🏰 अध्याय 14/14 — राजस्थान भूगोल

पर्यटन

Tourism | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. राजस्थान पर्यटन — परिचय एवं महत्व
  2. पर्यटन के प्रकार — वर्गीकरण
  3. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
  4. प्रमुख पर्यटन सर्किट
  5. नए पर्यटन सर्किट 2024-25
  6. धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन
  7. हेरिटेज (विरासत) पर्यटन
  8. ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन
  9. वन्यजीव, इको एवं साहसिक पर्यटन
  10. प्रमुख मेले एवं त्यौहार
  11. फिल्म पर्यटन, वेडिंग पर्यटन एवं वैश्विक ब्रांडिंग
  12. संस्थागत ढाँचा
  13. केंद्र सरकार की योजनाएँ
  14. राज्य सरकार की योजनाएँ
  15. पर्यटक सुरक्षा एवं जिम्मेदार पर्यटन
  16. नवीनतम आँकड़े एवं रुझान (2024-2026)
  17. नवीनतम अपडेट 2025-26
🌟 क्या आप जानते हैं?

ज़रा सोचिए — साल 2025 में अकेले राजस्थान में 25.44 करोड़ से ज़्यादा पर्यटक घूमने आए, यानी राज्य की कुल जनसंख्या (लगभग 8 करोड़) से भी तीन गुना ज़्यादा! यह आँकड़ा दिखाता है कि 'पधारो म्हारे देश' का न्यौता सचमुच पूरी दुनिया तक पहुँच चुका है। क्या आपने कभी सोचा है कि सीकर के एक छोटे से कस्बे खाटूश्यामजी में हर साल लाखों घरेलू श्रद्धालु क्यों पहुँचते हैं — इतने ज़्यादा कि यह जयपुर के आमेर किले से भी आगे निकल जाता है? और वहीं दूसरी ओर, विदेशी सैलानियों की पहली पसंद वही आमेर पैलेस बना रहता है, जिसकी हाथी सवारी व शीश महल की झिलमिलाती दीवारें उन्हें मंत्रमुग्ध कर देती हैं। और यह भी जानकर हैरानी होगी कि 2013 में राजस्थान के 6 पहाड़ी किले — आमेर, चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, जैसलमेर व गागरोण — एक साथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुए, यानी पूरी दुनिया ने माना कि ये किले सिर्फ राजस्थान की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की धरोहर हैं। हाल ही में तो जयपुर में IIFA अवार्ड्स जैसे बॉलीवुड के सबसे बड़े मंच का आयोजन भी हुआ, जिससे 'पिंक सिटी' की चमक सीधे पूरी दुनिया के टीवी स्क्रीन तक पहुँच गई। आइए, इस अंतिम अध्याय में राजस्थान के इस विशाल, रंगीन व सतत बढ़ते पर्यटन संसार को विस्तार से समझते हैं — किलों-महलों से लेकर मेलों-त्यौहारों तक, और सरकारी योजनाओं से लेकर 2025-26 के सबसे ताज़ा आँकड़ों तक।

1राजस्थान पर्यटन — परिचय एवं महत्व

राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य होने के साथ-साथ देश के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक भी है। यहाँ के भव्य किले-महल, रंग-बिरंगी संस्कृति, थार का रेगिस्तान, झीलें, वन्यजीव अभयारण्य, धार्मिक स्थल व जीवंत मेले-त्यौहार मिलकर एक ऐसा अनुभव रचते हैं जो विश्वभर में अद्वितीय माना जाता है। राजस्थान पर्यटन का आधिकारिक नारा 'पधारो म्हारे देश' (आइए, मेरे देश में पधारिए) राज्य की आतिथ्य-परंपरा को दर्शाता है।

सूचकमहत्व
अर्थव्यवस्था में योगदानपर्यटन राजस्थान की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों में से एक है — यह लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोज़गार देता है (होटल, गाइड, हस्तशिल्प, परिवहन, खानपान आदि क्षेत्रों में)
राष्ट्रीय रैंकिंगवर्ष 2024 में घरेलू व विदेशी पर्यटक यात्राओं के आधार पर राजस्थान को देश में 5वाँ स्थान प्राप्त हुआ
सांस्कृतिक कूटनीतिकिले-महल, हस्तशिल्प, लोक-कला व त्यौहारों के माध्यम से राजस्थान भारत की सॉफ्ट पावर (Soft Power) को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है
बहुआयामी स्वरूपविरासत, धार्मिक, ग्रामीण, वन्यजीव, साहसिक, फिल्म व वेडिंग — हर प्रकार के पर्यटन के लिए राजस्थान में विविध विकल्प उपलब्ध हैं

