📋 इस अध्याय में
- संभाग — परिचय, प्रशासनिक महत्व एवं संभागीय आयुक्त का पद सृजन
- संभागीय व्यवस्था का इतिहास — प्रारम्भ, बंद एवं पुनः शुरुआत
- संभागों का तुलनात्मक चार्ट — सीमाएँ, जिले, विशेषताएँ
- जिला — परिचय, ऐतिहासिक विकास एवं संवैधानिक स्थिति
- राजस्थान के 41 जिले — वर्तमान संरचना (दिसम्बर 2024 अनुसार)
- प्रशासनिक पदसोपान एवं जिला प्रशासन की संरचना
- जिला कलेक्टर के चार रूपों में कार्य
- उपखण्ड प्रशासन (SDO) — शक्तियाँ एवं कार्य
- तहसील, उपतहसील, कानूनगो एवं पटवारी प्रशासन
- राजस्व मण्डल (Board of Revenue) | सिविल सेवा अपील अधिकरण
📌 संभागीय व्यवस्था एवं संभागीय आयुक्त
1संभाग — परिचय, प्रशासनिक महत्व एवं संभागीय आयुक्त का पद सृजन
संभाग (Division) एक प्रशासनिक इकाई है जो जिला और राज्य सचिवालय के बीच की कड़ी के रूप में कार्य करता है। यह मध्यवर्ती स्तर पर प्रशासनिक समन्वय का केन्द्र है।
| पहलू | विवरण |
|---|
| परिभाषा | जिला और राज्य सचिवालय के बीच मध्यवर्ती प्रशासनिक इकाई। |
| प्रशासनिक प्रमुख | संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) — IAS अधिकारी। |
| राज्य प्रशासन पदसोपान | मुख्य सचिव (राज्य) → संभागीय आयुक्त (संभाग) → जिला कलेक्टर (जिला)। |
| पद सृजन | 1829 में लॉर्ड विलियम बैंटिक ने कलेक्टरों के कार्यों पर निगरानी हेतु। |
| कड़ी | जिला कलेक्टर एवं मुख्य सचिव के बीच। |
| शक्तियाँ | राजस्व, न्यायिक, प्रशासनिक एवं नियंत्रणकारी — चारों प्रकार की शक्तियाँ। |
◈ संभागीय आयुक्त के प्रमुख कार्य
1. अधीनस्थ जिलों के प्रशासन पर नियंत्रण एवं कार्यों में समन्वय।
2. संभाग में संचालित योजनाओं की मॉनिटरिंग।
3. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर नियंत्रण।
4. भू-राजस्व से संबंधित मामलों की सुनवाई — राजस्व अपीलीय प्राधिकारी।
5. प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की जाँच।
6. जिला प्रमुख का त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को दिया जाता है।
7. जिला स्तर पर CM आदेशों और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी।
◈ संभागीय आयुक्त कार्यालय — संगठन
| पद | सेवा |
|---|
| संभागीय आयुक्त | IAS |
| अतिरिक्त संभागीय आयुक्त | RAS |
| उपनिदेशक (सांख्यिकी) / राजस्व लेखा निरीक्षक / तहसीलदार / नायब तहसीलदार | अधीनस्थ सेवा |
| कार्यालय अधीक्षक | — |
| सांख्यिकी सहायक / कम्प्यूटर / अन्य मंत्रालयिक कार्मिक | — |
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
1829 Lord William BentinckIASराजस्व अपीलीयPDS नियंत्रणCS-Collector के बीच कड़ीRAS अतिरिक्त आयुक्त
2संभागीय व्यवस्था का इतिहास — प्रारम्भ, बंद एवं पुनः शुरुआत
| तिथि | घटना | CM / विवरण |
|---|
| 30 मार्च 1949 | संभागीय व्यवस्था की शुरुआत | CM हीरालाल शास्त्री। राजस्थान के एकीकरण के चौथे चरण (वृहत् राजस्थान) में। प्रारम्भ में 5 संभाग — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा। |
| अप्रैल 1962 | व्यवस्था बंद | CM मोहनलाल सुखाड़िया। कारण — आयुक्त के कार्य राजस्व बोर्ड व कलेक्टर के कार्यों का दोहराव; अनावश्यक संघर्ष। |
| 1962 के बाद | 4 विशेष आयुक्त जारी रहे | जोधपुर (मरुस्थल विकास), बीकानेर (IGNP), उदयपुर (जनजातीय विकास), कोटा (चम्बल कमाण्ड क्षेत्र) — ये भू-राजस्व नहीं, केवल योजना कार्य। |
| 26 जनवरी 1987 | व्यवस्था पुनः शुरू | CM हरिदेव जोशी। 6 संभागों के साथ। |
| 1987 | अजमेर 6वाँ संभाग | जयपुर संभाग को तोड़कर अजमेर संभाग बना। |
| 4 जून 2005 | भरतपुर 7वाँ संभाग | जयपुर व कोटा संभाग को तोड़कर। |
| 17 मार्च 2023 | 3 नए संभाग घोषित | बाँसवाड़ा, पाली, सीकर। |
| 7 अगस्त 2023 | 3 नए संभाग गठित | — |
| 29 दिसम्बर 2024 | 3 नए संभाग निरस्त | 28 Dec 2024 कैबिनेट बैठक में निर्णय। 29 Dec 2024 अधिसूचना। वापस 7 संभाग। |
⭐ वर्तमान स्थिति:
29 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना के पश्चात् — राजस्थान में कुल 7 संभाग। बाँसवाड़ा, सीकर, पाली संभाग निरस्त। इनके जिले मूल संभागों में वापस मिले।
