सीमा एक गृहिणी (Homemaker) है — जयपुर के एक मध्यमवर्गीय परिवार में। उसके पति रोज़ शराब पीकर मारते हैं। सास-ससुर दहेज के लिए ताने देते हैं। घर से निकलने की कोशिश करे तो धमकी — "निकली तो बच्चे तुझे नहीं मिलेंगे।" एक दिन पड़ोसन ने कहा — "सीमा, तेरे लिए 2005 में एक कानून बना है।" सीमा ने संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) से मिलकर DIR (Domestic Incident Report) दर्ज की। मजिस्ट्रेट ने धारा 18 का संरक्षण आदेश और धारा 19 का निवास आदेश दिया — अब न पति घर से निकाल सकता है, न मार सकता है। यही है "घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 (PWDVA)" की असली ताकत।
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| पूर्ण नाम | घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम, 2005 (Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005) |
| अधिनियम संख्या | 2005 का अधिनियम संख्या 43 |
| विधेयक पारित (Bill Passed) | 13 सितम्बर, 2005 — संसद द्वारा |
| लागू (Effective) | 26 अक्टूबर, 2006 |
| संरचना (Structure) | 5 अध्याय (Chapters) + 37 धाराएं (Sections) |
| आधार (Basis) | भारत के 56वें वर्ष में — संसद द्वारा अधिनियमित |
| उद्देश्य (Objective) | परिवार के भीतर होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा से महिलाओं का संरक्षण |
| NCRB 2022 डेटा | भारत में हर 3 मिनट में एक घरेलू हिंसा का मामला | Rajasthan में 12,000+ मामले/वर्ष |
यह अधिनियम पहला ऐसा भारतीय कानून है जो घरेलू हिंसा को न केवल आपराधिक (Criminal) बल्कि civil law के दायरे में भी लाता है। महिला को आश्रय, सुरक्षा और आर्थिक राहत — तीनों एक साथ मिलती हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य: PWDVA 2005 के तहत अपराध संज्ञेय (Cognizable) और अजमानतीय (Non-Bailable) होते हैं। महिला को केवल अपने साक्ष्य पर न्यायालय आरोपी को दोषी मान सकती है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: कोई भी ऐसी महिला जो प्रत्यर्थी (Respondent/आरोपी) के साथ घरेलू नातेदारी (Domestic Relationship) में रह रही हो या रह चुकी हो तथा आरोपी पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाती हो। ✅ सरल शब्दों में: पीड़ित महिला — जो आरोपी के साथ एक ही घर में रही हो/हो — और जिसने घरेलू हिंसा झेली हो। 💡 उदाहरण: सीमा जो अपने पति के साथ रहती है और पति मारता-पीटता है → सीमा व्यथित व्यक्ति है। Live-in relationship में भी यह लागू होता है (Delhi HC, 2025)।
⚖️ कानूनी परिभाषा: जब दो व्यक्ति निम्नलिखित संबंधों में साझा गृहस्थी (Shared Household) में रह रहे हों या रह चुके हों: विवाह (Marriage), रक्त संबंध (Blood Relation), गोद लेना (Adoption), कुटुम्ब/परिवार, एक संयुक्त परिवार में साथ-साथ रहना। ✅ सरल शब्दों में: एक ही घर में रहने वाले जो किसी पारिवारिक रिश्ते से जुड़े हों — विवाह, खून, गोद — सब घरेलू नातेदार हैं। 💡 उदाहरण: पत्नी-पति, बहू-सास-ससुर, बहन-भाई, live-in partner — सभी घरेलू नातेदारी में आते हैं। Anumika Chandel v. Naresh Chandel Case (2006) में live-in को भी विवाह जैसा माना गया।
