1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं संविधान सभा की माँग (1934–1946)
| वर्ष / घटना |
प्रस्तावक / संस्था |
विवरण एवं ऐतिहासिक परिणाम |
| 1934 |
एम.एन. रॉय (M.N. Roy) |
सर्वप्रथम स्वतंत्र संविधान सभा (Constituent Assembly) का विचार रखा (साम्यवादी आंदोलन के प्रणेता) |
| 1935 |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) |
आधिकारिक रूप से संविधान निर्माण हेतु संविधान सभा की प्रथम बार माँग |
| 1938 |
पं. जवाहरलाल नेहरू |
घोषणा: स्वतंत्र भारत का संविधान बिना बाहरी हस्तक्षेप के वयस्क मताधिकार द्वारा निर्वाचित सभा बनाएगी |
| 1939 |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) |
कार्यकारिणी द्वारा प्रस्ताव पारित कर नेहरू की माँग को आधिकारिक नीति बनाया |
| 1940 |
अगस्त प्रस्ताव (August Offer) |
ब्रिटिश सरकार द्वारा संविधान सभा की माँग को सैद्धांतिक रूप से पहली बार आधिकारिक स्वीकृति |
| 1942 |
क्रिप्स मिशन (Cripps Mission) |
सर स्टैफोर्ड क्रिप्स का प्रस्ताव: द्वितीय विश्वयुद्ध बाद निर्वाचित सभा; मुस्लिम लीग द्वारा अस्वीकृत (2 सभाओं की माँग) |
| 1946 |
कैबिनेट मिशन (Cabinet Mission) |
3 सदस्यीय मिशन (पैथिक लॉरेंस, स्टैफोर्ड क्रिप्स, ए.वी. अलेक्जेंडर); आगमन 24 मार्च 1946, योजना 16 मई 1946; 1 ही संविधान सभा का व्यावहारिक खाका प्रस्तुत |
2. संविधान सभा की संरचना, सीट आवंटन एवं चुनाव पद्धति
💡 एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote - STV): आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली, जिसमें मतदाता वरीयता (1st, 2nd, 3rd) दर्ज करते हैं और निर्धारित कोटा पाने वाले प्रत्याशी निर्वाचित होते हैं।
| इकाई / क्षेत्र |
सीटें |
प्रतिनिधित्व एवं निर्वाचन प्रक्रिया का स्वरूप |
| ब्रिटिश भारत (11 गवर्नर प्रांत) |
292 |
मद्रास, बॉम्बे, संयुक्त प्रांत, बिहार, मध्य प्रांत, उड़ीसा, पंजाब, उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP), सिंध, बंगाल, असम; प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन |
| मुख्य आयुक्त प्रांत (Chief Comm.) |
4 |
4 प्रांत (प्रत्येक से 1 सीट): दिल्ली, अजमेर-मेरवाड़ा, कूर्ग, ब्रिटिश बलूचिस्तान |
| देशी रियासतें (Princely States) |
93 |
रियासतों के शासकों/प्रमुखों द्वारा सीधे मनोनीत (चुनाव में भाग नहीं लिया) |
| कुल मूल सदस्य संख्या |
389 |
जनसंख्या अनुपात: प्रति 10 लाख की आबादी पर 1 सीट निर्धारित |
| विभाजन उपरांत सदस्य संख्या |
299 |
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 व विभाजन उपरांत शेष बची संख्या (229 प्रांतीय + 70 रियासती) |
| समुदाय |
सीटें |
सामाजिक वर्ग |
संख्या |
| हिंदू |
163 |
अनुसूचित जातियाँ (SC) |
31 |
| मुसलमान |
80 |
पिछड़ी जनजातियाँ (ST) |
6 |
| भारतीय ईसाई |
6 |
महिला सदस्य (Women) |
15 |
| सिख (पंजाब में) |
4 |
एंग्लो-इंडियन (Anglo-Indian) |
3 |
| पारसी |
3 |
— |
— |
विशेष तथ्य: महात्मा गांधी एवं मोहम्मद अली जिन्ना संविधान सभा के सदस्य नहीं थे। महिला सदस्यों में हंसा मेहता, सरोजिनी नायडू, राजकुमारी अमृत कौर आदि प्रमुख।
