🏛️ अध्याय 1/12 — राजस्थान राज्यव्यवस्था

राज्यपाल

Governor of Rajasthan | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय एवं संवैधानिक स्थिति
  2. नियुक्ति — अनुच्छेद 155 (Appointment)
  3. योग्यताएँ एवं सेवा शर्तें (अनुच्छेद 157–158)
  4. कार्यकाल एवं पदावधि — अनुच्छेद 156
  5. शपथ, अनुच्छेद 160 एवं संवैधानिक उन्मुक्तियाँ
  6. कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)
  7. विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)
  8. वीटो पॉवर एवं अध्यादेश (अनुच्छेद 200 व 213)
  9. वित्तीय एवं न्यायिक शक्तियाँ (Financial & Judicial Powers)
  10. स्वविवेकीय शक्तियाँ — अनुच्छेद 163(2) (Discretionary Powers)
  11. राज्यपाल संबंधी प्रमुख आयोग एवं समितियाँ
  12. अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति शासन एवं राजस्थान
  13. राजस्थान के राज्यपाल — सूची एवं विशेष तथ्य
  14. राज्यपाल संबंधी महत्वपूर्ण कथन एवं उपमाएँ

1परिचय एवं संवैधानिक स्थिति

भारतीय संविधान में संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System) अपनाई गई है, जिसमें दोहरी कार्यपालिका (Dual Executive) होती है — एक नाममात्र का प्रमुख और एक वास्तविक प्रमुख। ठीक वैसे ही जैसे किसी कंपनी में Chairman और CEO होते हैं — Chairman नाम का मालिक होता है, लेकिन असली काम CEO करता है। राज्य स्तर पर यही भूमिका क्रमशः राज्यपाल (Governor) और मुख्यमंत्री (Chief Minister) की है।

राज्यपाल का उल्लेख भारतीय संविधान के भाग-6 (Part VI) में अनुच्छेद 153 से 162 तक मिलता है। यह पद संवैधानिक तथा गरिमामय है।

राज्यपाल की दोहरी भूमिका (Dual Role)

📖 परिभाषा

राज्यपाल — राज्य का औपचारिक/संवैधानिक प्रमुख जो राष्ट्रपति की तरह मंत्रिपरिषद की सलाह पर कार्य करता है। वास्तविक शक्तियाँ मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली राज्य मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं।

पदसंवैधानिक प्रमुखवास्तविक प्रमुखसर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी
राज्य स्तरराज्यपाल (Governor)मुख्यमंत्री (CM)मुख्य सचिव (Chief Secretary)
केन्द्र स्तरराष्ट्रपति (President)प्रधानमंत्री (PM)कैबिनेट सचिव

अनुच्छेद 153 — राज्यपाल का पद

⭐ महत्वपूर्ण

7वें संविधान संशोधन 1956 के प्रमुख परिणाम: (1) राज्यों की श्रेणियाँ A, B, C, D समाप्त (भाग-7, अनुच्छेद 238 निरसित), (2) एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है, (3) लोकसभा सीटें 500 से बढ़कर 525 हुईं, (4) राजप्रमुख (Rajpramukh) के स्थान पर राज्यपाल पद आरम्भ।

🧠 याद करने की ट्रिक

राजस्थान के प्रथम राजप्रमुख → सवाई मानसिंह (30 मार्च, 1949) | राजस्थान के प्रथम राज्यपाल → गुरुमुख निहालसिंह (पदभार: 1 नवम्बर, 1956)

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 153भाग-6दोहरी भूमिकाऔपचारिक प्रमुख7वाँ संशोधनसंसदीय शासनदोहरी कार्यपालिका

2नियुक्ति — अनुच्छेद 155 (Appointment)

राज्यपाल की नियुक्ति का तरीका उसकी संवैधानिक स्थिति को समझने की कुंजी है। संविधान निर्माताओं ने काफी विचार-विमर्श के बाद नियुक्त राज्यपाल को निर्वाचित राज्यपाल के विकल्प के रूप में चुना। इस प्रावधान की प्रेरणा कनाडा के संविधान से ली गई।

नियुक्ति की प्रक्रिया

निर्वाचित राज्यपाल को क्यों अस्वीकार किया?