⚖️ कानूनी परिभाषा: कोई भी वयस्क पुरुष (Adult Male) जो महिला के साथ घरेलू नातेदारी में रहा हो या रह रहा हो, जिसके खिलाफ महिला द्वारा घरेलू हिंसा की शिकायत की गई हो तथा राहत/अनुतोष चाह रही हो। ✅ सरल शब्दों में: आरोपी — वह वयस्क पुरुष जिसके खिलाफ पीड़िता ने शिकायत की। साथ रहने वाले रिश्तेदार (सास, ननद आदि) भी शामिल हो सकते हैं। 💡 उदाहरण: रमेश (पति) अपनी पत्नी सीमा को मारता है → रमेश Respondent है। यदि सास भी प्रताड़ित करे → सास को भी Respondent बनाया जा सकता है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: व्यथित महिला द्वारा घरेलू हिंसा की शिकायत प्राप्त होने पर विहित प्रारूप (Prescribed Format) में संरक्षण अधिकारी द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) कहलाती है। ✅ सरल शब्दों में: पीड़िता की शिकायत पर Protection Officer जो official report बनाता है — उसे DIR कहते हैं। यह मजिस्ट्रेट के पास जाती है। 💡 उदाहरण: सीमा ने संरक्षण अधिकारी के पास जाकर पति की मारपीट की शिकायत की। अधिकारी ने DIR तैयार की और मजिस्ट्रेट को भेजी — अब कार्यवाही शुरू होगी।
⚖️ कानूनी परिभाषा: साझा गृहस्थी वह घर है जिसमें व्यथित महिला रहती है या रह चुकी है तथा प्रत्यर्थी के साथ घरेलू नातेदारी में है — चाहे वह घर प्रत्यर्थी के स्वामित्व में हो या न हो, किराए पर लिया हो, या HUF (Hindu Undivided Family) का हो। ✅ सरल शब्दों में: जिस घर में पीड़िता रहती है/रही है — वह Shared Household है। चाहे घर पति का हो, सास का हो, किराए का हो। 💡 उदाहरण: सीमा ससुराल के घर में रहती है — वह घर उसकी सास का है। फिर भी यह Shared Household है और धारा 17 के तहत सीमा को वहां रहने का अधिकार है।
| धारा | परिभाषा (Definition) | सरल अर्थ |
|---|---|---|
| 2(b) | बालक (Child) — 18 वर्ष से कम आयु का व्यक्ति | गोद लिया, सौतेला, पोष्य बालक भी | 18 साल से छोटा बच्चा |
| 2(h) | दहेज (Dowry) — दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, धारा-2 के अनुसार | विवाह से पूर्व/बाद दी गई संपत्ति | शादी के लिए दिया गया सामान/पैसा — जो मांगा जाए |
| 2(k) | चिकित्सा सुविधा (Medical Facility) — सरकारी या निजी — पीड़िता के इलाज के लिए | डॉक्टर/हॉस्पिटल जो DV पीड़िता का इलाज करे |
| 2(l) | महानगर मजिस्ट्रेट या न्यायिक मजिस्ट्रेट — जिले में PWDVA कार्यवाही का अधिकार | वह न्यायालय जो PWDVA cases सुने |
| 2(m) | अधिसूचित अधिकारी (Notified Officer) — राज्य सरकार द्वारा नियुक्त | सरकार का designated अधिकारी |
| 2(r) | राहत/अनुतोष (Relief) — धारा 18-22 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश | पीड़िता को दी जाने वाली कोई भी मदद/आदेश |
⚖️ कानूनी परिभाषा: प्रत्यर्थी व उसके नातेदारों द्वारा व्यथित महिला के साथ किया गया कोई भी कार्य या आचरण जो 4 प्रकार के दुर्व्यवहार (4 Types of Abuse) में से किसी में शामिल हो। ✅ सरल शब्दों में: घर के अंदर पति/परिवार द्वारा महिला को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाना — शरीर, मन, पैसा, इज्जत — किसी से भी — यह घरेलू हिंसा है। 💡 उदाहरण: पति का मारना (शारीरिक), जबरन यौन संबंध (लैंगिक), "बेटा नहीं दे सकती" के ताने (मौखिक), स्त्रीधन वापस न करना (आर्थिक) — सभी घरेलू हिंसा हैं।