क्रॉस-रेफरेंस: राजस्थान की झीलों, वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों व जैव विविधता का विस्तृत विवरण अध्याय 2 (अपवाह तंत्र) व अध्याय 4 (वनस्पति एवं वन्यजीव) में पढ़ा जा चुका है — इस अध्याय में इन्हें पर्यटन स्थल के रूप में केवल संक्षेप में संदर्भित किया गया है, ताकि अनावश्यक पुनरावृत्ति न हो।

2पर्यटन के प्रकार — वर्गीकरण

दिसंबर 1995 में जयपुर में आयोजित पर्यटन निवेश सम्मेलन (INVESTOUR) में राजस्थान के पर्यटन को व्यवस्थित ढंग से विकसित करने हेतु इसे मुख्यतः 4 वर्गों में वर्गीकृत किया गया, जिसे बाद के वर्षों में और विस्तृत किया गया।

🏰 स्वरूप के आधार पर
  • ऐतिहासिक पर्यटन स्थल (किले, महल, हवेलियाँ)
  • सांस्कृतिक/धार्मिक पर्यटन स्थल (मंदिर, तीर्थ, मेले)
  • भौगोलिक/प्राकृतिक पर्यटन स्थल (झीलें, मरुस्थल, अभयारण्य)
🎯 गतिविधि के आधार पर
  • विरासत (Heritage) पर्यटन
  • धार्मिक (Religious/Spiritual) पर्यटन
  • ग्रामीण एवं जनजातीय (Rural & Tribal) पर्यटन
  • साहसिक, इको एवं वन्यजीव (Adventure, Eco & Wildlife) पर्यटन
💡 नई पर्यटन इकाई नीति 2024 का विस्तार

पुरानी नीति में केवल 16 प्रकार की पर्यटन इकाइयाँ परिभाषित थीं, जबकि पर्यटन इकाई नीति 2024 में इन्हें बढ़ाकर 24 प्रकार कर दिया गया है — जिसमें इको-टूरिज्म यूनिट, फिल्म सिटी, हेरिटेज रेस्टोरेंट, इंटीग्रेटेड टूरिज्म विलेज, मोटल व वेसाइड फैसिलिटी, रिज़ॉर्ट हाउसिंग, रूरल टूरिज्म यूनिट तथा टूरिज्म स्टार्ट-अप्स जैसी नई श्रेणियाँ शामिल की गई हैं। यह दर्शाता है कि सरकार अब पर्यटन को केवल 'घूमने' तक सीमित न रखकर एक व्यवस्थित उद्योग (Industry) के रूप में विकसित कर रही है।

3यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल

राजस्थान में कुल 9 स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में शामिल हैं, जो राज्य को भारत के सबसे समृद्ध विश्व-धरोहर राज्यों में से एक बनाते हैं।

क्रमस्थलवर्षश्रेणी
1केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर)1985प्राकृतिक धरोहर
2जंतर मंतर (जयपुर)2010सांस्कृतिक धरोहर
3आमेर का किला (जयपुर)2013राजस्थान के पहाड़ी किले
4चित्तौड़गढ़ का किला2013राजस्थान के पहाड़ी किले
5कुंभलगढ़ का किला (राजसमंद)2013राजस्थान के पहाड़ी किले
6रणथंभौर का किला (सवाई माधोपुर)2013राजस्थान के पहाड़ी किले
7जैसलमेर का किला2013राजस्थान के पहाड़ी किले
8गागरोण का किला (झालावाड़)2013राजस्थान के पहाड़ी किले
9जयपुर परकोटा नगर (Jaipur City, Walled City)2019सांस्कृतिक धरोहर

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र: राजस्थान के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों का जिलावार वितरण — हाथ से चिन्हित करने हेतु रिक्त मानचित्र

