स्थानीय स्वशासन का अर्थ है — स्थानीय मुद्दों पर, स्थानीय जनता द्वारा, स्थानीय चुनाव के माध्यम से, स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा, स्थानीय संसाधनों से चलाया जाने वाला शासन। भारत में इसका अस्तित्व प्राचीनकाल से है। गाँधीजी के "ग्राम स्वराज्य" की अवधारणा इसी की परिणति है।
| काल | राजनीतिक इकाई | प्रमुख | विशेषता |
|---|---|---|---|
| वैदिककाल | सभा, समिति, विद्ध | ग्रामणी (ग्राम प्रमुख) | अथर्ववेद में ग्रामणी शब्द; सभा व समिति केन्द्रीय व स्थानीय दोनों स्तर पर कार्यरत |
| बौद्धकाल | ग्राम | ग्रामयोजक | बौद्ध ग्रन्थों में उल्लेख |
| मौर्यकाल | ग्रामसभा | ग्रामिक | कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित; ग्राम स्तर पर स्वायत्त शासन |
| चोलकाल | ऊर (Ur) | वर्तमान पंचायत | सर्वप्रथम संगठित ग्राम पंचायत व्यवस्था। चोल साम्राज्य में सर्वाधिक विकसित। |
| मुगलकाल | ग्राम | मुकद्दम / चौधरी | नगर का प्रमुख — कोतवाल। प्रशासन की सबसे छोटी इकाई "ग्राम"। |
| वर्ष | घटना / अधिनियम | महत्व |
|---|---|---|
| 1687-88 | भारत में पहले नगर निगम की स्थापना — मद्रास | 30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स II। |
| 1864 | राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबू | ब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन का प्रारम्भ। |
| 1870 | लॉर्ड मेयो का विकेन्द्रीकरण प्रस्ताव | वित्तीय विकेन्द्रीकरण हेतु स्थानीय स्वशासन को प्रोत्साहन। |
| 1882 | लॉर्ड रिपन का प्रस्ताव | स्थानीय स्वशासन का जनक (Father of Local Self Govt.)। जिला बोर्ड, ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत का गठन। इनका प्रस्ताव — स्थानीय शासन का मैग्नाकार्टा। |
| 1907 | हॉब हाउस रॉयल कमीशन | सत्ता के विकेन्द्रीकरण के अध्ययन हेतु। रिपोर्ट 1909 में। |
| 1919 | मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम | स्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषयों में शामिल। |
| 1928 | राजस्थान की बीकानेर रियासत | बीकानेर — ग्राम पंचायत अधिनियम बनाने वाली प्रथम रियासत। बाद में जयपुर (1938), सिरोही (1943), भरतपुर (1944), करौली (1949)। |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम | स्थानीय स्वशासन को प्रान्तीय (राज्य) सूची में रखा। |
स्थानीय स्वशासन (Local Self Government) — नगर या गाँव की जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। वर्तमान में "पंचायती राज" और "नगरीय स्वशासन" — दोनों राज्य सूची के विषय हैं (संविधान की 7वीं अनुसूची, प्रविष्टि 5)।
ग्राम स्वराज — महात्मा गाँधी की पुस्तक "My Picture of Free India" में इस अवधारणा का उल्लेख। स्थानीय स्वशासन का जनक — लॉर्ड रिपन (1882)। भारत में स्थानीय शासन का इतिहास — 1688 से माना जाता है (मद्रास नगर निगम)।
स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान ने नीति-निर्देशक तत्वों में ग्राम पंचायत की व्यवस्था की, लेकिन वास्तविक विकेन्द्रीकरण के लिए कई कार्यक्रम और समितियाँ आवश्यक थीं।
| कार्यक्रम | प्रारम्भ | उद्देश्य | असफलता का कारण |
|---|---|---|---|
| सामुदायिक विकास कार्यक्रम (CDP) | 2 अक्टूबर 1952 (Ford Foundation के सहयोग से) | ग्रामीण विकास — कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि | नौकरशाही का अत्यधिक हस्तक्षेप + जनसहभागिता की कमी |
| राष्ट्रीय प्रसार सेवा कार्यक्रम (NES) | 2 अक्टूबर 1953 | ग्रामीण विकास को जनआन्दोलन बनाना | जन-जागरूकता की कमी + संसाधनों की अपर्याप्तता |
पंचायती राज का स्वर्ण जयंती समारोह — 2 अक्टूबर 2009, नागौर में। अध्यक्षता — सोनिया गाँधी। घोषणा — जयपुर में पंचायती राज संस्थान खोला जाएगा। 1959 में राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद अधिनियम 1959 बनाया गया।
| क्र. | पतन का कारण |
|---|---|
| 1 | धन की कमी — पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव |
| 2 | राजनीतिक चेतना की कमी — जनता में जागरूकता नहीं |
| 3 | आन्तरिक मतभेद — जाति, वर्ग, गुट का प्रभाव |
| 4 | नियमित चुनाव प्रणाली का अभाव — अनिश्चितता |
| 5 | अधिकारों का विकेन्द्रीकरण नाम मात्र का — शक्तियाँ केन्द्र में ही |
पंचायती राज व्यवस्था के मूल्यांकन, सुधार एवं उसे संवैधानिक दर्जा दिलाने हेतु समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर पर समितियाँ गठित की गईं। इन 5 प्रमुख समितियों की सिफारिशें RAS/IAS परीक्षाओं में बार-बार पूछी जाती हैं।
| समिति / अध्यक्ष | सरकार / वर्ष | प्रस्तावित ढाँचा | सर्वाधिक शक्तिशाली | मुख्य सिफारिशें |
|---|---|---|---|---|
| बलवंतराय मेहता समिति | नेहरू सरकार (जनवरी 1957; रिपोर्ट नवम्बर 1957) | त्रिस्तरीय — जिला परिषद + पंचायत समिति + ग्राम पंचायत | मध्य/खण्ड स्तर — पंचायत समिति | लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण। जिला परिषद अध्यक्ष = कलेक्टर। जनसंख्या: जिला 50 हजार, पंचायत समिति 5 हजार, ग्राम पंचायत 1 हजार। |
| अशोक मेहता समिति | मोरारजी देसाई (सितम्बर 1977; रिपोर्ट 1978) | द्विस्तरीय — जिला परिषद + मण्डल पंचायत (15-20 हजार जनसंख्या) | जिला परिषद | ग्राम पंचायत समाप्त करने की सिफारिश। संवैधानिक दर्जा। दलगत चुनाव। कार्यकाल 4 वर्ष। 1959-1969 को "पंचायती राज का उत्थान काल" कहा। |
| G.V.K. राव समिति | राजीव गाँधी / योजना आयोग (1985) | चतुर्स्तरीय — राज्य+जिला+खण्ड +ग्राम | मध्य/खण्ड स्तर | पंचायती राज संस्थाओं को "बिना जड़ की घास" कहा। जिला विकास आयुक्त। SC/ST/OBC/महिलाओं को आरक्षण। 5 वर्ष कार्यकाल। कार्ड समिति भी कहते हैं। |
| L.M. सिंघवी समिति | राजीव गाँधी / ग्रामीण विकास मंत्रालय (1986) | त्रिस्तरीय | — | ग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति। संवैधानिक दर्जा। राज्य वित्त आयोग। न्याय पंचायत। गैर-दलीय चुनाव। पंचायती राज पुनरुद्धार समिति भी कहते हैं। |
| P.K. थंगन समिति | राजीव गाँधी / योजना आयोग (1988; रिपोर्ट 1989) | त्रिस्तरीय | जिला परिषद | पंचायती राज को संघ सूची का विषय बनाने की सिफारिश। ग्राम पंचायत को सीमित न्यायिक अधिकार। कार्यकाल 5 वर्ष। संवैधानिक दर्जा। |
