🏙️ अध्याय 8/12 — राजस्थान राज्यव्यवस्था

संभागीय आयुक्त एवं जिला कलेक्टर / DM

Divisional Commissioner & District Collector | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. संभाग — परिचय, प्रशासनिक महत्व एवं संभागीय आयुक्त का पद सृजन
  2. संभागीय व्यवस्था का इतिहास — प्रारम्भ, बंद एवं पुनः शुरुआत
  3. संभागों का तुलनात्मक चार्ट — सीमाएँ, जिले, विशेषताएँ
  4. जिला — परिचय, ऐतिहासिक विकास एवं संवैधानिक स्थिति
  5. राजस्थान के 41 जिले — वर्तमान संरचना (दिसम्बर 2024 अनुसार)
  6. प्रशासनिक पदसोपान एवं जिला प्रशासन की संरचना
  7. जिला कलेक्टर के चार रूपों में कार्य
  8. उपखण्ड प्रशासन (SDO) — शक्तियाँ एवं कार्य
  9. तहसील, उपतहसील, कानूनगो एवं पटवारी प्रशासन
  10. राजस्व मण्डल (Board of Revenue) | सिविल सेवा अपील अधिकरण
📌 संभागीय व्यवस्था एवं संभागीय आयुक्त

1संभाग — परिचय, प्रशासनिक महत्व एवं संभागीय आयुक्त का पद सृजन

संभाग (Division) एक प्रशासनिक इकाई है जो जिला और राज्य सचिवालय के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करता है। यह मध्यवर्ती स्तर पर प्रशासनिक समन्वय का केन्द्र है।

पहलूविवरण
परिभाषाजिला और राज्य सचिवालय के बीच मध्यवर्ती प्रशासनिक इकाई।
प्रशासनिक प्रमुखसंभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) — IAS अधिकारी।
राज्य प्रशासन पदसोपानमुख्य सचिव (राज्य) → संभागीय आयुक्त (संभाग) → जिला कलेक्टर (जिला)।
पद सृजन1829 में लॉर्ड विलियम बैंटिक ने कलेक्टरों के कार्यों पर निगरानी हेतु।
कड़ीजिला कलेक्टर एवं मुख्य सचिव के बीच।
शक्तियाँराजस्व, न्यायिक, प्रशासनिक एवं नियंत्रणकारी — चारों प्रकार की शक्तियाँ।

◈ संभागीय आयुक्त के प्रमुख कार्य

1. अधीनस्थ जिलों के प्रशासन पर नियंत्रण एवं कार्यों में समन्वय।

2. संभाग में संचालित योजनाओं की मॉनिटरिंग।

3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर नियंत्रण।

4. भू-राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई — राजस्व अपीलीय प्राधिकारी।

5. प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की जाँच।

6. जिला प्रमुख का त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को दिया जाता है।

7. जिला स्तर पर CM आदेशों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी।

◈ संभागीय आयुक्त कार्यालय — संगठन

पदसेवा
संभागीय आयुक्तIAS
अतिरिक्त संभागीय आयुक्तRAS
उपनिदेशक (सांख्यिकी) / राजस्व लेखा निरीक्षक / तहसीलदार / नायब तहसीलदारअधीनस्थ सेवा
कार्यालय अधीक्षक
सांख्यिकी सहायक / कम्प्यूटर / अन्य मंत्रालयिक कार्मिक
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
1829 Lord William BentinckIASराजस्व अपीलीयPDS नियंत्रणCS-Collector के बीच कड़ीRAS अतिरिक्त आयुक्त

2संभागीय व्यवस्था का इतिहास — प्रारम्भ, बंद एवं पुनः शुरुआत

तिथिघटनाCM / विवरण
30 मार्च 1949संभागीय व्यवस्था की शुरुआतCM हीरालाल शास्त्री। राजस्थान के एकीकरण के चौथे चरण (वृहत् राजस्थान) में। प्रारम्भ में 5 संभाग — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा।
अप्रैल 1962व्यवस्था बंदCM मोहनलाल सुखाड़िया। कारण — आयुक्त के कार्य राजस्व बोर्ड व कलेक्टर के कार्यों का दोहराव; अनावश्यक संघर्ष।
1962 के बाद4 विशेष आयुक्त जारी रहेजोधपुर (मरुस्थल विकास), बीकानेर (IGNP), उदयपुर (जनजातीय विकास), कोटा (चम्बल कमाण्ड क्षेत्र) — ये भू-राजस्व नहीं, केवल योजना कार्य।
26 जनवरी 1987व्यवस्था पुनः शुरूCM हरिदेव जोशी। 6 संभागों के साथ।
1987अजमेर 6वाँ संभागजयपुर संभाग को तोड़कर अजमेर संभाग बना।
4 जून 2005भरतपुर 7वाँ संभागजयपुर व कोटा संभाग को तोड़कर।
17 मार्च 20233 नए संभाग घोषितबाँसवाड़ा, पाली, सीकर।
7 अगस्त 20233 नए संभाग गठित
29 दिसम्बर 20243 नए संभाग निरस्त28 Dec 2024 कैबिनेट बैठक में निर्णय। 29 Dec 2024 अधिसूचना। वापस 7 संभाग।
⭐ वर्तमान स्थिति:

29 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के पश्चात् — राजस्थान में कुल 7 संभाग। बाँसवाड़ा, सीकर, पाली संभाग निरस्त। इनके जिले मूल संभागों में वापस मिले।

⚠️ 1962 में बंद — कारण: (1) संभागीय आयुक्त के कार्य राजस्व बोर्ड व जिला कलेक्टर के कार्यों का दोहराव था। (2) इससे अनावश्यक प्रशासनिक संघर्ष एवं असहयोग उत्पन्न होता था।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
30 Mar 1949हीरालाल शास्त्री5 संभाग 19491962 बंद सुखाड़िया1987 पुनः हरिदेव जोशीअजमेर 6वाँ 1987भरतपुर 7वाँ 200529 Dec 2024 — 7 संभाग

3 & 4. राजस्थान के 7 संभाग — विस्तृत विवरण (वर्तमान 2024 अनुसार)

वर्तमान में राजस्थान में 7 संभाग हैं। प्रत्येक संभाग के जिले, सीमावर्ती संभाग, अंतर्राज्यीय/अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ एवं विशेष तथ्य नीचे दिए गए हैं।

🔷 1. बीकानेर संभाग (4 जिले)

पहलूविवरण
जिले (4)(1) बीकानेर (2) चुरू (3) हनुमानगढ़ (4) गंगानगर
सीमावर्ती संभाग (3)जोधपुर, अजमेर, जयपुर
अंतर्राष्ट्रीय सीमापाकिस्तान — न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभाग
अंतर्राज्यीय सीमापंजाब, हरियाणा
विशेष तथ्ययहाँ केवल आंतरिक प्रवाह की नदियाँ। न्यूनतम दशकीय वृद्धि दर वाला संभाग।

🔷 2. जोधपुर संभाग (8 जिले) — सर्वाधिक जिले

पहलूविवरण
जिले (8)(1) जोधपुर (2) बाड़मेर (3) बालोतरा (4) जैसलमेर (5) जालोर (6) पाली (7) फलौदी (8) सिरोही
सीमावर्ती संभाग (3)उदयपुर, अजमेर, बीकानेर
अंतर्राष्ट्रीय सीमापाकिस्तान — सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभाग
अंतर्राज्यीय सीमागुजरात
विशेष तथ्यसर्वाधिक क्षेत्रफल वाला संभाग। पश्चिमी संभाग। न्यूनतम साक्षरता एवं जनसंख्या घनत्व। सर्वाधिक दशकीय वृद्धि।

🔷 3. जयपुर संभाग (7 जिले) — सर्वाधिक जनसंख्या

पहलूविवरण
जिले (7)(1) जयपुर (2) अलवर (3) दौसा (4) कोटपूतली-बहरोड़ (5) खैरथल-तिजारा (6) झुन्झुनूं (7) सीकर
सीमावर्ती संभाग (3)भरतपुर, अजमेर, बीकानेर
अंतर्राष्ट्रीय सीमानहीं
अंतर्राज्यीय सीमाहरियाणा
विशेष तथ्यसर्वाधिक जनसंख्या एवं जनसंख्या घनत्व। सर्वाधिक साक्षरता। सर्वाधिक SC आबादी।

🔷 4. उदयपुर संभाग (7 जिले) — दो भागों में विभाजित

पहलूविवरण
जिले (7)(1) उदयपुर (2) बाँसवाड़ा (3) चित्तौड़गढ़ (4) डूंगरपुर (5) प्रतापगढ़ (6) राजसमंद (7) सलूम्बर
सीमावर्ती संभाग (3)जोधपुर, अजमेर, कोटा
अंतर्राष्ट्रीय सीमानहीं
अंतर्राज्यीय सीमागुजरात, मध्यप्रदेश — सर्वाधिक अंतर्राज्यीय सीमा वाला संभाग
विशेष तथ्ययह 2 भागों में टूटा हुआ है (इसे तोड़ने वाला — अजमेर संभाग)। सर्वाधिक लिंगानुपात। सर्वाधिक ST आबादी। कर्क रेखा यहाँ से गुजरती है। सर्वाधिक नदियों का उद्गम यहाँ।

🔷 5. कोटा संभाग (4 जिले) — न्यूनतम जनसंख्या

पहलूविवरण
जिले (4)(1) कोटा (2) बूंदी (3) बारां (4) झालावाड़
सीमावर्ती संभाग (3)भरतपुर, अजमेर, उदयपुर
अंतर्राष्ट्रीय सीमानहीं
अंतर्राज्यीय सीमामध्यप्रदेश
विशेष तथ्यन्यूनतम जनसंख्या वाला संभाग। सर्वाधिक नदियाँ प्रवाहित होती हैं।