⚠️ 1962 में बंद — कारण: (1) संभागीय आयुक्त के कार्य राजस्व बोर्ड व जिला कलेक्टर के कार्यों का दोहराव था। (2) इससे अनावश्यक प्रशासनिक संघर्ष एवं असहयोग उत्पन्न होता था।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
30 Mar 1949हीरालाल शास्त्री5 संभाग 19491962 बंद सुखाड़िया1987 पुनः हरिदेव जोशीअजमेर 6वाँ 1987भरतपुर 7वाँ 200529 Dec 2024 — 7 संभाग
3 & 4. राजस्थान के 7 संभाग — विस्तृत विवरण (वर्तमान 2024 अनुसार)
वर्तमान में राजस्थान में 7 संभाग हैं। प्रत्येक संभाग के जिले, सीमावर्ती संभाग, अंतर्राज्यीय/अंतर्राष्ट्रीय सीमाएँ एवं विशेष तथ्य नीचे दिए गए हैं।
🔷 1. बीकानेर संभाग (4 जिले)
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (4) | (1) बीकानेर (2) चुरू (3) हनुमानगढ़ (4) गंगानगर |
| सीमावर्ती संभाग (3) | जोधपुर, अजमेर, जयपुर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | पाकिस्तान — न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभाग |
| अंतर्राज्यीय सीमा | पंजाब, हरियाणा |
| विशेष तथ्य | यहाँ केवल आंतरिक प्रवाह की नदियाँ। न्यूनतम दशकीय वृद्धि दर वाला संभाग। |
🔷 2. जोधपुर संभाग (8 जिले) — सर्वाधिक जिले
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (8) | (1) जोधपुर (2) बाड़मेर (3) बालोतरा (4) जैसलमेर (5) जालोर (6) पाली (7) फलौदी (8) सिरोही |
| सीमावर्ती संभाग (3) | उदयपुर, अजमेर, बीकानेर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | पाकिस्तान — सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा वाला संभाग |
| अंतर्राज्यीय सीमा | गुजरात |
| विशेष तथ्य | सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला संभाग। पश्चिमी संभाग। न्यूनतम साक्षरता एवं जनसंख्या घनत्व। सर्वाधिक दशकीय वृद्धि। |
🔷 3. जयपुर संभाग (7 जिले) — सर्वाधिक जनसंख्या
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (7) | (1) जयपुर (2) अलवर (3) दौसा (4) कोटपूतली-बहरोड़ (5) खैरथल-तिजारा (6) झुन्झुनूं (7) सीकर |
| सीमावर्ती संभाग (3) | भरतपुर, अजमेर, बीकानेर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | नहीं |
| अंतर्राज्यीय सीमा | हरियाणा |
| विशेष तथ्य | सर्वाधिक जनसंख्या एवं जनसंख्या घनत्व। सर्वाधिक साक्षरता। सर्वाधिक SC आबादी। |
🔷 4. उदयपुर संभाग (7 जिले) — दो भागों में विभाजित
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (7) | (1) उदयपुर (2) बाँसवाड़ा (3) चित्तौड़गढ़ (4) डूंगरपुर (5) प्रतापगढ़ (6) राजसमंद (7) सलूम्बर |
| सीमावर्ती संभाग (3) | जोधपुर, अजमेर, कोटा |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | नहीं |
| अंतर्राज्यीय सीमा | गुजरात, मध्यप्रदेश — सर्वाधिक अंतर्राज्यीय सीमा वाला संभाग |
| विशेष तथ्य | यह 2 भागों में टूटा हुआ है (इसे तोड़ने वाला — अजमेर संभाग)। सर्वाधिक लिंगानुपात। सर्वाधिक ST आबादी। कर्क रेखा यहाँ से गुजरती है। सर्वाधिक नदियों का उद्गम यहाँ। |
🔷 5. कोटा संभाग (4 जिले) — न्यूनतम जनसंख्या
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (4) | (1) कोटा (2) बूंदी (3) बारां (4) झालावाड़ |
| सीमावर्ती संभाग (3) | भरतपुर, अजमेर, उदयपुर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | नहीं |
| अंतर्राज्यीय सीमा | मध्यप्रदेश |
| विशेष तथ्य | न्यूनतम जनसंख्या वाला संभाग। सर्वाधिक नदियाँ प्रवाहित होती हैं। |
🔷 6. अजमेर संभाग (6 जिले) — मध्यवर्ती संभाग
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (6) | (1) अजमेर (2) भीलवाड़ा (3) ब्यावर (4) डीडवाना-कुचामन (5) नागौर (6) टोंक |
| सीमावर्ती संभाग (6) | बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, जयपुर — सभी 6 संभागों से सीमा |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | नहीं |
| अंतर्राज्यीय सीमा | मध्यप्रदेश — न्यूनतम अंतर्राज्यीय सीमा |