| प्रकार (Type) | विवरण (Description) | उदाहरण (Rajasthan Context) |
|---|---|---|
| 1. शारीरिक दुर्व्यवहार (Physical Abuse) | मारपीट, जीवन/अंग/स्वास्थ्य को क्षति पहुंचाना, मारपीट के उद्देश्य से हमला करना | पति का पत्नी पर हाथ उठाना, थप्पड़ मारना, लात मारना, घर से धक्का देना |
| 2. लैंगिक दुर्व्यवहार (Sexual Abuse) | अभद्र यौन आचरण, इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध, महिला की गरिमा (Dignity) का अपमान | पति का जबरन शारीरिक संबंध, अप्राकृतिक यौन कार्य, यौन प्रकृति की गालियां |
| 3. मौखिक व भावनात्मक दुर्व्यवहार (Verbal & Emotional Abuse) | गाली देना, उपहास करना, पुत्र न होने पर अपमान (ताने मारना), मानसिक प्रताड़ना | "बेटा नहीं दे सकती, निकम्मी है", "पीहर वाले कुछ नहीं हैं", लगातार अपमान |
| 4. आर्थिक दुर्व्यवहार (Economic Abuse) | स्त्रीधन की पहुंच से वंचित करना, आजीविका के साधन रोकना, जरूरी खर्च न देना | पत्नी का स्त्रीधन (गहने) रोक लेना, घर का खर्च न देना, नौकरी करने से रोकना |
पीड़ित महिला (या उसकी ओर से कोई भी व्यक्ति) निम्न में से किसी को भी घरेलू हिंसा की शिकायत कर सकती है: (1) पुलिस अधिकारी (Police Officer) — नजदीकी थाना; (2) संरक्षण अधिकारी (Protection Officer); (3) सेवा प्रदाता (Service Provider/NGO); (4) प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (स्थानीय अधिकारिता)। | Rajasthan में: Sakhi One Stop Centre (Jaipur, Jodhpur, Udaipur) → DV पीड़ितों के लिए एकल खिड़की (Single Window) सेवा।
धारा 4
संरक्षण अधिकारी को सूचना व सूचनाकर्ता का दायित्व-अपवर्जन कोई भी व्यक्ति घरेलू हिंसा के किसी कृत्य की सूचना संबंधित संरक्षण अधिकारी को दे सकता है। इस बाबत सद्भावनापूर्वक दी गई सूचना के लिए किसी भी व्यक्ति को नागरिक या आपराधिक दायित्व से मुक्त रखा जाएगा। अर्थात: पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार — कोई भी शिकायत कर सकता है — और उन पर कोई मुकदमा नहीं होगा।
धारा 5
पुलिस अधिकारियों, सेवा प्रदाताओं और मजिस्ट्रेट के कर्तव्य पुलिस अधिकारी, सेवाप्रदाता, संरक्षण अधिकारी या मजिस्ट्रेट — यदि इन्हें घरेलू हिंसा की शिकायत प्राप्त हो — तो वे व्यथित व्यक्ति को इस अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त होने वाले अधिकारों की जानकारी देंगे: संरक्षण अधिकारी की सेवाएं, निःशुल्क कानूनी सहायता, शेल्टर होम सुविधा, चिकित्सा सुविधा आदि।
धारा 6
आश्रय गृहों (Shelter Homes) के कर्तव्य आश्रय गृह (Shelter Home) का भारसाधक अधिकारी व्यथित महिला को आश्रय प्रदान करेगा। Rajasthan में: "Garima Grih" योजना के तहत 14 जिलों में Women Shelter Homes। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा में Sakhi One Stop Centres — PWDVA पीड़ितों के लिए।
धारा 8
संरक्षण अधिकारियों की नियुक्ति (Appointment of Protection Officer) नियुक्ति: राज्य सरकार द्वारा (इस अधिनियम के तहत शक्तियों व कर्तव्यों के पालनार्थ) — संभवतः कोई महिला अधिकारी हो। प्रत्येक जिले में एक या अधिक संरक्षण अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे।
