⚔️ अध्याय 7/10 — प्राचीन भारत का इतिहास

मौर्योत्तर काल

Post-Mauryan Age | RAS Pre+Mains | IAS/UPSC Prelims+Mains
📋 इस अध्याय में
  1. पृष्ठभूमि — मौर्य पतन के बाद की राजनीतिक स्थिति (Background)
  2. शुंग वंश — पुष्यमित्र शुंग (Shunga Dynasty)
  3. कण्व वंश (Kanva Dynasty)
  4. इंडो-ग्रीक/बैक्ट्रियन यूनानी — मिनांडर (Indo-Greeks)
  5. शक (सीथियन) — उत्तरी व पश्चिमी क्षत्रप, रुद्रदामन (Shakas)
  6. इंडो-पार्थियन — गोंडोफर्नीज़ (Indo-Parthians)
  7. कुषाण वंश — कडफिसीज़ से कनिष्क तक (Kushan Dynasty)
  8. कनिष्क का धार्मिक संरक्षण एवं चतुर्थ बौद्ध संगीति (Kanishka & Fourth Buddhist Council)
  9. गांधार कला (Gandhara School of Art)
  10. मथुरा कला (Mathura School of Art)
  11. मध्य एशियाई संपर्क के प्रभाव — व्यापार, समाज, विज्ञान (Impact of Central Asian Contact)
  12. सातवाहन वंश — उत्पत्ति एवं शासक (Satavahana Dynasty)
  13. सातवाहन प्रशासन, समाज एवं अर्थव्यवस्था (Satavahana Administration, Society & Economy)
  14. सातवाहन कला एवं स्थापत्य (Satavahana Art & Architecture)
  15. तुलनात्मक तालिका — गांधार बनाम मथुरा कला (Comparative Table)
  16. कालक्रम तालिका (Timeline)

कल्पना कीजिए — 185 ईसा पूर्व के आसपास पाटलिपुत्र की राजसभा में मौर्य सम्राट बृहद्रथ अपनी सेना का निरीक्षण कर रहे हैं। अचानक उनका ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग तलवार से वार कर उनकी हत्या कर देता है और सिंहासन हथिया लेता है। इस एक घटना से भारत का सबसे बड़ा साम्राज्य ढह जाता है — परंतु यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अगले चार सौ वर्षों में भारत की धरती पर एक अद्भुत नज़ारा दिखता है — यूनानी, शक (सीथियन), पार्थियन (ईरानी) व कुषाण (मध्य एशियाई) जैसी विदेशी शक्तियाँ बारी-बारी से उत्तर-पश्चिम भारत में राज करती हैं, जबकि शुंग, कण्व व सातवाहन जैसी स्वदेशी शक्तियाँ मध्य व दक्षिण भारत को सँभालती हैं।

यही वह दौर है जब भारतीय कला में यूनानी तकनीक मिलकर "गांधार शैली" बनाती है, जब कनिष्क जैसा विदेशी मूल का शासक बौद्ध धर्म का सबसे बड़ा संरक्षक बन जाता है, और जब रेशम मार्ग (Silk Route) से होकर भारत सीधे रोम साम्राज्य से जुड़ जाता है। आइए, इस अध्याय में मौर्योत्तर भारत की इस रंगारंग व जटिल राजनीतिक-सांस्कृतिक तस्वीर को विस्तार से समझें।

1पृष्ठभूमि — मौर्य पतन के बाद की राजनीतिक स्थिति (Background)

मौर्य साम्राज्य के पतन (लगभग 185 ई.पू.) के बाद भारत में मौर्यों जैसा कोई एक विशाल साम्राज्य दोबारा स्थापित नहीं हो सका — परंतु यह काल मध्य एशिया व भारत के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक-व्यापारिक संपर्क के लिए उल्लेखनीय है।