संविधान सभा में राज्यपाल के निर्वाचन बनाम नियुक्ति पर गहन बहस हुई। अंततः निर्वाचित राज्यपाल की योजना को छोड़ा गया क्योंकि:

1. यदि राज्यपाल निर्वाचित होता तो मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों जनप्रतिनिधि होते — टकराव (Conflict) अवश्यंभावी होता।

2. निर्वाचित राज्यपाल बहुमत दल का राजनीतिक प्यादा बन सकता था, जिससे राजनीतिक द्वंद्व और अलगाववाद को बल मिलता।

3. संसदीय प्रणाली में राज्यपाल की भूमिका नाममात्र की है, इसलिए चुनाव पर अतिरिक्त व्यय अनावश्यक होता।

4. मजबूत केन्द्र के लिए नियुक्त राज्यपाल आवश्यक है — केन्द्र का राज्यों पर प्रभावी नियंत्रण सम्भव हो सके।

💡 अवधारणा

भारत में संघात्मक शासन "केन्द्र की ओर झुकी हुई" (Centre-tilted Federalism) है। नियुक्त राज्यपाल इस व्यवस्था का मुख्य उपकरण है जिसके माध्यम से केन्द्र राज्यों पर प्रभावी नियंत्रण रखता है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 155राष्ट्रपति द्वारा नियुक्तिअधिपत्र (Warrant)कनाडा मॉडलकेन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाहCentre-tilted Federalism

3योग्यताएँ एवं सेवा शर्तें (अनुच्छेद 157–158)

अनुच्छेद 157 — योग्यताएँ (Qualifications)

⚠️ सावधान राज्यपाल पद के लिए कोई शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification) एवं अधिकतम आयु सीमा (Maximum Age Limit) का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। यह राज्यपाल को राष्ट्रपति से अलग करता है जहाँ भी 35 वर्ष न्यूनतम आयु है।

अनुच्छेद 158 — सेवा शर्तें (Service Conditions)

⭐ महत्वपूर्ण

राज्यपाल के परिलब्धियों, भत्तों एवं विशेषाधिकारों का विस्तृत उल्लेख संविधान की दूसरी अनुसूची (Second Schedule) में है। यदि एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल है तो वेतन उस अनुपात में मिलेगा जो राष्ट्रपति आदेश द्वारा निर्धारित करे — अनुच्छेद 158(3क)।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 157अनुच्छेद 15835 वर्ष न्यूनतमभारतीय नागरिकद्वितीय अनुसूची₹3.50 लाख वेतनकर मुक्त

4कार्यकाल एवं पदावधि — अनुच्छेद 156

अनुच्छेद 156 राज्यपाल के कार्यकाल की महत्वपूर्ण व्यवस्था करता है। संविधान ने राज्यपाल को स्थायित्व और लचीलेपन का संतुलन प्रदान किया है।

⭐ महत्वपूर्ण

बी.पी. सिंघल बनाम भारत संघ, 2010 — सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने निर्धारित किया कि राज्यपाल को मनमाने आधार पर (Arbitrary Ground) नहीं हटाया जा सकता। पद-रिक्तता पर उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश कार्यभार संभालता है।

💡 अवधारणा

राज्यपाल, महान्यायवादी (Attorney General), प्रधानमंत्री व केन्द्रीय मंत्रिपरिषद — ये सभी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत कार्य करते हैं। राज्यपालों के स्थानान्तरण का प्रावधान संविधान में नहीं है, परंतु व्यवहार में राष्ट्रपति केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह से एक राज्य से दूसरे राज्य में स्थानान्तरण करता है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 156राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत5 वर्ष कार्यकालत्यागपत्रपुनर्नियुक्तिB.P. Synghal Case 2010
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5शपथ, अनुच्छेद 160 एवं संवैधानिक उन्मुक्तियाँ

अनुच्छेद 159 — शपथ (Oath)

📖 परिभाषा

राज्यपाल की शपथ में तीन संकल्प:

अनुच्छेद 160 — आकस्मिक उपबंध

अनुच्छेद 361 — उन्मुक्तियाँ एवं विशेषाधिकार (Immunities)

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 159तृतीय अनुसूचीHC मुख्य न्यायाधीशशपथअनुच्छेद 361उन्मुक्तिआपराधिक उन्मुक्ति

6कार्यकारी शक्तियाँ (Executive Powers)

राज्य की समस्त कार्यपालिका कार्यवाही राज्यपाल के नाम से की जाती है (अनुच्छेद 166)। राज्यपाल अपनी शक्तियों का प्रयोग स्वयं अथवा अधीनस्थ अधिकारियों (मुख्यमंत्री व मंत्रिपरिषद) के माध्यम से करता है — अनुच्छेद 154(1)।