| पंचायती राज ढाँचा | राज्य / विशेष |
|---|---|
| एकस्तरीय | केरल, त्रिपुरा, मणिपुर, सिक्किम |
| द्विस्तरीय | असम, ओडिशा, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा |
| त्रिस्तरीय | उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु |
| चतुर्स्तरीय (एकमात्र) | पश्चिम बंगाल — ग्राम पंचायत, अंचल पंचायत, आंचलिक परिषद, जिला परिषद |
| राज्य | खण्ड/मध्य स्तर का नाम | राज्य | खण्ड/मध्य स्तर का नाम |
|---|---|---|---|
| राजस्थान | पंचायत समिति | उत्तरप्रदेश | क्षेत्र पंचायत |
| मध्यप्रदेश | जनपद पंचायत | तमिलनाडु | पंचायत संघ परिषद (Union Council) |
| गुजरात | तालुका पंचायत | कर्नाटक | मण्डल पंचायत |
| आन्ध्रप्रदेश | मण्डल प्रजा परिषद | महाराष्ट्र | पंचायत समिति |
राजस्थान सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था में सुधार हेतु समय-समय पर राज्य स्तरीय समितियाँ गठित कीं। इनकी सिफारिशों ने राजस्थान के पंचायती राज कानूनों को आकार दिया।
| समिति / अध्यक्ष | वर्ष | उद्देश्य एवं प्रमुख सिफारिश |
|---|---|---|
| सादिक अली समिति | 1964 | पंचायती राज व्यवस्था में सुधार। प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव वृहत्तर निर्वाचक मण्डल से (जिसमें ग्राम पंचायत के अध्यक्ष व सभी सदस्य शामिल हों)। |
| हरिश्चन्द्र माथुर समिति | 1963 | पंचायती राज प्रशासन सुधार। |
| गिरधारीलाल व्यास समिति | 1973 | ग्रामसेवक/पदेन सचिव/ग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.) का पद सृजित करने की सिफारिश। पंचायती राज संस्थाओं को पर्याप्त वित्तीय संसाधन देने पर बल। |
| हरलालसिंह खर्रा समिति | 1988 | पंचायती राज व्यवस्था समीक्षा। |
| अरुण कुमार समिति | 1996 | 73वें संशोधन के बाद पंचायती राज सुधार। |
| शिवचरण माथुर समिति | 1999-2000 | पंचायती राज प्रशासन व वित्त समीक्षा। |
| कटारिया समिति (गुलाबचंद कटारिया) | 2011 | सभी 29 विषय पंचायती राज संस्थाओं को सौंपने की सिफारिश (वर्तमान में 21 सौंपे गए)। |
| समिति | वर्ष | विषय |
|---|---|---|
| के. संथानम समिति | 1963 | पंचायती राज के वित्त पर अध्ययन। राष्ट्रीय विकास परिषद को "सुपर कैबिनेट" कहा। केन्द्रीय सतर्कता आयोग के गठन की सिफारिश। |
| जी. रामचन्द्रन समिति | 1966 | पंचायती राज प्रशिक्षण केन्द्रों पर। |
| दया चौबे समिति | 1976 | सामुदायिक विकास एवं पंचायती राज पर। |
| दांतेवाला समिति | 1978 | पंचायती राज समीक्षा। |
| हनुमंतराव समिति | 1984 | पंचायती राज प्रशासन। |
| वी.एन. गॉडगिल समिति | 1988 | पंचायती राज सुधार। |
L.M. सिंघवी समिति की सिफारिश पर प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हाराव की सरकार ने 73वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया। यह भारतीय लोकतंत्र में "मूक क्रांति (Silent Revolution)" के समान था।
| तिथि | विधायी प्रक्रिया |
|---|---|
| 22 दिसम्बर 1992 | 73वां संविधान संशोधन विधेयक — लोकसभा से पारित |
| 23 दिसम्बर 1992 | राज्यसभा से पारित |
| 20 अप्रैल 1993 | राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा द्वारा मंजूरी |
| 24 अप्रैल 1993 | लागू — 24 अप्रैल = राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (National Panchayati Raj Day) |
| 23 अप्रैल 1994 | राजस्थान में नया पंचायती राज अधिनियम 1994 लागू |
| जून 1994 | राज्य निर्वाचन आयोग का गठन (कार्य प्रारम्भ जुलाई 1994 से) |
| 1995 | राजस्थान में 73वें संशोधन के बाद सर्वप्रथम पंचायती राज चुनाव |
| 30 दिसम्बर 1996 | राजस्थान पंचायती राज नियम 1996 लागू |
73वें संशोधन के बाद नया पंचायती राज अधिनियम सर्वप्रथम लागू करने वाला राज्य — कर्नाटक (10 मई 1993)। 73वें संशोधन के बाद सर्वप्रथम पंचायती राज चुनाव कराने वाला राज्य — मध्यप्रदेश (मई-जून 1994)। राजीव गाँधी सरकार ने 64वाँ (ग्रामीण) और 65वाँ (नगरीय) संशोधन विधेयक 1989 में लाया लेकिन राज्यसभा से पारित नहीं हुआ।
| अनुच्छेद | English | विषय | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|---|
| 243 | — | परिभाषाएँ | ग्राम, ग्राम सभा, पंचायत, पंचायत क्षेत्र, मध्यवर्ती स्तर, जिला की परिभाषाएँ। |
| 243 क | A | ग्राम सभा | ग्राम सभा के कार्यों एवं शक्तियों का निर्धारण राज्य विधानमण्डल करेगा। |
| 243 ख | B | पंचायतों का गठन | प्रत्येक राज्य में त्रिस्तरीय पंचायत। 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्य में द्विस्तरीय। |
| 243 ग | C | संरचना | सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनाव। सरपंच का चुनाव प्रत्यक्ष। प्रधान व जिला प्रमुख अप्रत्यक्ष। |
| 243 घ | D | स्थानों का आरक्षण | SC/ST — जनसंख्या के अनुपात में। महिलाएँ — 33% (संवैधानिक)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। |
| 243 ङ | E | अवधि/कार्यकाल | प्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। |
| 243 च | F | अयोग्यताएँ | न्यूनतम आयु 21 वर्ष। अन्य योग्यताएँ राज्य विधानमण्डल तय करेगा। |
| 243 छ | G | शक्तियाँ एवं उत्तरदायित्व | 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर कार्य। सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु योजनाएँ। |
| 243 ज | H | कर एवं निधियाँ | राज्य विधानमण्डल पंचायतों को कर, फीस, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा। |
| 243 झ | I | राज्य वित्त आयोग | संवैधानिक निकाय। 73वें संशोधन के 1 वर्ष के भीतर गठन। फिर प्रत्येक 5 वर्ष पर। 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य। |
| 243 ञ | J | लेखाओं की संपरीक्षा | राज्य विधानमण्डल पंचायतों के सामाजिक अंकेक्षण का प्रावधान करेगी। |
| 243 ट | K | राज्य निर्वाचन आयोग | संवैधानिक निकाय। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त। HC न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है। |
| 243 ठ | L | UT पर लागू होना | इस भाग के उपबंध संघ राज्य क्षेत्रों में भी लागू होंगे। |
| 243 ड | M | लागू न होना | कुछ क्षेत्रों में लागू नहीं — नागालैण्ड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर के पर्वतीय क्षेत्र, दार्जिलिंग, 5वीं-6वीं अनुसूची क्षेत्र। |
