कल्पना कीजिए — सुबह उठते ही आप जिस सड़क पर चलकर स्कूल या दफ्तर जाते हैं, जिस बिजली से आपका पंखा चलता है, जिस राशन की दुकान से गेहूँ मिलता है, और जिस अस्पताल में आपका इलाज होता है — इन सबके पीछे कोई-न-कोई सरकारी तंत्र काम कर रहा होता है। यह तंत्र अपने-आप नहीं चलता — इसे चलाने, दिशा देने और बेहतर बनाने के तरीकों का व्यवस्थित अध्ययन ही लोक प्रशासन (Public Administration) कहलाता है। यह अध्याय इसी विषय की नींव है — यहाँ से हम समझेंगे कि यह विषय क्या है, इसकी प्रकृति कैसी है, इसका दायरा कितना बड़ा है, यह कितना महत्वपूर्ण है, और यह विषय पिछले 130 से अधिक वर्षों में किस तरह बदलता हुआ आज सुशासन (Good Governance) और नई लोक सेवा (New Public Service) तक पहुँचा है।
अंग्रेज़ी शब्द 'Administer' लैटिन भाषा के दो शब्दों "ad" (की ओर) तथा "ministrare" (सेवा करना, निर्देशित करना, प्रबंध करना) से मिलकर बना है। अर्थात् मूल रूप से प्रशासन का अर्थ है — सेवा करना, दिशा देना, नियंत्रित करना और मामलों का प्रबंध करना। संस्थागत सन्दर्भ के आधार पर प्रशासन को दो भागों में बाँटा जाता है — लोक प्रशासन (Public Administration), जो सरकारी परिवेश में कार्य करता है, तथा निजी प्रशासन (Private Administration), जो व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कार्य करता है। प्रशासन को "सामाजिक सम्बन्धों की एक तकनीक" (technology of social relationships) भी कहा जाता है — यह एक लक्ष्योन्मुखी, उद्देश्यपूर्ण एवं सहकारी मानवीय प्रयास है।
| विद्वान (Scholar) | परिभाषा (Definition) |
|---|---|
| ई.एन. ग्लैडन (E.N. Gladden) | प्रशासन एक लंबा और थोड़ा भारी शब्द है, परंतु इसका विनम्र अर्थ है — लोगों की देखभाल करना और मामलों का प्रबंध करना। |
| फेलिक्स ए. नाइग्रो (Felix A. Nigro) | प्रशासन किसी उद्देश्य को प्राप्त करने हेतु मनुष्यों एवं सामग्री का संगठन एवं उपयोग है। |
| एल.डी. व्हाइट (L.D. White) | प्रशासन की कला किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अनेक व्यक्तियों का निर्देशन, समन्वय एवं नियंत्रण है। |
| पफिफनर व प्रेस्थस (Pfiffner & Presthus) | प्रशासन वांछित आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मानवीय व भौतिक संसाधनों का संगठन एवं निर्देशन है। |
| लूथर गुलिक (Luther Gulick) | प्रशासन का संबंध कार्य सम्पन्न कराने से है — निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति से। |
| वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) | सार्वजनिक विधि का विस्तृत एवं क्रमबद्ध क्रियान्वयन ही प्रशासन है — सामान्य विधि का हर विशिष्ट प्रयोग प्रशासन की कला है। |
| एल.डी. व्हाइट — लोक प्रशासन | लोक प्रशासन में वे सभी संचालन शामिल हैं जिनका उद्देश्य लोक नीति (public policy) की पूर्ति अथवा प्रवर्तन है। |
| ड्वाइट वाल्डो (Dwight Waldo) | लोक प्रशासन राज्य के कार्यों पर लागू प्रबंध की कला एवं विज्ञान है। |
'Public' शब्द का अर्थ है 'government' — इसलिए लोक प्रशासन का सीधा अर्थ है सरकार का कार्य में परिवर्तित रूप, अर्थात् सरकार सामाजिक-आर्थिक व राजनीतिक मुद्दों को जिस तरह हैंडल करती है वही लोक प्रशासन है, जिसमें लोक-नौकरशाही (public bureaucracy) पर विशेष बल दिया जाता है। इसे दो व्यापक दृष्टिकोणों से देखा जाता है:
जब आप राशन कार्ड बनवाने पटवारी या ब्लॉक कार्यालय जाते हैं, तब सरकार की नीति (कि गरीब परिवारों को सस्ता अनाज मिलेगा) को ज़मीनी स्तर पर लागू करने का यही व्यावहारिक कार्य लोक प्रशासन है — नीति बनाना संकुचित नहीं, बल्कि उसे धरातल पर उतारना इसका केंद्र-बिंदु है।
सरल शब्दों में — प्रशासन लक्ष्य एवं नीतियाँ तय करता है, प्रबंधन उन्हें दक्षतापूर्वक क्रियान्वित करता है, और संगठन वह उपकरण (tool) है जिसके माध्यम से प्रबंधन उन लक्ष्यों तक पहुँचता है। फॉलेट के अनुसार, "प्रबंधन दूसरों के माध्यम से कार्य सम्पन्न कराने की कला है", जबकि फेयोल के अनुसार प्रबंधन का अर्थ है पूर्वानुमान लगाना, योजना बनाना, संगठित करना, आदेश देना, समन्वय करना एवं नियंत्रण करना। प्रबंधन संगठन के 5M — Men, Material, Machines, Methods व Money — को एक साथ लाकर परिणाम-उन्मुख कार्य करता है।
| आधार (Aspect) | प्रशासन (Administration) | प्रबंधन (Management) |
|---|---|---|
| फोकस | नीति-निर्माण एवं रणनीतिक लक्ष्य | नीति क्रियान्वयन एवं परिचालन |
| स्तर | शीर्ष-स्तरीय कार्य | मध्य से निम्न-स्तरीय कार्य |
| प्रकृति | निर्णायक एवं नौकरशाही-प्रधान | कार्यकारी एवं परिचालनात्मक |
| भूमिका | नियम व रूपरेखा तय करना | योजनाओं का क्रियान्वयन व संसाधन प्रबंधन |
| संदर्भ | सरकार एवं गैर-लाभकारी क्षेत्र में प्रमुख | लाभ-कमाने वाले संगठनों में सामान्य |
ध्यान दें: व्यवहार में प्रशासन व प्रबंधन परस्पर जुड़े व अतिव्यापी (overlapping) हैं। उच्च स्तर (सरकार, CEO, निदेशक मंडल) पर प्रशासनिक कार्य अधिक होते हैं, जबकि मध्य व निम्न स्तर (प्रबंधक, अधिकारी, पर्यवेक्षक) पर प्रबंधकीय कार्य अधिक होते हैं।
लोक प्रशासन की प्रकृति को समझने के लिए दो प्रमुख दृष्टिकोण हैं — व्यापक दृष्टिकोण (Integral View) एवं प्रबंधकीय दृष्टिकोण (Managerial View)।
| आधार (Aspect) | व्यापक दृष्टिकोण (Integral View) | प्रबंधकीय दृष्टिकोण (Managerial View) |
|---|---|---|
| परिभाषा | संगठनात्मक उद्देश्यों हेतु सभी क्रियाओं (शारीरिक, लिपिकीय, प्रबंधकीय) का योग | केवल शीर्ष-स्तरीय प्रबंधकीय निर्णय-प्रक्रिया |