राजस्थान प्रतिनिधित्व: राजपूताना रियासतों से कुल 13–15 प्रतिनिधि (जयपुर 3, जोधपुर 2, उदयपुर 2, बीकानेर 1, कोटा 1, अलवर 1); वी.टी. कृष्णमाचारी, हीरालाल शास्त्री, माणिक्यलाल वर्मा आदि प्रमुख।
3. कार्यप्रणाली, प्रमुख पदाधिकारी एवं स्वतंत्रता अधिनियम 1947
| दायित्व / पद |
नाम / व्यक्तित्व |
दिनांक एवं ऐतिहासिक विवरण |
| प्रथम बैठक |
207 सदस्य उपस्थित |
9 दिसम्बर 1946 (मुस्लिम लीग द्वारा बहिष्कार; सेंट्रल हॉल, नई दिल्ली) |
| अस्थायी अध्यक्ष |
डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा |
9 दिसम्बर 1946 (वरिष्ठतम सदस्य; फ्रांसीसी परंपरा अनुसार मनोनयन) |
| स्थायी अध्यक्ष |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
11 दिसम्बर 1946 (सर्वसम्मति से निर्वाचित) |
| उपाध्यक्ष (दो उपाध्यक्ष) |
एच.सी. मुखर्जी व वी.टी. कृष्णमाचारी |
एच.सी. मुखर्जी (25 जनवरी 1947); वी.टी. कृष्णमाचारी (16 जुलाई 1947) |
| संवैधानिक सलाहकार |
सर बी.एन. राव (Sir B.N. Rau) |
संविधान का प्रारंभिक कच्चा प्रारूप तैयार करने वाले विशेषज्ञ |
| सभा के सचिव |
एच.वी.आर. आयंगर (H.V.R. Iengar) |
संविधान सभा के आधिकारिक सचिव |
| मुख्य प्रारूपकार |
एस.एन. मुखर्जी (S.N. Mukherjee) |
(Chief Draftsman) — अनुच्छेदों की कानूनी भाषा के शिल्पी |
| विषय / आयाम |
स्वतंत्रता अधिनियम 1947 से पूर्व |
स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के पश्चात् |
| निकाय का स्वरूप |
ब्रिटिश सरकार के प्रस्तावों से निर्मित सीमित निकाय |
पूर्णतः संप्रभु निकाय (Sovereign Body); ब्रिटिश कानूनों को निरस्त करने में सक्षम |
| सदन की दोहरी भूमिका |
केवल संविधान निर्माण का दायित्व |
दोहरा कार्य: (1) संविधान निर्माण (अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद), (2) विधायिका/संसद (अध्यक्ष: जी.वी. मावलंकर) |
| सदस्य संख्या |
कुल 389 सदस्य (अविभाजित भारत) |
कुल 299 सदस्य (विभाजन उपरांत पाकिस्तान क्षेत्र अलग) |
4. उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution, 1946)
💡 उद्देश्य प्रस्ताव: 13 दिसम्बर 1946 को पं. नेहरू द्वारा प्रस्तुत एवं 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकृत। यह संविधान का मूल दार्शनिक मार्गदर्शक बना, जिसका संशोधित रूप वर्तमान प्रस्तावना (Preamble) है।
| प्रमुख दार्शनिक आधार |
उद्देश्य प्रस्ताव में अंतर्निहित मूल प्रावधान |
| संप्रभु गणराज्य |
भारत को स्वतंत्र संप्रभु गणराज्य (Independent Sovereign Republic) घोषित करना |
| संघीय व्यवस्था |
ब्रिटिश भारत, देशी रियासतों व अन्य क्षेत्रों का एक संघ (Union); स्वायत्त इकाइयाँ |
| जनता की सर्वोच्चता |
संप्रभु स्वतंत्र भारत की समस्त शक्तियाँ एवं प्राधिकार सीधे जनता से व्युत्पन्न |
| न्याय व स्वतंत्रता |
समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म व उपासना की स्वतंत्रता |
| सुरक्षा कवच |
अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, जनजातीय क्षेत्रों एवं दलित वर्गों हेतु पर्याप्त सुरक्षात्मक उपाय (Safeguards) |
| विश्व शांति |