महत्वपूर्ण तथ्य: 'राजस्थान के पहाड़ी किले' (Hill Forts of Rajasthan) श्रेणी के अंतर्गत 6 किलों को एक साथ वर्ष 2013 में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया — यह भारत के किसी एक राज्य से एक साथ शामिल हुए किलों का सबसे बड़ा समूह है। ध्यान रहे कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहार) राजस्थान का पहला यूनेस्को स्थल था (1985), जबकि जयपुर परकोटा (Walled City) सबसे नया है (6 जुलाई 2019)।

4प्रमुख पर्यटन सर्किट

पर्यटन विभाग ने राजस्थान को भौगोलिक व सांस्कृतिक समानता के आधार पर अनेक पर्यटन सर्किटों में बाँटा है, ताकि पर्यटक एक ही यात्रा में आसपास के जुड़े हुए स्थलों को व्यवस्थित ढंग से देख सकें। राज्य में कुल 10 सामान्य पर्यटन सर्किट हैं (शेखावाटी, अलवर-भरतपुर, ढूँढाड़/जयपुर, मेवाड़/उदयपुर, मारवाड़/जोधपुर, हाड़ौती, शेखावाटी हवेली सर्किट, थार मरुस्थल सर्किट, अरावली सर्किट, वन्यजीव सर्किट आदि)।

आध्यात्मिक/तीर्थ पर्यटन सर्किट

सर्किटस्थलों की संख्याप्रमुख स्थल
बुद्ध पर्यटन सर्किट2 प्रमुख स्थलराजस्थान में बौद्ध अवशेषों से जुड़े स्थल
बालाजी पर्यटन सर्किट4 प्रमुख स्थलमेहंदीपुर बालाजी (दौसा) सहित हनुमान मंदिर श्रृंखला
कृष्णा पर्यटन सर्किट5 प्रमुख स्थलनाथद्वारा, कृष्ण गमन पथ से जुड़े स्थल
तीर्थ पर्यटन सर्किट4 प्रमुख स्थलजैन व अन्य धार्मिक तीर्थ स्थल

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र: राजस्थान के सामान्य एवं आध्यात्मिक पर्यटन सर्किटों का मार्ग — हाथ से चिन्हित करने हेतु रिक्त मानचित्र

5नए पर्यटन सर्किट 2024-25

पिछले दो वर्षों में 'विकास भी, विरासत भी' की सोच के तहत राजस्थान सरकार ने कई नए, विशेष-थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करने की घोषणा की है, जिनमें से प्रत्येक के लिए ₹100 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है।

🏛️ महाराणा प्रताप पर्यटन सर्किट 📍 मेवाड़ क्षेत्र (उदयपुर संभाग) | ऐतिहासिक/विरासत सर्किट — बजट ₹100 करोड़

📝 विवरण: यह सर्किट महाराणा प्रताप के जीवन व हल्दीघाटी युद्ध से जुड़े स्थलों को आपस में जोड़ता है — जिसमें चावंड (महाराणा प्रताप की अंतिम राजधानी), हल्दीघाटी (युद्ध स्थल), गोगुंदा (राज्याभिषेक स्थल), कुंभलगढ़ (जन्म स्थल के निकट), देवेर (दिवेर विजय स्थल) व उदयपुर शामिल हैं। 🎯 महत्व: यह सर्किट पर्यटकों को केवल स्मारक दिखाने तक सीमित न रहकर मेवाड़ के गौरवशाली प्रतिरोध-इतिहास को जीवंत अनुभव के रूप में प्रस्तुत करता है, और राजस्थान की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम बनता है।

🏛️ जनजातीय (ट्राइबल) पर्यटन सर्किट 📍 दक्षिणी राजस्थान (उदयपुर-प्रतापगढ़ क्षेत्र) | सांस्कृतिक/जनजातीय सर्किट — बजट ₹100 करोड़

📝 विवरण: यह सर्किट राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति व विरासत को प्रदर्शित करने हेतु सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य, ऋषभदेव (केसरियाजी) मंदिर, गौतमेश्वर मंदिर व मातृकुंडिया जैसे स्थलों को जोड़ता है। 🎯 महत्व: यह भील, गरासिया व अन्य जनजातियों (जिनका विस्तृत अध्ययन अध्याय 11 में किया जा चुका है) की जीवनशैली, कला व परंपराओं को पर्यटकों तक पहुँचाने के साथ-साथ स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोज़गार व आजीविका के नए अवसर भी उत्पन्न करता है।

