📋 इस अध्याय में
- अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद — अवधारणा, प्रकृति एवं परिभाषा की चुनौती
- आतंकवाद के प्रकार एवं वर्गीकरण
- आतंकवाद के मूल कारण — गरीबी बनाम विचारधारा की बहस
- 9/11 एवं वैश्विक आतंकवाद-रोधी युद्ध का आरंभ
- इस्लामिक स्टेट (ISIS) का उदय एवं पतन
- यूरोप एवं पश्चिम में आतंकवाद के प्रमुख हमले
- संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक आतंकवाद-रोधी तंत्र
- FATF — वित्तीय कार्रवाई कार्यबल एवं आतंकवाद का वित्तपोषण
- पाकिस्तान — आतंकवाद का "एपिसेंटर"? गहन विश्लेषण
- भारत पर सीमा-पार आतंकवाद का प्रभाव — इतिहास एवं प्रमुख घटनाएं
- भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति — सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक
- भारत का घरेलू आतंकवाद-रोधी कानूनी ढांचा — UAPA एवं NIA
- आतंकवाद-रोधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका
- आतंकवाद एवं मीडिया — प्रचार-युद्ध का नया मैदान
- नए एवं उभरते खतरे — साइबर आतंकवाद, ड्रोन एवं ऑनलाइन कट्टरपंथ
📖 🌟 आरंभिक कहानी (Hook Story)
22 अप्रैल 2025 की दोपहर, कश्मीर की खूबसूरत बैसरन घाटी (पहलगाम) में सैकड़ों पर्यटक हरी-भरी वादियों का आनंद ले रहे थे। अचानक बंदूकधारी आतंकवादी घोड़े की सवारी कर रहे परिवारों के बीच घुस आए, और नाम पूछ-पूछकर, धर्म की पहचान के आधार पर 26 निर्दोष पर्यटकों को गोली मार दी। यह भारत में पिछले कई वर्षों का सबसे भीषण आतंकी हमला था। लेकिन इस बार भारत की प्रतिक्रिया पहले से बिल्कुल अलग थी — ठीक दो हफ्ते बाद, 6-7 मई 2025 की रात, भारतीय सेना ने "ऑपरेशन सिंदूर" (Operation Sindoor) के तहत पाकिस्तान एवं पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित 9 आतंकी शिविरों पर सटीक मिसाइल हमले किए — बिना किसी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाए, सिर्फ आतंकी बुनियादी ढांचे को। कुछ दिनों की सैन्य झड़प के बाद 10 मई 2025 को दोनों देशों में संघर्ष-विराम हुआ। यह घटना बताती है कि आतंकवाद अब सिर्फ एक आंतरिक सुरक्षा-चुनौती नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक मुद्दा बन चुका है जो देशों के बीच सीधे सैन्य टकराव तक की स्थिति पैदा कर सकता है। यही है इस अध्याय की केंद्रीय कहानी — अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रकृति, इसके वैश्विक तंत्र, एवं भारत की बदलती रणनीति की।
1 अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद — अवधारणा, प्रकृति एवं परिभाषा की चुनौती (Concept, Nature & Definitional Challenge)
सरल भाषा में समझें — आतंकवाद (Terrorism) आम भाषा में हिंसा के उस रूप को कहते हैं, जिसका लक्ष्य निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर व्यापक भय (Terror) पैदा करना होता है, ताकि किसी राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्य को हासिल किया जा सके। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि आज तक संयुक्त राष्ट्र सहित पूरी अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी "आतंकवाद" की एक ऐसी सर्वसम्मत परिभाषा नहीं बना पाई है, जिसे सभी देश स्वीकार करें।
परिभाषा की चुनौती — "एक का आतंकवादी, दूसरे का स्वतंत्रता सेनानी"
इसका सबसे बड़ा कारण है प्रसिद्ध कहावत — "एक व्यक्ति के लिए जो आतंकवादी है, वही दूसरे के लिए स्वतंत्रता सेनानी हो सकता है" (One man is terrorist, another man is freedom fighter)। कुछ देश किसी सशस्त्र समूह को "राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन" कहते हैं, तो पीड़ित देश उसी समूह को "आतंकवादी संगठन" घोषित करता है। इसी असहमति के कारण संयुक्त राष्ट्र में 1996 से प्रस्तावित "अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय" (CCIT — विस्तार से टॉपिक 7 में) आज तक पारित नहीं हो पाया है।
आतंकवाद की सामान्यतः स्वीकृत विशेषताएं
जानबूझकर नागरिकों/गैर-लड़ाकों को निशाना बनाना।
राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्य से प्रेरित होना।
व्यापक भय एवं असुरक्षा की भावना फैलाने का इरादा।
अक्सर गैर-राज्य अभिकर्ताओं (Non-State Actors) द्वारा संचालित, हालांकि राज्य-प्रायोजित आतंकवाद भी होता है (टॉपिक 2)।
⚠️ भारत की स्थिति
भारत हमेशा इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि आतंकवाद का कोई भी औचित्य नहीं हो सकता — चाहे उसे "स्वतंत्रता संग्राम", "प्रतिरोध" या किसी अन्य नाम से महिमामंडित करने की कोशिश की जाए। भारत का मानना है कि सीमा-पार से संचालित आतंकवाद को उसके प्रायोजक राज्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता (टॉपिक 10 में विस्तार से)।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ आतंकवाद की परिभाषा ◆ गैर-राज्य अभिकर्ता ◆ राज्य-प्रायोजित आतंकवाद ◆ CCIT
2 आतंकवाद के प्रकार एवं वर्गीकरण (Types & Classification of Terrorism)
पृष्ठभूमि — आतंकवाद कोई एक जैसा खतरा नहीं है — यह अलग-अलग उद्देश्यों, तरीकों एवं प्रेरणाओं के आधार पर कई रूपों में सामने आता है। इन्हें समझना आतंकवाद-रोधी रणनीति बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है, क्योंकि हर प्रकार से निपटने का तरीका अलग होता है।
संरचना — आतंकवाद के प्रमुख प्रकार