| विशेष तथ्य | मध्यवर्ती संभाग — सभी 6 संभागों से सीमा। यह 2 भागों में टूटा (इसे तोड़ने वाले जोधपुर व उदयपुर)। |
🔷 7. भरतपुर संभाग (5 जिले) — सर्वाधिक राज्यों से सीमा
| पहलू | विवरण |
|---|
| जिले (5) | (1) भरतपुर (2) डीग (3) करौली (4) धौलपुर (5) सवाईमाधोपुर |
| सीमावर्ती संभाग (3) | कोटा, अजमेर, जयपुर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमा | नहीं |
| अंतर्राज्यीय सीमा | हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश — सर्वाधिक 3 राज्यों से सीमा |
| विशेष तथ्य | पूर्वी संभाग। सर्वाधिक राज्यों (3) के साथ सीमा। न्यूनतम लिंगानुपात। सबसे छोटा क्षेत्रफल। |
3संभागों का तुलनात्मक चार्ट — सीमाएँ, जिले, विशेषताएँ
| संभाग | जिले | संभागों से सीमा | अंतर्राज्यीय सीमा | अंत. सीमा |
|---|
| बीकानेर | 04 | 03 (जोधपुर, अजमेर, जयपुर) | पंजाब, हरियाणा | पाकिस्तान |
| जोधपुर | 08 | 03 (उदयपुर, अजमेर, बीकानेर) | गुजरात | पाकिस्तान |
| जयपुर | 07 | 03 (भरतपुर, अजमेर, बीकानेर) | हरियाणा | नहीं |
| उदयपुर | 07 | 03 (जोधपुर, अजमेर, कोटा) | गुजरात, मध्यप्रदेश | नहीं |
| कोटा | 04 | 03 (भरतपुर, अजमेर, उदयपुर) | मध्यप्रदेश | नहीं |
| अजमेर | 06 | 06 (सभी 6 संभाग) | मध्यप्रदेश | नहीं |
| भरतपुर | 05 | 03 (कोटा, अजमेर, जयपुर) | हरियाणा, UP, MP | नहीं |
◈ परीक्षा उपयोगी तथ्य
📊 जिलों की संख्या के आधार पर
- 8 जिले — जोधपुर (सर्वाधिक)
- 7 जिले — जयपुर व उदयपुर
- 6 जिले — अजमेर
- 5 जिले — भरतपुर
- 4 जिले — कोटा व बीकानेर (न्यूनतम)
🌍 भौगोलिक/जनसांख्यिकीय
- सर्वाधिक क्षेत्रफल — जोधपुर
- न्यूनतम क्षेत्रफल — भरतपुर
- सर्वाधिक जनसंख्या — जयपुर
- न्यूनतम जनसंख्या — कोटा
- उत्तर — बीकानेर | दक्षिण — उदयपुर
- पूर्व — भरतपुर | पश्चिम — जोधपुर
- मध्यवर्ती — अजमेर
| विशेष | संभाग |
|---|
| सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय सीमा | जोधपुर |
| न्यूनतम अंतर्राष्ट्रीय सीमा | बीकानेर |
| अंतर्राष्ट्रीय सीमावर्ती संभाग (2) | जोधपुर व बीकानेर |
| सर्वाधिक अंतर्राज्यीय सीमा | उदयपुर |
| न्यूनतम अंतर्राज्यीय सीमा | अजमेर |
| सर्वाधिक राज्यों से सीमा (3) | भरतपुर — हरियाणा, UP, MP |
| सर्वाधिक संभागों से सीमा (6) | अजमेर |
| सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व | जयपुर |
| न्यूनतम जनसंख्या घनत्व | जोधपुर |
| सर्वाधिक साक्षरता | जयपुर |
| न्यूनतम साक्षरता | जोधपुर |
| सर्वाधिक लिंगानुपात | उदयपुर |
| न्यूनतम लिंगानुपात | भरतपुर |
| सर्वाधिक ST आबादी | उदयपुर |
| सर्वाधिक SC आबादी | जयपुर |
| कर्क रेखा | उदयपुर |
| सर्वाधिक नदियाँ प्रवाहित | कोटा |
| सर्वाधिक नदियों का उद्गम | उदयपुर |
| 2 भागों में टूटे संभाग | उदयपुर (तोड़ने वाला — अजमेर) + अजमेर (तोड़ने वाले — जोधपुर, उदयपुर) |
| केवल आंतरिक प्रवाह नदियाँ | बीकानेर |
| सर्वाधिक दशकीय वृद्धि | जोधपुर |
| न्यूनतम दशकीय वृद्धि | बीकानेर |
◈ राज्यों से सीमावर्ती संभाग
| राज्य | सीमावर्ती संभाग | संख्या |
|---|
| पंजाब | बीकानेर | 1 |
| हरियाणा | बीकानेर, जयपुर, भरतपुर | 3 |
| उत्तर प्रदेश | भरतपुर | 1 |
| मध्यप्रदेश | भरतपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर | 4 |
| गुजरात | उदयपुर, जोधपुर | 2 |
| पाकिस्तान (अंतर्राष्ट्रीय) | जोधपुर, बीकानेर | 2 |
📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)
1. संभाग — जिला व राज्य सचिवालय के बीच मध्यवर्ती इकाई। प्रशासनिक प्रमुख — संभागीय आयुक्त (IAS)। 2. पद सृजन — 1829 में लॉर्ड विलियम बैंटिक। 3. संभागीय व्यवस्था प्रारम्भ — 30 मार्च 1949 (CM हीरालाल शास्त्री, 5 संभाग)। 4. व्यवस्था बंद — अप्रैल 1962 (CM मोहनलाल सुखाड़िया — दोहराव व संघर्ष कारण)। 5. पुनः शुरू — 26 जनवरी 1987 (CM हरिदेव जोशी)। 6. 6वाँ संभाग — अजमेर (1987)। 7वाँ — भरतपुर (4 जून 2005)। 7. 3 नए संभाग (सीकर, पाली, बाँसवाड़ा) — 29 दिसम्बर 2024 को निरस्त। वर्तमान में 7 संभाग। 8. सर्वाधिक जिले — जोधपुर (8)। न्यूनतम — बीकानेर व कोटा (4-4)। 9. सर्वाधिक क्षेत्रफल — जोधपुर। न्यूनतम — भरतपुर। 10. सर्वाधिक जनसंख्या — जयपुर। न्यूनतम — कोटा। 11. अंतर्राष्ट्रीय सीमा — जोधपुर (सर्वाधिक) + बीकानेर (न्यूनतम)। 12. अजमेर — मध्यवर्ती संभाग, सभी 6 संभागों से सीमा। भरतपुर — 3 राज्यों से सीमा। 13. उदयपुर — ST, लिंगानुपात, कर्क रेखा, नदी उद्गम। जयपुर — SC, साक्षरता, घनत्व।