| क्षेत्र | चपरासी से लेकर राष्ट्राध्यक्ष तक सभी अधिकारी शामिल | केवल नीति क्रियान्वयन करने वाले शीर्ष अधिकारी |
| समर्थक | हेनरी फेयोल, जे.ए. वेग, डिमॉक, एल.डी. व्हाइट | हर्बर्ट साइमन, स्मिथबर्ग, थॉम्पसन, लूथर गुलिक |
| भारतीय प्रासंगिकता | अधिक प्रासंगिक — 90% कार्य लिपिक (क्लर्क/बाबू) स्तर से शुरू होकर ऊपर जाता है | सीमित प्रासंगिकता — केवल उच्च अधिकारियों तक केंद्रित |
दूसरा प्रश्न है — क्या लोक प्रशासन एक कला है, विज्ञान है, या दोनों? इसे नीचे तुलनात्मक ढंग से समझते हैं:
हर्बर्ट साइमन ने प्रशासनिक सिद्धांतों को महज़ "कहावतें" (proverbs) कहकर उनकी वैज्ञानिकता पर सवाल उठाया, जबकि रॉबर्ट डाहल ने कहा कि मूल्यों व नैतिकता को प्रशासन से अलग नहीं किया जा सकता। निष्कर्ष यह है कि लोक प्रशासन का दोहरा स्वरूप (Dual Nature) है — यह भौतिकी जैसा ठोस विज्ञान नहीं, बल्कि राजनीति विज्ञान व अर्थशास्त्र जैसा एक सामाजिक विज्ञान है, जिसमें विज्ञान (सिद्धांत व संरचना) तथा कला (प्रभावी क्रियान्वयन व नेतृत्व) दोनों का सम्मिश्रण है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक विद्वान इसे एक दर्शन (Philosophy) भी मानते हैं, क्योंकि इसका मूल उद्देश्य केवल दक्षता नहीं बल्कि समाज-सेवा, नैतिक मूल्य एवं जन-कल्याण है।
लोक प्रशासन के क्षेत्र (Scope) से आशय एक क्रिया (activity) तथा एक अनुशासन (discipline) दोनों रूप में इसकी प्रमुख चिंताओं से है। एक क्रिया के रूप में यह कल्याणकारी सेवाएँ देता है, राजकीय उद्योगों का प्रबंधन करता है, निजी उद्योगों को विनियमित करता है तथा लोक-नीतियों को क्रियान्वित करता है — यह व्यापक क्षेत्र आधुनिक राज्य की विस्तृत भूमिका को दर्शाता है।
1937 में लूथर गुलिक (Luther Gulick) एवं लिंडल उर्विक (Lyndall Urwick) ने प्रशासन के कार्यों को व्यवस्थित रूप से सात भागों में बाँटा — इसे ही POSDCoRB कहा जाता है:
| अक्षर | कार्य (Function) | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|---|
| P | Planning (योजना) | क्या करना है और कैसे करना है, इसकी रूपरेखा बनाना |
| O | Organizing (संगठन) | अधिकारियों व अधीनस्थों का ढाँचा बनाकर लक्ष्यों को उप-लक्ष्यों में बाँटना |
| S | Staffing (नियुक्ति) | भर्ती, प्रशिक्षण एवं अनुकूल कार्य-परिस्थितियाँ सुनिश्चित करना |
| D | Directing (निर्देशन) | निर्णय लेना, आदेश जारी करना, संगठन का नेतृत्व करना |
| Co | Coordinating (समन्वय) | सभी गतिविधियों को कुशलतापूर्वक आपस में जोड़ना |
| R | Reporting (प्रतिवेदन) | प्रगति की निगरानी व सूचना का आदान-प्रदान |
| B | Budgeting (बजट-निर्माण) | वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन |
इस दृष्टिकोण के अनुसार प्रशासन केवल प्रबंधकीय तकनीकों तक सीमित नहीं, बल्कि प्रत्येक क्षेत्र (रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कानून-व्यवस्था) को अपनी विशेष तकनीक की आवश्यकता होती है। लुईस मेरियम (Lewis Meriam) ने इसे कैंची के दो ब्लेड (✂) से समझाया — एक ब्लेड POSDCoRB तकनीक है, दूसरा विषय-वस्तु ज्ञान; दोनों प्रभावी प्रशासन हेतु आवश्यक हैं। एम.ई. डिमॉक (M.E. Dimock) ने इसे "What" (विषय-ज्ञान) व "How" (तकनीक) के रूप में समझाया — दोनों मिलकर ही प्रभावी प्रशासन बनता है।
| दृष्टिकोण (View) | प्रमुख समर्थक (Proponents) | मुख्य विचार |
|---|---|---|
| कल्याणकारी दृष्टिकोण (Welfare-Oriented View) | एल.डी. व्हाइट, यहेजकेल ड्रोर, साइमन | राज्य व प्रशासन में कोई भेद नहीं — उद्देश्य जन-कल्याण है |
| लोक-नीति दृष्टिकोण (Public Policy View) | यहेजकेल ड्रोर, मार्सन | प्रशासन केवल नीति-क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, नीति-निर्माण में भी भूमिका |
| तुलनात्मक लोक प्रशासन (Comparative PA View) | फ्रेड रिग्स, फेरल हीडी, रॉबर्ट डाहल | "जब तक लोक प्रशासन तुलनात्मक नहीं बनता, विज्ञान होने का दावा खोखला है" — डाहल |
| मनो-सामाजिक दृष्टिकोण (Psychosocial View) | — | प्रशासन निर्वात में नहीं, सभ्यता-संस्कृति-मूल्यों के प्रभाव में कार्य करता है |
| आधुनिक दृष्टिकोण (M.P. Sharma's View) | डॉ. एम.पी. शर्मा | प्रशासनिक संरचना, कार्य, लोक निगम एवं नियंत्रण-तंत्र — चारों स्तरों को शामिल करता है |
हेनरी फेयोल, मेरी पार्कर फॉलेट व उर्विक जैसे विद्वान मानते हैं कि दोनों में कोई मौलिक भेद नहीं — प्रबंधकीय तकनीक, संचालन का पदानुक्रम (hierarchy), लेखा-फाइलिंग की एकरूपता व कर्मचारियों का आदान-प्रदान दोनों में समान है। फिर भी कुछ स्पष्ट भेद हैं:
| आधार (Aspect) | लोक प्रशासन (Public) | निजी प्रशासन (Private) |
|---|---|---|
| राजनीतिक निर्देशन | राजनीतिक नियंत्रण के अधीन | राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त |
| जवाबदेही | जनता के प्रति जवाबदेह | निजी मालिकों के प्रति जवाबदेह |
| एकरूपता का सिद्धांत | समान कानूनों से शासित, सुसंगत रहना अनिवार्य | वरीयतापूर्ण व्यवहार संभव |
| वित्तीय नियंत्रण | विधायिका द्वारा वित्त नियंत्रित | स्वतंत्र रूप से वित्त प्रबंधन |
| सेवा-उद्देश्य | जन-कल्याण व सामुदायिक सेवा | लाभ-अधिकतमीकरण |
| कानूनी ढाँचा | कठोर कानूनी ढाँचे में कार्य | परिचालन में लचीलापन |
| गुमनामी (Anonymity) | गुमनामी के सिद्धांत से युक्त | पारदर्शी, बिना गुमनामी के |
| दक्षता मापन | प्रशासनिक, नीतिगत व सेवा-दक्षता से मापन | संसाधन-उपयोग व लाभ से मापन |
