भूमिका — नई आपराधिक विधि व्यवस्था
1 जुलाई 2024 — यह तारीख भारतीय आपराधिक कानून के इतिहास में क्रांतिकारी मोड़ बनी। 164 वर्ष पुराना भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code — IPC, 1860) और 51 वर्ष पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure — CrPC, 1973) को हटाकर तीन नए कानून लागू किए गए। सोचिए — राम की जमीन पर जबरन कब्जे में अब धाराएं बदल गईं। पुलिस को FIR में IPC लिखने की जगह BNS लिखना पड़ता है। वकील के पास CrPC की जगह BNSS है। यही बदलाव परीक्षा में पूछे जाएंगे।
तीन नए कानून: (1) भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) — IPC का स्थान | (2) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) — CrPC का स्थान | (3) भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) — Indian Evidence Act का स्थान — तीनों 1 जुलाई 2024 से प्रभावी।
⚖️ भाग A (Part A) भारतीय न्याय संहिता, 2023 Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (BNS) — Act No. 45 of 2023
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) भारत का नया दंड विधान (Penal Law) है जिसने 164 वर्ष पुराने भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code, 1860) का स्थान लिया। इसे संसद में दिसंबर 2023 में पारित किया गया और 1 जुलाई 2024 से पूरे भारत में लागू हुआ।
| विषय (Subject) | BNS 2023 | IPC 1860 (पुराना) |
|---|---|---|
| अधिनियम संख्या | Act No. 45 of 2023 | Act No. 45 of 1860 |
| राष्ट्रपति स्वीकृति | 25 दिसंबर 2023 | 6 अक्टूबर 1860 |
| प्रभावी तिथि | 1 जुलाई 2024 | 1 जनवरी 1862 |
| कुल धाराएँ | 358 धाराएँ (Sections) | 511 धाराएँ (Sections) |
| कुल अध्याय | 20 अध्याय (Chapters) | 23 अध्याय (Chapters) |
| प्रमुख विशेषता | Victim-centric, Technology-friendly | Colonial-era, Criminal-centric |
| राजद्रोह (Sedition) | हटाया गया (IPC 124A हटी) | धारा 124A — राजद्रोह था |
| संगठित अपराध | धारा 109-111 — नई धाराएं | था नहीं (अलग कानून) |
धारा 1
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (Short Title, Extent and Commencement) (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) है। | (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है (Extends to the whole of India) — जम्मू-कश्मीर सहित। | (3) यह उस तारीख से प्रवृत्त (Effective) होगी जो केंद्र सरकार (Central Government) राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना (Notification) द्वारा नियत करे। [प्रभावी: 1 जुलाई 2024]
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 2 में अधिनियम में प्रयुक्त प्रमुख शब्दों की परिभाषाएँ दी गई हैं। RAS परीक्षा के लिए निर्दिष्ट 11 परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं:
⚖️ कानूनी परिभाषा: बालक से अभिप्राय ऐसे किसी भी व्यक्ति (Any Person) से है जिसकी आयु 18 वर्ष से कम हो। ✅ सरल शब्दों में: 18 साल से छोटा कोई भी बच्चा "बालक" है। 💡 उदाहरण: POCSO Act में भी बालक की यही परिभाषा है। यदि 16 साल का लड़का किसी अपराध में शामिल है, तो BNS की "Child" परिभाषा लागू होगी और Juvenile Justice Act के तहत प्रक्रिया अलग होगी।
⚖️ कानूनी परिभाषा: न्यायालय से अभिप्राय किसी भी न्यायाधीश (Judge) या न्यायाधीशों के निकाय (Body of Judges) से है जो विधि द्वारा न्यायिक रूप से कार्य करने के लिए सशक्त हो (Empowered by law to act judicially)। ✅ सरल शब्दों में: सरकार द्वारा अधिकृत कोई भी न्यायाधीश या न्यायिक पीठ। 💡 उदाहरण: जयपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश का न्यायालय, मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट का न्यायालय — ये सब "Court" हैं।
⚖️ कानूनी परिभाषा: दस्तावेज से अभिप्राय किसी भी पदार्थ पर अक्षरों, अंकों या चिह्नों द्वारा अभिव्यक्त या वर्णित कोई विषय (Matter expressed upon any substance) है, और इसमें इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख (Electronic Record) और डिजिटल अभिलेख (Digital Record) भी शामिल हैं। ✅ सरल शब्दों में: कागज पर लिखी बात, कंप्यूटर फाइल, डिजिटल दस्तावेज — सब "दस्तावेज" हैं। 💡 उदाहरण: रामलाल की जमीन की रजिस्ट्री (Registration Deed) एक दस्तावेज है। उसका WhatsApp स्क्रीनशॉट भी डिजिटल दस्तावेज है जो न्यायालय में साक्ष्य (Evidence) बन सकता है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "वह" (He) और उसके अनुवाद किसी भी लिंग (Any Gender) को सम्मिलित करते हैं। ✅ सरल शब्दों में: कानून में "वह" शब्द सिर्फ पुरुष के लिए नहीं — स्त्री और तृतीय लिंग (Transgender) के लिए भी। 💡 उदाहरण: BNS की धारा में जहाँ "वह अपराध करेगा" लिखा है, वहाँ इसका अर्थ है — कोई भी व्यक्ति (पुरुष, महिला, या अन्य) अपराध करे। Gender-neutral language।
