🏙️ अध्याय 26/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

नगरीय स्वशासन एवं सहकारिता

Urban Local Bodies & Cooperatives | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. नगरीय स्वशासन — परिचय, इतिहास एवं संवैधानिक दर्जा
  2. 74वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)
  3. त्रिस्तरीय नगरीय ढाँचा — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण
  4. 12वीं अनुसूची — नगर पालिकाओं के 18 विषय | Rajasthan नगरीय तथ्य
  5. छावनी बोर्ड | नगर सुधार न्यास | विकास प्राधिकरण | पोर्ट ट्रस्ट
  6. राइट टू रिकॉल (Right to Recall) | अविश्वास प्रस्ताव
  7. जिला आयोजना समिति (243ZD) | महानगर योजना समिति (243ZE)
  8. 73वाँ vs 74वाँ संविधान संशोधन — तुलनात्मक विश्लेषण
  9. 97वाँ संविधान संशोधन 2011 — सहकारी समितियाँ (Art. 243ZH–243ZT)

1नगरीय स्वशासन — परिचय, इतिहास एवं संवैधानिक दर्जा

नगरीय स्वशासन (Urban Local Self Government) का अर्थ है — नगर के लोगों द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों द्वारा अपने क्षेत्र का शासन चलाना। मेगस्थनीज ने सर्वप्रथम "इण्डिका" पुस्तक में मौर्यकालीन नगरीय प्रशासन का उल्लेख किया है। वर्तमान में नगरीय स्वशासन राज्य सूची का विषय है।

◈ ऐतिहासिक विकास — Timeline

वर्षघटना / अधिनियममहत्व
1687–88भारत का प्रथम नगर निगम — मद्रास30 दिसम्बर 1687 को घोषणा; 29 सितम्बर 1688 को उद्घाटन। प्रथम मेयर — नेथेनियल हिगिन्सन। ब्रिटिश सम्राट — जेम्स-II।
1864राजस्थान में प्रथम नगरपालिका — माउण्ट आबूब्रिटिश राजस्थान में नगरीय शासन की शुरुआत।
1866अजमेर में नगरपालिकाराजस्थान में दूसरी नगरपालिका।
1867ब्यावर में नगरपालिकाराजस्थान की तीसरी नगरपालिका।
1869जयपुर में नगरपालिकाराजस्थान में नगरीय शासन का विस्तार।
1870लॉर्ड मेयो — वित्तीय विकेन्द्रीकरणस्थानीय स्वशासन हेतु वित्तीय विकेन्द्रीकरण।
1919मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड अधिनियमनगरीय स्थानीय स्वशासन — हस्तान्तरित विषय।
1935भारत सरकार अधिनियमनगरीय स्वशासन — प्रान्तीय सूची में।
1951राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1951स्वतंत्र भारत में प्रथम अधिनियम।
1959राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 19591951 के स्थान पर।
1963राजस्थान में प्रथम नगर पालिका चुनावफिर: 1970, 1972, 1974, 1976, 1982, 1986, 1999-2000, 2004-05, 2009-10, 2014-15, 2021।
1989राजीव गाँधी का 65वाँ संशोधन विधेयकलोकसभा से पारित लेकिन राज्यसभा से नहीं — रद्द।
199374वाँ संविधान संशोधन लागू (1 जून)नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव।
9 अगस्त 1994राजस्थान में 74वाँ संशोधन लागूराजस्थान नगर पालिका अधिनियम 1994 लागू।
2009राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009वर्तमान प्रभावी अधिनियम।
2011राइट टू रिकॉल कानून 20112009 अधिनियम में संशोधन।
📖 संवैधानिक दर्जा:

74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा — भाग-9क (नगर पालिकाएं), अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद) एवं 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़ी गई। भाग-9क का नाम "नगर पालिकाएं" दिया गया। यहाँ "नगर पालिकाएं" शब्द नगरीय संस्थाओं के त्रिस्तरीय ढाँचे का प्रतीक है।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
नगरीय स्वशासनमेगस्थनीजमद्रास नगर निगम 1688माउण्ट आबू 186474वाँ संशोधन1 June 1993भाग-9कराज्य सूचीनरसिम्हाराव

274वाँ संविधान संशोधन 1992 — अनुच्छेद 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)