वैश्वीकरण का प्रभाव: उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG) तथा सूचना-प्रौद्योगिकी क्रांति के कारण लोक व निजी प्रशासन के बीच की रेखा तेज़ी से धुँधली होती जा रही है — सरकारें अब सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के माध्यम से व्यवसाय-सदृश प्रथाएँ अपना रही हैं।
| वर्गीकरण (Classification) | विवरण |
|---|---|
| वॉकर का वर्गीकरण (Walker's Classification) | प्रशासन को 10 मुख्य सिद्धांतों में बाँटा — राजनीतिक, विधिक, वित्तीय, रक्षा, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक प्रशासन आदि। |
| फेयोल के 6 तत्व (Fayol's Elements) | तकनीकी, वाणिज्यिक, वित्तीय, सुरक्षा, लेखांकन एवं प्रशासनिक कार्य — ये छह तत्व मिलकर प्रशासन बनाते हैं। |
लोक प्रशासन को आधुनिक सभ्यता की धुरी कहा जाता है — "लोक प्रशासन = सामाजिक न्याय + विकास + सेवा"। यह नागरिकों के जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है।
| विद्वान (Scholar) | कथन / महत्व |
|---|---|
| प्रो. डनहम (Prof. Dunham) | यदि हमारी सभ्यता विफल होती है, तो प्रशासनिक विफलता ही इसका प्रमुख कारण होगी। |
| चार्ल्स ए. बीयर्ड (Charles A. Beard) | प्रशासन से बढ़कर कोई विषय महत्वपूर्ण नहीं — सभ्य शासन का भविष्य कुशल प्रशासनिक तंत्र पर निर्भर है। |
| अरस्तू (Aristotle) | राज्य का जन्म जीवन के लिए हुआ, और वह एक अच्छे जीवन के लिए बना रहता है। |
| हरमन फाइनर (Herman Finer) | कुशल प्रशासन ही सरकार का एकमात्र मज़बूत स्तंभ है — इसके बिना राज्य बिखर जाएगा। |
| एडवर्ड वाइडनर (Edward Weidner) | विकास प्रशासन सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने का साधन है। |
| मार्शल ई. डिमॉक (Marshall E. Dimock) | हर नागरिक प्रशासन से प्रभावित होता है — वह सेवाएँ प्राप्त करता है और कर चुकाता है। |
| ऑर्डवे टेड (Ordway Tead) | लोक प्रशासन एक नैतिक कार्य है, और प्रशासक इसके नैतिक अभिकर्ता हैं। |
| सी.पी. भांभरी (C.P. Bhambhri) | लोक प्रशासन के पतन के साथ सभ्यता स्वयं बिखर जाएगी। |
| लॉर्ड ब्राइस (Lord Bryce) | कानून तभी सम्मान पाता है जब वह निर्दोष की रक्षा करे और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करे। |
महत्व के प्रमुख आयाम इस प्रकार समझे जा सकते हैं:
1980 के दशक के आर्थिक सुधारों ने विकासशील देशों की सरकारों व नौकरशाही की भूमिका को गहराई से प्रभावित किया — राज्य की भूमिका "निवेशक व स्वामी" से "नियामक व पर्यवेक्षक" में बदल गई।
| राज्य की नई भूमिका | विवरण |
|---|---|
| आर्थिक संवर्धन | कृषि व उद्योग हेतु अवसंरचना का विकास |
| संस्थागत सुदृढ़ीकरण | बैंकों-सहकारी संस्थाओं का आधुनिकीकरण |
| बाज़ार विनियमन | उपभोक्ता संरक्षण हेतु नियामक निकाय (जैसे SEBI, IRDAI, TRAI) |
| मानव संसाधन विकास | शिक्षा, स्वास्थ्य व मानव संसाधन में निरंतर निवेश |
| आवश्यक वस्तु वितरण | सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से समान वितरण |
| सामाजिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण | आर्थिक उदारीकरण के जोखिमों के विरुद्ध सामाजिक सुरक्षा तंत्र |
विकासशील समाज (Developing Societies), जिन्हें प्रायः "तृतीय विश्व देश" (Third World Countries) कहा जाता है, एशिया-अफ्रीका-लैटिन अमेरिका के वे राष्ट्र हैं जो कृषि-प्रधान से औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण के दौर में हैं। फ्रेड डब्ल्यू. रिग्स (F.W. Riggs) के अनुसार, ये समाज 'एग्रेरिया' (कृषि-प्रधान) से 'इंडस्ट्रिया' (औद्योगिक) की ओर बढ़ते हुए एक 'प्रिज़्मीय समाज' (Prismatic Society) की स्थिति में होते हैं — जहाँ परंपरागत व आधुनिक तत्व साथ-साथ विद्यमान रहते हैं। मोहित भट्टाचार्य के अनुसार, "परिवर्तन की सर्वाधिक तात्कालिक आवश्यकता तथाकथित विकासशील देशों में ही है।"
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अनुकरणात्मक प्रतिरूप | औपनिवेशिक-युग के मॉडलों पर आधारित, न कि स्वदेशी व्यवस्थाओं पर — अधिनायकवादी व अभिजातवादी |
| कुशल जनशक्ति की भारी कमी | विकास कार्यक्रमों में प्रशिक्षित प्रशासकों व तकनीकी विशेषज्ञता का अभाव |
| अनुत्पादक कार्यों पर केंद्रित नौकरशाही | नौकरशाह जन-सेवा से अधिक स्व-हित को प्राथमिकता देते हैं |
| रूप व वास्तविकता में अंतर (Formalism) | नियम मौजूद हैं परंतु व्यवहार में पालन नहीं होता — वेबेरियन रूप तो है, पर वास्तविक योग्यता-तंत्र नहीं |
| नौकरशाही की परिचालन स्वायत्तता | तकनीकी विशेषज्ञता के एकाधिकार से अत्यधिक शक्ति, कमजोर संवैधानिक जवाबदेही |
| राजनीतिक-प्रशासनिक कार्यों का अतिव्यापन | नौकरशाह नीति-निर्माण में हस्तक्षेप करते हैं, प्रशासन व शासन की रेखा धुँधली |
| विकासात्मक कार्यों में अक्षमता | विरासत में मिली औपनिवेशिक व्यवस्था नियमन-कर वसूली हेतु कारगर, विकास हेतु नहीं |
विकासशील देशों में लोक प्रशासन की भूमिका बहुआयामी है — जन-अपेक्षाओं की पूर्ति (शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आवास), सामाजिक-आर्थिक विकास (कृषि-औद्योगिक विकास, भूमि-सुधार), पारंपरिक कार्यों का प्रभावी निष्पादन (कानून-व्यवस्था व राजस्व-संग्रहण विकास की पूर्व-शर्त हैं), राष्ट्रीयता की भावना का विकास (साम्प्रदायिक-जातीय तनावों के बीच एकता), तथा लोकतंत्र के अस्तित्व को सहारा देना।