राज्यपाल द्वारा की जाने वाली प्रमुख नियुक्तियाँ

नियुक्तिअनुच्छेदविशेष शर्त
मुख्यमंत्री (Chief Minister)अनुच्छेद 164विधानसभा में बहुमत प्राप्त दल का नेता
राज्य मंत्रिपरिषद के मंत्रीअनुच्छेद 164मुख्यमंत्री की सलाह पर
महाधिवक्ता (Advocate General)अनुच्छेद 165उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता
RPSC अध्यक्ष व सदस्यअनुच्छेद 316
राज्य निर्वाचन आयुक्तअनुच्छेद 243K, 243ZA
राज्य वित्त आयोगअनुच्छेद 243I, 243Y
जिला न्यायालय के न्यायाधीशअनुच्छेद 233HC के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श
सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतिराज्य विश्वविद्यालय अधिनियमनिजी विश्वविद्यालय शामिल नहीं
लोकायुक्त एवं उपलोकायुक्तराज्य लोकायुक्त अधिनियम
राज्य सूचना आयोग अध्यक्ष/सदस्यRTI Act, 2005
राज्य मानवाधिकार आयोगPHRA, 1993

अन्य महत्वपूर्ण कार्यकारी शक्तियाँ

राजस्थान में राज्यपाल के विशेष पद

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 154अनुच्छेद 164अनुच्छेद 165अनुच्छेद 166अनुच्छेद 167महाधिवक्ताRPSCकुलाधिपतिकुलपति नियुक्ति

7विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers)

राज्यपाल राज्य विधानमण्डल का अभिन्न अंग है। वह विधानमण्डल का सत्र बुलाने, सत्रावसान करने तथा विधानसभा भंग करने की शक्ति रखता है। इसके अलावा अभिभाषण, संदेश और मनोनयन की शक्तियाँ भी उसे प्राप्त हैं।

अनुच्छेद 174 — सत्र, सत्रावसान, विघटन

सत्रावसान (Prorogation) — राज्यपाल
  • राज्यपाल सत्र समाप्त करता है
  • सत्र के साथ बैठक भी समाप्त
  • कार्यसूची के बिंदु लैप्स हो जाते हैं
  • अगले सत्र में पुनः प्रस्तुत करना होगा
स्थगन (Adjournment) — विधानसभा अध्यक्ष
  • विधानसभा अध्यक्ष करता है
  • सत्र समाप्त नहीं होता
  • उस दिन की बैठक स्थगित
  • अनिश्चितकाल स्थगन = "Sine Die"
💡 अवधारणा

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर — "विधानसभा आहूत करना राज्यपाल का अधिकार नहीं, कर्तव्य है।" एक कैलेण्डर वर्ष में समस्त सत्रों की बैठकों की कुल संख्या 60 से कम नहीं होनी चाहिए।

अनुच्छेद 175 — अभिभाषण एवं संदेश

अनुच्छेद 176 — विशेष अभिभाषण

अनुच्छेद 171 व 333 — मनोनयन

⭐ महत्वपूर्ण

104वें संविधान संशोधन 2020 द्वारा: (1) अनुच्छेद 331 (लोकसभा में 2 एंग्लो-इंडियन मनोनयन) और अनुच्छेद 333 (विधानसभा में 1 एंग्लो-इंडियन मनोनयन) समाप्त। (2) SC/ST का आरक्षण लोकसभा/विधानसभाओं में 10 वर्ष के लिए बढ़ाया गया।

अनुच्छेद 192 — सदस्यों की अयोग्यता का निर्णय

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 174सत्रसत्रावसानSine Dieअनुच्छेद 175अनुच्छेद 176विशेष अभिभाषणबजट सत्र104वाँ संशोधनमनोनयन

8वीटो पॉवर एवं अध्यादेश (अनुच्छेद 200 व 213)

अनुच्छेद 200 — वीटो पॉवर (Veto Power)

जब कोई विधेयक विधानमण्डल से पारित होकर राज्यपाल के पास जाता है तो राज्यपाल के पास तीन विकल्प होते हैं। "Veto" लैटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ "निषेध" (मना करना) है।

विकल्पप्रकारविवरण
1. अनुमति देनासामान्यविधेयक कानून/अधिनियम बन जाता है — राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद।
2. निलम्बनकारी वीटोअस्थायी निषेधविधेयक पुनर्विचार हेतु लौटाना — विधानमण्डल पुनः भेजे तो राज्यपाल देने को बाध्य। धन विधेयक पर लागू नहीं।
3. आत्यांतिक वीटोपूर्ण निषेधअनुमति देने से पूर्णतः मना — सामान्यतः गैर-सरकारी विधेयकों पर। विधेयक समाप्त हो जाता है।
4. राष्ट्रपति हेतु आरक्षण7 परिस्थितियों में राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजना — राज्यपाल की भूमिका तब समाप्त।

राष्ट्रपति के पास आरक्षित विधेयकों के 7 आधार

1. ऐसा विधेयक जो उच्च न्यायालय की शक्तियों में कमी (Curtailment) करता हो।

2. ऐसा विधेयक जो नीति-निर्देशक तत्वों (DPSP) के विरुद्ध हो।

3. अनुच्छेद 31C — सम्पत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण से संबंधित।

