⚔️ अध्याय 3/15 — आधुनिक भारत का इतिहास

ब्रिटिश सत्ता का विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण

Expansion & Consolidation of British Power | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में

    ▌ भूमिका (Introduction)

    बंगाल भारत का सर्वाधिक समृद्ध प्रांत था। यहाँ के व्यापार और राजस्व ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बेहद आकर्षित किया। 1757 ई. में प्लासी के युद्ध और 1764 ई. में बक्सर के युद्ध ने बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की नींव रखी। इन दोनों युद्धों के परिणामस्वरूप 1765 ई. में कंपनी को बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी मिली — यही भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की वास्तविक शुरुआत थी।

    इस अध्याय में हम अध्ययन करेंगे: बंगाल के नवाबों और EIC का टकराव, काल कोठरी की घटना, प्लासी और बक्सर के युद्ध, इलाहाबाद की संधि, दीवानी अधिकार, रॉबर्ट क्लाइव का प्रशासन, और द्वैध शासन प्रणाली।

    ▌ बंगाल के नवाब और ईस्ट इंडिया कंपनी (Bengal Nawabs & EIC)

    बंगाल के प्रमुख नवाब

    नवाबशासनकालविशेषता
    मुर्शिद कुली खाँ1713–1727 ई.बंगाल का वास्तविक स्वतंत्र शासन; इज़ारेदारी प्रणाली; राजधानी मुर्शिदाबाद
    शुजा-उद-दीन1727–1739 ई.शांतिपूर्ण शासन; बंगाल की समृद्धि बढ़ी
    सरफराज खाँ1739–1740 ई.अलीवर्दी खाँ द्वारा पदच्युत
    अलीवर्दी खाँ1740–1756 ई.मजबूत शासक; मराठा आक्रमण झेला; EIC को किलेबंदी की अनुमति नहीं दी
    सिराज-उद-दौला1756–1757 ई.अंतिम स्वतंत्र नवाब; प्लासी में पराजित; मीर जाफर के विश्वासघात का शिकार

    EIC और नवाब के बीच विवाद के कारण

    ▌ काल कोठरी की घटना — Black Hole Tragedy (जून 1756 ई.)

    जून 1756 ई. में सिराज-उद-दौला ने कलकत्ता पर आक्रमण किया और फोर्ट विलियम पर कब्जा कर लिया। इस दौरान एक विवादास्पद घटना हुई जिसे 'काल कोठरी की घटना' (Black Hole of Calcutta) कहा जाता है।

    स्मरणीय: काल कोठरी की घटना का विवरण जे.जेड. होलवेल ने दिया था, जो एक अंग्रेज अधिकारी थे। इस घटना की प्रामाणिकता इतिहासकारों में विवादित रही है, किंतु UPSC परीक्षाओं में यह घटना पूछी जाती है।

    ▌ प्लासी का युद्ध — Battle of Plassey (23 जून 1757 ई.)

    प्लासी का युद्ध भारतीय इतिहास की एक निर्णायक घटना थी। यह मुर्शिदाबाद के दक्षिण में भागीरथी नदी के किनारे प्लासी नामक स्थान पर लड़ा गया। इसे 'युद्ध' कम और 'नाटक' अधिक कहा जाता है क्योंकि यह वास्तव में विश्वासघात का परिणाम था।

    युद्ध के कारण

    युद्ध का विवरण

    पहलूविवरण
    तिथि23 जून 1757 ई.
    स्थानप्लासी (मुर्शिदाबाद के दक्षिण, भागीरथी नदी के किनारे)
    अंग्रेज पक्षरॉबर्ट क्लाइव (Commander) — लगभग 3,000 सैनिक
    नवाब पक्षसिराज-उद-दौला — लगभग 50,000 सैनिक (कागजी)
    विश्वासघातीमीर जाफर (सेनापति) — युद्ध में खड़े रहे, लड़े नहीं
    परिणामसिराज की पराजय; भाग निकला; मीर जाफर के पुत्र मीरन ने सिराज की हत्या करवाई
    नया नवाबमीर जाफर — अंग्रेजों की कठपुतली बना

    महत्वपूर्ण: प्लासी की जीत के बाद रॉबर्ट क्लाइव ने मीर जाफर से भारी व्यक्तिगत भेंट और जमींदारी प्राप्त की। अत्यधिक व्यक्तिगत लाभ उठाने के कारण ब्रिटिश संसद ने क्लाइव पर जाँच बैठाई (Clive Inquiry, 1772)।

    प्लासी युद्ध के परिणाम

    ▶ मीर जाफर बंगाल का नवाब बना — EIC की कठपुतली ▶ अंग्रेजों को 24 परगना की जमींदारी मिली ▶ EIC को बंगाल में किलेबंदी और स्वतंत्र व्यापार का अधिकार ▶ फ्रांसीसी प्रभाव बंगाल से पूरी तरह समाप्त ▶ भारत में ब्रिटिश राजनीतिक शक्ति की नींव पड़ी ▶ रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का गवर्नर बना (1757–60)

    EXAM TIP

    प्लासी युद्ध से जुड़े परीक्षा के प्रश्न: तिथि — 23 जून 1757; विश्वासघाती — मीर जाफर; क्लाइव का भूमिका; 24 परगना; प्लासी 'युद्ध' था या 'नाटक' — इस पर निबंध लिखवाए जाते हैं।

    ▌ मीर कासिम और संघर्ष (Mir Qasim, 1760–1763 ई.)