⚖️ कानूनी परिभाषा: कोई भी कार्य या विश्वास "सद्भावना (Good Faith)" में नहीं कहा जाता जो उचित सावधानी और ध्यान (Due Care and Attention) के बिना किया जाए। ✅ सरल शब्दों में: ईमानदारी से, सोच-समझकर किया गया कार्य — सद्भावना है। 💡 उदाहरण: एक डॉक्टर ने आपातकालीन स्थिति (Emergency) में बिना परिजनों की अनुमति के ऑपरेशन किया और मरीज बच गया — यह सद्भावना में किया गया कार्य है। कोई आपराधिक दायित्व नहीं।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "सरकार" से अभिप्राय केंद्र सरकार (Central Government) या किसी राज्य सरकार (State Government) से है। ✅ सरल शब्दों में: भारत सरकार या किसी भी राज्य की सरकार। 💡 उदाहरण: "सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना" — यहाँ "सरकार" का अर्थ है केंद्र सरकार या राज्य सरकार की संपत्ति।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "न्यायाधीश" से अभिप्राय प्रत्येक ऐसे व्यक्ति से है जो विधि द्वारा, अकेले या न्यायाधीशों के निकाय के सदस्य के रूप में, निर्णायक (Adjudicatory) कार्य करने के लिए अधिकृत (Empowered) हो। ✅ सरल शब्दों में: सरकार द्वारा न्याय करने का अधिकार पाया हुआ व्यक्ति। 💡 उदाहरण: जयपुर के CJM (Chief Judicial Magistrate), ADJ (Additional District Judge), High Court के न्यायमूर्ति — सब "Judge" हैं।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "व्यक्ति" शब्द में कोई भी कंपनी (Company) या निगमित (Incorporated) अथवा अनिगमित (Unincorporated) संघ या व्यक्ति-समूह (Association or Body of Persons) शामिल है। ✅ सरल शब्दों में: सिर्फ इंसान नहीं — कंपनी, संस्था, समिति — ये सब "व्यक्ति" हैं। 💡 उदाहरण: Reliance Industries Limited ने यदि कोई अपराध किया, तो BNS में कंपनी पर भी मुकदमा चल सकता है — क्योंकि कंपनी भी "व्यक्ति" है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "जन (Public)" शब्द में समाज का कोई भाग (Any Section of the Public) या किसी विशेष वर्ग (Particular Class) के लोग शामिल हैं। ✅ सरल शब्दों में: "जन" का अर्थ सिर्फ सभी लोग नहीं — कोई विशेष समूह भी "जन" हो सकता है। 💡 उदाहरण: "जन-स्थान" = सार्वजनिक स्थान (Public Place) जैसे बाजार, सड़क, पार्क। वहाँ अश्लील हरकत करने पर BNS की धारा 296 लागू होती है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "लोक सेवक" में शामिल हैं: सरकार द्वारा नियुक्त अधिकारी, सशस्त्र बलों (Armed Forces) के अधिकारी, न्यायाधीश, न्यायालय के अधिकारी, पंचायत/नगर पालिका अधिकारी, सरकारी उपक्रमों (PSU) के अधिकारी, और जो भी सरकारी शक्ति का उपयोग करता हो। ✅ सरल शब्दों में: सरकारी काम करने वाला कोई भी अधिकारी/कर्मचारी — लोक सेवक है। 💡 उदाहरण: पटवारी, तहसीलदार, IAS अधिकारी, SDO, पुलिस कांस्टेबल — सब "लोक सेवक" हैं। लोक सेवक पर हमला करना BNS में गंभीर अपराध है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "मूल्यवान प्रतिभूति" से अभिप्राय ऐसे दस्तावेज से है जो किसी विधिक अधिकार (Legal Right) को सृजित, विस्तारित, अंतरित, प्रतिबंधित, उपशमित या मोचित करता हो; या जिसके द्वारा कोई व्यक्ति यह स्वीकार करे कि उस पर विधिक दायित्व (Legal Liability) है। ✅ सरल शब्दों में: वह दस्तावेज जो कोई कानूनी अधिकार पैदा करे या खत्म करे। 💡 उदाहरण: जमीन की रजिस्ट्री, प्रॉमिसरी नोट (Promissory Note), चेक (Cheque), बंधक पत्र (Mortgage Deed) — ये सब "मूल्यवान प्रतिभूति" हैं। इन्हें जालसाजी (Forgery) से नुकसान पहुँचाना गंभीर अपराध है।
BNS 2023 के अध्याय XI में धाराएं 189-197 "जन-शांति के विरुद्ध अपराध (Offences Against Public Tranquility)" से संबंधित हैं। ये धाराएं IPC 1860 के अध्याय VIII (धाराएं 141-160) का स्थान लेती हैं।
धारा 189
विधिविरुद्ध जन-समूह (Unlawful Assembly) — [IPC 141 का स्थान] पाँच या अधिक व्यक्तियों (Five or More Persons) का जन-समूह "विधिविरुद्ध (Unlawful)" होगा यदि उनका सामान्य उद्देश्य (Common Object) निम्नलिखित में से कोई हो: (a) आपराधिक बल (Criminal Force) द्वारा केंद्र/राज्य सरकार, संसद, विधानमंडल या लोक सेवक को भयभीत (Overawe) करना; (b) किसी कानून के क्रियान्वयन का विरोध (Resist Execution) करना; (c) कोई कूटकार्य, आपराधिक अतिचार या अन्य अपराध करना; (d) आपराधिक बल द्वारा किसी संपत्ति पर कब्जा लेना; (e) आपराधिक बल द्वारा किसी व्यक्ति को कोई कार्य करने या न करने पर मजबूर करना। दंड (Punishment): 6 माह का कारावास या जुर्माना या दोनों।
धारा 190
विधिविरुद्ध जन-समूह के प्रत्येक सदस्य का दायित्व (Liability of Every Member) यदि विधिविरुद्ध जन-समूह का कोई सदस्य उस समूह के सामान्य उद्देश्य (Common Object) की पूर्ति में कोई अपराध करता है, तो उस समय वहाँ उपस्थित (Present) प्रत्येक सदस्य उस अपराध का दोषी माना जाएगा — चाहे उसने स्वयं वह कार्य किया हो या नहीं। यह "सामूहिक दायित्व (Collective Liability)" का सिद्धांत है।
धारा 191