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6धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन

धार्मिक पर्यटन राजस्थान में घरेलू पर्यटकों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ा वर्ग है — स्वयं खाटूश्यामजी (सीकर) राज्य का सबसे अधिक घरेलू पर्यटकों को आकर्षित करने वाला स्थल है, जो आमेर पैलेस जैसे विश्वप्रसिद्ध विरासत स्थल से भी आगे है।

धार्मिक स्थलजिलाप्रमुख देवता/महत्व
खाटूश्यामजीसीकरश्याम बाबा (बर्बरीक) — राज्य में सर्वाधिक घरेलू पर्यटक यहीं आते हैं
पुष्करअजमेरब्रह्मा मंदिर — विश्व का एकमात्र प्रमुख ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर सरोवर
नाथद्वाराराजसमंदश्रीनाथजी मंदिर (कृष्ण स्वरूप) — वल्लभ संप्रदाय का प्रमुख केंद्र
श्री महावीरजीकरौलीजैन तीर्थ स्थल
गलता तीर्थजयपुरसूर्य मंदिर एवं प्राकृतिक जल-कुंड
करणी माता मंदिरबीकानेर'चूहों वाला मंदिर' के नाम से विश्वप्रसिद्ध
मालासेरी डूंगरीउदयपुर (निकट)जनजातीय आस्था का केंद्र
💡 समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट विकास

खाटूश्यामजी, पुष्कर, नाथद्वारा, श्री महावीरजी व गलता तीर्थ को आपस में जोड़ते हुए एक समग्र (Integrated) धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु एक ही यात्रा योजना में इन सभी प्रमुख स्थलों के दर्शन कर सकें। इसके साथ ही केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन 2.0 व प्रसाद 2.0 योजनाओं के अंतर्गत खाटू श्याम जी, करणी माता मंदिर व मालासेरी डूंगरी सहित राज्य के कुल 252 धार्मिक पर्यटन स्थलों पर जीर्णोद्धार व विकास कार्य चल रहे हैं।

7हेरिटेज (विरासत) पर्यटन

शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना

शेखावाटी क्षेत्र (झुंझुनूं, सीकर व चूरू जिले) अपनी भित्ति-चित्रित (Fresco Painted) हवेलियों के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जिसे अक्सर 'खुले आसमान की आर्ट गैलरी' (Open Air Art Gallery) कहा जाता है। इन ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण हेतु शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना के अंतर्गत झुंझुनूं, सीकर व चूरू जिलों की कुल 662 हवेलियाँ संरक्षण हेतु चिन्हित की गई हैं।

हेरिटेज होटल योजना

राजस्थान के प्राचीन किलों, हवेलियों व राजसी भवनों को हेरिटेज होटल के रूप में परिवर्तित करने की योजना पर्यटन व संरक्षण दोनों को एक साथ साधती है — इसके अंतर्गत अब तक 62 नई हेरिटेज होटल/संपत्तियों को हेरिटेज प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। हेरिटेज होटल/रेस्टोरेंट को प्रचलित आबकारी नीति के अनुसार रियायती दरों पर कंपोज़िट बार लाइसेंस प्राप्त करने की पात्रता भी दी गई है।

8ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन

ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) के अंतर्गत पर्यटकों को गाँव के वास्तविक जीवन, हस्तशिल्प, स्थानीय भोजन व लोक-संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सीधा लाभ मिलता है।

ग्रामीण पर्यटन गाँवजिलाविशेषता
सामोदजयपुरहेरिटेज सामोद पैलेस, ग्रामीण परिवेश
नीमरानाअलवरऐतिहासिक नीमराना किला-महल, हेरिटेज रिज़ॉर्ट
मोलेलाराजसमंदपारंपरिक टेराकोटा (मिट्टी शिल्प) कला के लिए प्रसिद्ध

क्रॉस-रेफरेंस: जनजातीय पर्यटन सर्किट व जनजातियों (भील, मीणा, गरासिया, सहरिया आदि) की सामाजिक-सांस्कृतिक विस्तृत जानकारी अध्याय 11 (जनजातियाँ) में विस्तार से पढ़ी जा चुकी है — यहाँ केवल पर्यटन-दृष्टिकोण से इसका संक्षिप्त संदर्भ दिया गया है।