विकसित देशों (उच्च GDP, उन्नत तकनीक, उच्च जीवन-स्तर) का प्रशासनिक तंत्र औद्योगीकरण, विश्व-युद्धों तथा व्यवहारिक विज्ञान की प्रगति से विकसित हुआ है। ये देश वेबेरियन मॉडल पर आधारित विशाल, विशिष्ट नौकरशाही पर निर्भर करते हैं — योग्यता-आधारित चयन, तर्कसंगत निर्णय-प्रक्रिया व पारदर्शी जवाबदेही इसकी पहचान है। कई यूरोपीय देशों को "प्रशासनिक राज्य" (Administrative States) कहा जाता है क्योंकि उनकी नौकरशाही विनियामक (regulatory) व सुरक्षा (security) दोनों भूमिकाएँ निभाती है। फिर भी, समन्वय की कमी, राजनीतिक हस्तक्षेप, आर्थिक मंदी का दबाव व कमजोर नियामक निगरानी जैसी चुनौतियाँ बनी रहती हैं।
| आधार | विकसित समाज (Developed) | विकासशील समाज (Developing) |
|---|---|---|
| भूमिका | सीमित भूमिका — निजी क्षेत्र का दक्षता हेतु विनियमन | अवसंरचना विकास व सामाजिक कल्याण में प्रमुख भूमिका |
| चुनौतियाँ | उन्नत तकनीक से साइबर अपराध जैसी जटिल समस्याएँ | गरीबी, बेरोज़गारी व निम्न उत्पादकता से निपटना |
| प्रभाव | विज्ञान व तकनीक से प्रभावित | अल्पविकसित अर्थव्यवस्था व सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से प्रभावित |
| नौकरशाही | व्यावहारिक व उत्पादन-उन्मुख | व्यक्तिगत सत्ता-केंद्रित, लक्ष्य-निर्देशित नहीं |
| संस्कृति | समतावादी-लोकतांत्रिक, असहमति के लिए खुली | पदानुक्रमिक — वरिष्ठों की राय पर सवाल नहीं |
| विधि क्रियान्वयन | प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता | कमज़ोर क्रियान्वयन से कानून कागज़ों तक सीमित |
| भ्रष्टाचार | न्यूनतम भ्रष्टाचार | व्यापक भ्रष्टाचार |
| प्रशासनिक भूमिकाएँ | अत्यधिक विशिष्ट व स्पष्ट परिभाषित | अतिव्यापी भूमिकाएँ, नौकरशाही की परिचालन स्वायत्तता |
लोक प्रशासन समाज के गठन के समय से ही अस्तित्व में रहा है, परंतु एक स्वतंत्र अकादमिक अनुशासन के रूप में इसका उदय वुडरो विल्सन के ऐतिहासिक निबंध "The Study of Administration" (1887) से माना जाता है।
| काल/स्रोत | योगदान |
|---|---|
| कौटिल्य का अर्थशास्त्र (भारत) | शासन-कला व राजनीति के प्रारंभिक सिद्धांत |
| अरस्तू की Politics (प्राचीन पश्चिम) | शासन की दार्शनिक बुनियाद |
| मैकियावेली की The Prince (मध्यकालीन पश्चिम) | प्रभावी शासन हेतु व्यावहारिक रणनीतियाँ |
| कैमरेलिज़्म — जर्मनी व ऑस्ट्रिया (18वीं सदी) | राज्य के व्यवस्थित प्रबंधन पर बल, प्रमुख विचारक: जॉर्ज ज़िंके |
निकोलस हेनरी (Nicholas Henry) ने 1887 के बाद लोक प्रशासन के विकास को छह विचार-प्रतिमानों (paradigms) में विभाजित किया है:
| चरण (काल) | नाम | प्रमुख विद्वान एवं विशेषताएँ |
|---|---|---|
| I (1887–1926) | राजनीति-प्रशासन द्वैधता (Politics-Administration Dichotomy) | वुडरो विल्सन ("PA का जनक") — नीति-निर्माण व क्रियान्वयन पृथक; फ्रैंक गुडनाउ (Politics and Administration, 1900) — "अमेरिकी PA का जनक"; एल.डी. व्हाइट (1926) — प्रथम पाठ्यपुस्तक |
| II (1927–1937) | सिद्धांतों का स्वर्ण-युग (Principles Era) | डब्ल्यू.एफ. विलोबी (1927); हेनरी फेयोल के 14 सिद्धांत; मैक्स वेबर का नौकरशाही सिद्धांत; गुलिक व उर्विक का POSDCoRB (1937); फॉलेट व मूनी-रिले के संगठनात्मक योगदान |
| III (1938–1947) | चुनौती का युग (Era of Challenge) | चेस्टर बर्नार्ड (Functions of the Executive, 1938); हर्बर्ट साइमन का "Proverbs of Administration" (1946) व Administrative Behavior (1947, नोबेल पुरस्कार 1978); रॉबर्ट डाहल की आलोचना; एल्टन मेयो के हॉथोर्न प्रयोग — मानव-संबंध उपागम का उदय |
| IV (1948–1970) | पहचान का संकट (Crisis of Identity) | नव-मानव-संबंध उपागम (आर्गिरिस, मैकग्रेगर, लिकर्ट); एफ.डब्ल्यू. रिग्स का पारिस्थितिक उपागम; नए लोक प्रशासन (NPA) का उदय; विंसेंट ऑस्ट्रॉम का लोक-चयन उपागम (Public Choice) |
| V (1971–1990s) | अंतर-अनुशासनात्मकता एवं परिपक्वता चरण | नीति-विज्ञान, राजनीतिक-अर्थशास्त्र व व्यवहार-विज्ञान का समावेश; ड्वाइट वाल्डो ने राजनीति-प्रशासन द्वैधता को "अप्रचलित सिद्धांत" (outworn credo) बताया |
| VI (1990s–वर्तमान) | शासन प्रतिमान (Governance Paradigm) | संयुक्त राष्ट्र व विश्व बैंक द्वारा सुशासन को बढ़ावा; LPG सुधार; नागरिक-केंद्रित शासन; बाज़ार-चालित प्रशासन (NPM); डिजिटल शासन का उदय (Digital India, आधार, UMANG) |
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1930 का दशक | लखनऊ विश्वविद्यालय ने राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में लोक प्रशासन को शामिल किया |
| 1937 | मद्रास विश्वविद्यालय ने लोक प्रशासन में प्रथम डिप्लोमा पाठ्यक्रम आरंभ किया |
| 1949 | नागपुर विश्वविद्यालय में डॉ. एम.पी. शर्मा के नेतृत्व में भारत का पहला स्वतंत्र लोक प्रशासन विभाग स्थापित |
| 1954 | पॉल एच. एप्पलबी की सिफारिश पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA), नई दिल्ली की स्थापना |
| 1957 | राजस्थान विश्वविद्यालय ने अर्थशास्त्र विभाग के अंतर्गत लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम आरंभ किया — प्रो. एम.बी. माथुर की अग्रणी भूमिका |
| 1959 | राजस्थान विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में पहला बैच स्नातक हुआ |
| 1965 | राजस्थान विश्वविद्यालय में लोक प्रशासन एक स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित हुआ |
| 1971 | राजस्थान विश्वविद्यालय ने लोक प्रशासन में पहली पीएच.डी. उपाधि प्रदान की |
| 1987 | UPSC की सिविल सेवा परीक्षा में लोक प्रशासन को एक वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया |
Minnowbrook Conference-I (1968) युवा विद्वानों द्वारा सिराक्यूज़ विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित की गई थी, जिसका नेतृत्व ड्वाइट वाल्डो ने किया। इसका उद्देश्य लोक प्रशासन को सामाजिक रूप से उत्तरदायी बनाना तथा प्रशासकों को परिवर्तन के वाहक (change agents) के रूप में स्थापित करना था।
| NPA में क्या नया था? (Frederickson) | विवरण |
|---|---|
| सामान्य से जन-केंद्रित | कम सामान्य नौकरशाही कार्य, अधिक जन-कल्याण पर फोकस |
| वर्णनात्मक से निर्देशात्मक | केवल सिद्धांत नहीं, वास्तविक समस्याओं का सक्रिय समाधान |
| संस्थान-केंद्रित से ग्राहक-केंद्रित | प्रशासनिक ढाँचे से अधिक नागरिक-प्रभाव को प्राथमिकता |
| निरपेक्ष से मानदंडात्मक (किंतु वैज्ञानिक) | मूल्यों व नैतिकता को वैज्ञानिक अन्वेषण के साथ जोड़ना |
| कृति (वर्ष) | लेखक | योगदान |
|---|---|---|
| Toward a New Public Administration (1971) | फ्रैंक मैरिनी | मूल्य-निरपेक्ष परंपराओं से हटकर नई दिशा का प्रस्ताव |
| Public Administration in a Time of Turbulence (1971) | ड्वाइट वाल्डो | Minnowbrook के विषयों का विस्तार |
| New Public Administration (1980) | जॉर्ज फ्रेडरिक्सन | NPA के स्थायी प्रभाव को प्रदर्शित किया |
बीस वर्ष बाद आयोजित Minnowbrook Conference-II (1988) की अध्यक्षता जॉर्ज फ्रेडरिक्सन ने की — यह पहले सम्मेलन से कहीं अधिक व्यावहारिक व कम क्रांतिकारी था:
| आधार | Minnowbrook I (1968) | Minnowbrook II (1988) |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | ड्वाइट वाल्डो | जॉर्ज फ्रेडरिक्सन |
| संरचना | संकुचित — मुख्यतः राजनीति विज्ञान पृष्ठभूमि | व्यापक — विधि, अर्थशास्त्र, योजना, नीति-अध्ययन |
| रुख | विवादास्पद, टकरावपूर्ण, क्रांतिकारी | अधिक व्यावहारिक, कम क्रांतिकारी, वरिष्ठों के प्रति सम्मानजनक |
| बल | प्रासंगिकता, मूल्य, सामाजिक समता, परिवर्तन | नेतृत्व, संवैधानिक-कानूनी परिप्रेक्ष्य, तकनीक-नीति |
| सामाजिक परिवेश | सरकार के प्रति गहरा संशय | राज्य के सिकुड़ने, निजीकरण व स्वैच्छिकता की बढ़ती माँग |
Minnowbrook-III (सितंबर 2008), जिसकी अध्यक्षता प्रो. रोज़मेरी ओ'लियरी ने की, ने वैश्विक स्तर पर विषय को अमेरिकी संदर्भ से बाहर विस्तारित किया — वैश्विक आतंकवाद, 2008 की आर्थिक मंदी, सतत विकास व डिजिटल शासन जैसे मुद्दों को शामिल किया गया। इसी सम्मेलन से "Journal of Public Administration Research and Theory (JPART)" (2009) का प्रकाशन आरंभ हुआ; अगला सम्मेलन Minnowbrook-IV वर्ष 2028 में प्रस्तावित है।
| सैद्धांतिक आधार (Theoretical Basis) | मुख्य विचार |
|---|---|
| लोक-चयन उपागम (Public Choice Approach) | विंसेंट ऑस्ट्रॉम — नौकरशाही-विरोधी दृष्टिकोण, संस्थागत बहुलवाद, विकेंद्रीकरण एवं आर्थिक तर्क का लोक सेवाओं पर प्रयोग |
| नव-टेलरवाद / प्रबंधनवाद (Neo-Taylorism/Managerialism) | वेबेरियन नौकरशाही में निजी क्षेत्र की प्रबंध-तकनीकों का समावेश — प्रदर्शन मूल्यांकन, व्यक्तिगत जवाबदेही, प्रोत्साहन |
NPM का केंद्र-बिंदु 3Es है —
| 3Es | अर्थ |
|---|---|
| मितव्ययिता (Economy) | शासन में फिजूलखर्ची समाप्त करना |
| दक्षता (Efficiency) | संसाधनों का अधिकतम उपयोग हेतु सेवा-वितरण को सुव्यवस्थित करना |
| प्रभावशीलता (Effectiveness) | स्पष्ट उद्देश्य तय कर संसाधनों को प्रमुख समस्याओं पर केंद्रित करना |
क्रिस्टोफर हुड ने NPM के सात निर्णायक तत्व बताए हैं:
| क्र. | तत्व (Element) |
|---|---|
| 1 | व्यावसायिक प्रबंधन पर बल — प्रबंधकीय स्वायत्तता के साथ मज़बूत नेतृत्व |
| 2 | स्पष्ट मानक व प्रदर्शन मापदंड (KPIs, बेंचमार्क) |
| 3 | परिणाम-नियंत्रण (Output Controls) पर बल |
| 4 | सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों का विखंडन — बड़ी नौकरशाहियों को छोटी विशिष्ट इकाइयों में बाँटना |
| 5 | सार्वजनिक क्षेत्र में अधिक प्रतिस्पर्धा — आउटसोर्सिंग, PPP |
| 6 | निजी क्षेत्र की प्रबंध-प्रथाओं को अपनाना |
| 7 | संसाधन-उपयोग में अधिक अनुशासन व मितव्ययिता — लागत-प्रभावशीलता |
ऑस्बर्न व गेब्लर ने अपनी पुस्तक "Reinventing Government" (1992) में उद्यमशील सरकार (Entrepreneurial Government) के 10 सिद्धांत प्रस्तुत किए:
| क्र. | सिद्धांत | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|---|
| 1 | उत्प्रेरक सरकार (Catalytic) | "Steer, not row" — सरकार सुविधा प्रदान करे, प्रत्यक्ष सेवा न दे |
| 2 | समुदाय-स्वामित्व वाली सरकार | सत्ता जनता के हाथों में |
| 3 | प्रतिस्पर्धी सरकार | सेवा-प्रदाताओं में प्रतिस्पर्धा से दक्षता बढ़े |
| 4 | लक्ष्य-प्रेरित सरकार | नियम-आधारित शासन से परिणाम-उन्मुख प्रबंधन की ओर |
| 5 | परिणाम-उन्मुख सरकार | इनपुट नहीं, प्रभाव व प्रदर्शन को मापना |
| 6 | ग्राहक-प्रेरित सरकार | नागरिक = ग्राहक — विकल्प व संतुष्टि पर बल |
| 7 | उद्यमी सरकार | कर के अलावा शुल्क व साझेदारी से राजस्व सृजन |
| 8 | दूरदर्शी सरकार | समस्याओं के उत्पन्न होने से पहले समाधान |
| 9 | विकेंद्रीकृत सरकार | स्थानीय टीमों को अधिक शक्ति, सहभागी निर्णय-प्रक्रिया |
| 10 | बाज़ार-उन्मुख सरकार | बाज़ार तंत्र, निजीकरण व विनियमन-मुक्ति से बेहतर सेवा-वितरण |
NPM ने कई प्रशासनिक विरोधाभास (paradoxes) भी उत्पन्न किए हैं — क्रिस्टोफर हुड इसे "प्रदर्शन विरोधाभास" (Performance Paradox) कहते हैं:
| विरोधाभास (Paradox) | व्याख्या |
|---|---|
| जवाबदेही बनाम स्वायत्तता | प्रबंधकीय लचीलेपन हेतु स्वायत्तता, सख्त प्रदर्शन-आधारित जवाबदेही से टकराती है |
