✏️ अध्याय 10/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

संविधान का संशोधन

Amendment of the Constitution | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय (Introduction)
  2. संशोधन की प्रक्रिया — 8 चरण (Procedure under Article 368)
  3. संशोधन के 3 प्रकार (Three Types of Amendments)
  4. साधारण बहुमत से संशोधन (Simple Majority — 18 Provisions)
  5. विशेष बहुमत से संशोधन (Special Majority)
  6. विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदन (Special Majority + State Ratification)
  7. संशोधन प्रक्रिया की आलोचनाएँ (7 Criticisms)
  8. विद्वानों के मत (Scholars' Views)

1परिचय (Introduction)

हर लिखित संविधान की तरह भारत का संविधान भी बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को समायोजित करने के लिए संशोधन का प्रावधान करता है। लेकिन यह प्रक्रिया न ब्रिटेन की तरह "अत्यंत आसान" है और न अमेरिका की तरह "अत्यंत कठिन" — यह "दोनों का समन्वय" है।

विशेषताभारतब्रिटेनअमेरिका
संशोधन का तरीकान कठोर, न लचीला — दोनों का समन्वयअत्यंत लचीला (Flexible) — साधारण कानून जैसाअत्यंत कठोर (Rigid) — 3/4 States + 2/3 Congress
Art./PartArt. 368, Part XXकोई लिखित संविधान नहींArticle V
K.C. Wheare का मत"Flexibility and Rigidity के बीच अच्छा संतुलन"
Art. 368 के अंतर्गत संशोधन शक्ति
  • Parliament — अपनी संविधायी शक्ति (Constituent Power) से
  • जोड़ना (Addition), परिवर्तन (Variation) या निरसन (Repeal)
  • Art. 368 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार
  • 24वाँ संशोधन 1971: President को assent देना अनिवार्य
Basic Structure की सीमा (Kesavananda 1973)
  • Parliament उन प्रावधानों को नहीं बदल सकती जो "Basic Structure" का हिस्सा हैं
  • यह सिद्धांत Kesavananda Bharati Case 1973 में स्थापित हुआ
  • Basic Structure = संसदीय लोकतंत्र, FR, Rule of Law आदि
  • Art. 368 स्वयं भी Basic Structure का हिस्सा है

2संशोधन की प्रक्रिया — 8 चरण (Procedure under Article 368)

चरणप्रक्रियाविशेष बिंदु
1. विधेयक प्रस्तुतिसंशोधन विधेयक (Amendment Bill) केवल
2. प्रस्तुतकर्तामंत्री या निजी सदस्य (Private Member) — दोनों प्रस्तुत कर सकते हैंPresident की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं
3. विशेष बहुमत से पारितप्रत्येक सदन में: (a) सदन की कुल सदस्यता का बहुमत + (b) उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 का बहुमतTotal membership = कुल सदस्य (रिक्तियाँ + अनुपस्थित सहित)
4. अलग-अलग पारितप्रत्येक सदन अलग-अलग पारित करेदोनों सदनों में मतभेद होने पर — कोई संयुक्त बैठक (Joint Sitting) नहीं
5. राज्य विधानमंडलों का अनुमोदनसंघीय प्रावधानों के लिए — आधे राज्यों (Half of States) के विधानमंडलों की साधारण बहुमत से स्वीकृतिकोई समय-सीमा नहीं; स्वीकृति वापस लेने पर संविधान मौन
6. President को प्रस्तुतिदोनों सदनों + (जहाँ जरूरी) राज्यों से पारित होने के बाद President को भेजा जाता है
7. President का अनुमोदनPresident को assent देना अनिवार्य [24वाँ संशोधन 1971]President न assent रोक सकते हैं, न वापस भेज सकते हैं
8. अधिनियम बन जाता हैPresident के assent के बाद Bill — Constitutional Amendment Act बन जाता हैसंविधान उसी अनुसार संशोधित

24वाँ संशोधन 1971 का महत्व: इस संशोधन से पहले यह स्पष्ट नहीं था कि President assent देने से इनकार कर सकते हैं या नहीं। 24वें संशोधन ने यह स्पष्ट किया: President को assent देना अनिवार्य है।

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3संशोधन के 3 प्रकार (Three Types of Amendments)

भारतीय संविधान में संशोधन तीन तरीकों से हो सकता है। Note: Simple Majority के संशोधन Art. 368 के अंतर्गत नहीं आते।

