🦁 अध्याय 6/10 — प्राचीन भारत का इतिहास

मौर्य साम्राज्य

Mauryan Empire | RAS Pre+Mains | IAS/UPSC Prelims+Mains
📋 इस अध्याय में
  1. स्रोत — अर्थशास्त्र, इंडिका, अभिलेख (Sources for Mauryan History)
  2. चंद्रगुप्त मौर्य — उदय एवं नंद वंश का अंत (Rise of Chandragupta)
  3. सेल्यूकस संधि एवं जैन परंपरा (Treaty with Seleucus)
  4. बिंदुसार (Bindusara)
  5. अशोक — प्रारंभिक जीवन एवं राज्याभिषेक (Early Life of Ashoka)
  6. कलिंग युद्ध एवं हृदय-परिवर्तन (Kalinga War & Transformation)
  7. अशोक का धम्म (Ashoka's Dhamma)
  8. अशोक के अभिलेख — प्रकार एवं वर्गीकरण (Ashokan Edicts — Classification)
  9. मौर्य प्रशासन — सप्तांग सिद्धांत एवं केंद्रीय व्यवस्था (Mauryan Administration)
  10. प्रांतीय एवं नगर प्रशासन (Provincial & Municipal Administration)
  11. न्याय-व्यवस्था एवं गुप्तचर तंत्र (Judiciary & Espionage System)
  12. मौर्य अर्थव्यवस्था (Mauryan Economy)
  13. मौर्य कला एवं स्थापत्य (Mauryan Art & Architecture)
  14. समाज एवं धर्म (Society & Religion)
  15. पतन के कारण — बहुविध सिद्धांत (Decline — Multiple Theories)
  16. उत्तराधिकारी एवं साम्राज्य-विस्तार तालिका (Mauryan Rulers — Summary)
  17. कालक्रम तालिका (Timeline)

कल्पना कीजिए — मगध की राजसभा में एक कुरूप, कुटिल-नीति में पारंगत ब्राह्मण विद्वान को नंद सम्राट धनानंद द्वारा सरेआम अपमानित किया जाता है। अपमानित ब्राह्मण अपनी शिखा (चोटी) खोलकर प्रतिज्ञा करता है — "जब तक नंद वंश का समूल नाश नहीं कर दूँगा, यह शिखा नहीं बाँधूँगा!" यह ब्राह्मण थे विष्णुगुप्त, जिन्हें इतिहास "चाणक्य" या "कौटिल्य" के नाम से जानता है। उन्होंने एक तेजस्वी युवक चंद्रगुप्त को खोजा, उसे शिक्षा दी, रणनीति सिखाई — और अंततः 321 ईसा पूर्व के आसपास नंद साम्राज्य का अंत कर भारतीय इतिहास के पहले महान साम्राज्य — मौर्य साम्राज्य — की नींव रखी।

यही साम्राज्य आगे चलकर चंद्रगुप्त के पौत्र अशोक के समय अपने चरम पर पहुँचा — एक ऐसा सम्राट जिसने युद्ध में खून की नदियाँ बहते देखकर हथियार त्याग दिए और करुणा व अहिंसा का संदेश पूरे विश्व में फैलाया। आइए, इस अध्याय में हम भारत के पहले अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना, प्रशासन, कला व पतन को विस्तार से समझें।

1स्रोत — अर्थशास्त्र, इंडिका, अभिलेख (Sources for Mauryan History)

📜 साहित्यिक स्रोत
  • कौटिल्य/चाणक्य रचित "अर्थशास्त्र" — प्रशासन, अर्थव्यवस्था व राजनीति का विस्तृत विवरण
  • मेगस्थनीज़ रचित "इंडिका" — चंद्रगुप्त के दरबार का यूनानी विवरण (मूल ग्रंथ लुप्त, अंश उद्धरणों में सुरक्षित)
  • विशाखदत्त रचित "मुद्राराक्षस" — चंद्रगुप्त के उदय पर नाटक
  • बौद्ध ग्रंथ (दीपवंश, महावंश), जैन ग्रंथ (परिशिष्टपर्वन) व पुराण
🪨 पुरातात्विक स्रोत
  • अशोक के शिलालेख व स्तंभ-लेख — सबसे विश्वसनीय समकालीन स्रोत
  • यक्ष-यक्षिणी जैसी मूर्तियाँ व मौर्यकालीन पॉलिशदार स्तंभ
  • बराबर गुफाओं के अभिलेख
  • सिक्के — आहत/पंचमार्क सिक्के

