राजस्थान, जिसे 'रेगिस्तान का देश' कहा जाता है, वहाँ अनेक सुंदर और ऐतिहासिक झीलें हैं। ये झीलें न केवल पानी का स्रोत हैं बल्कि पर्यटन, संस्कृति और जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान की झीलें मीठे पानी और खारे पानी दोनों प्रकार की हैं।
स्थान: राजसमंद जिला | निर्माण: महाराणा राज सिंह (1662-1676 ई.)
यह राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है। इसका निर्माण गोमती नदी पर बाँध बनाकर किया गया था। झील के उत्तरी भाग को 'नौ चौकी' कहते हैं जहाँ संगमरमर की 25 छतरियाँ बनी हैं। यहाँ 'राज प्रशस्ति' स्थित है।
स्थान: उदयपुर | निर्माण: महाराणा जय सिंह (1687-1691 ई.)
एशिया की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम मीठे पानी की झील। इसमें 7 टापू हैं। सबसे बड़े टापू को 'बाबा का भागड़ा' और सबसे छोटे को 'प्यारी' कहते हैं।
स्थान: उदयपुर | निर्माण: 14वीं शताब्दी
उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध झील। इसमें दो टापू हैं — जग निवास (लेक पैलेस) और जग मंदिर। इसे 'उदयपुर की शान' कहते हैं।
स्थान: उदयपुर | निर्माण: महाराणा फतेह सिंह
पिछोला झील से नहर द्वारा जुड़ी यह झील उदयपुर की प्रमुख झील है। इसमें 'नेहरू द्वीप' पर सौर वेधशाला स्थित है।
स्थान: अजमेर | निर्माण: अर्णोराज (आनाजी) 1135-1150 ई.
अजमेर की सबसे बड़ी झील। जहाँगीर ने 'दौलत बाग' और शाहजहाँ ने 'बारादरी' बनवाई। यह लूणी नदी का उद्गम स्थल है।
स्थान: पुष्कर, अजमेर
हिंदुओं की पवित्र झील। विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर यहाँ स्थित है। कार्तिक पूर्णिमा पर विश्व प्रसिद्ध 'पुष्कर मेला' लगता है। इसे 'तीर्थराज' कहते हैं।
स्थान: अलवर | निर्माण: महाराजा विनय सिंह (1845 ई.)
इसे 'राजस्थान का नंदन कानन' कहते हैं। रानी सिलि के लिए झील के किनारे 'लेक पैलेस' बनवाया गया।
स्थान: माउंट आबू, सिरोही
राजस्थान की सबसे ऊँची (1200 मीटर) एवं एकमात्र प्राकृतिक झील। ज्वालामुखी क्रिया से निर्मित। यहाँ 'टोड रॉक' और 'नन रॉक' प्रमुख आकर्षण हैं।
स्थान: जयपुर (नागौर, अजमेर की सीमा)
भारत की सबसे बड़ी और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की झील। भारत के कुल नमक का 8.7% यहाँ उत्पादित होता है। रामसर साइट में शामिल। सर्दियों में हजारों फ्लेमिंगो पक्षी आते हैं।
स्थान: नागौर जिला
इस झील से सोडियम सल्फेट का उत्पादन होता है। यहाँ 'राजस्थान स्टेट केमिकल वर्क्स' स्थित है।
स्थान: बीकानेर जिला
यह राजस्थान के उत्तर-पश्चिम में स्थित खारे पानी की झील है। यहाँ नमक उत्पादन होता है।
स्थान: बाड़मेर जिला
यहाँ का नमक सर्वश्रेष्ठ माना जाता है (98% सोडियम क्लोराइड)। 'खारवाल' जाति के लोग परंपरागत तरीके से नमक बनाते हैं।