📜 अध्याय 1/34 — भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

Historical Background of the Constitution | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. परिचय (Introduction)
  2. अंतरिम सरकार (Interim Government) 1946
  3. स्वतंत्र भारत का प्रथम मंत्रिमंडल (First Cabinet of Independent India) 1947
  4. प्रमुख पदाधिकारी — कालक्रम (Key Office-Holders in Order)
  5. कालरेखा (Timeline) : 1600 से 1947

1परिचय (Introduction)

ईस्ट इंडिया कम्पनी (East India Company) सन् 1608 में व्यापारियों (Traders) के रूप में भारत आई। रानी एलिज़ाबेथ प्रथम ने 1600 में इसे भारत में व्यापार के विशेष अधिकार (Exclusive Trading Rights) दिए थे। 1765 में बक्सर के युद्ध (Battle of Buxar, 1764) की विजय के बाद मुगल सम्राट शाह आलम ने कम्पनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी (Diwani — राजस्व और दीवानी न्याय का अधिकार) सौंप दी। इससे कम्पनी एक व्यापारिक संस्था से एक प्रादेशिक शक्ति (Territorial Power) बन गई।

1858 में सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny / First War of Independence) के बाद ब्रिटिश क्राउन (British Crown) ने भारत का शासन सीधे अपने हाथ में ले लिया। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली। इन दो शताब्दियों में अनेक संवैधानिक अधिनियम (Constitutional Acts) बने, जिन्होंने भारतीय संविधान और वर्तमान शासन व्यवस्था की नींव रखी।

कम्पनी शासन (Company Rule)1773–1858
  • पहला नियंत्रण अधिनियम: 1773
  • केंद्रीय प्रशासन की नींव
  • व्यापारिक कम्पनी पर संसदीय नियंत्रण
  • 8 प्रमुख अधिनियम इस काल में
  • कम्पनी: व्यापारी → शासक → प्रशासक
क्राउन शासन (Crown Rule)1858–1947
  • 1857 विद्रोह के बाद सीधा क्राउन नियंत्रण
  • Viceroy प्रणाली की शुरुआत
  • प्रतिनिधि संस्थाओं का क्रमिक विकास
  • GOI Act 1935 — सबसे बड़ा स्रोत
  • 1947: स्वतंत्रता और विभाजन

भाग 1 — कम्पनी शासन (Company Rule) : 1773 से 1858

ब्रिटिश संसद ने इस काल में अनेक अधिनियम (Acts) पारित किए जिनका उद्देश्य कम्पनी की गतिविधियों पर नियंत्रण (Control) रखना, भारत में प्रशासन को व्यवस्थित करना और ब्रिटिश हितों की रक्षा करना था। NCERT के अनुसार यह काल भारत में केंद्रीय प्रशासन (Central Administration) के क्रमिक विकास का काल है।

1.1 रेगुलेटिंग एक्ट (Regulating Act) 1773

Regulating Act 1773 ( प्रथम नियंत्रण अधिनियम )

यह अधिनियम ब्रिटिश सरकार द्वारा कम्पनी (Company) को नियंत्रित करने का पहला कदम था। इसने पहली बार कम्पनी के राजनीतिक (Political) और प्रशासनिक (Administrative) कार्यों को आधिकारिक मान्यता दी और भारत में केंद्रीय प्रशासन की नींव रखी।

1773 से पहले ईस्ट इंडिया कम्पनी पर ब्रिटिश सरकार का कोई नियंत्रण नहीं था। कम्पनी के कर्मचारी मनमाने तरीके से काम करते थे, भ्रष्टाचार (Corruption) चरम पर था और तीनों प्रेसीडेंसियाँ (Presidencies) — बंगाल, बॉम्बे, मद्रास — एक-दूसरे से स्वतंत्र थीं। इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए यह अधिनियम पारित हुआ।

1. बंगाल के गवर्नर (Governor of Bengal) का पद बदलकर "बंगाल का गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal)" किया गया। उनकी सहायता के लिए 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद (Executive Council) बनाई गई। प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स (Lord Warren Hastings)।

2. बॉम्बे और मद्रास के गवर्नरों (Governors) को बंगाल के Governor-General के अधीन (Subordinate) किया गया। इससे पहले तीनों प्रेसीडेंसियाँ एक-दूसरे से बिल्कुल स्वतंत्र थीं।

3. कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court at Calcutta) की स्थापना 1774 में — 1 मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) और 3 अन्य न्यायाधीश (Judges)।

4. कम्पनी के कर्मचारियों पर व्यक्तिगत व्यापार (Private Trade) करने और "देशी" लोगों से उपहार (Gifts) या रिश्वत (Bribes) लेने पर पूर्ण प्रतिबंध (Prohibition) लगाया गया।

5. संचालक मंडल (Court of Directors — कम्पनी का शासी निकाय) को राजस्व (Revenue), नागरिक (Civil) और सैन्य (Military) मामलों की जानकारी ब्रिटिश सरकार को देना अनिवार्य किया।

संवैधानिक महत्व (Constitutional Significance): (क) ब्रिटिश सरकार द्वारा कम्पनी को नियंत्रित करने का पहला कदम, (ख) पहली बार कम्पनी के राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्यों को स्वीकृति, (ग) भारत में केंद्रीय प्रशासन (Central Administration) की नींव।

1.2 अमेंडिंग एक्ट (Amending Act) 1781 — Act of Settlement

Amending Act 1781 ( Act of Settlement )

रेगुलेटिंग एक्ट 1773 के दोषों को दूर करने के लिए पारित। इसने Supreme Court और Governor-General के बीच अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) की सीमाएँ स्पष्ट कीं।

1. गवर्नर-जनरल और परिषद को अपने आधिकारिक कार्यों (Official Acts) के लिए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अधिकार क्षेत्र से बाहर किया। कम्पनी के कर्मचारियों को भी आधिकारिक कार्यों के लिए इससे मुक्ति।

2. राजस्व संबंधी मामलों (Revenue Matters) और उनकी वसूली (Collection) को Supreme Court के अधिकार क्षेत्र से बाहर किया।

3. Supreme Court का अधिकार क्षेत्र कलकत्ता के सभी निवासियों पर। न्यायालय व्यक्तिगत कानून (Personal Law) लागू करेगा — हिंदुओं पर हिंदू कानून, मुसलमानों पर मोहम्मडन कानून।