| 243 ढ | N | विद्यमान विधियाँ | 73वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक राज्य विधानमण्डल निरसित न करे। |
| 243 ण | O | न्यायालय का हस्तक्षेप वर्जित | निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या स्थान आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं दी जाएगी। |
⚠️ 73वाँ संशोधन लागू नहीं होता: यह अधिनियम निम्न क्षेत्रों में लागू नहीं होता — मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, मणिपुर के कुछ पर्वतीय क्षेत्र, पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग, 5वीं व 6वीं अनुसूची में वर्णित राज्य।
प्रथम वित्त आयोग गठन — 24 अप्रैल 1994। कार्य प्रारम्भ — 1 अप्रैल 1995 से 31 मार्च 2000। प्रथम अध्यक्ष — कृष्ण कुमार गोयल। 5वें राज्य वित्त आयोग की अध्यक्ष — ज्योति किरण।
73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज के कुछ प्रावधान अनिवार्य (बाध्यकारी) रखे गए जो सभी राज्यों पर लागू होते हैं, जबकि कुछ स्वैच्छिक (वैकल्पिक) रखे गए जिन्हें राज्य अपनी इच्छानुसार लागू कर सकते हैं।
73वें संशोधन — महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (संवैधानिक)। 2009 में राजस्थान सहित कई राज्यों ने 50% महिला आरक्षण की व्यवस्था की। 50% आरक्षण लागू करने वाला प्रथम राज्य — मध्यप्रदेश। OBC को आरक्षण — स्वैच्छिक (राज्य विधानमण्डल तय करेगा)। SC/ST का आरक्षण — Art. 334 में विनिर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर प्रभावी नहीं रहेगा।
ग्राम सभा पंचायती राज की आत्मा है। यह लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण की सबसे बुनियादी इकाई है। L.M. सिंघवी ने इसे "प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति" कहा था।
| विषय | ग्राम सभा का नियम |
|---|---|
| वार्षिक बैठकें | वर्ष में 4 बैठकें — 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर। परन्तु कम से कम 2 बैठकें अनिवार्य। |
| बैठक की सूचना | बैठक से 7 दिन पूर्व। आकस्मिक परिस्थितियों में 3 दिन पूर्व। |
| गणपूर्ति (Quorum/कोरम) | कुल सदस्यों का 1/5 (20%)। |
| कोरम पूर्ण न हो तो | बैठक स्थगित (30 दिन के लिए)। स्थगन के बाद पुनः बुलाने पर कोरम की आवश्यकता नहीं, लेकिन नए विषयों पर चर्चा नहीं। |
| कोरम की जिम्मेदारी | सरपंच व वार्ड पंच। लगातार 3 बैठकों में कोरम पूर्ण न हो तो नोटिस, 2 अवसर और दिए जाते हैं। |
| निर्णय | सर्वसम्मति व मतदान से। बहुमत — उपस्थित व मत देने वालों का। |
| कार्यवाही का लेखा | ग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.) रजिस्टर में लिखेगा; सरपंच हस्ताक्षर करेगा। |
| विशेष बैठक | ग्राम सभा के कुल सदस्यों में से 5% या 25 सदस्य (जो भी अधिक) द्वारा लिखित सूचना। |
| संयुक्त बैठक | सीमा विवाद/चारागाह विवाद होने पर। प्रत्येक ग्राम सभा से 5% या 10 सदस्य (जो भी कम) उपस्थिति अनिवार्य। |
| वार्षिक बैठक | पंचायत मुख्यालय पर। नया वित्तीय वर्ष शुरू होने के 3 माह पहले। |
| पहलू | ग्राम सभा | वार्ड सभा |
|---|---|---|
| इकाई | ग्राम पंचायत स्तर पर | ग्राम पंचायत की सबसे छोटी इकाई |
| सदस्य | ग्राम के सभी पंजीकृत वयस्क मतदाता | वार्ड के पंजीकृत वयस्क मतदाता |
| अध्यक्ष | सरपंच | वार्ड पंच |
| बैठकें | वर्ष में 4 (न्यूनतम 2) | वर्ष में 2 (न्यूनतम) |
| कोरम | कुल सदस्यों का 1/5 | कुल सदस्यों का 1/10 |
| प्रकृति | स्थायी संस्था (भंग नहीं) | — |
| संवैधानिक उल्लेख | Art. 243, 243A | राजस्थान PR अधिनियम 1994 की धारा 3 |
| कार्यवाही | VDO रजिस्टर में; सरपंच हस्ताक्षर | — |
राजस्थान में पंचायती राज का त्रिस्तरीय ढाँचा है — ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर), पंचायत समिति (खण्ड/मध्य स्तर) और जिला परिषद (जिला/शीर्ष स्तर)। यह तालिका RAS Pre और Mains दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
| पहलू / विषय | ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर) | पंचायत समिति (खण्ड स्तर) | जिला परिषद (जिला स्तर) |
|---|---|---|---|
| राजनैतिक प्रमुख | सरपंच | प्रधान | जिला प्रमुख |
| उपप्रमुख | उपसरपंच | उपप्रधान | उपजिला प्रमुख |
| प्रशासनिक प्रमुख | ग्राम विकास अधिकारी (V.D.O.) | खण्ड विकास अधिकारी (B.D.O.) | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.) |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष | 21 वर्ष | 21 वर्ष |
| सदस्यों का चुनाव | वार्ड पंच — प्रत्यक्ष मतदान द्वारा | सदस्य — प्रत्यक्ष मतदान द्वारा | सदस्य — जनता द्वारा प्रत्यक्ष |
| अध्यक्ष का चुनाव | सरपंच — प्रत्यक्ष; उपसरपंच — निर्वाचित पंचों द्वारा अप्रत्यक्ष | प्रधान व उपप्रधान — निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष | जिला प्रमुख व उपजिला प्रमुख — निर्वाचित सदस्यों में से अप्रत्यक्ष |
| सदस्यों की शपथ | पीठासीन अधिकारी द्वारा | पीठासीन अधिकारी द्वारा | पीठासीन अधिकारी (जिला कलेक्टर) द्वारा |
| अध्यक्ष/उपाध्यक्ष की शपथ | सरपंच व उपसरपंच — पीठासीन अधिकारी | प्रधान व उपप्रधान — S.D.M. द्वारा | जिला प्रमुख व उपजिला प्रमुख — जिला कलेक्टर द्वारा |
| सदस्य/उपाध्यक्ष का त्यागपत्र | वार्ड पंच+उपसरपंच+सरपंच — B.D.O. को | पंचायत समिति सदस्य+उपप्रधान — प्रधान को | जिला परिषद सदस्य+उपजिला प्रमुख — जिला प्रमुख को |
| अध्यक्ष का त्यागपत्र | सरपंच — B.D.O. को | प्रधान — जिला प्रमुख को | जिला प्रमुख — संभागीय आयुक्त को |
| बैठकें | 15 दिन में कम से कम 1 | 1 माह में कम से कम 1 | 3 माह में कम से कम 1 |
| न्यूनतम सदस्य | 9 (3 हजार जनसंख्या तक); प्रति 1000 पर 2 अतिरिक्त | 15 (1 लाख तक); 1 लाख से अधिक पर प्रति 15 हजार 2 अतिरिक्त | 17 (4 लाख तक); 4 लाख से अधिक पर प्रति 1 लाख 2 अतिरिक्त |
| पदेन सदस्य | V.D.O. + संबंधित पंचायत समिति व जिला परिषद सदस्य | B.D.O. + क्षेत्र के विधायक, सांसद, जिला परिषद सदस्य + सभी सरपंच + विधायक द्वारा मनोनीत 1 व्यक्ति | C.E.O. + समस्त सांसद (LS+RS), समस्त विधायक (LA+LC) + समस्त प्रधान + सांसद द्वारा मनोनीत 1 व्यक्ति + कलेक्टर |
