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Paper-I1

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World history— प्रबोधन काल (Enlightenment)

Paper-I — सामान्य अध्ययन-I

Total Marks: 200Time: 3 HoursDate: 11/08/2026

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  • Correction Pen का उपयोग निषिद्ध है। / Use of Correction Pen is strictly forbidden.
  • उत्तर हिंदी या अंग्रेजी में दीजिए। / Answer in Hindi or English.
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Paper-I2
📚 Model Answer Booklet
Q1. [5 Marks]
यूरोपीय प्रबोधन काल (Enlightenment) को परिभाषित कीजिए।
✅ Model Answer:प्रबोधन काल 17वीं-18वीं सदी का वह बौद्धिक आंदोलन था जिसने परंपरागत धर्मसत्ता और ईश्वरीय आदेश के स्थान पर तर्क, मानव विवेक, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सर्वोच्च माना। इमैनुअल कांट के अनुसार इसका मूल मंत्र "Sapere Aude" (अपनी बुद्धि का साहसपूर्वक प्रयोग करो) था। इसने आधुनिक लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की वैचारिक नींव रखी।
Q2. [5 Marks]
18वीं सदी में यूरोप में प्रबोधन काल के उद्भव के मुख्य कारणों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
✅ Model Answer:प्रबोधन काल के उद्भव में 14वीं-16वीं सदी के पुनर्जागरण (मानवतावाद) और धर्मसुधार आंदोलन द्वारा चर्च के एकाधिकार को चुनौती देना प्रमुख था। इसके अतिरिक्त 17वीं सदी की वैज्ञानिक क्रांति (न्यूटन, गैलीलियो), प्रिंटिंग प्रेस द्वारा नए विचारों का प्रसार, भौगोलिक खोजों से प्राप्त नवीन वैश्विक अनुभव तथा 1688 की इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति ने इसके लिए वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार की।
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Paper-I3
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Q3. [5 Marks]
वैज्ञानिक पद्धति के विकास में फ्रांसिस बेकन और रेने देकार्त के योगदान की तुलना कीजिए।
✅ Model Answer:फ्रांसिस बेकन को 'अनुभववाद' (Empiricism) का जनक माना जाता है, जिन्होंने प्रयोगों और अवलोकन पर आधारित 'आगमनात्मक पद्धति' (Inductive Method) दी तथा कहा कि "ज्ञान ही शक्ति है"। इसके विपरीत, रेने देकार्त 'बुद्धिवाद' (Rationalism) के जनक थे, जिन्होंने "Cogito Ergo Sum" (मैं सोचता हूँ, इसलिए मैं हूँ) का सिद्धांत देते हुए गणितीय तर्क पर आधारित 'निगमनात्मक पद्धति' (Deductive Method) का प्रतिपादन किया।
Q4. [5 Marks]
फ्रांसीसी विचारक वोल्तेयर के प्रमुख विचारों एवं रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
✅ Model Answer:वोल्तेयर फ्रांसीसी प्रबोधन के सबसे प्रखर विचारक थे, जिन्हें "प्रबोधन की तलवार" कहा जाता है। उन्होंने व्यंग्य के माध्यम से चर्च के भ्रष्टाचार और अंधविश्वास पर कठोर प्रहार किया ("Ecrasez L'infame!")। वे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक सहिष्णुता तथा डीइज्म (Deism) के प्रबल समर्थक थे। 'कैंडिड' (Candide) तथा 'फिलोसोफिकल डिक्शनरी' (1764) उनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं।
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Paper-I4
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Q5. [5 Marks]
मॉन्टेस्क्यू के 'शक्ति-पृथक्करण' (Separation of Powers) के सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए।
✅ Model Answer:मॉन्टेस्क्यू ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द स्पिरिट ऑफ द लॉज' (1748) में निरंकुश शासन को रोकने हेतु सरकार की शक्तियों को तीन पृथक अंगों—विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका में विभाजित करने का सिद्धांत दिया। उन्होंने कहा कि जब ये तीनों शक्तियां एक ही व्यक्ति या संस्था में केंद्रित होती हैं, तो तानाशाही जन्म लेती है। यह सिद्धांत आधुनिक लोकतांत्रिक संविधानों का आधार है।
