🏘️ अध्याय 10/12 — राजस्थान राज्यव्यवस्था

पंचायती राज एवं नगरीय स्वशासन

Panchayati Raj & Urban Local Self-Government | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. स्थानीय स्वशासन — परिचय, प्राचीन एवं ब्रिटिश काल का इतिहास
  2. स्वतंत्रता के पश्चात — सामुदायिक कार्यक्रम, असफलता एवं सुधार
  3. पंचायती राज — 5 प्रमुख राष्ट्रीय समितियाँ (तुलनात्मक विश्लेषण)
  4. राजस्थान राज्य स्तरीय पंचायती राज समितियाँ
  5. 73वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243 से 243(O) — विस्तृत विवरण
  6. अनिवार्य (Compulsory) vs स्वैच्छिक (Voluntary) प्रावधान
  7. ग्राम सभा एवं वार्ड सभा — गठन, कार्य, कोरम, बैठकें
  8. राजस्थान त्रिस्तरीय पंचायती राज — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण
  9. PESA अधिनियम 1996 — अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार
  10. 11वीं अनुसूची — पंचायती राज के 29 विषय | महत्वपूर्ण संस्थाएँ
  11. नगरीय स्वशासन — परिचय, इतिहास एवं संवैधानिक दर्जा
  12. 74वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)
  13. त्रिस्तरीय नगरीय ढाँचा — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण
  14. 12वीं अनुसूची — नगर पालिकाओं के 18 विषय | Rajasthan नगरीय तथ्य
  15. छावनी बोर्ड | नगर सुधार न्यास | विकास प्राधिकरण | पोर्ट ट्रस्ट
  16. राइट टू रिकॉल (Right to Recall) | अविश्वास प्रस्ताव
  17. जिला आयोजना समिति (243ZD) | महानगर योजना समिति (243ZE)
  18. 73वाँ vs 74वाँ संविधान संशोधन — तुलनात्मक विश्लेषण
  19. 97वाँ संविधान संशोधन 2011 — सहकारी समितियाँ (Art. 243ZH–243ZT)
📌 पंचायती राज (Panchayati Raj)

1स्थानीय स्वशासन — परिचय, प्राचीन एवं ब्रिटिश काल का इतिहास

स्थानीय स्वशासन का अर्थ है — स्थानीय मुद्दों पर, स्थानीय जनता द्वारा, स्थानीय चुनाव के माध्यम से, स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा, स्थानीय संसाधनों से चलाया जाने वाला शासन। भारत में इसका अस्तित्व प्राचीनकाल से है। गाँधीजी के "ग्राम स्वराज्य" की अवधारणा इसी की परिणति है।

◈ प्राचीन काल में स्थानीय शासन

कालराजनीतिक इकाईप्रमुखविशेषता
वैदिककालसभा, समिति, विद्धग्रामणी (ग्राम प्रमुख)अथर्ववेद में ग्रामणी शब्द; सभा व समिति केन्द्रीय व स्थानीय दोनों स्तर पर कार्यरत
बौद्धकालग्रामग्रामयोजकबौद्ध ग्रन्थों में उल्लेख
मौर्यकालग्रामसभाग्रामिककौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित; ग्राम स्तर पर स्वायत्त शासन
चोलकालऊर (Ur)वर्तमान पंचायतसर्वप्रथम संगठित ग्राम पंचायत व्यवस्था। चोल साम्राज्य में सर्वाधिक विकसित।
मुगलकालग्राममुकद्दम / चौधरीनगर का प्रमुख — कोतवाल। प्रशासन की सबसे छोटी इकाई "ग्राम"।

◈ ब्रिटिश काल — स्थानीय शासन का औपचारिक विकास

वर्षघटना / अधिनियममहत्व
1687-88भारत में पहले नगर निगम की स्थापना — मद्रास30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स II।
1864राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबूब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन का प्रारम्भ।
1870लॉर्ड मेयो का विकेन्द्रीकरण प्रस्ताववित्तीय विकेन्द्रीकरण हेतु स्थानीय स्वशासन को प्रोत्साहन।
1882लॉर्ड रिपन का प्रस्तावस्थानीय स्वशासन का जनक (Father of Local Self Govt.)। जिला बोर्ड, ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत का गठन। इनका प्रस्ताव — स्थानीय शासन का मैग्नाकार्टा।
1907हॉब हाउस रॉयल कमीशनसत्ता के विकेन्द्रीकरण के अध्ययन हेतु। रिपोर्ट 1909 में।
1919मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियमस्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषयों में शामिल।
1928राजस्थान की बीकानेर रियासतबीकानेर — ग्राम पंचायत अधिनियम बनाने वाली प्रथम रियासत। बाद में जयपुर (1938), सिरोही (1943), भरतपुर (1944), करौली (1949)।
1935भारत सरकार अधिनियमस्थानीय स्वशासन को प्रान्तीय (राज्य) सूची में रखा।
📖 परिभाषा:

स्थानीय स्वशासन (Local Self Government) — नगर या गाँव की जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। वर्तमान में "पंचायती राज" और "नगरीय स्वशासन" — दोनों राज्य सूची के विषय हैं (संविधान की 7वीं अनुसूची, प्रविष्टि 5)।

🧠 याद करने की ट्रिक:

ग्राम स्वराज — महात्मा गाँधी की पुस्तक "My Picture of Free India" में इस अवधारणा का उल्लेख। स्थानीय स्वशासन का जनक — लॉर्ड रिपन (1882)। भारत में स्थानीय शासन का इतिहास — 1688 से माना जाता है (मद्रास नगर निगम)।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
स्थानीय स्वशासनलॉर्ड रिपनमैग्नाकार्टामद्रास नगर निगम 1688चोल साम्राज्य (ऊर)मुकद्दमबीकानेर 1928राज्य सूची

2स्वतंत्रता के पश्चात — सामुदायिक कार्यक्रम, असफलता एवं सुधार

स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान ने नीति-निर्देशक तत्वों में ग्राम पंचायत की व्यवस्था की, लेकिन वास्तविक विकेन्द्रीकरण के लिए कई कार्यक्रम और समितियाँ आवश्यक थीं।

◈ सामुदायिक विकास कार्यक्रम एवं उनकी असफलता

कार्यक्रमप्रारम्भउद्देश्यअसफलता का कारण
सामुदायिक विकास कार्यक्रम (CDP)2 अक्टूबर 1952 (Ford Foundation के सहयोग से)ग्रामीण विकास — कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य आदिनौकरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप + जनसहभागिता की कमी
राष्ट्रीय प्रसार सेवा कार्यक्रम (NES)2 अक्टूबर 1953ग्रामीण विकास को जनआन्दोलन बनानाजन-जागरूकता की कमी + संसाधनों की अपर्याप्तता

◈ पंचायती राज का उद्घाटन — 2 अक्टूबर 1959

⭐ महत्वपूर्ण:

पंचायती राज का स्वर्ण जयंती समारोह — 2 अक्टूबर 2009, नागौर में। अध्यक्षता — सोनिया गाँधी। घोषणा — जयपुर में पंचायती राज संस्थान खोला जाएगा। 1959 में राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद अधिनियम 1959 बनाया गया।

◈ 1965 के बाद पंचायती राज का पतन — कारण

क्र.पतन का कारण
1धन की कमी — पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव
2राजनीतिक चेतना की कमी — जनता में जागरूकता नहीं
3आन्तरिक मतभेद — जाति, वर्ग, गुट का प्रभाव
4नियमित चुनाव प्रणाली का अभाव — अनिश्चितता
5अधिकारों का विकेन्द्रीकरण नाम मात्र का — शक्तियाँ केन्द्र में ही
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
Art. 40 (DPSP)CDP 1952NES 1953नागौर-बगदरी 1959राजस्थान प्रथम राज्यमोहनलाल सुखाड़ियास्वर्ण जयंती 2009पतन के कारण

3पंचायती राज — 5 प्रमुख राष्ट्रीय समितियाँ (तुलनात्मक विश्लेषण)

पंचायती राज व्यवस्था के मूल्यांकन, सुधार एवं उसे संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर पर समितियाँ गठित की गईं। इन 5 प्रमुख समितियों की सिफारिशें RAS/IAS परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं।