📌 जिला प्रशासन (District Administration)
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1जिला — परिचय, ऐतिहासिक विकास एवं संवैधानिक स्थिति
"जिला" शब्द लैटिन "Districtus" से आया है, जिसका अर्थ है "न्यायिक प्रशासन"। जिला भारतीय प्रशासन की आधारभूत भौगोलिक इकाई है — यह वह धुरी है जिस पर समूचा फील्ड-प्रशासन टिका है।
| काल | जिले का नाम | प्रमुख का नाम | विशेष |
|---|
| मौर्यकाल | जनपद | राजुका | जिला प्रशासन का वर्तमान स्वरूप सर्वप्रथम मौर्यकाल में। "जनपद" शब्द अभी भी UP में प्रचलित। |
| गुप्तकाल / हर्षकाल | विषय | विषयपति | — |
| सल्तनत काल | परगना | फौजदार | — |
| मुगलकाल | सरकार | अमालगुजार / अमिल | — |
| ब्रिटिश काल | District | Collector / DM | Warren Hastings 1772 ने पद सृजित किया। |
◈ संवैधानिक एवं सामान्य तथ्य
- संविधान में उल्लेख : Art. 233 में "जिला न्यायाधीश" की नियुक्ति में "जिला" शब्द।
- 73वें व 74वें संशोधन द्वारा भाग-9 व 9(क) में "जिला" शब्द सम्मिलित।
- सामान्यतः जिले की जनसंख्या — 10 लाख। क्षेत्र — 4000 वर्ग मील।
- जिला — स्थानीय क्षेत्रों व राज्य प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी।
- राजस्थान में महत्वपूर्ण पड़ाव : 1 नवम्बर 1956 को अजमेर — 26वाँ जिला। 26 जनवरी 2008 को प्रतापगढ़ — 33वाँ जिला (परमेशचन्द्र समिति की सिफारिश पर)।
📖 प्रतापगढ़ (33वाँ जिला, 26 जनवरी 2008):
चित्तौड़गढ़ से — अरनोद, छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़। उदयपुर से — धरियावाद। बाँसवाड़ा से — पीपलखूंट। इन 5 तहसीलों को मिलाकर बनाया गया।
2राजस्थान के 41 जिले — वर्तमान संरचना (दिसम्बर 2024 अनुसार)
पिछली सरकार ने 19 नए जिले बनाए जिससे कुल संख्या 50 हो गई थी। नई सरकार ने डॉ. ललित के. पंवार समिति की सिफारिशों पर 9 जिले रद्द किए। अब राजस्थान में कुल 41 जिले हैं।
❌ रद्द किए गए 9 जिले
- 1. जयपुर ग्रामीण → जयपुर में
- 2. जोधपुर ग्रामीण → जोधपुर में
- 3. दूदू → जयपुर में
- 4. केकड़ी → अजमेर, टोंक में
- 5. शाहपुरा → भीलवाड़ा में
- 6. नीम का थाना → सीकर, झुंझुनूं में
- 7. गंगापुर सिटी → सवाई माधोपुर, करौली में
- 8. सांचौर → जालोर में
- 9. अनूपगढ़ → श्रीगंगानगर, बीकानेर में
✅ यथावत रखे 8 नए जिले
- 1. बालोतरा (बाड़मेर से)
- 2. ब्यावर (अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद से)
- 3. डीग (भरतपुर से)
- 4. डीडवाना-कुचामन (नागौर से)
- 5. कोटपूतली-बहरोड़ (जयपुर, अलवर से)
- 6. खैरथल-तिजारा (अलवर से)
- 7. फलौदी (जोधपुर, जैसलमेर से)
- 8. सलूम्बर (उदयपुर से)
🧠 रद्द 9 जिले — याद करने की ट्रिक:
महानगरीय विभाजन — जयपुर ग्रामीण, जोधपुर ग्रामीण। मध्य राजस्थान बेल्ट — दूदू, केकड़ी, शाहपुरा। परिधीय क्षेत्र — अनूपगढ़, सांचौर, नीम का थाना, गंगापुर सिटी। (33 → 50 → 41 का सफर)
◈ 41 जिले — संभागवार सूची
| क्र. | जिला | संभाग | क्र. | जिला | संभाग |
|---|
| 1 | बीकानेर ★ | बीकानेर | 22 | जयपुर ★ | जयपुर |
| 2 | चुरू ★ | बीकानेर | 23 | अलवर ★ | जयपुर |
| 3 | हनुमानगढ़ ★ | बीकानेर | 24 | दौसा ★ | जयपुर |
| 4 | श्रीगंगानगर ★ | बीकानेर | 25 | कोटपूतली-बहरोड़ 🆕 | जयपुर |
| 5 | जोधपुर ★ | जोधपुर | 26 | खैरथल-तिजारा 🆕 | जयपुर |
| 6 | बाड़मेर ★ | जोधपुर | 27 | झुंझुनूं ★ | जयपुर |
| 7 | बालोतरा 🆕 | जोधपुर | 28 | सीकर ★ | जयपुर |
| 8 | जैसलमेर ★ | जोधपुर | 29 | उदयपुर ★ | उदयपुर |
| 9 | जालोर ★ | जोधपुर | 30 | बाँसवाड़ा ★ | उदयपुर |
| 10 | पाली ★ | जोधपुर | 31 | चित्तौड़गढ़ ★ | उदयपुर |
| 11 | फलौदी 🆕 | जोधपुर | 32 | डूंगरपुर ★ | उदयपुर |