| दक्षता बनाम समता | लागत-दक्षता की खोज आवश्यक सेवाओं की समान पहुँच से समझौता कर सकती है |
| ग्राहक बनाम नागरिक | नागरिकों को ग्राहक मानना उनकी लोकतांत्रिक हिस्सेदारी को कमज़ोर कर सकता है |
| विखंडन बनाम समन्वय | विकेंद्रीकृत सेवा-वितरण से एजेंसियों के बीच समन्वय की समस्या |
| मात्रात्मकता बनाम लोक-उद्देश्य | मापने योग्य लक्ष्यों पर अति-बल गुणात्मक व दीर्घकालिक मूल्यों की उपेक्षा कर सकता है |
| बाज़ार-तर्क बनाम लोक-नैतिकता | बाज़ार प्रतिस्पर्धा लोक-सेवा नैतिकता व सामूहिक कल्याण को क्षति पहुँचा सकती है |
| नवाचार बनाम जोखिम-भीरुता | NPM नवाचार को बढ़ावा देता है, पर अत्यधिक अंकेक्षण-संस्कृति जोखिम लेने को हतोत्साहित करती है |
शासन (Governance) शब्द ग्रीक शब्द "Kybernan" (पतवार चलाना, दिशा देना) से बना है। हार्लन क्लीवलैंड ने 1970 के दशक में इसे लोकप्रिय बनाया: "लोग जो चाहते हैं वह कम सरकार और अधिक शासन (governance) है।" सुशासन की अवधारणा 1990 के दशक में विश्व बैंक, UNDP व OECD की रिपोर्टों से उभरी — इसका उद्देश्य विकासशील देशों में बेहतर विकासात्मक परिणामों हेतु शासन में सुधार करना था।
| आधार | सरकार (Government) | शासन (Governance) |
|---|---|---|
| अभिविन्यास | राज्य-केंद्रित, नौकरशाही-चालित | उत्तरदायी, सहभागी व समतापूर्ण |
| नागरिकों की भूमिका | निष्क्रिय प्राप्तकर्ता | सक्रिय सहभागी / हितधारक |
| निर्णय-प्रक्रिया | पदानुक्रम, नियम, सत्ता | सहमति, साझेदारी, सहयोग |
| सेवा-वितरण | सरकार द्वारा प्रत्यक्ष प्रावधान | साझा प्रावधान — PPP, NGO, CSR |
| शक्ति | सरकारी संस्थाओं में केंद्रित | राज्य, बाज़ार व नागरिक समाज में विकेंद्रित |
विश्व बैंक (1992) के अनुसार, शासन "एक देश के आर्थिक व सामाजिक संसाधनों के विकास-प्रबंधन में शक्ति के प्रयोग का ढंग" है। इसने खराब शासन की पाँच प्रमुख समस्याएँ चिन्हित कीं — कानूनों का अनुचित/विलंबित क्रियान्वयन, कमज़ोर लेखा-प्रणाली, भ्रष्टाचार-प्रवण खरीद-प्रक्रिया, विकृत निवेश प्राथमिकताएँ, तथा लाभार्थी-भागीदारी का अभाव।
| विश्व बैंक के 4 आयाम (Dimensions) | विवरण |
|---|---|
| लोक क्षेत्र प्रबंधन | दक्षता व व्यावसायिक नौकरशाही |
| जवाबदेही | अधिकारियों को उत्तरदायी बनाना |
| विकास हेतु कानूनी ढाँचा | स्पष्ट, निष्पक्ष व प्रवर्तनीय कानून |
| सूचना एवं पारदर्शिता | निर्णय-प्रक्रिया में खुलापन |
UNDP (1997) ने सुशासन के आठ सिद्धांत प्रतिपादित किए, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
| क्र. | सिद्धांत | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | सहभागिता (Participatory) | सभी स्त्री-पुरुषों की निर्णय-प्रक्रिया में प्रत्यक्ष या प्रतिनिधि माध्यम से आवाज़ |
| 2 | सहमति-उन्मुखता (Consensus Oriented) | विभिन्न हितों में मध्यस्थता कर व्यापक सहमति प्राप्त करना |
| 3 | जवाबदेही (Accountable) | निर्णयकर्ता जनता व संस्थागत हितधारकों के प्रति उत्तरदायी |
| 4 | पारदर्शिता (Transparent) | प्रक्रियाएँ व सूचना सुलभ व समझने योग्य |
| 5 | उत्तरदायित्व/तत्परता (Responsive) | संस्थाएँ उचित समय-सीमा में सभी हितधारकों की सेवा करें |
| 6 | प्रभावशीलता व दक्षता (Effective & Efficient) | प्रक्रियाएँ व संस्थाएँ प्रभावी व कुशल हों |
| 7 | समता व समावेशिता (Equitable & Inclusive) | सभी को समान अवसर व पहुँच |
| 8 | विधि का शासन (Rule of Law) | निष्पक्ष व समान रूप से प्रवर्तित कानूनी ढाँचा |
सुशासन के प्रमुख लक्षण हैं — सहभागिता, विधि का शासन, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, समता, प्रभावशीलता-दक्षता, जवाबदेही व पूर्वानुमेयता। इसके उद्देश्य हैं — नागरिकों के जीवन-स्तर में सुधार, प्रशासन की विश्वसनीयता स्थापित करना, सूचना-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, नागरिक-हितैषी प्रशासन प्रदान करना, तथा नागरिक समाज-राज्य-बाज़ार के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना।
| सुशासन से आगे — वैकल्पिक उपागम | प्रस्तावक एवं मुख्य विचार |
|---|---|
| मानवीय शासन (Humane Governance) | HDR दक्षिण एशिया (1999) — केवल अर्थव्यवस्था नहीं, राजनीतिक-सामाजिक-नागरिक न्यूनताओं पर बल; मानव क्षमता व गरिमा का विकास |
| पर्याप्त-अच्छा शासन (Good Enough Governance) | मेरिली ग्रिंडल (2004) — सुशासन का एजेंडा "अवास्तविक रूप से लंबी सूची"; न्यूनतम स्वीकार्य शासन पर्याप्त, प्राथमिकता-क्रम तय करना ज़रूरी |
| संवर्धित वाशिंगटन सहमति | हेल्ड आदि (2005) — बाज़ार-सुधारों के साथ गरीबी-उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा-जाल व भ्रष्टाचार-विरोधी उपायों को जोड़ना |
| भारत में सुशासन हेतु प्रमुख पहलें | विवरण |
|---|---|
| सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 | पारदर्शिता को कानूनी अधिकार बनाया |
| नागरिक अधिकार-पत्र (Citizens' Charter) | सेवा-मानकों के प्रति जवाबदेही |
| लोकपाल एवं लोकायुक्त | भ्रष्टाचार-विरोधी संस्थागत तंत्र |
| पंचायती राज संस्थाएँ (73वाँ/74वाँ संशोधन) | विकेंद्रीकरण व स्थानीय स्वशासन |
| डिजिटल इंडिया व ई-गवर्नेंस | दक्षता व सुलभता में वृद्धि |
| सामाजिक अंकेक्षण (जैसे MGNREGA) | नागरिक निगरानी व जवाबदेही |
राजस्थान संदर्भ — जन सूचना पोर्टल: 13 सितंबर 2019 को राजस्थान सरकार द्वारा लॉन्च किया गया जन सूचना पोर्टल (Jan Soochna Portal) सुशासन के सिद्धांतों — पारदर्शिता व सूचना तक पहुँच — का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके माध्यम से नागरिक बिना RTI दाखिल किए 300 से अधिक सरकारी योजनाओं व लाभार्थी-सूचियों की जानकारी सीधे प्राप्त कर सकते हैं।