4. राष्ट्रीय महत्व का विधेयक।

5. संविधान के उपबंधों के विरुद्ध विधेयक।

6. देश के व्यापक हित के विरुद्ध विधेयक।

7. वित्तीय आपात के समय धन विधेयक।

राष्ट्रपति — 3 प्रकार के वीटो (अनुच्छेद 111)
  • निलम्बनकारी वीटो (Suspensive)
  • आत्यांतिक वीटो (Absolute)
  • जेबी वीटो (Pocket Veto) — भी है
राज्यपाल — 2 प्रकार के वीटो (अनुच्छेद 200)
  • निलम्बनकारी वीटो (Suspensive)
  • आत्यांतिक वीटो (Absolute)
  • जेबी वीटो (Pocket Veto) — नहीं है

अनुच्छेद 213 — अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance Power)

जब विधानमण्डल का सत्र नहीं चल रहा हो और तत्काल कानून की आवश्यकता हो तो राज्यपाल अपने हस्ताक्षर से एक आदेश जारी करता है जिसे अध्यादेश (Ordinance) कहते हैं। यह राज्यपाल की विधायी शक्ति है।

⭐ महत्वपूर्ण

डी.सी. वाधवा बनाम बिहार सरकार, 1987 — सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि बिना विधानमण्डल से पारित कराए बार-बार अध्यादेश जारी करना "अध्यादेश राज" है जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विरुद्ध है। राजस्थान में सर्वाधिक अध्यादेश 1949 में (49) और 2013 में (30) जारी किए गए।

⚠️ सावधान राज्यपाल को राष्ट्रपति के अनुदेशों के बिना अध्यादेश नहीं जारी करना है यदि: (क) विधेयक को विधानमण्डल में प्रस्तुत करने से पूर्व राष्ट्रपति की अनुमति आवश्यक हो, (ख) विधेयक राष्ट्रपति के विचार हेतु आरक्षित रखना आवश्यक हो, (ग) राज्य का अधिनियम राष्ट्रपति की स्वीकृति के बिना अवैध हो।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 200अनुच्छेद 213वीटोनिलम्बनकारीआत्यांतिकअध्यादेश42 दिन नियमDC Wadhwa Case 1987जेबी वीटो

9वित्तीय एवं न्यायिक शक्तियाँ (Financial & Judicial Powers)

वित्तीय शक्तियाँ

न्यायिक शक्तियाँ

अनुच्छेद 161 — क्षमा शक्ति की तुलना

राष्ट्रपति की क्षमा शक्ति (अनुच्छेद 72)
  • मृत्युदण्ड माफ कर सकता है
  • कोर्ट मार्शल के दण्ड को माफ/कम कर सकता है
  • संघ सूची + समवर्ती सूची के अपराध
  • तुलनात्मक रूप से अधिक व्यापक
  • पॉकेट वीटो का अधिकार है
राज्यपाल की क्षमा शक्ति (अनुच्छेद 161)
  • मृत्युदण्ड माफ नहीं कर सकता (स्थगित/लघुकृत कर सकता है)
  • कोर्ट मार्शल के दण्ड पर अधिकार नहीं
  • राज्य सूची + समवर्ती सूची के अपराध
  • तुलनात्मक रूप से सीमित
  • पॉकेट वीटो का अधिकार नहीं
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 161अनुच्छेद 198अनुच्छेद 202वार्षिक वित्तीय विवरणCAG रिपोर्टअनुच्छेद 233क्षमा शक्तिमृत्युदण्डHC शपथ
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10स्वविवेकीय शक्तियाँ — अनुच्छेद 163(2) (Discretionary Powers)

अनुच्छेद 163(1) के अनुसार राज्यपाल को सलाह देने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद होती है। परंतु अनुच्छेद 163(2) के अनुसार कुछ मामलों में राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य नहीं — यही स्वविवेकीय शक्ति है।

A. संविधान प्रदत्त स्वविवेकीय शक्तियाँ (Constitutional Discretion)

1. विधेयक को राष्ट्रपति हेतु आरक्षित रखना — अनुच्छेद 200।

2. राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करना — अनुच्छेद 356।

3. मुख्यमंत्री से सूचना माँगना — अनुच्छेद 167।

4. विधेयक को पुनर्विचार हेतु लौटाना (धन विधेयक छोड़कर) — अनुच्छेद 200।

5. अनुच्छेद 371 व अनुसूची 5 व 6 के अंतर्गत विशेष राज्यों में विशेष स्वविवेकीय शक्तियाँ।

B. परिस्थितिजन्य स्वविवेकीय शक्तियाँ (Situational Discretion)

1. त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) — स्पष्ट बहुमत न मिलने पर मुख्यमंत्री पद के लिए किसे आमंत्रित करें — स्वविवेक।