4. प्रांतीय न्यायालयों (Provincial Courts) से अपील (Appeal) — Supreme Court में नहीं, बल्कि Governor-General-in-Council के पास।

5. Governor-General-in-Council को प्रांतीय न्यायालयों और परिषदों के लिए नियम (Regulations) बनाने का अधिकार।

1.3 पिट्स इंडिया एक्ट (Pitt's India Act) 1784

Pitt's India Act 1784 ( द्विशासन की शुरुआत )

ब्रिटिश Prime Minister विलियम पिट (William Pitt) द्वारा ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत। पहली बार कम्पनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों को अलग किया। भारत में कम्पनी के क्षेत्रों को पहली बार "ब्रिटिश संपत्ति (British Possessions)" कहा गया।

1. कम्पनी के व्यापारिक कार्यों (Commercial Functions) और राजनीतिक कार्यों (Political Functions) में स्पष्ट अंतर किया गया।

2. व्यापारिक कार्य: संचालक मंडल (Court of Directors) के पास। राजनीतिक कार्य: नई संस्था नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के पास। इस प्रकार द्विशासन प्रणाली (Double Government / Dual System) की स्थापना हुई।

3. नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) को भारत में ब्रिटिश संपत्तियों (British Possessions) के नागरिक (Civil), सैन्य (Military) और राजस्व (Revenue) कार्यों की देखरेख का पूरा अधिकार।

संचालक मंडल (Court of Directors)
  • व्यापारिक (Commercial) कार्य
  • भारत में सभी व्यापारिक निर्णय
  • Court of Directors के अधीन
नियंत्रण बोर्ड (Board of Control)
  • राजनीतिक (Political) कार्य
  • नागरिक, सैन्य और राजस्व नियंत्रण
  • ब्रिटिश सरकार के अधीन

दो महत्वपूर्ण तथ्य: (1) पहली बार भारत में कम्पनी के क्षेत्रों को "British Possessions in India" कहा गया। (2) पहली बार ब्रिटिश सरकार को कम्पनी के कार्यों और भारत के प्रशासन पर सर्वोच्च (Supreme) नियंत्रण मिला।

1.4 एक्ट ऑफ 1786 (Act of 1786)

1786 में लॉर्ड कार्नवालिस (Lord Cornwallis) को बंगाल का Governor-General नियुक्त किया जाना था। उन्होंने यह पद स्वीकार करने के लिए दो शर्तें (Conditions) रखीं:

कार्नवालिस की माँग 1
  • विशेष परिस्थितियों में अपनी परिषद (Council) के निर्णय को नकारने (Override) का अधिकार
कार्नवालिस की माँग 2
  • वे गवर्नर-जनरल के साथ-साथ सेनापति (Commander-in-Chief) भी रहेंगे

1786 का अधिनियम इन दोनों माँगों को पूरा करने के लिए पारित किया गया। बाद में यही Override का अधिकार Charter Act 1793 द्वारा सभी भावी Governor-Generals और Governors को दे दिया गया।

1.5 चार्टर एक्ट (Charter Act) 1793

Charter Act 1793

कम्पनी के व्यापार एकाधिकार (Trade Monopoly) को 20 वर्ष के लिए बढ़ाया और Governor-General को अधिक शक्तियाँ दीं।

1. कार्नवालिस को दिए गए "Override" अधिकार का विस्तार — सभी भावी गवर्नर-जनरलों और प्रेसीडेंसियों के गवर्नरों को भी यह अधिकार।

2. Governor-General को अधीनस्थ (Subordinate) प्रेसीडेंसियों — बॉम्बे और मद्रास — पर अधिक नियंत्रण (Control) और शक्ति।

3. कम्पनी का भारत में व्यापार एकाधिकार (Trade Monopoly) — अगले 20 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।

4. Commander-in-Chief Governor-General की परिषद का सदस्य नहीं होगा — जब तक विशेष रूप से नियुक्त न किया जाए।

5. नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के सदस्यों और उनके कर्मचारियों का वेतन — अब भारतीय राजस्व (Indian Revenue) से दिया जाएगा।

1.6 चार्टर एक्ट (Charter Act) 1813

Charter Act 1813

कम्पनी के भारतीय व्यापार एकाधिकार को समाप्त किया और ब्रिटिश क्राउन की संप्रभुता (Sovereignty) स्थापित की। NCERT के अनुसार इस अधिनियम ने शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव किए।

1. कम्पनी का भारत में व्यापार एकाधिकार (Trade Monopoly) समाप्त — भारतीय व्यापार (Indian Trade) सभी ब्रिटिश व्यापारियों के लिए खुला। चाय (Tea) व्यापार और चीन (China) के साथ व्यापार में एकाधिकार जारी।

2. भारत में कम्पनी के क्षेत्रों पर ब्रिटिश क्राउन (British Crown) की संप्रभुता (Sovereignty) की घोषणा।

3. ईसाई मिशनरियों (Christian Missionaries) को भारत में आने और प्रचार (Preaching) करने की अनुमति।

4. भारत में पश्चिमी शिक्षा (Western Education) के प्रसार (Spread) का प्रावधान।

5. स्थानीय सरकारों (Local Governments) को व्यक्तियों पर कर (Tax) लगाने और न भरने वालों को दंडित (Punish) करने का अधिकार।

1.7 चार्टर एक्ट (Charter Act) 1833

Charter Act 1833 ( केंद्रीकरण की चरम सीमा )

ब्रिटिश भारत में केंद्रीकरण (Centralisation) की अंतिम और सर्वोच्च सीमा। "बंगाल के गवर्नर-जनरल" को अब "भारत का गवर्नर-जनरल (Governor-General of India)" बनाया गया। कम्पनी का व्यापारिक स्वरूप पूरी तरह समाप्त हुआ।

NCERT के अनुसार यह अधिनियम ब्रिटिश भारत में केंद्रीकरण की प्रक्रिया का चरम बिंदु था। Lord Macaulay को विधि आयोग (Law Commission) का अध्यक्ष बनाया गया जिसने भारतीय दंड संहिता (IPC — Indian Penal Code) का मसौदा तैयार किया।