धारा 9
संरक्षण अधिकारी के कर्तव्य (Duties of Protection Officer) (i) मजिस्ट्रेट को कर्तव्य निर्वहन में सहायता; (ii) व्यथित महिला की शिकायत पर घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) तैयार करना और मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट करना तथा स्थानीय पुलिस अधिकारी व सेवा प्रदाता को प्रति भेजना; (iii) राहत प्राप्ति हेतु आवेदन में सहायता; (iv) निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी; (v) सुरक्षित आश्रयगृहों व चिकित्सा सुविधाओं में सहायता; (vi) चिकित्सीय परीक्षण की रिपोर्ट पुलिस व मजिस्ट्रेट को भेजना।
दंड — संरक्षण अधिकारी के कर्तव्य पालन में विफल होने पर: धारा 33 के तहत — 1 वर्ष कारावास + ₹20,000 जुर्माना। संरक्षण अधिकारी "लोक सेवक (Public Servant)" माना जाता है — धारा 30।
धारा 10
सेवा प्रदाता (Service Provider — NGO) ऐसी संस्था जो महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्यों के लिए पंजीकृत हो (Company Act/Society Registration Act) — उनके कार्य: (i) घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) तैयार करना; (ii) चिकित्सा सहायता; (iii) विधिक सलाह; (iv) वित्तीय सहायता; (v) पीड़िता को अन्य सहायता। | सेवा प्रदाता सदस्यों को सद्भावना से किए गए कार्यों के लिए कोई कानूनी बाध्यता नहीं।
धारा 11
सरकार के कर्तव्य (Duties of Government) (1) अधिनियम का व्यापक प्रचार-प्रसार — मीडिया, टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट मीडिया। (2) जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम — पुलिस व न्यायिक सेवा के लिए। (3) DV रोकथाम हेतु — विधि विभाग, गृह विभाग, स्वास्थ्य और मानव संसाधन विभाग का समन्वय।
धारा 12
मजिस्ट्रेट को आवेदन (Application to Magistrate) व्यथित महिला, संरक्षण अधिकारी या पीड़िता की ओर से कोई भी व्यक्ति — प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को — धारा 18-22 के तहत राहत के लिए आवेदन कर सकता है। मजिस्ट्रेट पहली सुनवाई में ही अंतरिम (Interim) राहत आदेश दे सकता है।
धारा 14
परामर्श (Counseling) मजिस्ट्रेट के पास यह शक्ति है कि वह पक्षकारों को — व्यथित महिला को या प्रत्यर्थी को या दोनों को — किसी सेवा प्रदाता के माध्यम से परामर्श (Counseling) हेतु निर्देशित कर सकता है। उद्देश्य: DV रुकने की संभावना और परिवार में सुलह।
धारा 16
कार्यवाहियों का बंद कमरे में किया जाना (In-Camera Proceedings) मामले की परिस्थितियों को देखते हुए मजिस्ट्रेट — गोपनीयता बनाए रखने के लिए — कार्यवाही बंद कमरे में कर सकता है। पीड़िता की पहचान और गरिमा सुरक्षित रखी जाती है।
धारा 17
साझा गृहस्थी में निवास का अधिकार (Right to Reside in Shared Household) प्रत्येक महिला को साझा गृहस्थी में निवास करने का अधिकार होगा — भले ही वह गृहस्थी उसके स्वामित्व में नहीं हो। उसे किसी भी प्रकार से बेदखल (Evict) नहीं किया जाएगा। यह अधिकार महिला को बिना court order के भी मिला हुआ है — automatic है।