    मीर जाफर अंग्रेजों की माँगें पूरी नहीं कर पाया, इसलिए 1760 ई. में अंग्रेजों ने उसे हटाकर मीर कासिम (उसका दामाद) को नवाब बनाया। मीर कासिम एक योग्य और स्वाभिमानी शासक था।

    स्मरणीय: मीर कासिम अंग्रेजों का एकमात्र ऐसा कठपुतली नवाब था जिसने वास्तव में अंग्रेजों को चुनौती दी। उसने अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने की कोशिश की।

    ▌ बक्सर का युद्ध — Battle of Buxar (22 अक्टूबर 1764 ई.)

    बक्सर का युद्ध प्लासी से भी अधिक निर्णायक था। इसमें तीन शक्तियों के गठबंधन को अंग्रेजों ने हराया। यह युद्ध बिहार के बक्सर में गंगा नदी के किनारे लड़ा गया।

    पहलूविवरण
    तिथि22 अक्टूबर 1764 ई.
    स्थानबक्सर, बिहार (गंगा के किनारे)
    भारतीय गठबंधनमीर कासिम (बंगाल) + शुजा-उद-दौला (अवध) + शाह आलम द्वितीय (मुगल)
    अंग्रेज कमांडरहेक्टर मुनरो (Major Hector Munro)
    परिणामभारतीय गठबंधन की निर्णायक पराजय
    मीर जाफर1763 में पुनः नवाब बनाया गया (मीर कासिम को हटाकर)
    महत्वप्लासी से बड़ा — तीन शक्तियों की एकजुट सेना को हराया; ब्रिटिश सर्वोच्चता स्थापित

    प्लासी बनाम बक्सर: प्लासी (1757) में विश्वासघात की भूमिका थी — वास्तविक लड़ाई नहीं हुई। बक्सर (1764) में वास्तविक सैन्य संघर्ष था जिसमें तीन शक्तियों के गठबंधन को पराजित किया — इसीलिए बक्सर को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    EXAM TIP

    परीक्षा में पूछा जाता है — बक्सर में अंग्रेज कमांडर: हेक्टर मुनरो। बक्सर की तिथि: 22 अक्टूबर 1764। तीन गठबंधन: मीर कासिम + शुजा-उद-दौला + शाह आलम II। बक्सर बनाम प्लासी महत्व।

    ▌ इलाहाबाद की संधि — Treaty of Allahabad (1765 ई.)

    बक्सर के बाद रॉबर्ट क्लाइव 1765 ई. में दोबारा बंगाल का गवर्नर बनकर आया। उसने दो अलग-अलग संधियाँ कीं जो 'इलाहाबाद की संधियाँ' कहलाती हैं:

    प्रथम संधि — शाह आलम द्वितीय (मुगल बादशाह) के साथ

    द्वितीय संधि — शुजा-उद-दौला (अवध) के साथ

    दीवानी अधिकार — 12 अगस्त 1765 (ऐतिहासिक महत्व)

    ▶ बंगाल, बिहार और ओडिशा की दीवानी (राजस्व वसूली) EIC को मिली ▶ निज़ामत (कानून-व्यवस्था) नवाब के पास रही — इससे द्वैध शासन का जन्म ▶ EIC अब भारत में केवल व्यापारिक नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति बन गई ▶ दीवानी आय से EIC ने भारतीय वस्तुएँ खरीदकर इंग्लैंड भेजना शुरू किया ▶ यह घटना भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की वास्तविक शुरुआत मानी जाती है

    ▌ द्वैध शासन प्रणाली — Dual Government (1765–1772 ई.)

    1765 ई. में दीवानी मिलने के बाद बंगाल में एक विचित्र व्यवस्था लागू हुई जिसे 'द्वैध शासन' (Double Government/Dual Government) कहते हैं। इस व्यवस्था में शक्ति और जिम्मेदारी अलग-अलग हाथों में थी।

    पहलूEIC (दीवान)नवाब (निज़ाम)
    अधिकारराजस्व वसूली (दीवानी)कानून-व्यवस्था, न्याय
    जिम्मेदारीजनकल्याण की कोई ज़िम्मेदारी नहींजनकल्याण पर जिम्मेदारी किंतु साधन नहीं
    व्यवहार मेंराजस्व बेरहमी से वसूलासेना और प्रशासन चलाने को धन नहीं
    परिणामइंग्लैंड को धन भेजा (Drain of Wealth)बंगाल में अराजकता और अकाल

    द्वैध शासन की आलोचना: इस व्यवस्था को वारेन हेस्टिंग्ज़ ने 'सभी बुराइयों की जड़' बताया। 1770 ई. में बंगाल के महान अकाल (Great Bengal Famine) में एक करोड़ से अधिक लोग मारे गए — इसके लिए द्वैध शासन को जिम्मेदार माना जाता है। 1772 में वारेन हेस्टिंग्ज़ ने इसे समाप्त किया।