(A) धार्मिक/वैचारिक आतंकवाद — धार्मिक कट्टरपंथ की आड़ में हिंसा (जैसे अल-कायदा, ISIS — टॉपिक 4 व 5)।
(B) जातीय-राष्ट्रवादी/अलगाववादी आतंकवाद — किसी विशेष जातीय समूह के लिए अलग राष्ट्र/स्वायत्तता की मांग (जैसे श्रीलंका का LTTE, स्पेन का ETA, आयरलैंड का IRA)।
(C) वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism) — सशस्त्र क्रांति के ज़रिए राज्य को उखाड़ फेंकने की विचारधारा (जैसे भारत में नक्सलवाद/माओवाद)।
(D) राज्य-प्रायोजित आतंकवाद (State-Sponsored Terrorism) — जब कोई राष्ट्र गुप्त रूप से आतंकी समूहों को धन, प्रशिक्षण, हथियार या शरण देता है (टॉपिक 9 में पाकिस्तान का उदाहरण)।
(E) नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) — मादक पदार्थों की तस्करी से मिलने वाले धन से आतंकी गतिविधियों को वित्तपोषित करना।
(F) साइबर-आतंकवाद एवं अकेला-भेड़िया (Lone-Wolf) हमले — बिना किसी संगठनात्मक ढांचे के, इंटरनेट से प्रेरित होकर अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया हमला (टॉपिक 15 में विस्तार से)।
💡 उदाहरण — एक ही हमले में कई प्रकार का मिश्रण
आधुनिक आतंकवाद अक्सर इन श्रेणियों का मिश्रण होता है — जैसे कोई समूह धार्मिक विचारधारा से प्रेरित हो (प्रकार A), लेकिन उसका वित्तपोषण नशीले पदार्थों की तस्करी से हो (प्रकार E), एवं उसे किसी पड़ोसी राज्य की खुफिया एजेंसी का गुप्त समर्थन प्राप्त हो (प्रकार D) — यही जटिलता आतंकवाद-रोधी नीति बनाना कठिन बनाती है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ जातीय-राष्ट्रवादी आतंकवाद ◆ वामपंथी उग्रवाद ◆ राज्य-प्रायोजित आतंकवाद ◆ नार्को-आतंकवाद ◆ लोन-वुल्फ हमला
3 आतंकवाद के मूल कारण — गरीबी बनाम विचारधारा की बहस (Root Causes of Terrorism — Poverty vs Ideology Debate)
पृष्ठभूमि — आतंकवाद-रोधी नीति बनाने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि आखिर कोई व्यक्ति आतंकवादी क्यों बनता है। इस पर दशकों से विद्वानों में गहरी बहस चली आ रही है, और कोई एक सरल उत्तर नहीं है।
संरचना — मूल कारणों की तीन व्याख्याएं
- आर्थिक अभाव परिकल्पना (Poverty Hypothesis) — इसके अनुसार गरीबी, बेरोज़गारी एवं शिक्षा की कमी युवाओं को कट्टरपंथी संगठनों के प्रति संवेदनशील बनाती है, क्योंकि ऐसे संगठन आर्थिक प्रलोभन एवं "उद्देश्यपूर्ण जीवन" का झूठा भरोसा देते हैं।
- वैचारिक/धार्मिक व्याख्या (Ideological Hypothesis) — कई शोध बताते हैं कि वास्तविक आंकड़ों में अधिकांश बड़े आतंकी हमलों के सरगना (जैसे 9/11 का मुख्य योजनाकार खालिद शेख मोहम्मद, या कई ISIS नेता) शिक्षित एवं मध्यम-वर्गीय पृष्ठभूमि से आए — यह दिखाता है कि गरीबी अकेला निर्णायक कारक नहीं, बल्कि गहरी वैचारिक कट्टरता, पहचान का संकट (Identity Crisis) एवं "हम बनाम वे" की सोच भी उतनी ही बड़ी भूमिका निभाती है।
- राजनीतिक शिकायत परिकल्पना (Political Grievance Hypothesis) — विदेशी कब्ज़े, राजनीतिक दमन, भेदभाव या न्याय न मिलने की भावना (जैसे कश्मीर या फिलिस्तीन जैसे लंबे संघर्षों में) भी कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाला एक बड़ा कारक मानी जाती है।
💡 उदाहरण — संतुलित दृष्टिकोण की ज़रूरत
अधिकांश आधुनिक आतंकवाद-विरोधी विशेषज्ञ अब यह मानते हैं कि आतंकवाद का कोई एक "मूल कारण" नहीं होता, बल्कि यह आर्थिक अभाव, वैचारिक कट्टरता, राजनीतिक शिकायत एवं व्यक्तिगत/सामाजिक कारकों (जैसे सामाजिक अलगाव, ऑनलाइन कट्टरपंथ — टॉपिक 15) के जटिल मिश्रण से उपजता है — इसीलिए सिर्फ सैन्य कार्रवाई या सिर्फ आर्थिक विकास, अकेले कोई भी उपाय पर्याप्त नहीं है।
⚠️ नीतिगत निहितार्थ
यह बहस सीधे नीति-निर्माण को प्रभावित करती है — यदि गरीबी मुख्य कारण मानी जाए, तो विकास-कार्यक्रमों पर ज़ोर दिया जाएगा; यदि विचारधारा मुख्य कारण हो, तो कट्टरपंथ-निवारण (De-radicalization) कार्यक्रमों एवं धार्मिक प्रति-वर्णन (Counter-Narrative) पर ज़ोर दिया जाएगा। भारत सहित अधिकांश देश आज दोनों तरह के उपायों को साथ अपनाने की नीति पर चलते हैं।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ आर्थिक अभाव परिकल्पना ◆ वैचारिक कट्टरता ◆ पहचान का संकट ◆ राजनीतिक शिकायत परिकल्पना ◆ कट्टरपंथ-निवारण (De-radicalization)
4 9/11 एवं वैश्विक आतंकवाद-रोधी युद्ध का आरंभ (9/11 & the Beginning of the Global War on Terror)
पृष्ठभूमि — 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा (Al-Qaeda) के 19 आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण कर अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (न्यूयॉर्क) एवं पेंटागन पर हमला किया, जिसमें लगभग 3,000 लोग मारे गए — यह अमेरिकी धरती पर हुआ सबसे बड़ा आतंकी हमला था, और आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी "मोड़ लेने वाली घटनाओं" (Turning Points) में से एक माना जाता है।
संरचना/कार्यप्रणाली — "आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध"
9/11 के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने "आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध" (Global War on Terror) की घोषणा की। अक्टूबर 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया (Operation Enduring Freedom), क्योंकि वहाँ की तालिबान सरकार अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को शरण दिए हुए थी। इसी दौर में अमेरिका ने "पैट्रियट एक्ट" जैसे कड़े घरेलू कानून बनाए, तथा दुनिया भर में आतंकवाद-रोधी सुरक्षा-तंत्र (हवाई अड्डों पर सख़्त जांच, निगरानी व्यवस्था) को नया रूप दिया।