दंगा (Rioting) — [IPC 146-148 का स्थान] (1) जब कोई विधिविरुद्ध जन-समूह या उसका कोई सदस्य समूह के सामान्य उद्देश्य की पूर्ति में बल या हिंसा (Force or Violence) का प्रयोग करे, तो यह "दंगा (Rioting)" होगा। | (2) दंगे का प्रत्येक सदस्य दोषी है — दंड: 2 वर्ष का कारावास (Imprisonment) या जुर्माना (Fine) या दोनों। | (3) यदि दंगाई घातक हथियार (Deadly Weapon) या मृत्युकारक वस्तु से सशस्त्र (Armed) हो, तो दंड: 5 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों।
एक धार्मिक जुलूस के दौरान जयपुर में 50 लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई और उन्होंने दुकानों में तोड़-फोड़ की। BNS के तहत: (1) जो 5+ लोग इस उद्देश्य से इकट्ठे हुए = BNS 189 (Unlawful Assembly); (2) भीड़ का प्रत्येक सदस्य = BNS 190 (सामूहिक दायित्व); (3) जब तोड़-फोड़ की = BNS 191(2) (Rioting — 2 साल); (4) यदि कोई लाठी, तलवार लेकर था = BNS 191(3) (Rioting armed — 5 साल)। IPC में यही 141, 143, 146, 147, 148 था।
BNS 2023 की धाराएं 194-197 विभिन्न समूहों के बीच सद्भाव (Harmony), राष्ट्रीय एकता (National Integration) और सामाजिक शांति (Social Peace) बनाए रखने से संबंधित हैं।
धारा 194
शत्रुता संवर्धन (Promoting Enmity Between Groups) — [IPC 153A का स्थान] जो कोई (a) धर्म, मूलवंश (Race), जन्मस्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय के आधार पर विभिन्न वर्गों (Groups) के बीच शत्रुता (Enmity), घृणा (Hatred) या दुर्भावना (Ill-will) को बढ़ावा दे, (b) या ऐसे कार्य करे जो सद्भाव (Harmony) के लिए हानिकारक हों — दंड: (1) साधारण स्थिति में — 3 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों; (2) यदि किसी पूजा-स्थल (Place of Worship) पर या धार्मिक सभा (Religious Assembly) में किया जाए — 5 वर्ष तक कारावास या जुर्माना या दोनों।
धारा 195
राष्ट्रीय एकता के प्रति हानिकारक अभिकथन (Assertions Prejudicial to National Integration) जो कोई जानबूझकर ऐसे शब्द बोले, लिखे, हस्ताक्षर करे, दृश्य सामग्री बनाए जो: (a) भारत की एकता और अखंडता (Unity and Integrity of India) के प्रति हानिकारक हों; (b) किसी वर्ग या समुदाय को राष्ट्र-विरोधी बताए — दंड: 3 वर्ष का कारावास या जुर्माना या दोनों।
धारा 196
राजद्रोह सम्बन्धी नया प्रावधान (New Provisions Related to Sedition) BNS 2023 में पुरानी IPC की धारा 124A (Sedition) को हटाया गया है। इसके स्थान पर BNS की धारा 152 में "राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ" को परिभाषित किया गया है। धारा 196 में ऐसे कार्यों का वर्णन है जो देश के विरुद्ध विद्रोह (Armed Rebellion) को भड़काते हों — दंड: कठोर आजीवन कारावास (Rigorous Imprisonment for Life) तक।
धारा 197
उपद्रव (Affray) — [IPC 159 का स्थान] जब दो या अधिक व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान (Public Place) में इस प्रकार लड़ें कि आस-पास के लोगों को भय (Terror to the Public) उत्पन्न हो, तो यह "उपद्रव (Affray)" है। दंड: 1 माह का कारावास या ₹1000 जुर्माना या दोनों।
IPC vs BNS — धारा 153A/159: IPC 153A (Promoting Enmity) = BNS 194 | IPC 153B (Assertions against National Integration) = BNS 195 | IPC 124A (Sedition) = BNS 152 (Revised, not exact replacement) | IPC 159 (Affray) = BNS 197
धारा 270
लोक बाधा / वातावरण प्रदूषण (Public Nuisance / Making Atmosphere Noxious) जो कोई ऐसा कार्य करे या ऐसी विधिविरुद्ध लोप (Illegal Omission) का दोषी हो जिससे जनसाधारण (Public) को या उस पड़ोस में निवास करने वाले या संपत्ति रखने वाले लोगों को सामान्य क्षति (Common Injury), खतरा (Danger) या कष्ट (Annoyance) हो, या जिससे वातावरण को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाया जाए — वह "लोक बाधा (Public Nuisance)" का दोषी होगा। दंड: जुर्माना (Fine) — इसे IPC 268 और 278 का मिश्रण माना जा सकता है।
जोधपुर में एक फैक्ट्री मालिक रात को जहरीला धुआँ छोड़ता है जिससे आस-पास के लोगों को साँस लेने में तकलीफ होती है — यह BNS धारा 270 के तहत लोक बाधा (Public Nuisance) है। जयपुर में किसी ने सड़क पर इतना मलबा डाल दिया कि लोगों का निकलना मुश्किल हो गया — यह भी धारा 270 के तहत जुर्माने का प्रावधान है।
BNS 2023 का अध्याय XV "जन-स्वास्थ्य, सुरक्षा, सुविधा, शालीनता और नैतिकता को प्रभावित करने वाले अपराध" से संबंधित है। धाराएं 294-296 अश्लीलता (Obscenity) से जुड़ी हैं।
धारा 294
अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय (Sale of Obscene Books etc.) — [IPC 292 का स्थान] जो कोई किसी ऐसी पुस्तक (Book), पैम्फलेट (Pamphlet), कागज, लेख (Writing), रेखाचित्र (Drawing), चित्र (Painting), प्रतिनिधित्व (Representation) या आकृति (Figure) को — जो अश्लील (Obscene) हो — बेचे, किराये पर दे, वितरित करे, प्रदर्शित करे, या उत्पादित करे — दंड: 2 वर्ष का कारावास + ₹5000 जुर्माना (प्रथम अपराध के लिए); पुनरावृत्ति पर: 5 वर्ष + ₹10000 जुर्माना।