74वें संविधान संशोधन 1992 द्वारा संविधान में भाग-9क जोड़ा गया जिसमें नगर पालिकाओं से संबंधित 18 अनुच्छेद (243P से 243ZG) हैं। यह 73वें संशोधन का शहरी समकक्ष है।

अनुच्छेदhindiविषयप्रमुख प्रावधान
243 Pपरिभाषाएँवार्ड समिति, जिला, नगर पालिका, नगर पालिका क्षेत्र, महानगर क्षेत्र की परिभाषाएँ। महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या।
243 Qनगर पालिकाओं का गठनत्रिस्तरीय : नगर पंचायत (संक्रमणशील), नगर पालिका परिषद (लघु नगरीय), नगर निगम (वृहत नगरीय)। दर्जा राज्यपाल द्वारा अधिसूचना से। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं।
243 Rनगर पालिकाओं की संरचनापार्षद — प्रत्यक्ष चुनाव। पदेन सदस्य — MP, MLA, अनुभवी व्यक्ति। अध्यक्ष का चुनाव — राज्य विधानमण्डल तय करेगा।
243 Sवार्ड समितियाँ3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में एक या अधिक वार्डों को मिलाकर वार्ड समिति।
243 Tस्थानों का आरक्षणSC/ST — जनसंख्या अनुपात में। महिला — 33% (सभी वर्गों में)। OBC — राज्य विधानमण्डल तय करेगा। अध्यक्षों के पद भी आरक्षित।
243 Uकार्यकालप्रथम अधिवेशन से 5 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव।
243 Vअयोग्यताएँन्यूनतम आयु 21 वर्ष। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 nomination। अन्य निरर्हताएँ — राज्य विधानमण्डल तय।
243 Wशक्तियाँ, प्राधिकार12वीं अनुसूची के 18 विषयों पर कार्य। आर्थिक-सामाजिक विकास हेतु योजनाएँ।
243 Xकर एवं निधियाँराज्य विधानमण्डल कर, शुल्क लगाने की शक्ति दे सकेगा। राज्य की संचित निधि से अनुदान।
243 Yराज्य वित्त आयोग243I (झ) के अधीन SFC का प्रावधान नगरीय निकायों के लिए भी।
243 Zलेखाओं की संपरीक्षाराज्य विधानमण्डल नगर पालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा का उपबंध करेगा।
243 ZAयकराज्य निर्वाचन आयोग243K के अधीन SEC का प्रावधान। राज्य निर्वाचन आयुक्त — राज्यपाल द्वारा नियुक्त।
243 ZBयखUT पर लागूनगर पालिकाओं संबंधी प्रावधान संघ राज्य क्षेत्रों में लागू।
243 ZCयगलागू न होना5वीं व 6वीं अनुसूची क्षेत्रों में लागू नहीं। दार्जिलिंग गोरखा पर्वतीय परिषद के कार्यों पर प्रभावी नहीं।
243 ZDयघजिला आयोजना समितिजिले में पंचायतों व नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण। अध्यक्ष — जिला प्रमुख।
243 ZEयङमहानगर योजना समितिमहानगर क्षेत्र की विकास योजना। 2/3 सदस्य निर्वाचित।
243 ZFयचविद्यमान विधियाँ74वें संशोधन से पूर्व की विधियाँ तब तक बनी रहेंगी जब तक निरसित न हों।
243 ZGयछन्यायालय का हस्तक्षेप वर्जितपरिसीमन/आवंटन संबंधी विधि को न्यायालय में चुनौती नहीं।
⭐ नगर क्षेत्र (Urban Area) घोषणा के लिए 3 शर्तें:

(1) न्यूनतम जनसंख्या 5000। (2) कार्यशील पुरुषों का न्यूनतम 75% गैर-कृषि कार्यों में संलग्न। (3) जनसंख्या घनत्व कम से कम 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी। ये शर्तें पूरी होने पर राज्यपाल अधिसूचना द्वारा नगर क्षेत्र घोषित करते हैं।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
74वाँ संशोधनभाग-9कArt. 243P-243ZG18 अनुच्छेदवार्ड समिति 3 लाख+महानगर 10 लाख+33% महिला21 वर्षSECSFCDPCMPC

3त्रिस्तरीय नगरीय ढाँचा — विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण

नगरीय स्थानीय शासन में तीन स्तर हैं — नगर पंचायत/नगर पालिका (लघु), नगर परिषद (मध्यम) और नगर निगम (वृहत)। इन्हें सामूहिक रूप से "नगर पालिकाएं" कहा जाता है।

पहलू / विषयनगर पालिका (Nagar Palika)नगर परिषद (Nagar Parishad)नगर निगम (Nagar Nigam)
जनसंख्या10 हजार से 1 लाख तक1 लाख से 5 लाख तक5 लाख से 1 करोड़ तक
जनसंख्या घनत्व200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी1000 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी
प्रति व्यक्ति मासिक आय10 रुपये200 रुपये500 रुपये
गैर-कृषि कार्यों में10% या अधिक25% या अधिक50% या अधिक
राजनैतिक अध्यक्षचैयरमेन / अध्यक्षसभापतिमहापौर / मेयर
अध्यक्ष का चुनावप्रत्यक्षप्रत्यक्षअप्रत्यक्ष (निर्वाचित पार्षदों द्वारा)
प्रशासनिक प्रमुखअधिशाषी अधिकारी (E.O.)मुख्य कार्यकारी अधिकारी (C.E.O.)आयुक्त (Commissioner)
न्यूनतम वार्ड131313
न्यूनतम आयु21 वर्ष21 वर्ष21 वर्ष
कार्यकाल5 वर्ष5 वर्ष5 वर्ष
वार्ड सदस्यपार्षद (प्रत्यक्ष)पार्षद (प्रत्यक्ष)पार्षद (प्रत्यक्ष)
श्रेणीचतुर्थ (25 हजार तक), तृतीय (25-49,999), द्वितीय (50-99,999)
राजस्थान में संख्या1963410
आरक्षणSC/ST जनसंख्या अनुपात + महिलाएँ 33%SC/ST + महिलाएँ 33%SC/ST + महिलाएँ 33%
पदेन सदस्य (मत नहीं)अनुभवी व्यक्ति + MP + MLAअनुभवी व्यक्ति + MP + MLAअनुभवी व्यक्ति + MP + MLA

◈ राजस्थान में 10 नगर निगम

क्र.नगर निगमक्र.नगर निगमक्र.नगर निगम
1जयपुर2जोधपुर (दक्षिण)3कोटा (उत्तर)
4अजमेर5बीकानेर6अलवर
7भरतपुर (7वाँ — 13 जून 2014)8जयपुर (हेरिटेज) — अक्टूबर 20199जोधपुर (उत्तर) — अक्टूबर 2019
10कोटा (दक्षिण) — अक्टूबर 2019
⭐ महत्वपूर्ण तथ्य:

नगर पालिका/परिषद/निगम का दर्जा — राज्यपाल अधिसूचना द्वारा। औद्योगिक नगरी में नगर पालिका नहीं (Art. 243Q)। वार्ड समिति — 3 लाख+ जनसंख्या वाली नगर पालिकाओं में। नगर परिषद में अधिकतम 8 नामांकित सदस्य (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009)। एक प्रत्याशी एक वार्ड से अधिकतम 4 नामांकन पत्र।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
नगर पालिका 196नगर परिषद 34नगर निगम 10महापौर अप्रत्यक्षपार्षद प्रत्यक्षEOCEOCommissionerभरतपुर 7वाँ 2014अक्टूबर 2019
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412वीं अनुसूची — नगर पालिकाओं के 18 विषय | Rajasthan नगरीय तथ्य

74वें संविधान संशोधन द्वारा 12वीं अनुसूची जोड़ी गई जिसमें नगर पालिकाओं के 18 विषय हैं। इसका संबंध अनुच्छेद 243W(ब) से है। कितने विषय नगर पालिकाओं को हस्तांतरित किए जाएँगे — यह राज्य विधानमण्डल तय करेगा।

