नगरीय स्वशासन (Urban Local Self Government) का अर्थ है — नगर के लोगों द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। मेगस्थनीज ने सर्वप्रथम "इण्डिका" पुस्तक में मौर्यकालीन नगरीय प्रशासन का उल्लेख किया है। वर्तमान में नगरीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है।
| वर्ष | घटना / अधिनियम | महत्व |
|---|---|---|
| 1687–88 | भारत का प्रथम नगर निगम — मद्रास | 30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स-II। |
| 1864 | राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबू | ब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन की शुरुआत। |
| 1866 | अजमेर में नगरपालिका | राजस्थान में दूसरी नगरपालिका। |
| 1867 | ब्यावर में नगरपालिका | राजस्थान की तीसरी नगरपालिका। |
| 1869 | जयपुर में नगरपालिका | राजस्थान में नगरीय शासन का विस्तार। |
| 1870 | लॉर्ड मेयो — वित्तीय विकेन्द्रीकरण | स्थानीय स्वशासन हेतु वित्तीय विकेन्द्रीकरण। |
| 1919 | मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियम | नगरीय स्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषय। |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम | नगरीय स्वशासन — प्रान्तीय सूची में। |
| 1951 | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1951 | स्वतंत्र भारत में प्रथम अधिनियम। |
| 1959 | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1959 | 1951 के स्थान पर। |
| 1963 | राजस्थान में प्रथम नगर पालिका चुनाव | फिर: 1970, 1972, 1974, 1976, 1982, 1986, 1999-2000, 2004-05, 2009-10, 2014-15, 2021। |
| 1989 | राजीव गाँधी का 65वाँ संशोधन विधेयक | लोकसभा से पारित लेकिन राज्यसभा से नहीं — रद्द। |
| 1993 | 74वाँ संविधान संशोधन लागू (1 जून) | नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। |
| 9 अगस्त 1994 | राजस्थान में 74वाँ संशोधन लागू | राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1994 लागू। |
| 2009 | राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 | वर्तमान प्रभावी अधिनियम। |
| 2011 | राइट टू रिकॉल कानून 2011 | 2009 अधिनियम में संशोधन। |
74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा — भाग-9क (नगर पालिकाएं), अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद) एवं 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़ी गई। भाग-9क का नाम "नगर पालिकाएं" दिया गया। यहाँ "नगर पालिकाएं" शब्द नगरीय संस्थाओं के त्रिस्तरीय ढाँचे का प्रतीक है।
74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा संविधान में भाग-9क जोड़ा गया जिसमें नगर पालिकाओं से संबंधित 18 अनुच्छेद (243P से 243ZG) हैं। यह 73वें संशोधन का शहरी समकक्ष है।
| अनुच्छेद | hindi | विषय | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|---|
| 243 P | त | परिभाषाएँ | वार्ड समिति, जिला, नगर पालिका, नगर पालिका क्षेत्र, महानगर क्षेत्र की परिभाषाएँ। महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या। |
| 243 Q | थ | नगर पालिकाओं का गठन | त्रिस्तरीय : नगर पंचायत (संक्रमणशील), नगर पालिका परिषद (लघु नगरीय), नगर निगम (वृहत नगरीय)। दर्जा राज्यपाल द्वारा अधिसूचना से। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं। |
| 243 R | द | नगर पालिकाओं की संरचना | पार्षद — प्रत्यक्ष चुनाव। पदेन सदस्य — MP, MLA, अनुभवी व्यक्ति। अध्यक्ष का चुनाव — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। |
| 243 S | ध | वार्ड समितियाँ | 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में एक या अधिक वार्डों को मिलाकर वार्ड समिति। |
| 243 T | न | स्थानों का आरक्षण | SC/ST — जनसंख्या अनुपात में। महिला — 33% (सभी वर्गों में)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। अध्यक्षों के पद भी आरक्षित। |