क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा तथा अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं मानव कल्याण में भारत का सक्रिय योगदान |
5. संविधान सभा की प्रमुख समितियाँ एवं उप-समितियाँ
| प्रमुख समिति (Major Committee) |
अध्यक्ष (Chairman) |
प्रमुख कार्यक्षेत्र / दायित्व |
| संघ शक्ति समिति (Union Powers Comm.) |
पं. जवाहरलाल नेहरू |
केंद्रीय शक्तियों व विषयों का निर्धारण |
| संघ संविधान समिति (Union Const. Comm.) |
पं. जवाहरलाल नेहरू |
संघीय कार्यपालिका व संसद का ढाँचा |
| प्रांतीय संविधान समिति (Provincial Const.) |
सरदार वल्लभभाई पटेल |
प्रांतों के संवैधानिक स्वरूप की रूपरेखा |
| प्रारूप समिति (Drafting Committee) |
डॉ. भीमराव अंबेडकर |
नए संविधान का वास्तविक वैधानिक प्रारूप बनाना |
| मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक व जनजातीय समिति |
सरदार वल्लभभाई पटेल |
नागरिक अधिकारों व संरक्षण हेतु वृहद समिति |
| प्रक्रिया नियम समिति (Rules of Procedure) |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
सभा की कार्यप्रणाली संचालन नियम |
| राज्य समिति (राज्यों से वार्ता हेतु) |
पं. जवाहरलाल नेहरू |
रियासतों व राज्यों से बातचीत एवं समन्वय |
| संचालन समिति (Steering Committee) |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
सदन के दैनिक कार्य-व्यापार का संचालन |
| महत्वपूर्ण उप-समिति / लघु समिति |
अध्यक्ष (Chairman) |
दायित्व / विषय |
| मौलिक अधिकार उप-समिति |
जे.बी. कृपलानी (J.B. Kripalani) |
मूल अधिकारों की सूची का निर्धारण |
| अल्पसंख्यक उप-समिति |
एच.सी. मुखर्जी (H.C. Mukherjee) |
अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों की सिफारिश |
| उत्तर-पूर्व सीमा जनजातीय व असम क्षेत्र उप-समिति |
गोपीनाथ बारदोलोई (Gopinath Bardoloi) |
असम व पूर्वोत्तर सीमांत क्षेत्रों का प्रशासनिक प्रारूप |
| अपवर्जित/आंशिक अपवर्जित क्षेत्र (असम अतिरिक्त) |
ए.वी. ठक्कर (A.V. Thakkar) |
जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रशासनिक उपाय |
| राष्ट्रीय ध्वज तदर्थ समिति (Ad-hoc on Flag) |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
राष्ट्रीय ध्वज अंगीकरण संबंधी परामर्श |
| कार्य संचालन समिति (Order of Business) |
डॉ. के.एम. मुंशी |
दैनिक विधायी कार्यसूची का निर्धारण |
| सदन समिति (House Committee) |
बी. पट्टाभि सीतारमैया |
सदस्यों के आवास व अन्य व्यवस्थाएँ |
| प्रत्यय-पत्र समिति (Credentials Committee) |
अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर |
सदस्यों की पात्रता व प्रत्यय-पत्रों की जाँच |
6. प्रारूप समिति (Drafting Committee) एवं डॉ. बी.आर. अंबेडकर
| क्र. |
सदस्य का नाम |
संवैधानिक दायित्व एवं प्रतिस्थापन विवरण |
| 1 |
डॉ. भीमराव अंबेडकर (अध्यक्ष) |
भारतीय संविधान के जनक व मुख्य वास्तुकार (Chief Architect); प्रारूप के प्रणेता |
| 2 |
एन. गोपालस्वामी अय्यंगार |
प्रारूपण में प्रमुख प्रशासनिक व विधिक योगदान |
| 3 |
अल्लादि कृष्णस्वामी अय्यर |
प्रख्यात न्यायविद्, संवैधानिक अनुच्छेदों के विशेषज्ञ |
| 4 |
डॉ. के.एम. मुंशी |