धारा 295
बालकों को अश्लील वस्तुओं का विक्रय (Sale of Obscene Objects to Child) — [IPC 293 का स्थान] जो कोई किसी 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति (Minor — बालक) को कोई अश्लील वस्तु (Obscene Object) — पुस्तक, चित्र, वीडियो आदि — बेचे, किराये पर दे, वितरित करे या प्रदर्शित करे — दंड: 3 वर्ष का कारावास + ₹7000 जुर्माना (प्रथम अपराध); पुनरावृत्ति पर: 7 वर्ष + ₹15000 जुर्माना। बालकों की सुरक्षा के लिए कठोर दंड का प्रावधान।
धारा 296
अश्लील कार्य और गीत (Obscene Acts and Songs) — [IPC 294 का स्थान] जो कोई दूसरों को कष्ट पहुँचाने के आशय से: (a) किसी सार्वजनिक स्थान (Public Place) में कोई अश्लील कार्य (Obscene Act) करे; या (b) किसी सार्वजनिक स्थान पर या उसके निकट कोई अश्लील गीत (Obscene Song), गाथागीत (Ballad) या अश्लील शब्द (Obscene Words) गाए, पढ़े या बोले — दंड: 3 माह का कारावास या ₹1000 जुर्माना या दोनों।
⚖️ भाग B (Part B) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) — CrPC का स्थान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 — BNSS) भारत का नया आपराधिक प्रक्रिया कानून (Criminal Procedure Law) है जिसने 51 वर्ष पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure, 1973 — CrPC) का स्थान लिया। BNSS आपराधिक मामलों में जाँच (Investigation), विचारण (Trial) और न्यायिक प्रक्रिया (Judicial Process) को नियंत्रित करती है।
| विषय (Subject) | BNSS 2023 | CrPC 1973 (पुरानी) |
|---|---|---|
| अधिनियम संख्या | अधिनियम 46/2023 | अधिनियम 2/1974 |
| प्रभावी तिथि | 1 जुलाई 2024 | 1 अप्रैल 1974 |
| कुल धाराएँ | 533 धाराएँ (Sections) | 528 धाराएँ (Sections) |
| कुल अध्याय | 38 अध्याय (Chapters) | 37 अध्याय |
| कुल अनुसूचियाँ | 2 अनुसूचियाँ (Schedules) | 2 अनुसूचियाँ |
| ऑडियो-वीडियो विचारण | धारा 3(2) — प्रावधान | नहीं था |
| इलेक्ट्रॉनिक FIR | धारा 173 — प्रावधान | नहीं था |
| फोरेंसिक जाँच | धारा 176 — 7+ वर्ष अपराध में अनिवार्य | नहीं था |
धारा 1
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) है। | (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है। | (3) यह उस तारीख से प्रवृत्त होगी जो केंद्र सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे। [प्रभावी: 1 जुलाई 2024]
BNSS 2023 की धारा 2 में 15 प्रमुख शब्दों की परिभाषाएँ हैं जो RAS परीक्षा के पाठ्यक्रम में निर्दिष्ट हैं:
⚖️ कानूनी परिभाषा: किसी संचार उपकरण (Communication Device) का उपयोग जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing), पहचान की प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग, तलाशी और जब्ती (Search & Seizure), साक्ष्य (Evidence), इलेक्ट्रॉनिक संचार (Electronic Communication) का संप्रेषण शामिल हो। ✅ सरल शब्दों में: वीडियो कॉल, ऑनलाइन हियरिंग, जूम मीटिंग — जो भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हो। 💡 उदाहरण: COVID-19 के दौरान जब न्यायालय बंद थे, तो सुप्रीम कोर्ट ने ऑडियो-वीडियो माध्यम से सुनवाई की। BNSS ने इसे कानूनी मान्यता दी।
⚖️ कानूनी परिभाषा: "जमानत (Bail)" से अभिप्राय किसी अभियुक्त (Accused) या संदिग्ध (Suspected) व्यक्ति को न्यायालय या अधिकारी द्वारा लगाई गई शर्तों (Conditions) पर बंधपत्र (Bond) या जमानत-बंधपत्र (Bail Bond) निष्पादित करने पर हिरासत (Custody) से मुक्त करना है। ✅ सरल शब्दों में: अभियुक्त को शर्तों पर रिहा करना — जमानत है। 💡 उदाहरण: रामलाल को पुलिस ने गिरफ्तार किया। उसका वकील जमानत की अर्जी लेकर मजिस्ट्रेट के पास गया। मजिस्ट्रेट ने ₹10,000 के बंधपत्र पर रामलाल को रिहा किया — यह जमानत (Bail) है।
⚖️ कानूनी परिभाषा: जमानती अपराध (Bailable Offence) — वह अपराध जो पहली अनुसूची (First Schedule) में जमानती के रूप में दिखाया गया हो या अन्य किसी विधि में जमानती बनाया गया हो। गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable Offence) — इसके अलावा कोई भी अपराध। ✅ सरल शब्दों में: जमानती = जमानत का अधिकार है; गैर-जमानती = जमानत न्यायालय की दया पर। 💡 उदाहरण: चोरी (BNS Sec 303) — जमानती; हत्या (BNS Sec 101) — गैर-जमानती। जमानती में पुलिस खुद जमानत दे सकती है; गैर-जमानती में न्यायालय का आदेश चाहिए।
| शब्द (Term) | परिभाषा (Definition) | IPC/CrPC अंतर |
|---|---|---|
| जमानत-बंधपत्र (Bail-Bond) | जमानती की उपस्थिति सहित मुक्ति का वचन-पत्र (Undertaking WITH Surety) | CrPC में भी यही था |
| बंधपत्र (Bond) | व्यक्तिगत बंधपत्र — बिना जमानती के (Undertaking WITHOUT Surety) | CrPC में भी यही था |
| अभियोग (Charge) | न्यायालय द्वारा अभियुक्त के विरुद्ध औपचारिक आरोप (Formal Accusation) | कोई बड़ा अंतर नहीं |
| संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) | जिसमें पुलिस बिना वारंट (Without Warrant) गिरफ्तार कर सके — प्रथम अनुसूची में | CrPC में भी था |
| परिवाद (Complaint) | मजिस्ट्रेट को मौखिक या लिखित शिकायत — लेकिन पुलिस रिपोर्ट नहीं | पुलिस रिपोर्ट = Complaint नहीं |
| इलेक्ट्रॉनिक संचार (Electronic Communication) | फोन, मोबाइल, कंप्यूटर, ऑडियो-वीडियो द्वारा सूचना प्रेषण | नया प्रावधान BNSS में |
| जाँच (Inquiry) | मजिस्ट्रेट या न्यायालय द्वारा जाँच (विचारण या जाँच नहीं) | CrPC में भी था |
| अन्वेषण (Investigation) | पुलिस अधिकारी द्वारा साक्ष्य संग्रह (Collection of Evidence) | CrPC में भी था |
| असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) | जिसमें पुलिस बिना वारंट गिरफ्तार नहीं कर सकती | CrPC में भी था |
| उपखंड (Sub Division) | जिले का एक भाग (Territorial Division of a District) | CrPC में भी था |
| समन मामला (Summons Case) | अपराध जो मृत्यु/आजीवन कारावास/2 वर्ष से अधिक से दंडनीय नहीं | CrPC में भी था |
| वारंट मामला (Warrant Case) | अपराध जो मृत्यु, आजीवन कारावास या 2 वर्ष से अधिक से दंडनीय | CrPC में भी था |
धारा 3(2)
ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से विचारण (Trial by Electronic Means) धारा 3(2)(a): सत्र न्यायालय (Sessions Court) या मजिस्ट्रेट न्यायालय में विचारण (Trial) या जाँच (Inquiry) ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम (Audio-Video Electronic Means) द्वारा आयोजित की जा सकती है। | धारा 3(2)(b): साक्ष्य (Evidence) ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम द्वारा लिया जा सकता है। | यह प्रावधान "डिजिटल न्याय (Digital Justice)" की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों के लोग भी घर बैठे विचारण में भाग ले सकते हैं।
महत्वपूर्ण: CrPC 1973 में ऑडियो-वीडियो विचारण का कोई प्रावधान नहीं था। BNSS 2023 ने डिजिटल तकनीक को न्यायिक प्रक्रिया में पूरी तरह शामिल किया — यह परीक्षा में अत्यधिक पूछा जाता है।
BNSS 2023 की धाराएं 14-17 विभिन्न स्तरों पर मजिस्ट्रेटों की शक्तियों और उनकी नियुक्ति से संबंधित हैं।
धारा 14
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की विशेष शक्तियाँ (Special Powers of Chief Judicial Magistrate) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM — Chief Judicial Magistrate) को उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा प्रत्येक जिले में नियुक्त किया जाता है। CJM के पास 7 वर्ष तक के कारावास और आजीवन कारावास को छोड़कर सभी दंडों का अधिकार है। जिले में सभी प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेटों पर CJM का नियंत्रण।
धारा 15
महानगर मुख्य मजिस्ट्रेट (Chief Metropolitan Magistrate) महानगर क्षेत्र (Metropolitan Area) — जहाँ जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो — के लिए उच्च न्यायालय एक मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (Chief Metropolitan Magistrate) नियुक्त करता है। CMM की शक्तियाँ CJM के समान होती हैं।
धारा 16
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special Judicial Magistrate) राज्य सरकार किसी विशेष क्षेत्र या विशेष प्रकार के मामलों के लिए किसी सक्षम अधिकारी को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (Special Judicial Magistrate) की शक्तियाँ प्रदान कर सकती है। इनका कार्यकाल 1 वर्ष तक हो सकता है जिसे बढ़ाया जा सकता है।
धारा 17
मजिस्ट्रेटों की पीठ (Bench of Magistrates) उच्च न्यायालय 2 या अधिक मजिस्ट्रेटों की एक पीठ (Bench of Magistrates) बना सकता है और उन्हें किसी विशेष क्षेत्र या विशेष मामलों के लिए शक्तियाँ दे सकता है। इससे न्यायिक कार्यभार (Judicial Workload) का वितरण होता है।
BNSS 2023 की धाराएं 41-43 पुलिस और निजी व्यक्तियों द्वारा गिरफ्तारी की शक्तियों से संबंधित हैं। ये CrPC की धाराएं 41, 42, 43 का स्थान लेती हैं।
धारा 41
पुलिस द्वारा बिना वारंट के गिरफ्तारी (Arrest without Warrant by Police) पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश (Without Order of Magistrate) और बिना वारंट (Without Warrant) के निम्न स्थितियों में गिरफ्तार कर सकता है: (a) संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) में लिप्त व्यक्ति; (b) जो व्यक्ति भागने की कोशिश करे; (c) जो घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) हो; (d) जिसके पास चोरी का माल हो; (e) जो पुलिस कार्य में बाधा डाले; (f) जो जमानत की शर्तें तोड़े। नोट: गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य।
धारा 42