📌 9/11 के बाद की समयरेखा
- 11 सितंबर 2001 — 9/11 हमला : अल-कायदा द्वारा अमेरिका पर हमला, लगभग 3,000 मृत
- अक्टूबर 2001 — अफगानिस्तान पर अमेरिकी आक्रमण : तालिबान सरकार को सत्ता से हटाया गया
- 2 मई 2011 — ओसामा बिन लादेन का सफाया : अमेरिकी विशेष बलों ने पाकिस्तान के एबटाबाद में गुप्त अभियान चलाया
- अगस्त 2021 — अमेरिकी सेना की वापसी एवं तालिबान की पुनः सत्ता : 20 वर्षों बाद अमेरिका अफगानिस्तान से हटा, तालिबान पुनः सत्ता में आया
⚠️ एक विडंबना (Irony)
यह ऐतिहासिक विडंबना है कि 20 वर्षों तक, हज़ारों अरब डॉलर खर्च करने एवं लाखों जानें गंवाने के बाद भी, अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के साथ ही वही तालिबान सरकार अफगानिस्तान में फिर से सत्ता में आ गई, जिसे हटाने के लिए यह पूरा युद्ध शुरू हुआ था — यह दिखाता है कि सैन्य शक्ति से आतंकवाद-रोधी युद्ध जीतना कितना जटिल है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ 9/11 ◆ अल-कायदा ◆ ओसामा बिन लादेन ◆ आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध ◆ ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम ◆ तालिबान
5 इस्लामिक स्टेट (ISIS) का उदय एवं पतन (Rise & Fall of the Islamic State — ISIS)
पृष्ठभूमि — 2003 के इराक युद्ध (अध्याय 2) के बाद इराक में उपजी राजनीतिक अस्थिरता एवं सांप्रदायिक तनाव से "इराक में अल-कायदा" नामक समूह उभरा, जो आगे चलकर सीरिया के गृहयुद्ध (2011 से) का लाभ उठाकर एक कहीं अधिक खतरनाक संगठन — "इस्लामिक स्टेट" (ISIS/Daesh) — में बदल गया।
संरचना/कार्यप्रणाली — "खिलाफत" की घोषणा एवं क्षेत्रीय विस्तार
29 जून 2014 को अबू बक्र अल-बगदादी ने इराक के मोसुल शहर से खुद को "खलीफा" घोषित करते हुए एक "इस्लामिक खिलाफत" (Caliphate) की स्थापना की घोषणा की। अपने चरम पर (2014-15) ISIS ने इराक एवं सीरिया के ब्रिटेन के आकार जितने बड़े भू-भाग पर नियंत्रण कर लिया था, तथा दुनिया भर से हज़ारों "विदेशी लड़ाकों" (Foreign Fighters) को अपनी ओर आकर्षित किया। ISIS ने यज़ीदी अल्पसंख्यकों के विरुद्ध नरसंहार जैसे अत्यंत क्रूर कृत्य किए तथा सोशल मीडिया का बेहद प्रभावी दुष्प्रचार-हथियार के रूप में इस्तेमाल किया।
💡 उदाहरण — अमेरिकी-नेतृत्व वाला गठबंधन
सितंबर 2014 में अमेरिका के नेतृत्व में एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय सैन्य गठबंधन ("ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व") बना, जिसने वर्षों के सैन्य अभियान के बाद मार्च 2019 में सीरिया के बाघौज़ में ISIS के अंतिम क्षेत्रीय गढ़ को हराया — अक्टूबर 2019 में अल-बगदादी खुद एक अमेरिकी विशेष अभियान के दौरान मारा गया।
⚠️ खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ
भूभाग खोने के बावजूद ISIS की शाखाएं (जैसे अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में सक्रिय "ISIS-खुरासान" या ISIS-K) आज भी सक्रिय हैं — अगस्त 2021 में काबुल हवाई अड्डे पर हुए घातक बम धमाके एवं मार्च 2024 में मॉस्को के "क्रोकस सिटी हॉल" में हुए हमले (140 से अधिक मृत) दोनों के लिए ISIS-K ज़िम्मेदार ठहराया गया — यह दिखाता है कि "खिलाफत" के पतन के बावजूद विचारधारा एवं नेटवर्क अभी भी वैश्विक खतरा बने हुए हैं।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ ISIS/Daesh ◆ अबू बक्र अल-बगदादी ◆ खिलाफत ◆ विदेशी लड़ाके ◆ ऑपरेशन इनहेरेंट रिज़ॉल्व ◆ ISIS-खुरासान (ISIS-K)
6 यूरोप एवं पश्चिम में आतंकवाद के प्रमुख हमले (Major Terror Attacks in Europe & the West)
पृष्ठभूमि — 9/11 (टॉपिक 4) एवं भारत (टॉपिक 10) पर होने वाले हमलों के अलावा, 2010 के दशक में यूरोप ने भी ISIS (टॉपिक 5) एवं अल-कायदा से प्रेरित कई भीषण आतंकी हमले झेले, जिन्होंने पश्चिमी देशों की घरेलू सुरक्षा-नीति एवं आप्रवासन-बहस दोनों को गहराई से प्रभावित किया।
संरचना — प्रमुख यूरोपीय हमलों की समयरेखा
📌 यूरोप में प्रमुख आतंकी हमले (2015-17)
- 7 जनवरी 2015 — शार्ली एब्दो हमला, पेरिस : व्यंग्य पत्रिका के दफ़्तर पर हमला, धार्मिक कार्टून बनाने पर बदले की भावना से
- 13 नवंबर 2015 — पेरिस हमले : बटाक्लां थिएटर सहित कई स्थानों पर समन्वित हमले, 130 से अधिक मृत — ISIS ने ज़िम्मेदारी ली
- 22 मार्च 2016 — ब्रसेल्स बम धमाके : हवाई अड्डे एवं मेट्रो स्टेशन पर आत्मघाती हमले, 32 मृत
- 14 जुलाई 2016 — नीस ट्रक हमला : बैस्टिल दिवस समारोह में भीड़ पर ट्रक चढ़ाया गया, 86 मृत
- 22 मई 2017 — मैनचेस्टर एरीना बम धमाका : एरियाना ग्रांडे के संगीत-कार्यक्रम के बाहर आत्मघाती हमला, 22 मृत, कई किशोर शामिल
💡 उदाहरण — "घर में उगाया गया" कट्टरपंथ (Homegrown Radicalization)
यूरोप के इन अधिकांश हमलों की एक चौंकाने वाली समानता है — हमलावर अक्सर विदेशी घुसपैठिए नहीं, बल्कि उन्हीं यूरोपीय देशों में जन्मे या बड़े हुए नागरिक थे, जो इंटरनेट एवं स्थानीय कट्टरपंथी नेटवर्क के ज़रिए धीरे-धीरे कट्टरपंथी बने — इसे "होमग्रोन रेडिकलाइज़ेशन" कहा जाता है, जो पारंपरिक सीमा-सुरक्षा उपायों से रोकना बेहद मुश्किल है (टॉपिक 3 की जड़ों की बहस से सीधा जुड़ाव)।