🇮🇳 पूर्वी, मध्य भारत व दक्कन (स्वदेशी शासक)
  • शुंग वंश — मगध व मध्य भारत
  • कण्व वंश — शुंगों के बाद मगध
  • सातवाहन वंश — दक्कन व मध्य भारत (लगभग 450 वर्ष शासन)
🌏 उत्तर-पश्चिम भारत (मध्य एशियाई/विदेशी शासक)
  • इंडो-ग्रीक (बैक्ट्रियन यूनानी)
  • शक/सीथियन (उत्तरी व पश्चिमी क्षत्रप)
  • इंडो-पार्थियन (गोंडोफर्नीज़)
  • कुषाण (यूची जनजाति मूल)

ध्यान दें: यह वह काल है जब सबसे अधिक विदेशी समूह भारतीय समाज में समाहित (assimilate) हुए — मनुस्मृति में शक व पार्थियनों को "व्रात्य क्षत्रिय" (पथभ्रष्ट क्षत्रिय) कहा गया है, अर्थात उन्हें द्वितीय-श्रेणी क्षत्रिय का दर्जा देकर हिंदू समाज-व्यवस्था में समाहित किया गया।

2शुंग वंश — पुष्यमित्र शुंग (Shunga Dynasty)

📜 पुष्यमित्र शुंग (Pushyamitra Shunga) (शुंग वंश के संस्थापक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 185-149 ई.पू. मौर्य सेना के सेनापति (सेनानी) रहते हुए अंतिम मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या कर सत्ता हथिया ली। कट्टर ब्राह्मणवादी परंपरा के अनुयायी — दो अश्वमेध यज्ञ संपन्न किए, जो राजनीतिक सर्वोच्चता स्थापित करने का प्रतीक था। बैक्ट्रियन यूनानियों के आक्रमण को रोकने में सफल रहे तथा कलिंग के खारवेल से भी संघर्ष हुआ। इनके काल में भरहुत व साँची के बौद्ध स्तूपों का जीर्णोद्धार व विस्तार हुआ — यह दर्शाता है कि ब्राह्मणवाद के पुनरुत्थान के बावजूद बौद्ध स्थापत्य को संरक्षण मिलता रहा।

3कण्व वंश (Kanva Dynasty)

शुंग वंश के अंतिम शासक देवभूति के मंत्री वासुदेव कण्व ने उनकी हत्या कर लगभग 73 ई.पू. में सत्ता हथिया ली — इस प्रकार ब्राह्मण कण्व वंश की स्थापना हुई, जो लगभग 73-28 ई.पू. तक शासन करता रहा।

4इंडो-ग्रीक/बैक्ट्रियन यूनानी — मिनांडर (Indo-Greeks)

उत्तर-पश्चिम में सिकंदर के बाद स्थापित सेल्यूसिड साम्राज्य कमज़ोर पड़ने तथा सीथियन जनजातियों के दबाव से बैक्ट्रिया (उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान) के यूनानी शासक भारत की ओर बढ़े — लगभग 200 ई.पू. से हिंदुकुश पार कर आने वाले ये "इंडो-ग्रीक" या "बैक्ट्रियन यूनानी" कहलाए। इन्होंने सिकंदर से भी बड़े भू-भाग पर अधिकार किया तथा अयोध्या व पाटलिपुत्र तक पहुँचे, परंतु कोई स्थायी संयुक्त शासन स्थापित नहीं कर सके।

📜 मिनांडर/मिलिंद (Menander/Milinda) (सर्वाधिक प्रसिद्ध इंडो-ग्रीक शासक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 165-145 ई.पू. बौद्ध भिक्षु नागसेन (जिन्हें कुछ स्रोत नागार्जुन भी कहते हैं) से संवाद के बाद बौद्ध धर्म अपनाया — इस दार्शनिक संवाद को "मिलिंदपन्हो" (Milinda Panho — "मिलिंद के प्रश्न") नामक ग्रंथ में संकलित किया गया, जो बौद्ध दर्शन का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