1. बंगाल के गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal) का पद बदलकर "भारत का गवर्नर-जनरल (Governor-General of India)" किया गया। उसे सभी नागरिक (Civil) और सैन्य (Military) शक्तियाँ दी गईं। इस प्रकार पहली बार पूरे ब्रिटिश भारत पर एक सरकार का अधिकार हुआ। प्रथम Governor-General of India: लॉर्ड विलियम बेंटिक (Lord William Bentick)।

2. बॉम्बे और मद्रास के गवर्नरों की विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers) समाप्त। केवल Governor-General of India को पूरे ब्रिटिश भारत के लिए कानून बनाने का अधिकार। इससे पहले के अधिनियमों के तहत बने कानून "Regulations" कहलाते थे; अब "Acts" कहलाएंगे।

3. कम्पनी की व्यापारिक गतिविधियाँ (Commercial Activities) पूरी तरह समाप्त। अब वह केवल एक प्रशासनिक (Administrative) संस्था रह गई। भारत में कम्पनी के क्षेत्र "His Majesty की ओर से न्यास (Trust) में" रखे गए।

4. भारतीय सिविल सेवा (Civil Services) के लिए खुली प्रतियोगिता (Open Competition) का प्रयास — लेकिन संचालक मंडल (Court of Directors) के विरोध के कारण यह प्रावधान निरस्त हो गया। (यह सफलतापूर्वक Charter Act 1853 में लागू होगा।)

NCERT : Lord Macaulay ने इसी दौर में "Minute on Education (1835)" दिया जिससे भारत में अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू हुई। विधि आयोग ने IPC (1860) का मसौदा तैयार किया जो आज भी प्रासंगिक है।

1.8 चार्टर एक्ट (Charter Act) 1853 — अंतिम Charter Act

Charter Act 1853 ( अंतिम Charter Act )

Charter Acts की श्रृंखला (1793–1853) का अंतिम अधिनियम। एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मील का पत्थर। पहली बार विधायी (Legislative) और कार्यकारी (Executive) कार्यों को अलग किया — भारत में संसदीय विधायी प्रक्रिया का बीज।

1. पहली बार Governor-General की परिषद (Council) के विधायी (Legislative) और कार्यकारी (Executive) कार्यों को अलग किया। 6 नए "विधान परिषद सदस्य (Legislative Councillors)" जोड़े गए। इस प्रकार एक अलग "भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद [Indian (Central) Legislative Council]" बनी जो ब्रिटिश संसद की तरह कार्य करती थी। यह पहली बार था जब विधान निर्माण (Legislation) को शासन की एक विशेष प्रक्रिया माना गया।

2. सिविल सेवाओं (Civil Services) में भर्ती के लिए खुली प्रतियोगिता (Open Competition) लागू। "अनुबंधित सिविल सेवा (Covenanted Civil Service)" भारतीयों के लिए भी खुली। मैकाले समिति (Macaulay Committee) 1854 में गठित।

3. कम्पनी का शासन अनिश्चित काल (Indefinite Period) के लिए बढ़ाया गया — पिछले Charter Acts की तरह कोई निश्चित अवधि नहीं। यह स्पष्ट संकेत था कि संसद जब चाहे कम्पनी का शासन समाप्त कर सकती है।

4. पहली बार विधान परिषद में स्थानीय (Local) प्रतिनिधित्व। 6 नए सदस्यों में से 4 स्थानीय प्रांतीय सरकारों — मद्रास, बॉम्बे, बंगाल और आगरा — द्वारा नियुक्त।

महत्वपूर्ण वर्गीकरण: Covenanted Civil Service (उच्च सेवाएँ) — कम्पनी के कानून से बनी। Uncovenanted Civil Service (निम्न सेवाएँ) — अन्य तरीके से। 1853 के बाद ICS (Indian Civil Service) में भारतीयों की भी भागीदारी संभव।

चार्टर एक्ट — एक नजर में (Charter Acts at a Glance)

चार्टर एक्ट (वर्ष)मुख्य विशेषताविशेष तथ्य
Charter Act 1793Trade Monopoly 20 वर्ष विस्तार; Override अधिकार सामान्यीकृतBoard of Control के सदस्यों का वेतन भारतीय राजस्व से
Charter Act 1813Trade Monopoly समाप्ति; ब्रिटिश क्राउन की SovereigntyMissionaries को भारत आने की अनुमति; पश्चिमी शिक्षा
Charter Act 1833GOI का पद; Centralisation चरम; Commercial activities समाप्तLord William Bentick — प्रथम Governor-General of India
Charter Act 1853Legislative-Executive अलगाव; Open Competition; अंतिम Charter ActMacaulay Committee 1854; स्थानीय प्रतिनिधित्व

भाग 2 — क्राउन शासन (Crown Rule) : 1858 से 1947

1857 के विद्रोह (Revolt) ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। इसके बाद ब्रिटिश क्राउन ने सीधे शासन अपने हाथ में लिया। इस काल में भारतीयों को धीरे-धीरे प्रशासन में भागीदारी (Participation) मिलने लगी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement) के दबाव में ब्रिटिश सरकार ने समय-समय पर संवैधानिक सुधार (Constitutional Reforms) किए।

2.1 भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act) 1858

GOI Act 1858 ( द्विशासन का अंत )

1857 के सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny / First War of Independence) के बाद पारित। इसे "भारत के सुशासन का अधिनियम (Act for the Good Government of India)" भी कहते हैं। इसने ईस्ट इंडिया कम्पनी को समाप्त कर भारत की सत्ता सीधे ब्रिटिश क्राउन को सौंप दी।

1. भारत का शासन अब "महारानी के नाम पर (In the Name of Her Majesty)" — ब्रिटिश क्राउन की सीधी जिम्मेदारी।

2. Governor-General of India का पदनाम (Designation) बदलकर "भारत का वायसराय (Viceroy of India)" किया गया। वह भारत में ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि (Direct Representative) होगा। प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning)।

3. नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) और संचालक मंडल (Court of Directors) — दोनों समाप्त। 1784 से चली आ रही द्विशासन प्रणाली (Double Government) का पूरी तरह अंत।

4. नया पद: "भारत सचिव (Secretary of State for India)" — ब्रिटिश कैबिनेट (British Cabinet) का सदस्य। वह ब्रिटिश संसद (Parliament) के प्रति उत्तरदायी (Responsible) होगा। उसे भारतीय प्रशासन पर पूर्ण अधिकार (Complete Authority) होगा।