नाम और पता बताने से मना करने पर गिरफ्तारी (Arrest on Refusal to Give Name) जब कोई व्यक्ति किसी असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) में शामिल हो और वह पुलिस को अपना नाम एवं निवास-स्थान (Name and Residence) बताने से मना करे या मिथ्या जानकारी दे — तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है। 24 घंटे में छोड़ना होगा या मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।
धारा 43
निजी व्यक्ति द्वारा गिरफ्तारी (Arrest by Private Person) कोई भी निजी व्यक्ति (Private Person) — बिना मजिस्ट्रेट के आदेश या वारंट के — किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है जो उसकी उपस्थिति में: (a) संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध (Cognizable and Non-Bailable Offence) करे; (b) घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) हो। ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर तुरंत पुलिस को सौंपना होगा।
नया प्रावधान — हथकड़ी (Handcuffs): BNSS 2023 में पहली बार स्पष्ट प्रावधान: आदतन अपराधी (Habitual Offender), भगोड़े, संगठित अपराध (Organised Crime), आतंकवाद, बलात्कार, हत्या, एसिड अटैक के आरोपियों को हथकड़ी (Handcuffs) लगाई जा सकती है — CrPC में यह नहीं था।
BNSS 2023 की धाराएं 126-129 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट (Executive Magistrate) को यह शक्ति देती हैं कि वह संभावित अपराधियों से शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा (Security) माँगे।
| धारा (Section) | विषय (Subject) | कारण (Ground) |
|---|---|---|
| 126 | दोषसिद्धि पर शांति बनाए रखने की सुरक्षा (Security on Conviction) | जब न्यायालय को लगे कि व्यक्ति शांति भंग कर सकता है — दोषसिद्धि के साथ-साथ |
| 127 | अन्य मामलों में शांति बनाए रखने की सुरक्षा (Security in Other Cases) | कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को विश्वास हो कि व्यक्ति शांति भंग करेगा |
| 128 | संदिग्ध व्यक्तियों से सदाचार की सुरक्षा (Security from Suspected Persons) | जो व्यक्ति अपराध के लिए तैयार हो रहा हो या असामाजिक व्यवहार में संलिप्त हो |
| 129 | आदतन अपराधियों से सदाचार की सुरक्षा (Security from Habitual Offenders) | जो व्यक्ति आदतन चोर, डकैत, जालसाज, बदमाश हो |
BNSS 2023 में जमानत के प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये CrPC की धाराएं 436, 437, 440 का स्थान लेती हैं।
धारा 148
जमानती अपराध में जमानत (Bail in Bailable Offences) जब किसी व्यक्ति को जमानती अपराध (Bailable Offence) में गिरफ्तार किया जाए, तो वह जमानत (Bail) का अधिकारी है — यह उसका कानूनी अधिकार (Legal Right) है, न कि न्यायालय की दया। जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
धारा 149
गैर-जमानती अपराध में जमानत (Bail in Non-Bailable Offences) गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable Offence) में जमानत न्यायालय के विवेक (Discretion of Court) पर निर्भर है। निम्न परिस्थितियों में जमानत नहीं दी जाएगी: (a) मृत्युदंड (Death Penalty) या आजीवन कारावास (Life Imprisonment) वाले अपराध में, जब साक्ष्य उचित आधार दे; (b) जब पहले गैर-जमानती अपराध में दोषसिद्ध हो। विशेष परिस्थिति — 16 वर्ष से कम उम्र, महिला, बीमार/दिव्यांग — जमानत मिल सकती है।
धारा 152
जमानत की सामान्य शर्तें (General Conditions for Bail) न्यायालय जमानत देते समय निम्न शर्तें लगा सकता है: (a) आरोपी जाँच या विचारण में उपस्थित रहे; (b) गवाहों को प्रभावित न करे; (c) साक्ष्य नष्ट न करे; (d) भारत न छोड़े; (e) पासपोर्ट जमा करे। नई शर्त BNSS में — "जन सुरक्षा (Public Safety)" को भी आधार बनाया जा सकता है।
BNSS 2023 की धाराएं 163-167 कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और पुलिस को आसन्न खतरे (Imminent Danger) या लोक-बाधा (Public Nuisance) की स्थिति में निवारक आदेश (Preventive Orders) देने की शक्ति देती हैं।
धारा 163
तत्काल मामलों में आदेश (Orders in Urgent Cases of Nuisance or Apprehended Danger) जिला मजिस्ट्रेट (DM) या उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या अन्य कार्यपालिक मजिस्ट्रेट — जब संतुष्ट हो कि किसी कार्य या भौतिक स्थिति से खतरा (Danger) या कष्ट (Annoyance) या क्षति (Injury) हो रही है या होने की आशंका है — तो तत्काल एकपक्षीय आदेश (Immediate Ex-Parte Order) दे सकता है। यह धारा CrPC की धारा 144 का स्थान लेती है।
धारा 164
लिखित बयान एवं स्वीकारोक्ति (Statements and Confessions) मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति का बयान (Statement) या स्वीकारोक्ति (Confession) रिकॉर्ड कर सकता है। पुलिस के सामने दिया गया बयान साक्ष्य नहीं बनता — लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया बयान साक्ष्य बन सकता है।
धारा 165
कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ (Powers of Executive Magistrate) कार्यपालिक मजिस्ट्रेट लोक-शांति (Public Peace) बनाए रखने के लिए आदेश जारी कर सकता है — जैसे भीड़ हटाने का आदेश, धारा 144 जैसे आदेश।