| 12 | सिरोही ★ | जोधपुर | 33 | प्रतापगढ़ ★ | उदयपुर |
| 13 | कोटा ★ | कोटा | 34 | राजसमंद ★ | उदयपुर |
| 14 | बूंदी ★ | कोटा | 35 | सलूम्बर 🆕 | उदयपुर |
| 15 | बारां ★ | कोटा | 36 | भरतपुर ★ | भरतपुर |
| 16 | झालावाड़ ★ | कोटा | 37 | डीग 🆕 | भरतपुर |
| 17 | अजमेर ★ | अजमेर | 38 | करौली ★ | भरतपुर |
| 18 | भीलवाड़ा ★ | अजमेर | 39 | धौलपुर ★ | भरतपुर |
| 19 | ब्यावर 🆕 | अजमेर | 40 | सवाईमाधोपुर ★ | भरतपुर |
| 20 | डीडवाना-कुचामन 🆕 | अजमेर | 41 | नागौर ★ | अजमेर |
| 21 | टोंक ★ | अजमेर | — | — | — |
⭐ नोट:
★ = मूल/पुराने जिले | 🆕 = नए (यथावत रखे गए) जिले। कुल 33 मूल + 8 नए = 41 जिले। रद्द 3 संभाग (बाँसवाड़ा, पाली, सीकर) — 29 दिसम्बर 2024 अधिसूचना।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
41 जिले7 संभाग33 मूल जिले8 नए यथावत9 रद्दपंवार समिति50→41राम लुभाया कमेटी (नए बनाए)29 Dec 2024
3प्रशासनिक पदसोपान एवं जिला प्रशासन की संरचना
| प्रशासनिक इकाई | संख्या | राजस्व/प्रशासनिक अधिकारी |
|---|
| राज्य | 1 | मुख्य सचिव (CS) |
| संभाग | 7 | संभागीय आयुक्त (DC) — IAS |
| जिला | 41 | जिला कलेक्टर / DM — IAS (2009 से RAS भी) |
| अतिरिक्त जिला | — | अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADC/ADM) |
| उपखण्ड | — | उपखण्ड अधिकारी (SDO/SDM) — प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट |
| तहसील | — | तहसीलदार — द्वितीय श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट |
| उपतहसील | — | नायब तहसीलदार — अराजपत्रित |
| पटवार सर्किल | — | भू-अभिलेख निरीक्षक / कानूनगो / गिरदावर |
| खसरा / ग्राम | — | पटवारी — ग्राम स्तर का प्रमुख राजस्व प्रशासक |
◈ पुलिस प्रशासन की पदश्रृंखला
- SP → ASP → Dy.SP / CO → CI → ASI → HC (हेड कांस्टेबल) → Constable।
- SP जिला दण्डनायक (DM/Collector) के निर्देशन एवं अधीन कार्य करता है।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
CS→DC→DM→ADM→SDO→Tehsildar→Naib→Kanungo→Patwari41 जिलेIAS + 2009 से RAS भी
4. जिला कलेक्टर — इतिहास, नाम, उपनाम एवं महत्व
जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासन का वह केन्द्रबिन्दु है जो एक साथ राजस्व अधिकारी, दण्डनायक, विकास समन्वयक और आपदा प्रबंधक है। इसे जिले में "लघु राज्य सरकार" का दर्जा प्राप्त है।
| वर्ष | घटना | विवरण |
|---|
| 1772 | पद सृजन | Warren Hastings ने बंगाल में जिला कलेक्टर पद बनाया। भू-राजस्व अधिकार दिए। प्रथम कलेक्टर — राल्फ शैल्डन। |
| 1773 | पद समाप्त | — |
| 1781 | पुनः शुरुआत | — |
| 1787 | शक्ति विस्तार | राजस्व के साथ दण्डनायक (Magistrate) की शक्तियाँ भी दी गईं। कलेक्टर "Little Napoleon" बना। |
| 1793 | शक्ति सीमित | Lord Cornwallis ने शक्तियाँ घटाईं। बाद में Lord Mackenzie ने पुनः विस्तारित कीं। |
| 1858 | शक्ति सुदृढ़ | ब्रिटिश सम्राट के अधीन भारत — कलेक्टर और अधिक शक्तिशाली। |
| 2009 | RAS को Collector | राजस्थान में पहली बार RAS अधिकारियों को जिला कलेक्टर पदस्थापित किया जाने लगा। |
◈ अलग-अलग राज्यों में नाम
| नाम | राज्य | भूमिका |
|---|
| Deputy Commissioner (DC) | पंजाब, हरियाणा, असम, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर | — |
| Deputy Magistrate
/ जिला दण्डनायक | उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल | — |
| जिला कलेक्टर / जिलाधीश | राजस्थान | मुख्य उपयोग |
| जिला दण्डाधिकारी (DM) | जब भू-राजस्व संग्रहण करे | Revenue role |
| जिला विकास अधिकारी (DDO) | जब विकास कार्यों का समन्वय करे | Development role |
◈ महत्वपूर्ण कथन एवं उपनाम
| कथन / उपनाम | स्रोत |
|---|
| "जिलाधीश, जिला प्रशासन की धुरी है।" | अटल बिहारी वाजपेयी |
| "संस्थागत करिश्मा (Institutional Charisma)" | रजनी कोठारी |
| "कहीं दूसरी जगह जिलाधीश नामक अधिकारी न तो हुआ है तथा न ही होगा।" | के.के. दास |
| "जिलाधीश की तुलना एक कछुए से की है, जिसकी पीठ पर भारत सरकार का हाथी खड़ा है।" | रैम्जे मैक्डोनैल्ड |