5. Secretary of State की सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारत परिषद (India Council) गठित — यह एक सलाहकार निकाय (Advisory Body) था।

6. Secretary of State-in-Council को एक निगमित निकाय (Corporate Body) का दर्जा — भारत और इंग्लैंड में मुकदमा कर सकती और मुकदमा हो सकता था।

M.V. Pylee का मत: "इस अधिनियम ने भारत में शासन की व्यवस्था में कोई मौलिक परिवर्तन नहीं किया, बल्कि केवल उस तंत्र (Machinery) को बेहतर बनाया जिसके द्वारा भारत सरकार को इंग्लैंड से नियंत्रित किया जाता था।"

2.2 भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act) 1861

ICA 1861

1857 के बाद ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को शासन में शामिल करने की नीति अपनाई। 1861, 1892 और 1909 — तीन क्रमिक अधिनियम इसी नीति का परिणाम थे। 1861 का अधिनियम प्रतिनिधि संस्थाओं (Representative Institutions) की शुरुआत का प्रतीक है।

1. प्रतिनिधि संस्थाओं की शुरुआत — Viceroy कुछ भारतीयों को गैर-सरकारी सदस्य (Non-Official Members) के रूप में विधान परिषद में नामांकित (Nominate) करेगा। 1862 में Lord Canning ने तीन भारतीयों को नामांकित किया — बनारस के राजा, पटियाला के महाराजा और सर दिनकर राव।

2. विकेंद्रीकरण (Decentralisation) की शुरुआत — बॉम्बे और मद्रास प्रेसीडेंसियों को वापस विधायी शक्तियाँ (Legislative Powers) दी गईं। यह 1773 से चली आ रही केंद्रीकरण (Centralisation) की प्रवृत्ति को पलटना था। इसी नीति के परिणामस्वरूप 1937 में प्रांतों को लगभग पूर्ण आंतरिक स्वायत्तता (Internal Autonomy) मिली।

3. बंगाल, उत्तर-पश्चिमी प्रांत (NWP) और पंजाब में नई विधान परिषदें — क्रमशः 1862, 1886 और 1897 में स्थापित।

4. "विभाग प्रणाली (Portfolio System)" को आधिकारिक मान्यता — जो Lord Canning ने 1859 में शुरू की थी। इसके तहत Viceroy की परिषद के प्रत्येक सदस्य को एक या अधिक विभागों (Departments) का प्रभारी बनाया गया।

5. Viceroy को आपातकाल (Emergency) में विधान परिषद (Legislative Council) की सहमति के बिना अध्यादेश (Ordinance) जारी करने का अधिकार। अध्यादेश की अधिकतम वैधता (Maximum Life): 6 महीने।

2.3 भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act) 1892

ICA 1892

सीमित और अप्रत्यक्ष चुनाव (Indirect Election) का बीज। "चुनाव (Election)" शब्द इस अधिनियम में नहीं था — इसे "अनुशंसा पर नामांकन (Nomination on Recommendation)" कहा गया।

1. केंद्र और प्रांत की विधान परिषदों में गैर-सरकारी (Non-Official) सदस्यों की संख्या बढ़ाई — लेकिन सरकारी बहुमत (Official Majority) बनाए रखा।

2. विधान परिषदों (Legislative Councils) की शक्तियाँ बढ़ाई — बजट (Budget) पर चर्चा करने और कार्यपालिका (Executive) से प्रश्न (Questions) पूछने का अधिकार।

3. कुछ गैर-सरकारी सदस्यों का नामांकन — (क) केंद्रीय परिषद के लिए Viceroy द्वारा प्रांतीय विधान परिषदों और बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स की अनुशंसा पर; (ख) प्रांतीय परिषदों के लिए Governors द्वारा जिला बोर्ड, नगर पालिका, विश्वविद्यालय, व्यापार संघ, जमींदार और चेंबर की अनुशंसा पर।

विशेष नोट: इस अधिनियम ने सीमित और अप्रत्यक्ष तरीके से चुनाव की अवधारणा शुरू की — लेकिन "Election" शब्द कानून में नहीं था। यह केवल "अनुशंसा पर नामांकन (Nomination on Recommendation)" था।

2.4 भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act) 1909 — मोर्ले-मिंटो सुधार

ICA 1909 ( मोर्ले-मिंटो सुधार (Morley-Minto Reforms) )

Lord Morley — तत्कालीन Secretary of State for India; Lord Minto — तत्कालीन Viceroy। NCERT के अनुसार इस अधिनियम ने "सांप्रदायिकता को कानूनी मान्यता (Legalised Communalism)" दी।

1. विधान परिषदों का आकार बड़ा — केंद्रीय विधान परिषद (Central Legislative Council) में सदस्य: 16 से बढ़ाकर 60 किए। प्रांतीय परिषदों में भी वृद्धि (संख्या एक समान नहीं थी)।

2. केंद्रीय परिषद में सरकारी बहुमत (Official Majority) बनाए रखा — लेकिन प्रांतीय परिषदों में गैर-सरकारी बहुमत (Non-Official Majority) की अनुमति।

3. विधान परिषदों की विवेचनात्मक शक्तियाँ (Deliberative Powers) बढ़ाईं — सदस्य पूरक प्रश्न (Supplementary Questions) पूछ सकते थे और बजट (Budget) पर प्रस्ताव (Resolution) पेश कर सकते थे।

4. पहली बार भारतीयों को Viceroy और Governors की कार्यकारी परिषदों (Executive Councils) में शामिल करने की व्यवस्था। भारत का प्रथम कार्यकारी परिषद सदस्य: सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा (Satyendra Prasad Sinha) — Law Member।

5. मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) — मुस्लिम सदस्यों का चुनाव केवल मुस्लिम मतदाता करेंगे। इसे "सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (Communal Representation)" कहा गया। Lord Minto — "सांप्रदायिक निर्वाचन के जनक (Father of Communal Electorate)"।

6. प्रेसीडेंसी नगर पालिकाओं (Presidency Corporations), वाणिज्य मंडलों (Chambers of Commerce), विश्वविद्यालयों (Universities) और जमींदारों (Zamindars) के लिए अलग प्रतिनिधित्व (Separate Representation)।