क्र.12वीं अनुसूची — विषयक्र.12वीं अनुसूची — विषय
1नगरीय योजना (नगर योजना सहित)10गंदी बस्ती सुधार एवं प्रोन्नयन
2भूमि उपयोग विनियमन और भवन निर्माण11नगरीय निर्धनता उन्मूलन
3आर्थिक एवं सामाजिक विकास योजना12नगरीय सुविधाएँ (पार्क, उद्यान, खेल मैदान)
4सड़कें और पुल13सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं सौंदर्यपरक आयाम
5घरेलू, औद्योगिक व वाणिज्यिक जल प्रदाय14शव गाड़ना, श्मशान, विद्युत शवदाहगृह
6लोक स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफाई, कूड़ा प्रबंध15कांजी हाउस, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण
7अग्निशमन सेवाएँ16जन्म-मरण सांख्यिकी (पंजीकरण)
8नगरीय वानिकी, पर्यावरण संरक्षण17सार्वजनिक सुविधाएँ (सड़क प्रकाश, पार्किंग, बस स्टॉप)
9दुर्बल वर्गों की रक्षा (विकलांग, मानसिक)18वधशालाओं एवं चर्मशोधनशालाओं का विनियमन

◈ भारत में नगरीय स्थानीय शासन के प्रकार

प्रकारविवरण
नगर निगम (Municipal Corporation)सबसे बड़े शहरों के लिए।
नगर परिषद (Municipal Council)मध्यम आकार के शहरों के लिए।
नगर पालिका (Municipality/Nagar Panchayat)छोटे व संक्रमणशील क्षेत्रों के लिए।
छावनी बोर्ड (Cantonment Board)सैन्य क्षेत्रों के लिए — केन्द्र सरकार (रक्षा मंत्रालय) के अधीन।
नगर सुधार न्यास (UIT)नगरों के सुनियोजित विकास के लिए।
नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority)विशेष नगरों के विकास के लिए।
पत्तन न्यास (Port Trust)बन्दरगाह वाले शहरों में — संसद द्वारा गठित।
अधिसूचित क्षेत्र समितिजहाँ कानून लागू नहीं लेकिन कुछ शहरी सुविधाएँ आवश्यक।
महानगरीय योजना समिति10 लाख+ जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्रों के लिए।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
12वीं अनुसूची18 विषयArt. 243Wनगर निगमनगर परिषदनगर पालिकाUITPort Trustमहानगरीय

5छावनी बोर्ड | नगर सुधार न्यास | विकास प्राधिकरण | पोर्ट ट्रस्ट

◈ छावनी बोर्ड (Cantonment Board)

पहलूविवरण
अधिनियमछावनी बोर्ड अधिनियम 1924 (2006 में संशोधन)।
नियंत्रणकेन्द्र सरकार का रक्षा मंत्रालय। (राज्य सरकार का नहीं)
अध्यक्षसेना का कमाण्डिंग ऑफिसर।
उपाध्यक्षजनता से निर्वाचित। कार्यकाल — 3 वर्ष।
सदस्यनिर्वाचित (जनता से) + मनोनीत (सैन्य छावनी से)।
भारत में संख्या62 छावनी बोर्ड।
राजस्थान में1 — नसीराबाद (अजमेर)।
विवादयदि पंचायत और छावनी बोर्ड के बीच विवाद हो — निर्णय राज्य सरकार करेगी (केन्द्र के अनुमोदन के अधीन)।

◈ नगर सुधार न्यास (Urban Improvement Trust — UIT)

◈ नगर विकास प्राधिकरण (Development Authority)

प्राधिकरणस्थापना वर्षक्षेत्रविशेष
JDA — जयपुर विकास प्राधिकरण1982जयपुरराजस्थान का प्रथम विकास प्राधिकरण
JaDA — जोधपुर विकास प्राधिकरण2008जोधपुर
ADA — अजमेर विकास प्राधिकरण2013अजमेर
BDA — भिवाड़ी विकास प्राधिकरण2018भिवाड़ी (अलवर)औद्योगिक क्षेत्र

◈ पत्तन न्यास (Port Trust)

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
छावनी बोर्ड 192462 छावनी बोर्डनसीराबादरक्षा मंत्रालयUIT 15 (Raj.)JDA 1982JaDA 2008ADA 2013BDA 2018Port Trust

6राइट टू रिकॉल (Right to Recall) | अविश्वास प्रस्ताव

◈ राइट टू रिकॉल (Right to Recall)

राइट टू रिकॉल वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनमत संग्रह (Referendum) द्वारा कार्यकाल से पहले पद से हटाया जा सकता है।