Q6. [5 Marks]
जॉन लॉक के 'प्राकृतिक अधिकारों' (Natural Rights) एवं 'ताबुला रासा' के सिद्धांत को समझाइए।
✅ Model Answer:जॉन लॉक के अनुसार प्रत्येक मनुष्य को जन्म से जीवन, स्वतंत्रता तथा संपत्ति का 'प्राकृतिक अधिकार' प्राप्त है, जिनकी रक्षा करना सरकार का मूल कर्तव्य है। यदि सरकार विफल रहती है, तो जनता को उसे बदलने का अधिकार है। लॉक ने 'ताबुला रासा' का सिद्धांत देते हुए कहा कि मनुष्य का मस्तिष्क जन्म के समय खाली स्लेट होता है और ज्ञान अनुभव से प्राप्त होता है।
Q7. [5 Marks]
ज्याँ-जाक रूसो के 'सामान्य इच्छा' (General Will) के सिद्धांत की व्याख्या कीजिए।
✅ Model Answer:रूसो ने अपनी पुस्तक 'द सोशल कॉन्ट्रैक्ट' (1762) में कहा कि "मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, लेकिन वह सर्वत्र जंजीरों में जकड़ा है।" उन्होंने 'सामान्य इच्छा' का सिद्धांत दिया, जिसके अनुसार राज्य की संप्रभुता जनता की सामूहिक और साझा इच्छा में निहित है। रूसो प्रत्यक्ष लोकतंत्र और लोकप्रिय संप्रभुता के समर्थक थे, जिसके विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति को सर्वाधिक प्रेरित किया।
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Paper-I5
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Q8. [5 Marks]
देनी दिदेरो की 'एंसाइक्लोपीडिया' (Encyclopedie) का प्रबोधन आंदोलन में क्या महत्व था?
✅ Model Answer:देनी दिदेरो द्वारा संपादित 28 खंडों की 'एंसाइक्लोपीडिया' (1751-1772) को "प्रबोधन काल की बाइबिल" कहा जाता है। इसमें वोल्तेयर, रूसो तथा मॉन्टेस्क्यू सहित प्रमुख विचारकों ने 72,000 से अधिक लेख लिखे। इसका मुख्य उद्देश्य मानव ज्ञान को तर्क और विज्ञान की कसौटी पर संकलित कर अंधविश्वास, धार्मिक कट्टरता तथा निरंकुशता को समाप्त करना था। इसने जनता में क्रांतिकारी चेतना जगाई।
Q9. [5 Marks]
प्रबोधन कालीन आर्थिक एवं नारीवादी विचारों में एडम स्मिथ और मेरी वॉलस्टनक्राफ्ट के योगदान का वर्णन कीजिए।
✅ Model Answer:एडम स्मिथ ने अपनी पुस्तक 'द वेल्थ ऑफ नेशंस' (1776) में अमुक हस्तक्षेप (Laissez-Faire) और 'अदृश्य हाथ' (Invisible Hand) का सिद्धांत देकर आधुनिक पूंजीवादी अर्थव्यवस्था की नींव रखी। दूसरी ओर, मेरी वॉलस्टनक्राफ्ट ने 'अ विंडिकेशन ऑफ द राइट्स ऑफ वुमन' (1792) में महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों की मांग कर नारीवादी प्रबोधन (Feminist Enlightenment) की शुरुआत की।
Q10. [5 Marks]
प्रबोधन कालीन विचारों के प्रसार में सलोन (Salons) और कॉफीहाउस (Coffeehouses) की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
✅ Model Answer:प्रबोधन कालीन नए विचारों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुँचाने में सलोन और कॉफीहाउस ने वैचारिक मंच का कार्य किया। फ्रांस में मादाम द ज्यॉफ्रां जैसी महिलाओं द्वारा संचालित 'सलोन' में दार्शनिक और अभिजात वर्ग बहस करते थे। वहीं इंग्लैंड के 'कॉफीहाउस' में आम नागरिक, व्यापारी और बुद्धिजीवी समाचार पत्रों और पर्चों पर खुलकर सामाजिक-राजनीतिक चर्चा करते थे।
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Paper-I6
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Q11. [10 Marks]
17वीं सदी की वैज्ञानिक क्रांति ने यूरोपीय प्रबोधन आंदोलन (Enlightenment) को किस प्रकार जन्म दिया? आइज़क न्यूटन के प्रभाव के विशेष संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
✅ Model Answer:17वीं सदी की वैज्ञानिक क्रांति ने यूरोपीय प्रबोधन आंदोलन की वैचारिक एवं दार्शनलक नींव रखी। इससे पूर्व यूरोपीय समाज में चर्च और बाइबल के वाक्य ही अंतिम सत्य माने जाते थे। परंतु कोपर्निकस की हेलियोसेंट्रिक थ्योरी (सूर्य केंद्रित सिद्धांत) और गैलीलियो के दूरबीन शोधों ने चर्च की धार्मिक मान्यताओं को असत्य सिद्ध कर दिया। फ्रांसिस बेकन के अनुभववाद और रेने देकार्त के बुद्धिवाद ने अवलोकन तथा तर्क को ज्ञान का एकमात्र आधार बनाया。