Good Governance Index — नवीनतम स्थिति: DARPG ने 2019 में सुशासन सूचकांक (Good Governance Index) ढाँचा लॉन्च किया, जो द्विवार्षिक (biannual) रूप से जारी होता है। GGI-2023 संस्करण जारी नहीं किया गया — अगला संस्करण अब तक लंबित/प्रत्याशित है। नवीनतम पूर्ण आँकड़े GGI-2021 के हैं, जिसमें राजस्थान ने न्यायिक एवं लोक सुरक्षा, पर्यावरण तथा नागरिक-केंद्रित शासन जैसे संकेतकों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। (स्रोत: DARPG — यथासंभव नवीनतम जानकारी हेतु darpg.gov.in देखें)।
| सुशासन के समक्ष संस्थागत चुनौतियाँ | आवश्यकता |
|---|---|
| संसदीय कार्यप्रणाली | घटती बहस व व्यवधान — उत्तरदायित्व व उत्पादकता में सुधार आवश्यक |
| सिविल सेवा | नौकरशाही की जड़ता — व्यावसायिकता, नागरिक-केंद्रितता, ई-गवर्नेंस व नैतिकता आवश्यक |
| न्यायपालिका | लंबित मामले व पहुँच की समस्या — स्वतंत्रता, गति व सामाजिक न्याय उन्मुखता आवश्यक |
| निजी क्षेत्र | अनियंत्रित लाभ-उद्देश्य — जवाबदेही, उपभोक्ता संरक्षण व CSR आवश्यक |
| नागरिक-समाज | उदासीनता व अनभिज्ञता — अधिकार-जागरूकता व सहभागी भूमिका आवश्यक |
रॉबर्ट डेनहार्ट व जेनेट डेनहार्ट ने NPS के सात सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं:
| क्र. | सिद्धांत | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|---|
| 1 | नियंत्रण नहीं, सेवा करें (Serve, Not Steer) | लोक सेवकों की भूमिका नागरिकों के साझा हितों को साकार करने में मदद करना है, समाज को पूर्व-निर्धारित दिशा में नियंत्रित करना नहीं |
| 2 | लोक-हित लक्ष्य है, उप-उत्पाद नहीं | प्रशासकों को साझा लोक-हित की सक्रिय रूप से रचना करनी चाहिए, न कि केवल त्वरित व्यक्तिगत समाधान देना |
| 3 | रणनीतिक सोच, लोकतांत्रिक क्रिया | प्रभावी नीतियाँ सामूहिक कार्य, सहयोग व लोकतांत्रिक सहभागिता से उपजती हैं |
| 4 | ग्राहक नहीं, नागरिकों की सेवा करें | लोक-हित व्यक्तिगत स्वार्थों के योग से नहीं, बल्कि साझा मूल्यों पर संवाद से उत्पन्न होता है |
| 5 | जवाबदेही सरल नहीं है | जवाबदेही में संवैधानिक-सांविधिक अपेक्षाएँ, राजनीतिक मानदंड, सामुदायिक मूल्य व व्यावसायिक मानक — सभी शामिल |
| 6 | उत्पादकता नहीं, लोगों को महत्व दें | दीर्घकालिक सफलता सहयोग, साझा नेतृत्व व मानवीय गरिमा पर निर्भर करती है, केवल संकुचित प्रदर्शन-मापदंडों पर नहीं |
| 7 | उद्यमिता से ऊपर नागरिकता व लोक सेवा को महत्व दें | लोक-हित उन नागरिकों व लोक सेवकों से बेहतर सधता है जो सेवा हेतु प्रतिबद्ध हैं, न कि उद्यमी जो सार्वजनिक संसाधनों को निजी संपत्ति समझें |
OPA (पारंपरिक लोक प्रशासन), NPM व NPS के बीच का तुलनात्मक विश्लेषण इस विषय की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा-सामग्री है:
| आयाम (Dimension) | पारंपरिक PA (OPA) | नया लोक प्रबंधन (NPM) | नई लोक सेवा (NPS) |
|---|---|---|---|
| सैद्धांतिक आधार | राजनीतिक सिद्धांत; परंपरागत नौकरशाही | आर्थिक सिद्धांत; बाज़ार/प्रत्यक्षवाद | लोकतांत्रिक सिद्धांत; नागरिकता व संवाद |
| नागरिकों की भूमिका | निष्क्रिय ग्राहक/प्रजा | ग्राहक (Customer) | सक्रिय नागरिक व सह-निर्माता |
| सरकार की भूमिका | रोइंग — प्रत्यक्ष प्रावधान व नियंत्रण | स्टीयरिंग — बाज़ार को सुगम बनाना | सर्विंग — सुविधा, मध्यस्थता, सहयोग |
| लोक-हित | राजनीतिक रूप से परिभाषित, कानून में व्यक्त | व्यक्तिगत हितों का समुच्चय | साझा मूल्यों पर संवाद से उत्पन्न |
| जवाबदेही | पदानुक्रमिक (वरिष्ठों/निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति) | बाज़ार/परिणाम-उन्मुख | बहुआयामी — कानून, मानदंड, समुदाय, नागरिक |
| मूल आलोचना | अत्यधिक कठोर, अनुत्तरदायी नौकरशाही | बाज़ार व दक्षता पर अति-बल | आदर्शवादी — संसाधन-सीमित परिवेश में क्रियान्वयन कठिन |
प्रबोधन-युग (18वीं सदी) व औद्योगीकरण (20वीं सदी) के बाद समाज विज्ञान-तर्क पर आधारित हो गया — मार्क्स, दुर्खीम व वेबर जैसे विचारकों ने तर्कसंगत-वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाज को दिशा दी। परंतु लोक प्रशासन में इसने पदानुक्रम, गोपनीयता, विशेषज्ञ-प्रभुत्व एवं कम नागरिक-भागीदारी को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप असमानताएँ व सामाजिक टकराव उत्पन्न हुए। उत्तर-आधुनिकतावाद (Postmodernism) इसी तर्कवादी एकाधिकार को चुनौती देते हुए विविध स्वरों, संवाद व प्रासंगिक-नैतिकता (situational ethics) पर बल देता है — "एक सर्वश्रेष्ठ तरीका" (one best way) की धारणा को अस्वीकार करता है।
"Administration is the most obvious part of government; it is government in action." — वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson)
"We don't need more government; we need better governance." — डेविड ऑस्बर्न व टेड गेब्लर (Reinventing Government, 1992)