9वन्यजीव, इको एवं साहसिक पर्यटन

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान व वन्यजीव अभयारण्य (रणथंभौर, सरिस्का, केवलादेव, मरुद्यान आदि — जिनका विस्तृत अध्ययन अध्याय 4 में किया जा चुका है) वन्यजीव पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं। इसके साथ ही राज्य में साहसिक पर्यटन (डेज़र्ट सफारी, कैमल सफारी, पैराग्लाइडिंग, ज़िपलाइनिंग, हॉट एयर बैलूनिंग) व इको-टूरिज्म (प्रकृति-अनुकूल, टिकाऊ पर्यटन) को भी तेज़ी से बढ़ावा दिया जा रहा है।

10प्रमुख मेले एवं त्यौहार

राजस्थान के मेले व त्यौहार यहाँ की जीवंत संस्कृति की सबसे रंगीन झलक हैं — ये न केवल स्थानीय समुदाय के लिए सामाजिक-धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं।

🎪 पुष्कर मेला पुष्कर, अजमेर | अक्टूबर-नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा)

विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला — एक सप्ताह तक चलने वाला यह मेला ऊँट व पशुधन व्यापार के साथ-साथ मटका फोड़, सबसे बड़ी मूँछ प्रतियोगिता व दुल्हन प्रतियोगिता जैसी रोचक गतिविधियों के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यह हज़ारों विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाला राज्य का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आयोजन है।

🎪 गणगौर महोत्सव संपूर्ण राजस्थान (मुख्यतः जयपुर) | चैत्र माह (मार्च-अप्रैल)

शिव (गण) व पार्वती (गौरी) की पूजा को समर्पित यह त्यौहार सुहागिन व अविवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है — पति की दीर्घायु व अच्छे वर की कामना के साथ मूर्तियों की शोभायात्रा निकाली जाती है, जो राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक त्यौहारों में गिना जाता है।

🎪 तीज महोत्सव जयपुर (मुख्यतः) | श्रावण माह (जुलाई-अगस्त)

देवी पार्वती को समर्पित यह मानसूनी त्यौहार विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, जो प्रेम, वैवाहिक सुख व मानसून ऋतु के स्वागत का प्रतीक है — जयपुर में भव्य तीज शोभायात्रा निकलती है, और हाल ही में महिलाओं के लिए विशेष तीज मेला भी पौण्ड्रिक पार्क (जयपुर) में आयोजित किया गया।

🎪 डेज़र्ट फेस्टिवल जैसलमेर | जनवरी-फरवरी (माघ पूर्णिमा)

तीन दिवसीय यह उत्सव थार मरुस्थल की जीवंत संस्कृति का प्रदर्शन करता है — राजस्थानी लोक-संगीत, नृत्य, कठपुतली शो, ऊँट दौड़ व पगड़ी बाँधने की प्रतियोगिताएँ इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं, जो जैसलमेर को शीतकाल के सबसे व्यस्त पर्यटन मौसम में बदल देता है।

अन्य प्रमुख मेले/उत्सवस्थान/जिला
नागौर महोत्सव (पशु मेला)नागौर
पतंग महोत्सव (काइट फेस्टिवल)जयपुर
कुंभलगढ़ महोत्सवराजसमंद
मारवाड़ महोत्सवजोधपुर
बाणेश्वर मेलाडूंगरपुर (जनजातीय मेला)
शीतला माता मेलाचाकसू, जयपुर
हाथी महोत्सवजयपुर (होली के अवसर पर)
घूमर महोत्सवसभी संभाग मुख्यालय (2024-25 से भव्य स्तर पर शुरू)

11फिल्म पर्यटन, वेडिंग पर्यटन एवं वैश्विक ब्रांडिंग

राजस्थान की भव्य वास्तुकला, महल व रेगिस्तानी दृश्य इसे फिल्म निर्माण के लिए एक स्वाभाविक व लोकप्रिय गंतव्य बनाते हैं। इसी तरह विवाह-पर्यटन (Wedding Tourism) में भी राजस्थान (विशेषकर उदयपुर) देश-विदेश के जोड़ों की पहली पसंद बन चुका है।