| "जिलाधीश को एक अधिवक्ता, एक लेखाविद्, एक सर्वेक्षणकर्त्ता तथा राजपत्रों को तैयार करने वाला लेखक होना चाहिए।" | साइमन आयोग (1930) |
| "Little Napoleon" (लिटल नेपोलियन) | ब्रिटिशकाल में 1787 के बाद |
| "जिला प्रशासन की आँख, कान व हाथ (बांह)" | जिला कलेक्टर का उपनाम |
| "लघु राज्य सरकार" | जिला में कलेक्टर की बहुआयामी भूमिका |
- CARD समिति (1985) — जिला प्रशासन के लिए गठित। अध्यक्ष — G.V.K. राव।
- पुस्तक — "District Administration in India" (1979) — एस.एस. खेरा द्वारा।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
Warren Hastings 1772Little NapoleonCARD Committee GVK Raoरजनी कोठारीवाजपेयीIAS + RAS 2009Ralph Sheldon
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4जिला कलेक्टर के चार रूपों में कार्य
जिला कलेक्टर एकल व्यक्ति है किन्तु उसकी भूमिकाएँ चतुर्दिक हैं। वह एक साथ दण्डनायक, भूमि अधिकारी, विकास समन्वयक और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी है।
◈ भूमिका 1 — जिला दण्डनायक (District Magistrate — DM)
| क्र. | कार्य |
|---|
| 1 | जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखना। SP, DM के निर्देशन में कार्य करता है। |
| 2 | अधीनस्थ कार्यकारी मजिस्ट्रेटों (ADM→SDM→2nd Exec. Mag.) का निरीक्षण। |
| 3 | CrPC के निवारक खण्ड के मुकदमों की सुनवाई + दावा रहित सम्पत्ति का निस्तारण। |
| 4 | मृत्युदण्ड के कार्यान्वयन को प्रमाणित करना। |
| 5 | सरकार को वार्षिक अपराध प्रतिवेदन। |
| 6 | विदेशियों के पासपोर्ट की जाँच। |
| 7 | प्रेस कानून, मनोरंजन कर अधिनियम लागू करना। |
| 8 | CrPC — धारा 144 लागू करना। असामाजिक तत्वों पर नियंत्रण। |
| 9 | मण्डल आयुक्त की अनुपस्थिति में जिला विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष। |
| 10 | स्थानीय निकायों पर नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण। |
| 11 | शस्त्र, होटल, विस्फोटक पदार्थों के लाइसेंस की अनुमति व नियंत्रण। |
◈ भूमिका 2 — जिला कलेक्टर / जिलाधीश (Revenue)
| क्र. | कार्य |
|---|
| 1 | भू-राजस्व का संग्रहण। |
| 2 | भूमि अधिग्रहण, भू-मूल्यांकन, भू-अभिलेख एवं भू-सुधार लागू करना। |
| 3 | कृषि ऋणों का वितरण (तकावी ऋण)। |
| 4 | प्राकृतिक आपदाओं — बाढ़, सूखा, अकाल, महामारी में आपदा प्रबंधन। |
| 5 | जिला बैंकर समन्वय समिति की अध्यक्षता। |
| 6 | जिला योजना केन्द्र की अध्यक्षता। |
| 7 | पेट्रोल, शराब, मादक पदार्थों पर आबकारी शुल्क व नियंत्रण। |
| 8 | स्टाम्प अधिनियम लागू करना। |
| 9 | भूमि विवाद संबंधी अपील की सुनवाई। |
◈ भूमिका 3 — जिला विकास अधिकारी / समन्वयक (DDO)
| क्र. | कार्य |
|---|
| 1 | जिले की विकास परियोजनाओं की निगरानी व क्रियान्वयन। |
| 2 | जिला प्रशासन एवं राज्य सरकार के मध्य समन्वय। |
| 3 | लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण नीति लागू करना + पंचायतीराज संस्थाओं में समन्वय। |
| 4 | जिला प्रशासन, NGO, विभागों के मध्य समन्वय। |
| 5 | शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल, बिजली व यातायात की व्यवस्था। |
| 6 | जिला योजना क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष। |
| 7 | जिले के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी के रूप में। |
◈ भूमिका 4 — मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO)
| क्र. | कार्य |
|---|
| 1 | जिले में मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी। |
| 2 | जिला निर्वाचन अधिकारी। |
| 3 | मुख्य जनगणना अधिकारी। |
| 4 | दैनिक जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति व वितरण पर निगरानी। |
| 5 | अधीनस्थों की गतिविधियों का निरीक्षण व प्रशिक्षण। |
| 6 | जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) का अध्यक्ष — आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 (जनवरी 2006 से लागू)। |
