हर लिखित संविधान की तरह भारत का संविधान भी बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को समायोजित करने के लिए संशोधन का प्रावधान करता है। लेकिन यह प्रक्रिया न ब्रिटेन की तरह "अत्यंत आसान" है और न अमेरिका की तरह "अत्यंत कठिन" — यह "दोनों का समन्वय" है।
| विशेषता | भारत | ब्रिटेन | अमेरिका |
|---|---|---|---|
| संशोधन का तरीका | न कठोर, न लचीला — दोनों का समन्वय | अत्यंत लचीला (Flexible) — साधारण कानून जैसा | अत्यंत कठोर (Rigid) — 3/4 States + 2/3 Congress |
| Art./Part | Art. 368, Part XX | कोई लिखित संविधान नहीं | Article V |
| K.C. Wheare का मत | "Flexibility and Rigidity के बीच अच्छा संतुलन" | — | — |
| चरण | प्रक्रिया | विशेष बिंदु |
|---|---|---|
| 1. विधेयक प्रस्तुति | संशोधन विधेयक (Amendment Bill) केवल | |
| 2. प्रस्तुतकर्ता | मंत्री या निजी सदस्य (Private Member) — दोनों प्रस्तुत कर सकते हैं | President की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं |
| 3. विशेष बहुमत से पारित | प्रत्येक सदन में: (a) सदन की कुल सदस्यता का बहुमत + (b) उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 का बहुमत | Total membership = कुल सदस्य (रिक्तियाँ + अनुपस्थित सहित) |
| 4. अलग-अलग पारित | प्रत्येक सदन अलग-अलग पारित करे | दोनों सदनों में मतभेद होने पर — कोई संयुक्त बैठक (Joint Sitting) नहीं |
| 5. राज्य विधानमंडलों का अनुमोदन | संघीय प्रावधानों के लिए — आधे राज्यों (Half of States) के विधानमंडलों की साधारण बहुमत से स्वीकृति | कोई समय-सीमा नहीं; स्वीकृति वापस लेने पर संविधान मौन |
| 6. President को प्रस्तुति | दोनों सदनों + (जहाँ जरूरी) राज्यों से पारित होने के बाद President को भेजा जाता है | — |
| 7. President का अनुमोदन | President को assent देना अनिवार्य [24वाँ संशोधन 1971] | President न assent रोक सकते हैं, न वापस भेज सकते हैं |
| 8. अधिनियम बन जाता है | President के assent के बाद Bill — Constitutional Amendment Act बन जाता है | संविधान उसी अनुसार संशोधित |
24वाँ संशोधन 1971 का महत्व: इस संशोधन से पहले यह स्पष्ट नहीं था कि President assent देने से इनकार कर सकते हैं या नहीं। 24वें संशोधन ने यह स्पष्ट किया: President को assent देना अनिवार्य है।
भारतीय संविधान में संशोधन तीन तरीकों से हो सकता है। Note: Simple Majority के संशोधन Art. 368 के अंतर्गत नहीं आते।
| प्रकार (Type) | बहुमत (Majority) | उदाहरण |
|---|---|---|
| 1. साधारण बहुमत (Simple Majority) | उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत (साधारण विधायी प्रक्रिया) | नए राज्य, UT, नागरिकता, संसद की प्रक्रिया आदि — 18 प्रावधान [Art. 368 से बाहर] |
| 2. विशेष बहुमत (Special Majority) | कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वाले 2/3 का बहुमत | FR, DPSP और अन्य अधिकांश प्रावधान |
| 3. विशेष बहुमत +राज्यों का अनुमोदन | Special Majority + आधे राज्य विधानमंडलों की साधारण बहुमत से स्वीकृति | संघीय प्रावधान — President निर्वाचन, SC-HC, 7th Schedule आदि — 8 प्रावधान |
इन प्रावधानों को Parliament साधारण कानून जैसी प्रक्रिया से बदल सकती है। ये Art. 368 के दायरे में नहीं आते — यानी "संविधान का संशोधन" नहीं माने जाते।
| क्र. | साधारण बहुमत से संशोधनीय प्रावधान |
|---|---|
| 1 | नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना (Art. 2) |
| 2 | नए राज्यों का गठन; मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन (Art. 3) |
| 3 | राज्यों में विधान परिषदों का उन्मूलन या निर्माण (Art. 169) |
| 4 | द्वितीय अनुसूची — राष्ट्रपति, राज्यपाल, Speaker, न्यायाधीशों आदि के परितोषण/भत्ते |
| 5 | संसद में गणपूर्ति (Quorum) |
| 6 | संसद सदस्यों के वेतन और भत्ते |
| 7 | संसद में प्रक्रिया के नियम (Rules of Procedure) |
| 8 | संसद, उसके सदस्यों और समितियों के विशेषाधिकार |
| 9 | संसद में अंग्रेजी भाषा का उपयोग |
| 10 | सर्वोच्च न्यायालय में puisne न्यायाधीशों की संख्या |
| 11 | सर्वोच्च न्यायालय पर अधिक अधिकारिता प्रदान करना |
| 12 | राजभाषा का उपयोग (Official Language) |
| 13 | नागरिकता — अर्जन और समाप्ति |
| 14 | संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनाव |
| 15 | निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation of Constituencies) |
| 16 | संघ राज्यक्षेत्र (Union Territories) |
| 17 | पाँचवीं अनुसूची — अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन |
| 18 | छठी अनुसूची — जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन |
अधिकांश संवैधानिक प्रावधानों को विशेष बहुमत (Special Majority) से संशोधित किया जाता है। इसका अर्थ है:
| क्र. | विशेष बहुमत + राज्य अनुमोदन से संशोधनीय प्रावधान |
|---|---|
| 1 | राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी पद्धति (Art. 54-55) |