5शक (सीथियन) — उत्तरी व पश्चिमी क्षत्रप, रुद्रदामन (Shakas)

मध्य एशिया की सीथियन जनजाति (भारतीय स्रोतों में "शक") ने बैक्ट्रिया व पार्थिया पर अधिकार कर यूनानी शासकों को हराया, फिर धीरे-धीरे उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़े।

📜 रुद्रदामन प्रथम (Rudradaman I) (पश्चिमी क्षत्रप — शक शासक)

✍️ रचनाकार: लगभग द्वितीय शताब्दी ई. (लगभग 150 ई.) काठियावाड़ (गुजरात) के अर्ध-शुष्क क्षेत्र में स्थित सुदर्शन झील (जो मौर्यकाल से सिंचाई हेतु उपयोग में थी) की मरम्मत करवाई — यह उनके जनकल्याणकारी कार्यों का प्रमाण है। संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान — जूनागढ़ अभिलेख (लगभग 150 ई.) शुद्ध संस्कृत में लिखा गया प्रथम दीर्घ अभिलेख माना जाता है, जो काव्य-शैली (kavya style) का भी प्रारंभिक उदाहरण है।

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6इंडो-पार्थियन — गोंडोफर्नीज़ (Indo-Parthians)

पार्थिया (आधुनिक ईरान का क्षेत्र) से आए पार्थियन शासकों ने शकों से तक्षशिला क्षेत्र छीना — भारतीय इतिहास में इन्हें "पहलव" भी कहा जाता है।

7कुषाण वंश — कडफिसीज़ से कनिष्क तक (Kushan Dynasty)

कुषाण, मध्य एशिया की यूची (Yuchi) जनजाति की एक शाखा थे — पहले बैक्ट्रिया में शकों को हराकर बसे, फिर काबुल घाटी होते हुए गांधार क्षेत्र पर अधिकार किया।

📜 कुजुल कडफिसीज़ (Kujula Kadphises) (कुषाण वंश के संस्थापक)

✍️ रचनाकार: प्रथम शताब्दी ई. काबुल घाटी पर अधिकार कर अपने नाम से सिक्के जारी किए — प्रारंभिक कुषाण शासकों के स्वर्ण सिक्कों में गुप्तकालीन सिक्कों से भी अधिक स्वर्ण-मात्रा पाई जाती है।

📜 विम कडफिसीज़/कडफिसीज़ द्वितीय (Wima Kadphises) (कुजुल कडफिसीज़ के पुत्र)

✍️ रचनाकार: प्रथम शताब्दी ई. उत्तरार्ध संपूर्ण उत्तर-पश्चिम भारत को मथुरा तक जीता — "सम्पूर्ण विश्व का स्वामी" जैसी उच्च उपाधियों वाले स्वर्ण सिक्के जारी किए। शिव के परम भक्त थे — सिक्कों पर शिव व नंदी की आकृति मिलती है।

📜 कनिष्क (Kanishka) (कुषाण वंश का सबसे महान शासक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 78-120 ई. शक संवत (Saka Era) के प्रवर्तक, जो 78 ई. से प्रारंभ होता है — आज भी भारत की राष्ट्रीय पंचांग-प्रणाली शक संवत पर आधारित है। साम्राज्य पश्चिम में गांधार से पूर्व में वाराणसी तक तथा उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में मालवा तक फैला था। राजधानी पुरुषपुर (वर्तमान पेशावर) थी, मथुरा द्वितीय राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण थी।

8कनिष्क का धार्मिक संरक्षण एवं चतुर्थ बौद्ध संगीति (Kanishka & Fourth Buddhist Council)

कनिष्क ने शासनकाल के प्रारंभिक भाग में बौद्ध धर्म अपनाया, परंतु उनके सिक्कों पर बुद्ध के साथ-साथ यूनानी व हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियाँ भी मिलती हैं — यह उनकी धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाता है।