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12संस्थागत ढाँचा

संस्थाभूमिका
पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकारनीति-निर्माण, योजनाओं का क्रियान्वयन, पर्यटन स्थलों का विकास व प्रचार-प्रसार
राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC)होटल संचालन, पर्यटक परिवहन (Coach Travels), टूर पैकेज व कार्यकारी एजेंसी की भूमिका (जैसे जावर-झामर कोटड़ा जियो-टूरिज्म परियोजना में — देखें अध्याय 13)
राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभागस्मारकों, संग्रहालयों व पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण

13केंद्र सरकार की योजनाएँ

🏛️ केंद्रीय पर्यटन योजनाएँ (राजस्थान में क्रियान्वयन) — प्रमुख योजनाएँ

14राज्य सरकार की योजनाएँ

🏛️ राजस्थान सरकार की प्रमुख पर्यटन योजनाएँ — प्रमुख योजनाएँ

(रिक्त मानचित्र में स्वयं अभ्यास करें) मानचित्र: राजस्थान के प्रमुख पर्यटन सर्किट एवं नए विकसित हो रहे सर्किट — हाथ से चिन्हित करने हेतु रिक्त मानचित्र

15पर्यटक सुरक्षा एवं जिम्मेदार पर्यटन

पर्यटकों, विशेषकर महिला पर्यटकों के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

1. 15 फरवरी 2024 से पर्यटक सहायता बल (Tourist Assistance Force) द्वारा एक विशेष सुरक्षा अभियान चलाया गया, जिसके अंतर्गत लगभग 1,075 असामाजिक तत्वों/उपद्रवियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

2. प्रमुख पर्यटन स्थलों व राजकीय स्मारकों पर पर्यटकों से ऑनलाइन फीडबैक लेने की व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि सेवाओं में निरंतर सुधार हो सके।

3. उदयपुर पुलिस द्वारा राजस्थान की पहली AI-आधारित WhatsApp पर्यटक हेल्पलाइन शुरू की गई है, जो पर्यटकों को तुरंत सहायता व जानकारी उपलब्ध कराती है।

4. जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) को बढ़ावा देने हेतु जयपुर में इंडियन रेस्पॉन्सिबल टूरिज्म स्टेट समिट एंड अवार्ड्स का आयोजन किया गया, जिसमें टिकाऊ व स्थानीय-समुदाय-हितैषी पर्यटन प्रयासों को सम्मानित किया गया।

5. यूनेस्को इंडिया के सहयोग से 214 कलाकारों व हस्तशिल्प कर्मियों को स्वरोज़गार हेतु प्रशिक्षण दिया गया, जिससे पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय समुदाय तक पहुँचे।

16नवीनतम आँकड़े एवं रुझान (2024-2026)

वर्ष/अवधिघरेलू पर्यटकविदेशी पर्यटककुल पर्यटक/वृद्धि
2024 (पूर्ण वर्ष)23.01 करोड़ यात्राएँ20.72 लाख यात्राएँकुल लगभग 23.22 करोड़; घरेलू में 28.50% व विदेशी में 21.92% की वृद्धि (2023 की तुलना में)
2025 (पूर्ण वर्ष)कुल 25.44 करोड़ पर्यटक (2024 की तुलना में लगभग 10% वृद्धि)
अगस्त 2025 तक15 करोड़ से अधिकलगभग 12 लाख2024 की समान अवधि की तुलना में संयुक्त यात्राओं में 11.71% वृद्धि
जनवरी-मार्च 2026 (Q1)6.13 करोड़ यात्राएँ (लगभग)6.98 लाख यात्राएँ (लगभग)कुल लगभग 6.20 करोड़ पर्यटक यात्राएँ
🇮🇳 घरेलू पर्यटकों की पहली पसंद
  • खाटूश्यामजी (सीकर) — सर्वाधिक लोकप्रिय धार्मिक/घरेलू पर्यटन स्थल
🌍 विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद
  • आमेर पैलेस (जयपुर) — सर्वाधिक लोकप्रिय विरासत/विदेशी पर्यटन स्थल
💡 रेगिस्तान से हरियाली तक — बदलता रुझान