🔷 6. अजमेर संभाग (6 जिले) — मध्यवर्ती संभाग

पहलूविवरण
जिले (6)(1) अजमेर (2) भीलवाड़ा (3) ब्यावर (4) डीडवाना-कुचामन (5) नागौर (6) टोंक
सीमावर्ती संभाग (6)बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, जयपुर — सभी 6 संभागों से सीमा
अंतर्राष्ट्रीय सीमानहीं
अंतर्राज्यीय सीमामध्यप्रदेश — न्यूनतम अंतर्राज्यीय सीमा
विशेष तथ्यमध्यवर्ती संभाग — सभी 6 संभागों से सीमा। यह 2 भागों में टूटा (इसे तोड़ने वाले जोधपुर व उदयपुर)।

🔷 7. भरतपुर संभाग (5 जिले) — सर्वाधिक राज्यों से सीमा

पहलूविवरण
जिले (5)(1) भरतपुर (2) डीग (3) करौली (4) धौलपुर (5) सवाईमाधोपुर
सीमावर्ती संभाग (3)कोटा, अजमेर, जयपुर
अंतर्राष्ट्रीय सीमानहीं
अंतर्राज्यीय सीमाहरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश — सर्वाधिक 3 राज्यों से सीमा
विशेष तथ्यपूर्वी संभाग। सर्वाधिक राज्यों (3) के साथ सीमा। न्यूनतम लिंगानुपात। सबसे छोटा क्षेत्रफल।

3संभागों का तुलनात्मक चार्ट — सीमाएँ, जिले, विशेषताएँ

संभागजिलेसंभागों से सीमाअंतर्राज्यीय सीमाअंत. सीमा
बीकानेर0403 (जोधपुर, अजमेर, जयपुर)पंजाब, हरियाणापाकिस्तान
जोधपुर0803 (उदयपुर, अजमेर, बीकानेर)गुजरातपाकिस्तान
जयपुर0703 (भरतपुर, अजमेर, बीकानेर)हरियाणानहीं
उदयपुर0703 (जोधपुर, अजमेर, कोटा)गुजरात, मध्यप्रदेशनहीं
कोटा0403 (भरतपुर, अजमेर, उदयपुर)मध्यप्रदेशनहीं
अजमेर0606 (सभी 6 संभाग)मध्यप्रदेशनहीं
भरतपुर0503 (कोटा, अजमेर, जयपुर)हरियाणा, UP, MPनहीं

◈ परीक्षा उपयोगी तथ्य

📊 जिलों की संख्या के आधार पर
  • 8 जिले — जोधपुर (सर्वाधिक)
  • 7 जिले — जयपुर व उदयपुर
  • 6 जिले — अजमेर
  • 5 जिले — भरतपुर
  • 4 जिले — कोटा व बीकानेर (न्यूनतम)
🌍 भौगोलिक/जनसांख्यिकीय
  • सर्वाधिक क्षेत्रफल — जोधपुर
  • न्यूनतम क्षेत्रफल — भरतपुर
  • सर्वाधिक जनसंख्या — जयपुर
  • न्यूनतम जनसंख्या — कोटा
  • उत्तर — बीकानेर | दक्षिण — उदयपुर
  • पूर्व — भरतपुर | पश्चिम — जोधपुर
  • मध्यवर्ती — अजमेर
विशेषसंभाग
सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय सीमाजोधपुर
न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय सीमाबीकानेर
अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती संभाग (2)जोधपुर व बीकानेर
सर्वाधिक अंतर्राज्यीय सीमाउदयपुर
न्यूनतम अंतर्राज्यीय सीमाअजमेर
सर्वाधिक राज्यों से सीमा (3)भरतपुर — हरियाणा, UP, MP
सर्वाधिक संभागों से सीमा (6)अजमेर
सर्वाधिक जनसंख्या घनत्वजयपुर
न्यूनतम जनसंख्या घनत्वजोधपुर
सर्वाधिक साक्षरताजयपुर
न्यूनतम साक्षरताजोधपुर
सर्वाधिक लिंगानुपातउदयपुर
न्यूनतम लिंगानुपातभरतपुर
सर्वाधिक ST आबादीउदयपुर
सर्वाधिक SC आबादीजयपुर
कर्क रेखाउदयपुर
सर्वाधिक नदियाँ प्रवाहितकोटा
सर्वाधिक नदियों का उद्गमउदयपुर
2 भागों में टूटे संभागउदयपुर (तोड़ने वाला — अजमेर) + अजमेर (तोड़ने वाले — जोधपुर, उदयपुर)
केवल आंतरिक प्रवाह नदियाँबीकानेर
सर्वाधिक दशकीय वृद्धिजोधपुर
न्यूनतम दशकीय वृद्धिबीकानेर

◈ राज्यों से सीमावर्ती संभाग

राज्यसीमावर्ती संभागसंख्या
पंजाबबीकानेर1
हरियाणाबीकानेर, जयपुर, भरतपुर3
उत्तर प्रदेशभरतपुर1
मध्यप्रदेशभरतपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर4
गुजरातउदयपुर, जोधपुर2
पाकिस्तान (अंतर्राष्ट्रीय)जोधपुर, बीकानेर2