ध्यान दें: अशोक के अभिलेखों में "देवानांप्रिय पियदस्सी" नाम मिलता था — जेम्स प्रिंसेप द्वारा 1837 में ब्राह्मी लिपि पढ़े जाने तथा श्रीलंकाई बौद्ध ग्रंथों से तुलना के बाद ही यह पहचान हो सकी कि यह उपाधि सम्राट अशोक की थी।

2चंद्रगुप्त मौर्य — उदय एवं नंद वंश का अंत (Rise of Chandragupta)

📜 चंद्रगुप्त मौर्य (Chandragupta Maurya) (मौर्य साम्राज्य के संस्थापक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 321-297 ई.पू. चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त) के मार्गदर्शन में चंद्रगुप्त ने पहले पंजाब क्षेत्र में सिकंदर के बाद बचे यूनानी क्षत्रपों को हराया, फिर मगध की ओर बढ़कर धनानंद को पराजित कर लगभग 321 ई.पू. मगध पर अधिकार किया। इस प्रकार भारत के प्रथम अखिल भारतीय साम्राज्य की स्थापना हुई, जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र रही।

3सेल्यूकस संधि एवं जैन परंपरा (Treaty with Seleucus)

305-303 ई.पू. के आसपास चंद्रगुप्त का सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर (जो सिकंदर की मृत्यु के बाद पश्चिम एशिया का शासक बना) से युद्ध हुआ — चंद्रगुप्त विजयी रहे, जिसके परिणामस्वरूप एक ऐतिहासिक संधि हुई:

1. चंद्रगुप्त को बलूचिस्तान, पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान तथा सिंधु नदी के पश्चिम का क्षेत्र प्राप्त हुआ।

2. बदले में चंद्रगुप्त ने सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार स्वरूप भेंट किए, जिनका उपयोग सेल्यूकस ने इप्सस के युद्ध (301 ई.पू.) में विजय हेतु किया।

3. इसी संधि के अंतर्गत मेगस्थनीज़ को यूनानी राजदूत बनाकर चंद्रगुप्त के दरबार, पाटलिपुत्र भेजा गया — जिसने "इंडिका" ग्रंथ की रचना की।

4बिंदुसार (Bindusara)

📜 बिंदुसार (Bindusara) (मौर्य साम्राज्य का द्वितीय शासक)

✍️ रचनाकार: शासनकाल: लगभग 297-273 ई.पू. यूनानी स्रोतों में इन्हें "अमित्रघात" (शत्रुओं का नाशक) कहा गया। इन्होंने साम्राज्य का विस्तार दक्षिण भारत तक (कर्नाटक तक) किया, हालाँकि कलिंग व अत्यंत दक्षिणी भाग (तमिल क्षेत्र) साम्राज्य से बाहर रहे। सीरियाई शासक एंटियोकस प्रथम ने डायमेकस नामक राजदूत बिंदुसार के दरबार भेजा। बिंदुसार ने कथित तौर पर मीठी शराब, सूखे अंजीर व एक यूनानी दार्शनिक भेजने का अनुरोध भी किया था।

5अशोक — प्रारंभिक जीवन एवं राज्याभिषेक (Early Life of Ashoka)