इस दिशा में आइज़क न्यूटन की कृति 'प्रिंसिपिया मैथमैटिका' (1687) तथा उनके गुरुत्वाकर्षण के नियमों का सर्वाधिक निर्णायक प्रभाव पड़ा। न्यूटन ने सिद्ध किया कि संपूर्ण भौतिक ब्रह्मांड ईश्वर की चमत्कारी मर्जी से नहीं, बल्कि निश्चित, सर्वव्यापी और गणितीय प्राकृतिक नियमों से संचालित होता है。

इस खोज से प्रबोधन कालीन विचारकों (जैसे जॉन लॉक, वोल्तेयर) को यह प्रेरणा मिली कि यदि भौतिक प्रकृति के नियम तर्कसंगत हैं, तो मानव समाज, राजनीति, धर्म और अर्थव्यवस्था के नियम भी तर्क पर आधारित होने चाहिए। इसी सोच ने निरंकुश राजतंत्र और चर्च के एकाधिकार पर प्रहार कर प्रबोधन आंदोलन को जन्म दिया।
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Paper-I7
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Q12. [10 Marks]
जॉन लॉक के राजनीतिक विचारों (प्राकृतिक अधिकार एवं सामाजिक अनुबंध) की विवेचना कीजिए तथा अमरीकी क्रांति पर इसके प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए।
✅ Model Answer:जॉन लॉक (1632-1704) को उदारवादी लोकतंत्र का जनक माना जाता है। उन्होंने अपनी कृति 'टू ट्रीटीज ऑफ गवर्नमेंट' (1689) में राजाओं के 'दैवीय अधिकार' के सिद्धांत को खारिज किया और दो प्रमुख राजनीतिक विचार प्रस्तुत किए:

1. प्राकृतिक अधिकार का सिद्धांत: लॉक के अनुसार प्रत्येक मनुष्य को जन्म सिद्ध अधिकार के रूप में जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति (Life, Liberty, Property) का अधिकार प्राप्त है। ये अधिकार अदेय हैं और राज्य का गठन इन्हीं की सुरक्षा हेतु हुआ है。
2. सामाजिक अनुबंध सिद्धांत: सरकार की शक्ति शासक में नहीं, बल्कि जनता की सहमति में निहित है। यदि सरकार जनता के प्राकृतिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहती है, तो जनता को ऐसी सरकार को बदलने या उखाड़ फेंकने का नैतिक अधिकार है。

अमरीकी क्रांति पर प्रभाव: लॉक के विचारों ने 1776 की अमरीकी स्वतंत्रता की घोषणा (American Declaration of Independence) को सीधे प्रभावित किया। थॉमस जेफरसन ने लॉक के "जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति" को अमरीकी घोषणापत्र में "जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज" (Pursuit of Happiness) के रूप में अपनाया। इसने आधुनिक संवैधानिक शासन की स्थापना की।
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Paper-I8
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Q13. [10 Marks]
जॉन लॉक और ज्याँ-जाक रूसो के सामाजिक अनुबंध (Social Contract) के सिद्धांतों की तुलना कीजिए। रूसो के विचारों ने फ्रांसीसी क्रांति को किस प्रकार प्रेरित किया?
✅ Model Answer:जॉन लॉक और ज्याँ-जाक रूसो दोनों प्रबोधन काल के प्रमुख सामाजिक अनुबंध दार्शनिक थे, परंतु उनके दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण भिन्नता थी:

1. प्राकृतिक अवस्था एवं अधिकार: लॉक के अनुसार प्राकृतिक अवस्था शांतिपूर्ण थी जहाँ संपत्ति एक प्राकृतिक अधिकार थी। रूसो के अनुसार प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य निष्पाप ('Noble Savage') था, परंतु निजी संपत्ति के उदय ने असमानता और भ्रष्टाचार पैदा किया。
2. लोकतंत्र का स्वरूप: लॉक ने प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र और सीमित सरकार का समर्थन किया, जबकि रूसो ने प्रत्यक्ष लोकतंत्र तथा जनता की 'सामान्य इच्छा' (General Will) पर आधारित लोकप्रिय संप्रभुता (Popular Sovereignty) पर बल दिया。

