🗳️ अध्याय 11/12 — राजस्थान राज्यव्यवस्था

राजस्थान में राजनीतिक प्रक्रियाएं एवं नई चुनौतियां

Political Processes & New Challenges in Rajasthan | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में (Table of Contents)
  1. राजस्थान में दलीय व्यवस्था का ऐतिहासिक विकास (1952 से वर्तमान तक के 5 चरण)
  2. क्षेत्रीय दल, तीसरा मोर्चा एवं निर्दलीयों की भूमिका (RLP, BAP, BSP, स्वतंत्र पार्टी)
  3. मतदान व्यवहार के निर्धारक तत्व (Determinants of Voting Behaviour) — जाति, क्षेत्र, लिंग व कल्याणकारी नीतियां
  4. राजस्थान के प्रमुख सामाजिक व राजनीतिक आंदोलन (RTI, आरक्षण, किसान, पर्यावरण)
  5. राजस्थान की राजनीति में समकालीन प्रवृत्तियाँ एवं चुनौतियाँ (बाड़ेबंदी, पेपर लीक, ERCP)
  6. विधानसभा चुनावों का ऐतिहासिक सारणीबद्ध विश्लेषण (1952–2023)
  7. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण शब्दावली (Keyword Box)
🗳️ दलीय व्यवस्था का विकास

1राजस्थान में दलीय व्यवस्था का ऐतिहासिक विकास (Party System Evolution)

राजस्थान में दलीय राजनीति का स्वरूप राष्ट्रीय राजनीति के समानांतर किंतु अपनी विशिष्ट सामंती, क्षेत्रीय और सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रेरित होकर विकसित हुआ है। 1952 के प्रथम आम चुनाव से लेकर वर्तमान तक की दलीय व्यवस्था को पाँच प्रमुख चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

📜 दलीय प्रणाली के 5 ऐतिहासिक चरण:
🚩 क्षेत्रीय दल एवं तीसरा मोर्चा

2क्षेत्रीय दल, तीसरा मोर्चा एवं निर्दलीयों की भूमिका

राजस्थान में तमिलनाडु (DMK/AIADMK), ओडिशा (BJD) या उत्तर प्रदेश (सपा/बसपा) की तरह कोई स्थायी और शक्तिशाली क्षेत्रीय दल पूरे राज्य पर शासन नहीं कर सका, किंतु विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट दलों ने किंगमेकर या दबाव समूह की भूमिका निभाई है:

🏛️ ऐतिहासिक क्षेत्रीय एवं विपक्षी दल
  • राम राज्य परिषद (RRP) : स्वामी करपात्री जी द्वारा स्थापित, 1952 के प्रथम चुनाव में 24 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी (सामंती व जागीरदार हितों का प्रतिनिधित्व)।
  • स्वतंत्र पार्टी (1959–1974) : सी. राजगोपालाचारी व मीनू मसानी द्वारा स्थापित। राजस्थान में जयपुर की महारानी गायत्री देवी इसका प्रमुख चेहरा थीं। 1962 में 36 सीटें तथा 1967 में 48 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी।
  • कृषिकार लोक पार्टी (KLP) : 1952 में जाट व किसान नेताओं का प्रतिनिधित्व।
⚡ समकालीन क्षेत्रीय व उप-क्षेत्रीय दल
  • भारत आदिवासी पार्टी (BAP) : 2023 में भारतीय ट्राइबल पार्टी (BTP) से अलग होकर गठित। दक्षिणी राजस्थान (डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर ग्रामीण) में 'भील प्रदेश' की मांग और आदिवासी स्वायत्तता के मुद्दे पर तीव्र उभार। 2023 में 3 विधानसभा व 2024 में 1 लोकसभा सीट जीती।
  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) : 2018 में हनुमान बेनीवाल द्वारा स्थापित। नागौर, बाड़मेर, जोधपुर ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, जाट व युवा मतदाताओं के बीच प्रभाव। 2018 में 3 सीटें जीतीं।
  • बहुजन समाज पार्टी (BSP) : पूर्वी राजस्थान (अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली) में दलित-मुस्लिम समीकरण पर प्रभावी। 2008 व 2018 में 6-6 सीटें जीतकर कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया (यद्यपि दोनों बार इसके विधायक कांग्रेस में विलय कर गए)।
🎯 निर्दलीयों की 'किंगमेकर' भूमिका:

राजस्थान में बागी और कद्दावर स्थानीय नेताओं के कारण निर्दलीय (Independents) का वोट प्रतिशत हमेशा 10% से 16% के बीच रहता है। 2008 (14 निर्दलीय) और 2018 (13 निर्दलीय) के चुनावों में जब किसी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, तब निर्दलीय विधायकों ने ही सरकार गठन में निर्णायक 'किंगमेकर' की भूमिका निभाई।

📊 मतदान व्यवहार के निर्धारक तत्व

3राजस्थान में मतदान व्यवहार के प्रमुख निर्धारक तत्व (Determinants of Voting Behaviour)

मतदान व्यवहार (Voting Behaviour) से तात्पर्य उन कारकों से है जो मतदाताओं के मत निर्णय को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। RAS मुख्य परीक्षा में यह अत्यंत महत्वपूर्ण 10-अंक का प्रश्न बनता है:

🔍 प्रमुख निर्धारक कारक:
✊ सामाजिक व राजनीतिक आंदोलन

4राजस्थान के प्रमुख सामाजिक एवं जन आंदोलन (Social & Mass Movements)

राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था केवल चुनावों तक सीमित नहीं है; जन आंदोलनों ने कई ऐतिहासिक कानूनों और राष्ट्रीय नीतियों की नींव इसी धरती पर रखी है:

📜 1. सूचना के अधिकार का आंदोलन (RTI Movement) — विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक आंदोलन

नेतृत्व : अरुणा रॉय (Aruna Roy), निखिल डे, शंकर सिंह एवं मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS)।

🛡️ 2. आरक्षण आंदोलन (Reservation Agitations in Rajasthan)
🌾 3. किसान एवं नहरी जल आंदोलन
🌿 4. पर्यावरण एवं अरावली संरक्षण आंदोलन
⚠️ समकालीन प्रवृत्तियाँ व चुनौतियाँ

5राजस्थान की राजनीति में समकालीन प्रवृत्तियाँ एवं नई चुनौतियाँ

📌 प्रमुख समकालीन राजनीतिक विमर्श एवं चुनौतियाँ:
📊 चुनावी इतिहास सारणी

6राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम (1998 से 2023 तक का तुलनात्मक परिदृश्य)

विधानसभा / वर्षकुल सीटेंकांग्रेसभाजपाअन्य / निर्दलीयमुख्यमंत्री व सत्ता परिवर्तन
11वीं (1998)2001533314अशोक गहलोत (कांग्रेस की प्रचंड जीत)
12वीं (2003)2005612024वसुंधरा राजे (राजस्थान की प्रथम महिला मुख्यमंत्री)
13वीं (2008)200967826 (BSP-6)अशोक गहलोत (निर्दलीय व बसपा सहयोग से सरकार)
14वीं (2013)2002116316वसुंधरा राजे (भाजपा का सर्वकालिक ऐतिहासिक रिकॉर्ड)
15वीं (2018)2001007327 (RLP-3, BSP-6)अशोक गहलोत (बसपा विलय व निर्दलीय समर्थन)
16वीं (2023)199*6911515 (BAP-3, RLP-1, BSP-2)भजनलाल शर्मा (भाजपा की सत्ता वापसी)
*2023 में करणपुर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी के निधन के कारण मतदान 199 सीटों पर हुआ था।
🔑 त्वरित पुनरावलोकन शब्दावली (Key Revision Chips)
एकदलीय प्रभुत्व (1952–77) मोहनलाल सुखाड़िया (17 वर्ष) भैरोंसिंह शेखावत (1977 प्रथम गैर-कांग्रेसी) राम राज्य परिषद स्वतंत्र पार्टी (महारानी गायत्री देवी) चक्रीय प्रतिमान (1998–2023) भारत आदिवासी पार्टी (BAP) राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) अरुणा रॉय & MKSS देवडूंगरी (राजसमंद) RTI कर्नल किरोड़ी बैंसला (MBC 5%) मेवाड़-वागड़ समीकरण PKC-ERCP समझौता 2024 भजनलाल शर्मा (16वीं विस)
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