📜 चतुर्थ बौद्ध संगीति (Fourth Buddhist Council) (कश्मीर, कुण्डलवन मठ)

✍️ रचनाकार: कनिष्क के संरक्षण में, अध्यक्ष वसुमित्र बौद्ध सिद्धांतों व धर्मशास्त्र पर विचार-विमर्श हेतु आयोजित — त्रिपिटक पर एक प्रामाणिक टीका तैयार की गई तथा महायान सिद्धांत को अंतिम/औपचारिक स्वरूप मिला। इसी संगीति में बौद्ध धर्म का हीनयान-महायान में औपचारिक विभाजन पूर्ण हुआ।

9गांधार कला (Gandhara School of Art)

गांधार कला-शैली का उद्भव पेशावर के आसपास के क्षेत्र में प्रथम-द्वितीय शताब्दी ई. में हुआ — इसका प्रारंभ इंडो-ग्रीक शासनकाल में हुआ, परंतु वास्तविक संरक्षण शकों व विशेषकर कुषाण सम्राट कनिष्क से मिला।

10मथुरा कला (Mathura School of Art)

मथुरा कला-शैली (उत्तर प्रदेश) प्रथम शताब्दी ई. में स्वदेशी परंपरा पर विकसित हुई — यह गांधार शैली से समकालीन परंतु शैलीगत रूप से भिन्न थी।

💡 आसान भाषा में समझें

गांधार कला को "विदेशी तकनीक में भारतीय विषय" कहा जा सकता है (जैसे यूनानी मूर्तिकार भारतीय बुद्ध बना रहे हों), जबकि मथुरा कला "भारतीय मिट्टी में भारतीय भावना" है — दोनों शैलियाँ एक ही समय, एक ही धर्म (बौद्ध) को लेकर विकसित हुईं, परंतु अपनी अलग पहचान बनाए रखा।

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11मध्य एशियाई संपर्क के प्रभाव — व्यापार, समाज, विज्ञान (Impact of Central Asian Contact)

क्षेत्रप्रभाव
व्यापार व अर्थव्यवस्थाकुषाणों का रेशम मार्ग (Silk Route) पर नियंत्रण — चीन से मध्य एशिया, अफ़ग़ानिस्तान होते हुए ईरान व रोम तक — व्यापारियों से शुल्क वसूली से अपार समृद्धि प्राप्त हुई
राजनीतिशक-क्षत्रप व्यवस्था (Satrapy System) की शुरुआत — सामंती संगठन द्वारा स्थानीय राजाओं पर नियंत्रण; कुछ क्षेत्रों में "द्वैध शासन" (एक साथ दो राजाओं का शासन) जैसी अनोखी प्रथा भी मिलती है
समाज व वेशभूषापगड़ी, पायजामा (trousers), लंबे कोट (जिससे बाद में शेरवानी विकसित हुई), टोपी, हेलमेट व जूतों का प्रचलन — घुड़सवारी व अश्वारोहण तकनीक में सुधार
धार्मिक-सामाजिक स्थितिशक व पार्थियन "देवपुत्र" (Son of God) जैसी दैवीय उपाधियाँ अपनाकर राजत्व को दैवीय स्वरूप देते थे — मनुस्मृति में इन्हें "व्रात्य क्षत्रिय" कहकर हिंदू वर्ण-व्यवस्था में समाहित किया गया
भाषा एवं साहित्यसंस्कृत भाषा को राजाश्रय मिला — रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख शुद्ध संस्कृत काव्य-शैली का प्रारंभिक उदाहरण; अश्वघोष रचित "बुद्धचरित" व "सौंदरनंद" संस्कृत काव्य के उत्कृष्ट उदाहरण; महावस्तु व दिव्यावदान जैसे बौद्ध-संकर संस्कृत ग्रंथ रचे गए
रंगमंच व विज्ञानयूनानी प्रभाव से भारतीय रंगमंच में "यवनिका" (पर्दा) की शुरुआत; चरक व सुश्रुत के आयुर्वेदिक ग्रंथों का विकास; यूनानी ज्योतिष के प्रभाव से संस्कृत में "होरा-शास्त्र" शब्द का प्रचलन; काँच-निर्माण तकनीक में उल्लेखनीय प्रगति