साहित्यकार व विधिवेत्ता; कांग्रेस के सक्रिय नेता |
| 5 |
सैयद मोहम्मद सादुल्ला |
असम के पूर्व प्रधानमंत्री; एकमात्र मुस्लिम लीग सदस्य |
| 6 |
एन. माधव राव |
बी.एल. मित्तर के अस्वस्थता के कारण त्यागपत्र देने पर स्थान ग्रहण |
| 7 |
टी.टी. कृष्णमाचारी |
1948 में डी.पी. खेतान की मृत्यु के पश्चात रिक्त स्थान पर नियुक्त |
कार्यकाल व प्रारूप प्रकाशन: गठन: 29 अगस्त 1947। कुल बैठकें: 141 दिन। प्रथम प्रारूप फरवरी 1948 में प्रकाशित (जनता को 8 माह का समय)। द्वितीय प्रारूप अक्टूबर 1948 में जनता की टिप्पणियों के उपरांत प्रकाशित।
🧠 प्रारूप समिति सदस्य याद रखने की युक्ति: 'अंबेडकर आए, मुंशी सादुल्ला संग; माधव-कृष्ण ने संभाला खेतान-मित्तर का रंग।'
7. संविधान निर्माण के चरण, वाचन एवं प्रमुख आँकड़े
| वाचन (Reading) |
समयावधि |
प्रमुख प्रक्रिया एवं कार्य-प्रगति |
| प्रथम वाचन (First Reading) |
4 नव. 1948 – 9 नव. 1948 |
डॉ. अंबेडकर द्वारा सभा में अंतिम प्रारूप पेश; 5 दिन तक सामान्य चर्चा |
| द्वितीय वाचन (Second Reading) |
15 नव. 1948 – 17 अक्टू. 1949 |
खंड-दर-खंड (Clause by clause) गहन विचार; कुल 7,653 संशोधन प्रस्तावित, 2,473 पर वास्तविक चर्चा |
| तृतीय वाचन (Third Reading) |
14 नव. 1949 – 26 नव. 1949 |
डॉ. अंबेडकर का प्रस्ताव पेश; 26 नवम्बर 1949 को संविधान अंगीकृत, अधिनियमित व आत्मार्पित |
| संविधान निर्माण सांख्यिकी |
आधिकारिक आँकड़ा |
संविधान निर्माण सांख्यिकी |
आधिकारिक आँकड़ा |
| कुल निर्माण समय |
2 वर्ष 11 माह 18 दिन |
कुल सत्र (Sessions) |
11 सत्र |
| कुल बैठकें (Sittings) |
165 दिन |
प्रारूप पर विचार अवधि |
114 दिन |
| प्रारूप समिति बैठकें |
141 दिन |
कुल आधिकारिक व्यय |
लगभग ₹64 लाख |
| मूल संरचना |
प्रस्तावना + 395 अनु. + 8 अनुसूचियां |
अंतिम हस्ताक्षरकर्ता |
284 सदस्य (299 में से उपस्थित) |
8. प्रवर्तन (Enforcement), विशेष अनुच्छेद एवं सुलेखन
| प्रवर्तन तिथि |
लागू किए गए विशिष्ट प्रावधान / अनुच्छेद |
ऐतिहासिक / कानूनी औचित्य |
| 26 नवम्बर 1949 (अंगीकरण) |
अनुच्छेद 5, 6, 7, 8, 9 (नागरिकता); अनु. 60 (शपथ); अनु. 324 (चुनाव); अनु. 366, 367, 379, 380 (अंतरिम संसद); अनु. 388, 391, 392, 393 (संक्षिप्त नाम) |
तात्कालिक प्रशासनिक व चुनावी आवश्यकताओं हेतु तुरंत प्रभावी किए गए |
| 26 जनवरी 1950 (प्रारंभ तिथि) |
शेष संपूर्ण संविधान पूर्ण रूप से लागू (संविधान की आधिकारिक 'Date of Commencement') |
1929 लाहौर अधिवेशन के संकल्प अनुसार 26 जनवरी 1930 को मनाए गए 'पूर्ण स्वराज दिवस (Purna Swaraj)' की ऐतिहासिक स्मृति में |
| निरस्तीकरण प्रभाव |
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 एवं भारत सरकार अधिनियम 1935 दोनों स्वतः निरस्त |
प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार उन्मूलन अधिनियम 1949 (Abolition of Privy Council Act) चालू रखा गया |
💡 अनुच्छेद 394-A (58वाँ संशोधन, 1987): राष्ट्रपति के प्राधिकार से संविधान का हिंदी में प्रामाणिक पाठ प्रकाशित किया जाएगा, जो विधिक प्रयोजनों में अंग्रेजी पाठ के समान ही आधिकारिक व मान्य होगा।
| विशिष्ट आयाम |