2. मुख्यमंत्री की अचानक मृत्यु व निश्चित उत्तराधिकारी नहीं — राज्यपाल स्वविवेक से नए मुख्यमंत्री नियुक्त करे।

3. अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर भी मंत्रिपरिषद त्यागपत्र न दे — राज्यपाल उसे बर्खास्त कर सकता है।

4. सरकार का बहुमत संदिग्ध लगे और CM बहुमत सिद्ध करने से इनकार करे — मंत्रिपरिषद बर्खास्त।

5. CM भ्रष्टाचार में दोषी हो परंतु इस्तीफा न दे — राज्यपाल मंत्रिपरिषद बर्खास्त कर सकता है।

6. राज्यपाल के अभिभाषण में अपने पूर्व कार्यों की आलोचना हो — उन वाक्यांशों को न पढ़ना राज्यपाल का विवेकाधिकार।

⭐ महत्वपूर्ण

नबाम रेबिया वाद, 2016 — उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि राज्यपाल की स्वविवेकीय शक्तियाँ [163(2)] सीमित हैं। राज्यपाल द्वारा की गई कार्यवाही काल्पनिक नहीं बल्कि तार्किक (Rational) होनी चाहिए।

💡 अवधारणा

अनुसूची 5, अनुच्छेद 244(1): अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय सलाहकार परिषद (20 सदस्य, 3/4 जनजातीय विधायक) — राज्यपाल इससे संबंधित वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को देता है। किसी भी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र का दर्जा राष्ट्रपति देता है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 163स्वविवेकीय शक्तित्रिशंकु विधानसभाHung Assemblyनबाम रेबिया 2016परिस्थितिजन्यसंविधान प्रदत्तअनुसूची 5

11राज्यपाल संबंधी प्रमुख आयोग एवं समितियाँ

भारत में केन्द्र-राज्य संबंध और राज्यपाल की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए समय-समय पर विभिन्न आयोगों और समितियों का गठन किया गया। इनकी सिफारिशें परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

आयोग/समितिगठन वर्षअध्यक्षप्रमुख सिफारिश
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग1966मोरारजी देसाईराज्यपाल एक ही बार नियुक्त हो; पुनर्नियुक्ति न हो; राज्यपाल प्रशासनिक व सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित हो।
भगवान सहाय समिति1970 (राष्ट्रपति द्वारा)भगवान सहायराज्यपाल व राज्य मंत्रिमण्डल के संबंध निश्चित करना।
राजमन्नार समिति1969 (तमिलनाडु)डॉ. पी.वी. राजमन्नार (रिपोर्ट 1971)राज्यपाल नियुक्ति में राज्य सरकार से परामर्श; राज्यपाल पद समाप्त करने की सिफारिश; अनुच्छेद 356-357 हटाने की सिफारिश।
सरकारिया आयोग1983 (रिपोर्ट 1988)न्यायमूर्ति रणजीत सिंह सरकारियासत्तारूढ़ दल का सक्रिय सदस्य राज्यपाल न हो; मुख्यमंत्री से परामर्श अनिवार्य; राज्यपाल राज्य का बाहरी व्यक्ति हो; 5 वर्ष से पूर्व राजनीतिक कारणों से न हटाया जाए।
वेंकटचलैया आयोग2000 (रिपोर्ट 2002)न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटचलैयाPM, गृहमंत्री, उपराष्ट्रपति, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री की समिति की सिफारिश पर राज्यपाल नियुक्ति; अनुच्छेद 356 का उपयोग सभी विकल्प समाप्त होने के बाद।
पूंछी आयोग2007 (रिपोर्ट 2010)न्यायमूर्ति मदनमोहन पूंछीकार्यकाल निश्चित हो; केन्द्र की इच्छा पर पदच्युति नहीं; 4 माह में विधेयक पर निर्णय; राज्यपाल को महाभियोग से हटाया जाए (राज्य विधानमण्डल द्वारा); विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति न बनाया जाए।
🧠 याद करने की ट्रिक

राजमन्नार + सरकारिया + पूंछी आयोग → ये तीनों केन्द्र-राज्य संबंध + राज्यपाल नियुक्ति से जुड़े हैं। "राज-सर-पूं" याद करो — राज=राजमन्नार, सर=सरकारिया, पूं=पूंछी।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
PAC 1966राजमन्नार 1971सरकारिया 1988वेंकटचलैया 2002पूंछी 2010केन्द्र-राज्य संबंधभगवान सहाय समिति

12अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति शासन एवं राजस्थान

जब किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाए तो राज्यपाल की लिखित सलाह पर, राष्ट्रपति द्वारा (केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह से) राज्य में राष्ट्रपति शासन की घोषणा की जा सकती है। यह भारतीय संघात्मक व्यवस्था का सर्वाधिक विवादास्पद प्रावधान है।