NCERT दृष्टिकोण: मोर्ले-मिंटो सुधारों ने सांप्रदायिक निर्वाचन (Communal Electorate) को कानूनी आधार देकर हिंदू-मुस्लिम एकता को कमजोर किया। कांग्रेस और लीग के बीच 1916 का "लखनऊ समझौता (Lucknow Pact)" इसी की प्रतिक्रिया था जिसमें दोनों ने मिलकर स्वशासन की माँग की।

भारतीय परिषद अधिनियम — तुलनात्मक सारांश (Comparative Summary)

विशेषताICA 1861ICA 1892ICA 1909
अधिनियम का उद्देश्यविकेंद्रीकरण; प्रतिनिधित्व शुरूअप्रत्यक्ष चुनाव; शक्ति वृद्धिसांप्रदायिक प्रतिनिधित्व; आकार वृद्धि
केंद्रीय परिषद में सदस्यवृद्धि (संख्या अनिश्चित)और वृद्धि; Official Majority16 → 60
विशेष प्रावधानPortfolio System; OrdinanceBudget पर चर्चा; प्रश्न का अधिकारCommunal Electorate; Exec. Council में भारतीय
सरकारी/गैर-सरकारीOfficial Majority — दोनों मेंOfficial Majority — दोनों मेंकेंद्र: Official; प्रांत: Non-official Majority

2.5 भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act) 1919

GOI Act 1919 ( मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (Montagu-Chelmsford Reforms) )

Montagu — तत्कालीन Secretary of State for India; Lord Chelmsford — तत्कालीन Viceroy। 20 अगस्त 1917 को ब्रिटिश सरकार ने घोषणा की — भारत में "उत्तरदायी शासन (Responsible Government)" की क्रमिक स्थापना का लक्ष्य। यह घोषणा "Montagu Declaration" कहलाती है। अधिनियम 1921 में लागू हुआ।

1. सभी प्रशासनिक विषयों (Administrative Subjects) को दो श्रेणियों में बाँटा — केंद्रीय विषय (Central Subjects) और प्रांतीय विषय (Provincial Subjects)। "Devolution Rules" के तहत यह वर्गीकरण किया गया। केंद्र और प्रांत अपने-अपने विषयों पर कानून बना सकते थे। फिर भी शासन ढाँचा (Government Structure) केंद्रीकृत और एकात्मक (Centralised and Unitary) बना रहा।

2. प्रांतीय विषयों को दो भागों में बाँटा — हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects) और आरक्षित विषय (Reserved Subjects)। यह द्विशासन (Dyarchy) प्रणाली की शुरुआत थी।

3. देश में पहली बार द्विसदनीय विधायिका (Bicameralism) और प्रत्यक्ष चुनाव (Direct Elections)। भारतीय विधान परिषद (Indian Legislative Council) को बदलकर द्विसदनीय विधायिका — उच्च सदन: राज्य परिषद (Council of State) और निचला सदन: विधान सभा (Legislative Assembly)। दोनों सदनों के अधिकांश सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव (Direct Election) से।

4. Viceroy की कार्यकारी परिषद (Executive Council) के 6 सदस्यों (Commander-in-Chief को छोड़कर) में से 3 भारतीय अनिवार्य।

5. सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (Communal Representation) का विस्तार — सिखों (Sikhs), भारतीय ईसाइयों (Indian Christians), एंग्लो-इंडियनों और यूरोपियों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorates)।

6. सीमित मताधिकार (Franchise) — संपत्ति (Property), कर (Tax) या अन्य योग्यताओं के आधार पर।

7. इंग्लैंड में "भारत उच्चायुक्त (High Commissioner for India)" का नया पद — कुछ कार्य Secretary of State से स्थानांतरित।

8. लोक सेवा आयोग (Public Service Commission) की स्थापना का प्रावधान — 1926 में Lee Commission की सिफारिश पर केंद्रीय लोक सेवा आयोग (Central Public Service Commission) स्थापित।

9. पहली बार प्रांतीय बजट (Provincial Budget) को केंद्रीय बजट (Central Budget) से अलग किया।

10. 10 वर्ष बाद इस अधिनियम की समीक्षा के लिए एक वैधानिक आयोग (Statutory Commission) नियुक्त करने का प्रावधान — इसी से Simon Commission (1927) बना।

11. नरेंद्र मंडल (Narendra Mandal / Chamber of Princes) की स्थापना का प्रस्ताव — 1921 में स्थापित। इसमें 120 सदस्य: 108 रियासतों के राजकुमार और 12 अन्य राज्यों के प्रतिनिधि। Viceroy इसका प्रमुख (Head) था।

द्विशासन प्रणाली (Dyarchy) — GOI Act 1919 का केंद्रीय सिद्धांत

Dyarchy शब्द ग्रीक (Greek) शब्द "di-arche" से आया है जिसका अर्थ है "दोहरा शासन (Double Rule)" — Lionel Curtis ने यह विचार दिया।

हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects)
  • लोक स्वास्थ्य (Public Health)
  • स्थानीय स्व-शासन (Local Self-Government)
  • कृषि (Agriculture)
  • शिक्षा (Education)
  • सार्वजनिक कार्य — आंशिक
आरक्षित विषय (Reserved Subjects)
  • पुलिस (Police)
  • न्याय प्रशासन (Administration of Justice)
  • भू-राजस्व (Land Revenue)
  • वित्त (Finance)
  • जेलें (Prisons)

हस्तांतरित विषयों का प्रशासन: Governor + मंत्री (Ministers) — विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी। आरक्षित विषयों का प्रशासन: Governor + कार्यकारी परिषद (Executive Council) — विधान परिषद के प्रति उत्तरदायी नहीं। यह प्रयोग काफी हद तक असफल (Largely Unsuccessful) रहा।

2.6 साइमन कमीशन (Simon Commission) 1927

नवम्बर 1927 में — निर्धारित समय से 2 वर्ष पूर्व — ब्रिटिश सरकार ने Sir John Simon की अध्यक्षता में 7 सदस्यीय वैधानिक आयोग (Statutory Commission) की घोषणा की। इस आयोग को नए संविधान पर रिपोर्ट देनी थी।