नाम / विवरण |
विशिष्ट आयाम |
नाम / विवरण |
| संविधान सभा की मुहर (प्रतीक) |
हाथी (Elephant) |
अंग्रेजी सुलेखक (Calligrapher) |
प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा (इटैलिक हस्तलिपि) |
| हिंदी संस्करण सुलेखक |
वसंत कृष्ण वैद्य |
पृष्ठ अलंकरण व चित्रकारी |
नंदलाल बोस व ब्योहार राममनोहर सिन्हा (शांतिनिकेतन) |
| संविधान दिवस (Constitution Day) |
26 नवम्बर (19 नव. 2015 को घोषित) |
प्रथम राष्ट्रपति शपथ |
डॉ. राजेंद्र प्रसाद (26 जनवरी 1950) |
9. संविधान के प्रभाव-स्रोत (Sources of the Constitution)
स्रोत विश्लेषण: डॉ. अंबेडकर अनुसार संविधान 'विश्व के ज्ञात संविधानों की गहन छानबीन (Ransacking)' के बाद बना। 250+ उपबंध 1935 के अधिनियम से लिए गए।
| स्रोत देश / अधिनियम |
भारतीय संविधान में ग्रहण की गई प्रमुख विशेषताएँ एवं प्रावधान |
| 1. भारत सरकार अधिनियम 1935 (सर्वाधिक प्रभाव) |
संघीय ढाँचा (Federal Scheme), राज्यपाल का कार्यालय, न्यायपालिका का ढाँचा, लोक सेवा आयोग, आपातकालीन प्रशासनिक उपबंध, प्रशासनिक विवरण |
| 2. ब्रिटेन (UK) |
संसदीय शासन प्रणाली, विधि का शासन (Rule of Law), विधायी प्रक्रिया, एकल नागरिकता, मंत्रिमंडल प्रणाली, परमाधिकार रिटें (Prerogative Writs), संसदीय विशेषाधिकार, द्विसदनवाद |
| 3. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) |
मूल अधिकार (Fundamental Rights), न्यायपालिका की स्वतंत्रता, न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review), राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment), SC/HC न्यायाधीशों को पद से हटाना, उपराष्ट्रपति का पद |
| 4. आयरलैंड (Ireland) |
राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP), राष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, राज्यसभा में 12 साहित्य-कला-विज्ञान-सेवा सदस्यों का मनोनयन |
| 5. कनाडा (Canada) |
सशक्त केंद्र के साथ संघीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) केंद्र को सौंपना, केंद्र द्वारा राज्यपालों की नियुक्ति, SC का परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction) |
| 6. ऑस्ट्रेलिया (Australia) |
समवर्ती सूची (Concurrent List), व्यापार, वाणिज्य एवं समागम की स्वतंत्रता, दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) |
| 7. जर्मनी (Weimar) |
आपातकाल के प्रवर्तन के दौरान मूल अधिकारों का स्थगन/निलंबन |
| 8. सोवियत संघ (USSR / रूस) |
मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) एवं प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय) का आदर्श |
| 9. फ्रांस (France) |
गणतंत्रात्मक ढाँचा (Republic) तथा प्रस्तावना में स्वतंत्रता, समता एवं बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity) के आदर्श |
| 10. दक्षिण अफ्रीका (South Africa) |
संविधान में संशोधन की प्रक्रिया (अनुच्छेद 368) एवं राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन |
| 11. जापान (Japan) |
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया (Procedure Established by Law — अनुच्छेद 21) |
