🧘 अध्याय 5/5 — व्यवहार (Behavior)

बर्नआउट, तनाव एवं सामना

Burnout, Stress & Coping | RAS Pre + Mains
📋 इस अध्याय में
  1. व्यावसायिक तनाव (Occupational Stress)
  2. तनाव के स्रोत (Sources of Stress)
  3. सामना की शैलियाँ (Coping Styles)
  4. बर्नआउट (Burnout)
  5. व्यक्तित्व एवं तनाव (Personality and Stress)
  6. कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दे (Gender Issues at Workplace)

कल्पना कीजिए — कोविड-19 के दौरान एक डॉक्टर प्रतिदिन 16 घंटे कार्य कर रहा था। शुरुआती 3 महीनों में वह पूरे अस्पताल का "हीरो" था — जोश व समर्पण से भरपूर। परंतु 6 महीने बाद वही डॉक्टर मरीज़ों से चिढ़ने लगा, थकान महसूस करने लगा, व अपने कार्य में कोई अर्थ नज़र नहीं आता था — यही है बर्नआउट (Burnout)। ठीक इसी तरह, एक Type A व्यक्तित्व वाला IPS अधिकारी — जो सदैव प्रतिस्पर्धी, अधीर व शीघ्रता में रहता है — हृदय रोग के उच्च जोखिम में होता है, जबकि एक शांत Type B व्यक्तित्व वाला प्रिंसिपल अधिक दीर्घायु व कम तनावग्रस्त जीवन जीता है। इस अध्याय में हम समझेंगे कि तनाव कहाँ से आता है, इससे कैसे निपटें, व्यक्तित्व का इससे क्या संबंध है, तथा कार्यस्थल पर महिलाओं से जुड़े विशिष्ट मुद्दे क्या हैं।

1व्यावसायिक तनाव (Occupational Stress)

सोचिए — एक ही परीक्षा हॉल में बैठे दो विद्यार्थी हैं। परीक्षा खत्म होने पर एक कहता है — "मज़ा आ गया, अच्छा पेपर था", और दूसरा कहता है — "बहुत तनाव में था, हाथ-पैर काँप रहे थे"। पेपर तो एक ही था, फिर दोनों की प्रतिक्रिया इतनी अलग क्यों? यही है तनाव (Stress) का असली रहस्य — यह सिर्फ बाहरी परिस्थिति पर नहीं, बल्कि व्यक्ति उस परिस्थिति को किस नज़र से देखता है, इस पर भी निर्भर करता है। आइए अब इसे थोड़ा वैज्ञानिक तरीके से समझते हैं।

सरल शब्दों में, तनाव (Stress) व्यक्ति व पर्यावरण के बीच असंतुलन की वह अवस्था है जिसमें कार्य की माँगें (Demands) व्यक्ति की क्षमताओं (Resources) से अधिक प्रतीत होती हैं — यानी काम ज़्यादा लगता है और अपने पास संसाधन/समय/ऊर्जा कम। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कार्यस्थल तनाव को "21वीं सदी की वैश्विक महामारी" (Global Epidemic of the 21st Century) की संज्ञा दी है — क्योंकि यह अकेले किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं रह गई, बल्कि दुनिया भर में उत्पादकता, स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था तीनों को प्रभावित कर रही है।

सेल्ये का सामान्य अनुकूलन संलक्षण (GAS) — शरीर तनाव पर कैसे प्रतिक्रिया करता है

हैंस सेल्ये नाम के वैज्ञानिक ने देखा कि चाहे तनाव किसी भी कारण से आए (परीक्षा, बॉस की डांट, बीमारी), हमारा शरीर हमेशा एक जैसे 3 चरणों से होकर गुज़रता है — बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई मशीन लगातार चलने पर पहले तेज़ी से काम करती है, फिर धीरे-धीरे गरम होकर थकने लगती है, और अंत में बंद पड़ जाती है।

🎓 सेल्ये का सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome — GAS) प्रतिपादक (Thinker): हैंस सेल्ये (Hans Selye) | वर्ष: 1936 (मूल शोध), 1950 (पूर्ण सिद्धांत)

💡 GAS मॉडल का उदाहरण

कोविड-19 के दौरान डॉक्टरों में: Alarm (महामारी की शुरुआत में तत्काल सक्रियता व चौकसी), Resistance (महीनों तक लगातार कार्य करते रहना, शरीर अनुकूलित होता रहा), Exhaustion (6 माह बाद शारीरिक-मानसिक थकावट व Burnout) — यह GAS के तीनों चरणों को स्पष्ट दर्शाता है।

आलोचना/सीमाएँ (Criticism): सेल्ये का यह मॉडल बताता है कि शरीर तनाव पर शारीरिक (Physiological) रूप से कैसे प्रतिक्रिया करता है, परंतु यह नहीं बताता कि परीक्षा हॉल वाले उदाहरण की तरह एक ही तनावकर्ता (Stressor) को अलग-अलग व्यक्ति अलग-अलग तरीके से क्यों अनुभव करते हैं। इसी कमी को पूरा करने के लिए बाद में लाज़रस व फोकमैन ने एक नया मॉडल दिया, जो शरीर की नहीं बल्कि दिमाग़ की भूमिका को केंद्र में रखता है — आइए वह अब समझते हैं।

लाज़रस व फोकमैन का संज्ञानात्मक मूल्यांकन मॉडल (Cognitive Appraisal Model)