चरणविवरण
घोषणाराज्यपाल की लिखित सलाह पर राष्ट्रपति घोषणा करता है।
विधानसभा की स्थितिघोषणा के साथ ही विधानसभा निलंबित (Suspended); अनुमोदन के बाद भंग (Dissolved)।
संसदीय अनुमोदन2 माह के अंदर, साधारण बहुमत से दोनों सदनों में अनुमोदन।
अनुमोदन के बिना2 माह तक लागू रह सकता है।
अवधिएक बार अनुमोदन पर 6 माह; 6-6 माह करके अधिकतम 3 वर्ष।
न्यायिक समीक्षाS.R. Bommai Case, 1994 — राष्ट्रपति शासन की न्यायिक समीक्षा सम्भव।
⭐ महत्वपूर्ण

S.R. बोम्मई वाद (11 मार्च, 1994) — सर्वोच्च न्यायालय की 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने ऐतिहासिक निर्णय में कहा: (1) राष्ट्रपति शासन की शक्ति पूर्ण नहीं है — न्यायालय की समीक्षा के अधीन। (2) सरकार का बहुमत परीक्षण राजभवन में नहीं, विधानमण्डल में हो। (3) राष्ट्रपति शासन से पहले राज्य सरकार को शक्ति परीक्षण का मौका दिया जाए।

राजस्थान में राष्ट्रपति शासन — चार बार

क्र.अवधि (दिन)राज्यपाल (लागू)मुख्यमंत्रीकारणराष्ट्रपति
1.13 मार्च–26 अप्रेल 1967 (45 दिन) — सबसे कमसम्पूर्णानंदमोहनलाल सुखाड़ियाचुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहींडॉ. एस. राधाकृष्णन
2.30 अप्रेल–21 जून 1977 (53 दिन)वेदपाल त्यागीहरिदेव जोशीलोकसभा चुनाव में काँग्रेस की हारबी.डी. जत्ती (कार्यवाहक)
3.17 फरवरी–5 जून 1980 (109 दिन)रघुकुल तिलकभैरोसिंह शेखावतलोकसभा चुनाव में जनता पार्टी की हारनीलम संजीव रेड्डी
4.15 दिसम्बर 1992–3 दिसम्बर 1993 (353 दिन) — सबसे लंबाएम. चैन्नारेड्डीभैरोसिंह शेखावतबाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद की परिस्थितियाँशंकरदयाल शर्मा
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
अनुच्छेद 356राष्ट्रपति शासनSR Bommai 199442 दिनन्यायिक समीक्षाराजस्थान 4 बार353 दिन (1992-93)45 दिन (1967)

13राजस्थान के राज्यपाल — सूची एवं विशेष तथ्य

राजस्थान के राज्यपालों की सूची (1956 से अब तक)