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. संभाग — जिला व राज्य सचिवालय के बीच मध्यवर्ती इकाई। प्रशासनिक प्रमुख — संभागीय आयुक्त (IAS)। 2. पद सृजन — 1829 में लॉर्ड विलियम बैंटिक। 3. संभागीय व्यवस्था प्रारम्भ — 30 मार्च 1949 (CM हीरालाल शास्त्री, 5 संभाग)। 4. व्यवस्था बंद — अप्रैल 1962 (CM मोहनलाल सुखाड़िया — दोहराव व संघर्ष कारण)। 5. पुनः शुरू — 26 जनवरी 1987 (CM हरिदेव जोशी)। 6. 6वाँ संभाग — अजमेर (1987)। 7वाँ — भरतपुर (4 जून 2005)। 7. 3 नए संभाग (सीकर, पाली, बाँसवाड़ा) — 29 दिसम्बर 2024 को निरस्त। वर्तमान में 7 संभाग। 8. सर्वाधिक जिले — जोधपुर (8)। न्यूनतम — बीकानेर व कोटा (4-4)। 9. सर्वाधिक क्षेत्रफल — जोधपुर। न्यूनतम — भरतपुर। 10. सर्वाधिक जनसंख्या — जयपुर। न्यूनतम — कोटा। 11. अंतर्राष्ट्रीय सीमा — जोधपुर (सर्वाधिक) + बीकानेर (न्यूनतम)। 12. अजमेर — मध्यवर्ती संभाग, सभी 6 संभागों से सीमा। भरतपुर — 3 राज्यों से सीमा। 13. उदयपुर — ST, लिंगानुपात, कर्क रेखा, नदी उद्गम। जयपुर — SC, साक्षरता, घनत्व।

📌 जिला प्रशासन (District Administration)
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1जिला — परिचय, ऐतिहासिक विकास एवं संवैधानिक स्थिति

"जिला" शब्द लैटिन "Districtus" से आया है, जिसका अर्थ है "न्यायिक प्रशासन"। जिला भारतीय प्रशासन की आधारभूत भौगोलिक इकाई है — यह वह धुरी है जिस पर समूचा फील्ड-प्रशासन टिका है।
कालजिले का नामप्रमुख का नामविशेष
मौर्यकालजनपदराजुकाजिला प्रशासन का वर्तमान स्वरूप सर्वप्रथम मौर्यकाल में। "जनपद" शब्द अभी भी UP में प्रचलित।
गुप्तकाल / हर्षकालविषयविषयपति
सल्तनत कालपरगनाफौजदार
मुगलकालसरकारअमालगुजार / अमिल
ब्रिटिश कालDistrictCollector / DMWarren Hastings 1772 ने पद सृजित किया।

◈ संवैधानिक एवं सामान्य तथ्य

📖 प्रतापगढ़ (33वाँ जिला, 26 जनवरी 2008):

चित्तौड़गढ़ से — अरनोद, छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़। उदयपुर से — धरियावाद। बाँसवाड़ा से — पीपलखूंट। इन 5 तहसीलों को मिलाकर बनाया गया।

2राजस्थान के 41 जिले — वर्तमान संरचना (दिसम्बर 2024 अनुसार)

पिछली सरकार ने 19 नए जिले बनाए जिससे कुल संख्या 50 हो गई थी। नई सरकार ने डॉ. ललित के. पंवार समिति की सिफारिशों पर 9 जिले रद्द किए। अब राजस्थान में कुल 41 जिले हैं।

❌ रद्द किए गए 9 जिले
  • 1. जयपुर ग्रामीण → जयपुर में
  • 2. जोधपुर ग्रामीण → जोधपुर में
  • 3. दूदू → जयपुर में
  • 4. केकड़ी → अजमेर, टोंक में
  • 5. शाहपुरा → भीलवाड़ा में
  • 6. नीम का थाना → सीकर, झुंझुनूं में
  • 7. गंगापुर सिटी → सवाई माधोपुर, करौली में
  • 8. सांचौर → जालोर में
  • 9. अनूपगढ़ → श्रीगंगानगर, बीकानेर में
✅ यथावत रखे 8 नए जिले
  • 1. बालोतरा (बाड़मेर से)
  • 2. ब्यावर (अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद से)
  • 3. डीग (भरतपुर से)
  • 4. डीडवाना-कुचामन (नागौर से)
  • 5. कोटपूतली-बहरोड़ (जयपुर, अलवर से)
  • 6. खैरथल-तिजारा (अलवर से)
  • 7. फलौदी (जोधपुर, जैसलमेर से)
  • 8. सलूम्बर (उदयपुर से)
🧠 रद्द 9 जिले — याद करने की ट्रिक:

महानगरीय विभाजन — जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण। मध्य राजस्थान बेल्ट — दूदू, केकड़ी, शाहपुरा। परिधीय क्षेत्र — अनूपगढ़, सांचौर, नीम का थाना, गंगापुर सिटी। (33 → 50 → 41 का सफर)

◈ 41 जिले — संभागवार सूची

क्र.जिलासंभागक्र.जिलासंभाग
1बीकानेर ★बीकानेर22जयपुर ★जयपुर
2चुरू ★बीकानेर23अलवर ★जयपुर
3हनुमानगढ़ ★बीकानेर24दौसा ★जयपुर
4श्रीगंगानगर ★बीकानेर25कोटपूतली-बहरोड़ 🆕जयपुर
5जोधपुर ★जोधपुर26खैरथल-तिजारा 🆕जयपुर
6बाड़मेर ★जोधपुर27झुंझुनूं ★जयपुर
7बालोतरा 🆕जोधपुर28सीकर ★जयपुर
8जैसलमेर ★जोधपुर29उदयपुर ★उदयपुर
9जालोर ★जोधपुर30बाँसवाड़ा ★उदयपुर
10पाली ★जोधपुर31चित्तौड़गढ़ ★उदयपुर
11फलौदी 🆕जोधपुर32डूंगरपुर ★उदयपुर
12सिरोही ★जोधपुर33प्रतापगढ़ ★उदयपुर
13कोटा ★कोटा34राजसमंद ★उदयपुर
14बूंदी ★कोटा35सलूम्बर 🆕उदयपुर
15बारां ★कोटा36भरतपुर ★भरतपुर
16झालावाड़ ★कोटा37डीग 🆕भरतपुर
17अजमेर ★अजमेर38करौली ★भरतपुर
18भीलवाड़ा ★अजमेर39धौलपुर ★भरतपुर
19ब्यावर 🆕अजमेर40सवाईमाधोपुर ★भरतपुर
20डीडवाना-कुचामन 🆕अजमेर41नागौर ★अजमेर
21टोंक ★अजमेर
⭐ नोट:

★ = मूल/पुराने जिले | 🆕 = नए (यथावत रखे गए) जिले। कुल 33 मूल + 8 नए = 41 जिले। रद्द 3 संभाग (बाँसवाड़ा, पाली, सीकर) — 29 दिसम्बर 2024 अधिसूचना।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
41 जिले7 संभाग33 मूल जिले8 नए यथावत9 रद्दपंवार समिति50→41राम लुभाया कमेटी (नए बनाए)29 Dec 2024

3प्रशासनिक पदसोपान एवं जिला प्रशासन की संरचना

प्रशासनिक इकाईसंख्याराजस्व/प्रशासनिक अधिकारी
राज्य1मुख्य सचिव (CS)
संभाग7संभागीय आयुक्त (DC) — IAS
जिला41जिला कलेक्टर / DM — IAS (2009 से RAS भी)
अतिरिक्त जिलाअतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADC/ADM)
उपखण्डउपखण्ड अधिकारी (SDO/SDM) — प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट
तहसीलतहसीलदार — द्वितीय श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट
उपतहसीलनायब तहसीलदार — अराजपत्रित
पटवार सर्किलभू-अभिलेख निरीक्षक / कानूनगो / गिरदावर
खसरा / ग्रामपटवारी — ग्राम स्तर का प्रमुख राजस्व प्रशासक

◈ पुलिस प्रशासन की पदश्रृंखला

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
CS→DC→DM→ADM→SDO→Tehsildar→Naib→Kanungo→Patwari41 जिलेIAS + 2009 से RAS भी

4. जिला कलेक्टर — इतिहास, नाम, उपनाम एवं महत्व

जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासन का वह केन्द्रबिन्दु है जो एक साथ राजस्व अधिकारी, दण्डनायक, विकास समन्वयक और आपदा प्रबंधक है। इसे जिले में "लघु राज्य सरकार" का दर्जा प्राप्त है।

वर्षघटनाविवरण
1772पद सृजनWarren Hastings ने बंगाल में जिला कलेक्टर पद बनाया। भू-राजस्व अधिकार दिए। प्रथम कलेक्टर — राल्फ शैल्डन।
1773पद समाप्त
1781पुनः शुरुआत
1787शक्ति विस्तारराजस्व के साथ दण्डनायक (Magistrate) की शक्तियाँ भी दी गईं। कलेक्टर "Little Napoleon" बना।
1793शक्ति सीमितLord Cornwallis ने शक्तियाँ घटाईं। बाद में Lord Mackenzie ने पुनः विस्तारित कीं।
1858शक्ति सुदृढ़ब्रिटिश सम्राट के अधीन भारत — कलेक्टर और अधिक शक्तिशाली।
2009RAS को Collectorराजस्थान में पहली बार RAS अधिकारियों को जिला कलेक्टर पदस्थापित किया जाने लगा।