समिति / अध्यक्षसरकार / वर्षप्रस्तावित ढाँचासर्वाधिक शक्तिशालीमुख्य सिफारिशें
बलवंतराय मेहता समितिनेहरू सरकार (जनवरी 1957; रिपोर्ट नवम्बर 1957)त्रिस्तरीय — जिला परिषद + पंचायत समिति + ग्राम पंचायतमध्य/खण्ड स्तर — पंचायत समितिलोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण। जिला परिषद अध्यक्ष = कलेक्टर। जनसंख्या: जिला 50 हजार, पंचायत समिति 5 हजार, ग्राम पंचायत 1 हजार।
अशोक मेहता समितिमोरारजी देसाई (सितम्बर 1977; रिपोर्ट 1978)द्विस्तरीय — जिला परिषद + मण्डल पंचायत (15-20 हजार जनसंख्या)जिला परिषदग्राम पंचायत समाप्त करने की सिफारिश। संवैधानिक दर्जा। दलगत चुनाव। कार्यकाल 4 वर्ष। 1959-1969 को "पंचायती राज का उत्थान काल" कहा।
G.V.K. राव समितिराजीव गाँधी / योजना आयोग (1985)चतुर्स्तरीय — राज्य+जिला+खण्ड +ग्राममध्य/खण्ड स्तरपंचायती राज संस्थाओं को "बिना जड़ की घास" कहा। जिला विकास आयुक्त। SC/ST/OBC/महिलाओं को आरक्षण। 5 वर्ष कार्यकाल। कार्ड समिति भी कहते हैं।
L.M. सिंघवी समितिराजीव गाँधी / ग्रामीण विकास मंत्रालय (1986)त्रिस्तरीयग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति। संवैधानिक दर्जा। राज्य वित्त आयोग। न्याय पंचायत। गैर-दलीय चुनाव। पंचायती राज पुनरुद्धार समिति भी कहते हैं।
P.K. थंगन समितिराजीव गाँधी / योजना आयोग (1988; रिपोर्ट 1989)त्रिस्तरीयजिला परिषदपंचायती राज को संघ सूची का विषय बनाने की सिफारिश। ग्राम पंचायत को सीमित न्यायिक अधिकार। कार्यकाल 5 वर्ष। संवैधानिक दर्जा।

◈ समितियों के विशिष्ट तथ्य — Exam Focus

◈ विभिन्न राज्यों में पंचायती राज का ढाँचा

पंचायती राज ढाँचाराज्य / विशेष
एकस्तरीयकेरल, त्रिपुरा, मणिपुर, सिक्किम
द्विस्तरीयअसम, ओडिशा, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा
त्रिस्तरीयउत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु
चतुर्स्तरीय (एकमात्र)पश्चिम बंगाल — ग्राम पंचायत, अंचल पंचायत, आंचलिक परिषद, जिला परिषद

◈ खण्ड (मध्य) स्तर के अलग-अलग राज्यों में नाम

राज्यखण्ड/मध्य स्तर का नामराज्यखण्ड/मध्य स्तर का नाम
राजस्थानपंचायत समितिउत्तरप्रदेशक्षेत्र पंचायत
मध्यप्रदेशजनपद पंचायततमिलनाडुपंचायत संघ परिषद (Union Council)
गुजराततालुका पंचायतकर्नाटकमण्डल पंचायत
आन्ध्रप्रदेशमण्डल प्रजा परिषदमहाराष्ट्रपंचायत समिति
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
बलवंतराय मेहता 1957अशोक मेहता 1977GVK राव 1985LM सिंघवी 1986PK थंगन 1988त्रिस्तरीयद्विस्तरीयबिना जड़ की घासप्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्तिलोकपाल

4राजस्थान राज्य स्तरीय पंचायती राज समितियाँ

राजस्थान सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में सुधार हेतु समय-समय पर राज्य स्तरीय समितियाँ गठित कीं। इनकी सिफारिशों ने राजस्थान के पंचायती राज कानूनों को आकार दिया।

समिति / अध्यक्षवर्षउद्देश्य एवं प्रमुख सिफारिश
सादिक अली समिति1964पंचायती राज व्यवस्था में सुधार। प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव वृहत्तर निर्वाचक मण्डल से (जिसमें ग्राम पंचायत के अध्यक्ष व सभी सदस्य शामिल हों)।
हरिश्चन्द्र माथुर समिति1963पंचायती राज प्रशासन सुधार।
गिरधारीलाल व्यास समिति1973ग्रामसेवक/पदेन सचिव/ग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.) का पद सृजित करने की सिफारिश। पंचायती राज संस्थाओं को पर्याप्त वित्तीय संसाधन देने पर बल।
हरलालसिंह खर्रा समिति1988पंचायती राज व्यवस्था समीक्षा।
अरुण कुमार समिति199673वें संशोधन के बाद पंचायती राज सुधार।
शिवचरण माथुर समिति1999-2000पंचायती राज प्रशासन व वित्त समीक्षा।
कटारिया समिति (गुलाबचंद कटारिया)2011सभी 29 विषय पंचायती राज संस्थाओं को सौंपने की सिफारिश (वर्तमान में 21 सौंपे गए)।

◈ अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समितियाँ

समितिवर्षविषय
के. संथानम समिति1963पंचायती राज के वित्त पर अध्ययन। राष्ट्रीय विकास परिषद को "सुपर कैबिनेट" कहा। केन्द्रीय सतर्कता आयोग के गठन की सिफारिश।
जी. रामचन्द्रन समिति1966पंचायती राज प्रशिक्षण केन्द्रों पर।
दया चौबे समिति1976सामुदायिक विकास एवं पंचायती राज पर।
दांतेवाला समिति1978पंचायती राज समीक्षा।
हनुमंतराव समिति1984पंचायती राज प्रशासन।
वी.एन. गॉडगिल समिति1988पंचायती राज सुधार।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
सादिक अली 1964गिरधारीलाल व्यास 1973 (VDO)कटारिया 2011 (29 विषय)के. संथानम 1963शिवचरण माथुर 1999

573वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243 से 243(O) — विस्तृत विवरण

L.M. सिंघवी समिति की सिफारिश पर प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हाराव की सरकार ने 73वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया। यह भारतीय लोकतंत्र में "मूक क्रांति (Silent Revolution)" के समान था।

◈ 73वें संशोधन की विधायी प्रक्रिया

तिथिविधायी प्रक्रिया
22 दिसम्बर 199273वां संविधान संशोधन विधेयक — लोकसभा से पारित
23 दिसम्बर 1992राज्यसभा से पारित
20 अप्रैल 1993राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा द्वारा मंजूरी
24 अप्रैल 1993लागू — 24 अप्रैल = राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day)
23 अप्रैल 1994राजस्थान में नया पंचायती राज अधिनियम 1994 लागू
जून 1994राज्य निर्वाचन आयोग का गठन (कार्य प्रारम्भ जुलाई 1994 से)
1995राजस्थान में 73वें संशोधन के बाद सर्वप्रथम पंचायती राज चुनाव
30 दिसम्बर 1996राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 लागू
⭐ महत्वपूर्ण:

73वें संशोधन के बाद नया पंचायती राज अधिनियम सर्वप्रथम लागू करने वाला राज्य — कर्नाटक (10 मई 1993)। 73वें संशोधन के बाद सर्वप्रथम पंचायती राज चुनाव कराने वाला राज्य — मध्यप्रदेश (मई-जून 1994)। राजीव गाँधी सरकार ने 64वाँ (ग्रामीण) और 65वाँ (नगरीय) संशोधन विधेयक 1989 में लाया लेकिन राज्यसभा से पारित नहीं हुआ।