विषयविवरण
बहिष्कार का कारण (Reason for Boycott)आयोग के सभी 7 सदस्य ब्रिटिश थे — एक भी भारतीय नहीं। इसलिए सभी दलों ने एकमत होकर बहिष्कार (Boycott) किया। जहाँ-जहाँ आयोग गया — "Simon Go Back" के नारे लगे।
रिपोर्ट1930 में प्रस्तुत की गई। सिफारिशें: Dyarchy समाप्ति, प्रांतों में उत्तरदायी शासन (Responsible Government), ब्रिटिश भारत और रियासतों का Federation, Communal Electorate जारी रखना।
गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conferences)ब्रिटिश सरकार ने तीन गोलमेज सम्मेलन बुलाए: 1st — 1930 (Congress ने भाग नहीं लिया), 2nd — 1931 (Gandhi ने भाग लिया), 3rd — 1932 (Congress ने भाग नहीं लिया)।
नेहरू रिपोर्ट (Nehru Report) 1928Simon Commission के विरोध में, All-Party Conference ने Motilal Nehru की अध्यक्षता में रिपोर्ट तैयार की। यह भारतीयों द्वारा बना पहला संवैधानिक प्रारूप (Draft) था। माँग: Dominion Status और मूल अधिकार।
White Paperगोलमेज सम्मेलनों के आधार पर "संवैधानिक सुधारों पर श्वेत पत्र (White Paper on Constitutional Reforms)" तैयार। इसे British Parliament की Joint Select Committee को भेजा। इसी की सिफारिशें GOI Act 1935 में समाहित हुईं।

2.7 सांप्रदायिक अवार्ड (Communal Award) 1932 एवं पूना पैक्ट (Poona Pact)

अगस्त 1932 में ब्रिटिश Prime Minister रामसे मैकडोनाल्ड (Ramsay MacDonald) ने अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व की एक योजना की घोषणा की — इसे "सांप्रदायिक अवार्ड (Communal Award)" कहा गया।

विषयविवरण
मुख्य प्रावधानमुस्लिम, सिख, भारतीय ईसाई, एंग्लो-इंडियन और यूरोपियों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल (Separate Electorate) जारी रखा। नया: दलित वर्गों (Depressed Classes / Scheduled Castes) के लिए भी पृथक निर्वाचन मंडल।
Gandhi का विरोधGandhiji दलित वर्गों को हिंदू समाज से अलग करने के विरुद्ध थे। उन्होंने पूना की यरवदा जेल (Yerawada Jail, Poona) में आमरण अनशन (Fast unto Death) शुरू किया।
पूना पैक्ट (Poona Pact)Gandhi और Dr. B.R. Ambedkar (दलित वर्गों के नेता) के बीच समझौता। परिणाम: हिंदू संयुक्त निर्वाचन मंडल (Hindu Joint Electorate) बनाए रखा गया — लेकिन दलित वर्गों के लिए आरक्षित सीटें (Reserved Seats) बढ़ाई गईं।
ब्रिटिश सरकार की स्वीकृतिपूना पैक्ट को स्वीकार किया। Communal Award में दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान हटाया। GOI Act 1935 में पूना पैक्ट के प्रावधान शामिल किए।

2.8 भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act) 1935

GOI Act 1935 ( भारतीय संविधान का सबसे बड़ा स्रोत )

इसे भारत में "पूर्णतः उत्तरदायी शासन (Completely Responsible Government)" की दिशा में दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव (Milestone) माना जाता है। यह अत्यंत विस्तृत दस्तावेज था — 321 धाराएँ (Sections) और 10 अनुसूचियाँ (Schedules)। भारतीय संविधान के लगभग 250+ अनुच्छेद इसी से प्रेरित हैं।

1. अखिल भारतीय संघ (All-India Federation) का प्रावधान — प्रांत (Provinces) और देशी रियासतें (Princely States) इकाइयाँ होंगी। शक्तियों का तीन सूचियों में विभाजन: संघीय सूची (Federal List — 59 विषय), प्रांतीय सूची (Provincial List — 54 विषय) और समवर्ती सूची (Concurrent List — 36 विषय)। अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers): Viceroy को। लेकिन रियासतें (Princely States) शामिल नहीं हुईं — Federation कभी अस्तित्व में नहीं आया।

2. प्रांतों में द्विशासन (Dyarchy) समाप्त और प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy) स्थापित। प्रांत अपने निर्धारित क्षेत्रों में स्वायत्त प्रशासनिक इकाइयाँ बनीं। Governor — मंत्रियों की सलाह पर कार्य करेगा जो विधायिका के प्रति उत्तरदायी होंगे। यह 1937 में लागू हुआ और 1939 में बंद।

3. केंद्र में द्विशासन (Dyarchy) लागू — केंद्रीय विषयों को आरक्षित (Reserved) और हस्तांतरित (Transferred) में बाँटा। लेकिन यह प्रावधान कभी लागू नहीं हुआ।

4. 6 प्रांतों में द्विसदनीय विधायिका (Bicameralism) — बंगाल, बॉम्बे, मद्रास, बिहार, असम और यूनाइटेड प्रांत। इनमें विधान परिषद (Upper House) और विधान सभा (Lower House) — लेकिन कई प्रतिबंध भी।

5. दलित वर्गों (Depressed Classes / Scheduled Castes) के लिए आरक्षित सीटें (Reserved General Seats)। महिलाओं (Women) और श्रमिकों (Labour) के लिए विशेष प्रतिनिधित्व का विस्तार।

6. 1858 में स्थापित भारत परिषद (Council of India) समाप्त। Secretary of State को सलाहकारों (Advisors) की एक टीम दी गई।

7. मताधिकार (Franchise) का विस्तार — लगभग 14% जनसंख्या को मतदान का अधिकार।

8. भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India — RBI) की स्थापना का प्रावधान — मुद्रा (Currency) और साख (Credit) के नियंत्रण के लिए।

9. संघीय लोक सेवा आयोग (Federal Public Service Commission) के साथ-साथ प्रांतीय (Provincial) और संयुक्त (Joint) लोक सेवा आयोगों का प्रावधान।

10. संघीय न्यायालय (Federal Court) का प्रावधान — 1937 में स्थापित।

11. बर्मा (Burma / Myanmar) को भारत से अलग किया गया।

12. दो नए प्रांत: उड़ीसा (Orissa) और सिंध (Sind) बनाए।

13. अल्पसंख्यकों (Minorities) के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षा उपाय (Safeguards)।