| 7 | जिला कोषागार व उपकोषागार का पर्यवेक्षण। |
| 8 | राष्ट्रीय पर्वों में ध्वजारोहण। |
| 9 | सरकारी आवास आवंटन, डाक बंगले, सर्किट हाउस निरीक्षण। |
| 10 | सैन्य अधिकारियों से सम्पर्क। |
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
DMCollectorDDODDMAधारा 144तकावी ऋणस्टाम्प अधिनियमआपदा प्रबंधन 2005जनगणना अधिकारी
5उपखण्ड प्रशासन (SDO) — शक्तियाँ एवं कार्य
जिले को उपखण्डों में विभाजित किया गया है। उपखण्ड का सर्वोच्च अधिकारी SDO (Sub-Divisional Officer) होता है — जो मुख्य भू-राजस्व अधिकारी और प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट दोनों है।
| भूमिका | SDO के प्रमुख कार्य |
|---|
| भू-राजस्व अधिकारी | भू-अभिलेख तैयार करना, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना, कृषि उत्पादन का आकलन, अधीनस्थों (तहसीलदार, नायब, कानूनगो, पटवारी) पर नियंत्रण, ग्रामवार भूमि नक्शे, गिरदावरी रिपोर्ट। |
| उपखण्ड मजिस्ट्रेट(1st Class Executive Mag.) | कानून-शांति व्यवस्था, पुलिस थानों/चौकियों का निरीक्षण, धारा-144 आदेश, वार्षिक अपराध रिपोर्ट कलेक्टर को। |
| भू-न्यायिक अधिकारी | भूमि, सीमा विवाद, चारागाह, भू-अभिलेख, राजस्व, सम्पत्ति, मुआवजे संबंधी विवाद। |
| प्रशासनिक अधिकारी | विकास कार्यक्रम संचालन, जनता की शिकायतें, PDS दुकानें नियंत्रण, BPL जनगणना, चुनाव कार्य। |
💡 अवधारणा:
SDO = Sub-Divisional Officer। कुछ राज्यों में SDM (Sub-Divisional Magistrate) कहते हैं। जिला कलेक्टर के निर्देशन में कार्य। उपखण्ड का मुख्य भू-राजस्व अधिकारी + प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
SDO/SDMप्रथम श्रेणी Exec. Mag.भू-राजस्वधारा 144BPL जनगणनागिरदावरीअतिक्रमण
6तहसील, उपतहसील, कानूनगो एवं पटवारी प्रशासन
◈ तहसील एवं तहसीलदार
"तहसील" अरबी भाषा का शब्द है — "मालगुजारी वसूलने वाली इकाई"। तहसीलदार RTS (Rajasthan Tehsildar Service — अधीनस्थ सेवा) का सदस्य है। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। SDO के निर्देशन में।
| भूमिका | तहसीलदार के कार्य |
|---|
| भू-राजस्व अधिकारी | भू-अभिलेखों का निरुपण, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, राजस्व संग्रहण, उल्लंघनकर्ताओं को दण्डित करना। |
| न्यायिक
(2nd Class Exec. Mag.) | काश्तकारी, चारागाह, सीमा, सम्पत्ति विवाद, सरकारी भूमि अतिक्रमण, राजकीय पत्रों का तामिली कार्य। |
| प्रशासनिक | PDS दुकानें नियंत्रण, जन्म-मृत्यु पंजीयन, जनगणना, जाति व मूल निवास प्रमाण पत्र, उपकोषालय, राहत भुगतान, चुनाव प्रबंधन। |
⭐ तहसील का इतिहास:
मुगलकाल से वर्तमान स्वरूप। राजस्थान में सर्वप्रथम अलवर रियासत (1781) में "तहसील" शब्द का प्रयोग। बाद में बीकानेर व अजमेर में।
◈ नायब तहसीलदार एवं कानूनगो / गिरदावर
| अधिकारी | विवरण |
|---|
| नायब तहसीलदार | तहसील की उप-इकाई (उपतहसील) का प्रमुख। अराजपत्रित अधिकारी। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। तहसीलदार के निर्देशन में। |
| कानूनगो / गिरदावर / भू-अभिलेख निरीक्षक | पटवार सर्किल का प्रमुख। नायब तहसीलदार व पटवारी के बीच कड़ी। पटवारी इसके अधीन। |
◈ पटवारी — ग्राम स्तर का राजस्व प्रशासक
पटवारी भारतीय राजस्व व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है। आम आदमी का सरकार से सबसे पहला सम्पर्क पटवारी के माध्यम से होता है।
| पहलू | विवरण |
|---|
| उल्लेख | मुगलकाल से पटवारी पद का उल्लेख। |
| नियुक्ति | राजस्व मण्डल, अजमेर। भर्ती — RSMSSB (राजस्थान अधीनस्थ एवं मंत्रालयिक सेवा चयन बोर्ड)। |
| अन्य नाम | तमिलनाडु — कारनाम | महाराष्ट्र — तलैठी | उत्तर प्रदेश — लेखपाल |
| प्रमुख कार्य | भू-राजस्व संग्रहण, गिरदावरी रिपोर्ट (फसल निरीक्षण), भू-अभिलेख संधारण, भू-नामान्तरण, जन्म-मृत्यु लेखा, सरकारी सम्पत्ति निगरानी, "न्याय आपके द्वार" अभियान, ग्राम सेवक पर नियंत्रण। |
| पटवार ट्रेनिंग स्कूल (6) | (1) टोंक (2) कोटा (3) देवखेड़ा (अलवर) (4) देबारी (उदयपुर) (5) गजसिंहपुर (श्रीगंगानगर) (6) जोधपुर |
