📚 अध्याय 2/11 — लोक प्रशासन

सिद्धांत एवं उपागम

Theories & Approaches | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांत (Scientific Management)
  2. प्रशासनिक प्रबंधन / शास्त्रीय सिद्धांत (Administrative / Classical Theory)
  3. नौकरशाही सिद्धांत (Bureaucratic Theory)
  4. मानव संबंध सिद्धांत (Human Relations Theory)
  5. व्यवहारवादी उपागम (Behavioural Approach)
  6. संरचना-प्रकार्यवादी उपागम (Structural-Functional Approach)
  7. पारिस्थितिक उपागम (Ecological Approach)
  8. बोनस — प्रणाली उपागम (Systems Approach)

सोचिए — 1890 के दशक की एक अमेरिकी स्टील फैक्ट्री में मज़दूर अपनी मर्ज़ी से काम करते थे, किसी को नहीं पता था कि एक मज़दूर एक दिन में कितना लोहा ढो सकता है, और उत्पादन बेहद कम था। फ्रेडरिक टेलर नाम के एक इंजीनियर ने घड़ी और स्टॉपवॉच लेकर हर हरकत को मापना शुरू किया — यहीं से जन्म हुआ वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific Management) का। कुछ दशक बाद, शिकागो की एक फैक्ट्री में एक अजीब बात हुई — रोशनी बढ़ाओ तो उत्पादन बढ़ जाए, घटाओ तो भी बढ़ जाए! एल्टन मेयो ने पाया कि असली वजह थी — मज़दूरों पर ध्यान दिया जाना और उनका आपसी सामाजिक समूह। यहीं से जन्म हुआ मानव संबंध सिद्धांत (Human Relations Theory) का। इस अध्याय में हम लोक प्रशासन के उन सभी बड़े सिद्धांतों व उपागमों (Approaches) की यात्रा करेंगे — वैज्ञानिक प्रबंधन से लेकर पारिस्थितिक उपागम तक — जो बताते हैं कि संगठन व प्रशासन को समझने के तरीके समय के साथ कैसे बदलते गए।

1वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांत (Scientific Management)

🎓 वैज्ञानिक प्रबंधन (Scientific Management) विचारक/प्रवर्तक: फ्रेडरिक विंसलो टेलर (F.W. Taylor) | वर्ष: 20वीं सदी का प्रारंभ (Midvale व Bethlehem Steel Co.)

टेलर ने "सोल्जरिंग" (Soldiering) नामक समस्या पहचानी — मज़दूर जान-बूझकर धीमी गति से काम करते थे: प्राकृतिक सोल्जरिंग (आदतन धीमापन) व व्यवस्थित सोल्जरिंग (पर्यवेक्षकों की अपेक्षाएँ बढ़ने के डर से जान-बूझकर कम उत्पादन)। टेलर ने इसे समाप्त करने हेतु वैज्ञानिक तकनीकों का प्रस्ताव रखा — "हर कार्य को करने का एक सर्वश्रेष्ठ तरीका" (One Best Way) खोजना।

वैज्ञानिक प्रबंधन के 4 मूल सिद्धांतविवरण
1. कार्य का विज्ञान विकसित करनापुराने अंगूठे के नियम (Rule of Thumb) की जगह कार्य-निष्पादन की वैज्ञानिक विधि; Time & Motion Studies की शुरुआत
2. वैज्ञानिक चयन एवं क्रमिक विकासश्रमिकों का वैज्ञानिक चयन व प्रशिक्षण ताकि अधिकतम दक्षता प्राप्त हो
3. विज्ञान व प्रशिक्षित श्रमिकों का सम्मिलनप्रशिक्षित श्रमिक + वैज्ञानिक तकनीक = उत्पादकता
4. कार्य व उत्तरदायित्व का समान विभाजनयोजना (प्रबंधन) व क्रियान्वयन (श्रमिक) में स्पष्ट विभाजन — प्रबंधक योजना बनाएँ, श्रमिक क्रियान्वयन करें

टेलर के इन चार सिद्धांतों का सार पाँच शब्दों में समाया है — "विज्ञान, अनुमान नहीं; सामंजस्य, कलह नहीं; सहयोग, व्यक्तिवाद नहीं; अधिकतम उत्पादन, सीमित उत्पादन नहीं; तथा श्रमिकों का पूर्ण विकास।" इसे टेलर ने "मानसिक क्रांति" (Mental Revolution) कहा — जिसमें श्रमिक व प्रबंधक दोनों के दृष्टिकोण में परिवर्तन आवश्यक है ताकि टकराव की जगह सहयोग हो।

वैज्ञानिक प्रबंधन की तकनीकेंविवरण
प्रकार्यात्मक फोरमैनशिप (Functional Foremanship)एकल पर्यवेक्षण (unity of command) को अस्वीकार — एक श्रमिक की निगरानी 8 विशेषज्ञ फोरमैन करें (योजना-वर्ग में: Route Clerk, Instruction Card Clerk, Time & Cost Clerk, Shop Disciplinarian; क्रियान्वयन-वर्ग में: Gang Boss, Speed Boss, Inspector, Repair Boss)
गति अध्ययन (Motion Study)कार्य-विधियों का मानकीकरण — किसी कार्य की सभी गतियों का अवलोकन कर सर्वश्रेष्ठ तरीका (one best way) निर्धारित करना
समय अध्ययन (Time Study)स्टॉपवॉच से प्रत्येक गति का मानक समय निर्धारित करना, दैनिक कार्य-योजना हेतु
विभेदी दर मज़दूरी योजना (Differential Piece Rate)मानक से कम कार्य = कम मज़दूरी; मानक पूरा = बोनस; मानक से अधिक = उच्च दर — उत्पादकता हेतु प्रोत्साहन
अपवाद सिद्धांत (Exception Principle)प्रबंधक केवल मानक से भिन्न (अपवादस्वरूप) मामलों पर ध्यान दे, सामान्य कार्य पर नहीं
अन्य तकनीकेंउपकरणों का मानकीकरण, पृथक योजना विभाग, निर्देश-पत्र, आधुनिक लागत-प्रणाली, रूटिंग सिस्टम

टेलर के प्रमुख सहयोगी थे — फ्रैंक एवं लिलियन गिलब्रेथ (Gilbreths), जिन्होंने "थर्बलिग" (Therblig) नामक 17 मूल गतियों की पहचान कर गति-अध्ययन को और परिष्कृत किया; तथा हेनरी गैंट (Henry Gantt), जिन्होंने कार्य-प्रगति दर्शाने हेतु "गैंट चार्ट" (Gantt Chart) विकसित किया, जो आज भी परियोजना-प्रबंधन में उपयोग होता है। टेलर के विचार सोवियत संघ में "स्टाखानोवाइट आंदोलन" (1920-40) के रूप में तथा विश्वभर में अपनाए गए।

आधार (Aspect)टेलर (वैज्ञानिक प्रबंधन)फेयोल (प्रशासनिक प्रबंधन)
फोकसशॉप-फ्लोर, श्रमिक-स्तरीय क्रियाएँशीर्ष-स्तरीय प्रबंधकीय गतिविधियाँ
दृष्टिकोणनीचे से ऊपर (परिचालन स्तर)ऊपर से नीचे (प्रबंधकीय स्तर)
उद्देश्यउत्पादकता सुधारना, अपव्यय समाप्त करनाप्रबंधन का सार्वभौमिक सिद्धांत विकसित करना
पद्धतिवैज्ञानिक प्रयोग, अवलोकन, मापनव्यक्तिगत अनुभव
क्षेत्रसूक्ष्म (कार्य-प्रबंधन)वृहद् (सम्पूर्ण संगठन-प्रबंधन)
प्रमुख सिद्धांतप्रकार्यात्मक फोरमैनशिपआदेश की एकता (Unity of Command)
प्रयोज्यताकेवल उत्पादन-गतिविधियाँसंगठन के सभी कार्यात्मक क्षेत्र
टेलर की विरासत (Legacy)
  • औद्योगिक इंजीनियरिंग व आधुनिक प्रबंधन की नींव रखी
  • विश्वभर (USA, UK, USSR, फ्रांस, जर्मनी, जापान) में प्रभाव
  • सरकार में दक्षता, कार्य-वर्गीकरण व कार्य-डिज़ाइन को प्रभावित किया
  • दक्षता व उत्पादकता पर बल आज भी प्रासंगिक
आलोचनाएँ (Criticism)
  • यांत्रिक दृष्टिकोण — मनुष्यों को मशीन जैसा माना
  • मनोवैज्ञानिक-सामाजिक पहलुओं की उपेक्षा (मेयो के प्रयोगों से खंडित)
  • श्रमिक अलगाव (worker alienation), बोरियत व मानवीकरण-हीनता
  • केवल शॉप-फ्लोर तक सीमित सूक्ष्म-दृष्टि, ट्रेड यूनियन के लिए खतरा
"Taylor was the first man in history who didn't just 'work' — he studied work scientifically." — पीटर ड्रकर (Peter Drucker)
💡 सरल भाषा में समझें — टेलर का सिद्धांत