अब वापस अपने परीक्षा वाले उदाहरण पर आते हैं — जो विद्यार्थी शांत था, उसने पेपर को "चुनौती" (Challenge) समझा और सोचा "मुझे तैयारी अच्छी थी, संभाल लूँगा"। जो विद्यार्थी घबराया हुआ था, उसने उसी पेपर को "खतरा" (Threat) समझा और सोचा "मेरी तैयारी कम थी, मैं फेल हो जाऊँगा"। यही अंतर है — तनाव बाहर की परिस्थिति में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग़ की व्याख्या (Interpretation) में छिपा होता है। इसी विचार को लाज़रस व फोकमैन ने एक व्यवस्थित मॉडल का रूप दिया।

📊 संज्ञानात्मक मूल्यांकन मॉडल (Cognitive Appraisal Model) ✍️ रिचर्ड लाज़रस व सूज़न फोकमैन (Richard Lazarus & Susan Folkman), 1984

1. प्राथमिक मूल्यांकन (Primary Appraisal) — व्यक्ति आकलन करता है कि परिस्थिति उसके लिए खतरा (Threat), हानि (Harm) या चुनौती (Challenge) है या नहीं। 2. द्वितीयक मूल्यांकन (Secondary Appraisal) — व्यक्ति आकलन करता है कि उसके पास इस परिस्थिति से निपटने हेतु पर्याप्त संसाधन/क्षमता है या नहीं। 3. तनाव तभी उत्पन्न होता है जब परिस्थिति की माँग व्यक्ति के मूल्यांकन में उपलब्ध संसाधनों से अधिक प्रतीत हो — अर्थात तनाव वस्तुनिष्ठ (Objective) नहीं, बल्कि व्यक्ति की व्यक्तिपरक (Subjective) व्याख्या पर निर्भर करता है।

💡 संज्ञानात्मक मूल्यांकन का उदाहरण

एक नई भर्ती हुई RAS अधिकारी के लिए पहली जन-सुनवाई (Primary Appraisal में "चुनौती") तनावपूर्ण लग सकती है यदि उसे लगे कि उसके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है (Secondary Appraisal में "संसाधन कम")। वहीं एक अनुभवी अधिकारी के लिए वही जन-सुनवाई सामान्य दिनचर्या मात्र होगी — क्योंकि उसका मूल्यांकन भिन्न है, भले ही परिस्थिति एक समान हो।

2तनाव के स्रोत (Sources of Stress)

तनाव कभी अचानक हवा से पैदा नहीं होता — जैसे किसी पौधे के मुरझाने के पीछे या तो पानी की कमी होती है, या धूप की, या मिट्टी खराब होती है — वैसे ही कार्यस्थल के तनाव के पीछे भी हमेशा कोई ठोस कारण (स्रोत) छिपा होता है। इन कारणों को समझना ज़रूरी है क्योंकि जब तक हमें बीमारी की जड़ पता नहीं चलेगी, तब तक सही इलाज नहीं हो सकता। आइए इन स्रोतों को 4 आसान भागों में बाँटकर समझते हैं:

स्रोत का प्रकारविवरणउदाहरण
कार्य-संबंधी (Work-related)अत्यधिक कार्यभार (Workload), भूमिका अस्पष्टता (Role Ambiguity), भूमिका द्वंद्व (Role Conflict), नौकरी असुरक्षा, कमज़ोर नेतृत्व।एक क्लर्क को एक साथ 3 अलग-अलग अधिकारियों से परस्पर विरोधी निर्देश मिलते हैं — यह Role Conflict है।
संगठनात्मक (Organizational)कमज़ोर संचार, कार्यालय-राजनीति (Politics), अन्याय की भावना (Injustice)।प्रमोशन में योग्यता के बजाय राजनीति हावी होने पर कर्मचारी में गहरा असंतोष व तनाव उत्पन्न होता है।
व्यक्तिगत (Individual)व्यक्तित्व-प्रकार (Type A/B), नियंत्रण-स्थान (Locus of Control), पारिवारिक दबाव।एक Type A व्यक्तित्व वाला अधिकारी छोटी-छोटी देरी पर भी अत्यधिक तनावग्रस्त हो जाता है।
पर्यावरणीय (Environmental)आर्थिक अनिश्चितता, सामाजिक बदलाव, कोविड-पश्चात Hybrid Work तनाव।Work From Home में घर व ऑफिस की सीमाएँ धुंधली होने से कर्मचारी लगातार "ऑन-कॉल" महसूस करता है।
💡 तनाव के स्रोतों का अतिरिक्त उदाहरण

एक शिक्षक जिसे स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ प्रशासनिक कागज़ी कार्य (Non-teaching Duties) भी दिए जाते हैं और वह नहीं जानता कि किसे प्राथमिकता दे — यह Role Ambiguity व Workload दोनों का उदाहरण है, जो उसके कार्य-प्रदर्शन व मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करता है।

सामाजिक पुनः समायोजन निर्धारण मापनी (Social Readjustment Rating Scale — SRRS): थॉमस होम्स व रिचर्ड राहे (Thomas Holmes & Richard Rahe, 1967) द्वारा विकसित यह मापनी जीवन की प्रमुख घटनाओं (Life Events) को तनाव-मूल्य (Stress Points) प्रदान करती है — जैसे जीवनसाथी की मृत्यु (100 अंक — सर्वाधिक), विवाह (50 अंक), नौकरी से निकाला जाना (47 अंक)। किसी व्यक्ति के एक वर्ष में संचित (Cumulative) अंक जितने अधिक होंगे, बीमार पड़ने या गंभीर तनाव का जोखिम उतना ही अधिक होगा।

📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →

3सामना की शैलियाँ (Coping Styles)

तनाव आना अपने हाथ में नहीं होता — बारिश किसी को भी भिगो सकती है। परंतु बारिश आने पर कोई तुरंत छाता खोल लेता है (सीधा उपाय), तो कोई भीगकर भी मुस्कुराते हुए सोचता है — "चलो, आज नहाना हो गया, अच्छा ही हुआ" (सोच बदलना)। दोनों ही व्यक्ति बारिश से "निपट" (Cope) रहे हैं, बस उनका तरीका अलग है। ठीक इसी तरह कार्यस्थल पर तनाव से निपटने के भी अलग-अलग तरीके होते हैं, जिन्हें "सामना की शैलियाँ" (Coping Styles) कहा जाता है।

🎓 सामना की शैलियाँ — 2 व्यापक प्रकार प्रतिपादक (Thinker): रिचर्ड लाज़रस व सूज़न फोकमैन (Lazarus & Folkman) | वर्ष: 1984

🎯 समस्या-केंद्रित सामना (Problem-focused)
  • तनाव के मूल कारण को सीधे संबोधित करना।
  • योजना बनाना (Planning), समय-प्रबंधन (Time Management)।
  • सीधी कार्यवाही (Direct Action) — समस्या का समाधान खोजना।
  • उदाहरण: अत्यधिक कार्यभार होने पर कार्यों की प्राथमिकता सूची बनाना।
❤️ भावना-केंद्रित सामना (Emotion-focused)
  • तनाव से उत्पन्न नकारात्मक भावनाओं को प्रबंधित करना।
  • सकारात्मक पुनर्विचार (Positive Reframing), जर्नलिंग।
  • माइंडफुलनेस (Mindfulness), ध्यान (Meditation)।
  • उदाहरण: असफलता के बाद स्वयं को याद दिलाना कि यह सीखने का अवसर है।
💡 सामना शैलियों का उदाहरण

एक RAS अधिकारी जब किसी जटिल भूमि-विवाद को सुलझाने हेतु चरणबद्ध कार्य-योजना बनाता है — यह समस्या-केंद्रित सामना है। वहीं जब वह तनावपूर्ण दिन के बाद परिवार के साथ बैठकर मन हल्का करता है — यह भावना-केंद्रित व सामाजिक सहयोग सामना दोनों का मिश्रण है। इसके विपरीत, यदि वह समस्या से बचने हेतु फाइल को टालता रहे — यह परिहार सामना है, जो समस्या को और बड़ा बना सकता है।

मनोवैज्ञानिक रक्षा तंत्र (Psychological Defense Mechanisms) — भावना-केंद्रित सामना से संबंध

💡 रक्षा तंत्र का उदाहरण

एक अधिकारी जो अपने वरिष्ठ की डांट से आहत होकर घर आकर बच्चों पर चिल्लाता है — यह प्रतिगमन (Regression) है। इसके विपरीत, वही अधिकारी यदि अपनी निराशा को सकारात्मक ऊर्जा में बदलकर एक सामाजिक-सेवा परियोजना शुरू कर दे — यह उदात्तीकरण (Sublimation) है, जो कहीं अधिक स्वस्थ प्रतिक्रिया है।

प्रभावी सामना कार्यक्रम — EAP एवं MBSR

व्यक्तिगत सामना (Coping) के अलावा, संगठन स्वयं भी कर्मचारियों की मदद के लिए संरचित कार्यक्रम चला सकते हैं — ताकि कर्मचारी को अकेले जूझना न पड़े।

💡 EAP व MBSR का उदाहरण

यदि किसी सरकारी विभाग में एक कर्मचारी पारिवारिक व कार्यभार के दोहरे दबाव में टूटता जा रहा हो, तो EAP के अंतर्गत विभाग उसे एक निःशुल्क, गोपनीय काउंसलर से मिलवा सकता है — जिससे समस्या समय रहते सुलझ जाए। इसी तरह, यदि कोई संगठन सप्ताह में एक बार 20 मिनट का सामूहिक ध्यान-सत्र (MBSR Session) आयोजित करे, तो कर्मचारियों का तनाव-स्तर मापने योग्य रूप से घट सकता है — कई कॉर्पोरेट कंपनियाँ अब यह अपना रही हैं।

4बर्नआउट (Burnout)

याद कीजिए इस अध्याय की शुरुआत वाली कहानी — कोविड में वह डॉक्टर जो शुरुआत में पूरे अस्पताल का "हीरो" था, लेकिन 6 महीने बाद मरीज़ों से चिढ़ने लगा व थका-हारा महसूस करने लगा। यही स्थिति है "बर्नआउट" (Burnout) — जब GAS मॉडल की "थकावट अवस्था" (Exhaustion Stage) बहुत लंबे समय तक चलती रहे और तनाव को सही ढंग से मैनेज न किया जाए, तो वह धीरे-धीरे बर्नआउट का रूप ले लेता है। यानी बर्नआउट कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि लगातार अनियंत्रित तनाव का अगला व गंभीर चरण है।