⚠️ यूरोप की नीतिगत प्रतिक्रिया
इन हमलों के बाद यूरोपीय संघ (अध्याय 2) के देशों ने सीमा-नियंत्रण कड़े किए, खुफिया-सूचना साझाकरण तंत्र मज़बूत किए, तथा सोशल मीडिया कंपनियों पर कट्टरपंथी सामग्री हटाने का दबाव बढ़ाया — फिर भी "अकेले भेड़िया" (Lone-Wolf, टॉपिक 2) हमलों को पूरी तरह रोक पाना आज भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ शार्ली एब्दो हमला ◆ पेरिस हमले 2015 ◆ बटाक्लां ◆ ब्रसेल्स बम धमाके ◆ मैनचेस्टर एरीना ◆ होमग्रोन रेडिकलाइज़ेशन
7 संयुक्त राष्ट्र का वैश्विक आतंकवाद-रोधी तंत्र (UN Global Counter-Terrorism Framework)
पृष्ठभूमि — चूंकि आतंकवाद की कोई सर्वसम्मत परिभाषा (टॉपिक 1) नहीं है, इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने एक व्यापक संधि के बजाय, अलग-अलग प्रस्तावों एवं तंत्रों के ज़रिए आतंकवाद से निपटने का रास्ता अपनाया है।
संरचना — प्रमुख तंत्र
- सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1267 (1999) — अल-कायदा एवं तालिबान से जुड़े व्यक्तियों/संगठनों पर प्रतिबंध हेतु एक "प्रतिबंध समिति" (Sanctions Committee) स्थापित की, जिसकी सूची में शामिल होने पर संपत्ति फ्रीज़ एवं यात्रा-प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जाते हैं — भारत ने पाकिस्तान स्थित कई आतंकियों (जैसे मसूद अज़हर, हाफ़िज़ सईद) को इसी सूची में शामिल कराने के लिए लंबा कूटनीतिक प्रयास किया।
- सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1373 (2001) — 9/11 के तुरंत बाद पारित यह प्रस्ताव सभी सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी (Legally Binding) है, जिसमें आतंकी-वित्तपोषण रोकना, आतंकियों को शरण न देना एवं आपसी सूचना-साझाकरण अनिवार्य किया गया — इसी प्रस्ताव से "आतंकवाद-रोधी समिति" (Counter-Terrorism Committee — CTC) बनी।
- संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति (2006) — महासभा द्वारा सर्वसम्मति से अपनाई गई यह रणनीति चार स्तंभों पर आधारित है: आतंकवाद के मूल कारणों को दूर करना, आतंकवाद रोकना एवं उससे लड़ना, राज्यों की क्षमता निर्माण करना, तथा मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना।
- संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-रोधी कार्यालय (UNOCT) — 2017 में स्थापित, जो सदस्य देशों को तकनीकी सहायता एवं क्षमता-निर्माण में सहयोग देता है।
भारत की भूमिका — भारत ने 2022 में मुंबई एवं दिल्ली में UNSC आतंकवाद-रोधी समिति (CTC) की एक विशेष बैठक की मेज़बानी की, जिसमें 26/11 हमले (टॉपिक 10) के स्थलों का दौरा भी कराया गया — यह भारत की सीमा-पार आतंकवाद की पीड़ा को वैश्विक मंच पर उजागर करने की एक बड़ी कूटनीतिक पहल थी।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ UNSC प्रस्ताव 1267 ◆ UNSC प्रस्ताव 1373 ◆ आतंकवाद-रोधी समिति (CTC) ◆ संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति 2006 ◆ UNOCT
8 FATF — वित्तीय कार्रवाई कार्यबल एवं आतंकवाद का वित्तपोषण (FATF — Financial Action Task Force & Terror Financing)
पृष्ठभूमि — कोई भी आतंकी संगठन बिना पैसे के काम नहीं कर सकता — हथियार खरीदना, लड़ाकों को प्रशिक्षण देना, प्रचार करना, सभी के लिए धन चाहिए। इसीलिए आतंकवाद-रोधी रणनीति का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है आतंकी-वित्तपोषण (Terror Financing) के स्रोतों को काटना।
संरचना/कार्यप्रणाली — FATF कैसे काम करता है
1989 में G7 देशों द्वारा मूल रूप से मनी-लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए स्थापित FATF ने 9/11 (टॉपिक 4) के बाद अपने दायरे में आतंकी-वित्तपोषण को भी शामिल कर लिया। FATF किसी देश की वित्तीय-निगरानी व्यवस्था का आकलन करने के बाद उसे "ग्रे लिस्ट" (निगरानी सूची, जिसमें सुधार की शर्त होती है) या "ब्लैक लिस्ट" (उच्च-जोखिम, असहयोगी देश) में डाल सकता है — जिससे उस देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन, विदेशी निवेश एवं IMF/विश्व बैंक (अध्याय 3) से कर्ज़ मिलना कठिन हो जाता है।
💡 उदाहरण — पाकिस्तान का FATF इतिहास
पाकिस्तान को जून 2018 में आतंकी-वित्तपोषण की खामियों के चलते FATF की ग्रे लिस्ट में डाला गया था, और अक्टूबर 2022 में "पर्याप्त सुधारों" के आधार पर इससे बाहर निकाला गया। लेकिन अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले (हुक कहानी देखें) के बाद भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को दोबारा ग्रे लिस्ट में डालने तथा उसे मिलने वाली IMF सहायता (जुलाई 2024 में स्वीकृत 7 अरब डॉलर बेलआउट पैकेज) की समीक्षा की मांग ज़ोरदार तरीके से उठाई, यह तर्क देते हुए कि इस धन का दुरुपयोग आतंकी ढांचे को बनाए रखने में हो सकता है।
⚠️ भारत की FATF में भूमिका
भारत 2010 से FATF का पूर्ण सदस्य है तथा आतंकी-वित्तपोषण नेटवर्क को उजागर करने में सक्रिय भूमिका निभाता है — भारत का तर्क है कि जब तक सीमा-पार आतंकवाद के वित्तीय स्रोतों पर सख़्त अंतर्राष्ट्रीय निगरानी नहीं होगी, तब तक सैन्य कार्रवाई (टॉपिक 11) अकेले पर्याप्त नहीं होगी।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ FATF ◆ ग्रे लिस्ट ◆ ब्लैक लिस्ट ◆ आतंकी-वित्तपोषण ◆ पाकिस्तान FATF इतिहास