धारा 17 — सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान: "पत्नी को घर से नहीं निकाल सकते" — चाहे घर पति का हो, सास का हो, या किराए का। यह automatic अधिकार है। बिना मजिस्ट्रेट के order के भी यह अधिकार है।
यह अधिनियम का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। मजिस्ट्रेट जांच के पश्चात् घरेलू हिंसा सिद्ध होने या संभावना पर — व्यथित महिला के पक्ष में निम्न 5 प्रकार के राहत आदेश पारित कर सकता है:
धारा 18
संरक्षण आदेश (Protection Order) — सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यर्थी को निषेध (Prohibit) किया जाता है: (i) घरेलू हिंसा का कोई भी कृत्य करने से; (ii) व्यथित के कार्यस्थल या बच्चे के विद्यालय में जाने से; (iii) व्यथित से किसी भी माध्यम से संपर्क करने से (व्यक्तिगत, मौखिक, लिखित, इलेक्ट्रॉनिक, टेलीफोनिक); (iv) व्यथित की संपत्ति को नष्ट करने से। | दंड: संरक्षण आदेश का उल्लंघन करे → 1 साल कारावास या ₹20,000 जुर्माना या दोनों।
धारा 19
निवास आदेश (Residence Order) मजिस्ट्रेट यह आदेश दे सकता है: (i) व्यथित महिला को साझा गृहस्थी में रखने का; (ii) प्रत्यर्थी को साझा गृहस्थी से या उसके किसी भाग से हटाने का; (iii) प्रत्यर्थी को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का; (iv) प्रत्यर्थी को बंधक (Encumber) या बेचने से रोकने का। | महत्वपूर्ण: HUF (Hindu Undivided Family) की संपत्ति पर भी लागू।
धारा 20
आर्थिक अनुतोष (Monetary Relief) मजिस्ट्रेट प्रत्यर्थी को निम्न का भुगतान करने का आदेश दे सकता है: (i) आजीविका/निर्वाह भत्ता (Maintenance); (ii) चिकित्सा व्यय (Medical Expenses); (iii) संपत्ति के नुकसान की भरपाई; (iv) बच्चों का भरण-पोषण (Child Maintenance)। यह relief "adequate, fair and reasonable" होनी चाहिए।
धारा 21
अभिरक्षा आदेश (Custody Order) दम्पत्ति के किसी भी संतान की अस्थायी अभिरक्षा (Temporary Custody) व्यथित व्यक्ति को दी जा सकती है। यदि आवश्यक हो तो प्रत्यर्थी को उसकी संतान से मिलने की व्यवस्था का निर्देश दिया जा सकता है। | यह अस्थायी (Interim) अभिरक्षा है — Guardian and Wards Act से अलग।
धारा 22
प्रतिकर/क्षतिपूर्ति आदेश (Compensation Order) मजिस्ट्रेट द्वारा व्यथित व्यक्ति के साथ हुई घरेलू हिंसा के कारण — मानसिक यातना और भावनात्मक कष्ट की क्षतिपूर्ति हेतु — प्रतिकर (Compensation) आदेश पारित किया जा सकता है। यह धारा 20 के monetary relief से अलग — यहां mental suffering का हर्जाना मिलता है।
| आदेश (Order) | धारा | मुख्य सामग्री | उल्लंघन पर दंड |
|---|---|---|---|
| संरक्षण आदेश | 18 | हिंसा/संपर्क/संपत्ति नुकसान — सब रोकता है | 1 साल + ₹20,000 |
| निवास आदेश | 19 | घर से नहीं निकालेंगे, वैकल्पिक आवास | 1 साल + ₹20,000 |
| आर्थिक अनुतोष | 20 | जीवन-निर्वाह भत्ता, चिकित्सा, बच्चों का खर्च | Contempt of Court |
| अभिरक्षा आदेश | 21 | बच्चे की अस्थायी custody + visitation rights | Contempt of Court |
| क्षतिपूर्ति आदेश | 22 | मानसिक पीड़ा का हर्जाना | Contempt of Court |
धारा 23
