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Paper-I1

New India Education (NIEd)

RAS Mains Practice Test

Paper-I — सामान्य अध्ययन-I

Total Marks: 200Time: 3 HoursDate: 11/08/2026

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महत्त्वपूर्ण निर्देश / IMPORTANT INSTRUCTIONS
  • उत्तर निर्धारित स्थान पर ही लिखें। / Answer within the prescribed space only.
  • निर्धारित शब्द सीमा से अधिक न लिखें। / Do not exceed the word limit.
  • Correction Pen का उपयोग निषिद्ध है। / Use of Correction Pen is strictly forbidden.
  • उत्तर हिंदी या अंग्रेजी में दीजिए। / Answer in Hindi or English.
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Paper-I2
📚 Model Answer Booklet
Q1. [5 Marks]
समाजशास्त्र को परिभाषित करते हुए किंग्सले डेविस (Kinsley Davis) और एच.एम. जॉनसन (H.M. Johnson) के विचारों का उल्लेख करें।
✅ Model Answer:समाजशास्त्र लैटिन शब्द 'सोसियस' (साथी/समाज) और ग्रीक शब्द 'लोगोस' (अध्ययन) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ समाज का वैज्ञानिक अध्ययन है । किंग्सले डेविस के अनुसार, समाजशास्त्र मानव समाज का अध्ययन है । वहीं एच.एम. जॉनसन इसे सामाजिक समूहों, उनके आंतरिक संगठन रूपों, इन रूपों को बनाए रखने या बदलने वाली प्रक्रियाओं और समूहों के बीच संबंधों का अध्ययन मानते हैं ।
Q2. [5 Marks]
समाजशास्त्र के उद्भव में प्रबोधन काल (Enlightenment) और फ्रांसीसी क्रांति की क्या भूमिका रही?
✅ Model Answer:अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में यूरोप के सामाजिक बदलावों ने समाजशास्त्र को जन्म दिया । प्रबोधन काल ने परंपरागत विश्वदृष्टि को चुनौती दी और रूसो व वॉल्टेयर जैसे दार्शनिकों के माध्यम से स्वतंत्रता, लोकतंत्र व तर्क जैसे विचारों को स्थापित किया । इसी बौद्धिक आधार पर 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने राजतंत्र का अंत कर स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के मूल्यों की स्थापना की, जिससे उत्पन्न नई सामाजिक व्यवस्थाओं के वैज्ञानिक अध्ययन हेतु समाजशास्त्र का विकास हुआ ।
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Paper-I3
📚 Model Answer Booklet
Q3. [5 Marks]
भारत में समाजशास्त्र के विकास के प्रथम और द्वितीय चरण की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
✅ Model Answer:भारत में समाजशास्त्र के विकास के प्रथम चरण में अंग्रेजों ने भारतीय समाज को समझने का प्रयास किया, जिसके तहत 1784 में विलियम जोंस ने रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की स्थापना की । द्वितीय चरण व्यावसायिक समाजशास्त्रियों का काल था, जिसमें 1919 में बॉम्बे विश्वविद्यालय में शिक्षण प्रारंभ हुआ । इसी चरण में जी.एस. घुर्ये, डी.पी. मुकर्जी और आर.के. मुखर्जी जैसे विचारकों ने कलकत्ता और लखनऊ विश्वविद्यालयों में समाजशास्त्र को अकादमिक रूप से स्थापित किया ।
Q4. [5 Marks]
एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर और शरत चंद्र रॉय को भारतीय समाजशास्त्र का आकस्मिक अग्रणी क्यों कहा जाता है?