| 2 | संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्ति का विस्तार |
| 3 | सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय |
| 4 | संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण |
| 5 | वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council) [101वाँ संशोधन 2016 द्वारा जोड़ा — Art. 279-A] |
| 6 | सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची (Union List, State List, Concurrent List) |
| 7 | Parliament में राज्यों का प्रतिनिधित्व |
| 8 | संविधान संशोधन करने की शक्ति और प्रक्रिया (Art. 368 स्वयं) |
महत्वपूर्ण: Art. 368 स्वयं — Type 3 (Special Majority + States) के अंतर्गत आता है। इसका अर्थ है: यदि Parliament Amendment Procedure को बदलना चाहे, तो उसे भी आधे राज्यों की स्वीकृति चाहिए।
| क्र. | आलोचना | तर्क |
|---|---|---|
| 1 | कोई विशेष निकाय नहीं | USA जैसी Constitutional Convention या Constituent Assembly नहीं। संविधायी शक्ति केवल Parliament को — कुछ मामलों में State Legislatures को। |
| 2 | State Legislatures संशोधन प्रारम्भ नहीं कर सकतीं | केवल एक अपवाद: State Legislature — Parliament से विधान परिषद बनाने/हटाने का प्रस्ताव पास कर सकती है (Parliament माने या न माने)। USA में States भी Constitutional Convention बुलाने का प्रस्ताव दे सकते हैं। |
| 3 | Parliament का एकाधिकार | अधिकांश संविधान Parliament अकेले बदल सकती है। राज्यों की सहमति बहुत कम मामलों में, वह भी केवल आधे राज्यों की — USA में 3/4 राज्यों की जरूरत। |
| 4 | समय-सीमा का अभाव | States के लिए संशोधन विधेयक पर अनुमोदन/अस्वीकृति की कोई समय-सीमा नहीं। एक बार दी गई स्वीकृति वापस ली जा सकती है या नहीं — इस पर भी मौन। |
| 5 | संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं | साधारण विधेयकों के लिए दोनों सदनों की Joint Sitting का प्रावधान है, लेकिन Constitutional Amendment Bill में दोनों सदनों में गतिरोध होने पर Joint Sitting नहीं। |
| 6 | विधायी प्रक्रिया से मिलती-जुलती | Special Majority को छोड़कर — Amendment Bill साधारण विधेयक की तरह ही Parliament से पारित होता है। अलग प्रक्रिया नहीं। |
| 7 | प्रावधान अत्यंत संक्षिप्त | संशोधन प्रक्रिया के प्रावधान बहुत संक्षिप्त हैं — न्यायपालिका को मामले ले जाने की व्यापक गुंजाइश। |
"जबकि हम चाहते हैं कि यह संविधान यथासंभव ठोस और स्थायी हो, संविधान में कोई स्थायित्व नहीं होता। इसमें एक निश्चित लचीलापन होना चाहिए। यदि आप किसी संविधान को कठोर और स्थायी बना देते हैं, तो आप राष्ट्र के विकास को, एक जीवंत, जीवन्त, जैविक लोग के विकास को रोक देते हैं।"
"Assembly ने न केवल लोगों को संविधान संशोधन का अधिकार देने से इनकार करके संविधान पर अंतिमता और अचूकता की मुहर लगाने से परहेज किया — बल्कि संविधान के संशोधन के लिए एक सुगम प्रक्रिया (Facile Procedure) भी प्रदान की।"
"यह किस्म-किस्म की संशोधन प्रक्रियाएँ बुद्धिमानी है — लेकिन यह बहुत कम संविधानों में मिलती है।" (This variety in the amending process is wise but rarely found.) "लचीलेपन और कठोरता के बीच अच्छा संतुलन बिठाती है।" (Strikes a good balance between flexibility and rigidity.)
★ सारांश (Summary)
| प्रकार | बहुमत | किसमें जरूरी | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| Type 1: Simple Majority | उपस्थित + मतदान का बहुमत | Art. 368 से बाहर — 18 प्रावधान | नए राज्य, UT, Citizenship, SC Judges की संख्या |
| Type 2: Special Majority | कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वाले का 2/3 | अधिकांश प्रावधान | FR, DPSP, अन्य सभी |
| Type 3: Special + States | Type 2 + आधे राज्यों की साधारण बहुमत से स्वीकृति | 8 संघीय प्रावधान | President Election, SC-HC, 7th Schedule, Art. 368 स्वयं |
| विषय | तथ्य |
|---|---|
| Art. 368 का स्थान | Part XX — Power of Parliament to amend the Constitution |
| President का assent | अनिवार्य [24वाँ संशोधन 1971] — वापस नहीं कर सकते, रोक नहीं सकते |
| Joint Sitting | Amendment Bill पर — नहीं; Ordinary Bill पर — हाँ |
| राज्य विधानमंडल | संशोधन प्रारम्भ नहीं कर सकते (State Legislatures cannot initiate) |
| Type 3 में राज्यों की सहमति | आधे राज्य (Half of States) — USA में 3/4 राज्य |
| समय-सीमा | State ratification के लिए कोई time limit नहीं |
| Kesavananda Bharati 1973 | Basic Structure — Parliament Amendment से नहीं बदल सकती |
| Basic Structure में शामिल | Supremacy of Constitution; Republic and Democratic form; Judicial Review; Secularism; FR |
| GST Council जोड़ा | 101वाँ संशोधन 2016 ने Type 3 सूची में Art. 279-A (GST Council) जोड़ा |
| India vs UK vs USA | India = दोनों का समन्वय; UK = Flexible; USA = Rigid (3/4 States + 2/3 Congress) |