| 243 U | प | कार्यकाल | प्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। |
| 243 V | फ | अयोग्यताएँ | न्यूनतम आयु 21 वर्ष। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 nomination। अन्य निरर्हताएँ — राज्य विधानमण्डल तय। |
| 243 W | ब | शक्तियाँ, प्राधिकार | 12वीं अनुसूची के 18 विषयों पर कार्य। आर्थिक-सामाजिक विकास हेतु योजनाएँ। |
| 243 X | भ | कर एवं निधियाँ | राज्य विधानमण्डल कर, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा। राज्य की संचित निधि से अनुदान। |
| 243 Y | म | राज्य वित्त आयोग | 243I (झ) के अधीन SFC का प्रावधान नगरीय निकायों के लिए भी। |
| 243 Z | य | लेखाओं की संपरीक्षा | राज्य विधानमण्डल नगर पालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा का उपबंध करेगा। |
| 243 ZA | यक | राज्य निर्वाचन आयोग | 243K के अधीन SEC का प्रावधान। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त। |
| 243 ZB | यख | UT पर लागू | नगर पालिकाओं संबंधी प्रावधान संघ राज्य क्षेत्रों में लागू। |
| 243 ZC | यग | लागू न होना | 5वीं व 6वीं अनुसूची क्षेत्रों में लागू नहीं। दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद के कार्यों पर प्रभावी नहीं। |
| 243 ZD | यघ | जिला आयोजना समिति | जिले में पंचायतों व नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। |
| 243 ZE | यङ | महानगर योजना समिति | महानगर क्षेत्र की विकास योजना। 2/3 सदस्य निर्वाचित। |
| 243 ZF | यच | विद्यमान विधियाँ | 74वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक निरसित न हों। |
| 243 ZG | यछ | न्यायालय का हस्तक्षेप वर्जित | परिसीमन/आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं। |
(1) न्यूनतम जनसंख्या 5000। (2) कार्यशील पुरुषों का न्यूनतम 75% गैर-कृषि कार्यों में संलग्न। (3) जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। ये शर्तें पूरी होने पर राज्यपाल अधिसूचना द्वारा नगर क्षेत्र घोषित करते हैं।
नगरीय स्थानीय शासन में तीन स्तर हैं — नगर पंचायत/नगर पालिका (लघु), नगर परिषद (मध्यम) और नगर निगम (वृहत)। इन्हें सामूहिक रूप से "नगर पालिकाएं" कहा जाता है।
| पहलू / विषय | नगर पालिका (Nagar Palika) | नगर परिषद (Nagar Parishad) | नगर निगम (Nagar Nigam) |
|---|---|---|---|
| जनसंख्या | 10 हजार से 1 लाख तक | 1 लाख से 5 लाख तक | 5 लाख से 1 करोड़ तक |
| जनसंख्या घनत्व | 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी | 500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी | 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी |
| प्रति व्यक्ति मासिक आय | 10 रुपये | 200 रुपये | 500 रुपये |
| गैर-कृषि कार्यों में | 10% या अधिक | 25% या अधिक | 50% या अधिक |
| राजनैतिक अध्यक्ष | चैयरमेन / अध्यक्ष | सभापति | महापौर / मेयर |
| अध्यक्ष का चुनाव | प्रत्यक्ष | प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष (निर्वाचित पार्षदों द्वारा) |
| प्रशासनिक प्रमुख | अधिशाषी अधिकारी (E.O.) | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.) | आयुक्त (Commissioner) |
| न्यूनतम वार्ड | 13 | 13 | 13 |
| न्यूनतम आयु | 21 वर्ष | 21 वर्ष | 21 वर्ष |
| कार्यकाल | 5 वर्ष | 5 वर्ष | 5 वर्ष |
| वार्ड सदस्य | पार्षद (प्रत्यक्ष) | पार्षद (प्रत्यक्ष) | पार्षद (प्रत्यक्ष) |
| श्रेणी | चतुर्थ (25 हजार तक), तृतीय (25-49,999), द्वितीय (50-99,999) | — | — |
| राजस्थान में संख्या | 196 | 34 | 10 |
| आरक्षण | SC/ST जनसंख्या अनुपात + महिलाएँ 33% | SC/ST + महिलाएँ 33% | SC/ST + महिलाएँ 33% |