9 पाकिस्तान — आतंकवाद का "एपिसेंटर"? गहन विश्लेषण (Pakistan — "Epicentre" of Terrorism? A Deeper Analysis)
पृष्ठभूमि — भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि पाकिस्तान न सिर्फ सीमा-पार आतंकवाद का स्रोत है, बल्कि उसकी राज्य-व्यवस्था के भीतर ही आतंकी संगठनों को संस्थागत समर्थन प्राप्त है — इसे समझने के लिए पाकिस्तान की "डीप स्टेट" (Deep State) संरचना को जानना ज़रूरी है।
संरचना/कार्यप्रणाली — "डीप स्टेट" एवं प्रॉक्सी-नीति
- ISI (इंटर-सर्विसेज़ इंटेलिजेंस) — पाकिस्तान की सैन्य-खुफिया एजेंसी पर लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद (टॉपिक 10) जैसे संगठनों को प्रशिक्षण, धन एवं रणनीतिक मार्गदर्शन देने का आरोप लगता रहा है — पाकिस्तानी सेना एवं सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।
- हक्कानी नेटवर्क — अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय यह शक्तिशाली आतंकी नेटवर्क तालिबान से जुड़ा है, तथा अगस्त 2021 में तालिबान की सत्ता-वापसी के बाद इसके प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी अफगानिस्तान के गृह मंत्री बन गए — यह दिखाता है कि आतंकी नेटवर्क एवं राज्य-सत्ता के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है।
- "अच्छे" बनाम "बुरे" आतंकवादी की नीति — विश्लेषक पाकिस्तान पर आरोप लगाते हैं कि वह उन आतंकी समूहों के विरुद्ध कार्रवाई करता है जो पाकिस्तानी राज्य को ही निशाना बनाते हैं (जैसे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान — TTP), जबकि भारत-केंद्रित समूहों (लश्कर, जैश) को अपेक्षाकृत खुली छूट देता रहा है — इसे "गुड टेररिस्ट, बैड टेररिस्ट" नीति कहा जाता है।
💡 उदाहरण — अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति के उदाहरण
मई 2011 में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन (टॉपिक 4) पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में — एक प्रमुख सैन्य अकादमी से महज़ कुछ किलोमीटर दूर — वर्षों से छुपा हुआ पाया गया, जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तानी सुरक्षा-तंत्र की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए।
⚠️ संतुलित दृष्टिकोण
निष्पक्षता से यह भी समझना ज़रूरी है कि पाकिस्तान स्वयं भी बड़े पैमाने पर आतंकवाद का शिकार रहा है — TTP एवं बलूच अलगाववादी समूहों के हमलों में हज़ारों पाकिस्तानी नागरिक एवं सैनिक मारे गए हैं। पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि वह स्वयं आतंकवाद का "पीड़ित" है, न कि प्रायोजक — जबकि भारत एवं कई पश्चिमी विश्लेषक इस दावे पर गहरा संदेह जताते हैं। परीक्षा में दोनों पक्षों के तर्क संतुलित ढंग से समझना महत्वपूर्ण है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ ISI ◆ हक्कानी नेटवर्क ◆ डीप स्टेट ◆ गुड टेररिस्ट-बैड टेररिस्ट नीति ◆ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ◆ एबटाबाद ऑपरेशन
10 भारत पर सीमा-पार आतंकवाद का प्रभाव — इतिहास एवं प्रमुख घटनाएं (Impact of Cross-Border Terrorism on India)
पृष्ठभूमि — भारत विश्व के उन गिने-चुने देशों में है, जिसने दशकों से सबसे व्यवस्थित एवं लगातार सीमा-पार, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद (टॉपिक 2) झेला है — 1980 के दशक के पंजाब उग्रवाद (खालिस्तान आंदोलन) से लेकर 1989 से शुरू हुए कश्मीर उग्रवाद तक, जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी पर प्रशिक्षण, हथियार एवं वित्तीय सहायता देने के आरोप लगते रहे हैं।
संरचना — प्रमुख आतंकी हमलों की समयरेखा
📌 भारत पर प्रमुख आतंकी हमले
- 1993 — मुंबई सिलसिलेवार बम धमाके : एक ही दिन में 12 से अधिक बम विस्फोट, 250 से अधिक मृत
- 13 दिसंबर 2001 — संसद पर हमला : नई दिल्ली में भारतीय संसद भवन पर आतंकी हमला, भारत-पाकिस्तान में भारी सैन्य तनाव
- 26-29 नवंबर 2008 — मुंबई हमला (26/11) : लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने समुद्री रास्ते से मुंबई में घुसकर कई स्थानों पर हमला किया, 166 मृत
- 18 सितंबर 2016 — उरी हमला : सेना शिविर पर हमला, 19 सैनिक शहीद — इसके बाद सर्जिकल स्ट्राइक (टॉपिक 11)
- 14 फरवरी 2019 — पुलवामा हमला : जैश-ए-मोहम्मद द्वारा आत्मघाती कार-बम हमला, 40 CRPF जवान शहीद — इसके बाद बालाकोट एयरस्ट्राइक
- 22 अप्रैल 2025 — पहलगाम हमला : बैसरन घाटी में पर्यटकों पर धर्म-आधारित हमला, 26 मृत — इसके बाद ऑपरेशन सिंदूर (टॉपिक 11)
⚠️ राज्य-प्रायोजन का आरोप
भारत लगातार अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर यह साक्ष्यों सहित बताता रहा है कि लश्कर-ए-तैयबा एवं जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को पाकिस्तानी धरती पर खुले तौर पर प्रशिक्षण शिविर चलाने की छूट मिली हुई है — यही वजह है कि भारत आतंकवाद को केवल एक "कानून-व्यवस्था" की समस्या नहीं, बल्कि एक राज्य-प्रायोजित सुरक्षा-चुनौती (टॉपिक 2) मानता है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ खालिस्तान आंदोलन ◆ कश्मीर उग्रवाद ◆ 26/11 मुंबई हमला ◆ लश्कर-ए-तैयबा ◆ जैश-ए-मोहम्मद ◆ पुलवामा हमला ◆ पहलगाम हमला 2025
11 भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति — सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक (India Counter-Terror Strategy)