क्र.राज्यपालकार्यकाल (से)कार्यकाल (तक)विशेष
1गुरुमुख निहालसिंह (प्रथम राज्यपाल)1 नव. 195615 अप्रेल 1962दिल्ली के CM; BHU कुलपति; सर्वाधिक 8 बार अभिभाषण
2सम्पूर्णानंद16 अप्रेल 196215 अप्रेल 1967UP के CM; 1962 भारत-चीन युद्ध के समय राज्यपाल; सांगानेर खुली जेल निर्माण
3हुकुम सिंह16 अप्रेल 196730 जून 1972लोकसभा अध्यक्ष (1962-67); "स्पोक्समैन" पत्रिका
4जोगिन्दर सिंह1 जुलाई 197214 फरवरी 1977 (त्यागपत्र)नेशनल राइफल एसोसिएशन महासचिव; राज्यपाल रिलीफ फण्ड 1973
5रघुकुल तिलक12 मई 19778 अगस्त 1981 (बर्खास्त)RPSC सदस्य; रेलवे सेवा चयन आयोग अध्यक्ष; 1981 में बर्खास्त
6ओ.पी. मेहरा6 मार्च 198231 जनवरी 1985एयर चीफ मार्शल; आत्मकथा "Sweet and Sour"; पद्मभूषण
7बसंतराव पाटिल20 नव. 198514 अक्टूबर 1987 (त्यागपत्र)महाराष्ट्र CM; गांधी जी के साथ सत्याग्रह; डाक टिकट जारी
8सुखदेव प्रसाद15 अक्टूबर 1987(दो कार्यकाल) 1990VP Singh सरकार ने 1990 में बर्खास्त किया
9देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय14 फरवरी 1990(त्यागपत्र 1991)इंडियन काउंसिल ऑफ फिलोसफी रिसर्च अध्यक्ष
10एम. चेन्नारेड्डी5 फरवरी 199230 मई 1993आंध्रप्रदेश CM; राजस्थान में चौथी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया
11बलिराम भगत30 जून 199330 अप्रेल 1998लोकसभा अध्यक्ष (1976-77); विदेश मंत्री व रक्षा मंत्री
12दरबारा सिंह1 मई 199823 मई 1998 (पद पर निधन)पंजाब CM; न्यूनतम कार्यकाल; पद पर रहते निधन होने वाले प्रथम राज्यपाल
13अंशुमन सिंह16 जनवरी 199913 मई 2003इलाहाबाद व राजस्थान HC के न्यायाधीश
14निर्मलचंद्र जैन14 मई 200322 सितम्बर 2003 (पद पर निधन)MP महाधिवक्ता; 11वें वित्त आयोग सदस्य; अभिभाषण दिए बिना निधन
15मदनलाल खुराना14 जनवरी 200431 अक्टूबर 2004 (त्यागपत्र)दिल्ली CM; "दिल्ली का शेर"; जनता दरबार आयोजित
16प्रतिभा देवीसिंह पाटिल8 नव. 200423 जून 2007 (त्यागपत्र)प्रथम महिला राज्यपाल; भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति; मेक्सिको पुरस्कार
17शैलेन्द्र कुमार सिंह6 सितम्बर 20071 दिसम्बर 2009 (पद पर निधन)विदेश सेवा में राजदूत; G-77 व IAEA अध्यक्ष; UN में India के Permanent Mission सदस्य
18प्रभाराव25 जनवरी 201026 अप्रेल 2010 (पद पर निधन)महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष की नेता; HP से अतिरिक्त प्रभार; निधन होने वाली एकमात्र महिला
19शिवराज पाटिल28 अप्रेल 201011 मई 2012लोकसभा अध्यक्ष (1991-96); गृहमंत्री; रक्षामंत्री; अतिरिक्त प्रभार (पंजाब)
20मार्गेट अल्वा12 मई 20127 अगस्त 2014 (त्यागपत्र)राज्यसभा उपसभापति; दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय सम्मान; उत्तराखण्ड की भी राज्यपाल
21कल्याण सिंह4 सितम्बर 20149 सितम्बर 2019UP CM; पद्म विभूषण (मरणोपरांत); कार्यकाल पूर्ण करने वाले तृतीय राज्यपाल
22कलराज मिश्र9 सितम्बर 201930 जुलाई 2024UP राजनेता; 44वें (पद क्रम से), जनसूचना पोर्टल 13 सितम्बर 2019 से
23हरिभाऊ किसनराव बागड़े31 जुलाई 2024वर्तमान (लगातार)महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष (2014-19); 45वें (पद क्रम से); 22वें व्यक्ति के अनुसार

राजस्थान के राज्यपाल — विशेष श्रेणियाँ

पद पर रहते निधन हुए
  • दरबारा सिंह (1998) — प्रथम
  • निर्मलचंद्र जैन (2003)
  • शैलेन्द्र कुमार सिंह (2009)
  • प्रभाराव (2010) — एकमात्र महिला
पद से त्यागपत्र देने वाले
  • जोगिन्दर सिंह (1977)
  • बसंतराव पाटिल (1987)
  • देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय (1991)
  • मदनलाल खुराना (2004)
  • प्रतिभा पाटिल (2007)
  • मार्गेट अल्वा (2014)
महिला राज्यपाल
  • प्रतिभा पाटिल (2004-07) — प्रथम
  • प्रभाराव (2009-10) — पद पर निधन
  • मार्गेट अल्वा (2012-14)
  • प्रभाराव — प्रथम कार्यवाहक महिला
पूर्ण कार्यकाल पूरा करने वाले
  • गुरुमुख निहालसिंह — प्रथम
  • सम्पूर्णानंद — द्वितीय
  • कल्याण सिंह — तृतीय
पूर्व मुख्यमंत्री जो राज्यपाल बने
  • गुरुमुख निहालसिंह (दिल्ली CM)
  • मदनलाल खुराना (दिल्ली CM)
  • सम्पूर्णानंद (UP CM)
  • कल्याण सिंह (UP CM)
  • एम. चेन्नारेड्डी (AP CM)
  • वसंतराव पाटिल (महाराष्ट्र CM)
  • दरबारा सिंह (पंजाब CM)
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष जो राज्यपाल बने
  • हुकुम सिंह (1962-67)
  • बलिराम भगत (1976-77)
  • शिवराज पाटिल (1991-96)