12सातवाहन वंश — उत्पत्ति एवं शासक (Satavahana Dynasty)

मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद दक्कन व मध्य भारत में सबसे महत्वपूर्ण स्वदेशी शक्ति सातवाहन वंश (जिन्हें पुराणों में "आंध्र" भी कहा गया) थी — इन्होंने गोदावरी नदी की ऊपरी घाटी (वर्तमान महाराष्ट्र) में सत्ता स्थापित की तथा धीरे-धीरे कर्नाटक व आंध्र प्रदेश तक विस्तार किया। इनका शासन लगभग 450 वर्षों तक चला — इनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी पश्चिमी दक्कन के शक क्षत्रप थे।

📜 गौतमीपुत्र सातकर्णी (Gautamiputra Satakarni) (सातवाहन वंश का महानतम शासक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 106-130 ई. (24 वर्ष) इनकी उपलब्धियाँ नासिक अभिलेख में इनकी माता गौतमी बलश्री द्वारा दर्ज कराई गईं। शक शासक नहपान को पराजित कर संपूर्ण दक्कन पर अधिकार किया तथा साम्राज्य को कृष्णा नदी के मुहाने तक विस्तारित किया। स्वयं को वर्ण-व्यवस्था के पुनर्स्थापक ("खत्तियदपमानमदन" — क्षत्रियों के दर्प का नाशक) के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि स्वयं ब्राह्मण होने का दावा भी किया — यह दर्शाता है कि सातवाहन मूलतः एक स्थानीय/आदिवासी समूह थे, जिन्हें बाद में वर्ण-व्यवस्था में सम्मिलित किया गया (संकर जाति के रूप में)। इनके सिक्कों पर जलयान (ship) की आकृति मिलती है, जो सातवाहनों की समुद्री/नौसैनिक शक्ति व व्यापार को दर्शाती है।

13सातवाहन प्रशासन, समाज एवं अर्थव्यवस्था (Satavahana Administration, Society & Economy)

प्रशासन

समाज

अर्थव्यवस्था

14सातवाहन कला एवं स्थापत्य (Satavahana Art & Architecture)

📍 कार्ले चैत्य (Karle Chaitya) (पश्चिमी दक्कन, महाराष्ट्र)

⏰ काल: सातवाहन काल
⭐ महत्व: ठोस चट्टान को काटकर बनाई गई भव्य शैलकृत गुफा — स्तंभों वाला विशाल सभा-कक्ष (चैत्य), जिसके साथ भिक्षुओं के निवास हेतु विहार भी उत्खनित किए गए। यह पश्चिमी दक्कन की चट्टान-स्थापत्य कला का उत्कृष्ट व सबसे प्रभावशाली उदाहरण माना जाता है।

15तुलनात्मक तालिका — गांधार बनाम मथुरा कला (Comparative Table)

बिंदुगांधार कलामथुरा कला
क्षेत्रपेशावर व आसपास (उत्तर-पश्चिम)मथुरा, उत्तर प्रदेश
मूल प्रेरणायूनानी-रोमन (Graeco-Roman) शैली से प्रभावितस्वदेशी भारतीय परंपरा (यक्ष-यक्षिणी मूर्तिकला) से विकसित
सामग्रीनीले-धूसर शिस्ट (schist) पत्थरलाल बलुआ पत्थर
भाव-भंगिमायथार्थवादी शारीरिक बनावट, मूँछें, घुँघराले बालआध्यात्मिक/शांत भाव-मुद्रा प्रधान
मुख्य विषयबुद्ध व बोधिसत्व (महायान केंद्रित)बुद्ध सहित शिव-विष्णु, यक्षिणी-अप्सरा भी
संरक्षकइंडो-ग्रीक, शक, विशेषकर कुषाण (कनिष्क)कुषाण शासक (मथुरा द्वितीय राजधानी)
"कनिष्क के काल में बुद्ध की मूर्ति एक ओर गांधार में यूनानी देवता अपोलो जैसी दिखी, तो दूसरी ओर मथुरा में भारतीय यक्ष जैसी — यही है भारतीय कला की अद्भुत समावेशी शक्ति।" — कला-इतिहासकारों की सम्मिलित राय
🎯 मौर्योत्तर काल — उत्तर लेखन कोण UPSC: 10अं/150श | 15अं/250श || RAS: 5अं/60-70श | 10अं/120श

परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य

1. पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ की हत्या कर लगभग 185 ई.पू. शुंग वंश की स्थापना की — दो अश्वमेध यज्ञ किए। 2. शुंग काल में भरहुत व साँची स्तूपों का जीर्णोद्धार व विस्तार हुआ। 3. वासुदेव कण्व ने शुंग शासक देवभूति को हराकर लगभग 73 ई.पू. कण्व वंश स्थापित किया। 4. मिनांडर/मिलिंद (इंडो-ग्रीक) ने बौद्ध भिक्षु नागसेन से संवाद के बाद बौद्ध धर्म अपनाया — "मिलिंदपन्हो" इसी संवाद का संकलन है। 5. इंडो-ग्रीक शासक भारत में सिक्कों पर निश्चित शासक-पहचान (नाम, तिथि, प्रतिमा) अंकित करने वाले प्रथम शासक थे। 6. माउस — भारत में शक-शासन का संस्थापक; अज़ेस प्रथम — विक्रम संवत का प्रवर्तक माना जाता है। 7. रुद्रदामन प्रथम (पश्चिमी क्षत्रप) — सुदर्शन झील की मरम्मत करवाई; जूनागढ़ अभिलेख शुद्ध संस्कृत का प्रथम दीर्घ अभिलेख। 8. गोंडोफर्नीज़ (इंडो-पार्थियन) — तक्षशिला-काबुल-पेशावर पर शासन; ईसाई परंपरा में संत थॉमस से संबंध बताया जाता है। 9. कुजुल कडफिसीज़ — कुषाण वंश संस्थापक; विम कडफिसीज़ — शिव भक्त, "विश्व स्वामी" उपाधि धारक। 10. कनिष्क (78-120 ई.) — शक संवत (78 ई.) के प्रवर्तक, राजधानी पुरुषपुर (पेशावर), द्वितीय राजधानी मथुरा। 11. चतुर्थ बौद्ध संगीति — कुण्डलवन (कश्मीर), अध्यक्ष वसुमित्र, महायान सिद्धांत को औपचारिक स्वरूप मिला। 12. अश्वघोष — कनिष्क दरबार के विद्वान, "बुद्धचरित" व "सौंदरनंद" के रचयिता; चरक — आयुर्वेदाचार्य, कनिष्क द्वारा संरक्षित। 13. गांधार कला — यूनानी-रोमन व भारतीय शैली का मिश्रण, यथार्थवादी बुद्ध-मूर्तियाँ, शिस्ट पत्थर का प्रयोग। 14. मथुरा कला — स्वदेशी शैली, लाल बलुआ पत्थर, आध्यात्मिक भाव-मुद्रा, शिव-विष्णु प्रतिमाएँ भी निर्मित। 15. मनुस्मृति में शक व पार्थियनों को "व्रात्य क्षत्रिय" (पथभ्रष्ट क्षत्रिय) कहा गया। 16. सातवाहन वंश (आंध्र) — संस्थापक सिमुक, लगभग 450 वर्ष शासन, गोदावरी घाटी में उदय। 17. गौतमीपुत्र सातकर्णी — शक शासक नहपान को पराजित किया; नासिक अभिलेख (माता गौतमी बलश्री द्वारा) में उपलब्धियाँ वर्णित। 18. सातवाहन शासकों का मातृवंशीय नामकरण — "गौतमीपुत्र", "वासिष्ठीपुत्र" — माताओं के महत्व का प्रतीक। 19. सातवाहनों ने स्वर्ण सिक्के नहीं, बल्कि सीसा, पोटीन, ताँबा व काँसे के सिक्के जारी किए; कल्याणी प्रमुख बंदरगाह था। 20. कार्ले चैत्य (महाराष्ट्र) — सातवाहनकालीन शैलकृत स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण; अमरावती-नागार्जुनकोंडा (आंध्र) प्रमुख बौद्ध कला-केंद्र।