अशोक बिंदुसार के पुत्र व चंद्रगुप्त के पौत्र थे। परंपरा के अनुसार राज्याभिषेक से पहले वे उज्जयिनी व तक्षशिला के प्रांतीय गवर्नर (कुमार/आर्यपुत्र) रहे — तक्षशिला में उन्हें एक विद्रोह को शांत करने भेजा गया था। बिंदुसार की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के लिए भाइयों में संघर्ष की परंपरा मिलती है, जिसमें अशोक विजयी होकर लगभग 269-268 ई.पू. में राज्याभिषिक्त हुए (अभिषेक वास्तविक राज्यारोहण के कुछ वर्ष बाद हुआ माना जाता है)।

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6कलिंग युद्ध एवं हृदय-परिवर्तन (Kalinga War & Transformation)

अशोक के शासनकाल का सबसे निर्णायक मोड़ था कलिंग युद्ध (लगभग 261 ई.पू.) — यह घटना स्वयं अशोक के 13वें बृहद शिलालेख (Major Rock Edict XIII) में विस्तार से वर्णित है।

"कलिंग विजय के पश्चात देवताओं के प्रिय राजा को धम्म के प्रति अनुराग, धम्म की चाहत व धम्म की शिक्षा उत्पन्न हुई। कलिंग की विजय पर देवताओं के प्रिय को पश्चाताप हुआ, क्योंकि किसी अजित (स्वतंत्र) देश को जीतने में वध, मृत्यु व बंदी बनाया जाना होता है, जो देवताओं के प्रिय को अत्यंत दुःखद व शोचनीय प्रतीत होता है।" — अशोक, 13वाँ बृहद शिलालेख

7अशोक का धम्म (Ashoka's Dhamma)

अशोक भारतीय इतिहास के पहले शासक थे जिन्होंने अपने संदेश सीधे प्रजा व अधिकारियों तक पहुँचाने के लिए पत्थर की सतहों, प्राकृतिक चट्टानों व पॉलिशदार स्तंभों पर अभिलेख खुदवाए। "धम्म" कोई संकीर्ण संप्रदाय (जैसे बौद्ध धर्म) नहीं, बल्कि एक व्यापक नैतिक आचार-संहिता थी, जो सभी धर्मों के लोगों के लिए स्वीकार्य हो सकती थी।

☸️ धम्म के मुख्य सिद्धांत
  • बड़ों (माता-पिता, गुरुजनों) के प्रति सम्मान
  • ब्राह्मणों व श्रमणों (संन्यासियों) के प्रति उदारता
  • दास-दासियों व सेवकों के साथ दयापूर्ण व्यवहार
  • अन्य धर्मों व परंपराओं के प्रति सहिष्णुता व सम्मान
  • अहिंसा — पशु-बलि व अनावश्यक हिंसा का त्याग
📢 धम्म-प्रसार की व्यवस्था
  • "धम्म महामात्त" नामक विशेष अधिकारी नियुक्त, जो जन-जन तक धम्म पहुँचाते थे
  • सीरिया, मिस्र, यूनान (मैसेडोनिया) जैसे देशों में दूत भेजे गए
  • पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा गया
  • धम्म-यात्राएँ (राजा द्वारा प्रजा से सीधे संवाद हेतु दौरे)

विचारणीय बिंदु: अशोक की धम्म-नीति शांति व अहिंसा का प्रचार करती थी, फिर भी उन्होंने विशाल सैन्य-व्यवस्था बनाए रखी — इतिहासकारों में यह बहस है कि क्या धम्म एक नैतिक सिद्धांत था या फिर विभिन्न धर्मों-संस्कृतियों वाले विशाल साम्राज्य को एकजुट रखने की एक व्यावहारिक/रणनीतिक नीति। दोनों दृष्टिकोण परीक्षा में संतुलित रूप से प्रस्तुत करने चाहिए।

8अशोक के अभिलेख — प्रकार एवं वर्गीकरण (Ashokan Edicts — Classification)

अशोक के कुल 33 अभिलेख मिलते हैं, जिन्हें रूप व सामग्री के आधार पर मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा जाता है — यह विषय Prelims के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