जनवरी-मार्च 2026 की अवधि में अरावली, दक्षिणी राजस्थान व हाड़ौती क्षेत्र में भी 93.85 लाख पर्यटक पहुँचे — यह आँकड़ा दिखाता है कि अब पर्यटकों का रुझान केवल पारंपरिक 'रेगिस्तान-किला' छवि तक सीमित न रहकर राज्य के हरे-भरे, पहाड़ी व कम-प्रचलित क्षेत्रों (हाड़ौती, दक्षिणी राजस्थान) की ओर भी तेज़ी से बढ़ रहा है — जो राज्य के पर्यटन-आधार के व्यापक विविधीकरण का संकेत है।

17नवीनतम अपडेट 2025-26

💡 पर्यटन इकाई नीति 2024 का क्रियान्वयन

4 दिसंबर 2024 से प्रभावी नई पर्यटन इकाई नीति के अंतर्गत निजी निवेशकों के लिए 24 विभिन्न प्रकार की पर्यटन इकाइयाँ स्थापित करने का मार्ग खुला है, जिससे राज्य में तेज़ी से नए होटल, रिज़ॉर्ट, इको-टूरिज्म व फिल्म-सिटी जैसी परियोजनाएँ शुरू हो रही हैं — यह नीति राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS-2024) के वित्तीय प्रोत्साहनों से भी जुड़ी हुई है।

💡 IIFA अवार्ड्स व वैश्विक कार्यक्रम (मार्च 2025)

25वें IIFA (International Indian Film Academy) अवार्ड्स का भव्य आयोजन 7 से 9 मार्च 2025 तक जयपुर में हुआ, जिसमें बॉलीवुड के शीर्ष कलाकारों की भागीदारी ने राजस्थान पर्यटन को वैश्विक मीडिया में अभूतपूर्व दृश्यता दिलाई। इसी क्रम में जयपुर में पहली बार आयोजित 'Wed in India Expo' ने राज्य को वेडिंग-डेस्टिनेशन के रूप में और मज़बूत किया।

💡 AI-आधारित पर्यटक हेल्पलाइन एवं तकनीकी पहल (2026)

उदयपुर पुलिस द्वारा राजस्थान की पहली AI-आधारित WhatsApp पर्यटक हेल्पलाइन शुरू की गई है, जो तकनीक के माध्यम से पर्यटक सुरक्षा व सुविधा को अगले स्तर पर ले जाने का प्रयास है। साथ ही जनवरी-मार्च 2026 के आँकड़े दिखाते हैं कि राज्य में पर्यटन न सिर्फ मात्रा में बल्कि भौगोलिक विस्तार (अरावली, दक्षिणी राजस्थान, हाड़ौती) में भी लगातार बढ़ रहा है।

💡 जावर-झामर कोटड़ा जियो-टूरिज्म परियोजना (जनवरी 2025)

उदयपुर के निकट जावर व झामर कोटड़ा को नई जियो-हेरिटेज पर्यटन साइट्स के रूप में विकसित करने की परियोजना पर्यटन के एक बिल्कुल नए आयाम — विज्ञान-पर्यटन (Geo-Tourism) — को राजस्थान में स्थापित कर रही है (विस्तृत विवरण अध्याय 13 में)। यह दिखाता है कि राज्य अब पारंपरिक किला-महल पर्यटन से आगे बढ़कर वैज्ञानिक व शैक्षणिक पर्यटन के नए क्षेत्रों में भी अग्रणी बन रहा है।

