▌ भूमिका (Introduction)
आधुनिक भारत के इतिहास की शुरुआत 15वीं शताब्दी के अंत में यूरोपीयों के भारत आगमन से मानी जाती है। व्यापारिक उद्देश्यों से प्रेरित होकर विभिन्न यूरोपीय शक्तियाँ भारत पहुँचीं और धीरे-धीरे यहाँ अपना प्रभाव जमाती गईं। इन शक्तियों में पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश और फ्रांसीसी प्रमुख थे।
यूरोपीय शक्तियों के भारत आगमन का कालक्रम:
| यूरोपीय शक्ति | प्रथम आगमन वर्ष | प्रथम स्थान | कंपनी की स्थापना |
|---|---|---|---|
| पुर्तगाली | 1498 ई. | कालीकट (केरल) | — |
| डच | 1602 ई. | मसुलीपट्टनम, आंध्र प्रदेश | VOC – 1602 ई. |
| अंग्रेज | 1608 ई. | सूरत, गुजरात | EIC – 1600 ई. |
| डेनिश | 1620 ई. | ट्रंकेबार, तमिलनाडु | 1616 ई. |
| फ्रांसीसी | 1664 ई. | सूरत | 1664 ई. |
EXAM TIP
परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है — सही क्रम: पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी। पुर्तगाल सबसे पहले आए और अंग्रेज सबसे अंत में सफल हुए।
▌ पुर्तगाली (The Portuguese)
वास्को-द-गामा का आगमन
महत्वपूर्ण: 1500 ई. में पेड्रो अल्वारेज़ काब्राल ने कालीकट में पहली पुर्तगाली व्यापारिक कोठी स्थापित की।
पुर्तगाली गवर्नर एवं उनके योगदान
| गवर्नर | कार्यकाल | प्रमुख कार्य |
|---|---|---|
| फ्रांसिस्को-द-अल्मेडा | 1505–09 ई. | नीली जल नीति (Blue Water Policy/Cartaze System) — समुद्री व्यापार पर नियंत्रण; 1509 ई. में दीव का युद्ध जीता |
| अल्फांसो-द-अल्बुकर्क | 1509–15 ई. | पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक; 1510 ई. में गोवा विजय; जहाजों की परमिट प्रणाली लागू की |
| नीनो-द-कुन्हा | 1529–38 ई. | मुख्यालय कोचीन से गोवा स्थानांतरित; 1534 ई. में बेसीन द्वीप प्राप्त किया |
| मार्टिन अल्फांसो | 1542–45 ई. | सेंट फ्रांसिस जेवियर को भारत लाया (ईसाई धर्म प्रचार) |
अल्फांसो-द-अल्बुकर्क के बारे में विशेष
नीली जल नीति (Blue Water Policy)
पुर्तगाली शक्ति का पतन
अवशेष: पुर्तगाली गोवा, दमन, दीव और दादरा-नगर हवेली में 1961 तक रहे। स्वतंत्र भारत ने 1961 में 'ऑपरेशन विजय' द्वारा इन्हें भारत में मिलाया।
▌ डच / हॉलैंडवासी (The Dutch)
▶ मसुलीपट्टनम (1605) — पहली कोठी ▶ पुलिकट (1610) — मुख्य केंद्र ▶ सूरत (1616) ▶ विमलापट्टनम (1641) ▶ नागपट्टनम (1658) — दूसरा प्रमुख केंद्र ▶ चिनसुराह / चंदेरनागोर क्षेत्र
डच शक्ति का पतन — कोलाचेल का युद्ध (1741)
EXAM TIP
कोलाचेल का युद्ध (1741) = डचों का पतन | यह एकमात्र युद्ध था जिसमें किसी भारतीय राजा ने किसी यूरोपीय शक्ति को निर्णायक रूप से पराजित किया।
▌ अंग्रेज (The English / British)
ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
भारत में अंग्रेजी व्यापार का विस्तार
| वर्ष | घटना / महत्व |
|---|---|
| 1608 ई. | कैप्टन हॉकिंस सूरत पहुँचा — जहांगीर से मिलने का प्रयास किया |
| 1612 ई. | स्वाली का युद्ध — अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को हराया; जहांगीर ने सूरत में कोठी की अनुमति दी |
| 1613 ई. | सूरत में पहली स्थायी अंग्रेजी कोठी स्थापित |
| 1615-16 ई. | सर थॉमस रो जहांगीर के दरबार में — व्यापारिक विशेषाधिकार प्राप्त किए |
| 1651 ई. | हुगली नदी के तट पर बंगाल में पहली अंग्रेजी कोठी |
| 1661 ई. | पुर्तगाल ने दहेज में बम्बई अंग्रेजों को दिया (राजा चार्ल्स II की शादी पर) |
| 1690 ई. | जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता की स्थापना की |
| 1698 ई. | कंपनी ने तीन गाँवों की जमींदारी खरीदी — कलकत्ता, सुतानुती, गोविंदपुर |
| 1715 ई. | जॉन सर्मन मिशन — मुगल बादशाह फर्रुखसियर से 'मैग्ना कार्टा' फरमान प्राप्त किए |
फर्रुखसियर का फरमान (1717): इसे प्रायः कंपनी का 'मैग्ना कार्टा' कहा जाता है क्योंकि इसने कंपनी को अभूतपूर्व व्यापारिक विशेषाधिकार प्रदान किए। इससे बंगाल में आयात-निर्यात शुल्क से मुक्ति, अतिरिक्त भूमि किराए पर लेने का अधिकार और बम्बई में ढाले गए सिक्कों को मुगल साम्राज्य में मान्यता मिली।
अंग्रेजों की सफलता के कारण
▌ डेनिश / डेन (The Danes)
EXAM TIP
डेन = धर्म प्रचारक | डेनिश व्यापार में असफल रहे क्योंकि उनका मुख्य ध्यान व्यापार नहीं बल्कि धर्म प्रचार था।
▌ फ्रांसीसी (The French)
फ्रांसीसी कंपनी और प्रारंभिक विस्तार
डूप्ले का काल — फ्रांसीसी शक्ति का चरमोत्कर्ष
▌ कर्नाटक के युद्ध (Carnatic Wars)
अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच भारत में वर्चस्व के लिए तीन प्रमुख युद्ध हुए, जिन्हें 'कर्नाटक के युद्ध' कहा जाता है। इन युद्धों का परिणाम यह निकला कि फ्रांसीसी भारत से लगभग बाहर हो गए और अंग्रेजों का एकछत्र राज स्थापित हुआ।
प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746–1748 ई.)