✅ Model Answer:एल.के. अनंतकृष्ण अय्यर ने एक क्लर्क के रूप में शुरुआत की और भारत के पहले स्वशिक्षित नृशास्त्री बनकर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त की । वे इंडियन साइंस कांग्रेस के एंथ्रोपोलॉजी सेक्शन के अध्यक्ष भी रहे । शरत चंद्र रॉय एक वकील थे, जिनकी रांची कोर्ट में वकालत के दौरान आदिवासी प्रथाओं की व्याख्या करते हुए नृशास्त्र में गहरी रुचि जगी । उन्होंने 1922 में 'Man in India' नामक प्रसिद्ध जर्नल की स्थापना की । बिना औपचारिक समाजशास्त्रीय डिग्री के इनके अभूतपूर्व योगदान के कारण इन्हें आकस्मिक अग्रणी कहा जाता है ।
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Paper-I4
📚 Model Answer Booklet
Q5. [5 Marks]
जी.एस. घुर्ये द्वारा प्रस्तुत रर्बनाइजेशन (Rurbanization) और विवाह संबंधी विचारों को स्पष्ट करें।
✅ Model Answer:भारतीय समाजशास्त्र के पितामह जी.एस. घुर्ये ने रर्बनाइजेशन की अवधारणा दी, जिसका अर्थ ग्रामीण (Rural) और शहरी (Urbanisation) विशेषताओं व सुविधाओं का एकीकरण है । विवाह और नातेदारी के अध्ययन में घुर्ये ने हिंदू समाज में तीन प्रकार के विवाह प्रतिबंधों का उल्लेख किया है । इनमें एंडोगैमी, एक्सोगैमी और हाइपरगैमी शामिल हैं, जो भारतीय सामाजिक संरचना और जाति व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ।
Q6. [5 Marks]
राधाकमल मुखर्जी की सामाजिक पारिस्थितिकी (Social Ecology) और मूल्यों का सिद्धांत (Theory of Values) क्या है?
✅ Model Answer:लखनऊ स्कूल के संस्थापक राधाकमल मुखर्जी ने सामाजिक पारिस्थितिकी की अवधारणा दी, जो भूगर्भीय, भौगोलिक, जैविक और सामाजिक कारकों की परस्पर क्रिया पर आधारित है । उनके मूल्यों के सिद्धांत के अनुसार, समाज में तथ्य और मूल्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं । उनका मानना था कि खाने या पहनावे जैसी सरल मानवीय क्रियाएँ भी सामाजिक मूल्यों द्वारा आकारित होती हैं, तथा आर्थिक लेन-देन केवल बाजार शक्तियों से नहीं बल्कि जाति व धार्मिक नियमों से प्रभावित होते हैं ।
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Paper-I5
📚 Model Answer Booklet
Q7. [5 Marks]
डी.पी. मुकर्जी के अनुसार भारत में वर्ग व्यवस्था (On Classes) का स्वरूप कैसा है?
✅ Model Answer:मार्क्सियोलॉजिस्ट विचारक डी.पी. मुकर्जी ने द्वंद्वात्मक भौतिकवाद के दृष्टिकोण से भारतीय समाज का विश्लेषण करते हुए यहाँ की वर्ग व्यवस्था को दो मुख्य भागों में विभाजित किया है । पहला स्वामी वर्ग (Masters) और दूसरा सेवा वर्ग (Service) । मुकर्जी के अनुसार, भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना में सेवा वर्ग नैतिक रूप से स्वामी वर्ग की सेवा करने के लिए बाध्य है । उन्होंने यह भी माना कि भारत में जाति का जन्म आर्य आक्रमण से हुआ था ।
Q8. [5 Marks]
ए.आर. देसाई के मार्क्सवादी दृष्टिकोण में ब्रिटिश उपनिवेशवाद और भारतीय राज्य की क्या भूमिका बताई गई है?
✅ Model Answer:बॉम्बे स्कूल के ए.आर. देसाई ने मार्क्सवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए तर्क दिया कि ब्रिटिश उपनिवेशवाद ने पारंपरिक भारतीय समाज को पूँजीवादी व्यवस्था में बदल दिया । उन्होंने अपनी आलोचनात्मक दृष्टि से यह स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी नवस्वतंत्र भारतीय राज्य एक पूँजीपति वर्ग की तरह ही काम कर रहा है । जब सत्ता की ऐसी आलोचना असामान्य थी, तब भी देसाई ने ग्रामीण राष्ट्रवाद और सामाजिक-आर्थिक नीतियों का निर्भीक विश्लेषण प्रस्तुत किया ।
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