूरत विभाजन (1907) — कारण, घटना एवं परिणाम

    दिसंबर 1907 में सूरत अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नरम दल और गरम दल में विभाजित हो गई — यह भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की एक ऐतिहासिक घटना थी।

    8.1 विभाजन के कारण

    8.2 विभाजन के परिणाम

    ► राजद्रोही सभाएँ अधिनियम 1907

    ► आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1908

    ► विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908

    ► भारतीय प्रेस अधिनियम 1910

    याद रखें: सूरत विभाजन (1907) ने स्वदेशी आंदोलन को कमज़ोर किया लेकिन भारत में राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुँचाने में मदद की — UPSC 2015 में इस पर प्रश्न आया था।

    9. गरम दल का मूल्यांकन — उपलब्धियाँ एवं सीमाएँ

    9.1 उपलब्धियाँ

    9.2 सीमाएँ

    10. होमरूल लीग आंदोलन (1916)

    प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) के दौरान ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों और मोर्ले-मिंटो सुधारों से निराशा के बाद, होमरूल लीग आंदोलन आरंभ हुआ।

    10.1 दो अलग लीगें
    संस्थास्थापनामुख्यालयक्षेत्र
    तिलक की होमरूल लीगअप्रैल 1916पूनामहाराष्ट्र (बॉम्बे छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत
    एनी बेसेंट की होमरूल लीगसितंबर 1916मद्रासशेष भारत, बॉम्बे शहर सहित

    10.2 होमरूल आंदोलन के उदय के कारण

    10.3 होमरूल आंदोलन का महत्व

    🎯 EXAM TIP

    होमरूल लीग पर UPSC में बार-बार प्रश्न — "तिलक की लीग" अप्रैल 1916, "बेसेंट की लीग" सितंबर 1916। एनी बेसेंट 1917 में INC की प्रथम महिला अध्यक्ष भी बनीं।

    11. लखनऊ समझौता (1916)

    1916 के लखनऊ अधिवेशन (अध्यक्ष — ए.सी. मजूमदार) में दो महत्वपूर्ण समझौते हुए — INC में नरम-गरम दल का पुनर्मिलन और INC-मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता।

    11.1 मुख्य धाराएँ (मुस्लिम लीग के साथ)

    11.2 मूल्यांकन

    महत्वपूर्ण: लखनऊ समझौते में तिलक और जिन्ना की प्रमुख भूमिका रही — इसी कारण तिलक को "भारतीय अशांति के जनक" कहने वाले अंग्रेज बाद में उनकी प्रशंसा करने लगे।

    12. राष्ट्रीय आंदोलन के चरण — संक्षिप्त अवलोकन

    चरणकालनेतृत्वविशेषता
    नरम दल / उदारवादी चरण1885–1905नौरोजी, गोखले, मेहता, सुरेंद्रनाथ बनर्जीयाचिका, प्रार्थना, संवैधानिक माँगें, क्रमिक सुधार
    गरम दल / उग्रवादी चरण1905–1919तिलक, लाल-बाल-पाल, अरविंदस्वराज, स्वदेशी, बहिष्कार, जनभागीदारी
    गांधी युग1919–1947महात्मा गांधीपूर्ण स्वराज, अहिंसक असहयोग, सत्याग्रह
    ★ KEY POINTS ★
    ✦ INC की स्थापना — दिसंबर 1885, बॉम्बे। संस्थापक — ए.ओ. ह्यूम। प्रथम अध्यक्ष — वोमेश चंद्र बोनर्जी। 72 प्रतिनिधि।
    ✦ दादाभाई नौरोजी — "भारत के बुजुर्ग नेता", "धन निष्कासन सिद्धांत" के प्रणेता, INC के तीन बार अध्यक्ष (1886, 1893, 1906)।
    ✦ "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" — बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य)।
    ✦ सूरत विभाजन — दिसंबर 1907। INC नरम-गरम में विभाजित। 1916 लखनऊ अधिवेशन में पुनर्मिलन।
    ✦ 1887 — प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष: बदरुद्दीन तैयबजी। 1888 — प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष: जॉर्ज यूल।
    ✦ 1917 — एनी बेसेंट INC की प्रथम महिला अध्यक्ष। 1925 — सरोजिनी नायडू प्रथम भारतीय महिला अध्यक्ष।
    ✦ होमरूल लीग — तिलक (अप्रैल 1916, पूना) और एनी बेसेंट (सितंबर 1916, मद्रास)।
    ✦ लखनऊ समझौता 1916 — INC व मुस्लिम लीग के बीच। पृथक निर्वाचन की स्वीकृति — द्विराष्ट्र सिद्धांत को बल।
    ✦ 1896 कलकत्ता — पहली बार "वंदे मातरम" गाया (टैगोर)। 1911 कलकत्ता — पहली बार "जन गण मन" गाया।
    ✦ 1892 में दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद के प्रथम भारतीय सांसद बने।
    🧑‍💼 अध्याय 07 — महत्वपूर्ण व्यक्तित्व (UPSC दृष्टि से)
    • ए.ओ. ह्यूम — INC के संस्थापक, सेवानिवृत्त ICS अधिकारी, "सेफ्टी वाल्व सिद्धांत"।
    • दादाभाई नौरोजी — "ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया", धन निष्कासन सिद्धांत, पहले भारतीय MP।
    • गोपाल कृष्ण गोखले — गांधी के राजनीतिक गुरु, "भारत का ग्लैडस्टोन", सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी के संस्थापक।
    • बाल गंगाधर तिलक — "लोकमान्य", "भारतीय अशांति के जनक" (वैलेंटाइन चिरोल के अनुसार), होमरूल लीग।
    • लाला लाजपत राय — "पंजाब केसरी", "शेर-ए-पंजाब", साइमन कमीशन विरोध में शहीद।
    • बिपिन चंद्र पाल — "क्रांतिकारी विचारों के जनक", "New India" समाचार-पत्र।
    • अरविंदो घोष — "Vande Mataram" पत्र, बाद में श्री अरविंद के रूप में आध्यात्मिक जीवन।
    • एनी बेसेंट — होमरूल लीग (सितंबर 1916), INC की प्रथम महिला अध्यक्ष (1917)।

    🎯 EXAM TIP

    UPSC Prelims हेतु — INC के प्रथम 10 अधिवेशनों के अध्यक्ष, स्थान और प्रमुख घटनाएँ याद रखें। "लाल-बाल-पाल" = लाला लाजपत राय + बाल गंगाधर तिलक + बिपिन चंद्र पाल।

    🎯 EXAM TIP

    UPSC Mains हेतु — "नरम दल और गरम दल में क्या अंतर था और गरम दल का उदय क्यों हुआ?" — इस पर 150-200 शब्दों में उत्तर लिखने का अभ्यास करें।

    अध्याय सारांश: भारत का राष्ट्रीय आंदोलन तीन चरणों में विकसित हुआ। नरम दल (1885-1905) ने याचिका और संवैधानिक माँगों से शुरुआत की। गरम दल (1905-1919) ने स्वराज, स्वदेशी और जनभागीदारी पर जोर दिया। सूरत विभाजन (1907) और लखनऊ पुनर्मिलन (1916) इस काल की महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं। होमरूल लीग आंदोलन ने गांधी युग की तैयारी की।

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