| पदेन सदस्य (मत नहीं) | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA | अनुभवी व्यक्ति + MP + MLA |
| क्र. | नगर निगम | क्र. | नगर निगम | क्र. | नगर निगम |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जयपुर | 2 | जोधपुर (दक्षिण) | 3 | कोटा (उत्तर) |
| 4 | अजमेर | 5 | बीकानेर | 6 | अलवर |
| 7 | भरतपुर (7वाँ — 13 जून 2014) | 8 | जयपुर (हेरिटेज) — अक्टूबर 2019 | 9 | जोधपुर (उत्तर) — अक्टूबर 2019 |
| 10 | कोटा (दक्षिण) — अक्टूबर 2019 | — | — | — | — |
नगर पालिका/परिषद/निगम का दर्जा — राज्यपाल अधिसूचना द्वारा। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं (Art. 243Q)। वार्ड समिति — 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में। नगर परिषद में अधिकतम 8 नामांकित सदस्य (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009)। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 नामांकन पत्र।
74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगर पालिकाओं के 18 विषय हैं। इसका संबंध अनुच्छेद 243W(ब) से है। कितने विषय नगर पालिकाओं को हस्तांतरित किए जाएँगे — यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
| क्र. | 12वीं अनुसूची — विषय | क्र. | 12वीं अनुसूची — विषय |
|---|---|---|---|
| 1 | नगरीय योजना (नगर योजना सहित) | 10 | गंदी बस्ती सुधार एवं प्रोन्नयन |
| 2 | भूमि उपयोग विनियमन और भवन निर्माण | 11 | नगरीय निर्धनता उन्मूलन |
| 3 | आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजना | 12 | नगरीय सुविधाएँ (पार्क, उद्यान, खेल मैदान) |
| 4 | सड़कें और पुल | 13 | सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सौंदर्यपरक आयाम |
| 5 | घरेलू, औद्योगिक व वाणिज्यिक जल प्रदाय | 14 | शव गाड़ना, श्मशान, विद्युत शवदाहगृह |
| 6 | लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई, कूड़ा प्रबंध | 15 | कांजी हाउस, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण |
| 7 | अग्निशमन सेवाएँ | 16 | जन्म-मरण सांख्यिकी (पंजीकरण) |
| 8 | नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण | 17 | सार्वजनिक सुविधाएँ (सड़क प्रकाश, पार्किंग, बस स्टॉप) |
| 9 | दुर्बल वर्गों की रक्षा (विकलांग, मानसिक) | 18 | वधशालाओं एवं चर्मशोधनशालाओं का विनियमन |
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| नगर निगम (Municipal Corporation) | सबसे बड़े शहरों के लिए। |
| नगर परिषद (Municipal Council) | मध्यम आकार के शहरों के लिए। |
| नगर पालिका (Municipality/Nagar Panchayat) | छोटे व संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए। |
| छावनी बोर्ड (Cantonment Board) | सैन्य क्षेत्रों के लिए — केन्द्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) के अधीन। |
| नगर सुधार न्यास (UIT) | नगरों के सुनियोजित विकास के लिए। |
| नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority) | विशेष नगरों के विकास के लिए। |
| पत्तन न्यास (Port Trust) | बन्दरगाह वाले शहरों में — संसद द्वारा गठित। |
| अधिसूचित क्षेत्र समिति | जहाँ कानून लागू नहीं लेकिन कुछ शहरी सुविधाएँ आवश्यक। |
| महानगरीय योजना समिति | 10 लाख+ जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्रों के लिए। |
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अधिनियम | छावनी बोर्ड अधिनियम 1924 (2006 में संशोधन)। |
| नियंत्रण | केन्द्र सरकार का रक्षा मंत्रालय। (राज्य सरकार का नहीं) |
| अध्यक्ष | सेना का कमाण्डिंग ऑफिसर। |
| उपाध्यक्ष | जनता से निर्वाचित। कार्यकाल — 3 वर्ष। |
| सदस्य | निर्वाचित (जनता से) + मनोनीत (सैन्य छावनी से)। |
| भारत में संख्या | 62 छावनी बोर्ड। |
| राजस्थान में | 1 — नसीराबाद (अजमेर)। |