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
तहसीलदार 2nd Class Mag.अलवर रियासत 1781नायब तहसीलदारकानूनगोपटवारीRSMSSBगिरदावरीलेखपाल (UP)कारनाम (TN)6 पटवार ट्रेनिंग स्कूल
7राजस्व मण्डल (Board of Revenue) | सिविल सेवा अपील अधिकरण
◈ राजस्व मण्डल — परिचय
| पहलू | विवरण |
|---|
| स्थापना | 01 नवम्बर 1949 — राजप्रमुख सवाई मानसिंह II के अध्यादेश द्वारा। |
| प्रकृति | राज्य में राजस्व मामलों का सर्वोच्च कोर्ट (अर्द्ध-न्यायिक निकाय)। |
| उद्देश्य | काश्तकार को भूमि विवाद में शीघ्र और सस्ता न्याय दिलाना। |
| मुख्यालय | अजमेर। सर्किट बेंच — जयपुर में। |
| चलन्यायालय
(Mobile Court) | सदस्य नियमित रूप से राज्य के संभागीय मुख्यालयों पर चल-न्यायालय लगाते हैं। |
| "न्याय आपके द्वार" | ग्राम पंचायत स्तर पर लोक अदालतें — आपसी सहमति से भूमि विवाद। |
| संरचना | अध्यक्ष — IAS (मुख्य सचिव स्तर)। 20 सदस्य — IAS, उच्च न्यायिक सेवा, राजस्व विशेषज्ञ, वकील। |
| प्रथम अध्यक्ष | बृजचंद शर्मा। |
| पत्रिका | "राविरा" — त्रैमासिक पत्रिका (राजस्व मण्डल द्वारा)। |
| प्रथम राजस्व दिवस | 15 अक्टूबर 2020। |
| कृषि व पशुगणना | प्रत्येक 5 वर्ष में कराता है। |
◈ राजस्व न्यायालयों की श्रृंखला (Hierarchy)
| स्तर | न्यायालय / अधिकारी | अपील किससे? |
|---|
| सर्वोच्च | राजस्व मण्डल, अजमेर | — |
| संभाग | संभागीय आयुक्त (Commissioner) | राजस्व मण्डल |
| जिला | जिला कलेक्टर / जिलाधीश | संभागीय आयुक्त |
| उपखण्ड | उपखण्ड अधिकारी (SDO) | कलेक्टर |
| तहसील | तहसीलदार | SDO |
| उपतहसील | नायब तहसीलदार | तहसीलदार |
◈ राजस्व मण्डल के प्रमुख कार्य
- भू-अभिलेख संबंधी — राजस्व इकाइयों का गठन, भूमि सुधार, राजस्व ग्रामों की घोषणा।
- न्यायिक — उपनिवेशन अधिनियम, सार्वजनिक सम्पत्ति एक्ट, नगरीय भूमि अधिनियम के अधीन अपीलें।
- कृषि सांख्यिकी एकत्र करना।
- प्रत्येक 5 वर्ष बाद कृषि गणना एवं पशुगणना।
- Minor Irrigation Statistics — रेशनलाइजेशन योजना का क्रियान्वयन।
◈ राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण
| पहलू | विवरण |
|---|
| गठन | 1 जुलाई 1976 — राजस्थान सिविल सेवा अधिनियम 1976 के तहत् जयपुर में। |
| चलपीठ (Jodhpur) | 1996 में जोधपुर में गठित। |
| जयपुर का क्षेत्राधिकार | जयपुर, अजमेर, भरतपुर व कोटा संभाग। |
| जोधपुर का क्षेत्राधिकार | जोधपुर, उदयपुर एवं बीकानेर संभाग। |
| CAT (Central
Administrative Tribunal) | जयपुर व जोधपुर में — क्षेत्राधिकार सम्पूर्ण राजस्थान। |
| उपनिवेशन विभाग
(Colonization Dept.) | गठन — मई 1955। कार्य — भूमि का विकास एवं आवंटन। |
📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)
1. "जिला" — Districtus (Latin) = "न्यायिक प्रशासन"। मौर्यकाल → जनपद (राजुका)। गुप्तकाल → विषय। सल्तनत → परगना। मुगल → सरकार। 2. वर्तमान 41 जिले = 33 मूल + 8 नए (यथावत)। 9 रद्द। 3 संभाग रद्द (29 Dec 2024)। 3. Warren Hastings 1772 ने Collector पद सृजित। प्रथम कलेक्टर — Ralph Sheldon। 1787 से "Little Napoleon"। 4. Collector = DM + Revenue Collector + DDO + CAO — चतुर्भूमिका। 5. DM — धारा 144, SP पर नियंत्रण, मृत्युदण्ड प्रमाणित करना। DDMA का अध्यक्ष। 6. SDO — उपखण्ड का सर्वोच्च अधिकारी, प्रथम श्रेणी Exec. Mag.। 7. तहसीलदार — RTS सेवा। नियुक्ति — राजस्व मण्डल। 2nd Class Exec. Mag.। 8. पटवारी — RSMSSB भर्ती। अन्य नाम: TN-कारनाम, Maharashtra-तलैठी, UP-लेखपाल। 9. राजस्व मण्डल — स्थापना 1 नवम्बर 1949। अजमेर HQ। "राविरा" पत्रिका। प्रथम अध्यक्ष — बृजचंद शर्मा। 10. राजस्व न्यायालय की श्रृंखला: Board of Revenue → Commissioner → Collector → SDO → Tehsildar → Naib Tehsildar। 11. सिविल सेवा अपील अधिकरण — 1 July 1976, Jaipur। चलपीठ — Jodhpur 1996। 12. "जिलाधीश, जिला प्रशासन की धुरी है।" — Vajpayee। "संस्थागत करिश्मा" — Rajni Kothari।
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