◈ अलग-अलग राज्यों में नाम

नामराज्यभूमिका
Deputy Commissioner (DC)पंजाब, हरियाणा, असम, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर
Deputy Magistrate / जिला दण्डनायकउत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
जिला कलेक्टर / जिलाधीशराजस्थानमुख्य उपयोग
जिला दण्डाधिकारी (DM)जब भू-राजस्व संग्रहण करेRevenue role
जिला विकास अधिकारी (DDO)जब विकास कार्यों का समन्वय करेDevelopment role

◈ महत्वपूर्ण कथन एवं उपनाम

कथन / उपनामस्रोत
"जिलाधीश, जिला प्रशासन की धुरी है।"अटल बिहारी वाजपेयी
"संस्थागत करिश्मा (Institutional Charisma)"रजनी कोठारी
"कहीं दूसरी जगह जिलाधीश नामक अधिकारी न तो हुआ है तथा न ही होगा।"के.के. दास
"जिलाधीश की तुलना एक कछुए से की है, जिसकी पीठ पर भारत सरकार का हाथी खड़ा है।"रैम्जे मैक्डोनैल्ड
"जिलाधीश को एक अधिवक्ता, एक लेखाविद्, एक सर्वेक्षणकर्त्ता तथा राजपत्रों को तैयार करने वाला लेखक होना चाहिए।"साइमन आयोग (1930)
"Little Napoleon" (लिटल नेपोलियन)ब्रिटिशकाल में 1787 के बाद
"जिला प्रशासन की आँख, कान व हाथ (बांह)"जिला कलेक्टर का उपनाम
"लघु राज्य सरकार"जिला में कलेक्टर की बहुआयामी भूमिका
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
Warren Hastings 1772Little NapoleonCARD Committee GVK Raoरजनी कोठारीवाजपेयीIAS + RAS 2009Ralph Sheldon
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4जिला कलेक्टर के चार रूपों में कार्य

जिला कलेक्टर एकल व्यक्ति है किन्तु उसकी भूमिकाएँ चतुर्दिक हैं। वह एक साथ दण्डनायक, भूमि अधिकारी, विकास समन्वयक और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी है।

◈ भूमिका 1 — जिला दण्डनायक (District Magistrate — DM)

क्र.कार्य
1जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखना। SP, DM के निर्देशन में कार्य करता है।
2अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेटों (ADM→SDM→2nd Exec. Mag.) का निरीक्षण।
3CrPC के निवारक खण्ड के मुकदमों की सुनवाई + दावा रहित सम्पत्ति का निस्तारण।
4मृत्युदण्ड के कार्यान्वयन को प्रमाणित करना।
5सरकार को वार्षिक अपराध प्रतिवेदन।
6विदेशियों के पासपोर्ट की जाँच।
7प्रेस कानून, मनोरंजन कर अधिनियम लागू करना।
8CrPC — धारा 144 लागू करना। असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण।
9मण्डल आयुक्त की अनुपस्थिति में जिला विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष।
10स्थानीय निकायों पर नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण।
11शस्त्र, होटल, विस्फोटक पदार्थों के लाइसेंस की अनुमति व नियंत्रण।

◈ भूमिका 2 — जिला कलेक्टर / जिलाधीश (Revenue)

क्र.कार्य
1भू-राजस्व का संग्रहण।
2भूमि अधिग्रहण, भू-मूल्यांकन, भू-अभिलेख एवं भू-सुधार लागू करना।
3कृषि ऋणों का वितरण (तकावी ऋण)।
4प्राकृतिक आपदाओं — बाढ़, सूखा, अकाल, महामारी में आपदा प्रबंधन।
5जिला बैंकर समन्वय समिति की अध्यक्षता।
6जिला योजना केन्द्र की अध्यक्षता।
7पेट्रोल, शराब, मादक पदार्थों पर आबकारी शुल्क व नियंत्रण।
8स्टाम्प अधिनियम लागू करना।
9भूमि विवाद संबंधी अपील की सुनवाई।

◈ भूमिका 3 — जिला विकास अधिकारी / समन्वयक (DDO)

क्र.कार्य
1जिले की विकास परियोजनाओं की निगरानी व क्रियान्वयन।
2जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के मध्य समन्वय।
3लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण नीति लागू करना + पंचायतीराज संस्थाओं में समन्वय।
4जिला प्रशासन, NGO, विभागों के मध्य समन्वय।
5शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल, बिजली व यातायात की व्यवस्था।
6जिला योजना क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष।
7जिले के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी के रूप में।

◈ भूमिका 4 — मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO)

क्र.कार्य
1जिले में मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी।
2जिला निर्वाचन अधिकारी।
3मुख्य जनगणना अधिकारी।
4दैनिक जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति व वितरण पर निगरानी।
5अधीनस्थों की गतिविधियों का निरीक्षण व प्रशिक्षण।
6जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का अध्यक्ष — आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (जनवरी 2006 से लागू)।
7जिला कोषागार व उपकोषागार का पर्यवेक्षण।
8राष्ट्रीय पर्वों में ध्वजारोहण।
9सरकारी आवास आवंटन, डाक बंगले, सर्किट हाउस निरीक्षण।
10सैन्य अधिकारियों से सम्पर्क।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
DMCollectorDDODDMAधारा 144तकावी ऋणस्टाम्प अधिनियमआपदा प्रबंधन 2005जनगणना अधिकारी