अंतरिम और एकपक्षीय आदेश (Interim and Ex-parte Orders) यदि मजिस्ट्रेट को प्रथमदृष्ट्या (Prima Facie) यह समाधान हो जाए कि प्रत्यर्थी घरेलू हिंसा का कोई कार्य कर रहा है, किया है, या इसकी संभावना है — तो मजिस्ट्रेट प्रत्यर्थी के विरूद्ध एकपक्षीय (Ex-parte — बिना प्रत्यर्थी को सुने) आदेश कर सकता है (धारा 18, 19, 20, 21, 22 के तहत)। यह Emergency में तुरंत राहत के लिए है।
धारा 25
आदेशों की अवधि और उनमें परिवर्तन धारा 18 (संरक्षण आदेश) तब तक प्रभावी रहेगा जब तक व्यथित व्यक्ति द्वारा इस हेतु आवेदन वापसी न की जाए। यदि मजिस्ट्रेट को परिस्थितियों में बदलाव के कारण आदेश में परिवर्तन अपेक्षित लगे — तो वह समुचित आदेश पारित कर सकता है।
धारा 26
अन्य वादों और नागरिक कार्यवाहियों में राहत इस अधिनियम के अलावा भी व्यथित द्वारा — किसी सिविल न्यायालय, Family Court या किसी आपराधिक न्यायालय के समक्ष — धारा 18-22 के तहत राहत आदेश प्राप्त किए जा सकते हैं। PWDVA की proceedings अन्य कानूनों (IPC, Hindu Marriage Act, CrPC) के तहत proceedings के साथ साथ चल सकती हैं।
धारा 29
अपील (Appeal) मजिस्ट्रेट के किसी भी आदेश से व्यथित या प्रत्यर्थी — Session Court (सत्र न्यायालय) में अपील कर सकते हैं। अपील आदेश की तिथि से 30 दिनों के भीतर की जाएगी।
धारा 31
संरक्षण आदेश के भंग पर दंड (Penalty for Breach of Protection Order) यदि प्रत्यर्थी धारा 18 के संरक्षण आदेश का उल्लंघन करे: दंड — 1 वर्ष कारावास (Imprisonment) या ₹20,000 जुर्माना (Fine) या दोनों। प्रत्यर्थी के दोषसिद्ध होने पर मजिस्ट्रेट BNS की धारा 85 व दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 के तहत भी आरोप तय कर सकता है।
एक RAS अधिकारी जिले में DM/Collector या SDM के रूप में PWDVA के implementation में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
1. PWDVA 2005 — Act No. 43 of 2005 | Bill passed: 13 September 2005 | Effective: 26 October 2006 2. 5 अध्याय (Chapters) + 37 धाराएं (Sections) | भारत के 56वें वर्ष में अधिनियमित 3. उद्देश्य: परिवार के भीतर हर प्रकार की हिंसा से महिलाओं का संरक्षण 4. व्यथित व्यक्ति (Section 2-a): घरेलू नातेदारी में रहने वाली पीड़ित महिला 5. घरेलू नातेदारी (Section 2-f): विवाह, रक्त, गोद, परिवार — एक घर में रहने वाले 6. DIR (Domestic Incident Report) — Section 2(e): Protection Officer द्वारा तैयार official report 7. घरेलू हिंसा 4 प्रकार (Section 3): शारीरिक, लैंगिक, मौखिक/भावनात्मक, आर्थिक 8. Section 4: कोई भी व्यक्ति सद्भावना से शिकायत कर सकता है — कोई दायित्व नहीं 9. Section 8: Protection Officer — राज्य सरकार नियुक्त | प्रत्येक जिले में एक या अधिक 10. Section 9: Protection Officer के 6 प्रमुख कर्तव्य — DIR, सूचना, shelter, medical, legal aid 11. Section 10: Service Provider (NGO) — DIR, medical, legal, financial सहायता 12. Section 17: साझा गृहस्थी में निवास — automatic right — बेदखल नहीं किया जा सकता 13. 