सोचिए एक क्रिकेट कोच किसी बल्लेबाज़ की हर बॉल खेलने की तकनीक को स्टॉपवॉच और वीडियो-कैमरे से बारीकी से मापता है ताकि "सबसे बेहतर तरीका" (one best way) खोजा जा सके — टेलर ने ठीक यही फैक्ट्री के मज़दूरों के लिए किया। जैसे एक ईंट उठाने के 10 अलग-अलग तरीके हो सकते हैं, टेलर ने विज्ञान से वह एक तरीका खोजा जो सबसे कम थकाए और सबसे तेज़ काम करे। मतलब टेलर यह कहना चाहते थे — "अंदाज़े से काम मत करो, मापो और सबसे अच्छा तरीका ढूँढो, फिर सबको वही सिखाओ।"

2प्रशासनिक प्रबंधन / शास्त्रीय सिद्धांत (Administrative / Classical Theory)

शास्त्रीय सिद्धांत (Classical Theory) का नामकरण स्वयं हर्बर्ट साइमन ने किया — यह मैक्स वेबर के नौकरशाही सिद्धांत व टेलर के वैज्ञानिक प्रबंधन का विस्तार व संश्लेषण है, जो सम्पूर्ण संगठनात्मक ढाँचे व प्रशासन पर केंद्रित है (न कि केवल शॉप-फ्लोर पर)। इसके प्रमुख प्रतिपादक हैं — हेनरी फेयोल, लूथर गुलिक, लिंडल उर्विक, जे.डी. मूनी व ए.सी. रिले।

🎓 प्रशासनिक प्रबंधन सिद्धांत (Fayol) विचारक/प्रवर्तक: हेनरी फेयोल (Henri Fayol, 1841-1925) | वर्ष: 1916 — General and Industrial Management

फेयोल के 6 प्रकार की गतिविधियाँ (TCFSAM)विवरण
तकनीकी (Technical)उत्पादन एवं निर्माण
वाणिज्यिक (Commercial)क्रय-विक्रय एवं वस्तुओं का आदान-प्रदान
वित्तीय (Financial)पूँजी जुटाना एवं कुशल उपयोग
सुरक्षा (Security)व्यक्ति एवं संपत्ति की सुरक्षा
लेखांकन (Accounting)स्टॉक-लेखा, लागत-नियंत्रण, सांख्यिकी, तुलन-पत्र
प्रबंधकीय (Managerial)योजना, संगठन, आदेश, समन्वय, नियंत्रण (POCCC)

इनमें से प्रबंधकीय तत्व (POCCC) — योजना (Planning), संगठन (Organizing), आदेश (Commanding), समन्वय (Coordinating) एवं नियंत्रण (Controlling) — ही एक प्रबंधक के मूल दायित्व हैं और आधुनिक प्रबंधकीय भूमिकाओं की नींव हैं। इसके बाद फेयोल ने प्रशासन के 14 सिद्धांत प्रतिपादित किए, जिन्हें उन्होंने स्वयं "लचीले व असंपूर्ण" (flexible, not exhaustive) बताया:

क्र.सिद्धांतसंक्षिप्त विवरण
1कार्य-विभाजन (Division of Work)विशेषीकरण से कौशल-विकास, उत्पादकता व दक्षता में वृद्धि
2सत्ता एवं उत्तरदायित्व (Authority & Responsibility)आदेश देने का अधिकार तथा कार्य-निष्पादन का दायित्व — दोनों में संतुलन आवश्यक
3अनुशासन (Discipline)आज्ञापालन, समझौतों का सम्मान — अच्छे नेतृत्व व स्पष्ट नियमों पर निर्भर
4आदेश की एकता (Unity of Command)एक अधीनस्थ को आदेश केवल एक ही वरिष्ठ से मिले — भ्रम व टकराव से बचाव
5निर्देशन की एकता (Unity of Direction)एक लक्ष्य वाली गतिविधियों का एक ही योजना व एक ही नेता द्वारा समन्वय
6सामान्य हित को व्यक्तिगत हित पर प्राथमिकतासंगठनात्मक लक्ष्य > व्यक्तिगत हित — दृढ़ नेतृत्व व निरंतर पर्यवेक्षण से सुनिश्चित
7उचित पारिश्रमिक (Fair Remuneration)न्यायसंगत, प्रेरक व नियमित रूप से समीक्षित वेतन — समय-दर, टुकड़ा-दर, बोनस, लाभ-भागिता
8केंद्रीकरण व विकेंद्रीकरणअनुपात का प्रश्न — अधीनस्थों की भूमिका जितनी अधिक, विकेंद्रीकरण उतना अधिक
9अधिक्रम शृंखला (Scalar Chain)शीर्ष से तल तक सत्ता की पदानुक्रमिक रेखा; "गैंग प्लैंक" संचार में तेज़ी हेतु शॉर्टकट
10व्यवस्था (Order)भौतिक व्यवस्था ("हर वस्तु का एक स्थान") व सामाजिक व्यवस्था ("सही व्यक्ति सही स्थान पर")
11समता (Equity)कर्मचारियों के साथ निष्पक्षता, दयालुता व न्याय से व्यवहार
12कार्यकाल की स्थिरता (Stability of Tenure)स्थिरता से दक्षता व निष्ठा; उच्च कर्मचारी-परिवर्तन दर से प्रशिक्षण-लागत व उत्पादकता-हानि
13पहल (Initiative)कर्मचारियों को पहल हेतु प्रोत्साहित करना — मनोबल व नवाचार बढ़ाता है
14सामूहिक भावना (Esprit de Corps)टीम-भावना ही शक्ति है — सहयोग की संस्कृति, प्रतिस्पर्धा की नहीं
💡 सरल भाषा में समझें — फेयोल के सिद्धांत

फेयोल के सिद्धांत ऐसे हैं जैसे एक स्कूल चलाने के व्यावहारिक नियम। "आदेश की एकता" का मतलब है कि किसी क्लास के बच्चे को अगर क्लास-टीचर कुछ कहती है तो प्रिंसिपल उसी वक्त कोई उल्टा आदेश न दें, वरना बच्चा कन्फ्यूज़ हो जाएगा — यानी एक व्यक्ति को आदेश एक ही बॉस से मिलना चाहिए। "सामूहिक भावना" (Esprit de Corps) का मतलब है टीम-भावना — जैसे किसी स्कूल की क्रिकेट टीम आपस में लड़ती रहे तो मैच कभी नहीं जीत पाएगी, भले हर खिलाड़ी अकेले में कितना भी अच्छा हो।

गुलिक व उर्विक ने 1937 में अपने ऐतिहासिक ग्रंथ "Papers on the Science of Administration" के माध्यम से शास्त्रीय सिद्धांत को चरम पर पहुँचाया। POSDCoRB के सात तत्व अध्याय-1 में विस्तार से पढ़े जा चुके हैं — यहाँ हम गुलिक के संगठन के 10 सिद्धांत तथा उर्विक के योगदान को समझेंगे।