◈ 73वाँ संशोधन — भाग-9, अनुच्छेद 243 से 243(O) — 16 अनुच्छेद

अनुच्छेदEnglishविषयप्रमुख प्रावधान
243परिभाषाएँग्राम, ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत क्षेत्र, मध्यवर्ती स्तर, जिला की परिभाषाएँ।
243 कAग्राम सभाग्राम सभा के कार्यों एवं शक्तियों का निर्धारण राज्य विधानमण्डल करेगा।
243 खBपंचायतों का गठनप्रत्येक राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत। 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य में द्विस्तरीय।
243 गCसंरचनासभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनाव। सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष। प्रधान व जिला प्रमुख अप्रत्यक्ष।
243 घDस्थानों का आरक्षणSC/ST — जनसंख्या के अनुपात में। महिलाएँ — 33% (संवैधानिक)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
243 ङEअवधि/कार्यकालप्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव।
243 चFअयोग्यताएँन्यूनतम आयु 21 वर्ष। अन्य योग्यताएँ राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
243 छGशक्तियाँ एवं उत्तरदायित्व11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर कार्य। सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु योजनाएँ।
243 जHकर एवं निधियाँराज्य विधानमण्डल पंचायतों को कर, फीस, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा।
243 झIराज्य वित्त आयोगसंवैधानिक निकाय। 73वें संशोधन के 1 वर्ष के भीतर गठन। फिर प्रत्येक 5 वर्ष पर। 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य।
243 ञJलेखाओं की संपरीक्षाराज्य विधानमण्डल पंचायतों के सामाजिक अंकेक्षण का प्रावधान करेगी।
243 टKराज्य निर्वाचन आयोगसंवैधानिक निकाय। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त। HC न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है।
243 ठLUT पर लागू होनाइस भाग के उपबंध संघ राज्य क्षेत्रों में भी लागू होंगे।
243 डMलागू न होनाकुछ क्षेत्रों में लागू नहीं — नागालैण्ड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर के पर्वतीय क्षेत्र, दार्जिलिंग, 5वीं-6वीं अनुसूची क्षेत्र।
243 ढNविद्यमान विधियाँ73वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक राज्य विधानमण्डल निरसित न करे।
243 णOन्यायालय का हस्तक्षेप वर्जितनिर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या स्थान आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाएगी।

⚠️ 73वाँ संशोधन लागू नहीं होता: यह अधिनियम निम्न क्षेत्रों में लागू नहीं होता — मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मणिपुर के कुछ पर्वतीय क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग, 5वीं व 6वीं अनुसूची में वर्णित राज्य।

⭐ राजस्थान वित्त आयोग:

प्रथम वित्त आयोग गठन — 24 अप्रैल 1994। कार्य प्रारम्भ — 1 अप्रैल 1995 से 31 मार्च 2000। प्रथम अध्यक्ष — कृष्ण कुमार गोयल। 5वें राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष — ज्योति किरण।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
73वाँ संशोधन24 April 199324 April = राष्ट्रीय PR दिवसभाग-9Art. 243-243O16 अनुच्छेद11वीं अनुसूचीSFCSECशंकरदयाल शर्मा

6अनिवार्य (Compulsory) vs स्वैच्छिक (Voluntary) प्रावधान

73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज के कुछ प्रावधान अनिवार्य (बाध्यकारी) रखे गए जो सभी राज्यों पर लागू होते हैं, जबकि कुछ स्वैच्छिक (वैकल्पिक) रखे गए जिन्हें राज्य अपनी इच्छानुसार लागू कर सकते हैं।

✅ अनिवार्य प्रावधान (Compulsory)
  • ग्राम सभा का गठन (Art. 243A)
  • ग्राम, मध्य एवं जिला स्तर पर पंचायतों की स्थापना
  • चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु — 21 वर्ष
  • SC/ST के लिए जनसंख्या अनुपात में आरक्षण
  • महिलाओं के लिए न्यूनतम 33% आरक्षण
  • तीनों स्तरों पर सभी सीटों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव
  • राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) की स्थापना
  • राज्य वित्त आयोग (SFC) की स्थापना
  • कार्यकाल 5 वर्ष; समाप्ति के 6 माह के भीतर चुनाव
  • मध्य और जिला स्तर के प्रमुखों के लिए अप्रत्यक्ष चुनाव
🔵 स्वैच्छिक प्रावधान (Voluntary)
  • पंचायतों को वित्तीय अधिकार (कर, शुल्क, फीस)
  • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण
  • विधानसभा/संसद सदस्यों को पंचायत में प्रतिनिधित्व
  • पंचायतों को स्थानीय सरकार के रूप में स्थापित करना
  • सामाजिक न्याय व आर्थिक विकास हेतु योजना शक्तियाँ
  • पंचायतों को कार्यों एवं शक्तियों का हस्तांतरण
  • ग्राम सभा को विशेष शक्तियाँ देना
  • 11वीं अनुसूची के विषयों का हस्तांतरण
⭐ आरक्षण — महत्वपूर्ण तथ्य:

73वें संशोधन — महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (संवैधानिक)। 2009 में राजस्थान सहित कई राज्यों ने 50% महिला आरक्षण की व्यवस्था की। 50% आरक्षण लागू करने वाला प्रथम राज्य — मध्यप्रदेश। OBC को आरक्षण — स्वैच्छिक (राज्य विधानमण्डल तय करेगा)। SC/ST का आरक्षण — Art. 334 में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगा।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनिवार्यस्वैच्छिक33% महिला आरक्षण50% राजस्थान 2009OBC — स्वैच्छिकSECSFC21 वर्ष
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

7ग्राम सभा एवं वार्ड सभा — गठन, कार्य, कोरम, बैठकें

ग्राम सभा पंचायती राज की आत्मा है। यह लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की सबसे बुनियादी इकाई है। L.M. सिंघवी ने इसे "प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति" कहा था।

◈ ग्राम सभा (Art. 243, 243A)

विषयग्राम सभा का नियम
वार्षिक बैठकेंवर्ष में 4 बैठकें — 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर। परन्तु कम से कम 2 बैठकें अनिवार्य।
बैठक की सूचनाबैठक से 7 दिन पूर्व। आकस्मिक परिस्थितियों में 3 दिन पूर्व।
गणपूर्ति (Quorum/कोरम)कुल सदस्यों का 1/5 (20%)।
कोरम पूर्ण न हो तोबैठक स्थगित (30 दिन के लिए)। स्थगन के बाद पुनः बुलाने पर कोरम की आवश्यकता नहीं, लेकिन नए विषयों पर चर्चा नहीं।
कोरम की जिम्मेदारीसरपंच व वार्ड पंच। लगातार 3 बैठकों में कोरम पूर्ण न हो तो नोटिस, 2 अवसर और दिए जाते हैं।
निर्णयसर्वसम्मति व मतदान से। बहुमत — उपस्थित व मत देने वालों का।
कार्यवाही का लेखाग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.) रजिस्टर में लिखेगा; सरपंच हस्ताक्षर करेगा।
विशेष बैठकग्राम सभा के कुल सदस्यों में से 5% या 25 सदस्य (जो भी अधिक) द्वारा लिखित सूचना।
संयुक्त बैठकसीमा विवाद/चारागाह विवाद होने पर। प्रत्येक ग्राम सभा से 5% या 10 सदस्य (जो भी कम) उपस्थिति अनिवार्य।
वार्षिक बैठकपंचायत मुख्यालय पर। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के 3 माह पहले।

◈ वार्ड सभा (Ward Sabha)

◈ ग्राम सभा vs वार्ड सभा — तुलना

पहलूग्राम सभावार्ड सभा
इकाईग्राम पंचायत स्तर परग्राम पंचायत की सबसे छोटी इकाई
सदस्यग्राम के सभी पंजीकृत वयस्क मतदातावार्ड के पंजीकृत वयस्क मतदाता
अध्यक्षसरपंचवार्ड पंच
बैठकेंवर्ष में 4 (न्यूनतम 2)वर्ष में 2 (न्यूनतम)
कोरमकुल सदस्यों का 1/5कुल सदस्यों का 1/10
प्रकृतिस्थायी संस्था (भंग नहीं)
संवैधानिक उल्लेखArt. 243, 243Aराजस्थान PR अधिनियम 1994 की धारा 3
कार्यवाहीVDO रजिस्टर में; सरपंच हस्ताक्षर
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
ग्राम सभावार्ड सभाArt. 243Aकोरम 1/5बैठकें 4स्थायी संस्थाV.D.O.विशेष बैठक 5% या 25प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति

8राजस्थान त्रिस्तरीय पंचायती राज — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण

राजस्थान में पंचायती राज का त्रिस्तरीय ढाँचा है — ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), पंचायत समिति (खण्ड/मध्य स्तर) और जिला परिषद (जिला/शीर्ष स्तर)। यह तालिका RAS Pre और Mains दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