1. वुडरो विल्सन का निबंध "The Study of Administration" (1887) — लोक प्रशासन के स्वतंत्र अनुशासन बनने का प्रारंभ बिंदु। 2. लूथर गुलिक व लिंडल उर्विक ने 1937 में POSDCoRB प्रतिपादित किया — सात प्रशासनिक कार्य। 3. निकोलस हेनरी के अनुसार लोक प्रशासन के विकास के छह चरण — Dichotomy से Governance Paradigm तक। 4. NPA का जन्म Minnowbrook Conference-I (1968) से — नेतृत्व ड्वाइट वाल्डो, शब्द फ्रैंक मैरिनी ने गढ़ा। 5. जॉर्ज फ्रेडरिक्सन ने NPA को "सरकार का पहला पुनःअविष्कार" कहा। 6. NPM शब्द क्रिस्टोफर हुड ने 1991 में गढ़ा; ऑस्बर्न व गेब्लर ने 1992 की पुस्तक "Reinventing Government" से लोकप्रिय बनाया। 7. NPM के 3Es — Economy, Efficiency, Effectiveness — तथा नारा "Steer, not row"। 8. सुशासन की अवधारणा 1990 के दशक में विश्व बैंक, UNDP व OECD से उभरी। 9. UNDP (1997) के सुशासन के 8 सिद्धांत — सहभागिता, सहमति-उन्मुखता, जवाबदेही, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, प्रभावशीलता-दक्षता, समता-समावेशिता, विधि का शासन। 10. NPS की स्थापना रॉबर्ट व जेनेट डेनहार्ट ने "The New Public Service: Serving, Not Steering" (2000/2003) में की। 11. NPS का केंद्रीय नारा — "Serve, don't Steer" — सरकार का काम नियंत्रण नहीं, सेवा है। 12. भारत में लोक प्रशासन का प्रथम स्वतंत्र विभाग — नागपुर विश्वविद्यालय (1949), डॉ. एम.पी. शर्मा के नेतृत्व में। 13. भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की स्थापना 1954 में पॉल एच. एप्पलबी की सिफारिश पर हुई। 14. राजस्थान विश्वविद्यालय में लोक प्रशासन 1957 में अर्थशास्त्र विभाग में आरंभ, 1965 में स्वतंत्र विभाग बना। 15. फ्रेड रिग्स की "प्रिज़्मीय समाज" (Prismatic Society) की अवधारणा — विकासशील देशों में परंपरा व आधुनिकता का सह-अस्तित्व। 16. हर्बर्ट साइमन ने प्रशासनिक सिद्धांतों को "Proverbs of Administration" (1946) कहकर आलोचना की — 1978 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया। 17. जन सूचना पोर्टल राजस्थान (2019) — सुशासन व पारदर्शिता का राज्य-स्तरीय उदाहरण। 18. Mission Karmayogi (2020) ने 2025-26 में iGOT प्लेटफ़ॉर्म पर 1.5 करोड़ से अधिक पंजीकृत शिक्षार्थी व 8 करोड़ से अधिक कोर्स-पूर्णता दर्ज की — अप्रैल 2026 में "Sādhana Saptah" के साथ Mission Karmayogi 2.0 चरण आरंभ। 19. लुईस मेरियम की "कैंची" (Scissors) उपमा — POSDCoRB तकनीक + विषय-वस्तु ज्ञान, दोनों आवश्यक। 20. गुडनाउ (1900) को "अमेरिकी लोक प्रशासन का जनक" कहा जाता है; एल.डी. व्हाइट (1926) ने प्रथम पाठ्यपुस्तक लिखी।
Q1. नवीन लोक प्रशासन (न्यू पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) की चार मूल विशेषताओं की गणना कीजिए। (5 अंक, 2016) Q2. लोक प्रशासन और व्यावसायिक प्रबंधन (बिजनेस मैनेजमेंट) के बीच मुख्य अंतर क्या हैं? (5 अंक, 2013) Q3. नवीन लोक प्रबंधन (न्यू पब्लिक मैनेजमेंट) दृष्टिकोण में निहित शासन संबंधी विरोधाभासों पर चर्चा कीजिए। (5 अंक, 2024) Q4. नवीन लोक प्रबंधन के '3-Es' की अवधारणा को संक्षेप में स्पष्ट कीजिए। (मूल: 2 अंक, 2016) Q5. नवीन लोक प्रबंधन (न्यू पब्लिक मैनेजमेंट) से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए तथा सरकारी प्रशासन में इसकी उपयोगिता की समीक्षा कीजिए। (मूल: 20 अंक, 2013 — नए पैटर्न में यह 10-अंक स्तर का प्रश्न होगा) Q6. सुशासन (Good Governance) के संबंध में UNDP द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों की विवेचना कीजिए। (संभावित, 10 अंक) Q7. नई लोक सेवा (New Public Service) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसके सात सिद्धांत बताइए। (संभावित, 10 अंक) Q8. लोक प्रशासन के क्षेत्र (Scope) संबंधी POSDCoRB दृष्टिकोण की व्याख्या कीजिए। (संभावित, 5 अंक)
| वर्ष | घटना / प्रकाशन | महत्व |
|---|---|---|
| 1887 | वुडरो विल्सन का निबंध "The Study of Administration" | लोक प्रशासन के स्वतंत्र अनुशासन बनने की शुरुआत |
| 1900 | फ्रैंक गुडनाउ की "Politics and Administration" | राजनीति-प्रशासन द्वैधता का सैद्धांतिक आधार |
| 1926 | एल.डी. व्हाइट की प्रथम पाठ्यपुस्तक | अनुशासन को अकादमिक वैधता मिली |
| 1937 | गुलिक व उर्विक का POSDCoRB | प्रशासनिक कार्यों का व्यवस्थित वर्गीकरण |
| 1938–1947 | बर्नार्ड व साइमन का योगदान (Proverbs of Administration) | सिद्धांतों की आलोचना, व्यवहारवादी उपागम की नींव |
| 1949 | नागपुर विश्वविद्यालय में भारत का पहला PA विभाग | भारत में अनुशासन की अकादमिक शुरुआत |
| 1954 | भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) की स्थापना | शोध व प्रकाशन हेतु राष्ट्रीय संस्था |
| 1957–1965 | राजस्थान विश्वविद्यालय में PA विभाग की स्थापना | राजस्थान में अनुशासन की जड़ें |
| 1968 | Minnowbrook Conference-I | नए लोक प्रशासन (NPA) का उदय |
| 1987 | UPSC सिविल सेवा परीक्षा में PA वैकल्पिक विषय | भारत में व्यावसायिक महत्व स्थापित |
| 1988 | Minnowbrook Conference-II | NPA विचारों का व्यावहारिक पुनर्मूल्यांकन |
| 1991 | क्रिस्टोफर हुड द्वारा NPM शब्द प्रतिपादित; भारत के आर्थिक सुधार (LPG) | बाज़ार-चालित प्रशासन का उदय |
| 1992 | ऑस्बर्न-गेब्लर की "Reinventing Government" | NPM को वैश्विक लोकप्रियता |
| 1997 | UNDP के सुशासन के 8 सिद्धांत | सुशासन की वैश्विक मानक-रूपरेखा |
| 2000/2003 | डेनहार्ट दंपति की "The New Public Service" | NPS की स्थापना |
| 2005 | सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) | भारत में सुशासन की दिशा में विधायी कदम |
| 2008 | Minnowbrook Conference-III | लोक प्रशासन का वैश्विक विस्तार |
| 2019 | GGI ढाँचा लॉन्च; राजस्थान का जन सूचना पोर्टल | सुशासन का मापन एवं राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन |
| 2020–2026 | Mission Karmayogi एवं Mission Karmayogi 2.0 | सिविल सेवा क्षमता-निर्माण का डिजिटल युग |