| अविश्वास प्रस्ताव | 2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से (2007 संशोधन के बाद) | 2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से | 2 वर्ष बाद; 1/3 हस्ताक्षर; 3/4 बहुमत से |
| आय के साधन | राज्य अनुदान + कर + शुल्क + शास्तियाँ (बाजार कर, पथ कर, भूमि कर आदि) | राज्य अनुदान + विभिन्न कर (मकान, भूमि, मेला, शिक्षा उपकर) | राज्य अनुदान + पंचायत समितियों का अंशदान + जन-सहयोग |
| ग्राम पंचायत निधि | सरपंच + V.D.O. के संयुक्त हस्ताक्षर | — | CEO के हस्ताक्षर से (जिला परिषद) |
प्रथम महिला जिला प्रमुख — नगेन्द्र बाला (कोटा)। प्रथम महिला सरपंच — छगन बहन गोलछा (खींचनगाँव, फलौदी, जोधपुर)। राजस्थान में पंचायती राज के प्रथम चुनाव — सितम्बर-अक्टूबर 1959। 1959 से 2020 तक कुल 11 बार चुनाव। (1959, 1965, 1978, 1981, 1988, 1995, 2000, 2005, 2010, 2015, 2020)।
राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 2021 संशोधन द्वारा धारा-89 में "ग्राम सेवक" के स्थान पर "ग्राम विकास अधिकारी (VDO)" नाम प्रतिस्थापित किया गया।
PESA — Panchayats Extension to Scheduled Areas (पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम)। यह अधिनियम संविधान की 5वीं अनुसूची में वर्णित जनजातीय क्षेत्रों में पंचायती राज के सिद्धान्तों को लागू करने हेतु बनाया गया।
वर्ष 1995 में दलीपसिंह भूरिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर PESA अधिनियम 24 दिसम्बर 1996 को लागू किया गया। पेसा के क्रियान्वयन हेतु पंचायती राज विभाग नोडल एजेंसी है।
| क्र. | राज्य | क्र. | राज्य | क्र. | राज्य |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | हिमाचल प्रदेश | 2 | राजस्थान | 3 | गुजरात |
| 4 | मध्यप्रदेश | 5 | महाराष्ट्र | 6 | आन्ध्रप्रदेश |
| 7 | तेलंगाना | 8 | छत्तीसगढ़ | 9 | ओडिशा |
| 10 | झारखण्ड | — | — | — | — |
राजस्थान में PESA अधिनियम 30 सितम्बर 1999 को लागू हुआ। PESA क्षेत्र में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ (सम्पूर्ण जिले) तथा चित्तौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, सिरोही जिलों की कुछ तहसीलों को शामिल किया गया। इस एक्ट के तहत वर्ष में 4 ग्राम सभाएं होती हैं (3-3 माह के अंतराल पर)। इन जिलों में पंचायत के सभी स्तरों पर अध्यक्ष के पद ST के लिए आरक्षित।
1. जनजातीय समाजों की ग्राम सभाओं को अत्यधिक शक्तिशाली बनाया गया — परम्पराओं एवं रीति-रिवाजों की सुरक्षा।
2. ग्राम सभा को सामाजिक एवं आर्थिक विकास की योजना एवं कार्यक्रम स्वीकृत करने का अधिकार।
3. भाग-9 के पंचायत प्रावधानों को जरूरी संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तारित करने का लक्ष्य।
4. राज्य विधानमण्डल — जिला स्तरीय प्रशासनिक प्रबंध में संविधान की 6वीं अनुसूची के प्रतिमानों का अनुगमन।
5. SC/ST/OBC आरक्षण — ST का आरक्षण कुल स्थानों में 50% से कम नहीं। सभी स्तरों पर अध्यक्षों के पद ST के लिए आरक्षित।
6. गौण खनिजों के लाइसेंस/खनन पट्टा देने के लिए ग्राम सभा/पंचायत की सिफारिश अनिवार्य।
7. नीलामी द्वारा गौण खनिजों के दोहन — ग्राम सभा/पंचायत की पूर्व सिफारिश अनिवार्य।
8. अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की अध्यक्षता — ST सदस्य (1 वर्ष के लिए, आम सहमति से)। सहमति न बने तो — वरिष्ठतम महिला ST सदस्य।
9. लघु जल निकायों की योजना बनाना व प्रबंधन — उपयुक्त स्तर की पंचायत को सौंपा जाएगा।
10. जिन ST का प्रतिनिधित्व न हो — मध्यवर्ती व जिला स्तर पर मनोनीत (परन्तु 10% से अधिक नहीं)।
11. ग्राम सभा को विशेष शक्तियाँ : मादक पदार्थ नियंत्रण, गौण वन उत्पाद स्वामित्व, भूमि हस्तांतरण, बाजार प्रबंधन, धन उधार नियंत्रण।
12. उच्च स्तर की पंचायत, निम्न स्तर की पंचायत या ग्राम के अधिकारों का हनन नहीं करेगी।
13. असंगत प्रावधान — राष्ट्रपति की स्वीकृति के 1 वर्ष बाद लागू नहीं होंगे।
73वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा 11वीं अनुसूची जोड़ी गई। इसमें पंचायती राज के 29 विषयों का उल्लेख है जिनका संबंध अनुच्छेद 243 छ (G) से है। इनमें से कितने विषय पंचायतों को हस्तांतरित किए जाएँगे, यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
| क्र. | 11वीं अनुसूची — विषय | क्र. | 11वीं अनुसूची — विषय |
|---|---|---|---|
| 1 | कृषि (कृषि विस्तार सहित) | 16 | गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम |
| 2 | भूमि विकास, भूमि सुधार, चकबंदी, भूमि संरक्षण | 17 | शिक्षा (प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय) |
| 3 | लघु सिंचाई, जल प्रबंध, जलविभाजक क्षेत्र | 18 | तकनीकी प्रशिक्षण व व्यावसायिक शिक्षा |
| 4 | पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन | 19 | प्रौढ़ व अनौपचारिक शिक्षा |
| 5 | मत्स्य उद्योग | 20 | पुस्तकालय |
| 6 | सामाजिक वानिकी व फार्म वानिकी | 21 | सांस्कृतिक क्रियाकलाप |
| 7 | लघु वन उपज | 22 | बाजार और मेले |
| 8 | लघु उद्योग (खाद्य प्रसंस्करण सहित) | 23 | स्वास्थ्य व स्वच्छता (अस्पताल, PHC, औषधालय) |
| 9 | खादी, ग्रामोद्योग, कुटीर उद्योग | 24 | परिवार कल्याण |
| 10 | ग्रामीण आवासन | 25 | महिला एवं बाल विकास |
| 11 | पेयजल | 26 | समाज कल्याण (विकलांग, मानसिक) |
| 12 | ईंधन और चारा | 27 | दुर्बल वर्गों का कल्याण (SC/ST) |
| 13 | सड़कें, पुल, पुलिया, जलमार्ग, अन्य संचार | 28 | सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) |
| 14 | ग्रामीण विद्युतीकरण (वितरण सहित) | 29 | सामुदायिक आस्तियों का अनुरक्षण |
| 15 | अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत | — | — |
प्रारम्भ में 16 विषय हस्तांतरित। 2 अक्टूबर 2010 को 5 और विषय हस्तांतरित किए गए : (1) कृषि (2) प्राथमिक शिक्षा (3) चिकित्सा एवं स्वास्थ्य (4) महिला एवं बाल विकास (5) सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।
| संस्था / तथ्य | विवरण |
|---|---|
| इंदिरा गाँधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान | जयपुर में, 1984 में स्थापित। स्वायत्तशासी संस्था। जनप्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों को प्रशिक्षण देना। |