विषयविवरण
सर्वप्रथम प्रयोग1903 — लॉस एंजिल्स (अमेरिका)
भारत में प्रथम प्रयोग राज्यमध्यप्रदेश — 2001
द्वितीय राज्यछत्तीसगढ़ — 2008
तृतीय राज्यराजस्थान — 2012
राजस्थान में कानूनRight to Recall कानून 2011 (2009 अधिनियम में संशोधन)
राजस्थान में प्रथम प्रयोगदिसम्बर 2012 — बारां जिले की मांगरोल नगर पालिका के अध्यक्ष अशोक जैन के विरुद्ध जनमत संग्रह।
किसे हटाया जा सकता हैमहापौर (Mayor), सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष।

◈ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) — नगरीय निकाय

⭐ Right to Recall vs अविश्वास प्रस्ताव:

अविश्वास प्रस्ताव — निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) लाते हैं। Right to Recall — जनता (मतदाता) द्वारा सीधे। राजस्थान में Right to Recall — महापौर, सभापति, नगर पालिका अध्यक्ष के विरुद्ध।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
राइट टू रिकॉलLos Angeles 1903MP 2001 प्रथमRajasthan 2012 तृतीयमांगरोल बारांअशोक जैनअविश्वास 3/42 वर्ष बाद
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7जिला आयोजना समिति (243ZD) | महानगर योजना समिति (243ZE)

◈ जिला आयोजना समिति (District Planning Committee — DPC)

74वें संविधान संशोधन द्वारा भाग-9क, अनुच्छेद 243ZD में जिला आयोजना समिति का प्रावधान। इसका उद्देश्य जिले में पंचायतों और नगर पालिकाओं की योजनाओं का एकीकरण कर सम्पूर्ण जिले की विकास योजना तैयार करना है।

पहलूDPC (जिला आयोजना समिति)MPC (महानगर योजना समिति)
अनुच्छेद243ZD (भाग-9क)243ZE (भाग-9क)
उद्देश्यजिले की एकीकृत विकास योजना तैयार करनामहानगर क्षेत्र की विकास योजना तैयार करना
क्षेत्रजिला स्तरमहानगर क्षेत्र (10 लाख+ जनसंख्या)
कुल सदस्य25 (संवैधानिक में निर्धारित नहीं)कम से कम 2/3 निर्वाचित
निर्वाचित सदस्य20 (4/5) — पंचायत व नगर निकायों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा (ग्रामीण-शहरी जनसंख्या अनुपात में)2/3 — नगर पालिका निर्वाचित + पंचायत अध्यक्ष (जनसंख्या अनुपात में)
पदेन सदस्य3 — जिला कलेक्टर, CEO, अतिरिक्त CEOराज्य व केन्द्र सरकार का प्रतिनिधित्व
मनोनीत सदस्य2 — राज्य सरकार द्वाराराज्य विधानमण्डल विधि बनाकर
अध्यक्षजिला प्रमुखराज्य विधानमण्डल विधि बनाकर
योजना भेजने की जिम्मेदारीअध्यक्ष (जिला प्रमुख) → राज्य सरकार कोअध्यक्ष → राज्य सरकार को
राजस्थान में प्रावधानधारा 121 — राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994
💡 DPC की विकास योजना में ध्यान रखने योग्य:

(1) पंचायतों और नगर पालिकाओं के सामान्य हित के विषय — स्थानिक योजना, जल व भौतिक संसाधनों में हिस्सा, अवसंरचना का एकीकृत विकास, पर्यावरण संरक्षण। (2) उपलब्ध वित्तीय या अन्य संसाधनों की मात्रा।

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
DPC — Art. 243ZDMPC — Art. 243ZE25 सदस्य DPC20 निर्वाचित3 पदेनअध्यक्ष — जिला प्रमुखमहानगर 10 लाख+2/3 निर्वाचित MPC