वर्गसंख्या एवं विशेषता
बृहद शिलालेख (Major Rock Edicts)14 शिलालेख — साम्राज्य की सीमाओं पर उत्कीर्ण, धम्म, कल्याण-नीति व कलिंग युद्ध (शिलालेख XIII) का वर्णन
लघु शिलालेख (Minor Rock Edicts)प्रारंभिक व छोटे अभिलेख — अशोक की व्यक्तिगत आस्था व बौद्ध धर्म ग्रहण का उल्लेख (जैसे मस्की अभिलेख, जिसमें "अशोक" नाम स्पष्ट मिलता है)
बृहद स्तंभ-लेख (Major Pillar Edicts)7 अभिलेख — पॉलिशदार स्तंभों पर, प्रशासन, न्याय व धम्म का विस्तृत विवेचन, अधिकांश गंगा के मैदानी क्षेत्र में
लघु स्तंभ-लेख (Minor Pillar Edicts)सारनाथ, साँची, कौशांबी, रुम्मिनदेई (लुम्बिनी) व निगाली सागर स्तंभों पर उत्कीर्ण — संघ-भेद व लुम्बिनी यात्रा जैसे विशिष्ट संदर्भ

9मौर्य प्रशासन — सप्तांग सिद्धांत एवं केंद्रीय व्यवस्था (Mauryan Administration)

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राज्य को सात अंगों (सप्तांग सिद्धांत) से मिलकर बना बताया गया है — यह प्राचीन भारतीय राजशास्त्र की एक महत्वपूर्ण अवधारणा है:

अंगअर्थ
स्वामी (राजा)राज्य का प्रमुख/शासक
अमात्य (मंत्रिपरिषद)राजा के मंत्री व सलाहकार
जनपद (भूमि व प्रजा)राज्य का भू-भाग एवं जनसंख्या
दुर्ग (किलेबंदी)राजधानी व सुरक्षा-व्यवस्था
कोष (राजकोष)राज्य का धन-भंडार
दंड (सेना/बल)शासन व सुरक्षा हेतु सैन्य/दंड-शक्ति
मित्र (मित्र-राज्य)संधि व सहयोगी राज्य

10प्रांतीय एवं नगर प्रशासन (Provincial & Municipal Administration)

विशाल व विविधतापूर्ण साम्राज्य (अफ़ग़ानिस्तान के पहाड़ी क्षेत्र से ओडिशा के समुद्र तट तक) में एक समान प्रशासनिक ढाँचा संभव नहीं था — इसलिए साम्राज्य में पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्र थे:

केंद्रभूमिका
पाटलिपुत्रसाम्राज्य की राजधानी — केंद्रीय शासन
तक्षशिलाउत्तर-पश्चिमी प्रांत की राजधानी (गांधार क्षेत्र)
उज्जयिनीपश्चिमी प्रांत की राजधानी (अवंति क्षेत्र)
तोसलीपूर्वी प्रांत की राजधानी (कलिंग क्षेत्र)
सुवर्णगिरिदक्षिणी प्रांत की राजधानी (कर्नाटक क्षेत्र)

मेगस्थनीज़ अनुसार पाटलिपुत्र की नगर-प्रशासन व्यवस्था

11न्याय-व्यवस्था एवं गुप्तचर तंत्र (Judiciary & Espionage System)

अर्थशास्त्र के अनुसार दो प्रकार की अदालतें थीं — "धर्मस्थीय" (दीवानी/civil न्यायालय, पारिवारिक-सामाजिक विवादों हेतु) व "कंटकशोधन" (फ़ौजदारी/criminal न्यायालय, अपराध व लोक-व्यवस्था हेतु)। राजधानी में मुख्य न्यायाधीश "धर्माधिकारिन्" कहलाता था।

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12मौर्य अर्थव्यवस्था (Mauryan Economy)

13मौर्य कला एवं स्थापत्य (Mauryan Art & Architecture)

📍 सारनाथ स्तंभ-शीर्ष (Sarnath Lion Capital) (सारनाथ, उत्तर प्रदेश)