पहलू / विषयग्राम पंचायत (ग्राम स्तर)पंचायत समिति (खण्ड स्तर)जिला परिषद (जिला स्तर)
राजनैतिक प्रमुखसरपंचप्रधानजिला प्रमुख
उपप्रमुखउपसरपंचउपप्रधानउपजिला प्रमुख
प्रशासनिक प्रमुखग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.)खण्ड विकास अधिकारी (B.D.O.)मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.)
न्यूनतम आयु21 वर्ष21 वर्ष21 वर्ष
सदस्यों का चुनाववार्ड पंच — प्रत्यक्ष मतदान द्वारासदस्य — प्रत्यक्ष मतदान द्वारासदस्य — जनता द्वारा प्रत्यक्ष
अध्यक्ष का चुनावसरपंच — प्रत्यक्ष; उपसरपंच — निर्वाचित पंचों द्वारा अप्रत्यक्षप्रधान व उपप्रधान — निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्षजिला प्रमुख व उपजिला प्रमुख — निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष
सदस्यों की शपथपीठासीन अधिकारी द्वारापीठासीन अधिकारी द्वारापीठासीन अधिकारी (जिला कलेक्टर) द्वारा
अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की शपथसरपंच व उपसरपंच — पीठासीन अधिकारीप्रधान व उपप्रधान — S.D.M. द्वाराजिला प्रमुख व उपजिला प्रमुख — जिला कलेक्टर द्वारा
सदस्य/उपाध्यक्ष का त्यागपत्रवार्ड पंच+उपसरपंच+सरपंच — B.D.O. कोपंचायत समिति सदस्य+उपप्रधान — प्रधान कोजिला परिषद सदस्य+उपजिला प्रमुख — जिला प्रमुख को
अध्यक्ष का त्यागपत्रसरपंच — B.D.O. कोप्रधान — जिला प्रमुख कोजिला प्रमुख — संभागीय आयुक्त को
बैठकें15 दिन में कम से कम 11 माह में कम से कम 13 माह में कम से कम 1
न्यूनतम सदस्य9 (3 हजार जनसंख्या तक); प्रति 1000 पर 2 अतिरिक्त15 (1 लाख तक); 1 लाख से अधिक पर प्रति 15 हजार 2 अतिरिक्त17 (4 लाख तक); 4 लाख से अधिक पर प्रति 1 लाख 2 अतिरिक्त
पदेन सदस्यV.D.O. + संबंधित पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्यB.D.O. + क्षेत्र के विधायक, सांसद, जिला परिषद सदस्य + सभी सरपंच + विधायक द्वारा मनोनीत 1 व्यक्तिC.E.O. + समस्त सांसद (LS+RS), समस्त विधायक (LA+LC) + समस्त प्रधान + सांसद द्वारा मनोनीत 1 व्यक्ति + कलेक्टर
अविश्वास प्रस्ताव2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से (2007 संशोधन के बाद)2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से
आय के साधनराज्य अनुदान + कर + शुल्क + शास्तियाँ (बाजार कर, पथ कर, भूमि कर आदि)राज्य अनुदान + विभिन्न कर (मकान, भूमि, मेला, शिक्षा उपकर)राज्य अनुदान + पंचायत समितियों का अंशदान + जन-सहयोग
ग्राम पंचायत निधिसरपंच + V.D.O. के संयुक्त हस्ताक्षरCEO के हस्ताक्षर से (जिला परिषद)

◈ महत्वपूर्ण प्रावधान — पंचायती राज

⭐ राजस्थान विशेष तथ्य:

प्रथम महिला जिला प्रमुख — नगेन्द्र बाला (कोटा)। प्रथम महिला सरपंच — छगन बहन गोलछा (खींचनगाँव, फलौदी, जोधपुर)। राजस्थान में पंचायती राज के प्रथम चुनाव — सितम्बर-अक्टूबर 1959। 1959 से 2020 तक कुल 11 बार चुनाव। (1959, 1965, 1978, 1981, 1988, 1995, 2000, 2005, 2010, 2015, 2020)।

📖 VDO का नाम परिवर्तन:

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 2021 संशोधन द्वारा धारा-89 में "ग्राम सेवक" के स्थान पर "ग्राम विकास अधिकारी (VDO)" नाम प्रतिस्थापित किया गया।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
सरपंचप्रधानजिला प्रमुखVDOBDOCEOअविश्वास प्रस्ताव 3/4त्यागपत्रबैठकें 15/30/90 दिन11 चुनाव

9PESA अधिनियम 1996 — अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत विस्तार

PESA — Panchayats Extension to Scheduled Areas (पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम)। यह अधिनियम संविधान की 5वीं अनुसूची में वर्णित जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज के सिद्धान्तों को लागू करने हेतु बनाया गया।

📖 पृष्ठभूमि:

वर्ष 1995 में दलीपसिंह भूरिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर PESA अधिनियम 24 दिसम्बर 1996 को लागू किया गया। पेसा के क्रियान्वयन हेतु पंचायती राज विभाग नोडल एजेंसी है।

◈ PESA — 10 राज्य (5वीं अनुसूची)

क्र.राज्यक्र.राज्यक्र.राज्य
1हिमाचल प्रदेश2राजस्थान3गुजरात
4मध्यप्रदेश5महाराष्ट्र6आन्ध्रप्रदेश
7तेलंगाना8छत्तीसगढ़9ओडिशा
10झारखण्ड
⭐ राजस्थान में PESA:

राजस्थान में PESA अधिनियम 30 सितम्बर 1999 को लागू हुआ। PESA क्षेत्र में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (सम्पूर्ण जिले) तथा चित्तौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, सिरोही जिलों की कुछ तहसीलों को शामिल किया गया। इस एक्ट के तहत वर्ष में 4 ग्राम सभाएं होती हैं (3-3 माह के अंतराल पर)। इन जिलों में पंचायत के सभी स्तरों पर अध्यक्ष के पद ST के लिए आरक्षित।

◈ PESA — 13 प्रमुख प्रावधान

1. जनजातीय समाजों की ग्राम सभाओं को अत्यधिक शक्तिशाली बनाया गया — परम्पराओं एवं रीति-रिवाजों की सुरक्षा।

2. ग्राम सभा को सामाजिक एवं आर्थिक विकास की योजना एवं कार्यक्रम स्वीकृत करने का अधिकार।

3. भाग-9 के पंचायत प्रावधानों को जरूरी संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तारित करने का लक्ष्य।

4. राज्य विधानमण्डल — जिला स्तरीय प्रशासनिक प्रबंध में संविधान की 6वीं अनुसूची के प्रतिमानों का अनुगमन।

5. SC/ST/OBC आरक्षण — ST का आरक्षण कुल स्थानों में 50% से कम नहीं। सभी स्तरों पर अध्यक्षों के पद ST के लिए आरक्षित।

6. गौण खनिजों के लाइसेंस/खनन पट्टा देने के लिए ग्राम सभा/पंचायत की सिफारिश अनिवार्य।

7. नीलामी द्वारा गौण खनिजों के दोहन — ग्राम सभा/पंचायत की पूर्व सिफारिश अनिवार्य।

8. अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अध्यक्षता — ST सदस्य (1 वर्ष के लिए, आम सहमति से)। सहमति न बने तो — वरिष्ठतम महिला ST सदस्य।

9. लघु जल निकायों की योजना बनाना व प्रबंधन — उपयुक्त स्तर की पंचायत को सौंपा जाएगा।

10. जिन ST का प्रतिनिधित्व न हो — मध्यवर्ती व जिला स्तर पर मनोनीत (परन्तु 10% से अधिक नहीं)।

11. ग्राम सभा को विशेष शक्तियाँ : मादक पदार्थ नियंत्रण, गौण वन उत्पाद स्वामित्व, भूमि हस्तांतरण, बाजार प्रबंधन, धन उधार नियंत्रण।

12. उच्च स्तर की पंचायत, निम्न स्तर की पंचायत या ग्राम के अधिकारों का हनन नहीं करेगी।