गुलिक के संगठन-सिद्धांत (10 Principles)विवरण
1. कार्य-विभाजन (Division of Work)कार्यों को विशिष्ट इकाइयों में बाँटना, कौशल के अनुरूप कार्य सौंपना
2. विभागीकरण का 4P सूत्रउद्देश्य (Purpose — स्वास्थ्य, शिक्षा), प्रक्रिया (Process — विधि, अभियांत्रिकी), व्यक्ति (Person — बाल-कल्याण), स्थान (Place — रेलवे क्षेत्र)
3. पदानुक्रम से समन्वयआदेश-शृंखला से स्पष्टता व व्यवस्था
4. जान-बूझकर समन्वय (विचारों से)विविध कार्यों को समान लक्ष्यों के अनुरूप जोड़ना
5. समितियों से समन्वयसामूहिक विचार-विमर्श व संतुलित दृष्टिकोण
6. विकेंद्रीकरण (Holding Company Concept)शक्ति का बँटवारा — तीव्र निर्णय, अधिक जवाबदेही व विशेषज्ञता
7. आदेश की एकता"एक स्वामी, एक आदेश" — भ्रम व दोहरी जवाबदेही से बचाव
8. स्टाफ एवं लाइनलाइन अधिकारी = आदेश व निर्णय; स्टाफ अधिकारी = विशेषज्ञता व सलाह
9. प्रत्यायोजन (Delegation)जवाबदेही बरकरार रखते हुए सत्ता का हस्तांतरण
10. नियंत्रण का क्षेत्र (Span of Control)एक पर्यवेक्षक कितने अधीनस्थों को प्रभावी ढंग से संभाल सकता है — कार्य-प्रकृति, संचार-साधन व भौगोलिक फैलाव पर निर्भर
उर्विक के 8 संगठन-सिद्धांत (Urwick)विवरण
उद्देश्य का सिद्धांतहर संगठन का स्पष्ट व अभिव्यक्त उद्देश्य होना चाहिए
संगति का सिद्धांतसत्ता व उत्तरदायित्व सभी स्तरों पर समान व संगत हों
उत्तरदायित्व का सिद्धांतवरिष्ठ अपने अधीनस्थों के कार्य की पूर्ण ज़िम्मेदारी लें
अधिक्रम सिद्धांत (Scalar)संगठन में पिरामिड-सदृश पदानुक्रमिक ढाँचा हो
नियंत्रण-क्षेत्र सिद्धांतएक पर्यवेक्षक प्रभावी ढंग से केवल 5-6 अधीनस्थों को संभाल सकता है
विशेषीकरण सिद्धांतकर्मचारी एक ही कार्य पर केंद्रित रहें ताकि दक्षता बढ़े
समन्वय सिद्धांतसंगठन के विभिन्न भागों में सामंजस्यपूर्ण कार्य सुनिश्चित करना
परिभाषा सिद्धांतहर पद के कर्तव्य, सत्ता व उत्तरदायित्व स्पष्ट रूप से परिभाषित हों

उर्विक ने अपनी पुस्तक "The Elements of Administration" (1943) में 29 सिद्धांतों का विस्तृत समूह भी प्रस्तुत किया तथा "Theory Z" के माध्यम से बताया कि प्रबंधन का आर्थिक उद्देश्य उपभोक्ताओं को किफ़ायती दरों पर वस्तुएँ/सेवाएँ उपलब्ध कराना है, जिसके लिए उपभोक्ता-उत्पादक-वितरक के बीच संचार-अंतराल पाटना आवश्यक है। लूथर गुलिक ने मुख्यालय व क्षेत्रीय इकाइयों के संबंध को भी तीन रूपों में समझाया — "All Fingers" (सीधा नियंत्रण, कोई क्षेत्रीय उप-विभाजन नहीं), "Short Arms and Long Fingers" (क्षेत्रीय विभाजन परंतु मुख्यालय के भीतर ही, जैसे विदेश मंत्रालय के प्रभाग), तथा "Long Arms and Short Fingers" (मुख्यालय से दूर विकेंद्रीकृत इकाइयाँ, जैसे भारत में ज़िला कलेक्टर का कार्यालय)।

💡 सरल भाषा में समझें — नियंत्रण का क्षेत्र (Span of Control)

एक टीचर क्लास के 30 बच्चों को अच्छे से पढ़ा व संभाल सकती है, लेकिन अगर उसी टीचर को 300 बच्चों की एक साथ ज़िम्मेदारी दे दी जाए तो न पढ़ाई ठीक होगी न अनुशासन — यही है "नियंत्रण का क्षेत्र" (Span of Control)। इसी तरह गुलिक व उर्विक कहते हैं कि एक अफसर सीमित संख्या में ही अधीनस्थों को प्रभावी ढंग से संभाल सकता है — इसीलिए बड़े दफ्तरों में एक के ऊपर एक अफसरों की पूरी सीढ़ी (hierarchy) बनानी पड़ती है।

शास्त्रीय सिद्धांत का महत्व
  • प्रशासन-विज्ञान की नींव — विल्सन के "प्रशासन-विज्ञान" की माँग का उत्तर
  • रिपोर्टिंग, बजटिंग, प्रत्यायोजन जैसी प्रबंधकीय तकनीकों का प्रवर्तन
  • सत्ता, उत्तरदायित्व, आदेश-एकता जैसी अवधारणाओं का ढाँचा दिया
  • मानव-संबंध व व्यवहारवादी सिद्धांतों की नींव बना
शास्त्रीय सिद्धांत की आलोचना
  • अवैज्ञानिक — अनुभवजन्य परीक्षण का अभाव, हर्बर्ट साइमन ने इसे "कहावतें" (Proverbs) कहा
  • मानवीय पक्ष की उपेक्षा — श्रमिकों को मशीन का पुर्जा माना (वॉरेन बेनिस: "बिना लोगों के संगठन")
  • अंतर्विरोधी सिद्धांत — केंद्रीकरण बनाम विकेंद्रीकरण जैसे टकराव
  • अनौपचारिक संगठन की उपेक्षा — बर्नार्ड व साइमन ने इसे उजागर किया
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

3नौकरशाही सिद्धांत (Bureaucratic Theory)

"Bureaucracy" शब्द सर्वप्रथम फ्रांसीसी अर्थशास्त्री विंसेंट डी गॉर्ने (Vincent de Gournay) ने 1745 में गढ़ा था, जब उन्होंने फ्रांस में उभरते "ब्यूरोमेनिया" के रुझान को देखा। 1789 में फ्रेंच अकादमी ने इसे "सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों के प्रभाव" के रूप में परिभाषित किया। परंतु इसे एक तटस्थ, व्यवस्थित सामाजिक-वैज्ञानिक अवधारणा के रूप में सर्वप्रथम जर्मन समाजशास्त्री मैक्स वेबर (1864-1920) ने प्रस्तुत किया।

🎓 आदर्श प्रारूप नौकरशाही (Ideal-Type Bureaucracy) विचारक/प्रवर्तक: मैक्स वेबर (Max Weber) | वर्ष: प्रारंभिक 20वीं सदी — "The Theory of Social and Economic Organization"

💡 सरल भाषा में समझें — सत्ता के 3 प्रकार

महात्मा गांधी के पास कोई सरकारी पद नहीं था, फिर भी लाखों लोग उनका अनुसरण करते थे — यह करिश्माई सत्ता है, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व से आती है। किसी गाँव में पुराने ज़माने के राजा-महाराजा की आज्ञा इसलिए मानी जाती थी क्योंकि "हमेशा से ऐसा ही होता आया है" — यह परंपरागत सत्ता है। परंतु आज अगर ज़िला कलेक्टर कोई आदेश दे तो हम उसे इसलिए मानते हैं क्योंकि वह "कलेक्टर की कुर्सी" पर बैठा है, भले वह व्यक्ति कोई भी हो — कलेक्टर बदल जाए तब भी वही आदेश-पालन होगा। यही वैध-तर्कसंगत सत्ता है, जिस पर पूरी आधुनिक नौकरशाही टिकी है।

वेबर के अनुसार नौकरशाही आधुनिक प्रशासन का सर्वाधिक तर्कसंगत रूप है, जो निम्न विशेषताओं पर आधारित है:

क्र.विशेषता (Characteristic)विवरण
1श्रम-विभाजन एवं विशेषीकरणकार्य को इकाइयों में बाँटना; बार-बार वही कार्य करने से दक्षता
2पदानुक्रम (Hierarchy)आदेश की शृंखला — प्रत्येक कर्मचारी उच्च प्राधिकारी की निगरानी में
3नियम (Rules)सभी कार्य स्थापित नियमों के अनुसार — एकरूपता व निरंतरता सुनिश्चित
4योग्यता-आधारित भर्तीतकनीकी योग्यता व खुली प्रतियोगी परीक्षा से नियुक्ति, व्यक्तिगत पसंद नहीं
5पूर्णकालिक अधिकारीकर्मचारी अपना पूरा समय संगठन को समर्पित करें
6कैरियर विकासपदानुक्रम में पदोन्नति का अवसर
7नियमित वेतन एवं पेंशनपद के अनुसार निश्चित वेतन तथा सेवानिवृत्ति-लाभ
8निजी-लोक हितों का पृथक्करणसंगठनात्मक संसाधनों का निजी लाभ हेतु उपयोग वर्जित
9अवैयक्तिकता (Impersonality)बिना पूर्वाग्रह या भावनात्मक प्रभाव के, नियमानुसार निष्पक्ष कार्य
10व्यवस्थित अनुशासनआचार-संहिता व अनुशासनात्मक नियंत्रण
11लिखित दस्तावेज़ीकरणसभी निर्णय व गतिविधियाँ औपचारिक रूप से अभिलिखित
12दक्षताश्रम-विभाजन, योग्यता-चयन, नियत वेतन व निष्पक्ष कार्य-प्रणाली से दक्षता
मॉर्स्टीन मार्क्स के अनुसार नौकरशाही के प्रकारविवरण
संरक्षक नौकरशाही (Guardian)अधिकारी नैतिक आचरण में प्रशिक्षित, जन-कल्याण के संरक्षक — उदा. प्लेटो का दार्शनिक-राजा, प्रशिया (1640-1740)
जाति नौकरशाही (Caste)उच्च जाति/वर्ग से अधिकारी — उदा. प्राचीन भारत, कुलीन इंग्लैंड, मेइजी-जापान
संरक्षण/लूट-तंत्र (Patronage/Spoils System)सत्तारूढ़ दल के वफादारों को पद — उदा. परंपरागत रूप से USA, 19वीं सदी तक UK
योग्यता नौकरशाही (Merit)योग्यता व खुली प्रतियोगी परीक्षा पर आधारित नियुक्ति — उदा. भारत जैसी आधुनिक लोकतांत्रिक सिविल सेवाएँ
नौकरशाही की सीमाएँ (Negative Aspects)विवरण
कठोर पदानुक्रमसामाजिक-राजनीतिक परिवर्तनों के प्रति अनुत्तरदायी हो सकती है
अत्यधिक नियंत्रणतकनीकी विशेषज्ञता के दम पर अधिनायकवादी प्रवृत्तियाँ
अवैयक्तिक व्यवहारव्यक्तिगत मामलों में असंवेदनशीलता व अन्याय
खंडित भूमिकाएँसंकीर्ण, पूर्व-निर्धारित कार्य — व्यक्तिगत निर्णय की गुंजाइश कम
अनुकूलन में असमर्थतासंगति पर बल के कारण बदलती परिस्थितियों में लचीलेपन की कमी
पर्यावरण की उपेक्षासामाजिक-सांस्कृतिक-राजनीतिक परिवेश से अंतःक्रिया को नज़रअंदाज़ करना
स्व-हित प्रधानतासंगठन/समाज के लक्ष्यों से ऊपर अपने हितों को प्राथमिकता
भ्रष्टाचार की संभावनानियमों को व्यक्तिगत लाभ हेतु मोड़ना
विकासशील देशों से असंगतिकठोर वेबेरियन ढाँचा उन देशों की ज़रूरतों से मेल नहीं खाता जहाँ लचीलापन व नवाचार आवश्यक है

वेबर के आदर्श मॉडल की कई विद्वानों ने आलोचना की है, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

आलोचक (Critic)मुख्य आलोचना
रॉबर्ट के. मर्टन (Robert K. Merton)"लक्ष्य-विस्थापन" (Goal Displacement) — नियमों का पालन साधन से साध्य (अंत) बन जाता है; अत्यधिक अनुरूपता व सुरक्षित निर्णय लेने की प्रवृत्ति (trained incapacity); "लाल फीताशाही" (red tape) से ग्राहक-सेवा प्रभावित; अत्यधिक केंद्रीकरण से विलंबित निर्णय
एल्विन गोल्डनर (Alvin Gouldner)नौकरशाही के तीन प्रतिरूप बताए — दंड-केंद्रित (Punishment-Centred), प्रतिनिधिक (Representative — पारस्परिक सहमति से नियम) एवं नकली (Mock — नियम केवल कागज़ों पर, व्यवहार में उपेक्षित)
मिशेल क्रोज़िए (Michel Crozier)"नौकरशाही का दुष्चक्र" (Bureaucratic Vicious Circle) — नियमों की कठोरता से अनिश्चितता के क्षेत्रों में ही वास्तविक शक्ति केंद्रित हो जाती है; परिवर्तन का प्रतिरोध
हैरी एम. जॉनसन (Harry M. Johnson)नियमों पर अत्यधिक बल से नौकरशाह व्यावहारिक उद्देश्य भूल जाते हैं — ग्राहक के लिए अनूठी समस्या को नौकरशाह "नियमित मामला" मानकर सुलझाता है
वॉरेन बेनिस (Warren Bennis)भविष्यवाणी की कि परंपरागत वेबेरियन नौकरशाही तेज़ी से बदलते परिवेश के अनुकूल न होने के कारण पतनोन्मुख होगी
चार्ल्स पेरो (Charles Perrow)इसके विपरीत तर्क — नियमित प्रशासनिक कार्यों के प्रबंधन में नौकरशाही आज भी प्रभावी व प्रभावशाली है
💡 सरल भाषा में समझें — लक्ष्य-विस्थापन (Merton) व लाल-फीताशाही

सोचिए राशन कार्ड बनवाने आप ब्लॉक ऑफिस जाते हैं और वहाँ बाबू कहता है "फॉर्म में एक कॉलम खाली है, कल फिर आना" — जबकि आपकी असली ज़रूरत (राशन कार्ड बनवाना) सामने खड़ी है। यहाँ "नियम भरना" खुद एक लक्ष्य बन गया, जबकि नियम तो सिर्फ साधन थे असली काम पूरा करने का — मर्टन इसी को "लक्ष्य-विस्थापन" (Goal Displacement) कहते हैं। इसी अत्यधिक नियम-प्रेम को हम रोज़मर्रा की भाषा में "लाल फीताशाही" (Red Tape) कहते हैं।

क्या नौकरशाही अपरिहार्य है?: एफ.ए. नाइग्रो व एल.जी. नाइग्रो के शब्दों में — "निकट भविष्य में नौकरशाही के लुप्त होने या समाज में इसके प्रभाव में कमी की कोई संभावना नहीं है।" जब तक हम परमाणु शक्ति, वाहन, दूरसंचार व रोज़गार-सुरक्षा रहित सरल युग में वापस नहीं जाना चाहते, तब तक नौकरशाही से बचा नहीं जा सकता।

4मानव संबंध सिद्धांत (Human Relations Theory)

1930 के आर्थिक मंदी, पूँजी-प्रधान उद्योगों में हड़तालों, तकनीकी प्रगति से श्रमिकों की बढ़ती शिक्षा-अपेक्षाएँ, तथा टेलरवाद की प्रतिक्रिया में मानव संबंध विचारधारा (लगभग 1940 से) का उदय हुआ। कीथ डेविस के अनुसार, "मानव संबंध का अर्थ है लोगों को इस प्रकार कार्य में एकीकृत करना कि वे आर्थिक, मनोवैज्ञानिक व सामाजिक संतुष्टि पाते हुए सहयोगपूर्ण ढंग से उत्पादक कार्य हेतु प्रेरित हों।"

🎓 हॉथोर्न प्रयोग (Hawthorne Experiments) विचारक/प्रवर्तक: एल्टन मेयो (Elton Mayo) — मानव संबंध विचारधारा के जनक | वर्ष: 1924-1932, Western Electric Company, शिकागो

हॉथोर्न प्रयोग के चरणमुख्य निष्कर्ष
प्रकाश-प्रयोग (Illumination, 1924)रोशनी बढ़ाने व घटाने दोनों में उत्पादकता बढ़ी — भौतिक परिस्थितियों से परे कोई कारक काम कर रहा था
रिले असेंबली टेस्ट रूम (1927-29)विश्राम-अवकाश व कम कार्य-घंटों से उत्पादकता बढ़ी — वास्तविक कारण था कार्य में स्वतंत्रता व बेहतर सामाजिक संबंध, न कि केवल भौतिक बदलाव
द्वितीय रिले समूह — समूह बोनस (1928)समूह-बोनस से 13% उत्पादकता वृद्धि — प्रेरणा का प्रदर्शन-प्रभाव
माइका-विभाजन समूहसामाजिक अंतःक्रिया व अनौपचारिक समूहों से कार्य-संतुष्टि व उत्पादकता प्रभावित हुई
साक्षात्कार अध्ययन (1928-32)लगभग 1600 कर्मचारियों के गहन साक्षात्कार — शिकायत व्यक्त करने का अवसर मिलने से मनोबल बढ़ा
प्रेक्षण अध्ययन — बैंक वायरिंग रूम (1931-32)14 श्रमिकों पर अध्ययन — कर्मचारी प्रबंधन के लक्ष्यों के विपरीत भी अनौपचारिक समूह-मानदंडों का पालन करते हैं

मेयो के प्रयोगों के निष्कर्ष: मनुष्य केवल आर्थिक प्राणी नहीं बल्कि सामाजिक प्राणी है; भौतिक कार्य-परिस्थितियों का उत्पादकता पर सीमित प्रभाव है; संगठनों में अनौपचारिक समूह स्वाभाविक रूप से बनते हैं; उच्च मनोबल (पहचान व स्वतंत्रता से प्रेरित) उत्पादकता बढ़ाता है; तथा शिकायतों को सुनने का मंच असंतोष घटाता है। मेयो ने "रैबल हाइपोथिसिस" (कि समाज केवल स्वार्थी व्यक्तियों का समूह है) को खारिज किया।