पृष्ठभूमि — पिछले एक दशक में भारत की आतंकवाद-रोधी नीति एक बड़े सैद्धांतिक बदलाव से गुज़री है — रक्षात्मक रुख (Defensive Posture) से आगे बढ़कर एक "सक्रिय एवं दंडात्मक" (Proactive & Punitive) रणनीति की ओर, जिसमें सीमा-पार आतंकी ढांचे पर सीधी कार्रवाई शामिल है।
संरचना/कार्यप्रणाली — तीन बड़े सैन्य कदम
- सर्जिकल स्ट्राइक, 29 सितंबर 2016 — उरी हमले (टॉपिक 10) के जवाब में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी लॉन्च-पैड्स पर सीमित, लक्षित हमले किए।
- बालाकोट एयरस्ट्राइक, 26 फरवरी 2019 — पुलवामा हमले (टॉपिक 10) के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया — 1971 के युद्ध के बाद यह पहली बार था जब भारत ने नियंत्रण रेखा पार कर, अंतर्राष्ट्रीय सीमा के भीतर पाकिस्तानी क्षेत्र में हवाई हमला किया।
- ऑपरेशन सिंदूर, 6-10 मई 2025 — पहलगाम हमले (हुक कहानी) के जवाब में भारत ने अब तक की सबसे बड़ी एवं व्यापक कार्रवाई की — पाकिस्तान एवं PoK में स्थित 9 आतंकी शिविरों (बहावलपुर एवं मुरीदके सहित) पर सटीक मिसाइल हमले किए गए। इसके बाद दोनों देशों के बीच ड्रोन एवं मिसाइल हमलों का आदान-प्रदान हुआ, जो 10 मई 2025 को संघर्ष-विराम पर समाप्त हुआ।
| पुरानी रणनीति (2016 से पहले) | नई रणनीति (2016 के बाद — "न्यू नॉर्मल") |
|---|
| ✓ मुख्यतः रक्षात्मक/कूटनीतिक जवाब | ✗ सक्रिय, सीमा-पार सैन्य कार्रवाई |
| ✓ सीमा के भीतर सीमित कार्रवाई | ✗ आतंकी संगठन एवं उसके प्रायोजक राज्य में भेद न करना |
| ✓ अंतर्राष्ट्रीय दबाव की प्रतीक्षा | ✗ त्वरित, निर्णायक जवाब |
⚠️ "न्यू नॉर्मल" सिद्धांत
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने स्पष्ट किया कि यह भारत की नई स्थायी नीति ("New Normal") है — यानी भविष्य में किसी भी बड़े आतंकी हमले के जवाब में भारत सीधे आतंकी ढांचे पर सैन्य कार्रवाई करेगा, चाहे वह कार्रवाई कूटनीतिक तनाव को कितना भी बढ़ाए। हालांकि विशेषज्ञ यह भी चेताते हैं कि दो परमाणु-सम्पन्न पड़ोसी देशों के बीच ऐसी सैन्य झड़पें अनियंत्रित रूप से बढ़ने (Escalation) का खतरा भी साथ लाती हैं।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ सर्जिकल स्ट्राइक 2016 ◆ बालाकोट एयरस्ट्राइक 2019 ◆ ऑपरेशन सिंदूर 2025 ◆ न्यू नॉर्मल सिद्धांत ◆ एस्केलेशन का खतरा
12 भारत का घरेलू आतंकवाद-रोधी कानूनी ढांचा — UAPA एवं NIA (India Domestic Counter-Terror Legal Framework)
पृष्ठभूमि — सैन्य कार्रवाई (टॉपिक 11) के साथ-साथ भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए एक मज़बूत घरेलू कानूनी एवं संस्थागत ढांचा भी विकसित किया है, जो जांच, अभियोजन एवं संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की शक्ति देता है।
संरचना — प्रमुख कानून एवं एजेंसियां
- गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम — UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), 1967 — भारत का मुख्य आतंकवाद-रोधी कानून है, जो सरकार को किसी संगठन को "गैर-कानूनी" या "आतंकवादी संगठन" घोषित करने की शक्ति देता है।
- UAPA संशोधन, 2019 — इस महत्वपूर्ण संशोधन ने सरकार को न सिर्फ संगठनों को, बल्कि किसी **व्यक्ति** को भी सीधे "आतंकवादी" घोषित करने की शक्ति दी — यह प्रावधान अपने दायरे एवं संभावित दुरुपयोग को लेकर नागरिक-अधिकार समूहों में बहस का विषय रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि यह आतंकी सरगनाओं पर तेज़ी से कार्रवाई के लिए ज़रूरी है।
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 — 26/11 मुंबई हमले (टॉपिक 10) के तुरंत बाद पारित इस कानून ने "राष्ट्रीय जांच एजेंसी" (NIA) की स्थापना की, जो आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच पूरे भारत में (राज्य की सीमाओं से परे) करने की विशेष शक्ति रखने वाली केंद्रीय एजेंसी है — यह अमेरिका के FBI से मिलती-जुलती भूमिका निभाती है।
- गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम न्यायाधिकरण — UAPA के तहत प्रतिबंधित संगठनों की समीक्षा के लिए एक न्यायिक न्यायाधिकरण की भी व्यवस्था है, ताकि प्रतिबंध की शक्ति का न्यायिक निरीक्षण (Judicial Oversight) बना रहे।
| सरकार का पक्ष | आलोचकों का पक्ष |
|---|
| ✓ आतंकी सरगनाओं पर तेज़ कार्रवाई ज़रूरी | ✗ व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की शक्ति का दुरुपयोग संभव |
| ✓ राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि | ✗ ज़मानत मिलना बेहद कठिन, लंबी न्यायिक प्रक्रिया |
| ✓ कड़े कानून के बिना जांच में देरी | ✗ असहमति की आवाज़ों पर भी दुरुपयोग की आशंका |
⚠️ संतुलन की चुनौती
किसी भी लोकतंत्र में आतंकवाद-रोधी कानूनों की सबसे बड़ी चुनौती यही है — राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberties) के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए। भारत की सर्वोच्च अदालत ने कई बार UAPA के तहत ज़मानत एवं प्रक्रिया से जुड़े मामलों में यह संतुलन साधने का प्रयास किया है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ UAPA 1967 ◆ UAPA संशोधन 2019 ◆ NIA अधिनियम 2008 ◆ न्यायिक निरीक्षण ◆ नागरिक स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
13 आतंकवाद-रोधी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में भारत की भूमिका (India Role in International Counter-Terrorism Cooperation)