🎓 बर्नआउट की अवधारणा प्रतिपादक (Thinker): हर्बर्ट फ्रायडेनबर्गर (Herbert Freudenberger) | वर्ष: 1974

📊 Maslach Burnout Inventory (MBI) — बर्नआउट के 3 आयाम ✍️ क्रिस्टीना मास्लाच (Christina Maslach), 1981

1. भावनात्मक थकान (Emotional Exhaustion) — भावनात्मक व शारीरिक ऊर्जा का पूर्णतः क्षीण हो जाना। 2. विरक्तीकरण/निष्ठुरता (Depersonalization/Cynicism) — सहकर्मियों/ग्राहकों के प्रति निर्लिप्त, निष्ठुर व नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना। 3. व्यक्तिगत उपलब्धि में कमी (Reduced Personal Accomplishment) — स्वयं को अक्षम व अप्रभावी महसूस करना, आत्म-मूल्य में कमी।

💡 MBI के तीनों आयामों का उदाहरण

हुक-स्टोरी वाला डॉक्टर — 6 महीने बाद अत्यंत थका हुआ महसूस करता है (Emotional Exhaustion), मरीज़ों को केवल "केस नंबर" समझने लगता है, संवेदनशीलता खो देता है (Depersonalization), और महसूस करता है कि वह अब मरीज़ों की उतनी मदद नहीं कर पा रहा जितनी पहले करता था (Reduced Accomplishment) — यह बर्नआउट के तीनों आयामों को स्पष्ट दर्शाता है।

सीमाएँ (Limitations): MBI मूलतः स्वास्थ्य व सेवा-क्षेत्र (Human Services — जैसे डॉक्टर, नर्स, शिक्षक) के कर्मचारियों को ध्यान में रखकर बनाया गया था। बाद में इसे IT, कॉर्पोरेट व अन्य क्षेत्रों के लिए भी अनुकूलित किया गया, परंतु आलोचकों का मानना है कि तीनों आयामों की मूल परिभाषाएँ हर तरह के व्यवसाय पर समान रूप से लागू नहीं होतीं — इसलिए क्षेत्र (Sector) के अनुसार व्याख्या में सावधानी ज़रूरी है।

WHO ICD-11 वर्गीकरण (2019): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मई 2019 में बर्नआउट को अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण (ICD-11) में एक "व्यावसायिक परिघटना" (Occupational Phenomenon) के रूप में मान्यता दी — परंतु स्पष्ट किया कि यह एक चिकित्सीय स्थिति (Medical Condition) नहीं, बल्कि "स्वास्थ्य सेवाओं से संपर्क को प्रभावित करने वाले कारकों" की श्रेणी में आता है। WHO के अनुसार बर्नआउट विशेष रूप से कार्यस्थल के संदर्भ में ही लागू होता है, जीवन के अन्य क्षेत्रों में नहीं।

तनाव (Stress)
  • अल्पकालिक या दीर्घकालिक हो सकता है।
  • व्यक्ति अभी भी उम्मीद व ऊर्जा रखता है — "संघर्ष" जारी है।
  • शारीरिक लक्षण प्रमुख (जैसे सिरदर्द, अनिद्रा)।
  • सभी जीवन-क्षेत्रों में हो सकता है।
बर्नआउट (Burnout)
  • सदैव दीर्घकालिक, संचयी (Cumulative) प्रक्रिया।
  • व्यक्ति निराश, थका व निर्लिप्त महसूस करता है — "हार मान ली"।
  • भावनात्मक थकान व निष्ठुरता प्रमुख।
  • विशेष रूप से कार्यस्थल-संदर्भ तक सीमित (WHO के अनुसार)।

बर्नआउट की रोकथाम (Prevention of Burnout)

बर्नआउट को ठीक करने से बेहतर है कि उसे होने ही न दिया जाए। इलाज से बचाव बेहतर है — इसलिए संगठन निम्न उपाय अपना सकते हैं:

A. कार्यभार संतुलन (Workload Balance) — यथार्थवादी लक्ष्य व समय-सीमा निर्धारित करना।

B. स्वायत्तता (Autonomy) — कर्मचारियों को अपने कार्य पर नियंत्रण व निर्णय-स्वतंत्रता देना।

C. मान्यता व सराहना (Recognition) — कार्य की सराहना व प्रोत्साहन देना।

D. नियमित विश्राम/अवकाश (Regular Breaks & Leave) — निरंतरता में विराम अनिवार्य।

📢 विज्ञापन
📦

ALL IN ONE Subscription — सम्पूर्ण GK एक ही स्थान पर

Multiple ValidityTests
₹899₹4,999
Join Now →

5व्यक्तित्व एवं तनाव (Personality and Stress)

क्या आपने कभी गौर किया कि एक ही ऑफिस में, एक ही तरह का भारी काम मिलने पर, एक कर्मचारी फौरन चिल्लाने लगता है और दूसरा शांति से मुस्कुरा कर काम शुरू कर देता है? दोनों को एक जैसी परिस्थिति मिली, फिर भी प्रतिक्रिया अलग — क्योंकि तनाव सिर्फ बाहरी परिस्थिति पर नहीं, व्यक्ति के स्वभाव/व्यक्तित्व (Personality) पर भी निर्भर करता है। आइए देखते हैं व्यक्तित्व के अलग-अलग प्रकार तनाव को कैसे प्रभावित करते हैं।