फ्रांसीसी क्रांति पर प्रभाव: रूसो की कृति 'द सोशल कॉन्ट्रैक्ट' (1762) का प्रसिद्ध वाक्य "मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, परंतु वह सर्वत्र जंजीरों में जकड़ा है" फ्रांसीसी क्रांति का मुख्य नारा बना। उनकी 'सामान्य इच्छा' की अवधारणा ने निरंकुश लुई 16वें के शासन और सामंती विशेषाधिकारों को अवैध ठहराया। क्रांति का अमर नारा "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" (Liberty, Equality, Fraternity) रूसो के विचारों की ही प्रत्यक्ष उपज था।
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Paper-I9
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Q14. [10 Marks]
यूरोपीय प्रबोधन काल (Enlightenment) के परिणामों का राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं वैश्विक आयामों में बहुआयामी विश्लेषण कीजिए।
✅ Model Answer:प्रबोधन काल (17वीं-18वीं सदी) ने यूरोपीय इतिहास और आधुनिक विश्व व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। इसके परिणामों का बहुआयामी विश्लेषण निम्न प्रकार है:

1. राजनीतिक आयाम: राजाओं के दैवीय अधिकार के सिद्धांत का अंत हुआ। मॉन्टेस्क्यू के शक्ति-पृथक्करण और लॉक के प्राकृतिक अधिकारों ने आधुनिक संवैधानिक लोकतंत्रों तथा लिखित संविधानों की नींव रखी。
2. आर्थिक आयाम: मर्केंटाइलिज्म (वणिकवाद) का विरोध हुआ। एडम स्मिथ के मुक्त बाजार (Laissez-Faire) और पूंजीवादी व्यवस्था का जन्म हुआ, जिससे व्यापारिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिला。
3. सामाजिक एवं दार्शनिक आयाम: धार्मिक सहिष्णुता और धर्मनिरपेक्ष राज्य का उदय हुआ। वर्ग विशेषाधिकारों की आलोचना हुई तथा सार्वभौमिक शिक्षा एवं मेरी वॉलस्टनक्राफ्ट द्वारा महिला अधिकारों की मांग उठी。
4. वैश्विक प्रभाव: प्रबोधन कालीन विचारों ने 1776 की अमरीकी क्रांति, 1789 की फ्रांसीसी क्रांति तथा 19वीं सदी के लैटिन अमरीकी स्वतंत्रता संग्रामों को वैचारिक आधार प्रदान किया。

निष्कर्षतः प्रबोधन काल ने मध्यकालीन अंधविश्वासों को समाप्त कर आधुनिक, तर्कसंगत और मानवाधिकारवादी विश्व का निर्माण किया।
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Paper-I10
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Q15. [10 Marks]
यूरोपीय प्रबोधन काल के विचारों का भारतीय पुनर्जागरण एवं भारतीय संविधान पर पड़े प्रभावों की समीक्षा कीजिए।
✅ Model Answer:यूरोपीय प्रबोधन काल के तर्कसंगत, मानवतावादी और लोकतांत्रिक विचारों का प्रभाव भारत के आधुनिक इतिहास और संवैधानिक विकास पर गहराई से पड़ा:

1. भारतीय पुनर्जागरण पर प्रभाव: 19वीं सदी के समाज सुधारक राजा राममोहन राय को "भारत का वोल्तेयर" कहा जाता है। उन्होंने प्रबोधन कालीन तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाकर सती प्रथा, जातिवाद और मूर्तिपूजा का विरोध किया तथा ब्रह्म समाज (1828) की स्थापना की। इसी प्रकार ज्योतिबा फुले ने मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता पर बल दिया。

2. भारतीय संविधान पर प्रभाव:
- उद्देश्यिका (Preamble): संविधान की प्रस्तावना में वर्णित "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" (Liberty, Equality, Fraternity) के आदर्श सीधे फ्रांसीसी क्रांति और प्रबोधन काल की देन हैं。
- मूल अधिकार (Part III): जॉन लॉक के 'प्राकृतिक अधिकारों' का प्रभाव भारतीय संविधान में अनुबंधित मौलिक अधिकारों (जैसे जीवन व स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार) में स्पष्ट दिखता है。
- शक्ति-पृथक्करण एवं धर्मनिरपेक्षता: मॉन्टेस्क्यू के सिद्धांत के अनुरूप विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका का पृथक्करण तथा धर्मनिरपेक्ष राज्य की स्थापना प्रबोधन काल के चिंतन पर आधारित है।
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