धारा 167
स्थानीय जाँच (Local Inquiry) कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को स्थानीय जाँच (Local Inquiry) का आदेश देने की शक्ति है। किसी विवाद का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के लिए किसी को नियुक्त किया जा सकता है और उसकी रिपोर्ट को साक्ष्य (Evidence) में प्रयोग किया जा सकता है।
अजमेर में दो संप्रदायों के बीच तनाव बढ़ रहा था। SDM को सूचना मिली कि शाम को दंगा हो सकता है। SDM ने BNSS की धारा 163 (CrPC 144 का स्थान) के तहत तत्काल निषेधाज्ञा (Prohibitory Order) जारी की — 5 से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध। इससे संभावित दंगा रोका गया। यही प्रशासन का निवारक कार्य है।
BNSS 2023 की धाराएं 173-174 पुलिस को सूचना देने और FIR दर्ज करने की प्रक्रिया से संबंधित हैं। BNSS में FIR प्रक्रिया में डिजिटल क्रांति आई है।
धारा 173
संज्ञेय मामलों में पुलिस को सूचना (Information to Police in Cognizable Cases — FIR) जब किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की सूचना पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (SHO) को दी जाए — तो वह उसे लिखित में अभिलिखित (Record) करेगा और पीड़ित को पढ़कर सुनाएगा और हस्ताक्षर/अंगूठा करवाएगा। | नया प्रावधान: FIR इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से (Electronically) भी दी जा सकती है, और 3 दिन के भीतर हस्ताक्षरित करना होगा। FIR की एक प्रति (Copy) तुरंत पीड़ित को नि:शुल्क मिलेगी। यह CrPC की धारा 154 का स्थान लेती है।
धारा 174
असंज्ञेय मामलों में जानकारी (Information in Non-Cognizable Cases) जब असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) की जानकारी पुलिस को दी जाए — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच (Investigation) नहीं कर सकती। पुलिस शिकायतकर्ता को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेज देगी। यह CrPC की धारा 155 का स्थान लेती है।
इलेक्ट्रॉनिक FIR: BNSS 2023 में e-FIR का प्रावधान — अब व्यक्ति पुलिस स्टेशन न जाकर भी ऑनलाइन FIR दर्ज करा सकता है। 3 दिन में हस्ताक्षरित करना अनिवार्य। यह CrPC में नहीं था — परीक्षा में यह अंतर अवश्य पूछा जाता है।
धारा 187
जब जाँच 24 घंटे में पूरी न हो — हिरासत की प्रक्रिया (Procedure when Investigation Cannot be Completed in 24 Hours) जब पुलिस किसी गिरफ्तार व्यक्ति की जाँच 24 घंटे में पूरी न कर पाए — तो उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा। | मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ: (a) पुलिस हिरासत (Police Custody): अधिकतम 15 दिन — लेकिन गंभीर अपराध (7+ वर्ष) में पहले 60 दिनों में; अन्य में पहले 40 दिनों में; (b) न्यायिक हिरासत (Judicial Custody): शेष अवधि। | कुल अधिकतम अभिरक्षा: (i) गंभीर अपराध (Death/Life/10+ years): 90 दिन; (ii) अन्य अपराध: 60 दिन। | "डिफॉल्ट जमानत (Default Bail)": यदि इस अवधि में आरोप-पत्र (Charge Sheet) दाखिल न हो, तो आरोपी जमानत का अधिकारी होगा। यह CrPC की धारा 167 का स्थान लेती है।
रामू को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 15 दिन पुलिस हिरासत माँगी — मजिस्ट्रेट ने दी। फिर रामू न्यायिक हिरासत (जेल) में रहा। 90 दिन पूरे हो गए लेकिन पुलिस ने आरोप-पत्र (Charge Sheet) दाखिल नहीं की। रामू के वकील ने "Default Bail" की अर्जी दी। BNSS की धारा 187 के अनुसार — 90 दिन में चार्जशीट न होने पर — रामू जमानत का अधिकारी बन गया।
BNSS 2023 की धाराएं 194-196 मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध का संज्ञान लेने (Taking Cognizance) और मामले को सत्र न्यायालय (Sessions Court) को भेजने से संबंधित हैं।
धारा 194
सत्र न्यायालय को मामला सुपुर्द करना (Commitment to Court of Session) जब किसी ऐसे अपराध का विचारण (Trial) केवल सत्र न्यायालय (Sessions Court) कर सकता हो — तो मजिस्ट्रेट उस मामले को सत्र न्यायालय को सुपुर्द (Commit) करेगा। ऐसे मामले जिनमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड संभव हो। यह CrPC की धारा 209 का स्थान लेती है।
धारा 195
मजिस्ट्रेट की परिधि से बाहर का मामला (Cases Beyond Magistrate Jurisdiction) यदि मजिस्ट्रेट को लगे कि मामला उसकी परिधि (Jurisdiction) से बाहर है, तो वह उसे उचित न्यायालय को भेज देगा। यह CrPC की धारा 210 का स्थान लेती है।
धारा 196
असंज्ञेय अपराध की जाँच का निर्देश (Direction to Investigate Non-Cognizable Offence) मजिस्ट्रेट को शक्ति है कि वह पुलिस को असंज्ञेय (Non-Cognizable) अपराध की जाँच (Investigation) करने का निर्देश दे — मानो वह संज्ञेय (Cognizable) हो। यह CrPC की धारा 156(3) का स्थान लेती है।
| IPC/CrPC धारा | विषय | BNS/BNSS धारा |
|---|---|---|
| IPC 141 | Unlawful Assembly — विधिविरुद्ध जन-समूह | BNS 189 |