द्वितीय कर्नाटक युद्ध (1749–1754 ई.)
तृतीय कर्नाटक युद्ध (1758–1763 ई.)
EXAM TIP
वांडीवाश का युद्ध (1760) = भारत में फ्रांसीसी शक्ति का अंत | इसके बाद भारत में केवल अंग्रेज ही एकमात्र यूरोपीय शक्ति बचे।
तीनों कर्नाटक युद्धों की तुलना:
| युद्ध | वर्ष | कारण | परिणाम / संधि |
|---|---|---|---|
| प्रथम | 1746–48 | ऑस्ट्रियन उत्तराधिकार युद्ध | आए-ला-शापेल संधि; मद्रास अंग्रेजों को वापस |
| द्वितीय | 1749–54 | कर्नाटक उत्तराधिकार विवाद | पांडिचेरी संधि; डूप्ले वापस बुलाया गया |
| तृतीय | 1758–63 | सप्तवर्षीय युद्ध | पेरिस संधि; फ्रांसीसी शक्ति समाप्त |
▶ फ्रांसीसी कंपनी राज्य के नियंत्रण में थी — स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकती थी। ▶ अंग्रेज कंपनी निजी उद्यम पर आधारित थी — अधिक लचीली और कुशल थी। ▶ फ्रांस यूरोप में नेपोलियन युद्धों में उलझा रहा — भारत को पर्याप्त संसाधन नहीं मिले। ▶ डूप्ले की महत्वाकांक्षी नीति के बाद कोई सक्षम नेतृत्व नहीं था। ▶ ब्रिटिश नौसेना की श्रेष्ठता ने फ्रांसीसी रसद को बाधित किया।
▌ प्रमुख युद्ध एवं परिणाम (Key Battles Summary)
| युद्ध | वर्ष | पक्ष | परिणाम |
|---|---|---|---|
| दीव का युद्ध | 1509 | पुर्तगाली vs. अरब-भारतीय | पुर्तगाली विजय; हिंद महासागर पर पुर्तगाली नियंत्रण |
| स्वाली का युद्ध | 1612 | अंग्रेज vs. पुर्तगाली | अंग्रेजी विजय; सूरत कोठी मिली |
| हुगली का युद्ध | 1632 | मुगल vs. पुर्तगाली | पुर्तगाल बंगाल से निष्कासित |
| कोलाचेल का युद्ध | 1741 | त्रावणकोर vs. डच | डचों का पतन |
| सेंट थोमे का युद्ध | 1746 | फ्रांसीसी vs. नवाब अनवरुद्दीन | फ्रांसीसी विजय |
| वांडीवाश का युद्ध | 1760 | अंग्रेज vs. फ्रांसीसी | अंग्रेजी विजय; फ्रांसीसी शक्ति समाप्त |
✦ पुर्तगाली पहले यूरोपीय थे जो 1498 ई. में भारत पहुँचे — वास्को-द-गामा कालीकट पहुँचा। ✦ अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा विजय की — वह पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक था। ✦ डच VOC (1602) ने मसुलीपट्टनम में पहली कोठी स्थापित की; 1741 में कोलाचेल में हारकर पतन हुआ। ✦ ब्रिटिश EIC की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को हुई; 1612 में स्वाली युद्ध के बाद सूरत में कोठी मिली। ✦ फर्रुखसियर का फरमान (1717) — कंपनी का 'मैग्ना कार्टा' माना जाता है। ✦ डेनिश (1616) धर्म प्रचार के लिए जाने जाते हैं; 1845 में सारे केंद्र अंग्रेजों को बेचे। ✦ फ्रांसीसी कंपनी 1664 में बनी; डूप्ले महत्वाकांक्षी गवर्नर था; 1760 में वांडीवाश में हारकर समाप्त। ✦ तीन कर्नाटक युद्धों (1746-63) के बाद अंग्रेज एकमात्र प्रमुख यूरोपीय शक्ति बचे। ✦ यूरोपीयों के आगमन का सही क्रम: पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी।
EXAM TIP
UPSC में अक्सर पूछा जाता है: (1) कोलाचेल युद्ध 1741 = डचों का पतन (2) वांडीवाश 1760 = फ्रांसीसियों का पतन (3) फर्रुखसियर फरमान = Magna Carta of Company (4) यूरोपीय क्रम याद रखें।