| विवाद | यदि पंचायत और छावनी बोर्ड के बीच विवाद हो — निर्णय राज्य सरकार करेगी (केन्द्र के अनुमोदन के अधीन)। |
| प्राधिकरण | स्थापना वर्ष | क्षेत्र | विशेष |
|---|---|---|---|
| JDA — जयपुर विकास प्राधिकरण | 1982 | जयपुर | राजस्थान का प्रथम विकास प्राधिकरण |
| JaDA — जोधपुर विकास प्राधिकरण | 2008 | जोधपुर | — |
| ADA — अजमेर विकास प्राधिकरण | 2013 | अजमेर | — |
| BDA — भिवाड़ी विकास प्राधिकरण | 2018 | भिवाड़ी (अलवर) | औद्योगिक क्षेत्र |
राइट टू रिकॉल वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनमत संग्रह (Referendum) द्वारा कार्यकाल से पहले पद से हटाया जा सकता है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| सर्वप्रथम प्रयोग | 1903 — लॉस एंजिल्स (अमेरिका) |
| भारत में प्रथम प्रयोग राज्य | मध्यप्रदेश — 2001 |
| द्वितीय राज्य | छत्तीसगढ़ — 2008 |
| तृतीय राज्य | राजस्थान — 2012 |
| राजस्थान में कानून | Right to Recall कानून 2011 (2009 अधिनियम में संशोधन) |
| राजस्थान में प्रथम प्रयोग | दिसम्बर 2012 — बारां जिले की मांगरोल नगर पालिका के अध्यक्ष अशोक जैन के विरुद्ध जनमत संग्रह। |
| किसे हटाया जा सकता है | महापौर (Mayor), सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष। |
अविश्वास प्रस्ताव — निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) लाते हैं। Right to Recall — जनता (मतदाता) द्वारा सीधे। राजस्थान में Right to Recall — महापौर, सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध।
74वें संविधान संशोधन द्वारा भाग-9क, अनुच्छेद 243ZD में जिला आयोजना समिति का प्रावधान। इसका उद्देश्य जिले में पंचायतों और नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण कर सम्पूर्ण जिले की विकास योजना तैयार करना है।
| पहलू | DPC (जिला आयोजना समिति) | MPC (महानगर योजना समिति) |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 243ZD (भाग-9क) | 243ZE (भाग-9क) |
| उद्देश्य | जिले की एकीकृत विकास योजना तैयार करना | महानगर क्षेत्र की विकास योजना तैयार करना |
| क्षेत्र | जिला स्तर | महानगर क्षेत्र (10 लाख+ जनसंख्या) |
| कुल सदस्य | 25 (संवैधानिक में निर्धारित नहीं) | कम से कम 2/3 निर्वाचित |
| निर्वाचित सदस्य | 20 (4/5) — पंचायत व नगर निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा (ग्रामीण-शहरी जनसंख्या अनुपात में) | 2/3 — नगर पालिका निर्वाचित + पंचायत अध्यक्ष (जनसंख्या अनुपात में) |
| पदेन सदस्य | 3 — जिला कलेक्टर, CEO, अतिरिक्त CEO | राज्य व केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व |
| मनोनीत सदस्य | 2 — राज्य सरकार द्वारा | राज्य विधानमण्डल विधि बनाकर |
| अध्यक्ष | जिला प्रमुख | राज्य विधानमण्डल विधि बनाकर |
| योजना भेजने की जिम्मेदारी | अध्यक्ष (जिला प्रमुख) → राज्य सरकार को | अध्यक्ष → राज्य सरकार को |
| राजस्थान में प्रावधान | धारा 121 — राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 | — |
(1) पंचायतों और नगर पालिकाओं के सामान्य हित के विषय — स्थानिक योजना, जल व भौतिक संसाधनों में हिस्सा, अवसंरचना का एकीकृत विकास, पर्यावरण संरक्षण। (2) उपलब्ध वित्तीय या अन्य संसाधनों की मात्रा।
दोनों में — 5 वर्ष कार्यकाल। SC/ST आरक्षण जनसंख्या अनुपात में। 33% महिला आरक्षण। OBC आरक्षण — स्वैच्छिक। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)। राज्य वित्त आयोग (SFC)। न्यूनतम आयु 21 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। न्यायालय हस्तक्षेप वर्जित।
⚠️ महत्वपूर्ण अंतर: 73वाँ : Mayor — नहीं (ग्रामीण में); 74वाँ : Mayor — हाँ (नगर निगम में)। 73वाँ : Gram Sabha — संवैधानिक; 74वाँ : Ward Committee — केवल 3 लाख+ में। 73वाँ : लागू 24 April; 74वाँ : लागू 1 June — 74वाँ पहले लागू हुआ दोनों में से!