| ग्रामसेवक प्रशिक्षण केन्द्र | मंडोर (जोधपुर) — 15 अगस्त 1960 से। |
| पंचायत प्रशिक्षण केन्द्र | डूंगरपुर (3 फरवरी 1994 से) और अजमेर (18 मई 1996 से)। |
| हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान | जयपुर (जोधपुर से 1963 में स्थानान्तरित; 1983 में नाम परिवर्तन)। |
| ग्रामीण विकास के लिए राष्ट्रीय संस्थान | मसूरी व हैदराबाद में। |
| DRDA (जिला ग्रामीण विकास अभिकरण) | अध्यक्ष — जिला प्रमुख (30 जनवरी 1999)। 1 सितम्बर 2003 को DRDA का विलय जिला परिषद में; CEO के अधीन "ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ"। |
| ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग | वर्तमान नाम। पूर्व — "विशिष्ट योजना संगठन" (1971), "विशिष्ट योजनाएँ एवं एकीकृत ग्रामीण विकास विभाग" (1979), "ग्रामीण विकास विभाग" (1 अप्रैल 1999)। |
| ई-पंचायत | मिशन मोड परियोजना। उद्देश्य — पंचायती राज संस्थाओं की आधुनिकता, पारदर्शिता व कार्यकुशलता। |
| राजस्थान विकास पत्रिका | पंचायती राज विभाग द्वारा द्वैमासिक पत्रिका — 1983 से प्रकाशन। |
| मिलेनियम गाँव | चुरू जिले की राजगढ़ तहसील का अमरपुरा गाँव — भारत का प्रथम मिलेनियम गाँव (संयुक्त राष्ट्र संघ की मिलेनियम प्रयोजना)। |
1. स्थानीय स्वशासन के जनक — लॉर्ड रिपन (1882)। उनका प्रस्ताव — "स्थानीय शासन का मैग्नाकार्टा"। पंचायती राज — राज्य सूची का विषय। 2. पंचायती राज की शुरुआत — 2 अक्टूबर 1959, नागौर (बगदरी गाँव), नेहरू द्वारा। प्रथम राज्य — राजस्थान; CM — मोहनलाल सुखाड़िया। 3. बलवंतराय मेहता (1957) — त्रिस्तरीय, मध्य/खण्ड सर्वाधिक शक्तिशाली। लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के जनक। 4. अशोक मेहता (1978) — द्विस्तरीय। GVK राव (1985) — "बिना जड़ की घास"। LM सिंघवी (1986) — "ग्राम सभा = प्रत्यक्ष लोकतंत्र की मूर्ति"। 5. 73वाँ संशोधन — 22-23 Dec 1992 (पारित), 24 April 1993 (लागू)। 24 अप्रैल = राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस। 6. भाग-9, अनुच्छेद 243 से 243(O) — कुल 16 अनुच्छेद। 11वीं अनुसूची — 29 विषय। 7. अनिवार्य — ग्राम सभा, त्रिस्तरीय ढाँचा, 5 वर्ष कार्यकाल, SC/ST/महिला आरक्षण (33%), SEC, SFC। 8. ग्राम सभा — स्थायी संस्था। वर्ष में 4 बैठकें (न्यूनतम 2)। कोरम — 1/5। VDO कार्यवाही लिखेगा। 9. त्रिस्तरीय : ग्राम पंचायत (VDO), पंचायत समिति (BDO), जिला परिषद (CEO)। 10. अविश्वास प्रस्ताव — 2 वर्ष बाद। 1/3 हस्ताक्षर। 3/4 बहुमत से पारित (2007 संशोधन से)। 11. PESA अधिनियम — 24 December 1996। 5वीं अनुसूची के 10 राज्यों में। राजस्थान में 30 September 1999 से। 12. राजस्थान में 29 में से 21 विषय हस्तांतरित (16 + 5; अतिरिक्त 5 — 2 अक्टूबर 2010 को)। 13. राजस्थान में 50% महिला आरक्षण — 2009 से। प्रथम महिला जिला प्रमुख — नगेन्द्र बाला (कोटा)। 14. राज्य वित्त आयोग (SFC) — राज्यपाल द्वारा। 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य। प्रथम अध्यक्ष राजस्थान — कृष्ण कुमार गोयल। 15. पश्चिम बंगाल — चतुर्स्तरीय पंचायती राज (एकमात्र)। नागालैण्ड, मेघालय, मिजोरम में 73वाँ संशोधन लागू नहीं।
नगरीय स्वशासन (Urban Local Self Government) का अर्थ है — नगर के लोगों द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। मेगस्थनीज ने सर्वप्रथम "इण्डिका" पुस्तक में मौर्यकालीन नगरीय प्रशासन का उल्लेख किया है। वर्तमान में नगरीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है।
| वर्ष | घटना / अधिनियम | महत्व |
|---|---|---|
| 1687–88 | भारत का प्रथम नगर निगम — मद्रास | 30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स-II। |
| 1864 | राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबू | ब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन की शुरुआत। |
| 1866 | अजमेर में नगरपालिका | राजस्थान में दूसरी नगरपालिका। |
| 1867 | ब्यावर में नगरपालिका | राजस्थान की तीसरी नगरपालिका। |
| 1869 | जयपुर में नगरपालिका | राजस्थान में नगरीय शासन का विस्तार। |
| 1870 | लॉर्ड मेयो — वित्तीय विकेन्द्रीकरण | स्थानीय स्वशासन हेतु वित्तीय विकेन्द्रीकरण। |
| 1919 | मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम | नगरीय स्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषय। |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम | नगरीय स्वशासन — प्रान्तीय सूची में। |
| 1951 | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1951 | स्वतंत्र भारत में प्रथम अधिनियम। |
| 1959 | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1959 | 1951 के स्थान पर। |
| 1963 | राजस्थान में प्रथम नगर पालिका चुनाव | फिर: 1970, 1972, 1974, 1976, 1982, 1986, 1999-2000, 2004-05, 2009-10, 2014-15, 2021। |
| 1989 | राजीव गाँधी का 65वाँ संशोधन विधेयक | लोकसभा से पारित लेकिन राज्यसभा से नहीं — रद्द। |
| 1993 | 74वाँ संविधान संशोधन लागू (1 जून) | नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। |
| 9 अगस्त 1994 | राजस्थान में 74वाँ संशोधन लागू | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1994 लागू। |
| 2009 | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 | वर्तमान प्रभावी अधिनियम। |
| 2011 | राइट टू रिकॉल कानून 2011 | 2009 अधिनियम में संशोधन। |
74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा — भाग-9क (नगर पालिकाएं), अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद) एवं 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़ी गई। भाग-9क का नाम "नगर पालिकाएं" दिया गया। यहाँ "नगर पालिकाएं" शब्द नगरीय संस्थाओं के त्रिस्तरीय ढाँचे का प्रतीक है।
74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा संविधान में भाग-9क जोड़ा गया जिसमें नगर पालिकाओं से संबंधित 18 अनुच्छेद (243P से 243ZG) हैं। यह 73वें संशोधन का शहरी समकक्ष है।
| अनुच्छेद | hindi | विषय | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|---|