पृष्ठभूमि — भारत दशकों से आतंकवाद की मार झेलने के अपने प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर, अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मज़बूत करने की सबसे मुखर आवाज़ों में से एक रहा है।
संरचना — भारत की प्रमुख पहलें
CCIT प्रस्ताव — भारत ने 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में "अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय" (CCIT — Comprehensive Convention on International Terrorism) का मसौदा प्रस्तुत किया, जो आतंकवाद की एक सार्वभौमिक, कानूनी रूप से बाध्यकारी परिभाषा तय करना चाहता है — लेकिन परिभाषा की चुनौती (टॉपिक 1) के कारण यह आज भी संयुक्त राष्ट्र में लंबित है।
द्विपक्षीय आतंकवाद-रोधी सहयोग — भारत का अमेरिका, फ्रांस, इज़राइल एवं रूस के साथ खुफिया-सूचना साझाकरण, संयुक्त सैन्य अभ्यास एवं आतंकी-वित्तपोषण पर समन्वय का गहरा सहयोग है।
QUAD आतंकवाद-रोधी कार्य समूह — भारत, अमेरिका, जापान एवं ऑस्ट्रेलिया के बीच आतंकवाद-रोधी सूचना-साझाकरण एवं क्षमता-निर्माण पर सहयोग (अध्याय 2, 15 में विस्तार से)।
वैश्विक कूटनीतिक अभियान — पहलगाम हमले (2025) के बाद भारत ने दुनिया भर के प्रमुख देशों से सार्वजनिक समर्थन जुटाने के लिए सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजे, ताकि सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक एकजुटता प्रदर्शित की जा सके।
💡 उदाहरण — वैश्विक एकजुटता का प्रयास
ऑपरेशन सिंदूर (टॉपिक 11) के बाद भारत सरकार ने बहु-दलीय सांसदों के प्रतिनिधिमंडल कई देशों में भेजे, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि भारत की कार्रवाई आतंकवाद के विरुद्ध एक संयमित, लक्षित एवं आत्मरक्षात्मक कदम थी — न कि किसी विस्तारवादी मंशा का हिस्सा। यह दर्शाता है कि आधुनिक आतंकवाद-रोधी रणनीति में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ वैश्विक जनमत एवं कूटनीति की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ CCIT ◆ द्विपक्षीय आतंकवाद-रोधी सहयोग ◆ QUAD आतंकवाद-रोधी कार्य समूह ◆ कूटनीतिक प्रतिनिधिमंडल
14 आतंकवाद एवं मीडिया — प्रचार-युद्ध का नया मैदान (Terrorism & Media — The New Battleground of Propaganda)
पृष्ठभूमि — आधुनिक आतंकवाद सिर्फ हिंसा के बारे में नहीं, बल्कि "प्रचार" (Propaganda) के बारे में भी उतना ही है। ISIS (टॉपिक 5) ने सोशल मीडिया का इतना प्रभावी उपयोग किया कि विशेषज्ञ इसे "मीडिया-प्रेमी आतंकी संगठन" (Media-Savvy Terror Group) की पहली बड़ी मिसाल मानते हैं।
संरचना — मीडिया एवं आतंकवाद का जटिल रिश्ता
भर्ती एवं प्रचार का औज़ार — आतंकी संगठन उच्च-गुणवत्ता वाले वीडियो, पत्रिकाएं (जैसे ISIS की "दाबिक" पत्रिका) एवं सोशल मीडिया अभियानों के ज़रिए दुनिया भर से "विदेशी लड़ाकों" (टॉपिक 5) को आकर्षित करते हैं।
"ऑक्सीजन ऑफ पब्लिसिटी" की बहस — पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर ने आतंकवाद को मीडिया कवरेज से मिलने वाले महत्व को "प्रचार की ऑक्सीजन" कहा था — यह बहस आज भी जारी है कि मीडिया को आतंकी हमलों की रिपोर्टिंग किस हद तक एवं कैसे करनी चाहिए, ताकि अनजाने में आतंकियों का मकसद पूरा न हो।
फ़ेक न्यूज़ एवं गलत सूचना — किसी बड़े हमले के बाद सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलती अफवाहें एवं गलत सूचना (Misinformation) समाज में साम्प्रदायिक तनाव भड़काने का भी खतरा पैदा करती हैं, जैसा भारत में कई हमलों के बाद देखा गया है।
प्रति-कथा अभियान (Counter-Narrative Campaigns) — कई सरकारें अब पूर्व-कट्टरपंथियों एवं धार्मिक विद्वानों की मदद से ऐसे ऑनलाइन अभियान चलाती हैं, जो आतंकी विचारधारा का सीधा खंडन करते हैं, ताकि कमज़ोर/प्रभावित युवाओं तक सही जानकारी पहुंचे (टॉपिक 3 में वर्णित कट्टरपंथ-निवारण प्रयासों का ही हिस्सा)।
💡 उदाहरण — भारत में मीडिया की भूमिका
26/11 मुंबई हमले (2008) के दौरान भारतीय समाचार चैनलों की लाइव कवरेज को लेकर बड़ी बहस छिड़ी थी — आरोप लगा कि सुरक्षा बलों की गतिविधियों के लाइव प्रसारण से हमलावरों को (जो पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलरों से फ़ोन पर लगातार संपर्क में थे) भारतीय बलों की रणनीति की जानकारी मिल रही थी — इसके बाद भारत में आतंकी हमलों की लाइव कवरेज पर दिशा-निर्देश (Guidelines) बनाए गए।
⚠️ डिजिटल दौर की नई चुनौती
आज एन्क्रिप्टेड ऐप्स एवं विकेंद्रीकृत सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर प्रचार-सामग्री पर नियंत्रण रखना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है (टॉपिक 15 में विस्तार से) — यह आतंकवाद-रोधी रणनीति का एक ऐसा मोर्चा है, जिस पर पारंपरिक कानून एवं सेना दोनों की सीमित पहुंच है।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ प्रचार की ऑक्सीजन ◆ मीडिया-प्रेमी आतंकी संगठन ◆ फ़ेक न्यूज़ ◆ प्रति-कथा अभियान ◆ 26/11 लाइव कवरेज बहस
15 नए एवं उभरते खतरे — साइबर आतंकवाद, ड्रोन एवं ऑनलाइन कट्टरपंथ (New & Emerging Threats)
पृष्ठभूमि — जैसे-जैसे तकनीक बदल रही है, आतंकवाद के तरीके भी बदल रहे हैं — आज के आतंकी संगठन पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ ड्रोन, इंटरनेट एवं क्रिप्टोकरेंसी जैसे नए औज़ारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए बिल्कुल नई चुनौतियां पेश करते हैं।