🎓 Type A एवं Type B व्यक्तित्व प्रतिपादक (Thinker): मेयर फ्रीडमैन व रे रोज़ेनमैन (Meyer Friedman & Ray Rosenman) | वर्ष: 1959

Type A व्यक्तित्व
  • अत्यधिक प्रतिस्पर्धी व महत्वाकांक्षी।
  • अधीर, समय की जल्दी, बहु-कार्यण (Multitasking) की आदत।
  • शत्रुतापूर्ण व आक्रामक प्रतिक्रिया देने की प्रवृत्ति।
  • उदाहरण: एक अधीर IPS अधिकारी जो देरी सहन नहीं कर पाता, हृदय रोग के उच्च जोखिम में।
Type B व्यक्तित्व
  • शांत, धैर्यवान व सहज।
  • गैर-प्रतिस्पर्धी, वर्तमान में जीने वाला दृष्टिकोण।
  • तनाव को बेहतर ढंग से संभालने में सक्षम।
  • उदाहरण: एक शांत स्वभाव का प्रिंसिपल जो दबाव में भी संयत रहकर लंबा व स्वस्थ जीवन जीता है।

आलोचना/सीमाएँ (Criticism): बाद के शोधों में पाया गया कि Type A व्यक्तित्व के सभी लक्षण समान रूप से हानिकारक नहीं हैं — विशेषकर "शत्रुता" (Hostility) व दबा हुआ गुस्सा ही हृदय रोग से सबसे अधिक जुड़े पाए गए, न कि सिर्फ प्रतिस्पर्धा या समय की जल्दी। इसलिए आधुनिक शोध अब पूरे Type A स्वभाव के बजाय सिर्फ "Hostility" (शत्रुता) वाले हिस्से पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।

Hardy Personality (दृढ़ व्यक्तित्व)

📊 Hardy Personality — 3 C's मॉडल ✍️ सुज़ैन कोबासा (Suzanne Kobasa), 1979

1. प्रतिबद्धता (Commitment) — अपने कार्य व जीवन के प्रति गहरी संलग्नता, पलायन के बजाय भागीदारी। 2. नियंत्रण (Control) — यह विश्वास कि व्यक्ति अपने जीवन की घटनाओं को प्रभावित कर सकता है, असहाय नहीं है। 3. चुनौती (Challenge) — परिवर्तन को खतरे के बजाय विकास के अवसर के रूप में देखना।

💡 Hardy Personality का उदाहरण

एक कलेक्टर जो नई व कठिन पोस्टिंग को खतरे के बजाय सीखने के अवसर (Challenge) के रूप में देखता है, अपने कार्य के प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध (Commitment) रहता है, और मानता है कि वह परिस्थितियों को बेहतर बना सकता है (Control) — वह Hardy Personality का उदाहरण है, जो तनाव के प्रति अधिक प्रतिरोधी होता है।

Type A बनाम Type B बनाम Hardy Personality — तुलनात्मक तालिका

आधारType A व्यक्तित्वType B व्यक्तित्वHardy Personality
प्रतिपादकफ्रीडमैन व रोज़ेनमैन (1959)फ्रीडमैन व रोज़ेनमैन (1959)सुज़ैन कोबासा (1979)
मूल दृष्टिकोणप्रतिस्पर्धी, समय-आग्रही, शत्रुतापूर्ण।शांत, धैर्यवान, गैर-प्रतिस्पर्धी।प्रतिबद्धता, नियंत्रण व चुनौती (3 C's) पर आधारित।
तनाव के प्रति प्रतिक्रियाउच्च तनाव, शीघ्र आवेशित।निम्न तनाव, संयत प्रतिक्रिया।तनाव को अवसर के रूप में पुनर्परिभाषित करता है।
स्वास्थ्य जोखिमहृदय रोग (Coronary-Prone) का उच्च जोखिम।अपेक्षाकृत कम स्वास्थ्य जोखिम।सर्वाधिक तनाव-प्रतिरोधी — निम्नतम जोखिम।
💡 तीनों व्यक्तित्वों की तुलना का उदाहरण

एक ही विभाग के 3 अधिकारी एक साथ भारी कार्यभार का सामना करते हैं — Type A अधिकारी चिड़चिड़ा होकर सहकर्मियों पर गुस्सा करता है; Type B अधिकारी शांति से कार्य को टालता रहता है; जबकि Hardy Personality वाला अधिकारी इसे चुनौती मानकर योजना बनाकर सक्रियता से हल करता है व दीर्घकाल में सबसे कम तनावग्रस्त रहता है।

नियंत्रण-स्थान (Locus of Control)

🎓 नियंत्रण-स्थान सिद्धांत (Locus of Control Theory) प्रतिपादक (Thinker): जूलियन रॉटर (Julian Rotter) | वर्ष: 1966

💡 Locus of Control का उदाहरण

परीक्षा में असफल होने पर आंतरिक नियंत्रण-स्थान वाला विद्यार्थी सोचता है — "मुझे अधिक मेहनत करनी होगी", जबकि बाह्य नियंत्रण-स्थान वाला विद्यार्थी सोचता है — "प्रश्न-पत्र ही कठिन था, मेरा कोई दोष नहीं"। पहला दृष्टिकोण दीर्घकाल में बेहतर सामना क्षमता विकसित करता है।