| 243 P | त | परिभाषाएँ | वार्ड समिति, जिला, नगर पालिका, नगर पालिका क्षेत्र, महानगर क्षेत्र की परिभाषाएँ। महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या। |
| 243 Q | थ | नगर पालिकाओं का गठन | त्रिस्तरीय : नगर पंचायत (संक्रमणशील), नगर पालिका परिषद (लघु नगरीय), नगर निगम (वृहत नगरीय)। दर्जा राज्यपाल द्वारा अधिसूचना से। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं। |
| 243 R | द | नगर पालिकाओं की संरचना | पार्षद — प्रत्यक्ष चुनाव। पदेन सदस्य — MP, MLA, अनुभवी व्यक्ति। अध्यक्ष का चुनाव — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। |
| 243 S | ध | वार्ड समितियाँ | 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में एक या अधिक वार्डों को मिलाकर वार्ड समिति। |
| 243 T | न | स्थानों का आरक्षण | SC/ST — जनसंख्या अनुपात में। महिला — 33% (सभी वर्गों में)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। अध्यक्षों के पद भी आरक्षित। |
| 243 U | प | कार्यकाल | प्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। |
| 243 V | फ | अयोग्यताएँ | न्यूनतम आयु 21 वर्ष। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 nomination। अन्य निरर्हताएँ — राज्य विधानमण्डल तय। |
| 243 W | ब | शक्तियाँ, प्राधिकार | 12वीं अनुसूची के 18 विषयों पर कार्य। आर्थिक-सामाजिक विकास हेतु योजनाएँ। |
| 243 X | भ | कर एवं निधियाँ | राज्य विधानमण्डल कर, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा। राज्य की संचित निधि से अनुदान। |
| 243 Y | म | राज्य वित्त आयोग | 243I (झ) के अधीन SFC का प्रावधान नगरीय निकायों के लिए भी। |
| 243 Z | य | लेखाओं की संपरीक्षा | राज्य विधानमण्डल नगर पालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा का उपबंध करेगा। |
| 243 ZA | यक | राज्य निर्वाचन आयोग | 243K के अधीन SEC का प्रावधान। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त। |
| 243 ZB | यख | UT पर लागू | नगर पालिकाओं संबंधी प्रावधान संघ राज्य क्षेत्रों में लागू। |
| 243 ZC | यग | लागू न होना | 5वीं व 6वीं अनुसूची क्षेत्रों में लागू नहीं। दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद के कार्यों पर प्रभावी नहीं। |
| 243 ZD | यघ | जिला आयोजना समिति | जिले में पंचायतों व नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। |
| 243 ZE | यङ | महानगर योजना समिति | महानगर क्षेत्र की विकास योजना। 2/3 सदस्य निर्वाचित। |
| 243 ZF | यच | विद्यमान विधियाँ | 74वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक निरसित न हों। |
| 243 ZG | यछ | न्यायालय का हस्तक्षेप वर्जित | परिसीमन/आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं। |
(1) न्यूनतम जनसंख्या 5000। (2) कार्यशील पुरुषों का न्यूनतम 75% गैर-कृषि कार्यों में संलग्न। (3) जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। ये शर्तें पूरी होने पर राज्यपाल अधिसूचना द्वारा नगर क्षेत्र घोषित करते हैं।
नगरीय स्थानीय शासन में तीन स्तर हैं — नगर पंचायत/नगर पालिका (लघु), नगर परिषद (मध्यम) और नगर निगम (वृहत)। इन्हें सामूहिक रूप से "नगर पालिकाएं" कहा जाता है।
| पहलू / विषय | नगर पालिका (Nagar Palika) | नगर परिषद (Nagar Parishad) | नगर निगम (Nagar Nigam) |
|---|---|---|---|
| जनसंख्या | 10 हजार से 1 लाख तक | 1 लाख से 5 लाख तक | 5 लाख से 1 करोड़ तक |
| जनसंख्या घनत्व | 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी | 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी | 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी |
| प्रति व्यक्ति मासिक आय | 10 रुपये | 200 रुपये | 500 रुपये |
| गैर-कृषि कार्यों में | 10% या अधिक | 25% या अधिक | 50% या अधिक |
| राजनैतिक अध्यक्ष | चैयरमेन / अध्यक्ष | सभापति | महापौर / मेयर |
| अध्यक्ष का चुनाव | प्रत्यक्ष | प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष (निर्वाचित पार्षदों द्वारा) |
| प्रशासनिक प्रमुख | अधिशाषी अधिकारी (E.O.) | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.) | आयुक्त (Commissioner) |
| न्यूनतम वार्ड | 13 | 13 | 13 |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष | 21 वर्ष | 21 वर्ष |
| कार्यकाल | 5 वर्ष | 5 वर्ष | 5 वर्ष |
| वार्ड सदस्य | पार्षद (प्रत्यक्ष) | पार्षद (प्रत्यक्ष) | पार्षद (प्रत्यक्ष) |
| श्रेणी | चतुर्थ (25 हजार तक), तृतीय (25-49,999), द्वितीय (50-99,999) | — | — |
| राजस्थान में संख्या | 196 | 34 | 10 |
| आरक्षण | SC/ST जनसंख्या अनुपात + महिलाएँ 33% | SC/ST + महिलाएँ 33% | SC/ST + महिलाएँ 33% |
| पदेन सदस्य (मत नहीं) | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA |
| क्र. | नगर निगम | क्र. | नगर निगम | क्र. | नगर निगम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 2 | जोधपुर (दक्षिण) | 3 | कोटा (उत्तर) |
| 4 | अजमेर | 5 | बीकानेर | 6 | अलवर |
| 7 | भरतपुर (7वाँ — 13 जून 2014) | 8 | जयपुर (हेरिटेज) — अक्टूबर 2019 | 9 | जोधपुर (उत्तर) — अक्टूबर 2019 |
| 10 | कोटा (दक्षिण) — अक्टूबर 2019 | — | — | — | — |
नगर पालिका/परिषद/निगम का दर्जा — राज्यपाल अधिसूचना द्वारा। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं (Art. 243Q)। वार्ड समिति — 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में। नगर परिषद में अधिकतम 8 नामांकित सदस्य (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009)। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 नामांकन पत्र।
74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगर पालिकाओं के 18 विषय हैं। इसका संबंध अनुच्छेद 243W(ब) से है। कितने विषय नगर पालिकाओं को हस्तांतरित किए जाएँगे — यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
| क्र. | 12वीं अनुसूची — विषय | क्र. | 12वीं अनुसूची — विषय |
|---|---|---|---|
| 1 | नगरीय योजना (नगर योजना सहित) | 10 | गंदी बस्ती सुधार एवं प्रोन्नयन |
| 2 | भूमि उपयोग विनियमन और भवन निर्माण | 11 | नगरीय निर्धनता उन्मूलन |