    ▌ रॉबर्ट क्लाइव का शासनकाल (Robert Clive as Governor)

    रॉबर्ट क्लाइव बंगाल का पहला वास्तविक ब्रिटिश गवर्नर माना जाता है। वह दो बार गवर्नर रहा:

    कार्यकालप्रमुख कार्य
    प्रथम: 1757–60 ई.प्लासी के बाद बंगाल स्थिरीकरण; मीर जाफर को नवाब बनाया; 24 परगना की जमींदारी ली
    द्वितीय: 1765–67 ई.दीवानी का प्रबंध; इलाहाबाद संधि; द्वैध शासन लागू; सैनिक भत्ता सुधार

    EXAM TIP

    क्लाइव के बारे में परीक्षा में पूछा जाता है: 'क्लाइव को भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का संस्थापक' क्यों कहते हैं? प्रथम और द्वितीय गवर्नरशिप के कार्य। क्लाइव इंक्वायरी (1772)।

    ▌ प्लासी बनाम बक्सर — तुलनात्मक अध्ययन

    बिंदुप्लासी (1757)बक्सर (1764)
    तिथि23 जून 175722 अक्टूबर 1764
    स्थानप्लासी, पश्चिम बंगालबक्सर, बिहार
    विरोधीसिराज-उद-दौलामीर कासिम + शुजा-उद-दौला + शाह आलम II
    अंग्रेज नेतारॉबर्ट क्लाइवहेक्टर मुनरो
    युद्ध की प्रकृतिमुख्यतः विश्वासघातवास्तविक सैन्य संघर्ष
    परिणामबंगाल में राजनीतिक नियंत्रणउत्तर भारत में ब्रिटिश सर्वोच्चता
    महत्वभारत में राजनीतिक युग की शुरुआतदीवानी का रास्ता खुला (1765)

    ▌ धन का निष्कासन — Drain of Wealth

    दीवानी अधिकार मिलने के बाद EIC ने बंगाल से भारी मात्रा में धन इंग्लैंड भेजना शुरू किया। इसे 'धन का निष्कासन' (Drain of Wealth) कहते हैं। इस अवधारणा को बाद में दादाभाई नौरोजी ने 'Poverty and Un-British Rule in India' (1901) में विस्तार से समझाया।

    ★ मुख्य बिंदु | KEY POINTS

    ✦ 1756 — काल कोठरी की घटना (Black Hole of Calcutta); सिराज-उद-दौला ने कलकत्ता जीता। ✦ 23 जून 1757 — प्लासी का युद्ध; क्लाइव vs सिराज; मीर जाफर का विश्वासघात। ✦ प्लासी के बाद: मीर जाफर नवाब, 24 परगना EIC को, फ्रांसीसी प्रभाव समाप्त। ✦ मीर कासिम (1760–63): दस्तक का दुरुपयोग रोका; राजधानी मुंगेर; EIC से युद्ध। ✦ 22 अक्टूबर 1764 — बक्सर का युद्ध; हेक्टर मुनरो; तीन शक्तियों का गठबंधन पराजित। ✦ 12 अगस्त 1765 — इलाहाबाद संधि; शाह आलम II से दीवानी; बंगाल, बिहार, ओडिशा। ✦ द्वैध शासन (1765–72): EIC = दीवान; नवाब = निज़ाम; 1770 का महान अकाल। ✦ रॉबर्ट क्लाइव — दो बार गवर्नर (1757–60, 1765–67); 1774 में आत्महत्या। ✦ वारेन हेस्टिंग्ज़ ने 1772 में द्वैध शासन समाप्त कर प्रत्यक्ष प्रशासन शुरू किया। ✦ धन का निष्कासन — दादाभाई नौरोजी ने सिद्ध किया; भारत की गरीबी का मुख्य कारण।

    EXAM TIP

    UPSC/PCS मुख्य प्रश्न: प्लासी को 'युद्ध नहीं नाटक' क्यों कहते हैं? — इसका उत्तर यह है कि सिराज की सेना का बड़ा हिस्सा (मीर जाफर गुट) लड़ा ही नहीं। द्वैध शासन की विफलता — 1770 का बंगाल अकाल। दीवानी — ब्रिटिश भारत का आर्थिक आधार।

    📢 विज्ञापन
    🔥 सबसे लोकप्रिय
    📘

    RAS Foundation Course 2026 🕉️

    Multiple ValidityTests
    ₹4,999₹25,000
    Join Now →
    📢 विज्ञापन
    📦

    ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

    Multiple ValidityTests
    ₹899₹4,999
    Join Now →
    📢 विज्ञापन
    🔥 सबसे लोकप्रिय
    📘

    RAS Foundation Course 2026 🕉️

    Multiple ValidityTests
    ₹4,999₹25,000
    Join Now →
    ← अध्याय 2: ब्रिटिश विजय की पूर्व संध्या पर भारत अध्याय 4: गवर्नर जनरल एवं वायसराय →