ध्यान दें: वास्तविकता में कोई भी व्यक्ति पूर्णतः "आंतरिक" या पूर्णतः "बाह्य" नहीं होता — यह एक स्पेक्ट्रम (Spectrum) है, यानी एक सीधी रेखा जिसके दो छोर हैं, और अधिकांश लोग इन दोनों छोरों के बीच कहीं होते हैं। एक ही व्यक्ति कभी आंतरिक तो कभी बाह्य नियंत्रण-स्थान जैसा व्यवहार दिखा सकता है, परिस्थिति के अनुसार।

Big Five व्यक्तित्व (OCEAN) एवं तनाव

अब तक हमने अलग-अलग व्यक्तित्व-मॉडल देखे। मनोविज्ञान में सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत व वैज्ञानिक रूप से परखा गया मॉडल है Big Five — जिसमें व्यक्तित्व को 5 मुख्य आयामों में बाँटा गया है।

💡 Big Five/Neuroticism का उदाहरण

दो अधिकारी एक ही तरह की कठिन पोस्टिंग पर हैं। जिस अधिकारी में Neuroticism अधिक है, वह छोटी-छोटी बातों पर भी चिंतित हो जाता है, नींद खराब होती है व निर्णय लेने में झिझकता है। वहीं जिस अधिकारी में Neuroticism कम व Conscientiousness अधिक है, वह व्यवस्थित ढंग से काम निपटाता है व दबाव में भी स्थिर रहता है — यह दिखाता है कि व्यक्तित्व की बनावट तनाव के अनुभव को कितना प्रभावित करती है।

6कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दे (Gender Issues at Workplace)

अब तक हमने तनाव व बर्नआउट को एक सामान्य दृष्टिकोण से समझा — जो किसी भी कर्मचारी (पुरुष या महिला) को हो सकता है। परंतु कुछ चुनौतियाँ ऐसी हैं जो खासतौर पर महिलाओं को कार्यस्थल पर अतिरिक्त रूप से झेलनी पड़ती हैं — जैसे बराबर काबिल होने के बावजूद आगे न बढ़ पाना, कम वेतन मिलना, या घर व दफ्तर दोनों की ज़िम्मेदारी अकेले उठाना। यह अतिरिक्त बोझ महिलाओं में तनाव व बर्नआउट का खतरा और बढ़ा देता है। आइए इन मुद्दों को एक-एक करके समझते हैं।

ग्लास सीलिंग (Glass Ceiling)

ग्लास सीलिंग एक अदृश्य बाधा (Invisible Barrier) है जो योग्य महिलाओं (व अन्य वंचित समूहों) को संगठन में शीर्ष नेतृत्व पदों तक पहुँचने से रोकती है — भले ही औपचारिक रूप से कोई रोक न हो।

💡 ग्लास सीलिंग का उदाहरण

एक अत्यंत योग्य महिला अधिकारी वर्षों तक उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के बावजूद वरिष्ठ प्रबंधन (Top Management) में पदोन्नत नहीं हो पाती, जबकि समान/कम योग्यता वाले पुरुष सहकर्मी आगे बढ़ जाते हैं — यह अनकही, अदृश्य बाधा ही ग्लास सीलिंग है।

लैंगिक वेतन-अंतर (Gender Pay Gap)

वेतन-अंतर के आँकड़े (Latest Data): ILO व राष्ट्रीय आँकड़ों के अनुसार भारत में लैंगिक वेतन-अंतर पद्धति व क्षेत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न अनुमानित है — कुछ अध्ययन इसे लगभग 19-20% बताते हैं तो हाल के व्यापक अनुमान इसे 34% तक भी आँकते हैं (ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ पुरुषों की तुलना में लगभग 50%, शहरी क्षेत्रों में लगभग 60% ही कमाती हैं)। IT/वित्त जैसे क्षेत्रों में अंतर सर्वाधिक, शिक्षा/स्वास्थ्य क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम पाया गया है। भारत Global Gender Gap Index में भी निम्न स्थान (131वें, 2025) पर रहा।

कार्य-जीवन संतुलन — दोहरा बोझ (Work-Life Balance — Double Burden)

💡 दोहरे बोझ का उदाहरण

एक कामकाजी माँ जो ऑफिस में पूरे दिन कार्य करने के बाद घर आकर बच्चों की पढ़ाई व घरेलू कार्यों में भी जुटी रहती है, जबकि उसके पुरुष सहकर्मी को यह अतिरिक्त ज़िम्मेदारी नहीं उठानी पड़ती — यह Double Burden है, जो महिलाओं में अतिरिक्त तनाव व बर्नआउट का जोखिम बढ़ाता है।

यौन उत्पीड़न — POSH अधिनियम, 2013

📊 POSH अधिनियम (Sexual Harassment of Women at Workplace Act) ✍️ भारत सरकार, 2013

1. प्रत्येक संगठन (10+ कर्मचारी) में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee — ICC) का गठन अनिवार्य। 2. शिकायत प्राप्ति के 90 दिनों के भीतर जाँच पूर्ण करने का प्रावधान। 3. असंगठित क्षेत्र हेतु स्थानीय शिकायत समिति (Local Complaints Committee — LCC) की व्यवस्था। 4. दिसंबर 2025 का ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट निर्णय (Dr. Sohail Malik v. Union of India) — यदि किसी महिला को किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा उत्पीड़ित किया जाए, तो वह अपने स्वयं के कार्यस्थल की ICC में शिकायत दर्ज करा सकती है।