| 3 | आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजना | 12 | नगरीय सुविधाएँ (पार्क, उद्यान, खेल मैदान) |
| 4 | सड़कें और पुल | 13 | सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सौंदर्यपरक आयाम |
| 5 | घरेलू, औद्योगिक व वाणिज्यिक जल प्रदाय | 14 | शव गाड़ना, श्मशान, विद्युत शवदाहगृह |
| 6 | लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई, कूड़ा प्रबंध | 15 | कांजी हाउस, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण |
| 7 | अग्निशमन सेवाएँ | 16 | जन्म-मरण सांख्यिकी (पंजीकरण) |
| 8 | नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण | 17 | सार्वजनिक सुविधाएँ (सड़क प्रकाश, पार्किंग, बस स्टॉप) |
| 9 | दुर्बल वर्गों की रक्षा (विकलांग, मानसिक) | 18 | वधशालाओं एवं चर्मशोधनशालाओं का विनियमन |
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| नगर निगम (Municipal Corporation) | सबसे बड़े शहरों के लिए। |
| नगर परिषद (Municipal Council) | मध्यम आकार के शहरों के लिए। |
| नगर पालिका (Municipality/Nagar Panchayat) | छोटे व संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए। |
| छावनी बोर्ड (Cantonment Board) | सैन्य क्षेत्रों के लिए — केन्द्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) के अधीन। |
| नगर सुधार न्यास (UIT) | नगरों के सुनियोजित विकास के लिए। |
| नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority) | विशेष नगरों के विकास के लिए। |
| पत्तन न्यास (Port Trust) | बन्दरगाह वाले शहरों में — संसद द्वारा गठित। |
| अधिसूचित क्षेत्र समिति | जहाँ कानून लागू नहीं लेकिन कुछ शहरी सुविधाएँ आवश्यक। |
| महानगरीय योजना समिति | 10 लाख+ जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्रों के लिए। |
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अधिनियम | छावनी बोर्ड अधिनियम 1924 (2006 में संशोधन)। |
| नियंत्रण | केन्द्र सरकार का रक्षा मंत्रालय। (राज्य सरकार का नहीं) |
| अध्यक्ष | सेना का कमाण्डिंग ऑफिसर। |
| उपाध्यक्ष | जनता से निर्वाचित। कार्यकाल — 3 वर्ष। |
| सदस्य | निर्वाचित (जनता से) + मनोनीत (सैन्य छावनी से)। |
| भारत में संख्या | 62 छावनी बोर्ड। |
| राजस्थान में | 1 — नसीराबाद (अजमेर)। |
| विवाद | यदि पंचायत और छावनी बोर्ड के बीच विवाद हो — निर्णय राज्य सरकार करेगी (केन्द्र के अनुमोदन के अधीन)। |
| प्राधिकरण | स्थापना वर्ष | क्षेत्र | विशेष |
|---|---|---|---|
| JDA — जयपुर विकास प्राधिकरण | 1982 | जयपुर | राजस्थान का प्रथम विकास प्राधिकरण |
| JaDA — जोधपुर विकास प्राधिकरण | 2008 | जोधपुर | — |
| ADA — अजमेर विकास प्राधिकरण | 2013 | अजमेर | — |
| BDA — भिवाड़ी विकास प्राधिकरण | 2018 | भिवाड़ी (अलवर) | औद्योगिक क्षेत्र |
राइट टू रिकॉल वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनमत संग्रह (Referendum) द्वारा कार्यकाल से पहले पद से हटाया जा सकता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सर्वप्रथम प्रयोग | 1903 — लॉस एंजिल्स (अमेरिका) |
| भारत में प्रथम प्रयोग राज्य | मध्यप्रदेश — 2001 |
| द्वितीय राज्य | छत्तीसगढ़ — 2008 |
| तृतीय राज्य | राजस्थान — 2012 |
| राजस्थान में कानून | Right to Recall कानून 2011 (2009 अधिनियम में संशोधन) |
| राजस्थान में प्रथम प्रयोग | दिसम्बर 2012 — बारां जिले की मांगरोल नगर पालिका के अध्यक्ष अशोक जैन के विरुद्ध जनमत संग्रह। |
| किसे हटाया जा सकता है | महापौर (Mayor), सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष। |
अविश्वास प्रस्ताव — निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) लाते हैं। Right to Recall — जनता (मतदाता) द्वारा सीधे। राजस्थान में Right to Recall — महापौर, सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध।
74वें संविधान संशोधन द्वारा भाग-9क, अनुच्छेद 243ZD में जिला आयोजना समिति का प्रावधान। इसका उद्देश्य जिले में पंचायतों और नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण कर सम्पूर्ण जिले की विकास योजना तैयार करना है।
| पहलू | DPC (जिला आयोजना समिति) | MPC (महानगर योजना समिति) |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 243ZD (भाग-9क) | 243ZE (भाग-9क) |
| उद्देश्य | जिले की एकीकृत विकास योजना तैयार करना | महानगर क्षेत्र की विकास योजना तैयार करना |
| क्षेत्र | जिला स्तर | महानगर क्षेत्र (10 लाख+ जनसंख्या) |
| कुल सदस्य | 25 (संवैधानिक में निर्धारित नहीं) | कम से कम 2/3 निर्वाचित |
| निर्वाचित सदस्य | 20 (4/5) — पंचायत व नगर निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा (ग्रामीण-शहरी जनसंख्या अनुपात में) | 2/3 — नगर पालिका निर्वाचित + पंचायत अध्यक्ष (जनसंख्या अनुपात में) |
| पदेन सदस्य | 3 — जिला कलेक्टर, CEO, अतिरिक्त CEO | राज्य व केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व |
| मनोनीत सदस्य | 2 — राज्य सरकार द्वारा | राज्य विधानमण्डल विधि बनाकर |
| अध्यक्ष | जिला प्रमुख | राज्य विधानमण्डल विधि बनाकर |
| योजना भेजने की जिम्मेदारी | अध्यक्ष (जिला प्रमुख) → राज्य सरकार को | अध्यक्ष → राज्य सरकार को |
| राजस्थान में प्रावधान | धारा 121 — राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 | — |
(1) पंचायतों और नगर पालिकाओं के सामान्य हित के विषय — स्थानिक योजना, जल व भौतिक संसाधनों में हिस्सा, अवसंरचना का एकीकृत विकास, पर्यावरण संरक्षण। (2) उपलब्ध वित्तीय या अन्य संसाधनों की मात्रा।
दोनों में — 5 वर्ष कार्यकाल। SC/ST आरक्षण जनसंख्या अनुपात में। 33% महिला आरक्षण। OBC आरक्षण — स्वैच्छिक। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)। राज्य वित्त आयोग (SFC)। न्यूनतम आयु 21 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। न्यायालय हस्तक्षेप वर्जित।
⚠️ महत्वपूर्ण अंतर: 73वाँ : Mayor — नहीं (ग्रामीण में); 74वाँ : Mayor — हाँ (नगर निगम में)। 73वाँ : Gram Sabha — संवैधानिक; 74वाँ : Ward Committee — केवल 3 लाख+ में। 73वाँ : लागू 24 April; 74वाँ : लागू 1 June — 74वाँ पहले लागू हुआ दोनों में से!