873वाँ vs 74वाँ संविधान संशोधन — तुलनात्मक विश्लेषण

🌾 73वाँ संविधान संशोधन (Panchayati Raj)
  • विषय : ग्रामीण स्थानीय शासन (Rural)
  • भाग : भाग-9 (पंचायतें)
  • अनुच्छेद : 243 से 243O (16 अनुच्छेद)
  • अनुसूची : 11वीं (29 विषय)
  • लागू : 24 अप्रैल 1993
  • Rajasthan Act : 23 अप्रैल 1994
  • तीन स्तर : ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
  • सर्वोच्च संस्था : जिला परिषद
  • जमीनी संस्था : ग्राम सभा (Art. 243A)
  • राजनेताओं का नाम : सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख
  • प्रशासनिक अधिकारी : VDO, BDO, CEO
  • राजस्थान में : प्रथम चुनाव 1995
🏙 74वाँ संविधान संशोधन (Urban Local Bodies)
  • विषय : नगरीय स्थानीय शासन (Urban)
  • भाग : भाग-9क (नगर पालिकाएं)
  • अनुच्छेद : 243P से 243ZG (18 अनुच्छेद)
  • अनुसूची : 12वीं (18 विषय)
  • लागू : 1 जून 1993
  • Rajasthan Act : 9 अगस्त 1994
  • तीन स्तर : नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम
  • सर्वोच्च संस्था : नगर निगम
  • जमीनी संस्था : वार्ड समिति (Art. 243S)
  • राजनेताओं का नाम : Chairman, Sabhapati, Mayor
  • प्रशासनिक अधिकारी : EO, CEO, Commissioner
  • Rajasthan में : प्रथम चुनाव 1963
⭐ दोनों में समान प्रावधान:

दोनों में — 5 वर्ष कार्यकाल। SC/ST आरक्षण जनसंख्या अनुपात में। 33% महिला आरक्षण। OBC आरक्षण — स्वैच्छिक। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC)। राज्य वित्त आयोग (SFC)। न्यूनतम आयु 21 वर्ष। विघटन के 6 माह के भीतर चुनाव। न्यायालय हस्तक्षेप वर्जित।

⚠️ महत्वपूर्ण अंतर: 73वाँ : Mayor — नहीं (ग्रामीण में); 74वाँ : Mayor — हाँ (नगर निगम में)। 73वाँ : Gram Sabha — संवैधानिक; 74वाँ : Ward Committee — केवल 3 लाख+ में। 73वाँ : लागू 24 April; 74वाँ : लागू 1 June — 74वाँ पहले लागू हुआ दोनों में से!

🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
73वाँ भाग-974वाँ भाग-9क16 vs 18 अनुच्छेद11वीं vs 12वीं अनुसूची29 vs 18 विषय24 April vs 1 Juneग्रामीण vs नगरीयग्राम सभा vs वार्ड समिति

997वाँ संविधान संशोधन 2011 — सहकारी समितियाँ (Art. 243ZH–243ZT)

97वें संविधान संशोधन 2011 द्वारा सहकारी समितियों (Cooperative Societies) को संवैधानिक दर्जा दिया गया। इससे पूर्व सहकारिता केवल साधारण कानून के तहत आती थी। इस संशोधन ने तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन किए।

◈ 97वें संशोधन के तीन महत्वपूर्ण परिवर्तन

परिवर्तनप्रावधानविवरण
1अनुच्छेद 19(1)(c) में संशोधन — भाग-3 (मूल अधिकार)सहकारी समितियाँ गठन करने का अधिकार — मौलिक अधिकार बनाया गया।
2अनुच्छेद 43B जोड़ा — भाग-4 (DPSP)राज्य, सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्य, लोकतांत्रिक नियंत्रण और व्यावसायिक प्रबंधन को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा।
3भाग-9ख (Part 9B) जोड़ाअनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक — 13 अनुच्छेद।

◈ भाग-9ख — सहकारी समितियों के 13 अनुच्छेद

अनुच्छेदविषयप्रमुख प्रावधान
243 ZHपरिभाषाएँसहकारी समिति, राज्य अधिनियम की परिभाषाएँ।
243 ZIनिगमन एवं समापनसहकारी समितियों के गठन, विनियमन और समापन।
243 ZJबोर्ड सदस्यों की संख्या व पदावधिबोर्ड के सदस्यों की संख्या (अधिकतम 21) व कार्यकाल (5 वर्ष)।
243 ZKबोर्ड सदस्यों का निर्वाचनचुनाव — सदस्यों द्वारा।
243 ZLबोर्ड का दमन व निलम्बनराज्य सरकार — 6 माह से अधिक नहीं।
243 ZMसहकारी समिति का लेखा परीक्षणलेखा वित्त वर्ष में 6 माह के भीतर।
243 ZNसामान्य सभा की बैठक6 माह के भीतर वार्षिक सामान्य बैठक।
243 ZOसदस्यों को सूचना का अधिकारसदस्यों को लेखा, जानकारी प्राप्त करने का अधिकार।
243 ZPविवरणी (Returns)निर्धारित प्राधिकरण को विवरणी (Returns) देना।
243 ZQअपराध और जुर्मानादण्ड के प्रावधान।
243 ZRबहुराज्यीय सहकारी समितियाँइस भाग का बहुराज्यीय सहकारी समितियों पर भी लागू होना।
243 ZSसंघ राज्य क्षेत्रों पर लागूUT में भी लागू।
243 ZTविद्यमान विधि का जारी रहनातब तक बनी रहेगी जब तक राज्य नया कानून न बना ले।