13. असंगत प्रावधान — राष्ट्रपति की स्वीकृति के 1 वर्ष बाद लागू नहीं होंगे।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
PESA 199624 Dec 19965वीं अनुसूची10 राज्यदलीपसिंह भूरिया समितिराजस्थान 30 Sep 1999बांसवाड़ा-डूंगरपुर-प्रतापगढ़ST 50% आरक्षणगौण खनिजग्राम सभा

1011वीं अनुसूची — पंचायती राज के 29 विषय | महत्वपूर्ण संस्थाएँ

73वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा 11वीं अनुसूची जोड़ी गई। इसमें पंचायती राज के 29 विषयों का उल्लेख है जिनका संबंध अनुच्छेद 243 छ (G) से है। इनमें से कितने विषय पंचायतों को हस्तांतरित किए जाएँगे, यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।

क्र.11वीं अनुसूची — विषयक्र.11वीं अनुसूची — विषय
1कृषि (कृषि विस्तार सहित)16गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
2भूमि विकास, भूमि सुधार, चकबंदी, भूमि संरक्षण17शिक्षा (प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय)
3लघु सिंचाई, जल प्रबंध, जलविभाजक क्षेत्र18तकनीकी प्रशिक्षण व व्यावसायिक शिक्षा
4पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन19प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा
5मत्स्य उद्योग20पुस्तकालय
6सामाजिक वानिकी व फार्म वानिकी21सांस्कृतिक क्रियाकलाप
7लघु वन उपज22बाजार और मेले
8लघु उद्योग (खाद्य प्रसंस्करण सहित)23स्वास्थ्य व स्वच्छता (अस्पताल, PHC, औषधालय)
9खादी, ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग24परिवार कल्याण
10ग्रामीण आवासन25महिला एवं बाल विकास
11पेयजल26समाज कल्याण (विकलांग, मानसिक)
12ईंधन और चारा27दुर्बल वर्गों का कल्याण (SC/ST)
13सड़कें, पुल, पुलिया, जलमार्ग, अन्य संचार28सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
14ग्रामीण विद्युतीकरण (वितरण सहित)29सामुदायिक आस्तियों का अनुरक्षण
15अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत
⭐ राजस्थान में 29 में से 21 विषय हस्तांतरित:

प्रारम्भ में 16 विषय हस्तांतरित। 2 अक्टूबर 2010 को 5 और विषय हस्तांतरित किए गए : (1) कृषि (2) प्राथमिक शिक्षा (3) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (4) महिला एवं बाल विकास (5) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।

◈ पंचायती राज संबंधी महत्वपूर्ण संस्थाएँ व तथ्य

संस्था / तथ्यविवरण
इंदिरा गाँधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थानजयपुर में, 1984 में स्थापित। स्वायत्तशासी संस्था। जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देना।
ग्रामसेवक प्रशिक्षण केन्द्रमंडोर (जोधपुर) — 15 अगस्त 1960 से।
पंचायत प्रशिक्षण केन्द्रडूंगरपुर (3 फरवरी 1994 से) और अजमेर (18 मई 1996 से)।
हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थानजयपुर (जोधपुर से 1963 में स्थानान्तरित; 1983 में नाम परिवर्तन)।
ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय संस्थानमसूरी व हैदराबाद में।
DRDA (जिला ग्रामीण विकास अभिकरण)अध्यक्ष — जिला प्रमुख (30 जनवरी 1999)। 1 सितम्बर 2003 को DRDA का विलय जिला परिषद में; CEO के अधीन "ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ"।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभागवर्तमान नाम। पूर्व — "विशिष्ट योजना संगठन" (1971), "विशिष्ट योजनाएँ एवं एकीकृत ग्रामीण विकास विभाग" (1979), "ग्रामीण विकास विभाग" (1 अप्रैल 1999)।
ई-पंचायतमिशन मोड परियोजना। उद्देश्य — पंचायती राज संस्थाओं की आधुनिकता, पारदर्शिता व कार्यकुशलता।
राजस्थान विकास पत्रिकापंचायती राज विभाग द्वारा द्वैमासिक पत्रिका — 1983 से प्रकाशन।
मिलेनियम गाँवचुरू जिले की राजगढ़ तहसील का अमरपुरा गाँव — भारत का प्रथम मिलेनियम गाँव (संयुक्त राष्ट्र संघ की मिलेनियम प्रयोजना)।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
11वीं अनुसूची29 विषयराजस्थान 21 विषयArt. 243GDRDAई-पंचायतमिलेनियम गाँवइंदिरा गाँधी PR संस्थान जयपुर

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. स्थानीय स्वशासन के जनक — लॉर्ड रिपन (1882)। उनका प्रस्ताव — "स्थानीय शासन का मैग्नाकार्टा"। पंचायती राज — राज्य सूची का विषय। 2. पंचायती राज की शुरुआत — 2 अक्टूबर 1959, नागौर (बगदरी गाँव), नेहरू द्वारा। प्रथम राज्य — राजस्थान; CM — मोहनलाल सुखाड़िया। 3. बलवंतराय मेहता (1957) — त्रिस्तरीय, मध्य/खण्ड सर्वाधिक शक्तिशाली। लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के जनक। 4. अशोक मेहता (1978) — द्विस्तरीय। GVK राव (1985) — "बिना जड़ की घास"। LM सिंघवी (1986) — "ग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति"। 5. 73वाँ संशोधन — 22-23 Dec 1992 (पारित), 24 April 1993 (लागू)। 24 अप्रैल = राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस। 6. भाग-9, अनुच्छेद 243 से 243(O) — कुल 16 अनुच्छेद। 11वीं अनुसूची — 29 विषय। 7. अनिवार्य — ग्राम सभा, त्रिस्तरीय ढाँचा, 5 वर्ष कार्यकाल, SC/ST/महिला आरक्षण (33%), SEC, SFC। 8. ग्राम सभा — स्थायी संस्था। वर्ष में 4 बैठकें (न्यूनतम 2)। कोरम — 1/5। VDO कार्यवाही लिखेगा। 9. त्रिस्तरीय : ग्राम पंचायत (VDO), पंचायत समिति (BDO), जिला परिषद (CEO)। 10. अविश्वास प्रस्ताव — 2 वर्ष बाद। 1/3 हस्ताक्षर। 3/4 बहुमत से पारित (2007 संशोधन से)। 11. PESA अधिनियम — 24 December 1996। 5वीं अनुसूची के 10 राज्यों में। राजस्थान में 30 September 1999 से। 12. राजस्थान में 29 में से 21 विषय हस्तांतरित (16 + 5; अतिरिक्त 5 — 2 अक्टूबर 2010 को)। 13. राजस्थान में 50% महिला आरक्षण — 2009 से। प्रथम महिला जिला प्रमुख — नगेन्द्र बाला (कोटा)। 14. राज्य वित्त आयोग (SFC) — राज्यपाल द्वारा। 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य। प्रथम अध्यक्ष राजस्थान — कृष्ण कुमार गोयल। 15. पश्चिम बंगाल — चतुर्स्तरीय पंचायती राज (एकमात्र)। नागालैण्ड, मेघालय, मिजोरम में 73वाँ संशोधन लागू नहीं।

📌 नगरीय स्वशासन एवं सहकारिता

1नगरीय स्वशासन — परिचय, इतिहास एवं संवैधानिक दर्जा

नगरीय स्वशासन (Urban Local Self Government) का अर्थ है — नगर के लोगों द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। मेगस्थनीज ने सर्वप्रथम "इण्डिका" पुस्तक में मौर्यकालीन नगरीय प्रशासन का उल्लेख किया है। वर्तमान में नगरीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है।