📝 UPSC + RAS पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

Q1. (UPSC Prelims) शक संवत का प्रारंभ किस शासक ने किया? (a) कनिष्क (b) रुद्रदामन (c) चंद्रगुप्त द्वितीय (d) कुजुल कडफिसीज़ — उत्तर: (a) कनिष्क Q2. (UPSC Prelims) मिलिंदपन्हो किस विषय से संबंधित ग्रंथ है? (a) अर्थशास्त्र (b) बौद्ध दर्शन-संवाद (c) ज्योतिष (d) आयुर्वेद — उत्तर: (b) Q3. (UPSC Mains) कुषाण काल में भारत-मध्य एशिया संपर्क के आर्थिक व सांस्कृतिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। Q4. (UPSC Mains) गांधार व मथुरा कला-शैलियों की तुलनात्मक विवेचना कीजिए। Q5. (RAS Pre) गौतमीपुत्र सातकर्णी की उपलब्धियों का उल्लेख किस अभिलेख में मिलता है? (a) जूनागढ़ (b) नासिक (c) हाथीगुम्फा (d) कंधार — उत्तर: (b) नासिक Q6. (RAS Mains) सातवाहन वंश की मातृवंशीय नामकरण परंपरा एवं इसके सामाजिक महत्व की विवेचना कीजिए। Q7. (UPSC Prelims) जूनागढ़ अभिलेख (शुद्ध संस्कृत में प्रथम दीर्घ अभिलेख) किस शासक से संबंधित है? (a) कनिष्क (b) रुद्रदामन प्रथम (c) खारवेल (d) पुष्यमित्र शुंग — उत्तर: (b) Q8. (UPSC Mains) पुष्यमित्र शुंग की सत्ता-प्राप्ति को "ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया" कहा जाता है — इस मत का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

16कालक्रम तालिका (Timeline)

काल/वर्षघटना
लगभग 185-149 ई.पू.पुष्यमित्र शुंग का शासनकाल — शुंग वंश की स्थापना
लगभग 200-100 ई.पू.इंडो-ग्रीक आक्रमण व उत्तर-पश्चिम भारत में विस्तार
लगभग 165-145 ई.पू.मिनांडर/मिलिंद का शासनकाल — बौद्ध धर्म ग्रहण
लगभग 73-28 ई.पू.कण्व वंश का शासनकाल
प्रथम शताब्दी ई.पू.माउस द्वारा भारत में शक-शासन की स्थापना; सातवाहन वंश का उदय (सिमुक)
प्रथम शताब्दी ई.पू.-ई.गोंडोफर्नीज़ का इंडो-पार्थियन शासन
प्रथम शताब्दी ई.कुजुल कडफिसीज़ द्वारा कुषाण वंश की स्थापना
78 ई.कनिष्क का राज्याभिषेक — शक संवत का प्रारंभ
लगभग 78-120 ई.कनिष्क का शासनकाल — चतुर्थ बौद्ध संगीति, गांधार कला का चरम
लगभग 150 ई.रुद्रदामन प्रथम का जूनागढ़ अभिलेख
106-130 ई.गौतमीपुत्र सातकर्णी का शासनकाल — शक शासक नहपान पर विजय
लगभग तीसरी शताब्दी ई.सातवाहन वंश का पतन
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