प्रकार (Type)बहुमत (Majority)उदाहरण
1. साधारण बहुमत (Simple Majority)उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत (साधारण विधायी प्रक्रिया)नए राज्य, UT, नागरिकता, संसद की प्रक्रिया आदि — 18 प्रावधान [Art. 368 से बाहर]
2. विशेष बहुमत (Special Majority)कुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वाले 2/3 का बहुमतFR, DPSP और अन्य अधिकांश प्रावधान
3. विशेष बहुमत +राज्यों का अनुमोदनSpecial Majority + आधे राज्य विधानमंडलों की साधारण बहुमत से स्वीकृतिसंघीय प्रावधान — President निर्वाचन, SC-HC, 7th Schedule आदि — 8 प्रावधान

4साधारण बहुमत से संशोधन (Simple Majority — 18 Provisions)

इन प्रावधानों को Parliament साधारण कानून जैसी प्रक्रिया से बदल सकती है। ये Art. 368 के दायरे में नहीं आते — यानी "संविधान का संशोधन" नहीं माने जाते।

क्र.साधारण बहुमत से संशोधनीय प्रावधान
1नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना (Art. 2)
2नए राज्यों का गठन; मौजूदा राज्यों के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन (Art. 3)
3राज्यों में विधान परिषदों का उन्मूलन या निर्माण (Art. 169)
4द्वितीय अनुसूची — राष्ट्रपति, राज्यपाल, Speaker, न्यायाधीशों आदि के परितोषण/भत्ते
5संसद में गणपूर्ति (Quorum)
6संसद सदस्यों के वेतन और भत्ते
7संसद में प्रक्रिया के नियम (Rules of Procedure)
8संसद, उसके सदस्यों और समितियों के विशेषाधिकार
9संसद में अंग्रेजी भाषा का उपयोग
10सर्वोच्च न्यायालय में puisne न्यायाधीशों की संख्या
11सर्वोच्च न्यायालय पर अधिक अधिकारिता प्रदान करना
12राजभाषा का उपयोग (Official Language)
13नागरिकता — अर्जन और समाप्ति
14संसद और राज्य विधानमंडलों के चुनाव
15निर्वाचन-क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation of Constituencies)
16संघ राज्यक्षेत्र (Union Territories)
17पाँचवीं अनुसूची — अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों का प्रशासन
18छठी अनुसूची — जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन

5विशेष बहुमत से संशोधन (Special Majority)

अधिकांश संवैधानिक प्रावधानों को विशेष बहुमत (Special Majority) से संशोधित किया जाता है। इसका अर्थ है:

Special Majority की परिभाषा
  • "कुल सदस्यता का बहुमत" (Majority of Total Membership) — चाहे कितनी भी सीटें रिक्त हों या सदस्य अनुपस्थित हों
  • PLUS: उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के 2/3 का बहुमत
  • Lok Sabha Rules: अंतिम चरण में नहीं बल्कि सभी प्रभावी चरणों में Special Majority जरूरी
इसके अंतर्गत संशोधनीय प्रावधान
  • मूल अधिकार (Fundamental Rights)
  • राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)
  • अन्य सभी प्रावधान जो Type 1 और Type 3 में नहीं आते
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6विशेष बहुमत + राज्यों का अनुमोदन (Special Majority + State Ratification)

संघीय ढाँचे (Federal Structure) से संबंधित प्रावधानों के लिए — Special Majority + आधे राज्य विधानमंडलों की साधारण बहुमत से स्वीकृति आवश्यक। यदि कुछ राज्य कोई कार्रवाई न करें — कोई बात नहीं; जैसे ही आधे राज्य consent दें — प्रक्रिया पूरी। कोई समय-सीमा नहीं।

क्र.विशेष बहुमत + राज्य अनुमोदन से संशोधनीय प्रावधान
1राष्ट्रपति का निर्वाचन और उसकी पद्धति (Art. 54-55)
2संघ और राज्यों की कार्यकारी शक्ति का विस्तार
3सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय
4संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों का वितरण
5वस्तु एवं सेवा कर परिषद (GST Council) [101वाँ संशोधन 2016 द्वारा जोड़ा — Art. 279-A]
6सातवीं अनुसूची की कोई भी सूची (Union List, State List, Concurrent List)
7Parliament में राज्यों का प्रतिनिधित्व
8संविधान संशोधन करने की शक्ति और प्रक्रिया (Art. 368 स्वयं)

महत्वपूर्ण: Art. 368 स्वयं — Type 3 (Special Majority + States) के अंतर्गत आता है। इसका अर्थ है: यदि Parliament Amendment Procedure को बदलना चाहे, तो उसे भी आधे राज्यों की स्वीकृति चाहिए।

7संशोधन प्रक्रिया की आलोचनाएँ (7 Criticisms)