5 Relief Orders: संरक्षण (18) | निवास (19) | आर्थिक (20) | अभिरक्षा (21) | क्षतिपूर्ति (22) 14. Section 23: Ex-parte / Interim Order — Prima Facie case में तुरंत राहत 15. Section 29: Appeal — Session Court में | 30 दिन के भीतर 16. Section 31: Protection Order उल्लंघन पर दंड: 1 साल जेल + ₹20,000 जुर्माना 17. Section 33: Protection Officer कर्तव्य में विफल → 1 साल जेल + ₹20,000 जुर्माना 18. PWDVA offense: संज्ञेय (Cognizable) और अजमानतीय (Non-Bailable) 19. Live-in relationship भी covered — Delhi HC 2025 | Anumika Chandel v. Naresh Chandel (2006) 20. Rajasthan: Sakhi One Stop Centres, Garima Grih Shelter Homes — PWDVA implementation
Q1. घरेलू हिंसा से क्या अभिप्राय है? PWDVA 2005 के अंतर्गत घरेलू हिंसा के प्रकार बताइए। (5 अंक) Q2. संरक्षण अधिकारी (Protection Officer) की नियुक्ति कौन करता है और उसके प्रमुख कर्तव्य क्या हैं? (5 अंक) Q3. PWDVA 2005 की धारा 18 और 19 के अंतर्गत संरक्षण आदेश और निवास आदेश की विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q4. "PWDVA 2005 के अंतर्गत मजिस्ट्रेट 5 प्रकार के राहत आदेश पारित कर सकता है।" — इन आदेशों की संक्षिप्त विवेचना कीजिए। (10 अंक) Q5. "व्यथित व्यक्ति" (Aggrieved Person) और "प्रत्यर्थी" (Respondent) की परिभाषा PWDVA 2005 के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q6. घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) क्या है? इसे कौन तैयार करता है और इसका क्या उपयोग है? (5 अंक) Q7. PWDVA 2005 के अंतर्गत सेवा प्रदाताओं (Service Providers) की भूमिका और दायित्व बताइए। (5 अंक) Q8. PWDVA 2005 की धारा 17 के अंतर्गत साझा गृहस्थी में निवास के अधिकार की विवेचना कीजिए। (5 अंक) Q9. PWDVA 2005 के अंतर्गत एकपक्षीय (Ex-parte) आदेश (धारा 23) कब और कैसे दिया जा सकता है? उदाहरण सहित समझाइए। (10 अंक) Q10. "PWDVA 2005 महिलाओं के लिए एक व्यापक कानून है परंतु इसके क्रियान्वयन में अनेक चुनौतियां हैं।" — Rajasthan के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। (10 अंक)
| वर्ष | घटना / अधिनियम / मामला (Event / Act / Case) |
|---|---|
| 1961 | दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 — दहेज से पहली सुरक्षा | धारा 498A IPC बाद में जोड़ी |
| 1983 | IPC में धारा 498A जोड़ी गई — पति/ससुराल द्वारा क्रूरता पर दंड |
| 1997 | Vishaka Guidelines — कार्यस्थल उत्पीड़न के खिलाफ | PWDVA की पृष्ठभूमि |
| 2000 | National Commission for Women (NCW) ने PWDVA का मसौदा तैयार किया |
| 2005 | PWDVA — विधेयक पारित: 13 सितम्बर 2005 | Act No. 43 of 2005 | 56वें वर्ष |
| 2006 | PWDVA लागू: 26 अक्टूबर 2006 | Protection Officer नियुक्ति शुरू |
| 2006 | Anumika Chandel v. Naresh Chandel — Live-in relationship को DV Act में मान्यता |
| 2013 | Domestic Violence Act में amendments — Section 2 में changes, विस्तार |
| 2015 | Rajasthan में Sakhi One Stop Centres शुरू — PWDVA पीड़ितों के लिए |
| 2022 | NCRB 2022 — DV cases: हर 3 मिनट में एक घटना | Rajasthan: 12,000+ मामले/वर्ष |
| 2025 | Delhi High Court — Live-in relationship को "विवाह जैसा संबंध" माना — PWDVA लागू |