⏰ काल: मौर्य काल, अशोक द्वारा निर्मित
⭐ महत्व: चार सिंह पीठ से पीठ जोड़कर बैठे हुए, एक घंटी-आकार आधार पर स्थापित — नीचे अबेकस पर हाथी, सिंह, बैल व अश्व की आकृतियाँ तथा 24-तीलियों वाले चार धर्मचक्र उकेरे गए हैं। इसे ही स्वतंत्र भारत ने अपना राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) बनाया — यह मौर्यकालीन पॉलिश तकनीक (मौर्य पॉलिश) का उत्कृष्ट उदाहरण है।

📍 बराबर गुफाएँ (Barabar Caves) (जहानाबाद ज़िला, बिहार)

⏰ काल: अशोक व उनके पौत्र दशरथ का काल
⭐ महत्व: भारत की प्राचीनतम शैलकृत (rock-cut) गुफाएँ — अशोक ने इन्हें आजीविक संप्रदाय के भिक्षुओं को समर्पित किया। लोमष ऋषि व सुदामा गुफाएँ प्रसिद्ध हैं — गुफाओं की भीतरी सतह पर अद्भुत काँच जैसी चमकदार पॉलिश तथा विशेष प्रतिध्वनि (echo) प्रभाव मिलता है।

14समाज एवं धर्म (Society & Religion)

15पतन के कारण — बहुविध सिद्धांत (Decline — Multiple Theories)

अशोक की मृत्यु (लगभग 232 ई.पू.) के बाद विशाल मौर्य साम्राज्य लगभग 50 वर्षों में ही बिखर गया — अंतिम शासक बृहद्रथ की हत्या सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने कर दी (लगभग 185/187 ई.पू.)। इतिहासकारों में पतन के कारणों पर मतभेद है — नीचे प्रमुख सिद्धांत संतुलित रूप से दिए गए हैं:

सिद्धांततर्क
ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया सिद्धांत (H.C. रायचौधुरी)अशोक की बौद्ध-समर्थक व अहिंसावादी नीतियों (पशु-बलि पर रोक) से परंपरागत ब्राह्मणवादी वर्ग में असंतोष फैला — पुष्यमित्र शुंग की सत्ता-प्राप्ति को इस असंतोष की परिणति माना जाता है
अति-केंद्रीकरण एवं अयोग्य उत्तराधिकारी (रोमिला थापर)साम्राज्य अत्यधिक केंद्रीकृत था — सक्षम केंद्रीय नेतृत्व के अभाव में यह ढाँचा तुरंत बिखर गया; अशोक के उत्तराधिकारी कमज़ोर व आपसी उत्तराधिकार-संघर्ष में उलझे रहे
आर्थिक संकटविशाल नौकरशाही, स्थायी सेना व दान-कार्यों (धम्म-प्रचार, स्तूप-निर्माण) पर भारी खर्च से राजकोष पर दबाव बढ़ा — कुछ विद्वान मुद्रा-अवमूल्यन (debasement of coinage) के प्रमाण भी बताते हैं
प्रांतीय विद्रोह एवं विकेंद्रीकरणदूरस्थ प्रांतों (तक्षशिला, दक्षिण भारत) में बार-बार विद्रोह हुए — कमज़ोर केंद्रीय नियंत्रण से प्रांतीय गवर्नरों (जैसे तक्षशिला) की स्वतंत्र प्रवृत्ति बढ़ी
विदेशी आक्रमणउत्तर-पश्चिम सीमा पर बैक्ट्रियन यूनानियों (इंडो-ग्रीक) के बढ़ते दबाव ने भी साम्राज्य को कमज़ोर किया, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में
अशोक की सैन्य-नीति में बदलावकलिंग युद्ध के बाद अशोक की अहिंसा-नीति से सैन्य विस्तार व नियंत्रण की परंपरागत आक्रामकता में कमी आई — कुछ विद्वान इसे भी दीर्घकालीन सैन्य-दुर्बलता का कारण मानते हैं (यह विवादास्पद मत है)