💡 सरल भाषा में समझें — हॉथोर्न प्रभाव

जैसे कोई टीचर जब क्लास में घूम-घूम कर बच्चों पर व्यक्तिगत ध्यान देना शुरू कर दे — भले पढ़ाई का तरीका बिल्कुल न बदले — तो बच्चे अपने-आप ज़्यादा मन लगाकर पढ़ने लगते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है "मुझ पर ध्यान दिया जा रहा है।" यही मेयो के प्रयोग का सबसे बड़ा सबक है — मशीन-जैसी सुविधाएँ बढ़ाने से ज़्यादा असर मानवीय ध्यान व अपनापन देने से पड़ता है। इसी को आज "हॉथोर्न प्रभाव" (Hawthorne Effect) कहा जाता है — लोग बेहतर काम इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें देखा/परखा जा रहा है।

मेयो के प्रमुख ग्रंथ
  • Democracy and Freedom (1919)
  • The Human Problems of an Industrial Civilization (1933)
  • The Social Problems of an Industrial Civilization (1945)
  • The Political Problems of an Industrial Civilization (1947)
मेयो के प्रयोगों की आलोचना
  • डब्ल्यू.एच. व्हाइट — कर्मचारियों के निजी जीवन में हस्तक्षेप को बढ़ावा देने का आरोप
  • प्रबंधन के प्रति पक्षपात — प्रबंधकीय व्यवहार पर कोई प्रयोग नहीं किया
  • त्रुटिपूर्ण शोध-पद्धति व ट्रेड यूनियन की भूमिका की उपेक्षा (शेपर्ड, बार्ज)
  • केरी — छोटे व चयनित नमूने से सामान्यीकरण पर सवाल

मेरी पार्कर फॉलेट — गतिशील प्रशासन (Mary Parker Follett — Dynamic Administration)

मेरी पार्कर फॉलेट को "प्रबंधन की जननी" (Mother of Management) कहा जाता है। उनका मानना था कि समन्वय (Coordination) संगठन का प्रथम सिद्धांत है। उन्होंने "परिस्थिति का नियम" (Law of the Situation) प्रस्तुत किया — आदेश किसी व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि परिस्थिति की माँग से उपजना चाहिए। उन्होंने रचनात्मक संघर्ष (Constructive Conflict) की भी वकालत की — संघर्ष को दबाने या समझौते से नहीं, बल्कि "एकीकरण" (Integration) से सुलझाना चाहिए, जिसमें दोनों पक्षों के हित संतुष्ट हों। फॉलेट ने सत्ता के "साथ" कार्य करने (power-with) को सत्ता के "ऊपर" (power-over) से बेहतर बताया।

💡 सरल भाषा में समझें — फॉलेट का "एकीकरण"

दो बहनों को एक ही संतरा चाहिए और झगड़ा हो रहा है। माँ बीच का हल निकालती है — आधा-आधा बाँट दो — यह "समझौता" (compromise) है, दोनों को पूरा संतरा नहीं मिला। परंतु अगर माँ पूछे "तुम्हें संतरा क्यों चाहिए?" तो पता चलता है एक बहन को सिर्फ छिलके से केक बनाना है और दूसरी को सिर्फ गूदा खाना है — अब दोनों को पूरी संतुष्टि मिल सकती है, बिना किसी का त्याग किए। यही है फॉलेट का "एकीकरण" (Integration) — असली ज़रूरत समझकर ऐसा हल निकालना जिसमें दोनों पक्ष जीतें।

🎓 मैस्लो का आवश्यकता-पदानुक्रम सिद्धांत विचारक/प्रवर्तक: अब्राहम मैस्लो (Abraham Maslow) | वर्ष: 1943

स्तर (निम्न से उच्च)आवश्यकताउदाहरण
1शारीरिक आवश्यकताएँ (Physiological)भोजन, जल, नींद, वेतन
2सुरक्षा आवश्यकताएँ (Safety)नौकरी की सुरक्षा, स्वास्थ्य-बीमा
3सामाजिक आवश्यकताएँ (Social)मित्रता, टीम-भावना, संबंध
4सम्मान आवश्यकताएँ (Esteem)मान्यता, पदोन्नति, उपलब्धि
5आत्म-सिद्धि आवश्यकताएँ (Self-Actualization)क्षमता की पूर्ण प्राप्ति, सृजनात्मकता
💡 सरल भाषा में समझें — मैस्लो का पिरामिड

एक दिहाड़ी मज़दूर जिसे दो वक़्त की रोटी जुटाने की चिंता है, वह उस समय "समाज में इज़्ज़त" या "अपनी प्रतिभा साबित करने" के बारे में नहीं सोचेगा — पहले पेट भरेगा (शारीरिक आवश्यकता), फिर नौकरी पक्की होगी तो सुरक्षा महसूस करेगा, फिर दोस्त-रिश्तेदार (सामाजिक), फिर तरक्की व सम्मान चाहेगा, और अंत में जब सब कुछ मिल जाए तब वह अपनी असली प्रतिभा (जैसे पेंटिंग, लेखन) को निखारने के बारे में सोचेगा। यही क्रम है मैस्लो का पिरामिड — नीचे की ज़रूरत पूरी हुए बिना ऊपर की ज़रूरत मन में आती ही नहीं।

डगलस मैकग्रेगर (Douglas McGregor, MIT) ने 1960 में मानव-प्रकृति के दो विपरीत दृष्टिकोण — थ्योरी X एवं थ्योरी Y — प्रस्तुत किए, जो प्रबंधकों की श्रमिकों के प्रति धारणा को दर्शाते हैं:

थ्योरी X (Theory X)
  • अधिकांश लोग कार्य को नापसंद करते हैं व टालते हैं
  • निर्देशन, नियंत्रण व दंड की धमकी से ही कार्य करते हैं
  • औसत व्यक्ति आलसी है, उत्तरदायित्व से बचता है
  • अधिनायकवादी प्रबंधन शैली — निर्देश ऊपर से नीचे
थ्योरी Y (Theory Y)
  • कार्य मनुष्य के लिए स्वाभाविक है — विश्राम/खेल जैसा
  • लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता स्वाभाविक व्यवहार है
  • लोग आत्म-निर्देशन व आत्म-नियंत्रण का प्रयोग करते हैं
  • सहभागी प्रबंधन — नवाचार व सृजनात्मकता को प्रोत्साहन
💡 सरल भाषा में समझें — X बनाम Y

एक टीचर जो मानती है कि "बच्चे मौका मिलते ही नकल करेंगे" वह हर परीक्षा में सख़्त निगरानी, CCTV व जाँच में उलझी रहती है (थ्योरी X सोच)। दूसरी टीचर मानती है कि "बच्चे खुद अच्छा करना चाहते हैं, बस सही माहौल चाहिए" — वह भरोसा करके ज़िम्मेदारी सौंपती है और बच्चे खुद प्रेरित होकर मेहनत करते हैं (थ्योरी Y सोच)। मैकग्रेगर कहना चाहते थे कि एक मैनेजर की अपने कर्मचारियों के बारे में धारणा ही तय करती है कि वह उनके साथ कैसा व्यवहार करेगा।

चेस्टर बर्नार्ड ने भी अपनी पुस्तक "The Functions of the Executive" (1938) में संगठनों को "सहयोग की प्रणाली" (Cooperative System) बताया — कार्यपालक के मुख्य कार्य हैं संचार-प्रणाली स्थापित करना, आवश्यक सेवाएँ प्राप्त करना, तथा संगठनात्मक उद्देश्य निर्धारित करना (इनका विस्तृत विवरण अगले खंड — व्यवहारवादी उपागम — में है)।

आधारशास्त्रीय सिद्धांत (Classical)मानव संबंध सिद्धांत (Human Relations)
संगठन-संरचनाऔपचारिक संगठन-ढाँचाअनौपचारिक संगठन व व्यक्तिगत गतिशीलता
श्रमिक की छविमशीन का पुर्जा, "आर्थिक मानव"सामाजिक प्राणी, अनौपचारिक समूह बनाने वाला
प्रेरणा के कारकआर्थिक पुरस्कार, भौतिक परिस्थितियाँसामाजिक-मनोवैज्ञानिक कारक
पर्यवेक्षण शैलीअधिनायकवादीलोकतांत्रिक व सहभागी
बलतथ्यों पर बलमूल्यों पर बल
दक्षता का आधारसिद्धांतों पर आधारित संरचनाकर्मचारी-संतुष्टि व मानव-संबंध
प्रमुख विचारकमैक्स वेबर, हेनरी फेयोलएल्टन मेयो, मेरी पार्कर फॉलेट

5व्यवहारवादी उपागम (Behavioural Approach)