97वें संविधान संशोधन 2011 द्वारा सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इससे पूर्व सहकारिता केवल साधारण कानून के तहत आती थी। इस संशोधन ने तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।
| परिवर्तन | प्रावधान | विवरण |
|---|---|---|
| 1 | अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन — भाग-3 (मूल अधिकार) | सहकारी समितियाँ गठन करने का अधिकार — मौलिक अधिकार बनाया गया। |
| 2 | अनुच्छेद 43B जोड़ा — भाग-4 (DPSP) | राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्य, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। |
| 3 | भाग-9ख (Part 9B) जोड़ा | अनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक — 13 अनुच्छेद। |
| अनुच्छेद | विषय | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|
| 243 ZH | परिभाषाएँ | सहकारी समिति, राज्य अधिनियम की परिभाषाएँ। |
| 243 ZI | निगमन एवं समापन | सहकारी समितियों के गठन, विनियमन और समापन। |
| 243 ZJ | बोर्ड सदस्यों की संख्या व पदावधि | बोर्ड के सदस्यों की संख्या (अधिकतम 21) व कार्यकाल (5 वर्ष)। |
| 243 ZK | बोर्ड सदस्यों का निर्वाचन | चुनाव — सदस्यों द्वारा। |
| 243 ZL | बोर्ड का दमन व निलम्बन | राज्य सरकार — 6 माह से अधिक नहीं। |
| 243 ZM | सहकारी समिति का लेखा परीक्षण | लेखा वित्त वर्ष में 6 माह के भीतर। |
| 243 ZN | सामान्य सभा की बैठक | 6 माह के भीतर वार्षिक सामान्य बैठक। |
| 243 ZO | सदस्यों को सूचना का अधिकार | सदस्यों को लेखा, जानकारी प्राप्त करने का अधिकार। |
| 243 ZP | विवरणी (Returns) | निर्धारित प्राधिकरण को विवरणी (Returns) देना। |
| 243 ZQ | अपराध और जुर्माना | दण्ड के प्रावधान। |
| 243 ZR | बहुराज्यीय सहकारी समितियाँ | इस भाग का बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर भी लागू होना। |
| 243 ZS | संघ राज्य क्षेत्रों पर लागू | UT में भी लागू। |
| 243 ZT | विद्यमान विधि का जारी रहना | तब तक बनी रहेगी जब तक राज्य नया कानून न बना ले। |
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| सहकारी आंदोलन के जनक | F. Nicholson (एफ. निकोलसन) |
| भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत | 1904 — सहकारी साख समिति अधिनियम (Cooperative Credit Society Act) से। |
| राजस्थान में सहकारिता की शुरुआत | 1904 में। |
| राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति | 1905 — भिनाय, अजमेर में। |
| 97वाँ संशोधन | 2011 — संवैधानिक दर्जा। |
| मूल अधिकार | Art. 19(1)(c) — सहकारी समितियाँ गठित करने का मूल अधिकार। |
| DPSP | Art. 43B — सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की राज्य की जिम्मेदारी। |
| भाग-9ख | Art. 243ZH से 243ZT — 13 अनुच्छेद। |
1. 74वाँ संविधान संशोधन — 1 जून 1993 से लागू। Rajasthan — 9 अगस्त 1994। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। 2. भाग-9क (नगर पालिकाएं), Art. 243P से 243ZG — 18 अनुच्छेद। 12वीं अनुसूची — 18 विषय। 3. त्रिस्तरीय : नगर पालिका (196), नगर परिषद (34), नगर निगम (10) — राजस्थान में। 4. महापौर (Mayor) — अप्रत्यक्ष चुनाव। Chairman/Sabhapati — प्रत्यक्ष। पार्षद — प्रत्यक्ष। 5. नगर क्षेत्र शर्तें : 5000 जनसंख्या + 75% गैर-कृषि + 400 घनत्व/वर्ग किमी। 6. महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या (Art. 243P)। वार्ड समिति — 3 लाख+ में (Art. 243S)। 7. छावनी बोर्ड — रक्षा मंत्रालय, 62 (India), 1 (Rajasthan — नसीराबाद)। Chairman = Commanding Officer। 8. JDA (1982), JaDA (2008), ADA (2013), BDA (2018) — Rajasthan के विकास प्राधिकरण। 9. Right to Recall — MP (2001) प्रथम; Rajasthan (2012) तृतीय। मांगरोल बारां — प्रथम प्रयोग। 10. DPC (243ZD) — 25 सदस्य (20 निर्वाचित + 3 पदेन + 2 मनोनीत)। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। 11. 73वाँ vs 74वाँ : भाग-9 vs 9क; 16 vs 18 अनुच्छेद; 11वीं vs 12वीं अनुसूची; 29 vs 18 विषय। 12. 74वाँ पहले लागू (1 June) vs 73वाँ बाद में (24 April) — परन्तु 73वाँ पहले पारित हुआ! 13. 97वाँ संशोधन 2011 — सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा। भाग-9ख, 13 अनुच्छेद। 14. Art. 19(1)(c) — सहकारी समिति गठन का मूल अधिकार। Art. 43B — DPSP। 15. राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति — 1905, भिनाय (अजमेर)। जनक — F. Nicholson।