14. संघीय रेलवे प्राधिकरण (Federal Railway Authority) का प्रावधान।

15. भारत के महालेखापरीक्षक (Auditor-General of India) की नियुक्ति का प्रावधान।

NCERT/RBSE जोड़ें: 1937 के चुनावों में Congress ने 11 में से 6 प्रांतों में बहुमत जीता। Congress ने 1937–39 तक सत्ता सँभाली। 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध (World War II) की घोषणा के बाद Congress ने इस्तीफा दे दिया। राजस्थान की रियासतें (Rajputana States) GOI Act 1935 के तहत Federation में शामिल नहीं हुईं।

GOI Act 1935 बनाम भारतीय संविधान (Comparison)

GOI Act 1935 की विशेषताभारतीय संविधान में रूप
संघीय ढाँचा (Federal Structure)अनुच्छेद 1 — भारत राज्यों का संघ
तीन सूचियाँ (Three Lists)अनुसूची 7 — संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची
राज्यपाल (Governor) का पदअनुच्छेद 153–167 — राज्यपाल की भूमिका
संघीय न्यायालय (Federal Court)अनुच्छेद 124 — सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
लोक सेवा आयोग (PSC)अनुच्छेद 315 — UPSC और State PSC
आपातकालीन प्रावधान (Emergency)अनुच्छेद 352, 356, 360 — तीन प्रकार के आपातकाल
Bicameral Legislatureअनुच्छेद 79 — Parliament (Lok Sabha + Rajya Sabha)
Residuary Powers को केंद्रअनुच्छेद 248 — Parliament को Residuary Powers

2.9 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम (Indian Independence Act) 1947

20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश Prime Minister क्लेमेंट एटली (Clement Atlee) ने घोषणा की कि ब्रिटिश शासन 30 जून 1948 तक समाप्त होगा। इसके बाद मुस्लिम लीग (Muslim League) के विभाजन (Partition) की माँग से आंदोलन तेज़ हुआ। 3 जून 1947 को Lord Mountbatten ने विभाजन योजना (Mountbatten Plan / Partition Plan) प्रस्तुत की। Congress और मुस्लिम लीग ने इसे स्वीकार किया। 4 जुलाई 1947 को Indian Independence Bill ब्रिटिश संसद में पेश हुआ, 18 जुलाई को Royal Assent मिला।

1. 15 अगस्त 1947 से भारत में ब्रिटिश शासन (British Rule) समाप्त — भारत स्वतंत्र राज्य (Independent State)।

2. भारत का विभाजन (Partition) — दो स्वतंत्र उपनिवेश (Independent Dominions): भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan)। दोनों को ब्रिटिश राष्ट्रमंडल (British Commonwealth) से अलग होने का अधिकार।

3. Viceroy का पद समाप्त। प्रत्येक Dominion के लिए Governor-General — ब्रिटिश King की सलाह पर Dominion Cabinet द्वारा नियुक्त। ब्रिटिश सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं।

4. दोनों Dominions की संविधान सभाओं (Constituent Assemblies) को अपना संविधान बनाने और किसी भी ब्रिटिश Parliament Act — यहाँ तक कि Independence Act — को रद्द करने का अधिकार।

5. दोनों Dominions की संविधान सभाएँ नए संविधान बनने तक अपने-अपने क्षेत्र के लिए कानून बना सकती हैं। 15 अगस्त 1947 के बाद ब्रिटिश Parliament का कोई Act किसी Dominion पर लागू नहीं होगा।

6. Secretary of State for India का पद समाप्त। उनके कार्य "Secretary of State for Commonwealth Affairs" को स्थानांतरित।

7. भारतीय रियासतों (Indian Princely States) और जनजातीय क्षेत्रों (Tribal Areas) पर ब्रिटिश Paramountcy 15 अगस्त 1947 से समाप्त।

8. भारतीय रियासतों को स्वतंत्रता — भारत (India) या पाकिस्तान (Pakistan) के Dominion में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का अधिकार।

9. जब तक नए संविधान न बनें, दोनों Dominions का शासन GOI Act 1935 के अनुसार — लेकिन Dominions को इसमें संशोधन का अधिकार।

10. ब्रिटिश Monarch के Bills पर Veto या उन्हें Reserve करने के अधिकार समाप्त। Governor-General को किसी भी Bill पर His Majesty के नाम पर सहमति (Assent) देने की पूर्ण शक्ति।

11. Governor-General और प्रांतीय Governors — संवैधानिक प्रमुख (Constitutional / Nominal Heads)। सभी मामलों में मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की सलाह पर कार्य करना अनिवार्य।

12. इंग्लैंड के King के शाही पदवी (Royal Titles) से "भारत के सम्राट (Emperor of India)" की उपाधि हटाई।

13. Secretary of State द्वारा सिविल सेवाओं (Civil Services) में नियुक्ति और पदों का आरक्षण बंद। 15 अगस्त 1947 से पहले नियुक्त सिविल कर्मचारी — अपने सभी लाभ (Benefits) जारी रखेंगे।

विशेष तथ्य: Lord Mountbatten — स्वतंत्र भारत के प्रथम Governor-General। उन्होंने Jawaharlal Nehru को स्वतंत्र भारत का प्रथम Prime Minister के रूप में शपथ (Oath) दिलाई। 1946 में बनी भारत की Constituent Assembly अब भारतीय Dominion की संसद (Parliament) बन गई।

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2अंतरिम सरकार (Interim Government) 1946

अंतरिम सरकार के सदस्य Viceroy की कार्यकारी परिषद (Viceroy's Executive Council) के सदस्य थे। Viceroy परिषद का प्रमुख रहा, लेकिन Jawaharlal Nehru को "उप-राष्ट्रपति (Vice-President of the Council)" का दर्जा दिया गया।