10. संविधान का दार्शनिक आधार (Philosophical Basis)
| दार्शनिक विचारधारा |
संविधान में व्यावहारिक प्रतिबिंब / उपबंध |
संवैधानिक दर्शन एवं उद्देश्य |
| उदारवादी-व्यक्तिवादी धारा (Liberal-Democratic) |
भाग 3 (Part III: मूल अधिकार), स्वतंत्र न्यायपालिका, वयस्क मताधिकार, विधि का शासन |
व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समता एवं मानवीय गरिमा की संप्रभु रक्षा |
| समाजवादी-कल्याणकारी धारा (Socialist-Welfare) |
भाग 4 (Part IV: DPSP), सामाजिक-आर्थिक न्याय, समान कार्य हेतु समान वेतन, संपदा संकेंद्रण पर रोक |
कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की स्थापना व विषमता निवारण |
| गांधीवादी विचारधारा (Gandhian Philosophy) |
अनुच्छेद 40 (ग्राम पंचायतें), कुटीर उद्योग, मद्यनिषेध, गोवंश संरक्षण, कमजोर वर्गों की उन्नति |
लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण, ग्राम स्वराज एवं आत्मनिर्भरता की भावना |
11. संविधान सभा की प्रमुख आलोचनाएँ एवं संतुलित प्रत्युत्तर
| प्रमुख आलोचना |
आलोचकों का प्रमुख तर्क / कथन |
संतुलित प्रत्युत्तर / ऐतिहासिक यथार्थ |
| प्रतिनिधिक निकाय नहीं (Not Representative) |
सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचित नहीं थी |
अप्रत्यक्ष निर्वाचन के बावजूद हिंदू, मुस्लिम, सिख, SC, ST, पारसी, ईसाई व 15 महिलाओं सहित सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व था |
| संप्रभुता का अभाव (Not Sovereign) |
ब्रिटिश सरकार के कैबिनेट मिशन प्रस्तावों से बनी; ब्रिटिश वायसराय की अनुमति पर बैठकें |
भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 द्वारा सभा पूर्ण संप्रभु बनी; किसी भी ब्रिटिश कानून को रद्द करने की पूर्ण शक्ति प्राप्त हुई |
| समय का अत्यधिक अपव्यय |
नज़ीरुद्दीन अहमद ने तंज कसते हुए 'ड्रिफ्टिंग समिति (Drifting Committee)' कहा (अमेरिकी संविधान 4 माह में बना) |
भारत की विशाल जनसंख्या, सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता, विभाजन की त्रासदी व रियासतों के एकीकरण हेतु 165 दिन की विस्तृत बहस आवश्यक थी |
| कांग्रेस का वर्चस्व |
ग्रैनविले ऑस्टिन (Granville Austin) का कथन: ('Assembly was the Congress and the Congress was India') |
कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का संयुक्त मंच थी; अंबेडकर व श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे गैर-कांग्रेसी भी शामिल थे |
| वकीलों-राजनेताओं का प्रभुत्व |
आईवर जेनिंग्स (Ivor Jennings) ने इसे ('Lawyer's Paradise') कहा; जटिल व विस्तृत कानूनी भाषा |
नवजात स्वतंत्र राष्ट्र के लिए सुदृढ़ वैधानिक ढाँचा, अधिकारों की सूक्ष्म व्याख्या व भविष्य के विवादों से बचाव हेतु विधिक दक्षता अपरिहार्य थी |
| हिंदू प्रभुत्व का आरोप |
लॉर्ड विस्काउंट साइमन का कथन ('A body of Hindus'); विंस्टन चर्चिल: केवल एक बड़े समुदाय का प्रतिनिधित्व |
जनसंख्या अनुपात में हिंदू बहुसंख्यक थे, किंतु अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए विशेष मौलिक अधिकार (अनु. 29-30) व सलाहकार समितियाँ गठित की गईं |