| IPC 143 | Member of Unlawful Assembly | BNS 190 |
| IPC 146-148 | Rioting — दंगा | BNS 191 |
| IPC 153A | Promoting Enmity | BNS 194 |
| IPC 153B | National Integration | BNS 195 |
| IPC 124A | Sedition — राजद्रोह | BNS 152 (बदला) |
| IPC 159 | Affray — उपद्रव | BNS 197 |
| IPC 268/278 | Public Nuisance | BNS 270 |
| IPC 292 | Obscene Books | BNS 294 |
| IPC 293 | Obscene objects to minor | BNS 295 |
| IPC 294 | Obscene acts | BNS 296 |
| CrPC 144 | Preventive Orders | BNSS 163 |
| CrPC 154 | FIR Registration | BNSS 173 |
| CrPC 167 | Remand — हिरासत | BNSS 187 |
| CrPC 436 | Bail in bailable offences | BNSS 148 |
| CrPC 437 | Bail in non-bailable | BNSS 149 |
| CrPC 41 | Arrest without warrant | BNSS 41 |
1. BNS 2023 = Act No. 45/2023 — राष्ट्रपति स्वीकृति 25 दिसंबर 2023 — प्रभावी 1 जुलाई 2024 — IPC 1860 का स्थान। 2. BNSS 2023 = Act No. 46/2023 — प्रभावी 1 जुलाई 2024 — CrPC 1973 का स्थान — 533 धाराएँ। 3. तीसरा नया कानून: BSA 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) — Indian Evidence Act 1872 का स्थान। 4. BNS में कुल 358 धाराएँ (IPC में 511 थीं) — 153 धाराएँ कम की गईं। 5. IPC 124A (Sedition) हटाई गई — BNS 152 में "Armed Rebellion" का नया प्रावधान। 6. BNS में पहली बार "सामुदायिक सेवा (Community Service)" — नई सज़ा का प्रकार। 7. BNS 189 = Unlawful Assembly (5+ persons) — IPC 141 का स्थान — दंड: 6 माह। 8. BNS 191 = Rioting — साधारण: 2 वर्ष; घातक हथियार से: 5 वर्ष। 9. BNS 194 = Promoting Enmity — साधारण: 3 वर्ष; पूजा-स्थल पर: 5 वर्ष। 10. BNS 296 = Obscene Acts — 3 माह कारावास या ₹1000 जुर्माना। 11. BNSS 3(2) = ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से विचारण — नया प्रावधान। 12. BNSS 41 = बिना वारंट गिरफ्तारी (Cognizable) + हथकड़ी का प्रावधान — नया। 13. BNSS 148 = जमानती अपराध में जमानत — कानूनी अधिकार (Not discretion)। 14. BNSS 149 = गैर-जमानती में जमानत — न्यायालय के विवेक पर। 15. BNSS 163 = CrPC 144 का स्थान — निषेधाज्ञा आदेश (Preventive Orders)। 16. BNSS 173 = e-FIR — ऑनलाइन FIR + 3 दिन में हस्ताक्षर — CrPC 154 का स्थान। 17. BNSS 187 = Remand — गंभीर अपराध: 90 दिन; अन्य: 60 दिन — Default Bail। 18. Default Bail: 90/60 दिन में Charge Sheet नहीं तो जमानत का अधिकार। 19. BNSS 176 = 7 वर्ष+ अपराध में फोरेंसिक जाँच अनिवार्य — नया प्रावधान। 20. BNSS 258 = निर्णय 30 दिन में (अधिकतम 45 दिन तक बढ़ाया जा सकता है)।
Q1. भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 2 में "मूल्यवान प्रतिभूति (Valuable Security)" की परिभाषा बताइए और इसका महत्व स्पष्ट कीजिए। (5 अंक) Q2. BNS 2023 में विधिविरुद्ध जन-समूह (Unlawful Assembly) की परिभाषा (धारा 189) और दंगे (Rioting) के प्रावधान (धारा 191) का वर्णन कीजिए। (10 अंक) Q3. "भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने आपराधिक न्याय प्रणाली को डिजिटल बनाया है" — धारा 3(2) और 173 के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए। (10 अंक) Q4. BNSS 2023 की धारा 187 के अंतर्गत पुलिस और न्यायिक हिरासत की प्रक्रिया बताइए। Default Bail क्या है? (10 अंक) Q5. BNS 2023 में "सद्भावना (Good Faith)" की परिभाषा क्या है? यह IPC से किस प्रकार भिन्न है? (5 अंक) Q6. BNSS 2023 की धारा 148 और 149 के अंतर्गत जमानती और गैर-जमानती अपराधों में जमानत के प्रावधानों की तुलना कीजिए। (5 अंक) Q7. BNS 2023 में IPC 1860 से क्या प्रमुख परिवर्तन हुए हैं? राजद्रोह (Sedition) की स्थिति क्या है? (10 अंक) Q8. BNSS 2023 की धारा 163 (CrPC 144) के अंतर्गत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की शक्तियाँ बताइए। RAS अधिकारी के रूप में इसका महत्व क्या है? (5 अंक)
| वर्ष (Year) | घटना / अधिनियम (Event / Act) |
|---|---|
| 1860 | भारतीय दंड संहिता (IPC, 1860) — Lord Macaulay द्वारा — अंग्रेजी हुकूमत में |
| 1862 | IPC 1860 प्रभावी (Effective) — 1 जनवरी 1862 |
| 1973 | दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC, 1973) — स्वतंत्र भारत में पहला आपराधिक प्रक्रिया कानून |
| 1974 | CrPC 1973 प्रभावी — 1 अप्रैल 1974 |
| 2000 | IT Act 2000 — साइबर अपराधों के लिए — IPC में धाराएं 66A-F जोड़ी गईं |
| 11 अगस्त 2023 | नए आपराधिक कानून संसद में पेश किए गए (BNS, BNSS, BSA) |
| 25 दिसंबर 2023 | राष्ट्रपति द्वारा तीनों नए कानूनों को स्वीकृति (Presidential Assent) |
| 1 जुलाई 2024 | BNS, BNSS, BSA प्रभावी — IPC, CrPC, Evidence Act की जगह |
| 1 जुलाई 2024 | पहली FIR BNS के तहत — Gwalior (M.P.) में — देश की पहली BNS FIR |
| 2024-25 | राजस्थान पुलिस को नए कानूनों की ट्रेनिंग — e-FIR प्रणाली लागू |