क्र.सदस्य (Member)विभाग (Portfolio)
1जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)उप-राष्ट्रपति; विदेश मामले और राष्ट्रमंडल संबंध
2सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel)गृह, सूचना एवं प्रसारण
3डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad)खाद्य एवं कृषि
4डॉ. जॉन मथाई (Dr. John Mathai)उद्योग एवं आपूर्ति
5जगजीवन राम (Jagjivan Ram)श्रम
6सरदार बलदेव सिंह (Sardar Baldev Singh)रक्षा
7C.H. भाभा (C.H. Bhabha)कार्य, खान और विद्युत
8लियाकत अली खान (Liaquat Ali Khan)वित्त
9अब्दुर रब निश्तर (Abdur Rab Nishtar)डाक एवं वायु
10आसफ अली (Asaf Ali)रेलवे एवं परिवहन
11C. राजगोपालाचारी (C. Rajagopalachari)शिक्षा एवं कला
12I.I. चुंदरीगर (I.I. Chundrigar)वाणिज्य
13गज़नफर अली खान (Ghaznafar Ali Khan)स्वास्थ्य
14जोगेंद्र नाथ मंडल (Jogendra Nath Mandal)कानून

3स्वतंत्र भारत का प्रथम मंत्रिमंडल (First Cabinet of Independent India) 1947

क्र.सदस्य (Member)विभाग (Portfolio)
1जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)Prime Minister; विदेश मामले; राष्ट्रमंडल संबंध; वैज्ञानिक अनुसंधान
2सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel)गृह, सूचना एवं प्रसारण; रियासतें
3डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (Dr. Rajendra Prasad)खाद्य एवं कृषि
4मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (Maulana Abul Kalam Azad)शिक्षा
5डॉ. जॉन मथाई (Dr. John Mathai)रेलवे एवं परिवहन
6R.K. षणमुगम चेट्टी (R.K. Shanmugham Chetty)वित्त
7डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (Dr. B.R. Ambedkar)कानून
8जगजीवन राम (Jagjivan Ram)श्रम
9सरदार बलदेव सिंह (Sardar Baldev Singh)रक्षा
10राज कुमारी अमृत कौर (Raj Kumari Amrit Kaur)स्वास्थ्य
11C.H. भाभा (C.H. Bhabha)वाणिज्य
12रफी अहमद किदवई (Rafi Ahmed Kidwai)संचार
13डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyama Prasad Mukherjee)उद्योग एवं आपूर्ति
14V.N. गाडगिल (V.N. Gadgil)कार्य, खान और विद्युत
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4प्रमुख पदाधिकारी — कालक्रम (Key Office-Holders in Order)

पद (Designation)प्रथम धारक (First Holder)अधिनियम / आधार
बंगाल के गवर्नर-जनरल (1st Governor-General of Bengal)लॉर्ड वॉरेन हेस्टिंग्स (Warren Hastings)Regulating Act 1773
भारत के गवर्नर-जनरल (1st Governor-General of India)लॉर्ड विलियम बेंटिक (Lord William Bentick)Charter Act 1833
भारत के वायसराय (1st Viceroy of India)लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning)GOI Act 1858
Viceroy की Executive Council में प्रथम भारतीयसत्येंद्र प्रसाद सिन्हा — Law MemberICA 1909
स्वतंत्र भारत के प्रथम Governor-Generalलॉर्ड माउंटबेटन (Lord Mountbatten)Independence Act 1947
भारत के प्रथम Prime Ministerजवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)Independence Act 1947
भारत के प्रथम भारतीय Governor-GeneralC. राजगोपालाचारी — जून 1948 सेIndependence Act 1947

5कालरेखा (Timeline) : 1600 से 1947

वर्ष / घटनाविवरण (Description)
1600Queen Elizabeth I ने East India Company को भारतीय व्यापार का Charter दिया
1608ईस्ट इंडिया कम्पनी (East India Company) भारत आई — व्यापारी के रूप में
1764बक्सर का युद्ध (Battle of Buxar) — मुगल सम्राट शाह आलम की पराजय
1765कम्पनी को बंगाल, बिहार, उड़ीसा की दीवानी (Diwani) — प्रादेशिक शक्ति बनी
1773रेगुलेटिंग एक्ट — प्रथम नियंत्रण अधिनियम; Warren Hastings — 1st Gov-Gen of Bengal
1774कलकत्ता में Supreme Court की स्थापना
1781अमेंडिंग एक्ट (Act of Settlement) — Jurisdiction की समस्याएँ सुलझाईं
1784Pitt's India Act — Double Government; Board of Control की स्थापना
1786Act of 1786 — Lord Cornwallis को Override और Commander-in-Chief का अधिकार
1793Charter Act — Trade Monopoly 20 वर्ष विस्तार
1813Charter Act — Trade Monopoly समाप्ति; पश्चिमी शिक्षा का प्रावधान
1833Charter Act — GOI का पद; केंद्रीकरण चरम; Lord Bentick 1st Gov-Gen of India
1853Charter Act (अंतिम) — Legislative-Executive अलगाव; Open Competition
1857सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny / First War of Independence)
1858GOI Act — Crown का सीधा शासन; Lord Canning 1st Viceroy; Sec. of State
1861Indian Councils Act — Decentralisation; Portfolio System; Ordinance
1892Indian Councils Act — अप्रत्यक्ष चुनाव; Budget पर चर्चा
1909Indian Councils Act (Morley-Minto) — Communal Electorate; 16→60 सदस्य
1916लखनऊ पैक्ट (Lucknow Pact) — Congress और Muslim League का संयुक्त मोर्चा
1917Montagu Declaration — Responsible Government का वादा
1919GOI Act (Montagu-Chelmsford) — Dyarchy; Direct Elections; Bicameralism
1927Simon Commission गठित — सभी 7 सदस्य ब्रिटिश; बहिष्कार "Simon Go Back"
1928नेहरू रिपोर्ट (Nehru Report) — भारतीयों का प्रथम संवैधानिक प्रारूप
1930Simon Commission की रिपोर्ट; 1st Round Table Conference
19312nd Round Table Conference — Gandhi ने भाग लिया
1932Communal Award — MacDonald; Gandhi का अनशन; पूना पैक्ट
1935GOI Act — Federation, Provincial Autonomy, Federal Court, RBI; 321 Sections
1937GOI Act 1935 लागू — Congress ने 6 प्रांतों में सत्ता सँभाली
1939Congress के मंत्रिमंडलों ने इस्तीफा — WW II का विरोध
1946Cabinet Mission Plan; Constituent Assembly; Interim Government
15 Aug 1947भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम लागू — India और Pakistan स्वतंत्र
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