कार्यवाहक राज्यपाल एवं अतिरिक्त प्रभार

⭐ महत्वपूर्ण

राजस्थान के राज्यपाल तथ्य: सर्वाधिक कार्यकाल → गुरुमुख निहालसिंह | न्यूनतम कार्यकाल → दरबारा सिंह | रघुकुल तिलक — बर्खास्त किए जाने वाले राज्यपाल | सुखदेव प्रसाद — VP Singh सरकार ने 1990 में बर्खास्त | प्रतिभा पाटिल — भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनने वाली राजस्थान की राज्यपाल | सरोजनी नायडू — भारत के किसी राज्य (UP) की प्रथम महिला राज्यपाल; जयंती 13 फरवरी = राष्ट्रीय महिला दिवस।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
गुरुमुख निहालसिंहहरिभाऊ बागड़ेकलराज मिश्रकल्याण सिंहप्रतिभा पाटिलमार्गेट अल्वाप्रभारावदरबारा सिंहरघुकुल तिलक45वें राज्यपाल

14राज्यपाल संबंधी महत्वपूर्ण कथन एवं उपमाएँ

कथन / उपमाकिसने कहा
"राज्यपाल का पद केवल वेतन का आकर्षण है।"विजयलक्ष्मी पण्डित
"राज्यपाल का कार्य अतिथियों का सत्कार करने के अलावा कुछ नहीं है।"पट्टाभिसितारम्मैया
"राज्यपाल संवैधानिक औचित्य का प्रहरी तथा केन्द्र-राज्य संबंधों को प्रगाढ़ करने वाली कड़ी है।"के.एम. मुंशी
"राज्यपाल सोने के पिंजरे में बंद चिड़िया के समान है।"सरोजनी नायडू
"राज्यपाल पद को केन्द्र सरकार भी महत्व नहीं देती।"मार्गेट अल्वा
🧠 याद करने की ट्रिक

5 कथन याद करने की ट्रिक — "वेतन-सत्कार-प्रहरी-पिंजरा-महत्व" | विजयलक्ष्मी = वेतन | पट्टाभि = सत्कार | मुंशी = प्रहरी/कड़ी | सरोजनी = पिंजरा | अल्वा = महत्व नहीं

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. राज्यपाल का उल्लेख — भाग-6, अनुच्छेद 153-162; दोहरी भूमिका — राज्य का संवैधानिक प्रमुख + केन्द्र का प्रतिनिधि। 2. नियुक्ति — अनुच्छेद 155, राष्ट्रपति द्वारा अधिपत्र से, केन्द्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह पर। प्रेरणा स्रोत — कनाडा। 3. योग्यताएँ — अनुच्छेद 157: भारतीय नागरिक + न्यूनतम 35 वर्ष आयु। कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं। 4. कार्यकाल — अनुच्छेद 156: 5 वर्ष, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत। त्यागपत्र राष्ट्रपति को। पुनर्नियुक्ति सम्भव। 5. शपथ — अनुच्छेद 159, HC के मुख्य न्यायाधीश द्वारा, प्रारूप तृतीय अनुसूची में। 6. विधायी शक्तियाँ — सत्र बुलाना/सत्रावसान/विघटन (अनुच्छेद 174); अभिभाषण (175-176); अध्यादेश (213); वीटो (200)। 7. वीटो पॉवर — राज्यपाल के पास 2 प्रकार: निलम्बनकारी + आत्यांतिक। पॉकेट वीटो नहीं। राष्ट्रपति के पास 3 प्रकार। 8. अध्यादेश — अनुच्छेद 213: विधानमण्डल का सत्र न चले तो; 6 सप्ताह (42 दिन) में पारित हो; DC Wadhwa Case 1987। 9. क्षमा शक्ति — अनुच्छेद 161: मृत्युदण्ड माफ नहीं कर सकता (स्थगित कर सकता है); राज्य सूची/समवर्ती सूची के अपराध। 10. स्वविवेकीय शक्तियाँ — अनुच्छेद 163(2): संविधान प्रदत्त + परिस्थितिजन्य। नबाम रेबिया, 2016 — सीमित शक्तियाँ। 11. आयोग — सरकारिया (1988): सबसे महत्वपूर्ण। पूंछी (2010): महाभियोग से हटाने की सिफारिश। 12. अनुच्छेद 356 — राजस्थान में 4 बार राष्ट्रपति शासन। सबसे लंबा 353 दिन (1992-93)। S.R. Bommai 1994 — न्यायिक समीक्षा। 13. राजस्थान के राज्यपाल — प्रथम: गुरुमुख निहालसिंह (1 नव. 1956); वर्तमान (2024): हरिभाऊ किसनराव बागड़े (45वें)। 14. महिला राज्यपाल — प्रतिभा पाटिल (प्रथम, 2004) → बाद में भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति। सरोजनी नायडू — भारत में प्रथम। 15. उपमाएँ — के.एम. मुंशी: "संवैधानिक औचित्य का प्रहरी"; सरोजनी नायडू: "सोने के पिंजरे में बंद चिड़िया।"

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