◈ ऐतिहासिक विकास — Timeline

वर्षघटना / अधिनियममहत्व
1687–88भारत का प्रथम नगर निगम — मद्रास30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स-II।
1864राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबूब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन की शुरुआत।
1866अजमेर में नगरपालिकाराजस्थान में दूसरी नगरपालिका।
1867ब्यावर में नगरपालिकाराजस्थान की तीसरी नगरपालिका।
1869जयपुर में नगरपालिकाराजस्थान में नगरीय शासन का विस्तार।
1870लॉर्ड मेयो — वित्तीय विकेन्द्रीकरणस्थानीय स्वशासन हेतु वित्तीय विकेन्द्रीकरण।
1919मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियमनगरीय स्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषय।
1935भारत सरकार अधिनियमनगरीय स्वशासन — प्रान्तीय सूची में।
1951राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1951स्वतंत्र भारत में प्रथम अधिनियम।
1959राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 19591951 के स्थान पर।
1963राजस्थान में प्रथम नगर पालिका चुनावफिर: 1970, 1972, 1974, 1976, 1982, 1986, 1999-2000, 2004-05, 2009-10, 2014-15, 2021।
1989राजीव गाँधी का 65वाँ संशोधन विधेयकलोकसभा से पारित लेकिन राज्यसभा से नहीं — रद्द।
199374वाँ संविधान संशोधन लागू (1 जून)नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव।
9 अगस्त 1994राजस्थान में 74वाँ संशोधन लागूराजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1994 लागू।
2009राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009वर्तमान प्रभावी अधिनियम।
2011राइट टू रिकॉल कानून 20112009 अधिनियम में संशोधन।
📖 संवैधानिक दर्जा:

74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा — भाग-9क (नगर पालिकाएं), अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद) एवं 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़ी गई। भाग-9क का नाम "नगर पालिकाएं" दिया गया। यहाँ "नगर पालिकाएं" शब्द नगरीय संस्थाओं के त्रिस्तरीय ढाँचे का प्रतीक है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
नगरीय स्वशासनमेगस्थनीजमद्रास नगर निगम 1688माउण्ट आबू 186474वाँ संशोधन1 June 1993भाग-9कराज्य सूचीनरसिम्हाराव

274वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)

74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा संविधान में भाग-9क जोड़ा गया जिसमें नगर पालिकाओं से संबंधित 18 अनुच्छेद (243P से 243ZG) हैं। यह 73वें संशोधन का शहरी समकक्ष है।

अनुच्छेदhindiविषयप्रमुख प्रावधान
243 Pपरिभाषाएँवार्ड समिति, जिला, नगर पालिका, नगर पालिका क्षेत्र, महानगर क्षेत्र की परिभाषाएँ। महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या।
243 Qनगर पालिकाओं का गठनत्रिस्तरीय : नगर पंचायत (संक्रमणशील), नगर पालिका परिषद (लघु नगरीय), नगर निगम (वृहत नगरीय)। दर्जा राज्यपाल द्वारा अधिसूचना से। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं।
243 Rनगर पालिकाओं की संरचनापार्षद — प्रत्यक्ष चुनाव। पदेन सदस्य — MP, MLA, अनुभवी व्यक्ति। अध्यक्ष का चुनाव — राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
243 Sवार्ड समितियाँ3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में एक या अधिक वार्डों को मिलाकर वार्ड समिति।
243 Tस्थानों का आरक्षणSC/ST — जनसंख्या अनुपात में। महिला — 33% (सभी वर्गों में)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। अध्यक्षों के पद भी आरक्षित।
243 Uकार्यकालप्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव।
243 Vअयोग्यताएँन्यूनतम आयु 21 वर्ष। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 nomination। अन्य निरर्हताएँ — राज्य विधानमण्डल तय।
243 Wशक्तियाँ, प्राधिकार12वीं अनुसूची के 18 विषयों पर कार्य। आर्थिक-सामाजिक विकास हेतु योजनाएँ।
243 Xकर एवं निधियाँराज्य विधानमण्डल कर, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा। राज्य की संचित निधि से अनुदान।
243 Yराज्य वित्त आयोग243I (झ) के अधीन SFC का प्रावधान नगरीय निकायों के लिए भी।
243 Zलेखाओं की संपरीक्षाराज्य विधानमण्डल नगर पालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा का उपबंध करेगा।
243 ZAयकराज्य निर्वाचन आयोग243K के अधीन SEC का प्रावधान। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त।
243 ZBयखUT पर लागूनगर पालिकाओं संबंधी प्रावधान संघ राज्य क्षेत्रों में लागू।
243 ZCयगलागू न होना5वीं व 6वीं अनुसूची क्षेत्रों में लागू नहीं। दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद के कार्यों पर प्रभावी नहीं।
243 ZDयघजिला आयोजना समितिजिले में पंचायतों व नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण। अध्यक्ष — जिला प्रमुख।
243 ZEयङमहानगर योजना समितिमहानगर क्षेत्र की विकास योजना। 2/3 सदस्य निर्वाचित।
243 ZFयचविद्यमान विधियाँ74वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक निरसित न हों।
243 ZGयछन्यायालय का हस्तक्षेप वर्जितपरिसीमन/आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं।
⭐ नगर क्षेत्र (Urban Area) घोषणा के लिए 3 शर्तें:

(1) न्यूनतम जनसंख्या 5000। (2) कार्यशील पुरुषों का न्यूनतम 75% गैर-कृषि कार्यों में संलग्न। (3) जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। ये शर्तें पूरी होने पर राज्यपाल अधिसूचना द्वारा नगर क्षेत्र घोषित करते हैं।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
74वाँ संशोधनभाग-9कArt. 243P-243ZG18 अनुच्छेदवार्ड समिति 3 लाख+महानगर 10 लाख+33% महिला21 वर्षSECSFCDPCMPC
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

3त्रिस्तरीय नगरीय ढाँचा — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण

नगरीय स्थानीय शासन में तीन स्तर हैं — नगर पंचायत/नगर पालिका (लघु), नगर परिषद (मध्यम) और नगर निगम (वृहत)। इन्हें सामूहिक रूप से "नगर पालिकाएं" कहा जाता है।

पहलू / विषयनगर पालिका (Nagar Palika)नगर परिषद (Nagar Parishad)नगर निगम (Nagar Nigam)
जनसंख्या10 हजार से 1 लाख तक1 लाख से 5 लाख तक5 लाख से 1 करोड़ तक
जनसंख्या घनत्व200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
प्रति व्यक्ति मासिक आय10 रुपये200 रुपये500 रुपये
गैर-कृषि कार्यों में10% या अधिक25% या अधिक50% या अधिक
राजनैतिक अध्यक्षचैयरमेन / अध्यक्षसभापतिमहापौर / मेयर
अध्यक्ष का चुनावप्रत्यक्षप्रत्यक्षअप्रत्यक्ष (निर्वाचित पार्षदों द्वारा)
प्रशासनिक प्रमुखअधिशाषी अधिकारी (E.O.)मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.)आयुक्त (Commissioner)
न्यूनतम वार्ड131313
न्यूनतम आयु21 वर्ष21 वर्ष21 वर्ष
कार्यकाल5 वर्ष5 वर्ष5 वर्ष
वार्ड सदस्यपार्षद (प्रत्यक्ष)पार्षद (प्रत्यक्ष)पार्षद (प्रत्यक्ष)
श्रेणीचतुर्थ (25 हजार तक), तृतीय (25-49,999), द्वितीय (50-99,999)
राजस्थान में संख्या1963410
आरक्षणSC/ST जनसंख्या अनुपात + महिलाएँ 33%SC/ST + महिलाएँ 33%SC/ST + महिलाएँ 33%
पदेन सदस्य (मत नहीं)अनुभवी व्यक्ति + MP + MLAअनुभवी व्यक्ति + MP + MLAअनुभवी व्यक्ति + MP + MLA

◈ राजस्थान में 10 नगर निगम

क्र.नगर निगमक्र.नगर निगमक्र.नगर निगम
1जयपुर2जोधपुर (दक्षिण)3कोटा (उत्तर)
4अजमेर5बीकानेर6अलवर
7भरतपुर (7वाँ — 13 जून 2014)8जयपुर (हेरिटेज) — अक्टूबर 20199जोधपुर (उत्तर) — अक्टूबर 2019
10कोटा (दक्षिण) — अक्टूबर 2019
⭐ महत्वपूर्ण तथ्य:

नगर पालिका/परिषद/निगम का दर्जा — राज्यपाल अधिसूचना द्वारा। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं (Art. 243Q)। वार्ड समिति — 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में। नगर परिषद में अधिकतम 8 नामांकित सदस्य (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009)। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 नामांकन पत्र।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
नगर पालिका 196नगर परिषद 34नगर निगम 10महापौर अप्रत्यक्षपार्षद प्रत्यक्षEOCEOCommissionerभरतपुर 7वाँ 2014अक्टूबर 2019