व्यवहारवादी उपागम संगठनों में व्यक्तियों व समूहों के वास्तविक व्यवहार (actual behaviour) पर केंद्रित है — यह संगठन को एक सामाजिक व्यवस्था मानता है, तथा औपचारिक संरचना/निर्देशों से अधिक महत्वपूर्ण "व्यवहार" को मानता है। यह मनोविज्ञान, समाज-मनोविज्ञान व नृविज्ञान से ज्ञान उधार लेता है, तथा शास्त्रीय सिद्धांतों के विरुद्ध एक विरोध-आंदोलन (protest movement) के रूप में उभरा।

🎓 प्रशासनिक व्यवहार (Administrative Behavior) विचारक/प्रवर्तक: हर्बर्ट ए. साइमन (Herbert A. Simon) | वर्ष: 1947 — नोबेल पुरस्कार 1978

💡 सरल भाषा में समझें — परिबद्ध तर्कसंगतता व संतुष्टिकरण

जब आप कॉलेज चुनते हैं, तो आप दुनिया-भर के हज़ारों कॉलेज की तुलना करके "सर्वश्रेष्ठ" कॉलेज नहीं चुनते — क्योंकि इतना समय, पैसा व जानकारी किसी के पास नहीं होती (यही है परिबद्ध तर्कसंगतता — Bounded Rationality)। इसकी बजाय आप अपने शहर/बजट के 5-6 कॉलेज देखकर, जो "ठीक-ठाक अच्छा" लगे उसे चुन लेते हैं — साइमन इसी को "संतुष्टिकरण" (Satisficing) कहते हैं: सर्वश्रेष्ठ नहीं, पर्याप्त रूप से अच्छा विकल्प चुनना।

🎓 कार्यपालक के कार्य (Functions of the Executive) विचारक/प्रवर्तक: चेस्टर आई. बर्नार्ड (Chester I. Barnard) | वर्ष: 1938

💡 सरल भाषा में समझें — उदासीनता का क्षेत्र (Zone of Indifference)

ऑफिस में बॉस कहे "यह रिपोर्ट कल तक भेज दो" तो आप बिना सवाल किए मान लेते हैं — यह आपके काम का ही हिस्सा है (यानी यह आदेश "उदासीनता के क्षेत्र" के भीतर आता है, आप उस पर सवाल नहीं उठाते)। परंतु अगर बॉस कहे "मेरे घर का निजी काम कर दो" तो आप सवाल उठाएँगे — क्योंकि यह उस दायरे से बाहर है। बर्नार्ड कहना चाहते थे कि सत्ता तब तक ही काम करती है जब तक अधीनस्थ उसे स्वीकार करने को तैयार हो — सत्ता ऊपर से थोपी नहीं जाती, नीचे से स्वीकृति से बनती है।

व्यवहारवादी उपागम की विशेषताएँविवरण
सामाजिक व्यवस्था के रूप में संगठनवास्तविक संगठनों में वास्तविक व्यवहार पर फोकस
अनुभवजन्य आधारअवलोकन, आँकड़ों व प्रयोग पर आधारित
अंतर-अनुशासनात्मकमनोविज्ञान, समाजशास्त्र व राजनीति विज्ञान का समन्वय
निर्णय-निर्माण उन्मुखवास्तविक परिस्थितियों में निर्णय कैसे लिए जाते हैं, इसका अध्ययन
सूक्ष्म-स्तरीय विश्लेषणव्यक्तियों व छोटे समूहों पर केंद्रित
भविष्यसूचक प्रकृतिप्रशासनिक व्यवहार की व्याख्या व भविष्यवाणी का प्रयास
मूल्य-निरपेक्ष व वस्तुनिष्ठलोक प्रशासन को वस्तुनिष्ठ बनाने का प्रयास
व्यवहारवादी उपागम का महत्व
  • निर्णय-निर्माण को प्रशासन के केंद्र में स्थापित किया
  • साइमन को 1978 में नोबेल पुरस्कार — अंतरानुशासनात्मक मान्यता
  • आधुनिक व्यवहारवादी अध्ययन की नींव रखी
  • शास्त्रीय सिद्धांतों की सीमाओं को वैज्ञानिक ढंग से उजागर किया
व्यवहारवादी उपागम की आलोचना
  • औपचारिक संरचना व गैर-मानवीय कारकों की उपेक्षा
  • मूल्यों व मानदंडात्मक विश्लेषण को नज़रअंदाज़ करना
  • व्यावहारिक प्रशासकों के लिए सीमित उपयोगिता
  • मौलिकता की कमी — परंपरावाद का ही विस्तार होने का आरोप
📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

6संरचना-प्रकार्यवादी उपागम (Structural-Functional Approach)

संरचना-प्रकार्यवादी उपागम एक समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण है, जो समाज को एक जटिल व्यवस्था मानता है, जिसकी विभिन्न संरचनाएँ (संस्थाएँ, संगठन) सामाजिक स्थिरता व व्यवस्था बनाए रखने हेतु कार्य (functions) करती हैं। इसे लोक प्रशासन में सर्वप्रथम ड्वाइट वाल्डो (1955) ने लागू किया, तथा टैल्कॉट पारसन्स व रॉबर्ट मर्टन ने इसे सैद्धांतिक गहराई दी।

🎓 संरचना-प्रकार्यवाद (AGIL Framework) विचारक/प्रवर्तक: टैल्कॉट पारसन्स (Talcott Parsons) | वर्ष: 1950 का दशक

💡 सरल भाषा में समझें — AGIL को क्रिकेट टीम से समझें

एक क्रिकेट टीम को ज़िंदा रहने के लिए चार काम करने होते हैं — नए अच्छे खिलाड़ी ढूँढना व संसाधन जुटाना (Adaptation), मैच जीतने का लक्ष्य तय करना (Goal Attainment), टीम में आपसी तालमेल व एकता बनाए रखना (Integration), और टीम की परंपरा-संस्कृति-जज़्बे को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनाए रखना (Latency)। पारसंस कहते हैं कि हर समाज या संस्था — चाहे वह सरकार हो या क्रिकेट टीम — इन्हीं चार कामों को करके ज़िंदा रहती है।

रॉबर्ट मर्टन ने कार्यों (Functions) को दो भागों में बाँटा, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणा है:

प्रकार्य का प्रकारपरिभाषाउदाहरण
प्रकट प्रकार्य (Manifest Function)जान-बूझकर किया गया व स्पष्ट रूप से मान्यता-प्राप्त परिणामविश्वविद्यालय का प्रकट कार्य — शिक्षा प्रदान करना
गुप्त प्रकार्य (Latent Function)अनजाने में उत्पन्न व कम स्पष्ट परिणामविश्वविद्यालय का गुप्त कार्य — सामाजिक नेटवर्क व विवाह-बाज़ार बनाना
प्रति-प्रकार्य (Dysfunction)संरचना द्वारा उत्पन्न व्यवधान जो व्यवस्था की स्थिरता को चुनौती देते हैंअत्यधिक नियम-पालन से लक्ष्य-विस्थापन (नौकरशाही में)
💡 सरल भाषा में समझें — प्रकट व गुप्त प्रकार्य

स्कूल में सुबह की प्रार्थना-सभा (Assembly) का प्रकट उद्देश्य है अनुशासन व नैतिक शिक्षा — यह सबको साफ़ दिखता है। लेकिन इसका एक गुप्त उद्देश्य भी है जो किसी ने योजना बनाकर नहीं रखा — बच्चों में रोज़ सुबह मिलने से दोस्ती व सामूहिक पहचान (हम सब एक स्कूल के हैं) बनना। पहला "प्रकट प्रकार्य" है, दूसरा "गुप्त प्रकार्य" — मर्टन का यही मुख्य योगदान है कि किसी संस्था के केवल दिखते उद्देश्य से नहीं, उसके छिपे प्रभावों से भी समझा जाना चाहिए।

फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स ने संरचना-प्रकार्यवादी उपागम को तुलनात्मक प्रशासनिक विश्लेषण के लिए लोकप्रिय बनाया — उन्होंने पाँच प्रमुख कार्य पहचाने: आर्थिक, सामाजिक, संचारात्मक, प्रतीकात्मक व राजनीतिक। ये कार्य किसी समाज की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग या समान संरचनाओं द्वारा सम्पन्न होते हैं — यही अवधारणा अगले खंड, पारिस्थितिक उपागम, से गहराई से जुड़ती है।

महत्वपूर्ण जुड़ाव: संरचना-प्रकार्यवादी उपागम और पारिस्थितिक उपागम एक-दूसरे के पूरक हैं — रिग्स ने संरचना-प्रकार्यवादी पद्धति का उपयोग करते हुए ही पारिस्थितिक उपागम में अपना प्रसिद्ध "प्रिज़्मीय-साला मॉडल" विकसित किया, जिसे अगले खंड में विस्तार से पढ़ेंगे।