कार्यान्वयन चुनौतियाँ (Implementation Challenges): रिपोर्ट्स के अनुसार POSH अधिनियम के एक दशक बाद भी ICC के अपर्याप्त गठन, प्रशिक्षण की कमी, कम रिपोर्टिंग (Under-reporting) व पारदर्शिता की कमी जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं — विशेषकर असंगठित क्षेत्र में। निजी व सरकारी दोनों क्षेत्रों में POSH अनुपालन की पारदर्शी रिपोर्टिंग एक सतत चुनौती है।

राजस्थान संदर्भ एवं सरकारी उपाय (Rajasthan Context & Government Measures)

सकारात्मक प्रगति (Positive Developments): UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणामों में राजेश्वरी सुवे एम. (Rajeshwari Suve M.) ने अखिल भारतीय रैंक 2 प्राप्त कर महिला टॉपर का स्थान हासिल किया। राष्ट्रीय स्तर पर महिला श्रमशक्ति भागीदारी दर (Female Labour Force Participation Rate) 2017-18 के 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% हो गई है, तथा सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 55% तक ले जाना है — यह दर्शाता है कि उचित अवसर मिलने पर महिलाएँ शीर्ष प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं व कार्यबल दोनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, यद्यपि Glass Ceiling जैसी चुनौतियाँ अब भी विद्यमान हैं।

कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दे — स्रोत एवं समाधान (सारांश तालिका)

लैंगिक मुद्दामुख्य कारणसरकारी/संगठनात्मक समाधान
ग्लास सीलिंग (Glass Ceiling)अचेतन पूर्वाग्रह (Unconscious Bias), नेटवर्किंग की कमी, पुरुष-प्रधान नेतृत्व संस्कृति।महिला नेतृत्व विकास कार्यक्रम, मेंटरशिप योजनाएँ, विविधता लक्ष्य (Diversity Targets)।
वेतन-अंतर (Pay Gap)समान कार्य हेतु असमान वेतन, कम प्रतिनिधित्व वाले उच्च-वेतन पद।समान वेतन अधिनियम प्रवर्तन, वेतन-लेखा परीक्षा (Pay Audits), पारदर्शी वेतन-नीति।
दोहरा बोझ (Double Burden)घरेलू व देखभाल-दायित्वों का असमान वितरण।क्रेच सुविधा, FPC (Flexible Working), पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) को बढ़ावा।
यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment)शक्ति-असंतुलन, जवाबदेही की कमी।POSH अधिनियम 2013, अनिवार्य ICC गठन, नियमित संवेदीकरण प्रशिक्षण।
मातृत्व-भित्ति (Maternal Wall)गर्भावस्था/मातृत्व के प्रति अप्रत्यक्ष पूर्वाग्रह।मातृत्व लाभ अधिनियम, प्रमोशन-प्रक्रिया में मातृत्व-अवकाश को नुकसान न मानना।
"बर्नआउट दीर्घकालिक, अप्रबंधित कार्यस्थल तनाव से उत्पन्न एक संलक्षण है।" — विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), ICD-11 वर्गीकरण, 2019
🎯 बर्नआउट, तनाव एवं सामना (Burnout, Stress & Coping) — सभी विषय — RAS Mains उत्तर लेखन कोण New Pattern 2026: केवल 5-अंक (60-70 शब्द)

📌 परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

1. WHO ने कार्यस्थल तनाव को "21वीं सदी की वैश्विक महामारी" कहा है। 2. सेल्ये का GAS मॉडल (1936/1950): Alarm → Resistance → Exhaustion — 3 चरण। 3. लाज़रस-फोकमैन का संज्ञानात्मक मूल्यांकन मॉडल (1984): Primary Appraisal (खतरा है?) व Secondary Appraisal (संसाधन हैं?)। 4. तनाव के 4 स्रोत: कार्य-संबंधी, संगठनात्मक, व्यक्तिगत, पर्यावरणीय। 5. SRRS (Social Readjustment Rating Scale, 1967): होम्स व राहे — जीवन-घटनाओं को तनाव-अंक देने वाली मापनी। 6. सामना की 2 व्यापक शैलियाँ (Lazarus & Folkman, 1984): समस्या-केंद्रित व भावना-केंद्रित; साथ ही परिहार व सामाजिक-सहयोग सामना भी। 7. रक्षा तंत्र: प्रतिगमन (Regression — अपरिपक्व व्यवहार) व उदात्तीकरण (Sublimation — सर्वाधिक परिपक्व तंत्र)। 8. EAP (Employee Assistance Programs) व MBSR (Jon Kabat-Zinn) — प्रभावी सामना कार्यक्रम। 9. फ्रायडेनबर्गर (1974): बर्नआउट शब्द का प्रथम प्रयोग — स्वास्थ्य-कर्मियों के संदर्भ में। 10. Maslach Burnout Inventory (MBI, 1981): 3 आयाम — Emotional Exhaustion, Depersonalization, Reduced Personal Accomplishment। 11. WHO ने मई 2019 में ICD-11 में बर्नआउट को "व्यावसायिक परिघटना" माना — चिकित्सीय स्थिति नहीं। 12. बर्नआउट बनाम तनाव: बर्नआउट सदैव दीर्घकालिक-संचयी है; तनाव अल्पकालिक भी हो सकता है। 13. Type A व्यक्तित्व (Friedman & Rosenman, 1959): प्रतिस्पर्धी, अधीर — Coronary-Prone (हृदय रोग जोखिम); Type B: शांत, कम जोखिम। 14. Hardy Personality (Kobasa, 1979): 3 C's — Commitment, Control, Challenge। 15. Locus of Control (Rotter, 1966): आंतरिक (स्वनियंत्रित) — बेहतर सामना; बाह्य (भाग्य-आधारित) — अधिक तनाव। 16. Big Five/OCEAN में न्यूरोटिसिज़्म (Neuroticism) तनाव का सर्वाधिक शक्तिशाली पूर्वानुमानकर्ता है। 17. ग्लास सीलिंग (Glass Ceiling): महिलाओं की शीर्ष पदों तक पहुँच में अदृश्य बाधा। 18. POSH अधिनियम, 2013: ICC गठन अनिवार्य, 90 दिन में जाँच; दिसंबर 2025 सुप्रीम कोर्ट निर्णय ने दायरा विस्तृत किया। 19. भारत में लैंगिक वेतन-अंतर अनुमानतः 19-34% (स्रोत/पद्धति अनुसार भिन्न); भारत Global Gender Gap Index 2025 में 131वें स्थान पर। 20. UPSC CSE 2025: राजेश्वरी सुवे एम. — अखिल भारतीय रैंक 2, महिला टॉपर। 21. राजस्थान: तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में महिलाओं हेतु 50% व पुलिस में 33% आरक्षण। 22. भारत की महिला श्रमशक्ति भागीदारी दर (FLFPR): 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7%; 2030 तक 55% लक्ष्य।