412वीं अनुसूची — नगर पालिकाओं के 18 विषय | Rajasthan नगरीय तथ्य

74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगर पालिकाओं के 18 विषय हैं। इसका संबंध अनुच्छेद 243W(ब) से है। कितने विषय नगर पालिकाओं को हस्तांतरित किए जाएँगे — यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।

क्र.12वीं अनुसूची — विषयक्र.12वीं अनुसूची — विषय
1नगरीय योजना (नगर योजना सहित)10गंदी बस्ती सुधार एवं प्रोन्नयन
2भूमि उपयोग विनियमन और भवन निर्माण11नगरीय निर्धनता उन्मूलन
3आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजना12नगरीय सुविधाएँ (पार्क, उद्यान, खेल मैदान)
4सड़कें और पुल13सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सौंदर्यपरक आयाम
5घरेलू, औद्योगिक व वाणिज्यिक जल प्रदाय14शव गाड़ना, श्मशान, विद्युत शवदाहगृह
6लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई, कूड़ा प्रबंध15कांजी हाउस, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण
7अग्निशमन सेवाएँ16जन्म-मरण सांख्यिकी (पंजीकरण)
8नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण17सार्वजनिक सुविधाएँ (सड़क प्रकाश, पार्किंग, बस स्टॉप)
9दुर्बल वर्गों की रक्षा (विकलांग, मानसिक)18वधशालाओं एवं चर्मशोधनशालाओं का विनियमन

◈ भारत में नगरीय स्थानीय शासन के प्रकार

प्रकारविवरण
नगर निगम (Municipal Corporation)सबसे बड़े शहरों के लिए।
नगर परिषद (Municipal Council)मध्यम आकार के शहरों के लिए।
नगर पालिका (Municipality/Nagar Panchayat)छोटे व संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए।
छावनी बोर्ड (Cantonment Board)सैन्य क्षेत्रों के लिए — केन्द्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) के अधीन।
नगर सुधार न्यास (UIT)नगरों के सुनियोजित विकास के लिए।
नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority)विशेष नगरों के विकास के लिए।
पत्तन न्यास (Port Trust)बन्दरगाह वाले शहरों में — संसद द्वारा गठित।
अधिसूचित क्षेत्र समितिजहाँ कानून लागू नहीं लेकिन कुछ शहरी सुविधाएँ आवश्यक।
महानगरीय योजना समिति10 लाख+ जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्रों के लिए।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
12वीं अनुसूची18 विषयArt. 243Wनगर निगमनगर परिषदनगर पालिकाUITPort Trustमहानगरीय

5छावनी बोर्ड | नगर सुधार न्यास | विकास प्राधिकरण | पोर्ट ट्रस्ट

◈ छावनी बोर्ड (Cantonment Board)

पहलूविवरण
अधिनियमछावनी बोर्ड अधिनियम 1924 (2006 में संशोधन)।
नियंत्रणकेन्द्र सरकार का रक्षा मंत्रालय। (राज्य सरकार का नहीं)
अध्यक्षसेना का कमाण्डिंग ऑफिसर।
उपाध्यक्षजनता से निर्वाचित। कार्यकाल — 3 वर्ष।
सदस्यनिर्वाचित (जनता से) + मनोनीत (सैन्य छावनी से)।
भारत में संख्या62 छावनी बोर्ड।
राजस्थान में1 — नसीराबाद (अजमेर)।
विवादयदि पंचायत और छावनी बोर्ड के बीच विवाद हो — निर्णय राज्य सरकार करेगी (केन्द्र के अनुमोदन के अधीन)।

◈ नगर सुधार न्यास (Urban Improvement Trust — UIT)

◈ नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority)

प्राधिकरणस्थापना वर्षक्षेत्रविशेष
JDA — जयपुर विकास प्राधिकरण1982जयपुरराजस्थान का प्रथम विकास प्राधिकरण
JaDA — जोधपुर विकास प्राधिकरण2008जोधपुर
ADA — अजमेर विकास प्राधिकरण2013अजमेर
BDA — भिवाड़ी विकास प्राधिकरण2018भिवाड़ी (अलवर)औद्योगिक क्षेत्र

◈ पत्तन न्यास (Port Trust)

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
छावनी बोर्ड 192462 छावनी बोर्डनसीराबादरक्षा मंत्रालयUIT 15 (Raj.)JDA 1982JaDA 2008ADA 2013BDA 2018Port Trust

6राइट टू रिकॉल (Right to Recall) | अविश्वास प्रस्ताव

◈ राइट टू रिकॉल (Right to Recall)

राइट टू रिकॉल वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनमत संग्रह (Referendum) द्वारा कार्यकाल से पहले पद से हटाया जा सकता है।

विषयविवरण
सर्वप्रथम प्रयोग1903 — लॉस एंजिल्स (अमेरिका)
भारत में प्रथम प्रयोग राज्यमध्यप्रदेश — 2001
द्वितीय राज्यछत्तीसगढ़ — 2008
तृतीय राज्यराजस्थान — 2012
राजस्थान में कानूनRight to Recall कानून 2011 (2009 अधिनियम में संशोधन)
राजस्थान में प्रथम प्रयोगदिसम्बर 2012 — बारां जिले की मांगरोल नगर पालिका के अध्यक्ष अशोक जैन के विरुद्ध जनमत संग्रह।
किसे हटाया जा सकता हैमहापौर (Mayor), सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष।

◈ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) — नगरीय निकाय

⭐ Right to Recall vs अविश्वास प्रस्ताव:

अविश्वास प्रस्ताव — निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) लाते हैं। Right to Recall — जनता (मतदाता) द्वारा सीधे। राजस्थान में Right to Recall — महापौर, सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
राइट टू रिकॉलLos Angeles 1903MP 2001 प्रथमRajasthan 2012 तृतीयमांगरोल बारांअशोक जैनअविश्वास 3/42 वर्ष बाद

7जिला आयोजना समिति (243ZD) | महानगर योजना समिति (243ZE)

◈ जिला आयोजना समिति (District Planning Committee — DPC)

74वें संविधान संशोधन द्वारा भाग-9क, अनुच्छेद 243ZD में जिला आयोजना समिति का प्रावधान। इसका उद्देश्य जिले में पंचायतों और नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण कर सम्पूर्ण जिले की विकास योजना तैयार करना है।

पहलूDPC (जिला आयोजना समिति)MPC (महानगर योजना समिति)
अनुच्छेद243ZD (भाग-9क)243ZE (भाग-9क)
उद्देश्यजिले की एकीकृत विकास योजना तैयार करनामहानगर क्षेत्र की विकास योजना तैयार करना
क्षेत्रजिला स्तरमहानगर क्षेत्र (10 लाख+ जनसंख्या)
कुल सदस्य25 (संवैधानिक में निर्धारित नहीं)कम से कम 2/3 निर्वाचित
निर्वाचित सदस्य20 (4/5) — पंचायत व नगर निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा (ग्रामीण-शहरी जनसंख्या अनुपात में)2/3 — नगर पालिका निर्वाचित + पंचायत अध्यक्ष (जनसंख्या अनुपात में)
पदेन सदस्य3 — जिला कलेक्टर, CEO, अतिरिक्त CEOराज्य व केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व
मनोनीत सदस्य2 — राज्य सरकार द्वाराराज्य विधानमण्डल विधि बनाकर
अध्यक्षजिला प्रमुखराज्य विधानमण्डल विधि बनाकर
योजना भेजने की जिम्मेदारीअध्यक्ष (जिला प्रमुख) → राज्य सरकार कोअध्यक्ष → राज्य सरकार को
राजस्थान में प्रावधानधारा 121 — राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994
💡 DPC की विकास योजना में ध्यान रखने योग्य:

(1) पंचायतों और नगर पालिकाओं के सामान्य हित के विषय — स्थानिक योजना, जल व भौतिक संसाधनों में हिस्सा, अवसंरचना का एकीकृत विकास, पर्यावरण संरक्षण। (2) उपलब्ध वित्तीय या अन्य संसाधनों की मात्रा।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
DPC — Art. 243ZDMPC — Art. 243ZE25 सदस्य DPC20 निर्वाचित3 पदेनअध्यक्ष — जिला प्रमुखमहानगर 10 लाख+2/3 निर्वाचित MPC