5उपखण्ड प्रशासन (SDO) — शक्तियाँ एवं कार्य

जिले को उपखण्डों में विभाजित किया गया है। उपखण्ड का सर्वोच्च अधिकारी SDO (Sub-Divisional Officer) होता है — जो मुख्य भू-राजस्व अधिकारी और प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट दोनों है।

भूमिकाSDO के प्रमुख कार्य
भू-राजस्व अधिकारीभू-अभिलेख तैयार करना, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना, कृषि उत्पादन का आकलन, अधीनस्थों (तहसीलदार, नायब, कानूनगो, पटवारी) पर नियंत्रण, ग्रामवार भूमि नक्शे, गिरदावरी रिपोर्ट।
उपखण्ड मजिस्ट्रेट(1st Class Executive Mag.)कानून-शांति व्यवस्था, पुलिस थानों/चौकियों का निरीक्षण, धारा-144 आदेश, वार्षिक अपराध रिपोर्ट कलेक्टर को।
भू-न्यायिक अधिकारीभूमि, सीमा विवाद, चारागाह, भू-अभिलेख, राजस्व, सम्पत्ति, मुआवजे संबंधी विवाद।
प्रशासनिक अधिकारीविकास कार्यक्रम संचालन, जनता की शिकायतें, PDS दुकानें नियंत्रण, BPL जनगणना, चुनाव कार्य।
💡 अवधारणा:

SDO = Sub-Divisional Officer। कुछ राज्यों में SDM (Sub-Divisional Magistrate) कहते हैं। जिला कलेक्टर के निर्देशन में कार्य। उपखण्ड का मुख्य भू-राजस्व अधिकारी + प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
SDO/SDMप्रथम श्रेणी Exec. Mag.भू-राजस्वधारा 144BPL जनगणनागिरदावरीअतिक्रमण

6तहसील, उपतहसील, कानूनगो एवं पटवारी प्रशासन

◈ तहसील एवं तहसीलदार

"तहसील" अरबी भाषा का शब्द है — "मालगुजारी वसूलने वाली इकाई"। तहसीलदार RTS (Rajasthan Tehsildar Service — अधीनस्थ सेवा) का सदस्य है। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। SDO के निर्देशन में।
भूमिकातहसीलदार के कार्य
भू-राजस्व अधिकारीभू-अभिलेखों का निरुपण, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, राजस्व संग्रहण, उल्लंघनकर्ताओं को दण्डित करना।
न्यायिक (2nd Class Exec. Mag.)काश्तकारी, चारागाह, सीमा, सम्पत्ति विवाद, सरकारी भूमि अतिक्रमण, राजकीय पत्रों का तामिली कार्य।
प्रशासनिकPDS दुकानें नियंत्रण, जन्म-मृत्यु पंजीयन, जनगणना, जाति व मूल निवास प्रमाण पत्र, उपकोषालय, राहत भुगतान, चुनाव प्रबंधन।
⭐ तहसील का इतिहास:

मुगलकाल से वर्तमान स्वरूप। राजस्थान में सर्वप्रथम अलवर रियासत (1781) में "तहसील" शब्द का प्रयोग। बाद में बीकानेर व अजमेर में।

◈ नायब तहसीलदार एवं कानूनगो / गिरदावर

अधिकारीविवरण
नायब तहसीलदारतहसील की उप-इकाई (उपतहसील) का प्रमुख। अराजपत्रित अधिकारी। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। तहसीलदार के निर्देशन में।
कानूनगो / गिरदावर / भू-अभिलेख निरीक्षकपटवार सर्किल का प्रमुख। नायब तहसीलदार व पटवारी के बीच कड़ी। पटवारी इसके अधीन।

◈ पटवारी — ग्राम स्तर का राजस्व प्रशासक

पटवारी भारतीय राजस्व व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है। आम आदमी का सरकार से सबसे पहला सम्पर्क पटवारी के माध्यम से होता है।

पहलूविवरण
उल्लेखमुगलकाल से पटवारी पद का उल्लेख।
नियुक्तिराजस्व मण्डल, अजमेर। भर्ती — RSMSSB (राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड)।
अन्य नामतमिलनाडु — कारनाम | महाराष्ट्र — तलैठी | उत्तर प्रदेश — लेखपाल
प्रमुख कार्यभू-राजस्व संग्रहण, गिरदावरी रिपोर्ट (फसल निरीक्षण), भू-अभिलेख संधारण, भू-नामान्तरण, जन्म-मृत्यु लेखा, सरकारी सम्पत्ति निगरानी, "न्याय आपके द्वार" अभियान, ग्राम सेवक पर नियंत्रण।
पटवार ट्रेनिंग स्कूल (6)(1) टोंक (2) कोटा (3) देवखेड़ा (अलवर) (4) देबारी (उदयपुर) (5) गजसिंहपुर (श्रीगंगानगर) (6) जोधपुर
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
तहसीलदार 2nd Class Mag.अलवर रियासत 1781नायब तहसीलदारकानूनगोपटवारीRSMSSBगिरदावरीलेखपाल (UP)कारनाम (TN)6 पटवार ट्रेनिंग स्कूल