🔑 इस अध्याय के महत्वपूर्ण तथ्य
1. राजस्थान में कुल 9 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1985, पहला), जंतर मंतर जयपुर (2010), 6 पहाड़ी किले — आमेर, चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, जैसलमेर, गागरोण (सभी 2013), तथा जयपुर परकोटा नगर (2019, सबसे नया) 2. वर्ष 2024 में राजस्थान को घरेलू व विदेशी पर्यटक यात्राओं के आधार पर देश में 5वाँ स्थान मिला; 2024 में कुल 23.22 करोड़ व 2025 में 25.44 करोड़ पर्यटक राज्य में आए 3. घरेलू पर्यटकों की पहली पसंद खाटूश्यामजी (सीकर) है, जबकि विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद आमेर पैलेस (जयपुर) है 4. पर्यटन इकाई नीति 2024 (4 दिसंबर 2024 से प्रभावी) में पुरानी नीति की 16 की तुलना में अब 24 प्रकार की पर्यटन इकाइयों को मान्यता दी गई है 5. राजस्थान टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कैपेसिटी बिल्डिंग फंड (RTICBF) के अंतर्गत ₹5,000 करोड़ से अधिक के पर्यटन विकास कार्य किए जा रहे हैं 6. महाराणा प्रताप पर्यटन सर्किट (₹100 करोड़, चावंड-हल्दीघाटी-गोगुंदा-कुंभलगढ़-दिवेर) एवं जनजातीय पर्यटन सर्किट (₹100 करोड़, सीतामाता-ऋषभदेव-गौतमेश्वर-मातृकुंडिया) 2024-25 की दो प्रमुख नई सर्किट परियोजनाएँ हैं 7. खाटूश्यामजी, पुष्कर, नाथद्वारा, श्री महावीरजी व गलता तीर्थ को जोड़ने वाला समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित हो रहा है; राज्य के कुल 252 धार्मिक स्थलों पर जीर्णोद्धार कार्य जारी है 8. शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना में झुंझुनूं-सीकर-चूरू की 662 हवेलियाँ चिन्हित हैं; अब तक 62 संपत्तियाँ हेरिटेज होटल प्रमाणन प्राप्त कर चुकी हैं 9. पुष्कर मेला (अक्टूबर-नवंबर) विश्व का सबसे बड़ा ऊँट मेला है; डेज़र्ट फेस्टिवल (जैसलमेर, जनवरी-फरवरी) थार संस्कृति का प्रमुख उत्सव है 10. स्वदेश दर्शन 2.0 योजना में राजस्थान से बूंदी (केशोरायपाटन, ₹17.37 करोड़ स्वीकृत) व जोधपुर को चिन्हित किया गया है; प्रसाद 2.0 योजना खाटू श्याम जी व करणी माता मंदिर जैसे तीर्थ स्थलों के विकास हेतु सक्रिय है 11. पंच गौरव योजना (17 दिसंबर 2024, ₹550 करोड़) प्रत्येक जिले की अनूठी पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है 12. 15 फरवरी 2024 से पर्यटक सहायता बल द्वारा सुरक्षा अभियान चलाकर लगभग 1,075 असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई की गई; उदयपुर में राजस्थान की पहली AI-आधारित WhatsApp पर्यटक हेल्पलाइन शुरू की गई 13. 25वें IIFA अवार्ड्स (7-9 मार्च 2025, जयपुर) व पहले 'Wed in India Expo' (जयपुर) ने राजस्थान की वैश्विक पर्यटन-ब्रांडिंग को नई ऊँचाई दी; 2024-25 में फिल्मांकन हेतु 86 अनुमतियाँ जारी हुईं 14. जनवरी-मार्च 2026 में अरावली, दक्षिणी राजस्थान व हाड़ौती क्षेत्र में 93.85 लाख पर्यटक पहुँचे — यह राज्य के पर्यटन-आधार के भौगोलिक विविधीकरण का संकेत है

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न (All Exams) 📝

Q1. राजस्थान में कुल कितने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं, और इनमें सबसे पहले व सबसे नए स्थल कौनसे हैं? Q2. 2013 में विश्व धरोहर सूची में शामिल राजस्थान के 6 पहाड़ी किलों के नाम लिखिए। Q3. राजस्थान की पर्यटन इकाई नीति 2024 कब से प्रभावी है, और इसमें कुल कितनी प्रकार की पर्यटन इकाइयाँ मान्यता प्राप्त हैं? Q4. महाराणा प्रताप पर्यटन सर्किट व जनजातीय पर्यटन सर्किट में कौन-कौनसे स्थल शामिल हैं? Q5. शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना किन जिलों में लागू है, और अब तक कितनी हवेलियाँ चिन्हित की गई हैं? Q6. स्वदेश दर्शन 2.0 योजना में राजस्थान के किन स्थलों को शामिल किया गया है? Q7. राजस्थान में घरेलू व विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद वाले स्थलों के नाम बताइए। Q8. पुष्कर मेला व डेज़र्ट फेस्टिवल का आयोजन कब व कहाँ होता है?

📌 अध्याय सारांश (Chapter Summary)

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