संतुलित निष्कर्ष: आधुनिक इतिहासकार यह मानते हैं कि मौर्य साम्राज्य का पतन किसी एक कारण से नहीं, बल्कि राजनीतिक (कमज़ोर उत्तराधिकारी), आर्थिक (राजकोषीय दबाव) व सामाजिक (ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया) कारकों के समन्वय से हुआ — छात्रों को परीक्षा में सभी दृष्टिकोण संतुलित रूप से प्रस्तुत करने चाहिए।

16उत्तराधिकारी एवं साम्राज्य-विस्तार तालिका (Mauryan Rulers — Summary)

शासककालप्रमुख उपलब्धि
चंद्रगुप्त मौर्यलगभग 321-297 ई.पू.साम्राज्य-स्थापना, नंद वंश का अंत, सेल्यूकस संधि
बिंदुसारलगभग 297-273 ई.पू.दक्षिण भारत तक विस्तार, "अमित्रघात"
अशोकलगभग 268-232 ई.पू.कलिंग विजय, धम्म-नीति, अभिलेख, तृतीय बौद्ध संगीति
बृहद्रथ (अंतिम शासक)लगभग 187-185 ई.पू.पुष्यमित्र शुंग द्वारा हत्या — मौर्य साम्राज्य का अंत
🎯 मौर्य साम्राज्य — उत्तर लेखन कोण UPSC: 10अं/150श | 15अं/250श || RAS: 5अं/60-70श | 10अं/120श

परीक्षा में अवश्य पूछे जाने वाले तथ्य

1. मौर्य साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से लगभग 321 ई.पू. की, धनानंद को पराजित कर। 2. सेल्यूकस संधि (305-303 ई.पू.) — चंद्रगुप्त को बलूचिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान का भाग मिला; बदले में 500 हाथी दिए गए; मेगस्थनीज़ राजदूत बनकर आया। 3. चंद्रगुप्त ने जीवन के अंत में जैन धर्म अपनाया, श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में सल्लेखना द्वारा प्राणोत्सर्ग किया। 4. बिंदुसार को यूनानी स्रोतों में "अमित्रघात" कहा गया; एंटियोकस प्रथम ने डायमेकस को राजदूत भेजा। 5. कलिंग युद्ध — लगभग 261 ई.पू., अशोक के 13वें बृहद शिलालेख में वर्णित, इसी के बाद धम्म-नीति अपनाई गई। 6. अशोक के अभिलेख चार प्रकार के — बृहद शिलालेख (14), लघु शिलालेख, बृहद स्तंभ-लेख (7), लघु स्तंभ-लेख। 7. जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि पढ़ी, जिससे अशोक के "देवानांप्रिय पियदस्सी" की पहचान संभव हुई। 8. सप्तांग सिद्धांत — स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र — कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित। 9. साम्राज्य के 5 प्रमुख केंद्र — पाटलिपुत्र (राजधानी), तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसली, सुवर्णगिरि। 10. मेगस्थनीज़ अनुसार पाटलिपुत्र नगर-प्रशासन 6 समितियों (प्रत्येक में 5 सदस्य) द्वारा संचालित होता था। 11. अर्थशास्त्र में दो न्यायालय — धर्मस्थीय (दीवानी) व कंटकशोधन (फ़ौजदारी); मुख्य न्यायाधीश धर्माधिकारिन् कहलाता था। 12. गुप्तचर दो प्रकार — संस्था (स्थिर) व संचारी (घुमंतू); गूढ़पुरुष गुप्त भेदिये कहलाते थे। 13. भूमि-कर सामान्यतः उपज का 1/6 भाग (भाग) होता था। 14. सारनाथ स्तंभ-शीर्ष (चार सिंह) स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय प्रतीक बना — 24-तीलियों वाला धर्मचक्र भारतीय ध्वज में सम्मिलित। 15. बराबर गुफाएँ (बिहार) — भारत की प्राचीनतम शैलकृत गुफाएँ, आजीविक संप्रदाय को समर्पित। 16. तृतीय बौद्ध संगीति — पाटलिपुत्र, अशोक के संरक्षण में, अध्यक्ष मोग्गलिपुत्त तिस्स। 17. अशोक ने पुत्र महेंद्र व पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म-प्रचार हेतु श्रीलंका भेजा। 18. रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख से पता चलता है कि सुदर्शन झील मौर्यकाल में निर्मित हुई थी। 19. मौर्य वंश का अंतिम शासक बृहद्रथ था, जिसकी हत्या सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने लगभग 185/187 ई.पू. की। 20. मौर्य पतन के प्रमुख सिद्धांत — ब्राह्मणवादी प्रतिक्रिया, अति-केंद्रीकरण, आर्थिक संकट, प्रांतीय विद्रोह, विदेशी आक्रमण।