📝 पिछले वर्षों के प्रश्न + संभावित प्रश्न (PYQs) New Pattern 2026: केवल 5-अंक (60-70 शब्द) प्रश्न

Q1. तनाव-प्रतिरोधी व्यक्तित्व (Stress Resistant Personality) क्या है? (2024) Q2. प्रतिगमन (Regression) एवं उदात्तीकरण (Sublimation) में अंतर स्पष्ट कीजिए। (2024) Q3. सामाजिक पुनः समायोजन निर्धारण मापनी (Social Readjustment Rating Scale) क्या है? (2024) Q4. तनाव कम करने हेतु भावना-केंद्रित एवं समस्या-केंद्रित सामना रणनीतियों में अंतर कीजिए। (2023) Q5. तनाव के स्रोत बताइए। (2021) Q6. तनाव प्रबंधन की युक्तियों को समझाइए। (2021) Q7. सामान्य अनुकूलन संलक्षण (General Adaptation Syndrome) क्या है? (2018, 2016) Q8. सकारात्मक स्वास्थ्य एवं कुशलक्षेम को बढ़ाने वाले कारक कौन-से हैं? (2018, 2016) Q9. संभावित प्रश्न (5 अंक): बर्नआउट (Burnout) क्या है? Maslach Burnout Inventory के तीन आयामों की व्याख्या कीजिए। Q10. संभावित प्रश्न (5 अंक): Type A एवं Type B व्यक्तित्व में अंतर स्पष्ट कीजिए। Q11. संभावित प्रश्न (5 अंक): कार्यस्थल पर लैंगिक मुद्दों (Glass Ceiling, वेतन-अंतर) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। Q12. संभावित प्रश्न (5 अंक): POSH अधिनियम, 2013 के मुख्य प्रावधानों को स्पष्ट कीजिए। Q13. संभावित प्रश्न (5 अंक): Hardy Personality की अवधारणा को Type A/B व्यक्तित्व से तुलना करते हुए स्पष्ट कीजिए।

कालक्रम/Timeline — तनाव, बर्नआउट एवं लैंगिक मुद्दे

वर्षसिद्धांत/घटनाविचारक/स्रोत
1936GAS मॉडल का मूल शोधहैंस सेल्ये
1950GAS सिद्धांत का पूर्ण प्रतिपादनहैंस सेल्ये
1959Type A/B व्यक्तित्व सिद्धांतफ्रीडमैन व रोज़ेनमैन
1966नियंत्रण-स्थान सिद्धांत (Locus of Control)जूलियन रॉटर
1967SRRS — जीवन-घटना तनाव मापनीहोम्स व राहे
1974"बर्नआउट" शब्द का प्रथम प्रयोगहर्बर्ट फ्रायडेनबर्गर
1979Hardy Personality — 3 C's मॉडलसुज़ैन कोबासा
1981Maslach Burnout Inventory (MBI)क्रिस्टीना मास्लाच
1984संज्ञानात्मक मूल्यांकन व सामना मॉडललाज़रस व फोकमैन
2013POSH अधिनियम पारितभारत सरकार
2019WHO — ICD-11 में बर्नआउट "व्यावसायिक परिघटना" मान्यWHO
2025UPSC CSE महिला टॉपर — AIR 2राजेश्वरी सुवे एम.
2025 (दिसंबर)POSH अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णयभारत का सर्वोच्च न्यायालय
📢 विज्ञापन
🔥 सबसे लोकप्रिय
📘

RAS Foundation Course 2026 🕉️

Multiple ValidityTests
₹4,999₹25,000
Join Now →
← अध्याय 4: कार्यस्थल पर उत्कर्ष (पुष्पन) मुख्य पृष्ठ पर वापस →