7राजस्व मण्डल (Board of Revenue) | सिविल सेवा अपील अधिकरण

◈ राजस्व मण्डल — परिचय

पहलूविवरण
स्थापना01 नवम्बर 1949 — राजप्रमुख सवाई मानसिंह II के अध्यादेश द्वारा।
प्रकृतिराज्य में राजस्व मामलों का सर्वोच्च कोर्ट (अर्द्ध-न्यायिक निकाय)।
उद्देश्यकाश्तकार को भूमि विवाद में शीघ्र और सस्ता न्याय दिलाना।
मुख्यालयअजमेर। सर्किट बेंच — जयपुर में।
चलन्यायालय (Mobile Court)सदस्य नियमित रूप से राज्य के संभागीय मुख्यालयों पर चल-न्यायालय लगाते हैं।
"न्याय आपके द्वार"ग्राम पंचायत स्तर पर लोक अदालतें — आपसी सहमति से भूमि विवाद।
संरचनाअध्यक्ष — IAS (मुख्य सचिव स्तर)। 20 सदस्य — IAS, उच्च न्यायिक सेवा, राजस्व विशेषज्ञ, वकील।
प्रथम अध्यक्षबृजचंद शर्मा।
पत्रिका"राविरा" — त्रैमासिक पत्रिका (राजस्व मण्डल द्वारा)।
प्रथम राजस्व दिवस15 अक्टूबर 2020।
कृषि व पशुगणनाप्रत्येक 5 वर्ष में कराता है।

◈ राजस्व न्यायालयों की श्रृंखला (Hierarchy)

स्तरन्यायालय / अधिकारीअपील किससे?
सर्वोच्चराजस्व मण्डल, अजमेर
संभागसंभागीय आयुक्त (Commissioner)राजस्व मण्डल
जिलाजिला कलेक्टर / जिलाधीशसंभागीय आयुक्त
उपखण्डउपखण्ड अधिकारी (SDO)कलेक्टर
तहसीलतहसीलदारSDO
उपतहसीलनायब तहसीलदारतहसीलदार

◈ राजस्व मण्डल के प्रमुख कार्य

◈ राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण

पहलूविवरण
गठन1 जुलाई 1976 — राजस्थान सिविल सेवा अधिनियम 1976 के तहत् जयपुर में।
चलपीठ (Jodhpur)1996 में जोधपुर में गठित।
जयपुर का क्षेत्राधिकारजयपुर, अजमेर, भरतपुर व कोटा संभाग।
जोधपुर का क्षेत्राधिकारजोधपुर, उदयपुर एवं बीकानेर संभाग।
CAT (Central Administrative Tribunal)जयपुर व जोधपुर में — क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण राजस्थान।
उपनिवेशन विभाग (Colonization Dept.)गठन — मई 1955। कार्य — भूमि का विकास एवं आवंटन।

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. "जिला" — Districtus (Latin) = "न्यायिक प्रशासन"। मौर्यकाल → जनपद (राजुका)। गुप्तकाल → विषय। सल्तनत → परगना। मुगल → सरकार। 2. वर्तमान 41 जिले = 33 मूल + 8 नए (यथावत)। 9 रद्द। 3 संभाग रद्द (29 Dec 2024)। 3. Warren Hastings 1772 ने Collector पद सृजित। प्रथम कलेक्टर — Ralph Sheldon। 1787 से "Little Napoleon"। 4. Collector = DM + Revenue Collector + DDO + CAO — चतुर्भूमिका। 5. DM — धारा 144, SP पर नियंत्रण, मृत्युदण्ड प्रमाणित करना। DDMA का अध्यक्ष। 6. SDO — उपखण्ड का सर्वोच्च अधिकारी, प्रथम श्रेणी Exec. Mag.। 7. तहसीलदार — RTS सेवा। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। 2nd Class Exec. Mag.। 8. पटवारी — RSMSSB भर्ती। अन्य नाम: TN-कारनाम, Maharashtra-तलैठी, UP-लेखपाल। 9. राजस्व मण्डल — स्थापना 1 नवम्बर 1949। अजमेर HQ। "राविरा" पत्रिका। प्रथम अध्यक्ष — बृजचंद शर्मा। 10. राजस्व न्यायालय की श्रृंखला: Board of Revenue → Commissioner → Collector → SDO → Tehsildar → Naib Tehsildar। 11. सिविल सेवा अपील अधिकरण — 1 July 1976, Jaipur। चलपीठ — Jodhpur 1996। 12. "जिलाधीश, जिला प्रशासन की धुरी है।" — Vajpayee। "संस्थागत करिश्मा" — Rajni Kothari।

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