873वाँ vs 74वाँ संविधान संशोधन — तुलनात्मक विश्लेषण

🌾 73वाँ संविधान संशोधन (Panchayati Raj)
  • विषय : ग्रामीण स्थानीय शासन (Rural)
  • भाग : भाग-9 (पंचायतें)
  • अनुच्छेद : 243 से 243O (16 अनुच्छेद)
  • अनुसूची : 11वीं (29 विषय)
  • लागू : 24 अप्रैल 1993
  • Rajasthan Act : 23 अप्रैल 1994
  • तीन स्तर : ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
  • सर्वोच्च संस्था : जिला परिषद
  • जमीनी संस्था : ग्राम सभा (Art. 243A)
  • राजनेताओं का नाम : सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख
  • प्रशासनिक अधिकारी : VDO, BDO, CEO
  • राजस्थान में : प्रथम चुनाव 1995
🏙 74वाँ संविधान संशोधन (Urban Local Bodies)
  • विषय : नगरीय स्थानीय शासन (Urban)
  • भाग : भाग-9क (नगर पालिकाएं)
  • अनुच्छेद : 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)
  • अनुसूची : 12वीं (18 विषय)
  • लागू : 1 जून 1993
  • Rajasthan Act : 9 अगस्त 1994
  • तीन स्तर : नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम
  • सर्वोच्च संस्था : नगर निगम
  • जमीनी संस्था : वार्ड समिति (Art. 243S)
  • राजनेताओं का नाम : Chairman, Sabhapati, Mayor
  • प्रशासनिक अधिकारी : EO, CEO, Commissioner
  • Rajasthan में : प्रथम चुनाव 1963
⭐ दोनों में समान प्रावधान:

दोनों में — 5 वर्ष कार्यकाल। SC/ST आरक्षण जनसंख्या अनुपात में। 33% महिला आरक्षण। OBC आरक्षण — स्वैच्छिक। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)। राज्य वित्त आयोग (SFC)। न्यूनतम आयु 21 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। न्यायालय हस्तक्षेप वर्जित।

⚠️ महत्वपूर्ण अंतर: 73वाँ : Mayor — नहीं (ग्रामीण में); 74वाँ : Mayor — हाँ (नगर निगम में)। 73वाँ : Gram Sabha — संवैधानिक; 74वाँ : Ward Committee — केवल 3 लाख+ में। 73वाँ : लागू 24 April; 74वाँ : लागू 1 June — 74वाँ पहले लागू हुआ दोनों में से!

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
73वाँ भाग-974वाँ भाग-9क16 vs 18 अनुच्छेद11वीं vs 12वीं अनुसूची29 vs 18 विषय24 April vs 1 Juneग्रामीण vs नगरीयग्राम सभा vs वार्ड समिति

997वाँ संविधान संशोधन 2011 — सहकारी समितियाँ (Art. 243ZH–243ZT)

97वें संविधान संशोधन 2011 द्वारा सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इससे पूर्व सहकारिता केवल साधारण कानून के तहत आती थी। इस संशोधन ने तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।

◈ 97वें संशोधन के तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन

परिवर्तनप्रावधानविवरण
1अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन — भाग-3 (मूल अधिकार)सहकारी समितियाँ गठन करने का अधिकार — मौलिक अधिकार बनाया गया।
2अनुच्छेद 43B जोड़ा — भाग-4 (DPSP)राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्य, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
3भाग-9ख (Part 9B) जोड़ाअनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक — 13 अनुच्छेद।

◈ भाग-9ख — सहकारी समितियों के 13 अनुच्छेद

अनुच्छेदविषयप्रमुख प्रावधान
243 ZHपरिभाषाएँसहकारी समिति, राज्य अधिनियम की परिभाषाएँ।
243 ZIनिगमन एवं समापनसहकारी समितियों के गठन, विनियमन और समापन।
243 ZJबोर्ड सदस्यों की संख्या व पदावधिबोर्ड के सदस्यों की संख्या (अधिकतम 21) व कार्यकाल (5 वर्ष)।
243 ZKबोर्ड सदस्यों का निर्वाचनचुनाव — सदस्यों द्वारा।
243 ZLबोर्ड का दमन व निलम्बनराज्य सरकार — 6 माह से अधिक नहीं।
243 ZMसहकारी समिति का लेखा परीक्षणलेखा वित्त वर्ष में 6 माह के भीतर।
243 ZNसामान्य सभा की बैठक6 माह के भीतर वार्षिक सामान्य बैठक।
243 ZOसदस्यों को सूचना का अधिकारसदस्यों को लेखा, जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
243 ZPविवरणी (Returns)निर्धारित प्राधिकरण को विवरणी (Returns) देना।
243 ZQअपराध और जुर्मानादण्ड के प्रावधान।
243 ZRबहुराज्यीय सहकारी समितियाँइस भाग का बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर भी लागू होना।
243 ZSसंघ राज्य क्षेत्रों पर लागूUT में भी लागू।
243 ZTविद्यमान विधि का जारी रहनातब तक बनी रहेगी जब तक राज्य नया कानून न बना ले।

◈ सहकारिता — महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य

तथ्यविवरण
सहकारी आंदोलन के जनकF. Nicholson (एफ. निकोलसन)
भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत1904 — सहकारी साख समिति अधिनियम (Cooperative Credit Society Act) से।
राजस्थान में सहकारिता की शुरुआत1904 में।
राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति1905 — भिनाय, अजमेर में।
97वाँ संशोधन2011 — संवैधानिक दर्जा।
मूल अधिकारArt. 19(1)(c) — सहकारी समितियाँ गठित करने का मूल अधिकार।
DPSPArt. 43B — सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की राज्य की जिम्मेदारी।
भाग-9खArt. 243ZH से 243ZT — 13 अनुच्छेद।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
97वाँ संशोधन 2011भाग-9खArt. 19(1)(c)Art. 43B243ZH-243ZT13 अनुच्छेदF. Nicholson1904 Cooperative Actभिनाय 1905बोर्ड 21 सदस्य

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. 74वाँ संविधान संशोधन — 1 जून 1993 से लागू। Rajasthan — 9 अगस्त 1994। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। 2. भाग-9क (नगर पालिकाएं), Art. 243P से 243ZG — 18 अनुच्छेद। 12वीं अनुसूची — 18 विषय। 3. त्रिस्तरीय : नगर पालिका (196), नगर परिषद (34), नगर निगम (10) — राजस्थान में। 4. महापौर (Mayor) — अप्रत्यक्ष चुनाव। Chairman/Sabhapati — प्रत्यक्ष। पार्षद — प्रत्यक्ष। 5. नगर क्षेत्र शर्तें : 5000 जनसंख्या + 75% गैर-कृषि + 400 घनत्व/वर्ग किमी। 6. महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या (Art. 243P)। वार्ड समिति — 3 लाख+ में (Art. 243S)। 7. छावनी बोर्ड — रक्षा मंत्रालय, 62 (India), 1 (Rajasthan — नसीराबाद)। Chairman = Commanding Officer। 8. JDA (1982), JaDA (2008), ADA (2013), BDA (2018) — Rajasthan के विकास प्राधिकरण। 9. Right to Recall — MP (2001) प्रथम; Rajasthan (2012) तृतीय। मांगरोल बारां — प्रथम प्रयोग। 10. DPC (243ZD) — 25 सदस्य (20 निर्वाचित + 3 पदेन + 2 मनोनीत)। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। 11. 73वाँ vs 74वाँ : भाग-9 vs 9क; 16 vs 18 अनुच्छेद; 11वीं vs 12वीं अनुसूची; 29 vs 18 विषय। 12. 74वाँ पहले लागू (1 June) vs 73वाँ बाद में (24 April) — परन्तु 73वाँ पहले पारित हुआ! 13. 97वाँ संशोधन 2011 — सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा। भाग-9ख, 13 अनुच्छेद। 14. Art. 19(1)(c) — सहकारी समिति गठन का मूल अधिकार। Art. 43B — DPSP। 15. राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति — 1905, भिनाय (अजमेर)। जनक — F. Nicholson।

📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →
← अध्याय 9: पुलिस प्रशासन — SP, SDO, तहसीलदार अध्याय 11: राजस्थान में राजनीतिक प्रक्रियाएं एवं नई चुनौतियां →