97वें संविधान संशोधन 2011 द्वारा सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इससे पूर्व सहकारिता केवल साधारण कानून के तहत आती थी। इस संशोधन ने तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।
| परिवर्तन | प्रावधान | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन — भाग-3 (मूल अधिकार) | सहकारी समितियाँ गठन करने का अधिकार — मौलिक अधिकार बनाया गया। |
| 2 | अनुच्छेद 43B जोड़ा — भाग-4 (DPSP) | राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्य, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। |
| 3 | भाग-9ख (Part 9B) जोड़ा | अनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक — 13 अनुच्छेद। |
| अनुच्छेद | विषय | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|
| 243 ZH | परिभाषाएँ | सहकारी समिति, राज्य अधिनियम की परिभाषाएँ। |
| 243 ZI | निगमन एवं समापन | सहकारी समितियों के गठन, विनियमन और समापन। |
| 243 ZJ | बोर्ड सदस्यों की संख्या व पदावधि | बोर्ड के सदस्यों की संख्या (अधिकतम 21) व कार्यकाल (5 वर्ष)। |
| 243 ZK | बोर्ड सदस्यों का निर्वाचन | चुनाव — सदस्यों द्वारा। |
| 243 ZL | बोर्ड का दमन व निलम्बन | राज्य सरकार — 6 माह से अधिक नहीं। |
| 243 ZM | सहकारी समिति का लेखा परीक्षण | लेखा वित्त वर्ष में 6 माह के भीतर। |
| 243 ZN | सामान्य सभा की बैठक | 6 माह के भीतर वार्षिक सामान्य बैठक। |
| 243 ZO | सदस्यों को सूचना का अधिकार | सदस्यों को लेखा, जानकारी प्राप्त करने का अधिकार। |
| 243 ZP | विवरणी (Returns) | निर्धारित प्राधिकरण को विवरणी (Returns) देना। |
| 243 ZQ | अपराध और जुर्माना | दण्ड के प्रावधान। |
| 243 ZR | बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ | इस भाग का बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर भी लागू होना। |
| 243 ZS | संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू | UT में भी लागू। |
| 243 ZT | विद्यमान विधि का जारी रहना | तब तक बनी रहेगी जब तक राज्य नया कानून न बना ले। |
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| सहकारी आंदोलन के जनक | F. Nicholson (एफ. निकोलसन) |
| भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत | 1904 — सहकारी साख समिति अधिनियम (Cooperative Credit Society Act) से। |
| राजस्थान में सहकारिता की शुरुआत | 1904 में। |
| राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति | 1905 — भिनाय, अजमेर में। |
| 97वाँ संशोधन | 2011 — संवैधानिक दर्जा। |
| मूल अधिकार | Art. 19(1)(c) — सहकारी समितियाँ गठित करने का मूल अधिकार। |
| DPSP | Art. 43B — सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की राज्य की जिम्मेदारी। |
| भाग-9ख | Art. 243ZH से 243ZT — 13 अनुच्छेद। |
1. 74वाँ संविधान संशोधन — 1 जून 1993 से लागू। Rajasthan — 9 अगस्त 1994। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। 2. भाग-9क (नगर पालिकाएं), Art. 243P से 243ZG — 18 अनुच्छेद। 12वीं अनुसूची — 18 विषय। 3. त्रिस्तरीय : नगर पालिका (196), नगर परिषद (34), नगर निगम (10) — राजस्थान में। 4. महापौर (Mayor) — अप्रत्यक्ष चुनाव। Chairman/Sabhapati — प्रत्यक्ष। पार्षद — प्रत्यक्ष। 5. नगर क्षेत्र शर्तें : 5000 जनसंख्या + 75% गैर-कृषि + 400 घनत्व/वर्ग किमी। 6. महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या (Art. 243P)। वार्ड समिति — 3 लाख+ में (Art. 243S)। 7. छावनी बोर्ड — रक्षा मंत्रालय, 62 (India), 1 (Rajasthan — नसीराबाद)। Chairman = Commanding Officer। 8. JDA (1982), JaDA (2008), ADA (2013), BDA (2018) — Rajasthan के विकास प्राधिकरण। 9. Right to Recall — MP (2001) प्रथम; Rajasthan (2012) तृतीय। मांगरोल बारां — प्रथम प्रयोग। 10. DPC (243ZD) — 25 सदस्य (20 निर्वाचित + 3 पदेन + 2 मनोनीत)। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। 11. 73वाँ vs 74वाँ : भाग-9 vs 9क; 16 vs 18 अनुच्छेद; 11वीं vs 12वीं अनुसूची; 29 vs 18 विषय। 12. 74वाँ पहले लागू (1 June) vs 73वाँ बाद में (24 April) — परन्तु 73वाँ पहले पारित हुआ! 13. 97वाँ संशोधन 2011 — सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा। भाग-9ख, 13 अनुच्छेद। 14. Art. 19(1)(c) — सहकारी समिति गठन का मूल अधिकार। Art. 43B — DPSP। 15. राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति — 1905, भिनाय (अजमेर)। जनक — F. Nicholson।