📝 UPSC + RAS पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) 📝

Q1. (UPSC Prelims) मेगस्थनीज़ किसके शासनकाल में भारत आया? (a) बिंदुसार (b) चंद्रगुप्त मौर्य (c) अशोक (d) चंद्रगुप्त द्वितीय — उत्तर: (b) Q2. (UPSC Prelims) कलिंग युद्ध का वर्णन किस अभिलेख में मिलता है? (a) प्रथम बृहद शिलालेख (b) 13वाँ बृहद शिलालेख (c) 7वाँ स्तंभ-लेख (d) मस्की अभिलेख — उत्तर: (b) Q3. (UPSC Mains) कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित गुप्तचर-व्यवस्था तथा न्याय-व्यवस्था की समालोचनात्मक विवेचना कीजिए। Q4. (UPSC Mains) मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों का बहुआयामी विश्लेषण प्रस्तुत कीजिए। Q5. (RAS Pre) चंद्रगुप्त मौर्य ने अंतिम समय में कौन-सा धर्म अपनाया? (a) बौद्ध धर्म (b) जैन धर्म (c) आजीवक (d) शैव — उत्तर: (b) Q6. (RAS Mains) अशोक के धम्म की अवधारणा एवं इसके प्रसार हेतु स्थापित प्रशासनिक तंत्र की विवेचना कीजिए। Q7. (UPSC Prelims) अशोक के बृहद शिलालेखों की कुल संख्या कितनी है? (a) 7 (b) 14 (c) 33 (d) 10 — उत्तर: (b) 14 Q8. (UPSC Mains) मौर्यकालीन कला व स्थापत्य की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए, विशेषकर स्तंभ-कला व शैलकृत गुफाओं के संदर्भ में।

17कालक्रम तालिका (Timeline)

काल/वर्षघटना
लगभग 321 ई.पू.चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा धनानंद की पराजय — मौर्य साम्राज्य की स्थापना
305-303 ई.पू.चंद्रगुप्त-सेल्यूकस युद्ध व संधि — मेगस्थनीज़ का आगमन
लगभग 297 ई.पू.चंद्रगुप्त का सिंहासन-त्याग, जैन धर्म ग्रहण — श्रवणबेलगोला प्रस्थान
लगभग 297-273 ई.पू.बिंदुसार का शासनकाल — दक्षिण भारत तक विस्तार
लगभग 268-232 ई.पू.अशोक का शासनकाल
लगभग 261 ई.पू.कलिंग युद्ध — अशोक का हृदय-परिवर्तन, धम्म-नीति का प्रारंभ
लगभग 250 ई.पू.तृतीय बौद्ध संगीति, पाटलिपुत्र — मिशनरियों का प्रेषण
लगभग 232 ई.पू.अशोक की मृत्यु
लगभग 232-185 ई.पू.अशोक के दुर्बल उत्तराधिकारी — साम्राज्य का क्रमिक विघटन
लगभग 185/187 ई.पू.पुष्यमित्र शुंग द्वारा बृहद्रथ की हत्या — मौर्य साम्राज्य का अंत, शुंग वंश की स्थापना
1837 ई.(संदर्भ) जेम्स प्रिंसेप द्वारा ब्राह्मी लिपि की खोज — अशोक के अभिलेखों की पहचान संभव हुई
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