7पारिस्थितिक उपागम (Ecological Approach)

पारिस्थितिकी (Ecology) मूलतः जीव-विज्ञान का शब्द है, जिसका अर्थ है जीवों व उनके पर्यावरण के बीच संबंध। लोक प्रशासन में इसका अर्थ है — प्रशासनिक तंत्र व उसके सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक पर्यावरण के बीच पारस्परिक संबंध। प्रशासन अपने पर्यावरण से प्रभावित भी होता है और उसे प्रभावित भी करता है।

पारिस्थितिक उपागम के प्रवर्तकयोगदान
जॉन एम. गॉस (J.M. Gaus, 1947)"Ecology of Government" — प्रशासन के अध्ययन में पारिस्थितिक कारकों (जनसंख्या, स्थान, तकनीक, संसाधन) को शामिल करने वाले प्रथम विद्वान
रॉस्को मार्टिन (Roscoe Martin, 1952)पारिस्थितिक दृष्टिकोण का विस्तार
रॉबर्ट ए. डाहल (Robert A. Dahl, 1969)तुलनात्मक दृष्टिकोण से पारिस्थितिक अध्ययन को समृद्ध किया
फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स (Fred W. Riggs, 1961)"The Ecology of Public Administration" (1961) — सबसे प्रमुख प्रतिपादक; तुलनात्मक ढंग से प्रशासन व पर्यावरण की अंतःक्रिया का अध्ययन

🎓 रिग्स का पारिस्थितिक उपागम (Riggs' Ecological Approach) विचारक/प्रवर्तक: फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स (F.W. Riggs) | वर्ष: 1961 — The Ecology of Public Administration

रिग्स के 5 पारिस्थितिक कारकविवरण
आर्थिक (Economic)वित्तीय व्यवस्था, उत्पादकता का स्तर
सामाजिक (Social)परिवार, वर्ग-संरचना, धर्म
प्रतीकात्मक (Symbolic)मिथक, मूल्य, सामाजिक सहमति
संचारात्मक (Communicative)साक्षरता-दर, मीडिया की पहुँच
राजनीतिक (Political)नेतृत्व की प्रकृति, राजनीतिक व्यवस्था का प्रकार

रिग्स ने समाजों को उनके विकास-स्तर के अनुसार तीन मॉडलों में वर्गीकृत किया — यह वर्गीकरण तुलनात्मक लोक प्रशासन (अध्याय-9) से सीधा जुड़ता है:

रिग्स का मॉडलप्रकृतिउदाहरण
एग्रेरिया (Agraria)परंपरागत, कृषि-प्रधान समाज — एकल/अ-विभेदित भूमिकाएँ (Fused)शाही चीन (Imperial China)
ट्रांज़िशिया (Transitia) / प्रिज़्मीय (Prismatic)संक्रमणकालीन/विकासशील समाज — परंपरा व आधुनिकता का मिश्रण, अतिव्यापी भूमिकाएँ, अस्थिर संस्थाएँफिलीपींस, थाईलैंड, भारत जैसे विकासशील देश
इंडस्ट्रिया (Industria)आधुनिक, विकसित समाज — प्रत्येक कार्य हेतु विशिष्ट व विभेदित संस्थाएँ (Diffracted)समकालीन संयुक्त राज्य अमेरिका

रिग्स ने विकासशील देशों — विशेषकर प्रिज़्मीय समाजों — के प्रशासन को समझने हेतु "प्रिज़्मीय-साला मॉडल" (Prismatic-Sala Model) विकसित किया। "साला" (Sala) शब्द ऐसे समाजों की प्रशासनिक उप-व्यवस्था को दर्शाता है, जिसकी तीन प्रमुख विशेषताएँ हैं:

प्रिज़्मीय-साला मॉडल की विशेषताएँविवरण
विषमरूपता (Heterogeneity)आधुनिक व परंपरागत प्रथाओं का साथ-साथ अस्तित्व
औपचारिकतावाद (Formalism)औपचारिक नियमों व वास्तविक व्यवहार के बीच व्यापक अंतर — नियम कागज़ों तक सीमित
अतिव्यापन (Overlapping)एक ही भूमिका/कार्य कई परस्पर-विरोधी प्राधिकारियों द्वारा सम्पन्न होना
💡 सरल भाषा में समझें — प्रिज़्मीय समाज

एक ही गाँव में आपको सरकारी कंप्यूटरीकृत ई-मित्रा केंद्र भी मिलेगा और बगल में पुराने ढंग से चलने वाली पटवारी की चौपाल भी — यानी आधुनिक व परंपरागत दोनों तरीके एक साथ, बिखरे हुए चल रहे हैं। किसी काम के लिए नियम-पुस्तिका में कुछ और लिखा है, पर असली व्यवहार में कुछ और होता है (जैसे "आज साहब नहीं हैं, कल आना")। यही है रिग्स का "प्रिज़्मीय समाज" — न पूरी तरह पुराना, न पूरी तरह नया, बीच का एक उलझा हुआ मिश्रण, ठीक वैसे ही जैसे कोई प्रिज़्म (त्रिपार्श्व शीशा) सफ़ेद रोशनी को कई रंगों में तोड़ देता है।

राजस्थान/भारत संदर्भ — पारिस्थितिक उपागम की प्रासंगिकता: भारत — विशेषकर राजस्थान जैसे राज्य — में प्रशासन आज भी आंशिक रूप से "प्रिज़्मीय" लक्षण दिखाता है (जैसे गाँवों में पंचायत व पटवारी व्यवस्था का सह-अस्तित्व), परंतु ई-मित्रा (e-Mitra — 33 ज़िलों में क्रियाशील), जन सूचना पोर्टल व डिजिटल गवर्नेंस जैसी पहलें राज्य को धीरे-धीरे "प्रिज़्मीय" से "विवर्तित/इंडस्ट्रिया" प्रकृति की ओर ले जाने का प्रयास हैं — औपचारिकतावाद व अतिव्यापन को कम करके एकरूप, पारदर्शी सेवा-वितरण की दिशा में।

पारिस्थितिक उपागम का महत्व यह है कि यह प्रशासन की वास्तविक प्रकृति व क्रियाशीलता को समझने में सहायक है, प्रशासनिक व्यवहार को पूर्णतः समझने हेतु पर्यावरणीय कारकों के अध्ययन को प्रोत्साहित करता है, तथा तुलनात्मक लोक प्रशासन व वास्तविक-विश्व चुनौतियों के विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी है।

8बोनस — प्रणाली उपागम (Systems Approach)

लुडविग वॉन बर्टलान्फी (Ludwig von Bertalanffy) ने 1950 में "सामान्य प्रणाली सिद्धांत" (General Systems Theory) प्रस्तुत किया, जिसे टैल्कॉट पारसन्स (समाजशास्त्र), डेविड ईस्टन (राजनीति विज्ञान) तथा चेस्टर बर्नार्ड, हर्बर्ट साइमन व फ्रेड रिग्स (लोक प्रशासन) ने अपने-अपने क्षेत्रों में लागू किया। एक "प्रणाली" (System) परस्पर-जुड़े, परस्पर-निर्भर भागों का ऐसा समूह है जो एक साझा लक्ष्य की दिशा में मिलकर कार्य करता है।

डेविड ईस्टन का इनपुट-आउटपुट मॉडलविवरण
इनपुट (Input)मानवीय/भौतिक संसाधन (कर्मचारी, धन) तथा सामाजिक माँगें व समर्थन
रूपांतरण प्रक्रिया (Throughput)नीति-निर्माण, समन्वय जैसी आंतरिक प्रक्रियाएँ जो इनपुट को आउटपुट में बदलती हैं
आउटपुट (Output)नीतियाँ, सेवाएँ या विनियम जो समाज को दिए जाते हैं
प्रतिपुष्टि (Feedback)पर्यावरण से प्रतिक्रिया (नागरिक-संतुष्टि, आलोचना) जो भविष्य के इनपुट व प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है
💡 सरल भाषा में समझें — प्रणाली उपागम को शरीर से समझें

हमारा शरीर भी एक "प्रणाली" (System) है — हम भोजन खाते हैं (इनपुट), पेट व आँतें उसे पचाती हैं (throughput/रूपांतरण), शरीर को ऊर्जा मिलती है (आउटपुट), और जब ऊर्जा कम होने लगती है तो फिर भूख लगती है जो हमें दोबारा खाना खिलाती है (feedback/प्रतिपुष्टि)। ठीक इसी तरह सरकार भी जनता से माँगें व संसाधन लेती है (इनपुट), नीति बनाती है (throughput), सेवाएँ देती है (आउटपुट), और जनता की प्रतिक्रिया (संतोष/असंतोष) फिर अगली नीति को प्रभावित करती है (feedback) — यही एक सतत चलने वाला चक्र है।