क्र.आलोचनातर्क
1कोई विशेष निकाय नहींUSA जैसी Constitutional Convention या Constituent Assembly नहीं। संविधायी शक्ति केवल Parliament को — कुछ मामलों में State Legislatures को।
2State Legislatures संशोधन प्रारम्भ नहीं कर सकतींकेवल एक अपवाद: State Legislature — Parliament से विधान परिषद बनाने/हटाने का प्रस्ताव पास कर सकती है (Parliament माने या न माने)। USA में States भी Constitutional Convention बुलाने का प्रस्ताव दे सकते हैं।
3Parliament का एकाधिकारअधिकांश संविधान Parliament अकेले बदल सकती है। राज्यों की सहमति बहुत कम मामलों में, वह भी केवल आधे राज्यों की — USA में 3/4 राज्यों की जरूरत।
4समय-सीमा का अभावStates के लिए संशोधन विधेयक पर अनुमोदन/अस्वीकृति की कोई समय-सीमा नहीं। एक बार दी गई स्वीकृति वापस ली जा सकती है या नहीं — इस पर भी मौन।
5संयुक्त बैठक का प्रावधान नहींसाधारण विधेयकों के लिए दोनों सदनों की Joint Sitting का प्रावधान है, लेकिन Constitutional Amendment Bill में दोनों सदनों में गतिरोध होने पर Joint Sitting नहीं।
6विधायी प्रक्रिया से मिलती-जुलतीSpecial Majority को छोड़कर — Amendment Bill साधारण विधेयक की तरह ही Parliament से पारित होता है। अलग प्रक्रिया नहीं।
7प्रावधान अत्यंत संक्षिप्तसंशोधन प्रक्रिया के प्रावधान बहुत संक्षिप्त हैं — न्यायपालिका को मामले ले जाने की व्यापक गुंजाइश।

8विद्वानों के मत (Scholars' Views)

Pandit Jawaharlal Nehru — Constituent Assembly में

"जबकि हम चाहते हैं कि यह संविधान यथासंभव ठोस और स्थायी हो, संविधान में कोई स्थायित्व नहीं होता। इसमें एक निश्चित लचीलापन होना चाहिए। यदि आप किसी संविधान को कठोर और स्थायी बना देते हैं, तो आप राष्ट्र के विकास को, एक जीवंत, जीवन्त, जैविक लोग के विकास को रोक देते हैं।"

Dr. B.R. Ambedkar — Constituent Assembly में

"Assembly ने न केवल लोगों को संविधान संशोधन का अधिकार देने से इनकार करके संविधान पर अंतिमता और अचूकता की मुहर लगाने से परहेज किया — बल्कि संविधान के संशोधन के लिए एक सुगम प्रक्रिया (Facile Procedure) भी प्रदान की।"

K.C. Wheare — Modern Constitutions

"यह किस्म-किस्म की संशोधन प्रक्रियाएँ बुद्धिमानी है — लेकिन यह बहुत कम संविधानों में मिलती है।" (This variety in the amending process is wise but rarely found.) "लचीलेपन और कठोरता के बीच अच्छा संतुलन बिठाती है।" (Strikes a good balance between flexibility and rigidity.)

★ सारांश (Summary)

3 प्रकार — Quick Reference

प्रकारबहुमतकिसमें जरूरीउदाहरण
Type 1: Simple Majorityउपस्थित + मतदान का बहुमतArt. 368 से बाहर — 18 प्रावधाननए राज्य, UT, Citizenship, SC Judges की संख्या
Type 2: Special Majorityकुल सदस्यता का बहुमत + उपस्थित व मतदान करने वाले का 2/3अधिकांश प्रावधानFR, DPSP, अन्य सभी
Type 3: Special + StatesType 2 + आधे राज्यों की साधारण बहुमत से स्वीकृति8 संघीय प्रावधानPresident Election, SC-HC, 7th Schedule, Art. 368 स्वयं

महत्वपूर्ण तथ्य (Key Facts)

विषयतथ्य
Art. 368 का स्थानPart XX — Power of Parliament to amend the Constitution
President का assentअनिवार्य [24वाँ संशोधन 1971] — वापस नहीं कर सकते, रोक नहीं सकते
Joint SittingAmendment Bill पर — नहीं; Ordinary Bill पर — हाँ
राज्य विधानमंडलसंशोधन प्रारम्भ नहीं कर सकते (State Legislatures cannot initiate)
Type 3 में राज्यों की सहमतिआधे राज्य (Half of States) — USA में 3/4 राज्य
समय-सीमाState ratification के लिए कोई time limit नहीं
Kesavananda Bharati 1973Basic Structure — Parliament Amendment से नहीं बदल सकती
Basic Structure में शामिलSupremacy of Constitution; Republic and Democratic form; Judicial Review; Secularism; FR
GST Council जोड़ा101वाँ संशोधन 2016 ने Type 3 सूची में Art. 279-A (GST Council) जोड़ा
India vs UK vs USAIndia = दोनों का समन्वय; UK = Flexible; USA = Rigid (3/4 States + 2/3 Congress)
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