◈ सहकारिता — महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य

तथ्यविवरण
सहकारी आंदोलन के जनकF. Nicholson (एफ. निकोलसन)
भारत में सहकारी आंदोलन की शुरुआत1904 — सहकारी साख समिति अधिनियम (Cooperative Credit Society Act) से।
राजस्थान में सहकारिता की शुरुआत1904 में।
राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति1905 — भिनाय, अजमेर में।
97वाँ संशोधन2011 — संवैधानिक दर्जा।
मूल अधिकारArt. 19(1)(c) — सहकारी समितियाँ गठित करने का मूल अधिकार।
DPSPArt. 43B — सहकारी समितियों को बढ़ावा देने की राज्य की जिम्मेदारी।
भाग-9खArt. 243ZH से 243ZT — 13 अनुच्छेद।
🔑 मुख्य शब्द (Keywords)
97वाँ संशोधन 2011भाग-9खArt. 19(1)(c)Art. 43B243ZH-243ZT13 अनुच्छेदF. Nicholson1904 Cooperative Actभिनाय 1905बोर्ड 21 सदस्य

📋 अध्याय सारांश (Quick Revision)

1. 74वाँ संविधान संशोधन — 1 जून 1993 से लागू। Rajasthan — 9 अगस्त 1994। PM — पी.वी. नरसिम्हाराव। 2. भाग-9क (नगर पालिकाएं), Art. 243P से 243ZG — 18 अनुच्छेद। 12वीं अनुसूची — 18 विषय। 3. त्रिस्तरीय : नगर पालिका (196), नगर परिषद (34), नगर निगम (10) — राजस्थान में। 4. महापौर (Mayor) — अप्रत्यक्ष चुनाव। Chairman/Sabhapati — प्रत्यक्ष। पार्षद — प्रत्यक्ष। 5. नगर क्षेत्र शर्तें : 5000 जनसंख्या + 75% गैर-कृषि + 400 घनत्व/वर्ग किमी। 6. महानगर क्षेत्र = 10 लाख+ जनसंख्या (Art. 243P)। वार्ड समिति — 3 लाख+ में (Art. 243S)। 7. छावनी बोर्ड — रक्षा मंत्रालय, 62 (India), 1 (Rajasthan — नसीराबाद)। Chairman = Commanding Officer। 8. JDA (1982), JaDA (2008), ADA (2013), BDA (2018) — Rajasthan के विकास प्राधिकरण। 9. Right to Recall — MP (2001) प्रथम; Rajasthan (2012) तृतीय। मांगरोल बारां — प्रथम प्रयोग। 10. DPC (243ZD) — 25 सदस्य (20 निर्वाचित + 3 पदेन + 2 मनोनीत)। अध्यक्ष — जिला प्रमुख। 11. 73वाँ vs 74वाँ : भाग-9 vs 9क; 16 vs 18 अनुच्छेद; 11वीं vs 12वीं अनुसूची; 29 vs 18 विषय। 12. 74वाँ पहले लागू (1 June) vs 73वाँ बाद में (24 April) — परन्तु 73वाँ पहले पारित हुआ! 13. 97वाँ संशोधन 2011 — सहकारी समितियों को संवैधानिक दर्जा। भाग-9ख, 13 अनुच्छेद। 14. Art. 19(1)(c) — सहकारी समिति गठन का मूल अधिकार। Art. 43B — DPSP। 15. राजस्थान में प्रथम सहकारी समिति — 1905, भिनाय (अजमेर)। जनक — F. Nicholson।

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