लोक प्रशासन एक "खुली व्यवस्था" (Open System) है — यह समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था व अंतर्राष्ट्रीय कारकों के साथ निरंतर अंतःक्रिया करता है (बंद व्यवस्था जैसे थर्मोस्टेट के विपरीत)। यह विभिन्न उप-प्रणालियों (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी) से मिलकर बना है, जो एक बड़ी "अधि-प्रणाली" (Supra-System) — जैसे भारत सरकार व समग्र भारतीय समाज — के भीतर कार्य करती हैं। लोक-चयन उपागम (Public Choice Approach, विंसेंट ऑस्ट्रॉम, 1960 का दशक) भी इसी दौर में विकसित हुआ, जो राजनीतिक-प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अध्ययन हेतु आर्थिक सिद्धांतों का उपयोग करता है — इसे "राजनीति का आर्थिक सिद्धांत" कहा जाता है (विस्तार से अध्याय-1 में नए लोक प्रबंधन के अंतर्गत पढ़ा जा चुका है)।

"There is no difference between public and private administration — both need common principles." — हेनरी फेयोल (Henri Fayol)
🎯 सिद्धांत एवं उपागम — RAS Mains उत्तर लेखन कोण 5-अंक: 60-70 शब्द | 10-अंक: ~120 शब्द

★ परीक्षा में अवश्य ध्यान रखने योग्य तथ्य ★

1. वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रवर्तक एफ.डब्ल्यू. टेलर — शब्द "Scientific Management" लुई ब्रैंडाइस (1910) ने गढ़ा। 2. टेलर के 4 सिद्धांत — कार्य का विज्ञान, वैज्ञानिक चयन, विज्ञान-श्रमिक सम्मिलन, समान कार्य-विभाजन। 3. गिलब्रेथ दंपति ने "थर्बलिग" (गति-अध्ययन) तथा हेनरी गैंट ने "गैंट चार्ट" विकसित किया। 4. हेनरी फेयोल — "शास्त्रीय सिद्धांत का जनक", 14 सिद्धांत व POCCC तत्व — पुस्तक: General and Industrial Management (1916)। 5. गुलिक व उर्विक की "Papers on the Science of Administration" (1937) — शास्त्रीय सिद्धांत का चरम बिंदु; POSDCoRB यहीं से आया। 6. मैक्स वेबर ने सत्ता के 3 प्रकार बताए — करिश्माई, परंपरागत, वैध-तर्कसंगत; नौकरशाही वैध-तर्कसंगत सत्ता पर आधारित। 7. वेबर के आलोचक — रॉबर्ट मर्टन (लक्ष्य-विस्थापन), एल्विन गोल्डनर (3 प्रतिरूप), मिशेल क्रोज़िए (दुष्चक्र)। 8. एल्टन मेयो के हॉथोर्न प्रयोग (1924-1932) — Western Electric Company, शिकागो — मानव संबंध सिद्धांत की नींव। 9. मेरी पार्कर फॉलेट — "प्रबंधन की जननी", "परिस्थिति का नियम" व रचनात्मक संघर्ष की अवधारणा। 10. अब्राहम मैस्लो का आवश्यकता-पदानुक्रम (1943) — शारीरिक → सुरक्षा → सामाजिक → सम्मान → आत्म-सिद्धि। 11. डगलस मैकग्रेगर की थ्योरी X (अधिनायकवादी दृष्टिकोण) व थ्योरी Y (सहभागी दृष्टिकोण), 1960। 12. हर्बर्ट साइमन — "Administrative Behavior" (1947, नोबेल 1978) — परिबद्ध तर्कसंगतता व संतुष्टिकरण की अवधारणा। 13. चेस्टर बर्नार्ड — "The Functions of the Executive" (1938) — सत्ता की स्वीकृति सिद्धांत व उदासीनता का क्षेत्र। 14. टैल्कॉट पारसन्स का AGIL ढाँचा — अनुकूलन, लक्ष्य-प्राप्ति, एकीकरण, प्रतिरूप-अनुरक्षण। 15. रॉबर्ट मर्टन — प्रकट प्रकार्य (Manifest) बनाम गुप्त प्रकार्य (Latent) की अवधारणा। 16. जॉन एम. गॉस (1947) पारिस्थितिक उपागम के प्रवर्तक; फ्रेड रिग्स (1961) सर्वाधिक प्रमुख — "Ecology of Public Administration"। 17. रिग्स के मॉडल — एग्रेरिया (परंपरागत) → ट्रांज़िशिया/प्रिज़्मीय (संक्रमणकालीन) → इंडस्ट्रिया (आधुनिक)। 18. प्रिज़्मीय-साला मॉडल की 3 विशेषताएँ — विषमरूपता, औपचारिकतावाद, अतिव्यापन। 19. Mission Karmayogi का "Karmayogi Competency Model" — 34 दक्षताएँ (13 व्यावहारिक + शेष कार्यात्मक) — व्यवहारवादी उपागम का समकालीन प्रयोग। 20. लुडविग वॉन बर्टलान्फी की सामान्य प्रणाली सिद्धांत (1950) — डेविड ईस्टन का इनपुट-आउटपुट-फीडबैक मॉडल।

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न (PYQs) 📝 5-अंक (60-70 शब्द) | 10-अंक (~120 शब्द)

Q1. एफ.डब्ल्यू. रिग्स द्वारा वर्णित तुलनात्मक लोक प्रशासन की तीन प्रवृत्तियों का उल्लेख कीजिए। (मूल: 2 अंक, 2024) Q2. मैक्स वेबर द्वारा पहचाने गए 'सत्ता' (Authority) के विभिन्न प्रकार क्या हैं? (मूल: 2 अंक, 2016) Q3. हेनरी फेयोल द्वारा दिए गए प्रबंधन के पाँच कार्य (तत्व) लिखिए। (मूल: 2 अंक, 2018) Q4. वेबर और बर्नार्ड द्वारा दी गई 'वैधता' (Legitimacy) की अवधारणा किन तरीकों से भिन्न है? (10 अंक, 2024) Q5. वैज्ञानिक प्रबंधन सिद्धांत की मुख्य विशेषताओं का वर्णन करते हुए इसकी आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। (संभावित, 10 अंक) Q6. हॉथोर्न प्रयोगों के प्रमुख निष्कर्षों की विवेचना कीजिए। (संभावित, 5 अंक) Q7. हर्बर्ट साइमन की 'परिबद्ध तर्कसंगतता' (Bounded Rationality) की अवधारणा स्पष्ट कीजिए। (संभावित, 5 अंक) Q8. फ्रेड रिग्स के प्रिज़्मीय-साला मॉडल की विवेचना कीजिए। (संभावित, 10 अंक)

वर्षसिद्धांत / प्रकाशनप्रवर्तक
1911Principles of Scientific Managementएफ.डब्ल्यू. टेलर
1916General and Industrial Management (14 सिद्धांत)हेनरी फेयोल
1920 (लेखन 1922)The Theory of Social and Economic Organizationमैक्स वेबर
1924होथोर्न — प्रकाश प्रयोग प्रारंभएल्टन मेयो
1927–1932रिले असेंबली व साक्षात्कार अध्ययनएल्टन मेयो टीम
1937Papers on the Science of Administration (POSDCoRB)गुलिक एवं उर्विक
1938The Functions of the Executiveचेस्टर बर्नार्ड
1943आवश्यकता-पदानुक्रम सिद्धांतअब्राहम मैस्लो
1943The Elements of Administration (29 सिद्धांत)लिंडल उर्विक
1946–1947Proverbs of Administration / Administrative Behaviorहर्बर्ट साइमन
1947Ecology of Governmentजॉन एम. गॉस
1950सामान्य प्रणाली सिद्धांतलुडविग वॉन बर्टलान्फी
1950 का दशकAGIL ढाँचाटैल्कॉट पारसन्स
1955संरचना-प्रकार्यवाद का PA में प्रथम प्रयोगड्वाइट वाल्डो
1957Bureaucratic Structure and Personalityरॉबर्ट के. मर्टन
1960थ्योरी X एवं थ्योरी Yडगलस मैकग्रेगर
1961The Ecology of Public Administration (प्रिज़्मीय-साला मॉडल)फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स
2020–2026Mission Karmayogi — Karmayogi Competency Modelभारत सरकार, DoPT/CBC
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →
← अध्याय 1: लोक प्रशासन: अर्थ, प्रकृति, क्षेत्र, महत्व एवं विकास अध्याय 3: संगठन के सिद्धांत →