संरचना — नए खतरों के प्रकार
- ड्रोन-आतंकवाद — पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर एवं पंजाब की सीमाओं पर पाकिस्तान से ड्रोन के ज़रिए हथियार, मादक पदार्थ एवं विस्फोटक गिराए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं — जून 2021 में जम्मू वायुसेना स्टेशन पर हुआ ड्रोन-हमला भारत में इस तरह की पहली घटनाओं में से एक था।
- ऑनलाइन कट्टरपंथ (Online Radicalization) — सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप एवं गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग युवाओं को दूर बैठे कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे "लोन-वुल्फ" (टॉपिक 2) हमलों की आशंका बढ़ रही है।
- साइबर-आतंकवाद — महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (बिजली ग्रिड, बैंकिंग व्यवस्था, अस्पताल) पर साइबर-हमलों के ज़रिए बड़े पैमाने पर अव्यवस्था फैलाने की क्षमता आज किसी भी पारंपरिक बम-हमले जितनी ही खतरनाक मानी जाती है।
- क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए वित्तपोषण — पारंपरिक बैंकिंग निगरानी (FATF, टॉपिक 8) से बचने के लिए कुछ आतंकी नेटवर्क अब क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए गुमनाम रूप से धन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे नियामकों के लिए नई चुनौतियां पैदा हुई हैं।
⚠️ भारत की तैयारी
भारत ने सीमाओं पर "एंटी-ड्रोन सिस्टम" तैनात करने, सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के साथ मिलकर कट्टरपंथी सामग्री हटाने तथा राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक जैसे संस्थागत ढांचे मज़बूत करने पर काम तेज़ किया है — फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीक जितनी तेज़ी से बदल रही है, उतनी ही तेज़ी से सुरक्षा-तंत्र को भी अद्यतन करते रहना होगा।
📌 महत्वपूर्ण — 🔑 महत्वपूर्ण शब्द (Keywords)
◆ ड्रोन-आतंकवाद ◆ ऑनलाइन कट्टरपंथ ◆ साइबर-आतंकवाद ◆ क्रिप्टोकरेंसी वित्तपोषण ◆ एंटी-ड्रोन सिस्टम
📌 अध्याय सार (Chapter Summary)
- 1. अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की कोई सर्वसम्मत परिभाषा नहीं है, जिसके कारण UN में CCIT जैसा व्यापक अभिसमय दशकों से लंबित है।
- 2. आतंकवाद कई रूपों में सामने आता है — धार्मिक, जातीय-राष्ट्रवादी, वामपंथी उग्रवाद, राज्य-प्रायोजित, नार्को-आतंकवाद एवं लोन-वुल्फ — और अक्सर इनका मिश्रण देखने को मिलता है।
- 3. आतंकवाद के मूल कारणों पर बहस जारी है — आर्थिक अभाव, वैचारिक कट्टरता एवं राजनीतिक शिकायत तीनों का जटिल मिश्रण इसके पीछे काम करता है, कोई एक अकेला कारण पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं देता।
- 4. 11 सितंबर 2001 के हमले ने वैश्विक सुरक्षा-व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया, तथा अमेरिका के 20 वर्षों के अफगान युद्ध के बावजूद 2021 में तालिबान की वापसी इस युद्ध की सीमाओं को उजागर करती है।
- 5. 2014 में घोषित ISIS खिलाफत 2019 तक भूभाग खो चुकी है, परंतु इसकी शाखाएं (जैसे ISIS-K) आज भी वैश्विक खतरा बनी हुई हैं।
- 6. शार्ली एब्दो, पेरिस-बटाक्लां, ब्रसेल्स, नीस एवं मैनचेस्टर जैसे हमलों ने दिखाया कि "होमग्रोन रेडिकलाइज़ेशन" यूरोप के लिए भी उतनी ही बड़ी चुनौती है, जितनी बाहरी घुसपैठ।
- 7. UNSC प्रस्ताव 1267 एवं 1373 तथा 2006 की वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति संयुक्त राष्ट्र के मुख्य आतंकवाद-रोधी उपकरण हैं।
- 8. FATF की ग्रे/ब्लैक लिस्ट व्यवस्था आतंकी-वित्तपोषण रोकने का एक शक्तिशाली आर्थिक औज़ार है — पाकिस्तान का बार-बार ग्रे लिस्ट में आना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
- 9. पाकिस्तान की "डीप स्टेट" संरचना — ISI, हक्कानी नेटवर्क एवं "गुड टेररिस्ट-बैड टेररिस्ट" नीति — भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं के केंद्र में रही है, हालांकि पाकिस्तान स्वयं भी आतंकवाद का शिकार रहा है।
- 10. भारत दशकों से पंजाब एवं कश्मीर में सीमा-पार, राज्य-प्रायोजित आतंकवाद झेल चुका है — 26/11, पुलवामा एवं पहलगाम (2025) जैसी घटनाएं इसकी गंभीरता दर्शाती हैं।
- 11. भारत की रणनीति रक्षात्मक रुख से बदलकर अब सक्रिय-दंडात्मक "न्यू नॉर्मल" बन चुकी है — सर्जिकल स्ट्राइक (2016), बालाकोट (2019) एवं ऑपरेशन सिंदूर (2025) इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
- 12. UAPA (1967, संशोधन 2019) एवं NIA अधिनियम (2008) भारत के घरेलू आतंकवाद-रोधी कानूनी ढांचे के स्तंभ हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन की चुनौती भी साथ लाते हैं।
- 13. भारत CCIT प्रस्ताव, FATF सदस्यता, QUAD आतंकवाद-रोधी सहयोग एवं सक्रिय कूटनीति के ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी सहयोग में एक अग्रणी भूमिका निभाता है।
- 14. आधुनिक आतंकवाद प्रचार-युद्ध (Propaganda War) का भी मैदान बन चुका है — मीडिया कवरेज, फ़ेक न्यूज़ एवं प्रति-कथा अभियान आतंकवाद-रोधी रणनीति के अहम हिस्से बन गए हैं।
- 15. ड्रोन, साइबर-हमले, ऑनलाइन कट्टरपंथ एवं क्रिप्टोकरेंसी-वित्तपोषण जैसे नए खतरे दिखाते हैं कि आतंकवाद-रोधी रणनीति को लगातार तकनीकी रूप से अद्यतन करते रहना होगा।